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सुरेंद्र राजभर मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) स्थित महावीर नगर फेरीवाला संगठन के सभासदों और सदस्यों ने मिलकर संगठन स्थापना दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया। महावीर नगर परिसर के सभी पथ विक्रेता इसमें शामिल हुए। यह संगठन, नेशनल हॉकर्स फेडरेशन और महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन के नेतृत्व में बोर्ड अनावरण का उद्घाटन किया।
मौके पर संगठन के मार्ग दर्शक रहे अखिलेश गौड़ ने बोर्ड यानि फलक का अनावरण किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के विधानसभा संघठक संतोष राणे, उप विभाग प्रमुख श्याम मोरे, स्थानीय कार्यकर्ता सुरेश रसाल, महेश गुप्ता और उप शाखा प्रमुख हरेश्याम गौड, राधेश्याम गौड़, विनय लिंबाचिया और अन्य ढेर सारे लोग उपस्थित रहे।
सरकार झुग्गी-झोपड़ियों पर जबरन तोड़क कार्रवाई नहीं कर सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट में हुए ऐतिहासिक फैसले में न्यायाधीशों ने स्पष्ट कह दिया, कि संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है।
जस्टिस अमित बोरकर और जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन की खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कहा, कि मुंबई में खुले स्थानों को बनाए रखने का एकमात्र समाधान कानूनों को सख्ती से लागू करना और अतिक्रमण करने वालों – झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को बेदखल करना है। जजों ने आदेश में कहा, “निश्चित रूप से, जनसंख्या दबाव, आर्थिक असमानता और शहरी गरीबी से मुक्त एक आदर्श दुनिया में, इस दृष्टिकोण को मजबूत संवैधानिक समर्थन मिल सकता है। लेकिन यह न्यायालय मुंबई में शहरी जीवन की वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
संविधान केवल एक सैद्धांतिक दस्तावेज नहीं है, यह एक जीवंत ढांचा है, और यह जिन अधिकारों की गारंटी देता है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, उन्हें वास्तविक, रोजमर्रा की परिस्थितियों के प्रकाश में समझा जाना चाहिए। यह सच है कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है। लेकिन यह भी उतना ही सच है, और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है कि आश्रय और पर्याप्त आवास का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मानव सम्मान और व्यक्तिगत सुरक्षा का एक हिस्सा है।
हालांकि वह वैध नहीं है पर निंदा नहीं की जानी चाहिए
अपने 191-पृष्ठ के फैसले में, न्यायाधीशों ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोग संविधान के संरक्षण से बाहर नहीं हैं। जस्टिस बोरकर की ओर से लिखे गए आदेश में कहा गया है, “उनके पास भूमि का कानूनी स्वामित्व नहीं हो सकता है, लेकिन उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। जब वे अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि तत्काल आवश्यकता और मजबूरी के कारण भूमि पर कब्जा करते हैं, तो उनके कृत्य की, हालांकि वह वैध नहीं है, निंदा नहीं की जानी चाहिए, बल्कि उसे सहानुभूति के साथ देखा जाना चाहिए। संविधान अपने मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से यह मानता है कि गरीबी और असमानता संरचनात्मक समस्याएं हैं, और राज्य से उन्हें कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने के लिए कहता है।
