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  • मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

    मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

    गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

    🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
    कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

    हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

    🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

    हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
    इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

    🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

    याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
    कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
    यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

    💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

    हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
    इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
    यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

    ⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

    वकील ने कहा,

    “ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

    उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

    • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
    • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
    • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

    ❓FAQs

    Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

    Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
    कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

    Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
    नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

    Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
    तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

    Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
    यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

  • बाइक सवारों के लिए राहत! अब बिना हेलमेट चालान में बड़ा बदलाव

    बाइक सवारों के लिए राहत! अब बिना हेलमेट चालान में बड़ा बदलाव

    बिना हेलमेट बाइक चलाने पर अब चालान की प्रक्रिया बदली जाएगी। ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने ई-चालान सिस्टम शुरू किया है, जो AI कैमरों से चालान जनरेट करेगा। जानिए नया नियम क्या कहता है और किन शहरों में लागू हुआ है।

    नई दिल्ली: भारत में बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने बिना हेलमेट चालान से जुड़े नियमों में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। अब से चालान सीधे मौके पर नहीं, बल्कि ई-चालान सिस्टम के जरिए काटा जाएगा।

    इस बदलाव का मकसद ट्रैफिक सिस्टम को ज़्यादा पारदर्शी, स्मार्ट और रिश्वत-मुक्त बनाना है। हालांकि हेलमेट पहनना अब भी अनिवार्य रहेगा।

    ⚙️ नया नियम क्या कहता है?

    अब ट्रैफिक पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काटने की बजाय AI-सक्षम कैमरा सिस्टम पर निर्भर होगी। अगर किसी सड़क या चौराहे पर CCTV या ट्रैफिक कैमरा लगा है और किसी बाइक सवार ने बिना हेलमेट वाहन चलाया, तो सिस्टम वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर चालान अपने आप जनरेट कर देगा

    ➡️ यानी कि अगर कैमरा कवरेज है, तो चालान ऑटोमेटिक होगा।
    ➡️ अगर कैमरा नहीं है, तो ट्रैफिक पुलिस मौके पर चालान काट सकती है।

    🪖 हेलमेट की अनिवार्यता अब भी बरकरार

    नए नियम का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बिना हेलमेट चलाना अब छूट गया है।
    मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत, बाइक चालक और पीछे बैठने वाला दोनों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। अगर आप बिना हेलमेट पकड़े गए, तो चालान तो कटेगा ही — बस तरीका अब डिजिटल होगा।

    🎥 अब चालान तय करेंगे AI कैमरे

    देशभर के कई शहरों में हाईटेक AI ट्रैफिक कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे न सिर्फ बिना हेलमेट बल्कि सीट बेल्ट, रेड लाइट जंप, मोबाइल यूज़ जैसे उल्लंघनों को भी पहचान सकते हैं।

    इन कैमरों से

    • वाहन की नंबर प्लेट स्कैन होती है
    • सिस्टम डेटा को ट्रैफिक सर्वर भेजता है
    • और ई-चालान सीधे वाहन मालिक के नाम जारी होता है

    इससे भ्रष्टाचार, झगड़े और गलत चालान की संभावना खत्म हो जाती है।

    🏙️ किन राज्यों में लागू हुआ नया ई-चालान सिस्टम?

    फिलहाल यह सिस्टम देश के कई बड़े शहरों में शुरू किया जा चुका है—
    📍 दिल्ली
    📍 लखनऊ
    📍 भोपाल
    📍 पुणे
    📍 जयपुर
    📍 अहमदाबाद

    अब धीरे-धीरे इसे छोटे शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर भी लागू किया जा रहा है।

    ⚠️ सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर

    सरकार का लक्ष्य सिर्फ चालान बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है।
    सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें बिना हेलमेट के होती हैं।
    AI आधारित सिस्टम से अब यह पता लगाना आसान होगा कि किसने नियम तोड़े, और यह सब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के होगा।


    ❓FAQs

    Q1. क्या अब बिना हेलमेट चलाने पर चालान नहीं कटेगा?
    चालान अभी भी कटेगा, लेकिन अब यह ऑटोमेटिक ई-चालान सिस्टम से कैमरा मॉनिटरिंग के जरिए होगा।

