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  • मुंबई में MHADA फ्लैट घोटाला: 1 फ्लैट 8 लोगों के नाम

    मुंबई में MHADA फ्लैट घोटाला: 1 फ्लैट 8 लोगों के नाम

    मुंबई में MHADA फ्लैट घोटाला उजागर, एक ही फ्लैट 8 लोगों को बेचकर 1.47 करोड़ की ठगी। तीन आरोपी गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी।

    मुंबई : शहर में रियल एस्टेट से जुड़े घोटाले लगातार सामने आ रहे हैं। ताज़ा मामला गोरेगांव इलाके से जुड़ा है, जहां एक ही MHADA फ्लैट को आठ अलग-अलग लोगों को दिखाकर करीब 1.47 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    आरोपियों के नाम तुषार साटम उर्फ राजू, किरण बोडके और अशोक इंगोले बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इन तीनों ने इसी तरह और भी कई लोगों को ठगा हो सकता है। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    शिकायतकर्ता महिला के साथ 34 लाख की ठगी

    पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता महिला मालाड इलाके की रहने वाली हैं। उन्हें गोरेगांव के पहाड़ी इलाके में स्थित MHADA इमारत का एक फ्लैट दिखाया गया। आरोपियों ने बताया कि यह फ्लैट अक्षय चव्हाण नाम के शख्स के नाम पर है और इसे 47 लाख रुपए में बेचना है। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    महिला को झांसा देकर उनसे किस्तों में 34 लाख रुपए ले लिए गए। लेकिन तय समय पर न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही किसी तरह के कागज़ात सौंपे गए। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    एक फ्लैट बेचा आठ लोगों को

    जब महिला ने दबाव बनाया तो आरोपियों ने बहाने बनाने शुरू कर दिए। बाद में महिला ने जानकारी निकाली तो पता चला कि यह फ्लैट सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि सात और लोगों को बेचा गया था। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    यानि कि एक ही फ्लैट का आठ अलग-अलग खरीदारों से सौदा कर लिया गया। यह मामला सामने आने के बाद महिला ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    कुल ठगी 1.47 करोड़ रुपए तक पहुंची

    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केवल महिला से ही नहीं बल्कि अन्य सात लोगों से भी पैसे लिए थे। कुल मिलाकर इन तीनों ने आठ लोगों से 1 करोड़ 47 लाख 75 हजार रुपए वसूले थे। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    लेकिन किसी को भी फ्लैट का कब्जा नहीं मिला और न ही कोई कानूनी दस्तावेज़। इस तरह सभी पीड़ितों के साथ खुली ठगी की गई। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    पुलिस की कार्रवाई और जांच

    फिलहाल, गोरेगांव पुलिस ने इस मामले में तुषार साटम, किरण बोडके और अशोक इंगोले के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को शक है कि इन तीनों ने इस तरह के और भी सौदे किए होंगे। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    जांच अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से लोगों को फ्लैट दिखाकर और फर्जी सौदे करके पैसे ठग रहा था। इस मामले में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    रियल एस्टेट घोटालों पर सवाल

    मुंबई जैसे शहर में जहां घर लेना पहले ही आम आदमी के लिए मुश्किल है, वहां इस तरह की ठगी घटनाएं लोगों के लिए और भी परेशानी बढ़ा रही हैं। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    MHADA फ्लैट आम तौर पर आम जनता के लिए किफायती दामों में उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन फर्जी दलाल और ठग गैंग इस पर भी कब्जा जमाकर लोगों से करोड़ों वसूल रहे हैं। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    पुलिस ने लोगों को किया आगाह

    इस घटना के बाद पुलिस ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी फ्लैट या प्रॉपर्टी का सौदा करने से पहले उसके कानूनी दस्तावेज़, ओनरशिप और MHADA की ऑथेंटिकेशन ज़रूर जांच लें। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

    साथ ही किसी भी तरह के कैश ट्रांजेक्शन से बचें और पेमेंट केवल आधिकारिक चैनल से ही करें। MHADA flat scam in Mumbai: 1 flat in the name of 8 people

  • HC का अल्टीमेटम: 3 बजे तक जरांगे को आजाद मैदान खाली करना होगा

    HC का अल्टीमेटम: 3 बजे तक जरांगे को आजाद मैदान खाली करना होगा

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे और उनके समर्थकों को दोपहर 3 बजे तक आजाद मैदान खाली करने का आदेश दिया है। पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब कोर्ट की सख्ती की वजह से चर्चा में है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अहम सुनवाई में मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे और उनके समर्थकों को स्पष्ट आदेश दिया कि उन्हें दोपहर 3 बजे तक मुंबई के आजाद मैदान को खाली करना होगा।

    हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें आंदोलनकारियों पर एक्सेम्प्लरी कॉस्ट (भारी जुर्माना) और यहां तक कि कॉन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट (अवमानना) की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    कोर्ट ने क्यों दिया अल्टीमेटम?