जजों ने कहा कि पर्यावरण अधिकारों और आवास अधिकारों को एक दूसरे के विरोधी के रूप में मानने का याचिकाकर्ताओं का तर्क एक गलती होगी। पीठ ने कहा, “दोनों अनुच्छेद 21 का हिस्सा हैं और दोनों ही गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार की रक्षा करते हैं। जिस तरह प्रदूषित हवा और पानी मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, उसी तरह असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और अस्वास्थ्यकर रहने की स्थिति भी नुकसान पहुंचाती है। हरे-भरे स्थानों की इस तरह से रक्षा करना कानूनन गलत और सिद्धांत रूप में अनुचित होगा, जिससे हजारों परिवार बेघर हो जाएं और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया या विकल्प न मिलें। इस तरह की कार्रवाई अनुच्छेद 21 की रक्षा करने के बजाय उसका उल्लंघन कर सकती है।
ये टिप्पणियां विकास नियंत्रण एवं संवर्धन विनियमन (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए की गईं, जो झुग्गी-झोपड़ियों द्वारा अतिक्रमण की गई मूल रूप से आरक्षित खुली भूमि का उपयोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास के लिए करने की अनुमति देता है। विनियमन ऐसी भूमि के केवल 65 प्रतिशत के उपयोग की अनुमति देता है, यदि उक्त भूमि 500 वर्ग मीटर से अधिक है और यह अनिवार्य करता है कि उक्त भूमि का 35 प्रतिशत हिस्सा खुली जगह, पार्क, उद्यान और/या मनोरंजन के मैदान आदि के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: 21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day
योग का महत्व
डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day
योग की आवश्यकता
अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।” Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day
राजस्थान के झालावाड़ जिला में एक युवक के आत्महत्या करने के बाद उसकी पत्नी ने अपने गांव में आत्महत्या कर ली। दोनों का शुक्रवार को एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस के अनुसार रटलाई के पिपलिया नग्गा गांव निवासी 19 वर्षीय सोनू पुत्र बालचंद झालावाड़ शहर में जिला अस्पताल के सामने चाय की टपरी लगाता था। वह झालावाड़ में मदारी खां तालाब कच्ची बस्ती में किराए के मकान में रहता था। उसकी पत्नी गांव में रहती थी।
उधर सोनू की मौत की सूचना मिलने के बाद उसकी पत्नी सपना ने भी शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे पिपलिया नग्गा गांव में एक पेड़ पर साड़ी से फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों ने उसका शव देखा तो पुलिस को सूचना दी।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र में इस बार का विधानसभा मुख्य रूप से दो खेमों के बीच लड़ा गया था। एक तरफ भाजपा की अगुआई वाली महायुति और दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी मैदान में थी। महायुति ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की और देवेंद्र फडणवीस को फिर से प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार पर सीएम फडणवीस ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनके शासनकाल में करप्शन पर लगाम लगाने की कोशिश किया जाएगा और उस दिशा में काम भी महायुति की सरकार करेगी। जबकि महाराष्ट्र में करप्शन हमेशा से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
खुद ने लगाया था भ्रष्टाचार के आरोप
दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा गया था कि अतीत में उन्होंने जिनपर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था। जैसे अजित पवार और छगन भुजबल जैसे और भी नेता अब महायुति गठबंधन की सरकार में कैबिनेट मंत्री कैसे बन गए हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगाई जा सकता है? इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपनी तरफ से गारंटी देते हुए जोर दिया कि पहले जो हुआ वो हो गया लेकिन हमारी सरकार में भ्रष्टाचारी के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
महाविकास अघाडी मे थे मंत्री
