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  • मुंबई में अब WhatsApp के जरिए होगा ट्रेन की बुकिंग

    मुंबई में अब WhatsApp के जरिए होगा ट्रेन की बुकिंग

    ट्रेन में टिकट के लिए अब आपको लाईन में खड़े रहने की जरुरत नही होगी। अब आप अपने मोबाइल फोन पर WhatsApp एप्लीकेशन के भीतर ही एक क्लिक से ट्रेन की टिकट बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे स्थानीय टिकट प्रणाली में सुधार लाने के प्रयास कर रहा है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    अब आम लोगों की सुविधा के लिए रेलवे बोर्ड नई टिकट बुकिंग प्रणाली लाने की तैयारी कर रहा है। मेट्रो में ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को मिल रहे लोकप्रियता को देखते हुए रेल प्रशासन ने फैसला किया है। इसके लिए निविदाएं मांगी गई है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    रेलवे ने क्या कहा?

    रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, रेलवे स्थानीय टिकट प्रणाली की सुविधा में सुधार लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है और व्हाट्सएप जैसे चैट-आधारित ऐप के माध्यम से टिकट प्रणाली शुरू करने की संभावना तलाश रहा है। हाल ही में, इस मामले में रुचि रखने वाले संगठनों के साथ एक बैठक हुई। अधिकारियों ने बताया कि सभी विवरण तय होने के बाद निविदा प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    डिजिटल इंडिया की पहल

    डिजिटल इंडिया पहल के तहत, भारतीय रेलवे डिजिटल माध्यमों से टिकट प्रणाली में बदलाव लाने पर ज़ोर दे रहा है। इसके परिणामस्वरूप, यात्रियों को कैशलेस तेज़ टिकट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देखा गया कि डिजिटल की ओर बदलाव होता जा रहा है। वर्तमान में, 25 प्रतिशत यात्री डिजिटल माध्यमों से टिकट बुक कर रहे हैं, और इसे अपनाने की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

    WhatsApp का इस्तेमाल

    मौजूदा डिजिटल टिकटिंग सिस्टम के अलावा, रेलवे टिकट बुकिंग की सुविधा बढ़ाने के लिए चैट-आधारित टिकटिंग समाधान पर भी काम कर रहा है। मेट्रो में टिकट बुकिंग के लिए यात्री WhatsApp का इस्तेमाल ज़्यादा पसंद करते हैं। टिकट खिड़की पर क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक चैट इंटरफ़ेस दिखाई देता है। “हाय” मैसेज भेजने पर आपको टिकट बुकिंग के विकल्प दिखाई देंगे और फिर भुगतान करके डिजिटल टिकट प्राप्त किए जा सकेंगे। 67 प्रतिशत मेट्रो किराया इसी तरह बुक किया जा रहा है।

    क्या हैं मुश्किलें?

    रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक कहा गया, कि व्हाट्सएप टिकटिंग सिस्टम के निर्माण के दौरान कई कारकों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यूटीएस के माध्यम से क्यूआर-आधारित टिकटिंग प्रणाली के वर्तमान दुरुपयोग को देखते हुए, इसी तरह की कमज़ोरियों से बचने के लिए नई प्रणाली विकसित करते समय सावधानी बरतनी होगी। हमारा लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली बनाना है जो यात्रियों के लिए आसान हो। Now train booking in Mumbai can be done through WhatsApp

  • मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार 7 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इसमें जांच एजंसियों की चूक प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट के वकील नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है। अदालत ने यह भी कहा, “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।”

    मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।

    अगर हेमंत करकरे होते तो, ..

    शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।”

    आरोपी बन गई सांसद

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    उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”

    क्या था मालेगांव बम धमाके का मामला?

    29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

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    मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।

    इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    सबूत ही नहीं मिला

    अदालत ने कहा, कि आरोप लगाया गया था, कि विस्फोट पुरोहित ने कश्मीर से हासिल किया था। लेकिन इसका कोई सबूत नही दिया और यह भी प्रमाणित नहीं किया कि किसी भी अभियुक्त के घर बम तैयार किया गया था। जिस मोटरसाइकिल पर विस्फोट रखा गया था, उसका साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से ठोस सबूतों के साथ संबंध सिद्ध नहीं हो सका। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    कहां हुई थी साज़िश?

    जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ।

    सबूतों के साथ छेड़छाड़

    अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।

    जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद

    उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

  • 12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    बेसिक से एडवांस

    इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

    फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

    इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?

    इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।

    योजना के प्रमुख लाभ

    योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    किन राज्यों में शुरू हुई यह योजना?

    यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    युवाओं को रोजगार में लाभ

    इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

    युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास

    कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है। 12th pass youth will get free computer course and scholarship of 15 thousand rupees

  • 17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा।

    न्यूज़ डेस्क
    नई दिल्ली:
    रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani

    35 ठिकानों पर छापेमारी

    दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।

    10 हजार करोड़ का अनडिस्क्लोज्ड

    इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है।

    मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी

    जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।

    उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani

  • Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी भरे ई- मेल भेजकर फिरौती मांगने वाले मुख्य आरोपी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई इंटरपोल की मदद से सफल हो पाई है। आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार किया गया है। Mumbai: The person who threatened Zeeshan Siddiqui has been arrested, the accused from Bihar took the name of ‘D’ company

    Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।

    कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?

    पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।

    ईमेल से मिली थी धमकी

    पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।

    बांद्रा पुलिस का एक्शन

    इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।

    भारत के बाहर से मिली थी धमकी

    पुलिस ने शिकायत के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी थी और अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 23 अप्रैल को यह केस मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी भारत से बाहर है, जिसके बाद 28 अप्रैल को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और फिर इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। Mumbai: The person who threatened Zeeshan Siddiqui has been arrested, the accused from Bihar took the name of ‘D’ company

    फिरौती का था मामला

    इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।

    हो सकते हैं कई खुलासे

    क्राइम ब्रांच का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद देश में दहशत का माहौल बन गया था। उसी वक्त उनके बेटे को मिली धमकी में उनके पिता की हत्या का जिक्र किया गया था। फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पीछे कोई और गिरोह या नेटवर्क तो नहीं है। Mumbai: The person who threatened Zeeshan Siddiqui has been arrested, the accused from Bihar took the name of ‘D’ company

  • मुंबई स्वर्णकार संघ ने किया सीपीआरओ का अपमान

    मुंबई स्वर्णकार संघ ने किया सीपीआरओ का अपमान

    स्वर्णकारो की सबसे पुरानी संस्था अपने संस्थापक के विचारों को पीछे छोड़ कर जाने कौन से आदर्शों का पालन कर रही है। गुरूवार को हुए एक कार्यक्रम में खुद बुलाकर मुख्य अतिथि को ही अपमानित कर दिया। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

    वी बी माणिक
    मुंबई:
    आज गुरुवार 31 जुलाई 2025 स्वर्गीय नाना शंकर शेठ के 160वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मध्यरेल मुख्यालय में नाना शंकर शेठ के चित्र पर माल्यार्पण कर उनकों श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम के अवसर पर मुंबई स्वर्णकार संघ के पदाधिकारी एवं उनके सदस्य उपस्थित थे। जिसमें मुख्य अथिति के स्थान पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला का इन स्वर्णकारों ने स्वागत ही नही किया। एक तरिके से मुख्य अतिथि को कार्यक्रम का न्योता देकर मौके पर उन्हें अपमानित किया गया। मौके पर कुछ लोगों ने बोला, कि ये लोग कौन से अहम में थे? इसका पता नही। लेकिन ऐसा नही करना चाहिए था।

    मुंबई स्वर्णकार संघ क्या काम करता है?