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    आजाद मैदान मुंबई का ऐतिहासिक और संवेदनशील इलाका है, जहां अक्सर बड़े आंदोलन और प्रदर्शन होते रहते हैं। लेकिन गणेशोत्सव जैसे त्योहार और शहर की भीड़भाड़ को देखते हुए प्रशासन ने कोर्ट से अपील की थी कि आंदोलनकारियों को वहां से हटाया जाए।

    याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक कब्जा करना उचित नहीं है। कोर्ट ने आंदोलनकारियों से कहा कि वे अपनी बात रखने के लिए वैधानिक तरीके अपनाएं, लेकिन शहर की सामान्य व्यवस्था को बाधित नहीं कर सकते।

    जरांगे का आंदोलन और उसका असर

    मनोज जरांगे पिछले कई महीनों से मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सक्रिय हैं। महाराष्ट्र में यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है। जरांगे और उनके समर्थक यह मांग कर रहे हैं कि मराठा समुदाय को स्थायी रूप से शिक्षा और नौकरी में आरक्षण दिया जाए।

    जरांगे का कहना है कि मराठा समाज के साथ वर्षों से अन्याय हुआ है और अब सरकार को इसका हल निकालना ही होगा। लेकिन उनकी आंदोलन शैली—चाहे वह अनशन हो या रैली—ने कई बार प्रशासन और अदालत की चिंता बढ़ा दी है।

    हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा –
    “हमारे आदेश का पालन न करने पर आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर आप समय पर आजाद मैदान खाली नहीं करते तो अवमानना की कार्रवाई होगी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।”

    कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि अब न्यायपालिका इस आंदोलन को सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ मान रही है।

    आंदोलनकारियों में बेचैनी

    जरांगे समर्थकों में कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तेज हो गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग जायज़ है और वे इसे छोड़ने वाले नहीं हैं। लेकिन कोर्ट के सख्त रुख ने उन्हें दोराहे पर खड़ा कर दिया है।

    कुछ आंदोलनकारी मानते हैं कि जरांगे को अब आंदोलन की नई रणनीति बनानी होगी, वरना कानूनी कार्रवाई से आंदोलन कमजोर पड़ सकता है।

    राजनीति में गरमाहट

    इस फैसले का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी साफ दिख रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर आंदोलन को कोर्ट तक पहुंचाया, ताकि जरांगे की ताकत को कम किया जा सके। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश का पालन हर किसी को करना ही होगा।

    मराठा आरक्षण का मुद्दा वैसे भी राज्य की राजनीति में लंबे समय से अहम भूमिका निभाता रहा है। अब कोर्ट की सख्ती के बाद इस पर नया राजनीतिक संग्राम छिड़ सकता है।

    जनता की प्रतिक्रिया

    मुंबई और महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों का कहना है कि आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अगर इससे आम जनता की जिंदगी प्रभावित होती है तो सरकार और कोर्ट को कदम उठाना ही चाहिए। वहीं, मराठा समाज से जुड़े लोग मानते हैं कि जरांगे की लड़ाई वैध है और कोर्ट को आंदोलनकारियों के साथ थोड़ा नरमी बरतनी चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जरांगे और उनके समर्थक कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे या टकराव का रास्ता अपनाएंगे। अगर उन्होंने आदेश मानकर आजाद मैदान खाली किया, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। और अगर आदेश का उल्लंघन किया, तो कोर्ट की कार्रवाई से आंदोलन को बड़ा झटका लग सकता है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट का यह अल्टीमेटम मराठा आंदोलन के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। एक ओर जरांगे और उनके समर्थकों के सामने आरक्षण की मांग का सवाल है, तो दूसरी ओर अदालत और प्रशासन की सख्ती है।

    यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में मराठा आंदोलन किस दिशा में जाता है। लेकिन इतना तय है कि कोर्ट का यह आदेश महाराष्ट्र की राजनीति और समाज दोनों पर गहरा असर छोड़ने वाला है।

  • मोहन भागवत के वानप्रस्थ का समय आ गया है- तुषार गांधी

    मोहन भागवत के वानप्रस्थ का समय आ गया है- तुषार गांधी

    महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने नागपुर में कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है और अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है। साथ ही बिहार की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया।

