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डिजिटल डेस्क महाराष्ट्र/पालघर: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे पालघर जिले के विरार से एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आ रहा है। यहां 17 वर्षीय किशोरी के साथ दो आरोपियों ने भूत-प्रेत उतारने के नाम पर कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने शनिवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। 22 वर्षीय गिरफ्तार आरोपी खुद को तांत्रिक बताकर मंदिरों में शिकार ढूंढता था। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
पुलिस ने क्या कहा?
विरार पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह कुछ महीने पहले विरार के एक मंदिर में 22 वर्षीय आरोपी प्रेम पाटिल से मिली थी, वह खुद को तांत्रिक बताकर अपने आप को भूत प्रेत भगाने मे सक्षम बताता था। प्रेम ने उसके साथ दावा करते हुए कहा, कि वह जादू-टोना कर भूत प्रेत भगाता है। उसने किशोरी के बारे में बताया कि उस पर बुरी आत्मा सवार है। उसने कहा कि उसे ठीक करने के लिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ेगा। इससे बुरी आत्मा भाग जाएगी। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
लॉज में ले जाकर दोनों ने किया दुष्कर्म
पीड़िता ने शिकायत में पुलिस को बताया, कि 30 जुलाई को प्रेम पाटिल और उसका साथी करण पाटिल ने उसे विरार के राजोडी बीच के पास एक लॉज में ले गया, जहां उन्होंने कथित तौर पर एक-एक कर दोनों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बात को बाद में पीड़िता ने अपने दोस्त को बताई। इसके बाद उसी दोस्त ने पुलिस में शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित किया। जिसके बाद उसने पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
पीड़िता की शिकायत के बाद विरार पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम (POCSO) और महाराष्ट्र मानव बलिदान, अमानवीय आचरण, अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार फिलहाल मामले में आगे की जांच चल रही है। A girl was raped in the name of exorcising ghosts, two arrested
महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहें लोगों दर्द आखिरकार एक महिला को अपनी जान गवां कर प्रकाश में लाना पड़ा है। जबकि लगातार हो रही जनता की मांगों पर सरकार को ध्यान देने की जरुरत है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: पालघर से मुंबई के बीच एक महिला की मौत ने पूरे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और यहां की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। एक साधारण सी दुर्घटना और अस्पताल तक पहुचने में 49 वर्षीय छाया पुरव की मौत हो गई। कारण 3 घंटो तक एम्बुलेंस ट्रैफिक मे फंसा रहा और अस्पताल तक पहुंच ही नही पाया कि छाया ने दम तोड़ दिया। पति लगातार एम्बुलेंस में बैठे बैठे डॉक्टरों के संपर्क में था। पर ट्रैफिक मे फंसे होने की वजह से बेबस और लाचार अपनी पत्नी को निहारता और दिलासा देता रहा और छाया ने दम तोड़ दिया। Traffic jam took the life of a woman, ambulance was stuck for 3 hours
पेड़ की टहनी गिरने से हुआ हादसा
31 जुलाई को पालघर के अपने घर के पास खड़ी छाया पूरव के सिर पर अचानक एक भारी पेड़ की टहनी गिर गई। इस हादसे में उनके सिर, कंधे और रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोटें आई। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि इतनी गंभीर चोटों के लिए यहां जरूरी सेवाएं नही है, पूरे पालघर जिले में इस तरह के अपघात पर इलाज हो पाना मुश्किल है। मजबूरी में पीड़ित के परिजनों को उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल रेफर करना पड़ा।
2 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे छाया पूरव को एम्बुलेंस के जरिए मुंबई के लिए रवाना किया गया। सामान्य परिस्थितियों में पालघर से मुंबई 100 किलोमीटर का सफर लगभग 2 घंटे में तय हो सकता था। लेकिन जैसे ही NH-48 Mumbai-Ahmedabad Highwayपर एम्बुलेंस पहुंची, वहां लंबा और भारी ट्रैफिक जाम लगा हुआ था, गाड़ियां रेंग-रेंगकर चल रही थीं। एम्बुलेंस के ड्राइवर ने कई बार हॉर्न और सायरन बजाकर रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन जाम इतना था कि गाड़ियां किनारे नहीं हो पा रहीं थी। मरीज की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही थी, लेकिन जाम के आगे सब बेबस थे।
3 घंटो तक जाम में फंसे रहे
शाम 6 बजे तक एम्बुलेंस सिर्फ 70 किलोमीटर का ही सफर तय कर पाई। यानी तीन घंटे बाद भी मरीज मुंबई के अस्पताल से काफी दूर थी। इस बीच छाया पूरव की हालत गंभीर होती चली गई। उनके पति, जो एम्बुलेंस में साथ थे, डॉक्टरों से लगातार फोन पर बात कर रहे थे, लेकिन स्थिति बिगड़ने के कारण उन्हें मीरा रोड के ऑर्बिट अस्पताल में भर्ती करने का फैसला किया गया। Traffic jam took the life of a woman, ambulance was stuck for 3 hours