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी। बता दें कि अजित पवार और छगन भुजबल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। महाविकास अघाड़ी की सरकार के दौरान मंत्री रहे अजित पवार पर अनियमितता के आरोप लगे थे। अब अजित पवार महाराष्ट्र महायुति गठबंधन की मौजूदा सरकार में राज्य के उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाल रहे हैं। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
भ्रष्टाचार पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि “राजनीति की यही सच्चाई है। राजनीति में आप इन चीजों से मुंह मोड़कर आगे नहीं बढ़ सकते। साल 2019 में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद और जब ये घोषणा हुई कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, तो मेरे रास्ते में रोड़े अटकाए गए। घोषणा के बाद भी उद्धव ठाकरे ने हमें धोखा दिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने हमें धोखा दिया।” उन्होंने कहा, राजनीति मे आपको टीके रहने के लिए रास्ता खोजना पड़ता है, तो हमने रास्ता निकाला। एक सही रास्ता था, लेकिन हमारे साथी उस रास्ते से भटक गए, तो हमने जिन्हें साथ ले सकते थे, उन्हें साथ लिया और आगे बढ़े।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
समझौता करना पड़ा
उन्होंने यह भी कहा कि “मैंने राजनैतिक सिद्धांत का हमेशा से पालन किया है और हमेशा इसे कायम रखा है। इसलिए मैंने हमेशा अपनी राजनीति को पकड़े रखा। लेकिन जब आप राजनीति में काम करते हैं, तो कभी-कभी आपको समझौता करना पड़ता है। लेकिन, अगर मैं मुख्यमंत्री हूं, तो मैं अपने मंत्रिमंडल में किसी को भी गलत काम नहीं करने दूंगा। मैं आपको गारंटी देता हूं कि यह सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
राजनीतिक अवसरवाद पर क्या बोले?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राजनीतिक अवसरवादिता पर भी सवाल पूछा गया। उनसे पूछा गया कि क्या राजनीतिक अवसरवादिता तब से बदल गई है, जब आपने शुरुआत की थी? या यह हमेशा से ऐसा ही रहा है? सीएम फडणवीस ने कहा, “यह हमेशा से ऐसा ही था। इसे इस तरह के चक्र के रूप में देखें। जैसे 1978 में महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव हुआ था। उस वक्त शरद पवार ने ठीक इसी तरह सरकार बनाई, फिर अगर आप 1992 को देखें, तो शरद पवार की सरकार के पास बहुमत नहीं था और उन्होंने शिवसेना को तोड़कर सरकार बनाई।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
मुंबई: नालासोपारा, पालघर जिले की रहने वाली एक कॉलेज स्टूडेंट ने गुरुवार को विलेपार्ले के सत्या कॉलेज की इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस अधिकारियों इसकी जानकारी देते हुए बताया, कि विलेपार्ले सत्या कॉलेज की यह घटना गुरुवार सवेरे की है। पुलिस को घटना स्थल से किसी भी तरह का सूसाइड नोट बरामद नही हुआ है। A 21 year old girl committed suicide by jumping from a college building.
पुलिस ने क्या कहा?
विलेपार्ले पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गबाजी चिमाटे ने जानकारी देते हुए बताया, कि मृतक 21 वर्षीय संध्या पाठक सत्या कॉलेज की थर्ड ईयर स्टूडेंट थी। उसने गुरुवार सवेरे कॉलेज केम्पस की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर रूप से घायल लड़की को अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। A 21 year old girl committed suicide by jumping from a college building.
पुलिस ने बताया, कि मृतक रेग्युलर पालघर जिले के नालासोपारा से यहां कॉलेज आया करती थी। उसने आत्महत्या क्यों की इसकी अभी तक कोई जानकारी प्राप्त नही हुई है। मौके से कोई सूसाइड नोट भी बरामद नही हुआ है। मामले की जांच में उसके सहपाठीयों से पूछताछ की जा रही है और कॉलेज प्रशासन जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। A 21 year old girl committed suicide by jumping from a college building.