    नागपुर: महात्मा गांधी के परपोते और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी ने नागपुर में ऐसा बयान दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधते हुए कहा कि, “अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है।” The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    दरअसल कुछ दिनों पहले मोहन भागवत ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह काम ऋषि-मुनियों ने पहले ही कर दिया था। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तुषार गांधी ने व्यंग्य किया और कहा कि भागवत जी की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है, इसलिए अब उन्हें वानप्रस्थ की ओर बढ़ना चाहिए।

    गांधी परिवार और संघ की खींचतान

    यह पहली बार नहीं है जब तुषार गांधी ने संघ या उसके नेताओं को लेकर बयान दिया हो। लंबे समय से गांधी परिवार और संघ विचारधारा के बीच टकराव की स्थिति रही है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद से ही आरएसएस और गांधी परिवार के रिश्ते तल्ख़ रहे हैं। नागपुर में दिए गए इस बयान ने एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है।

    बिहार राजनीति पर तुषार गांधी का बड़ा बयान

    नागपुर दौरे पर तुषार गांधी सिर्फ मोहन भागवत तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने बिहार में चल रही राहुल गांधी की यात्रा और वहां उठ रहे मुद्दों पर भी बात की।
    उन्होंने कहा – “बिहार के गांवों में बच्चों और आम लोगों के मुंह से एक ही नारा सुनाई दे रहा है – ‘वोट चोर गद्दी छोड़।’ ये नारा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिंदुस्तान में गूंजेगा।”

    तुषार गांधी के मुताबिक, बिहार के लोग इस बार बदलाव चाहते हैं। वहां के माहौल में एक बेचैनी है और लोग वोट चोरी के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। उन्होंने इसे एक बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    वानप्रस्थ टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?

    भारतीय परंपरा में वानप्रस्थ का मतलब जीवन के तीसरे चरण से है, जब इंसान सांसारिक मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ता है। तुषार गांधी ने जब मोहन भागवत के लिए वानप्रस्थ का जिक्र किया, तो इसे सिर्फ धार्मिक व्याख्या नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।

    राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी संघ की भूमिका और भागवत की सक्रियता पर सवाल उठाती है। यह कहना कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है” सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि उन्हें अब सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक बयानों से दूरी बना लेनी चाहिए। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    बिहार से हिंदुस्तान तक जाएगा मुद्दा

    तुषार गांधी ने आगे कहा कि बिहार में लोगों का गुस्सा अब साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा में उन्होंने खुद यह अनुभव किया कि गांव-गांव के लोग वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

    उन्होंने कहा –
    “हमने एक दिन की यात्रा में यह देखा कि बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी के मुंह से एक ही आवाज आ रही थी। यह नारा इतना बड़ा होगा कि बिहार से निकलकर पूरे हिंदुस्तान में फैलेगा।”

    परिवर्तन की उम्मीद

    तुषार गांधी ने कहा कि जनता के मन में बदलाव की उम्मीद है। उन्होंने इसे गांधीवादी आंदोलन की तर्ज पर जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बताया। उनके अनुसार, बिहार का यह मुद्दा धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है और 2025 के राजनीतिक समीकरण पर बड़ा असर डाल सकता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    नागपुर क्यों खास?

    तुषार गांधी का यह बयान नागपुर से आया, जो संघ (आरएसएस) का मुख्यालय है। इस वजह से यह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। नागपुर से दिया गया हर बयान राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर गूंजता है।

    महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का यह बयान आने वाले समय में बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।
    एक तरफ उन्होंने मोहन भागवत पर तंज कसा कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है”, वहीं दूसरी ओर बिहार की राजनीति में उठ रही वोट चोरी की गूंज को देशव्यापी मुद्दा बताया।

    राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इस बयान के पीछे गहरा राजनीतिक संदेश छिपा है। यह न सिर्फ संघ और गांधी परिवार की पुरानी खींचतान को सामने लाता है, बल्कि देश की राजनीति में बढ़ते असंतोष और बदलाव की मांग को भी रेखांकित करता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

  • अमेरिकी टैक्स से मुंबई सीफूड इंडस्ट्री पर बड़ा संकट

    अमेरिकी टैक्स से मुंबई सीफूड इंडस्ट्री पर बड़ा संकट

    अमेरिका ने भारतीय फ्रोजन सीफूड पर 50% टैक्स लगाया है। इससे मुंबई की ससून डॉक मछली इंडस्ट्री, मछुआरे और प्रॉन्स छीलने वाले हजारों मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: अमेरिका ने भारतीय फ्रोजन सीफूड पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाकर 50% कर दिया है। अभी तक यह ड्यूटी 10% थी, जिसे अगस्त की शुरुआत में पहले 25% और अब सीधे 50% कर दिया गया है। इस फैसले ने मुंबई की ससून डॉक सीफूड इंडस्ट्री और यहां काम करने वाले हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है।