    आप को बता दें कि “मुंबई स्वर्णकार संघ” मुंबई शहर में सोने के दागीने बनाने वाले कारीगरों की एक पुरानी संस्था है। ये संस्था केवल उन स्वजातीय कारीगरों की है जो जाति से सोनार है। स्वर्गीय नाना ने कारीगरों के ऊपर होने वाले उत्पीड़न और उनके सुरक्षा संरक्षण हेतु इस संस्था की नीव रखी थी। लेकिन उनके स्वर्गवास हो जाने के बाद से अब उसका उल्टा हो रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

    ट्रस्टियों की मनमानी

    सूत्रों के अनुसार अब मुस्लिमो और बंगालियों के अलावा न जाने किन-किन लोगों को सदस्य बनाकर आईडी दिया जाने लगा है। पहले केवल मराठी, राजस्थानी, गुजराती और उत्तर भारतीय काफ़िगरो के उत्थान हेतु कार्य किया जाता था। अब ये सब बंद होता दिखाई पड़ रहा है। इसके ट्रस्टियों में ज्ञान का अभाव है संस्था के नियम का पालन क्या होता है? इनको मालूम ही नही है। पर अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि वर्तमान में यहां के ट्रस्टी गण दिन पर दिन स्वर्गीय नाना के नाम को भी ये डूबाने पर उतारू है।

    ज़वेरी बाजार के स्वर्णकार कारीगर इनसे विमुख होते जा रहे है। नाना के छठवीं पीढ़ी के वंशज श्रीरंग शेठ ने माल्यार्पण कर उनको श्रधंजलि अर्पित किया। इनके साथ ज़वेरी बाजार के अन्य कारीगर एवं ट्रस्टी शामिल थे। लेकिन उनके विचारों को पीछे छोड़ दिया जा रहा है। Mumbai Goldsmith Association insulted CPRO

  • Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    Maharashtra: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगी सख्ती

    महाराष्ट्र की सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त कानून पास कर दिया है। इसके तहत नियम का पालन नही किए जाने पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने महाराष्ट्र के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम तय किए हैं। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    सोशल मीडिया पोस्ट पर लगी रोक

    महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के जानकारी दायक सोशल मीडिया पोस्ट कभी कभार लोगों में भ्रम या गलत संदेश भी फैला सकता है। इसकी जिम्मेदारी को लेकर सरकार अब सख्त हो गई है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक नही लगाया गया है। सिर्फ पोस्ट करते समय ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    क्या करें क्या ना करें ?

    सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को एक सरकारी आदेश जारी कर यह नियम सार्वजनिक रुप से प्रसारित कर दिया है। इसमें बताया गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं? और क्या नहीं? आदेश में यह भी कहा गया है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सोशल मीडिया से होगी समस्या

    आदेश में जानकारी देते हुए, कहा गया है, कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आसान उपयोग से पलक झपकते ही दुनिया के किसी भी कोने में जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसकी अदभुत क्षमता और एक क्लिक में कई लोगों तक बात पहुंचा देने की सुविधा के साथ कुछ खतरे भी सामने आए हैं—जैसे गोपनीय जानकारी का लीक होना, झूठी या भ्रामक जानकारी फैलना और इसके साथ ही बड़ी दिक्कत वाली बात यह है कि एक बार पोस्ट की गई जानकारी को हटाने के लिए कई नियमों का पालन करना पडता है इसकी सीमाएं तय की गई है। सरकारी विभाग के लिए दिक्कत हो सकती है।”

    आदेश में आगे कहा गया, कि “यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार की नीतियों, राजनीतिक घटनाओं या कुछ व्यक्तियों की आलोचना के लिए किया जा रहा है, जो सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।” Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

    नए नियमों की जानकारी

    सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे राज्य सरकार या देश से जुड़ी किसी भी नीति की आलोचना करने से बचें और सोशल मीडिया का उपयोग “सावधानी और जिम्मेदारी” के साथ करें। उन्हें कोई आपत्तिजनक या मानहानि करने वाली सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।