    Q2. क्या हेलमेट पहनना अब वैकल्पिक हो गया है?
    नहीं, हेलमेट अब भी जरूरी है। बिना हेलमेट बाइक चलाना अभी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन है।

    Q3. किन शहरों में यह नया सिस्टम लागू हुआ है?
    दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, पुणे, जयपुर और अहमदाबाद में यह सिस्टम सक्रिय है।

    Q4. क्या पुलिस अब चालान नहीं काटेगी?
    जहां कैमरा कवरेज नहीं है, वहां पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काट सकती है।

    Q5. क्या इससे गलत चालान की संभावना कम होगी?
    हां, क्योंकि यह सिस्टम AI आधारित है और मानवीय त्रुटियों या पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहती।

  • दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्त लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये का चेक सौंपा। अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वर्षा निवास पर मुलाकात की।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: मालाड़ पूर्व स्थित दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मराठवाड़ा और विदर्भ में आए हालिया बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। भाजपा के पूर्व नगरसेवक एवं बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने बैंक की ओर से मुख्यमंत्री सहायता निधि (Chief Minister Relief Fund) में ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का चेक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा।

    🙏 मुख्यमंत्री से वर्षा निवास पर मुलाकात

    इस अवसर पर भाजपा के मुंबई महानगरपालिका नेता और पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने वर्षा निवास पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को दीवाली की शुभकामनाएं भी दीं। मुलाकात के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी मौजूद थे।

    🌊 मराठवाड़ा और विदर्भ में बाढ़ से नुकसान

    हाल ही में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और बाढ़ से कई परिवारों को नुकसान झेलना पड़ा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, घर क्षतिग्रस्त हुए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे में मालाड सहकारी बैंक का यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि निजी संस्थाएं भी आपदा के समय सरकार के साथ खड़ी हैं।

    🏦 बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड मुंबई की एक पुरानी और भरोसेमंद वित्तीय संस्था है, जो समाजसेवा में भी सक्रिय रहती है। बैंक ने पहले भी शिक्षा सहायता, चिकित्सा सहायता और सामाजिक अभियानों में सहयोग दिया है। इस बार बैंक ने पूरग्रस्तों की मदद कर सामाजिक दायित्व निभाने का एक और उदाहरण पेश किया है।

    🌟 सीएम फडणवीस ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी मालाड सहकारी बैंक और अध्यक्ष विनोद मिश्रा का धन्यवाद किया और कहा कि समाज के सभी घटक यदि ऐसे ही एकजुट होकर योगदान दें, तो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद तेज़ी से संभव हो सकेगी।


    ❓FAQs

    Q1. दी मालाड सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में कितनी राशि दी?
    बैंक ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्तों की मदद के लिए 5 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री सहायता निधि में सौंपा।

    Q2. चेक किसे सौंपा गया?
    बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वर्षा निवास पर चेक सौंपा।

    Q3. इस अवसर पर और कौन मौजूद थे?
    इस मौके पर भाजपा युवा मोर्चा के माजी जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी उपस्थित थे।

    Q4. पूरग्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
    मुख्य रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।

  • विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या को देखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के 13.4 मीटर चौड़े DP रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग की है।

    मुंबई: मालाड़ पूर्व के दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले आप्पापाडा इलाके में सड़कों की चौड़ाई बहुत कम होने से रोज़ाना ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है। नागरिकों को ऑफिस या काम के स्थान तक पहुँचने में काफी देरी होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के प्रस्तावित 13.4 मीटर चौड़े विकास नियोजन (DP) रोड को “वाइटल प्रोजेक्ट (Vital Project)” घोषित करने की मांग की है।

    🏙️ आप्पापाडा क्षेत्र में सड़कें संकरी, ट्रैफिक जाम आम

    दिंडोशी के आप्पापाडा, गोकुलनगर और आसपास के इलाकों में सड़कें बेहद संकरी हैं। पश्चिम द्रुतगती महामार्ग (Western Express Highway) से इन इलाकों की दूरी ज्यादा होने के कारण यहां ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। इस कारण लोगों को समय पर ऑफिस या स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    🏗️ समानांतर रोड से पश्चिम उपनगरों को मिलेगी राहत