    ससून डॉक, जो मुंबई का सबसे बड़ा और व्यस्त मछली बाजार माना जाता है, वहां इन दिनों बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। आम दिनों की तरह मछलियों की लोडिंग, नीलामी और प्रोसेसिंग तो हो रही है, लेकिन व्यापारियों और मजदूरों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।

    संकट की जड़ क्या है?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने यह नया टैक्स लगाया है। इसका सीधा असर उन मछुआरों, व्यापारियों और मजदूरों पर पड़ने वाला है जो सालों से इस इंडस्ट्री से अपनी जीविका चलाते आ रहे हैं। ससून डॉक से रोज़ाना करीब 30 टन प्रॉन्स अमेरिका और चीन जैसे देशों में एक्सपोर्ट होते हैं। लेकिन बढ़े हुए टैक्स की वजह से अब अमेरिकी खरीदार भारतीय सीफूड की कीमत कम करने की मांग करेंगे।

    मछुआरों की मुश्किलें

    मरीन प्रॉडक्ट्स ऑक्शनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वसंत भुचाडे का कहना है –
    “अगर भारतीय सरकार ने इस टैक्स का हल नहीं निकाला तो एक्सपोर्टर्स मछुआरों को कम दाम देंगे। पहले जहां झींगा मछली (प्रॉन्स) की कीमत ₹300 प्रति किलो थी, वहीं अब यह ₹225-₹250 तक गिर सकती है। ऐसे में मछुआरे समुद्र में जाने से कतराएंगे, और पूरी इंडस्ट्री पर असर होगा।”

    एक ट्रॉलर की 8-10 दिन की मछली पकड़ने की लागत करीब ₹4 लाख आती है। इसमें डीज़ल, बर्फ और मजदूरी का खर्च शामिल है। अगर कीमतें गिरीं, तो मछुआरे घाटे में चले जाएंगे।

    महिलाओं की रोज़ी-रोटी पर भी असर

    ससून डॉक में करीब 12,000 महिलाएं प्रॉन्स छीलने का काम करती हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं रोज़ 12 घंटे मेहनत करके लगभग ₹600 कमाती हैं। लेकिन अगर मछुआरे प्रॉन्स पकड़ना बंद कर देंगे तो इन महिलाओं की रोज़ी-रोटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

    जयश्री नाम की एक महिला बताती हैं –
    “अगर मछुआरे प्रॉन्स पकड़ना बंद करेंगे तो हमारे पास काम नहीं रहेगा। हमारी पूरी कमाई इसी पर निर्भर है।” Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

    आगे का रास्ता क्या?

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सरकार को तुरंत अमेरिका से इस मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। वरना यह संकट केवल मछुआरों और मजदूरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी मुंबई सीफूड इंडस्ट्री और उससे जुड़े कारोबार को खत्म कर सकता है।

  • जरांगे पाटील आंदोलन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी, मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी

    जरांगे पाटील आंदोलन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी, मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी

    मुंबई प्रेस क्लब और टीवीजेए ने जरांगे पाटील समर्थकों पर महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप लगाया, कार्रवाई नहीं हुई तो मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    मुंबई | मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच मुंबई प्रेस क्लब और टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (TVJA) ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि आज़ाद मैदान पर मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ लगातार बदसलूकी और छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं से नाराज़ मीडिया संगठनों ने जरांगे पाटील को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो मीडिया संस्थान आंदोलन की कवरेज का बॉयकॉट कर सकते हैं। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    📌 प्रेस क्लब और टीवीजेए का कड़ा बयान

    मुंबई प्रेस क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में कहा,
    “हम महिला पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के साथ हो रही बदसलूकी, धमकी और अपमानजनक व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने भी जरांगे पाटील को लिखे पत्र में गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि रिपोर्टरों और कैमरामैन को लगातार अपशब्द, धक्कामुक्की और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    📌 जरांगे पाटील का रुख और विवादित बयान

    टीवीजेए के अध्यक्ष उदय जाधव ने बताया कि जब संगठन ने यह शिकायत जरांगे पाटील के सामने रखी तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था।
    जरांगे पाटील ने कहा, “आप लोग यहां मेहमान हैं, कुछ दिन एडजस्ट कर लीजिए।”

    इस बयान पर पत्रकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि आखिर महिला पत्रकारों को “एडजस्ट” क्यों करना चाहिए, जब आंदोलन में शामिल लोग ही उनकी सुरक्षा और सम्मान को चुनौती दे रहे हैं। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

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    आंदोलन की ताज़ा तस्वीर

    📌 आंदोलन की पृष्ठभूमि

    मनोज जरांगे पाटील पिछले कई महीनों से मराठा समाज को ओबीसी कोटा दिलाने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका प्रमुख आग्रह है कि मराठवाड़ा क्षेत्र के सभी मराठाओं को “कुनबी” दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।