    खुद का प्रचार

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी यह ज़रूर बता सकते हैं, कि किसी योजना या प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने या उनके विभाग ने क्या प्रयास किए हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि वे खुद का प्रचार न करें। सरकार की किसी योजना या प्रोजेक्ट से जुड़ी पहले से स्वीकृत जानकारी केवल वही व्यक्ति साझा कर सकता है जिसे इसके लिए अधिकृत किया गया है। इसका मकसद आम जनता की भागीदारी को बढ़ाना है।

    सरकारी महकमों का इस्तेमाल

    नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी और आधिकारिक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट बना सकते हैं। इसके अलावा, जब किसी अधिकारी का ट्रांसफर हो जाए, तो उन्हें अपने आधिकारिक अकाउंट को तुरंत संबंधित विभाग के प्रभारी को सौंप देना होगा। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है, कि अधिकारी और कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी आधिकारिक पदनाम, सरकारी प्रतीक (लोगो), यूनिफॉर्म, सरकारी गाड़ी या निवास जैसी संपत्तियों से जुड़ी फोटो, वीडियो या रील न डालें।

    अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय समन्वय के लिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे सोशल मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें बिना अनुमति के कोई भी गोपनीय दस्तावेज़, चाहे वह पूरा हो या आंशिक, अपलोड, फॉरवर्ड या साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन ऐप्स या प्लेटफॉर्म्स को सरकार ने बैन किया है, उनका उपयोग बिल्कुल न किया जाए।

    यह आदेश सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा — चाहे वे स्थायी हों, अनुबंध पर हों या सरकार के बाहर से नियुक्त किए गए हों। यह नियम उन सभी कर्मचारियों पर भी लागू होंगे जो सरकारी कंपनियों, उपक्रमों, अतिथि सेवाओं या स्थानीय निकायों में काम कर रहे हैं। Maharashtra: Strictness imposed on the use of social media for government employees

  • Mumbai: गूगल मैप के चक्कर में ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिरी सुरक्षा कर्मियों ने बचाया

    Mumbai: गूगल मैप के चक्कर में ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिरी सुरक्षा कर्मियों ने बचाया

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    बेलापुर में गूगल मैप के चलते गलत रास्ते पर ऑडी कार चला रही महिला खाड़ी में गिर गई। घटना शुक्रवार और शनिवार रात करीब 1 बजे की है। सुरक्षाकर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद महिला को बचाया।

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई:
    नवी मुंबई के बेलापुर में गूगल मैप ने महिला को पुल के नीचे का रास्ता बता दिया। महिला ने मैप देखते हुए पुल के ऊपर जाने की बजाय नीचे का रास्ता पकड़ लिया। नतीजतन, उसकी कार सीधे ध्रुवतारा जेट्टी से खाड़ी में गिर गई। गनीमत रही, कि समुद्री सुरक्षा बल के पुलिस कर्मियों ने कार को खाड़ी में गिरते हुए देख लिया। वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि महिला पानी में बह रही थी। इसके बाद रेस्क्यू बोट और गश्ती टीम की मदद से महिला को बचाया गया। Mumbai: A woman driving an Audi car while using Google Maps fell into the bay and was rescued by security

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    गूगल मैप के कारण पहले भी कई हादसे हुए-

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    9 जून, 2025: यूपी के महाराजगंज में फ्लाईओवर से लटक गई कार
    उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में गूगल मैप के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने के कारण एक कार अधूरे फ्लाईओवर से नीचे लटक गई थी। इस हादसे में कार में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए। हादसा महाराजगंज जिले के गोरखपुर-सोनौली नेशनल हाईवे स्थित भैया फरेंदा में निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर हुआ। फ्लाईओवर का काम अधूरा था, लेकिन गूगल मैप में पूरा रास्ता दिख रहा था।

    Google maps accident

    4 मार्च, 2025: ग्रेटर नोएडा में 30 फीट गहरे नाले​​​​ में कार गिरी, स्टेशन मास्टर की मौत
    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में गूगल मैप के गलत नेविगेशन डायरेक्शन के कारण एक 31 साल के स्टेशन मास्टर भरत सिंह कार सहित 30 फीट गहरे नाले में गिर गए थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। अधिकारियों को नाले से कार को बासर निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल करना पड़ा था। घटना के वक्त एक डिलीवरी बॉय घटनास्थल पर मौजूद था, जिसने पुलिस को जानकारी दी थी।