    प्रभु ने कहा है कि बोरीवली और लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों से जोड़ने वाला पश्चिम द्रुतगती महामार्ग के समानांतर रोड बेहद ज़रूरी है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक लोड कम होगा बल्कि नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

    🌊 पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प भी इससे जुड़ा

    आप्पापाडा क्षेत्र में पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प (Poisar River Rejuvenation Project) पहले से ही चल रहा है और इसे पहले से ही “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया गया है। लेकिन इस प्रकल्प के तहत बनने वाले सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP) और मलनिस्सारण वाहिनियां (Drainage pipelines) जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए सड़क (access road) उपलब्ध नहीं है।

    प्रभु का कहना है कि अगर 13.4 मीटर चौड़ा डीपी रोड तत्काल बनाया गया और उसे वाइटल प्रोजेक्ट घोषित किया गया, तो बीएमसी के इन अधूरे कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

    🏛️ बीएमसी और सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

    प्रभु ने मांग की है कि इस सड़क को प्राथमिकता (priority) पर लेकर इसे “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया जाए। इससे न केवल बीएमसी के कामों को गति मिलेगी, बल्कि आप्पापाडा और आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों को लंबे समय से मिल रही ट्रैफिक की समस्या से भी राहत मिलेगी।


    ❓FAQs

    Q1. आप्पापाडा से पोयसर नदी तक की सड़क क्यों जरूरी है?
    इस क्षेत्र में सड़कें संकरी होने से भारी ट्रैफिक जाम लगता है। नया डीपी रोड बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को सुगम आवागमन मिलेगा।

    Q2. इस रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग किसने की है?
    दिंडोशी विधानसभा के आमदार सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यह मांग की है।

    Q3. इससे बीएमसी के कौन-कौन से प्रोजेक्ट पूरे होंगे?
    पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प, सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP), इंटरसेप्टर और ड्रेनेज पाइपलाइन जैसे कई अधूरे काम पूरे हो पाएंगे।

    Q4. यह रोड किस चौड़ाई का प्रस्तावित है?
    यह विकास नियोजन सड़क 13.4 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।

  • मुंबई में मिठी नदी पर बनेगा नया ब्रिज, सायन-कुर्ला-BKC वालों को मिलेगी राहत

    मुंबई में मिठी नदी पर बनेगा नया ब्रिज, सायन-कुर्ला-BKC वालों को मिलेगी राहत

    मुंबई में धारावी के पास मिठी नदी पर नया ब्रिज बनने जा रहा है। पुराने पुल को तोड़कर नया चौड़ा और ऊंचा पुल बनाया जाएगा। करीब ₹303 करोड़ खर्च से बनने वाला ये ब्रिज सायन, कुर्ला और BKC जाने वालों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

    मुंबई: शहर वालों के लिए खुशखबरी है! धारावी में ड्राइव-इन थिएटर के पास मिठी नदी पर नया ब्रिज बनने वाला है। BMC ने पुराने पुल को तोड़कर नया चौड़ा पुल बनाने का काम शुरू कर दिया है। करीब ₹303 करोड़ की लागत से बन रहा ये ब्रिज दो साल में तैयार होगा। इससे सायन, कुर्ला और BKC की तरफ जाने वाली गाड़ियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

    🚧 नया मिठी नदी ब्रिज: क्या है प्लान?

    मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने पुराने मिठी नदी पुल को तोड़कर नया और मजबूत पुल बनाने का फैसला किया है।
    👉 पुराने पुल की चौड़ाई सिर्फ 9.3 मीटर थी, जिससे ट्रैफिक बार-बार जाम हो जाता था।
    👉 नया ब्रिज होगा 48 मीटर चौड़ा और 108 मीटर लंबा, जिससे बड़े-बड़े व्हीकल भी आसानी से निकल पाएंगे।
    👉 ये ब्रिज धारावी के ड्राइव-इन थिएटर के पास बनेगा, जो सायन-कुर्ला और BKC को जोड़ता है।

    💰 ₹303 करोड़ की लागत, दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

    इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹303.95 करोड़ का खर्च आएगा।
    BMC ने इसके लिए नया कॉन्ट्रैक्टर भी फाइनल कर लिया है।
    पूरा काम दो फेज में किया जाएगा।
    पहले फेज में पुराना ब्रिज तोड़ा जाएगा और नदी का चौड़ाई बढ़ाई जाएगी,
    जबकि दूसरे फेज में नया ब्रिज खड़ा किया जाएगा।

    🌊 क्यों जरूरी है नया पुल?