    जरांगे पाटील ने राज्य सरकार से मांग की है कि हैदराबाद और सतारा गैजेट्स में दर्ज मराठाओं को तुरंत कुनबी प्रमाणपत्र जारी किया जाए। साथ ही उन्होंने औंध और बॉम्बे गैजेट्स में दर्ज नामों को भी इस श्रेणी में शामिल करने की बात कही है।

    📌 मीडिया का अल्टीमेटम

    पत्रकार संगठनों ने साफ कहा है कि अगर जरांगे पाटील और उनकी टीम ने आंदोलन स्थल पर अनुशासन नहीं बनाए रखा और पत्रकारों, खासकर महिला रिपोर्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो मजबूरन मीडिया संस्थान कवरेज से पीछे हट जाएंगे।

    मुंबई प्रेस क्लब ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि “प्रेस की आज़ादी और महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

  • स्मार्ट कैमरे चालान काट सकते हैं, तो गड्ढे क्यों नहीं दिखते?

    स्मार्ट कैमरे चालान काट सकते हैं, तो गड्ढे क्यों नहीं दिखते?

    मुंबई की सड़कों पर स्मार्ट कैमरे चालान काटने में तेज हैं, लेकिन गड्ढों और टूटी सड़कों की हकीकत नहीं पकड़ते। असली सुरक्षा सड़क मरम्मत में है।

    मुंबई शहर में ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए स्मार्ट कैमरे अब हर जगह लगाए गए हैं। ये कैमरे हेलमेट न पहनने वाले बाइक सवारों से लेकर सिग्नल तोड़ने वाली गाड़ियों तक, हर गलती को रिकॉर्ड करते हैं और तुरंत चालान जेनरेट कर देते हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि यही कैमरे शहर की सड़कों पर मौजूद गड्ढों और खतरनाक हालात को बिल्कुल नहीं पकड़ते। सवाल उठता है – क्या सड़क सुरक्षा सिर्फ चालान काटने तक सीमित है, या फिर उन गड्ढों को भरना भी उतना ही जरूरी है जिनसे रोज़ाना हजारों लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं?

    Challan-System-Mumbai

    🚦 चालान में तेजी, मरम्मत में देरी

    मुंबई में रोज़ाना हजारों गाड़ियों पर चालान काटे जाते हैं। सरकार और ट्रैफिक पुलिस दावा करती है कि इससे सड़क पर अनुशासन और सुरक्षा बनी रहती है। लेकिन दूसरी तरफ हकीकत ये है कि सड़कों पर मौजूद गहरे गड्ढे और टूटी सड़कों के कारण दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। गड्ढों से गिरकर बाइक सवारों की मौत की खबरें आए दिन अखबारों में छपती हैं। If smart cameras can issue challans, then why can’t they see the potholes?

    🛑 गड्ढों का खतरा चालान से बड़ा

    अगर देखा जाए तो बिना हेलमेट बाइक चलाना या लालबत्ती पार करना खतरनाक है, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक है सड़क पर मौजूद गड्ढे। बरसात में ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और गाड़ी चलाते वक्त बिल्कुल भी नजर नहीं आते। नतीजा – हादसा। कई बार तो चालान भरकर घर लौटते वक्त ही लोग इन गड्ढों की वजह से अस्पताल पहुंच जाते हैं। If smart cameras can issue challans, then why can’t they see the potholes?

    🤔 स्मार्ट कैमरे क्यों नहीं पकड़ते गड्ढे?

    तकनीक इतनी विकसित है कि नंबर प्लेट पहचानने से लेकर ओवरस्पीड पकड़ने तक सबकुछ संभव है। तो फिर गड्ढों और टूटी सड़कों को पहचानने की टेक्नोलॉजी क्यों इस्तेमाल नहीं होती? अगर कैमरे इन गड्ढों का डेटा कलेक्ट करके BMC या संबंधित विभाग तक पहुंचा सकें तो सड़क मरम्मत जल्दी हो सकती है। If smart cameras can issue challans, then why can’t they see the potholes?

    📉 सिर्फ चालान से नहीं बढ़ेगी सुरक्षा

    ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन असली सुरक्षा तभी मिलेगी जब सड़कें भी सुरक्षित होंगी। सिर्फ चालान काटने से जनता की सुरक्षा नहीं होगी। जरूरी है कि सरकार और नगर निगम मिलकर कैमरों को सड़क सर्वे के लिए भी इस्तेमाल करें। If smart cameras can issue challans, then why can’t they see the potholes?

    💡 समाधान क्या है?