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    25 नवंबर 2024: गूगल मैप अधूरे पुल पर ले गया, कार नीचे गिरने से 3 की मौत
    यूपी के बरेली में गूगल मैप की वजह से एक कार आधे-अधूरे पुल से नीचे गिर गई थी। हादसे में कार में सवार 2 भाइयों समेत 3 युवकों की मौत हो गई थी। तीनों गूगल मैप के सहारे कार से बरेली आ रहे थे। लोकेशन के हिसाब से चल रहे युवक पुल पर पहुंच गए। कोहरे के कारण आगे दिखाई नहीं दिया और कार रामगंगा नदी में गिर गई।

  • झूठे गवाहों का इस्तेमाल कर 19 साल की जेल, मुंबई लोकल ब्लास्ट में 12 मुसल्मानों को किसने फंसाया?

    झूठे गवाहों का इस्तेमाल कर 19 साल की जेल, मुंबई लोकल ब्लास्ट में 12 मुसल्मानों को किसने फंसाया?

    11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में पिछले 19 सालों से जिन 12 मुसलमानों को दोषी ठहरा कर जेल में कैद कर लिया गया था। हाईकोर्ट ने सभी को एक साथ बरी कर दिया। लेकिन इन सब के पीछे कौन हो सकता है यह अभ भी सवाल का विषय बना हुआ है।

    मुंबई: 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन धमाकों में 187 लोगों की जान गई, 800 से ज़्यादा घायल हुए। इस भयानक घटना के 19 साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें इन धमाकों का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि बरी किए गए लोगों को वापस जेल नहीं भेजा जाएगा। अब सवाल है, कि इन 12 मुसलमानों को फंसाने का काम किसने किया था। जिसकी वजह से एक विशेष समुदाय को टार्गेट किया गया। ये सवाल हैं उन 12 लोगों में से एक मोहम्मद अली का, जिन्हें इसी मामले में बरी कर दिया गया है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर लगा रोक

    सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने साफ कर दिया, कि सभी आरोपी जेल से रिहा हो चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा जेल भेजने का सवाल ही नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों पर विचार करते हुए कहा, कि हाई कोर्ट के फैसले को कानूनी मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा और उस फैसले पर रोक लगाई जाती है।

    वो 13 लोग कौन थे?

    2006 के धमाकों के बाद मुंबई पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें कमाल अहमद, मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी, मोहम्मद माजिद, नवीद हुसैन खान, मोहम्मद फ़ैसल अतउर रहमान शेख, सुहैल महमूद शेख, आसिफ खान, एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, शेख मोहम्मद अली, जमीर अहमद, मुजम्मिल अतउर रहमान शेख, तनवीर अहमद और अब्दुल वहीद शेख शामिल थे। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?

    एक की हो गयी मौत

    गिरफ्तार 12 लोगों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी बेगुनाही की अपील की थी। हाईकोर्ट में 10 साल केस चला फिर फैसला आया कि ये सब बेकसूर हैं। इस पूरे मामले में एक ऐसा शख्स भी था जिसने अपनी बेगुनाही की खबर सुनने से पहले ही दुनिया छोड़ दिया। बिहार के मधुबनी जिले के बसोपट्टी के रहने वाले कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी की 2021 में कोविड के दौरान जेल में ही मौत हो गई थी।

    मजदूर को किया था गिरफ्तार

    जब कमाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तब उनके बेटे अब्दुल्ला अंसारी सिर्फ छह साल के थे। अब्दुल्ला कहा, ATS ने कमाल अंसारी पर पाकिस्तान में हथियारों का ट्रेनिंग लेने, भारत-नेपाल बॉर्डर के रास्ते आतंकवादियों को लाने और मुंबई के माटुंगा स्टेशन पर विस्फोटक रखने का इल्जाम लगाया था। लेकिन अब्दुल्ला बताते हैं कि उनके पिता एक मजदूर थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। 19 years in jail using false witnesses, who implicated 12 Muslims in Mumbai local train blast?