    2005 की मुंबई की बारिश सबको याद है — जब मिठी नदी में पानी भरने से पूरा शहर ठप पड़ गया था।
    उसके बाद डॉ. चितळे कमेटी ने सलाह दी थी कि नदी का चौड़ाई 68 मीटर से बढ़ाकर 100 मीटर किया जाए ताकि पानी का फ्लो ठीक रहे।
    अब उसी रिपोर्ट के हिसाब से ब्रिज की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में न ट्रैफिक जाम हो और न पानी भरने की दिक्कत।

    🚗 किन लोगों को फायदा होगा?

    इस ब्रिज से सबसे ज्यादा फायदा होगा उन लोगों को जो रोज़ सायन, कुर्ला, BKC और बांद्रा की तरफ जाते हैं।

    • ऑफिस टाइम पर लगने वाला जाम कम होगा
    • सिग्नल पर रुकने का टाइम घटेगा
    • नए ब्रिज से ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी और बेहतर बनेगी
    • ट्रक और बसों के लिए भी रास्ता आसान होगा

    ⚙️ कब तक बनेगा ये पुल?

    BMC के मुताबिक, पूरा प्रोजेक्ट दो साल में खत्म करने का टार्गेट है।
    काम चालू होते ही आस-पास के इलाकों में ट्रैफिक डाइवर्जन प्लान भी लागू किया जाएगा ताकि लोगों को ज्यादा दिक्कत न हो।

    📌 प्रोजेक्ट से जुड़ी खास बातें

    पॉइंटडिटेल
    जगहधारावी – ड्राइव-इन थिएटर के पास
    पुल की पुरानी चौड़ाई9.3 मीटर
    नई चौड़ाई48 मीटर
    कुल खर्च₹303.95 करोड़
    टाइमलाइन2 साल
    फेज2 (डिमॉलिशन + कंस्ट्रक्शन)

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. नया ब्रिज कहां बन रहा है?
    👉 धारावी के ड्राइव-इन थिएटर के पास, जहां से सायन-कुर्ला और BKC का रास्ता जाता है।

    Q2. कितना खर्च आएगा?
    👉 लगभग ₹303.95 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है।

    Q3. कब तक तैयार होगा?
    👉 दो साल में काम पूरा करने का टार्गेट है।

    Q4. नया ब्रिज कितना चौड़ा होगा?
    👉 नया पुल लगभग 48 मीटर चौड़ा बनाया जाएगा।

    Q5. किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
    👉 सायन, कुर्ला, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) की तरफ जाने वालों को सबसे बड़ा फायदा होगा।

  • 30 साल बाद भी चल रहा DDLJ का जादू, आज भी बजते हैं माराठा मंदिर में तालियां

    30 साल बाद भी चल रहा DDLJ का जादू, आज भी बजते हैं माराठा मंदिर में तालियां

    मुंबई के माराठा मंदिर में 30 साल बाद भी ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का जादू बरकरार है। शाहरुख खान और काजोल की इस सुपरहिट फिल्म को देखने आज भी फैंस उमड़ते हैं। जानिए कैसे ‘DDLJ’ बन गई भारत की सबसे लंबी चलने वाली फिल्म।

    मुंबई: मशहूर Maratha Mandir Theatre में आज भी हर सुबह 11:30 बजे बजती है वही धुन — “मेरे ख्वाबों में जो आए”। जी हां, 1995 में रिलीज़ हुई शाहरुख खान और काजोल की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) को आज भी रोज़ाना दिखाया जा रहा है।
    यह फिल्म अब तक 1500 हफ्तों से ज़्यादा लगातार चल चुकी है और इसे देखने वाले फैंस की तादाद आज भी कम नहीं होती।