हिंदुजा अस्पताल से सिर्फ 30 किलोमीटर पहले ऑर्बिट अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत जांचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत ने परिवार को गहरा सदमा दे दिया और यह सवाल छोड़ दिया कि अगर ट्रैफिक जाम न होता या पालघर में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं होतीं, तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
महाराष्ट्र में ट्रैफिक और स्वास्थ्य समस्याओं पर सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़ा कर गई – क्यों पालघर जैसे बड़े जिले में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा नहीं है? क्यों हाईवे पर आपातकालीन वाहन के लिए अलग ग्रीन कॉरिडोर नहीं बनाया जाता? क्यों हमारी यातायात प्रबंधन प्रणाली इतनी कमजोर है कि जान बचाने वाली गाड़ियां भी जाम में फंस जाती हैं? आपातकालीन चिकित्सा सहायता में समय की कीमत जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं हो सकती। यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी है कि तुरंत ट्रैफिक और हेल्थकेयर व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।
लोकतंत्र का हिस्सा
संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?
संसद में होती है गुंडो की भाषा
पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।
मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।
कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा
अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।
यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?
सरकार ने दिया सेना को धोखा
इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”
आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।
टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार
दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।
सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।
विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?
दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?
ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?
दुनिया की निगाहों में भारत?
भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।
जल विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुकान मालिक पर मेहरबानी कर भ्रष्टाचार पूर्वक जोड़ा नल कनेक्शन।
क्या उच्चअधिकारी करेंगे पानी पुरवठा विभाग की गैर कानूनी जल जोड़नी की जाँच?
मुंबई: भ्रष्टाचार का घुन मनपा को खाने लगा है। लापरवाह अफसर अपने कर्तव्य निर्वहन के स्थान पर गैरकानूनी तरीके से जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन दिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अछूता नहीं बचा, जिसने टी एंड कोल्ड्रिंक के नाम पर चल रहे शॉप को 394 का लाइसेंस देकर अपने भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण पेश कर दिया। जबकि टी की टपरी का स्टॉल फुटपाथ पर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 394 का लाइसेंस किसकी अथॉरिटी पर दिया गया? मनपा आयुक्त या आर/ दक्षिण विभाग के डीएमसी या फिर MOH, वैद्यकीय आरोग्य अधिकारी की अथॉरिटी का इस्तेमाल हुआ है कुछ पता नही। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices
मनपा ने खोया अपना लक्ष्य
यह सवाल आम जनता के बीच यक्ष प्रश्न की तरह मुहं बाये खड़ा है। जिस मनपा का गठन मुंबईकरों की सुविधा बढ़ाने के लिए लिए हुआ था। वहीं “असुविधा के लिए खेद है ” कि तर्ज पर मनपा अपना लक्ष्य खो चुकी है। एक ऐसा ही भ्रष्टाचार का मामला शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग त्रिकम दास रोड पर 14 अगस्त 1993 में मालिक अब्दुल रहमान द्वारा 15/10 के झोपड़े को 90000 में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को रजिस्ट्री की गई। 1976 के सेंसस में भी 15गुने दस फीट दर्ज किया गया।
यहां जल विभाग द्वारा पानी के कनेक्शन की अनुमति 25/09/2017 को उसी पते पर दी गई है। इसकी जानकारी RTI के माध्यम से उजागर हुआ। जबकि उपर्युक्त व्यक्ति को बिजली का कनेक्शन नियर आकांक्षा आर्केड के पते पर दिया गया। जो आकांक्षा आर्केड सीएचएस वडा पाव त्रिकम दास रोड के पते का है। फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसायटी द्वारा मौर्या फास्ट-फूड टी एंड कोल्ड्रिंक्स का प्रीमाइस में होने का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वार्ड को 12/03/2018 को लिखित दिया गया। बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/04/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया है।
लायसेंस विभाग की अनदेखी
यह पत्र बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक को चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दो वर्षों के लिए दिया गया लेकिन शॉप आकांक्षा आर्केड का कैसे लिखा गया? जबकि शॉप आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग से अलग है। गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम पर वड़ा पाव दर्ज है। सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति को वड़ा पाव का लाइट आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड कैसे लिखा जा सकता है? वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक शॉप को कैसे सहमति दी गयी?