मुंबई की रफी अहमद किडवाई मार्ग पुलिस ने एक संवेदनशील मामले को महज 2 घंटों के भीतर सुलझा दिया। आरोपी के गिरफ्तारी के साथ ही उसके मोबाइल फोन की सारी आपत्तिजनक स्टोरेज साफ कर दिया।
मुंबई: पश्चिम वडाला से शिवडी के बीच रहने वाली 22 वर्षीय कॉलेज छात्रा को 24 वर्षीय अब्दुल कलाम सोशस मीडिया के जरिए ब्लैकमेल और धमका रहा था। उसने छात्रा को चेतावनी दी कि अगर उसने उसके प्यार को स्वीकार नहीं किया तो वह उसकी फेसबुक में अपलोड तस्वीरों को फर्जी तरिके से एडिट कर उसका अश्ली वीडियो बनाकर ऑनलाइन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हुए वायरल कर देगा। Tried to trap a 22 year old college student in love, police arrested him within 2 hours
पिता को लड़की ने बताया
लड़की तो पहले, कुछ दिनों तक घबराई हुई हालत में अपने परिवार वालों से भी दूरी बनाने लगी। इसपर पिता परेशान होने लगे और समझा बुझाकर जब पूछा, तो पीड़ित लड़की ने अपने पिता कुरैशी को इसकी जानकारी दी। पिता ने तुरंत मुंबई पुलिस परिमंडल-4 की पुलिस उपायुक्त सुश्री रागसुधा आर से संपर्क किया और अपनी बेटी के साथ पूरी स्थिति बताते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया। Tried to trap a 22 year old college student in love, police arrested him within 2 hours
डीसीपी ने दिए निर्देश
डीसीपी रागसुधा आर ने आरएके मार्ग पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संदीप रणदिवे को त्वरित निर्देश दिए। उनके मार्गदर्शन में, एपीआई कांबले, एपीआई मोहिते, पीएसआई टाकुर और पुलिस टीम ने आरोपी के मोबाइल फोन को ट्रेस करना शुरू कर दिया। हालाँकि आरोपी हर 30 मिनट में अपना स्थान बदलता रहा, फिर भी पुलिस ने सिर्फ़ 2 घंटे के भीतर धारावी से अब्दुल कलाम का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने में कामयाबी हासिल की। हिरासत में लेने के बाद पहले तो पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच की और उसके फोन से लडकी की आपत्तिजनक सामग्री निकालने के बाद फोन से डिलीट कर दी। Tried to trap a 22 year old college student in love, police arrested him within 2 hours
लड़की और उसके परिवार ने डीसीपी रागसुधा आर और आएके मार्ग पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय कुमार संदीप रणदिवे, एपीआई कांबले, एपीआई मोहिते, पीएसआई ठाकुर और पूरी आरएके मार्ग पुलिस टीम को उनकी तेज और कुशल कार्रवाई के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। क्षेत्र के लोगों ने भी ऐसे संवेदनशील मामले में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और समर्थन के लिए उनकी सराहना की। Tried to trap a 22 year old college student in love, police arrested him within 2 hours
वकालत का मौका बहुत ही कम मिलता है सुप्रीम कोर्ट में..!
गठबंधन करने वाले दल को ही खत्म कर देना बीजेपी की खासियत
नितीश कुमार की पार्टी को खत्म करने की चाल..
मोदी और शाह के अत्यंत करीबी संजय झा की दोनो बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
झा ने स्वयं सोशल मिडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए किया पोस्ट
सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन
मुंबई: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट बनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वकालत का अनुभव या किसी सीनियर के अंडर में वर्षों तपस्या करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत का मौका बहुत कम ही मिलता है लेकिन मोदी सरकार जिस पर मेहरबां हो जाए। जिस पर कृपा दृष्टि पड़ जाए तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। जेडीयू के सांसद ही नहीं कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं संजय झा और मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री भी।
कौन है संजय झा?
मोदी शाह के अत्यंत विश्वसनीय भी हैं, इसलिए उन पर विशेष कृपा दृष्टि बरस रही है क्यों कि संजय झा और अन्य मंत्री जो जेडीयू के हैं मोदी को तीसरी बार बहुमत नहीं मिलने के बावजूद जेडीयू का समर्थन मिला, लेकिन मंत्रियों को तोड़ने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी को ही खत्म करने की चाल चली गई है। सबको अपने कर्म का फल भोग मिलना निश्चित है।
सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद बगावत पर उतर कर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।बीजेपी की यही खासियत है। जिस दल के साथ गठबंधन करती है, उसे ही खत्म कर देती है। अकाली दल और शिवसेना का हश्र सभी को याद होगा। अब बारी नीतीश कुमार के जेडीयू पार्टी की है। इसीलिए सारी मान मर्यादा तोड़कर संजय झा की दो बेटियों जिनमें से एक ने 2023 में और दूसरी ने 2025 में एलएमएम किया है। जिन्हें वकालत का अनुभव भी नहीं है इनको सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति मिल चुकी है।
जिसका जिक्र स्वयं झा ने सोशल मीडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए पोस्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन है यह। इसी मुद्दे पर जेडीएस नेता ने पूछा है, कि कितने ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सुप्रीमकोर्ट में सरकार की सेवा का अवसर दिया गया है? इसके पहले भी आरएसएस विचारधारा के लोगों को बिना आई ए एस परीक्षा उत्तीर्ण हुए ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष नियुक्त कर मोदी सरकार ने जता दिया था कि उसे संविधान की मर्यादा या कोर्ट और कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है।
साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। इस सिलसिले में मुंबई पुलिस की सायबर सेल ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है।
मुंबई: साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए दक्षिण मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। जालसाजों ने वरिष्ठ नागरिक को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके लिए अपराधियों ने विडियो कॉल का भी इस्तेमाल किया और फर्जी दस्तावेजों की फोटो कॉपी दिखाई।
कैसे किया मजबूर?