    शाहरुख-काजोल की केमिस्ट्री ने रचा इतिहास

    ‘DDLJ’ ने न सिर्फ शाहरुख खान को किंग ऑफ रोमांस बना दिया, बल्कि हिंदुस्तानी सिनेमा में एक नया ट्रेंड भी शुरू किया — जहां प्यार, परिवार और परंपरा का मेल दिखा।
    फिल्म की कहानी राज और सिमरन की है, जो यूरोप में मिलते हैं और फिर भारत में पारिवारिक बंधनों को तोड़ते नहीं, बल्कि मनाकर एक होते हैं।
    आज भी जब सिमरन दौड़कर ट्रेन में कूदती है, तो थिएटर में तालियों और सीटी की गूंज उठती है।

    “वो सीन जब अमरीश पुरी कहते हैं – जा सिमरन जा… आज भी रोंगटे खड़े कर देता है,”
    — मनोज देसाई, माराठा मंदिर के थिएटर हेड

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    फैंस का जुनून, जो अब भी कम नहीं हुआ

    मुंबई के रहने वाले 60 साल के मोहम्मद शाकिर कहते हैं,

    “मैं DDLJ लगभग 30 बार देख चुका हूं… और आगे भी देखता रहूंगा।”

    वहीं 23 साल के ओंकार सराफ बताते हैं,

    “हमने इसे मोबाइल और टीवी पर देखा, लेकिन बड़े पर्दे पर देखना अलग ही एहसास देता है। आज भी गूजबम्प्स आते हैं।”

    हर रविवार को थिएटर में करीब 500 लोग सीटें भर देते हैं, और कई पुराने फैंस तो इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना चुके हैं।

    सलमान खान ने दिखाई जबरदस्त फ्लेक्सिबिलिटी, शेयर की मजेदार स्ट्रेचिंग फोटो

    लगातार 30 साल — DDLJ बना ‘सांस्कृतिक स्मारक’

    2015 में जब फिल्म को हटाने की बात चली थी, तो दर्शकों के विरोध के बाद थिएटर ने इसे जारी रखा।
    फिल्म समीक्षक बरद्वाज रंगन कहते हैं,

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    “DDLJ एक दौर की निशानी है — जहां नई और पुरानी सोच टकराई, और प्यार ने जीत हासिल की। यह फिल्म अब एक Cultural Monument बन चुकी है।”

    विदेशी दर्शकों के लिए भी ‘दिल से जुड़ी कहानी’

    स्पेन से आई पर्यटक केली फर्नांडीज़ बताती हैं,

    “भले ही हमें हिंदी नहीं आती, लेकिन इस फिल्म के संगीत और डांस ने हमें भावनाओं से जोड़ दिया। ये रोमियो-जूलियट की तरह है, बस हैप्पी एंडिंग के साथ।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. DDLJ कब रिलीज़ हुई थी?
    ➡️ फिल्म 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज़ हुई थी।

    Q2. इसे सबसे ज़्यादा कहाँ चलाया गया है?
    ➡️ मुंबई के Maratha Mandir Theatre में पिछले 30 साल से रोज़ाना एक शो के साथ।

    Q3. DDLJ इतनी पॉपुलर क्यों है?
    ➡️ इसकी कहानी, रोमांस, संगीत और फैमिली वैल्यूज़ ने हर पीढ़ी को जोड़ रखा है।

    Q4. क्या अब भी लोग थिएटर में इसे देखने आते हैं?
    ➡️ हां, हर हफ्ते सैकड़ों दर्शक आते हैं, खासकर रविवार को।

  • मालाड में फुटपाथ पर मिली नवजात बच्ची, राहगीर ने बचाई जान

    मालाड में फुटपाथ पर मिली नवजात बच्ची, राहगीर ने बचाई जान

    मुंबई के मालाड में दिवाली की रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक नवजात बच्ची को फुटपाथ पर छोड़ दिया गया। राहगीर ने उसकी रोने की आवाज़ सुनकर पुलिस को खबर दी। बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वह फिलहाल सुरक्षित है।

    मुंबई: दिवाली की रात जब पूरा मुंबई शहर रौशनी से जगमगा रहा था, तब मालाड में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। एक नवजात बच्ची को फुटपाथ पर एक पार्क की बगल में बस के पास छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि एक राहगीर ने उसकी हल्की सी रोने की आवाज़ सुन ली और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे सुरक्षित बताया।