वहीं नेचर ऑफ बिजनेस में सिर्फ चाय की दुकान है तो वड़ा पाव कैसे बिक रहा है? जब सेंसस में 150 वर्गफुट है तो गुमास्ता में 120 फूट कैसे है? जबकि झोपड़े की रजिस्ट्री में 150 फिट है। फार्म p आकांक्षा आर्केड लिखा है तो B/F विभाग की NOC जो केवल चाल में लिया जाता है तो बिल्डिंग में कैसे NOC जारी किया गया? आकांक्षा बिल्डिंग सेक्रेटरी का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण को 12/03/2018 में लिखा। लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 6.5 मीटर फूट लेंथ ऑफ फ्रेंच बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ टी एंड कोल्ड्रिंक बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दिया गया।
एंटी करप्शन से जांच का अनुरोध
यहां पर कागजात में घपलेबाजी की गई है। लेकिन शिकायत पत्र पर कोई जांच नहीं की गई क्यों? स्पष्ट है बीएमसी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया गया है। ज्ञात हो कि बीएमसी ने चंद सिक्के घूस लेकर कॉमर्शियल वाटर कनेक्शन पास कर दिया जिसका संज्ञान बीएमसी नही ले रही। डीएमसी और वार्ड ऑफिसर की मिलीभगत से धोख़ाधड़ी की गई है। बीएमसी स्वास्थ विभाग के द्वारा 394 एवं जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन की अनियमितताओं के भ्रष्टाचार की जांच एंटी curruption विभाग से किये जाने का अनुरोध है। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices
मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने 4.034 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, कस्टम विभाग ने एयरपोर्ट से 94 लाख और 14.5 करोड़ रुपए की हाइड्रोपोनिक वीड जब्त की है। इन सभी मामलों में NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई कर मामले की तहकीकात की जा रही है। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
मुंबई: एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने ड्रग्स के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 4.034 किलोग्राम मेफेड्रोन (MD) बरामद की है, जिसकी कीमत करीब 10.07 करोड़ रुपए बताई जा रही है। मुंबई पुलिस ने यह कार्रवाई मालाड, जोगेश्वरी, दादर और नवी मुंबई जैसे चार अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर गिरफ्तारी की है। खबरों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी मुंबई के अलग-अलग इलाकों में मेफेड्रोन की सप्लाई कर रहे थे। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
मुंबई पुलिस से मिली जानकारी
पुलिस ने बताया कि घाटकोपर, वर्ली और बांद्रा यूनिट्स की अलग-अलग कार्रवाई में 504, 518, 766, 690 और 1.024 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया है। ये सभी बरामदगियां अलग-अलग मामलों में हुई हैं। अब तक इस मामले में चार FIR दर्ज हो चुकी हैं और मुंबई पुलिस की मुताबिक नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट के तहत आगे की जांच जारी है। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
एयरपोर्ट पर छापेमारी
इससे पहले, मुंबई कस्टम के एयरपोर्ट अथॉरिटी ने गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (CSMI) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए का मादक पदार्थ जब्त किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन में कस्टम ने कुल 0.947 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) बरामद किया था। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
आरोपी यात्री गिरफ्तार
दरअसल, बैंकॉक से मुंबई पहुंचे एक यात्री को जांच के दौरान रोका गया। उसके पास से 947 ग्राम हरे रंग की गांठों के रूप में संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 94 लाख रुपए बताई जा रही है। यह मादक पदार्थ वैक्यूम-सील प्लास्टिक पैकेट्स में पैक किया गया था और यात्री के ट्रॉली बैग में छिपाकर रखा गया था। आरोपी यात्री को एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
इससे पहले, मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने 5 और 6 अगस्त की दरमियानी रात को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 14.5 करोड़ रुपए की हाइड्रोपोनिक वीड जब्त की थी। मुंबई कस्टम्स की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह जब्ती एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज एक केस में की गई थी। इस दौरान एक यात्री को भी गिरफ्तार किया गया था। Huge amount of drugs recovered in Mumbai, total 5 arrested including 2 foreigners