जब महिला ने वीडियो कॉल मे सायबर जालसाजों को सरकारी वर्दी पहने हुए देखा तो वह घबरा गई और पहले तो वो उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश करती रही कि शायद उनसे कोई चूक हुई है। लेकिन जालसाज उनके कनेक्शन पाकिस्तान से बताने के नकली प्रमाणित दस्तावेज दिखाकर धमकाने लगे और सीधे-सीधे केस से बचने के लिए उन्हें 22.4 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
आखिरकार घबराहट के मारे पीड़ित महिला ने उनके कहे अनुसार पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर किए और राहत की सांस ली। घटना के बारे में पता चलने पर, दक्षिण साइबर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और मामले की जांच शुरू कर दी। अधिकारी इस व्यापक फर्जी जासूसी घोटाले में शामिल जालसाजों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने हालही में मराठी भाषा दिवस पर बड़ी धूमधाम से जिस स्टूडियो का उद्घाटन किया वह पहली बारिश मे गलने लगा है। इस भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए आरपीआई ने जांच की मांग की है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: गोरेगांव स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी स्टूडियो, जिसका उद्घाटन सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने मराठी भाषा दिवस पर बड़े धमाके के साथ किया था, भारी बारिश के दौरान टपकने लगा है। इसके कारण यहां की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।
फिल्मसिटी पर निकलेगा मोर्चा
स्टूडियो के निर्माण और नवीनीकरण कार्य में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के मुंबई महासचिव विशाल नावकर ने कार्य की जांच की मांग की है। यहां 2 जुलाई फिल्मसिटी पर मोर्चा निकालने का भी नावकर ने इशारा दिया है।
कौन है जिम्मेदार ?
विजय बापट, डिप्टी इंजीनियर (सिविल इंजीनियरिंग), गोरेगांव दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी में स्टूडियो नंबर 8,9,10,11 और 12 के रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण के कामों को ठेकेदार कंपनी से करवाने के लिए जिम्मेदार थे। लेकिन उन्होंने अपनी पसंद की ठेकेदार कंपनी को मरम्मत का काम दे दिया और उसी से काम कराया है। इसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए नावकर ने कहा, कि “यह काम सरकारी मानकों के अनुसार नहीं किया गया है और प्राक्कलन पत्र के प्रावधानों की भी इसमें अनदेखी की गई है।”
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के मुंबई महासचिव विशाल नावकर ने मीडिया को बताया, कि इसी वजह से इस काम में गलती हुई और कुछ ही महीनों में पहली बारिश का पानी छत से रिसाव होने लग गया। आलम ऐसा है कि पूरे स्टूडियो में पानी भर गया। उन्होंने मंगलवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, मामले की गहन जांच की भी मांग की।
नई टाइलों की जगह पूरानी लगी
हालांकि अनुमान पत्र में स्टूडियो की छत पर नई टाइलें लगाने का प्रावधान शामिल था, लेकिन नई टाइलें लगाने के बजाय पुरानी टाइलें हटा कर वापस से उन्हीं पुरानी टाइलों को फिर से लगा दी गया। इससे साफ जाहिर होता है कि पैसों की लेनदेन के खातिर जिम्मेदार डिप्टी इंजीनियर ने अपनी जवाबदेही का गलत इस्तेमाल किया है।