    👶 फुटपाथ पर छोड़ी गई नवजात बच्ची

    मालाड वेस्ट के बैक रोड, बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के पास ये घटना शनिवार देर रात करीब 11 बजे की है। पुलिस के मुताबिक बच्ची महज एक या दो दिन की लग रही थी और कपड़े में लिपटी हुई थी। उसके शरीर पर चींटियों के काटने के निशान थे, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसे कुछ घंटों पहले ही वहां छोड़ा गया था।

    🚓 राहगीर ने दिखाई इंसानियत, पुलिस ने दी त्वरित मदद

    पुलिस के अनुसार, पास से गुजर रहे एक शख्स ने जब मासूम की रोने की आवाज़ सुनी, तो तुरंत बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित थाने लेकर आई। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे साफ कपड़ों में लपेटकर अस्पताल पहुंचाया।

    बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया, “अगर उस राहगीर ने कुछ मिनट देर कर दी होती, तो शायद बच्ची की जान बचाना मुश्किल हो जाता। यह एक चमत्कार जैसा था कि उसकी आवाज़ किसी इंसान तक पहुंच गई।”

    🏥 शताब्दी अस्पताल में इलाज, बच्ची फिलहाल सुरक्षित

    बच्ची को तत्काल शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची फिलहाल स्वस्थ है और अस्पताल के बच्चों के वार्ड में उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची में किसी गंभीर चोट के निशान नहीं हैं, और उसका स्वास्थ्य सामान्य हो रहा है।

    📹 CCTV से होगी आरोपी की पहचान

    पुलिस ने इस मामले में अज्ञात महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक रविंद्र अव्हाड ने बताया, “हमने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है और इलाके के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि बच्ची को वहां कौन लेकर आया था।”

    💓 लोगों ने दिखाई अपनापन, कई ने अपनाने की जताई इच्छा

    घटना के बाद कई लोगों ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है। सोशल मीडिया पर भी राहगीर और पुलिस की इस इंसानियत की जमकर सराहना हो रही है। एक यूज़र ने लिखा, “दिवाली की रात अगर किसी ने सच्ची रौशनी फैलाई है, तो वो इस मासूम को बचाने वाले हैं।”

    🙏 मानवता की मिसाल बनी मुंबई

    मुंबई अक्सर अपनी तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के लिए जानी जाती है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इस शहर में इंसानियत अब भी जिंदा है। इस राहगीर और पुलिस टीम की सूझबूझ ने एक मासूम को नया जीवन दिया।


    FAQ सेक्शन:

    Q1. मालाड में नवजात बच्ची कहां मिली?
    ➡ बच्ची मालाड वेस्ट के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के पास फुटपाथ पर एक पार्क की बगल में मिली।

    Q2. क्या बच्ची सुरक्षित है?
    ➡ हां, बच्ची को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वह पूरी तरह सुरक्षित है।

    Q3. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
    ➡ पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

    Q4. क्या बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है?
    ➡ कई लोग बच्ची को गोद लेने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन फिलहाल वह अस्पताल की निगरानी में है।

  • ठाणे के कलवा में चॉल की स्लैब गिरी, दो लोग घायल; छह फ्लैट खाली कराए गए | मालाड और अंधेरी में आग से मची अफरा-तफरी

    ठाणे के कलवा में चॉल की स्लैब गिरी, दो लोग घायल; छह फ्लैट खाली कराए गए | मालाड और अंधेरी में आग से मची अफरा-तफरी

    ठाणे के कलवा इलाके में 30 साल पुरानी धर्मा निवास चॉल की स्लैब गिरने से दो लोग घायल हो गए। वहीं मुंबई के मालाड और अंधेरी में आग की दो अलग-अलग घटनाओं में कई दुकानें और गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। राहत की बात ये रही कि किसी की जान नहीं गई।