मुंबई में एक महिला ने अपने बैंक कर्मचारी दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स-ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। इसमें निजी डेटा की चोरी कर धमकाया गया, नौकरी छीन ली गई और बदनाम करने की कोशिश से परेशान पीड़ित जब कोर्ट पहुंचा। तब जाकर पुलिस ने किया 6 लोगों पर केस दर्ज.. Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
मुंबई: कांदीवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। आरोपी महिला ने धमकी दी कि अगर पैसा नहीं दिए तो वह उसे जेल भिजवा देगी। पीड़ित ने डर के साये में कई दिनों तक यह सब झेला, लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर पुलिस को आप बीती सुनाई। लेकिन पुलिस ने भी जब फरियाद नहीं सूनी तब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार पुलिस ने भरोरे को तार तार कर मानसिक प्रताड़ित कर रही ब्लैकमेलर एक्स गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
बदनाम कर जेल में सड़ाने की धमकी
दरअसल, चारकोप पुलिस ने डॉली कोटक नाम की एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली महिला को गिरफ्तार किया है। उस पर अपने एक्स-बॉयफ्रेंड से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है। पीड़ित एक आईटी सेक्टर में काम करता था। लेकिन वह पहले से ही एक झूठे केस में फंसा हुआ था और हाल ही में जमानत पर बाहर आया। तभी कोर्ट के बाहर डॉली ने उसकी बहन को पकड़ लिया और कहा, “भाई को बचाना है तो 1 करोड़ रुपये दो, वरना मैं मीडिया में उसका नाम खराब कर दूंगी और जेल में सड़ने दूंगी।” Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
डिजिटल डाटा की चोरी
खबरों के मुताबिक, डॉली कोटक यहीं नहीं रुकी, उसने तीन अन्य बैंक कर्मचारियों की मदद से पीड़ित के निजी और डिजिटल डाटा तक अपनी पहुंच बनाई। इसमें एचडीएफसी बैंक के हर्ष श्रीवास्तव और अनंत रुइया तथा आईसीआईसीआई बैंक के जयेश गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। जिन लोगों ने डॉली की मदद की। इनकी मदद से डॉली ने पीड़ित के ईमेल से लेकर बैंक खाते, लोकेशन और निजी फोटोज तक एक्सेस पा लिया। यहां तक कि पीड़ित के ईमेल से अपना नंबर भी लिंक करा लिया गया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
नौकरी से निकालवा दिया
मई 2024 में पीड़ित को डॉली के नंबर से एक धमकी भरा मैसेज आया कि “पैसे दे दो या जेल में मरो, तुम कभी नहीं जीत पाओगे।” इसके कुछ दिन बाद उसने पीड़ित के ईमेल आईडी से कंपनी के एचआर को कई बदनाम करने वाले मेल भेज दिए, जिससे उसकी नौकरी चली गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने आखिरकार बोरिवली मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर चारकोप पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 175(3) के तहत मामला दर्ज किया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
एफआईआर में डॉली कोटक, उसके भाई सागर कोटक, दोस्त प्रमिला वाज़ और तीन बैंक कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आईटी एक्ट, आइपीसी की कई धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह और डॉली पहले रिलेशनशिप में थे। यह मामला न केवल ब्लैकमेलिंग और निजी रिश्तों के खतरनाक मोड़ की तरफ इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कितना घातक हो सकता है। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
विक्रोली के पार्कसाईट पुलिस ने 23 वर्षीय युवक को दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया है। मामला तब सामने आया जब 15 साल की लड़की अपने 19 हफ्ते के गर्भपात कराने उड़ीसा के एक अस्पताल में भर्ती हुई।
मुंबई: गुरुवार को मुंबई पुलिस ने एक 23 वर्षीय युवक को नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और गर्भवती करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची की मां जब गर्भपात कराने उड़ीसा के एक अस्पताल ले गई, तो डॉक्टरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद बरहामपुर के बैद्यनाथपुर पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज कर मुंबई पुलिस को मामला ट्रांसफर किया गया। बरहामपुर के पुलिस अधीक्षक सरवणा विवेक एम. ने बताया कि 28 जुलाई को एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से मेडिको लीगल शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। Mumbai: Accused of raping a 15-year-old girl after impregnating her, threatens her mother
नाबालिग का बयान क्या था?