    • स्मार्ट कैमरों को AI सिस्टम से जोड़कर गड्ढों की पहचान करना।
    • चालान के साथ-साथ गड्ढों की रिपोर्टिंग का सिस्टम बनाना।
    • सड़क मरम्मत के लिए समयबद्ध प्लान बनाना।
    • ट्रैफिक सुरक्षा और सड़क सुरक्षा को बराबर महत्व देना।
  • मराठा आरक्षण आंदोलन से मुंबई कारोबारियों को भारी नुकसान

    मराठा आरक्षण आंदोलन से मुंबई कारोबारियों को भारी नुकसान

    मराठा आरक्षण आंदोलन से दक्षिण मुंबई में यातायात ठप हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि भीड़ और अफरा-तफरी से व्यापार पर गहरा असर पड़ा है, सरकार से हस्तक्षेप की मांग।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का असर अब व्यापारियों और कारोबार पर गहराई से दिखाई देने लगा है। दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में मनोज जरांगे के नेतृत्व में हो रहे आंदोलन के कारण सड़कों पर भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम ने कारोबारी गतिविधियों को ठप कर दिया है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA) के अध्यक्ष वीरन शाह ने कहा कि “आज़ाद मैदान के आसपास का इलाका पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुका है। सड़कों पर जाम, पुलिस की नाकाबंदी और बढ़ती भीड़ के चलते कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही तो व्यापार पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।” Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    आंदोलन से शहर की रफ्तार थमी

    पिछले दो दिनों से मुंबई लगातार बारिश और मराठा आंदोलन की वजह से जाम की मार झेल रही है। खासकर CST, फोर्ट, मरीन लाइन्स और कोलाबा जैसे इलाकों में ट्रैफिक जाम और दुकानों पर कम ग्राहकों की आवक ने कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि भीड़ और अव्यवस्था के कारण लोग खरीदारी के लिए बाजार तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    व्यापारियों का सरकार से निवेदन

    FRTWA समेत कई व्यापारी संगठनों ने सरकार से अपील की है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों की मांगें जायज़ हो सकती हैं लेकिन इस दौरान दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों को ठप होने से रोकना भी ज़रूरी है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    वीरन शाह ने साफ कहा कि “हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि आंदोलन को संवाद और चर्चा के ज़रिए हल किया जाए। व्यापारी और आम जनता रोज़ाना लाखों का नुकसान झेल रही है। सिर्फ यातायात ही नहीं बल्कि होटलों, रेस्टोरेंट्स और रिटेल दुकानों की बिक्री भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।” Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या

    आज़ाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के आसपास रोज़ाना हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो रहे हैं। इससे न सिर्फ ट्रैफिक ठप हो रहा है बल्कि सुरक्षा कारणों से कई दुकानों को बंद रखने की नौबत भी आ गई है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    प्रदर्शनकारियों ने यहां डेरा जमा लिया है और कई लोग सड़क किनारे खाना बना रहे हैं। इससे इलाके का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    पुलिस और प्रशासन की चुनौती

    मुंबई पुलिस और BMC के लिए भीड़ को नियंत्रित करना और व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस लगातार ट्रैफिक डायवर्ट कर रही है लेकिन इसके बावजूद दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    आंदोलन और आर्थिक नुकसान

    व्यापारियों का कहना है कि इस आंदोलन से रोज़ाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। कई व्यापारी संगठनों ने अंदेशा जताया है कि अगर आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ हुआ तो दक्षिण मुंबई की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    नतीजा

    मराठा आरक्षण आंदोलन जहां एक तरफ समुदाय के अधिकारों की लड़ाई है, वहीं दूसरी ओर इसका असर मुंबई के आम नागरिकों और व्यापार पर भी साफ देखा जा रहा है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ आंदोलनकारियों की मांगों को पूरा करना और दूसरी ओर शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखना। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

  • पवित्र रिश्ता फेम प्रिया मराठे का 38 साल की उम्र में निधन

    पवित्र रिश्ता फेम प्रिया मराठे का 38 साल की उम्र में निधन

    टीवी और मराठी फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री प्रिया मराठे का 38 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। ‘पवित्र रिश्ता’ में निभाए गए उनके किरदार को आज भी दर्शक याद करते हैं। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    मुंबई: मराठी और हिंदी टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री प्रिया मराठे का 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वह पिछले एक साल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। 31 अगस्त 2025, रविवार को उन्होंने मुंबई से सटे मीरा रोड स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    प्रिया मराठे ने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर मराठी और हिंदी टीवी इंडस्ट्री में एक खास पहचान बनाई थी। उन्हें ज़्यादातर लोग ‘पवित्र रिश्ता’ सीरियल में निभाए गए ‘वर्षा’ के किरदार से पहचानते हैं। इस शो में दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अंकिता लोखंडे भी मुख्य भूमिकाओं में थे। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    प्रिया मराठे का शुरुआती जीवन और करियर