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई: महाराष्ट्र के ठाणे और मुंबई में शनिवार को तीन अलग-अलग हादसों ने लोगों को दहला दिया। ठाणे के कलवा इलाके में करीब 30 साल पुरानी धर्मा निवास चॉल की स्लैब अचानक गिर गई, जिसमें दो लोग घायल हो गए। वहीं मुंबई के मालाड और अंधेरी में लगी भीषण आग की दो घटनाओं में कई दुकानें और वाहन जलकर खाक हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इन सभी घटनाओं में किसी की जान नहीं गई।

    ठाणे के कलवा में चॉल की स्लैब गिरी, दो लोग घायल

    महाराष्ट्र के ठाणे शहर में शनिवार रात एक बड़ी घटना हुई। कलवा इलाके के वितावा में स्थित 25 से 30 साल पुरानी ‘धर्मा निवास चॉल’ (Dharma Niwas Chawl) की स्लैब अचानक गिर गई। हादसे में दो लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत कलवा सिविक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
    ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) के डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेल प्रमुख यासीन तडवी ने बताया कि घटना रात करीब 9 बजे हुई।

    🧱 पुरानी इमारत नहीं थी खतरनाक सूची में

    TMC अधिकारियों के मुताबिक, यह चॉल करीब 20 फ्लैटों की थी, जिसमें 45 से 50 लोग रहते हैं। हादसे के बाद राहत दल मौके पर पहुंचा और 6 फ्लैट खाली कराकर सील कर दिए गए
    सावधानी के तौर पर बिजली सप्लाई काट दी गई ताकि कोई और हादसा न हो।
    अधिकारियों ने बताया कि यह इमारत पहले ‘डेंजरस बिल्डिंग’ की सूची में शामिल नहीं थी, लेकिन अब इसकी हालत का फिर से सर्वे किया जाएगा।

    🚒 मालाड में आग से चार दुकानें जलीं

    इसी बीच मुंबई के मालाड पूर्व के पठानवाड़ी इलाके में शनिवार दोपहर करीब 1 बजे आग लग गई। शुरुआत में यह आग कुछ दुकानों तक सीमित थी, लेकिन बाद में चार से पांच दुकानें जलकर खाक हो गईं।
    घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
    फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियां और अन्य राहत दलों ने चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
    आग में इलेक्ट्रिक वायरिंग, फर्नीचर, और मशीनरी बुरी तरह से जल गई। आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।

    Fire-causes-panic-in-Pathanwadi-Malad

    🔥 अंधेरी में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग

    मुंबई के अंधेरी पूर्व में शुक्रवार सुबह 8:10 बजे एक दो मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स (KDN Compound, मिलिट्री रोड, अशोक नगर) में आग लग गई।
    आग इतनी भीषण थी कि इसे बुझाने में छह घंटे से ज्यादा का वक्त लगा।
    फायर ब्रिगेड ने 2:25 बजे दोपहर तक आग पर काबू पाया।
    इस हादसे में एक इलेक्ट्रिक कार, तीन मोटरसाइकिलें, ऑफिस फर्नीचर और अन्य सामग्री जलकर नष्ट हो गईं।
    आग से इमारत का कुछ हिस्सा भी गिर गया। सौभाग्य से, इस घटना में भी कोई घायल नहीं हुआ।

    ⚙️ सरकारी विभाग करेगा जांच

    अधिकारियों ने बताया कि तीनों घटनाओं के बाद संबंधित विभागों ने सुरक्षा जांच शुरू कर दी है।
    कलवा की घटना में TMC कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट आगे की कार्रवाई करेगा, जबकि आग लगने के मामलों में फायर ब्रिगेड ने जांच के आदेश दिए हैं।


    FAQ Section

    Q1. ठाणे के कलवा में स्लैब गिरने की घटना कब हुई?
    शनिवार रात करीब 9 बजे धर्मा निवास चॉल में स्लैब गिरने की घटना हुई।

    Q2. क्या इस हादसे में किसी की मौत हुई है?
    नहीं, हादसे में दो लोग घायल हुए लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।

    Q3. क्या मालाड और अंधेरी की आग में कोई घायल हुआ?
    नहीं, दोनों आग की घटनाओं में किसी को चोट नहीं आई।

    Q4. आग लगने का कारण क्या था?
    अधिकारियों ने बताया कि अभी दोनों जगहों की आग के कारणों की जांच चल रही है।