पुलिस ने बताया कि अस्पताल के गायनोकोंलॉजी विभाग में भर्ती लड़की 19 सप्ताह की गर्भवती थी और वह गर्भपात कराना चाहती थी। पूछताछ में लड़की ने बताया कि वह पिछले 14 साल से अपने माता-पिता के साथ मुंबई में रह रही थी। मार्च में एक दिन आरोपी ने उसे जबरदस्ती अपने घर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। Mumbai: Accused of raping a 15-year-old girl after impregnating her, threatens her mother
कैसे हुआ खुलासा?
इसके बाद जब लड़की को अपनी गर्भावस्था का पता चला, तो उसने अपनी मां को इस घटना के बारे में बताया। मां ने जब आरोपी से इस बारे में बात की, तो आरोपी के परिवार वालों ने उन्हें चुप रहने की धमकी दी। इसके बाद, मां अपनी बेटी को बरहामपुर ले गई ताकि गर्भपात कराया जा सके, लेकिन डॉक्टरों की पूछताछ से मामला प्रकाश मे आया और उन्होंने स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी। Mumbai: Accused of raping a 15-year-old girl after impregnating her, threatens her mother
बरहामपुर पुलिस ने लड़की के बयान के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज कर इसे मुंबई में विक्रोली स्थित पार्कसाइट पुलिस स्टेशन को भेजा दिया। इसके बाद पार्कसाइट पुलिस ने औपचारिक एफआईआर दर्ज की और प्रारंभिक सबूतों के आधार पर आरोपी को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। लड़की को बरहामपुर के चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया गया, जहां उसकी पुनर्वास और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई। कमेटी ने उसका मेडिकल चेकअप और इलाज भी सुनिश्चित किया। Mumbai: Accused of raping a 15-year-old girl after impregnating her, threatens her mother
एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था।
मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
पुलिस ने क्या कहा?
नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
नाबालिग बच्ची का यौन शोषण
नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
आत्महत्या की कोशिश
मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
मुंबईः गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी में एक ऐसा दर्दनाक वाक्या पेश आया है। जिसमें कथित तौर से 35 वर्षीय तीन बच्चों की मां ने अपने ही पति को अपने प्रेमी की मदद से मौत के घाट उतार दिया। हालांकि पति इलाज के दौरान तडपते हुए भी पत्नी की खोफ से हकीकत छुपाता रहा। लेकिन जब पिता की मौत ही हो गई तो नाबालिग बेटी ने पुलिस को सारी कहानी बयां कर दी। इस पुरे केस में आरे पुलिस की मुख्य भुमिका रही। जवाबों पर संदेह जताते हुए उसने पूछताछ करना जारी रखा। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
पुलिस ने क्या कहा?
आरे पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवींद्र पाटील ने बताया, कि आरे मिल्क कॉलोनी में एक मेकअप आर्टिस्ट भरत लक्षमण अहिरे की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है। मामले में मृतक की 35 वर्षीय पत्नी राजश्री अहिरे को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि राजश्री ने षडयंत्र रचकर अपने प्रेमी चंद्रशेखर पडायाची और उसका साथी रंगा के हाथों अपने ही पति की हत्या करवा दी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
गिरफ्तार राजश्री और मृतक भरत अहिरे की फाइल तस्वीर
पत्नी ने खेला पति के साथ खेल
पुलिस के मुताबिक, पत्नी के अवैध संबंध के चलते भरत की हत्या हुई है। पिछले महीने जब भरत ने अपनी पत्नी से इस बारे में पूछा, तो उसने भोली बनते हुए चंद्रशेखर द्वारा उस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद भरत ने चंद्रशेखर को फोन किया, जिसने उसे गोरेगांव पूर्व के आरे मिल्क कॉलोनी स्थित एकतानगर, यूनिट नंबर 31 में एक सार्वजनिक शौचालय के पास मिलने के लिए बुलाया। इस दौरान राजश्री भी अपने पति के साथ मिलने वाली जगह पर भी गई। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