    क्या अब सरकारें, पुलिस, मीडिया कमाल के परिवार से माफी मांगेगे? उसकी बदनामी के दाग को कौन धोएगा?

    झूठे गवाह और मनगढ़ंत कबूलनामे का खुलासा

    इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को फंसाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, जिनकी पोल RTI ने खोल दी।

    • गवाह नंबर 74 की झूठी गवाही: अभियोजन पक्ष के गवाह नंबर 74 ने विशेष मकोका अदालत में बताया था कि उसने एहतेशाम सिद्दीकी को चर्चगेट रेलवे स्टेशन पर एक काले बैग के साथ देखा था। इसी गवाही के आधार पर एहतेशाम को बम लगाने वाला बताया गया। लेकिन RTI से मिली जानकारी ने इस गवाह की पोल खोल दी। गवाह ने जिस अस्पताल में किसी से मिलने की बात कही थी, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति था ही नहीं और जिस बैंक में मिलने का दावा किया था, वह व्यक्ति भी वहां नहीं था। अदालत ने इस गवाह को पुलिस का ‘स्टॉक गवाह’ करार दिया, यानी एक ऐसा गवाह जिसे पुलिस हर केस में इस्तेमाल करती है। RTI से यह भी सामने आया कि यही गवाह पुलिस के लिए चार और मामलों में भी पेश हुआ था।
    • पहचान में देरी पर सवाल: पुलिस ने कुछ ऐसे गवाह भी पेश किए जिन्होंने ब्लास्ट के 100 दिनों बाद आरोपियों को पहचानने की बात कही। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि कोई इतने लंबे समय बाद किसी व्यक्ति का चेहरा कैसे याद रख सकता है? यह दर्शाता है कि पुलिस असली गुनहगारों को ढूंढने के बजाय आम लोगों को बलि का बकरा बना रही थी।
    • स्केच गवाह का अनुपस्थित होना: आरोपी के स्केच बनाने में मदद करने वाले गवाह को ट्रायल के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उसे अदालत में आरोपी की पहचान करने के लिए कहा गया। मामले का यह एक सबसे बड़ा लूप-होल था।
    • कॉपी-पेस्ट के कबूलनामे: पुलिस का केस ज़्यादातर कबूलनामों पर आधारित था, जो पुलिस ने अपनी कस्टडी में लिए थे। MCOCA की धारा 18 के तहत पुलिस के सामने दिए गए कबूलनामों को कोर्ट में मान्यता देता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन कबूलनामों के आधार पर सजा देने से इंकार कर दिया, क्योंकि कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने यह भी पाया कि कई आरोपियों ने दो अलग-अलग अधिकारियों के सामने जुर्म कबूल किया था, लेकिन दोनों कबूलनामों में घटना का विवरण, यहां तक कि फुल स्टॉप और कॉमा भी हूबहू कॉपी-पेस्ट थे। कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय माना।

    2015 में इसी केस में बरी हुएम अब्दुल वाहिद शेख बताते हैं कि उन्होंने “हर दिन 20-25 आरटीआई एप्लीकेशन” दायर किए, जिनमें पुलिस स्टेशनों की लॉगबुक से लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड और हर जरूरी जानकारी मांगी गई।

    19 सालों बाद सामने आया पीड़ितों का दर्द

    मोहम्मद साजिद अंसारी, जो इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से थे, बताते हैं, “मेरा इलेक्ट्रॉनिक्स का बैकग्राउंड था, इसलिए इन लोगों के लिए आसान था कहना कि ये टाइमर बम बनाने के लायक है। इसी वजह से मुझे टारगेट किया गया, इन्होंने रिकवरी के तौर पर मेरे मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट के जो सामान थे और जो रिपेयरिंग की इलेक्ट्रॉनिक्स की चीजें थी उसे रिकवरी में दिखाया गया। हालांकि एफएसएल रिपोर्ट के अंदर क्लियर हुआ कि कुछ भी एक्सप्लोसिव मेरे पास नहीं मिला।”