    प्रिया का जन्म 23 अप्रैल 1987 को मुंबई में हुआ था। पढ़ाई-लिखाई यहीं से पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में वह स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में जानी जाती थीं। इसके बाद उन्होंने मराठी सीरियल्स में काम करना शुरू किया। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    उनका पहला मराठी सीरियल ‘या सुखानंया’ था, जिसके बाद उन्होंने ‘चार दिवस सासूचे’ जैसे शो में भी काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी जगह बनाई। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    ‘पवित्र रिश्ता’ से मिली पहचान

    प्रिया मराठे को असली पहचान ‘पवित्र रिश्ता’ से मिली। इस सीरियल में उन्होंने वर्षा का किरदार निभाया, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। उनकी एक्टिंग में गहराई और सच्चाई झलकती थी, जिस वजह से लोग उनके किरदार से भावनात्मक रूप से जुड़ गए। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    अन्य टीवी शो और किरदार

    ‘पवित्र रिश्ता’ के अलावा प्रिया ने कई पॉपुलर टीवी शोज़ में काम किया।

    • उन्होंने ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ में ज्योति मल्होत्रा का किरदार निभाया।
    • मराठी सीरियल ‘तू तिथे मी’ में प्रिया मोहते का नेगेटिव रोल किया।
    • साल 2017 में उन्होंने स्टार प्लस के शो ‘साथ निभाना साथिया’ में भावनी राठौड़ का किरदार निभाया, जिसमें वह एक खलनायिका बनीं।

    उनके अभिनय में विविधता देखने को मिलती थी – कॉमिक रोल से लेकर नेगेटिव किरदार तक उन्होंने हर भूमिका को जीवंत कर दिया। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    निजी जीवन

    प्रिया मराठे का विवाह 24 अप्रैल 2012 को अभिनेता शंतनु मोगे से हुआ था। शंतनु ने भी मराठी सीरियल ‘स्वराज्य रक्षक संभाजी’ में अहम भूमिका निभाई थी। दोनों का रिश्ता इंडस्ट्री में एक आदर्श जोड़ी के रूप में देखा जाता था। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    कैंसर से संघर्ष

    पिछले एक साल से प्रिया कैंसर से जूझ रही थीं। इलाज के दौरान भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सकारात्मक बनी रहीं। लेकिन बीमारी ने अंततः उनकी ज़िंदगी छीन ली। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

    इंडस्ट्री में शोक

    प्रिया मराठे के निधन से मराठी और हिंदी टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनके को-स्टार्स, दोस्त और फैन्स सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। लोग उन्हें एक टैलेंटेड, सादगीभरी और मिलनसार इंसान के रूप में याद कर रहे हैं।

    उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा और उनके निभाए किरदार आने वाले सालों तक दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे। Pavitra Rishta fame Priya Marathe dies at the age of 38

  • मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई में प्रदर्शनकारियों को पानी-भोजन की कमी

    मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई में प्रदर्शनकारियों को पानी-भोजन की कमी

    मुंबई के आज़ाद मैदान में मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों को बारिश, भोजन और पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है, जबकि BMC सुविधाओं का दावा कर रही है।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आज़ाद मैदान में चल रहा आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है। उनका मुख्य आग्रह है कि मराठा समुदाय को OBC श्रेणी में 10% आरक्षण दिया जाए। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    तेज़ बारिश और खराब मौसम ने प्रदर्शनकारियों की परेशानी बढ़ा दी है। कई लोग ट्रेन और बस से मुंबई पहुँचे हैं, लेकिन उन्हें भोजन, पानी और रहने की जगह की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के आसपास सड़क किनारे डेरा जमाए बैठे हैं और खुद ही खाना पकाने को मजबूर हैं। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल के आसपास की दुकानें और होटल बंद करा दिए गए हैं। उनका कहना है कि सरकार और BMC ने जानबूझकर भोजन और पानी की आपूर्ति रोक दी है। वहीं दूसरी तरफ, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने दावा किया है कि सभी जरूरी इंतज़ाम किए गए हैं। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    BMC के अनुसार –

    • 11 पानी के टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं।
    • 29 मुफ्त शौचालय मैदान में खोले गए हैं।
    • मोबाइल और पोर्टेबल टॉयलेट्स आसपास लगाए गए हैं।
    • गड्ढों में भरे पानी को सुखाने के लिए दो ट्रक बजरी मैदान में डाली गई है।
    • चिकित्सा सहायता केंद्र, चार मेडिकल टीम और दो एम्बुलेंस 24 घंटे तैनात हैं।
    • मैदान में अंधेरा न रहे, इसके लिए हाई इंटेंसिटी फ्लडलाइट्स लगाई गई हैं।

    इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हालात ज़मीनी स्तर पर अलग हैं। भोजन-पानी की वास्तविक कमी और शौचालयों की बदहाल स्थिति के चलते आंदोलनकारियों में गुस्सा है। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    मनोज जरांगे ने मीडिया से बात करते हुए कहा –
    “BMC प्रशासन मुख्यमंत्री के दबाव में काम कर रहा है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी रोक दिया है। गरीब मराठाओं को परेशान किया जा रहा है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”

    मुंबई पुलिस और प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, आंदोलन और तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कांदिवली ईस्ट में सोसायटी ने अवैध दीवार खड़ी कर बंद किया पदमार्ग, रहवासी भड़के

    कांदिवली ईस्ट में सोसायटी ने अवैध दीवार खड़ी कर बंद किया पदमार्ग, रहवासी भड़के

    मुंबई के कांदिवली ईस्ट में आम्रपाली सोसायटी के पदमार्ग पर अवैध दीवार बनाकर बंद कर दिया गया है। जिससे छात्रों, बुजुर्गों और भक्तों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    मुंबई: कांदिवली पूर्व इलाके में रहने वाले आम्रपाली और निलकंठ सोसायटी के नागरिक पिछले एक महीने से बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। वजह यह है कि उनकी रोजमर्रा की पायवाट, जो नवरंगवाड़ी मोहन बावडी और आस-पास के इलाकों को जोड़ती थी, उसे हनुमान नगर और समर्थनगर एसआरए इमारत के कुछ लोगों ने अवैध तरीके से बंद कर दिया है। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

    लगभग 100 साल पूराना यह पदमार्ग इलाके के हजारों नागरिकों के लिए एकमात्र शॉर्टकट रास्ता था। लेकिन अब यहां ८ से १० फुट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर मारकर अपने गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

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    ✦ सबसे ज्यादा असर आम जनता पर

    इस बंद पदमार्ग का सबसे ज्यादा असर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों पर पड़ा है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे रोज लेट हो रहे हैं। वहीं बुजुर्ग और महिलाएं मंदिर दर्शन या खरीदारी के लिए जाने में दिक्कत झेल रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दीवार पूरी तरह गैरकानूनी है और इसे तुरंत हटाना चाहिए। नागरिकों ने पहले ही बीएमसी आर. दक्षिण विभाग, समता नगर पुलिस स्टेशन और लोकल कॉर्पोरेटर को लिखित शिकायत दी है। मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

    ✦ धार्मिक स्थल तक पहुंच भी बाधित

    इस पदमार्ग के रास्ते में हनुमान मंदिर, महादेव मंदिर, साईं बाबा मंदिर और माताजी मंदिर आने जाने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। हर रोज सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए जाते थे। लेकिन दीवार खड़ी होने के बाद मंदिर जाने का रास्ता लंबा और असुविधाजनक हो गया है। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

    ✦ गणेशोत्सव पर भारी असर

    नागरिकों ने बताया कि इस विवाद का असर गणेशोत्सव पर भी पड़ा। आम्रपाली और निलकंठ सोसायटी के गणेश मंडलों को गणपति की स्थापना और पूजा के दौरान लंबे फेर से जाना पड़ा। अब विसर्जन के वक्त भी यही समस्या बनी रहेगी।
    स्थानीय निवासी मंगेश आंबुलकर ने कहा कि “गणेशोत्सव मुंबई का सबसे बड़ा त्योहार है और इस मौके पर नागरिकों को परेशान करना बिल्कुल गलत है। पालिका को तुरंत रास्ता खुलवाना चाहिए।” Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

    ✦ बीएमसी का रुख

    आर. दक्षिण विभाग के सहायक आयुक्त मनीष साळवे का कहना है कि परिरक्षण विभाग से अधिकारी भेजकर मौके की जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन नागरिकों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है, जमीनी कार्रवाई नहीं। जब हमने कांदीवली बीएमसी मेंटेनस विभाग के कनिष्ठ अभियंता अनिरुद्ध पिंजरकर से बात की तो उन्होंने गणेशोत्सव का हवाला देकर अपना हाथ झटक लिया। जबकि पिछले एक महिने से रहिवासी बीएमसी का चक्कर काट रहे हैं। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry

    ✦ नागरिकों में गुस्सा

    लोगों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई से अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। अगर पालिका और पुलिस ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो भविष्य में बड़े विवाद खड़े हो सकते हैं। Society in Kandivali East blocked the footpath by building an illegal wall, residents got angry