15 जुलाई की रात जब चंद्रशेखर और रंगा भरत से मिले तो उन्होंने उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। चंद्रशेखर ने उसकी छाती, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर बेतहाशा मुक्का मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखर का साथी रंगा हमले के दौरान भरत को पीछे से पकड़ रखा था। हमले के वक्त राजश्री बगल में खड़े होकर तमाशा देखती रही। न तो उसने हस्तक्षेप किया और न ही आवाज़ लगा कर मदद मांगी। इसके बाद जैसे ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर इकट्ठा होने लगे, दोनों हमलावर भाग गए। यहां राजश्री का और एक गुनाह सामने आया। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय, अपने घर ले गई और तीन दिनों तक बिना किसी इलाज के उसे तड़पता हुआ छोड़ दिया।
नाबालिग बेटियों ने मांगी मदद
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक भरत के दो बेटियां 13 और 5 साल की हैं और एक 3 साल का बेटा है। 13 वर्षीय नाबालिग अपने पिता की बिगड़ती हालत देख सहमी हुई थी। लेकिन जब उसने देखा कि पिता को खून की उल्टियां होने लगीं तो उसने ने रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी। सूचना पाकर भरत की भाभी घर आईं, जहां राजश्री ने दावा किया कि भरत एक बाइक दुर्घटना में घायल हो गया है। आखिरकार उसे मलाड पूर्व के पठानवाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में राजश्री ने वही एक्सिडेंट वाली झूठी कहानी दोहराई, इसपर भरत भी पत्नी के दबाव और डर के कारण उसी के हां में हां मिलाया। जबकि इसकी जानकारी डॉक्टरों ने मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के तहत पुलिस को रिपोर्ट भेजी। In Mumbai, a husband was killed by his own wife, the daughter had seen the mother’s act
हालांकि पुलिस को बयान में बहुत सी गड़बड़ियां नजर आ रही थी। इसलिए उन्होंने डिटेल में पूछताछ की और भरत के दिए गए बयान के आधार पर बेटी से भी बात की। क्यों कि रिशतेदारों को पहली सूचना बेटी ने दी थी। इसलिए पुलिस को शक हुआ और पूछताछ में बेटी ने बताया कि उसने मार पीट के समय छुपकर सारी घटना देख ली थी। पुलिस ने बताया कि बेटी के बयान के वक्त उसकी मां चुपचाप खड़ी देख रही थी। राजश्री अपने पति को अस्पताल ले जाने के बजाय घर ले आई और उसका इलाज भी नहीं कराया आखिरकार 5 अगस्त को इलाज के दौरान भरत की मृत्यु हो गई। बेटी के दिए गए बयान के आधार पर यह पूरा मामला सामने आया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य दो फरार आरोपियों की तलाश चल रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर हुई धरपकड़..
मुंबई: कॉटन ग्रीन रेलवे स्टेशन के पास से मुंबई क्राइम ब्रांच की हफ्ता वसूली विरोधी सेल ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार सभी आरोपी शूटर बताए जा रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि ये सभी लोग हरियाणा से मुंबई आए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के पुलिस अधिकारी आरोपियों के पास से 50 जिंदा कारतूस और 4 पिस्तौल भी बरामद कर इस बात का पता लगाने में जुटी है कि ये लोग क्या किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए थे? 5 sharp shooters from Haryana arrested in Mumbai and many weapons recovered
किसने भेजा हत्यारों को मुंबई?
घटना स्थल कालाचौकी पुलिस स्टेशन अंतर्गत होने की वजह से मुंबई क्राईम ब्रांच की टीम ने उन्हें पुलिस स्टेशन लेजाकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सन्नी नरेशकुमार, रवि अंग्रेज, राहुल पृथ्वीसिंह, अनुज कुलदीप कुमार और आदित्य योगेश कौशिक के रूप में हुई है। मुंबई क्राइम ब्रांच को मिली खूफिया जानकारी के आधार पर यह धरपकड़ हुई। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है, कि आखिर इन्हें मुंबई में हथियार लेकर किसने भेजा था और उनका इरादा क्या था?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब इन्हें मौके से पकड़ा तब अधिकारी ने पूछा, “क्या तुम्हारे पास जो पिस्तौल और कारतूस बरामद किया गया उसका लाइसेंस है?” तब गिरफ्तार आरोपियों ने कहा, “नहीं।” पूछा गया, कि “अगर लाइसेंस नहीं है, तो तुम हथियार किस काम से और कहां से लाए हो?” पूछने पर एक आरोपी ने बताया कि वह इसे बेचने के लिए लाया था।हालांकि, किसको बेचने के लिए लाया गया था? वो बता नही रहे हैं। इनके बयान तो सुन रहे हैं लेकिन अपने स्तर पर मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी जांच पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि कहीं किसी बड़ी योजना को अंजाम देने के लिए मुंबई आए हों?