    187 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

    19 सालों तक इन लोगों के परिवार के साथ पुलिस, समाज, मीडिया, सरकारें, अदालत नाइंसाफी करती रहीं।

    ऐसे में सवाल उठता है कि इन 12 लोगों और इनके परिवार के 19 साल के दर्द का जिम्मेदार कौन है? क्या उन लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने इन 12 लोगों को फंसाया था?

    एक सवाल और है, 2006 के ब्लास्ट में 187 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? उन परिवारों से क्या कहा जाएगा जिन्होंने अपनों को खोया था? वो लोग लौटकर नहीं आएंगे लेकिन उनके कातिल को हमारा प्रशासन आज तक नहीं ढूंढ पाया और ना ही कटघरे में खड़ा कर पाया, सजा तो दूर की बात हो गई।

  • 23 वर्षीय महिला का अपहरण, चलती कार में रातभर बलात्कार कर सड़क पर फेंका

    23 वर्षीय महिला का अपहरण, चलती कार में रातभर बलात्कार कर सड़क पर फेंका

    महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावाला की पहाड़ी इलाके में 23 वर्षीय एक महिला का कथित तौर पर अपहरण कर उसके साथ चलती कार में बलात्कार की घटना सामने आई है। रविवार को पुलिस ने इसकी जानकारी दी। 23-year-old woman kidnapped, raped overnight in a moving car and thrown on the road

    न्यूज़ डेस्क
    पुणे:
    महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावाला की एक पहाड़ी कस्बे में 23 वर्षीय एक महिला का कथित तौर पर अपहरण कर उसके साथ चलती कार में बलात्कार की घटना प्रकाश में आ रही है। बलात्कार करने के बाद पीड़ित महिला को सड़क किनारे फेंक दिया गया। रातभर चलती रही इस बलात्कार की घटना में पुलिस ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया, कि घटना शुक्रवार और शनिवार के दरमियानी रात की है। जब महिला अपने घर जाने के लिए सड़क पर चल रही थी।

    लोकप्रिय पर्यटक स्थल

    मिली जानकारी के मुताबिक, मुंबई से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित लोनावला के मावला इलाके में तुंगरली एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां एक राह चलती महिला का अपहर कर बलात्कार की घटना से इलाके में घबराहट और सनसनी फैल गई है। पुलिस ने बताया, कि घटना के सिलसिले में तुंगरली के निवासी 35 वर्षीय एक व्यक्ति को पकड़ लिया गया है। महिला की शिकायत के मुताबिक, पीड़ित महिला उसी इलाके में रहती है और शुक्रवार रात को वह अपने घर जा रही थी।

    घटना की जानकारी क्या है?

    अधिकारी ने बताया, कि एक कार उसके पास रुकी और एक आदमी ने उसे जबरन अंदर खींच लिया। इसके बाद आरोपी उसे एक सुनसान जगह पर ले गया, जहां चलती कार में उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया। उन्होंने बताया कि पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे तुंगरली में विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया और बार-बार यौन हमला करने के बाद उसे शनिवार तड़के सड़क किनारे फेंक दिया गया।

    उन्होंने बताया कि इसके बाद महिला ने लोनावाला सिटी पुलिस थाने में जाकर उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एम) (बलात्कार) और 138 (अपहरण) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ लिया गया है। 23-year-old woman kidnapped, raped overnight in a moving car and thrown on the road

    क्या है हकीकत?

    पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, कि पीड़िता के दावों की पुष्टि की जा रही है। महिला ने शुरू में दावा किया था कि तीन अज्ञात लोगों ने उसे जबरन कार में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि कार में केवल एक ही व्यक्ति था। उन्होंने बताया कि जांच से यह भी पता चला है कि आरोपी और महिला एक दूसरे को जानते थे। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।