Category: Mumbai News

  • मुंबई में MHADA के 120 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध, पहले आओ-पहले पाओ योजना

    मुंबई में MHADA के 120 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध, पहले आओ-पहले पाओ योजना

    मुंबई में MHADA 120 फ्लैट First Come First Served आधार पर बेच रही है। मलाड, कांदिवली, अंधेरी समेत कई इलाकों में ₹38 लाख से ₹8 करोड़ तक के घर।

    मुंबई: घर खरीदने का सपना देख रहे मुंबईकरों के लिए बड़ी खबर है। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित 120 फ्लैट First Come First Served (पहले आओ-पहले पाओ) आधार पर बेचने का ऐलान किया है। ये वे फ्लैट हैं जो पहले लॉटरी में आए थे लेकिन नहीं बिके थे। अब इन्हें सीधे ऑनलाइन बुकिंग के जरिए खरीदा जा सकेगा।

    🏙️ किन इलाकों में मिलेंगे MHADA फ्लैट

    MHADA के अनुसार ये फ्लैट मुंबई के कई प्रमुख और रिहायशी इलाकों में स्थित हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • मलाड
    • कांदिवली
    • अंधेरी
    • चारकोप
    • शिंपोली
    • अंटोप हिल
    • वडाला
    • पवई
    • मानखुर्द
    • घाटकोपर
    • विक्रोली
    • बायकुला
    • टारदेव
    • लोअर परेल
    • सायन
    • जुहू

    इन इलाकों में फ्लैट की कीमत ₹38 लाख से लेकर ₹8 करोड़ तक रखी गई है।

    💰 पहले लॉटरी में आए थे ये घर

    MHADA ने साफ किया है कि ये सभी फ्लैट पहले लॉटरी स्कीम के तहत उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन आवेदन न मिलने या अन्य कारणों से अनसोल्ड रह गए थे। अब इन्हें डायरेक्ट सेल के लिए खोला गया है।

    🖥️ आवेदन कब और कैसे करें

    MHADA फ्लैट के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।

    📅 जरूरी तारीखें

    • 5 फरवरी 2026: रजिस्ट्रेशन शुरू
    • 12 फरवरी 2026:
    • ऑनलाइन आवेदन
    • सिक्योरिटी डिपॉजिट
    • आवेदन शुल्क
    • फ्लैट सिलेक्शन की प्रक्रिया शुरू

    👉 आधिकारिक वेबसाइट: bookmyhome.mhada.gov.in

    🧾 फ्लैट बुक करने की प्रक्रिया

    1. पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
    2. सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना
    3. “Book My Home” विकल्प से
    • बिल्डिंग / विंग
    • फ्लोर
    • फ्लैट नंबर चुनना
    1. फ्लैट फाइनल होने के 48 घंटे के भीतर 10% राशि जमा करना अनिवार्य

    अगर 48 घंटे में भुगतान नहीं किया गया तो:
    ❌ फ्लैट की बुकिंग रद्द
    ❌ पूरी सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त

    📄 पात्रता और जरूरी दस्तावेज

    MHADA के अनुसार:

    ✅ पात्रता

    • आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल
    • भारतीय नागरिक होना जरूरी

    📑 दस्तावेज

    • अविवाहित आवेदक:
    • आधार कार्ड
    • पैन कार्ड
    • विवाहित आवेदक:
    • पति-पत्नी दोनों का आधार और पैन
    • डिक्री सर्टिफिकेट:
    • फ्लैट अलॉटमेंट के लिए अनिवार्य

    🏦 होम लोन लेने वालों के लिए नियम

    जो आवेदक होम लोन लेना चाहते हैं, उन्हें:

    • बैंक/वित्तीय संस्था का Pre-Sanction Letter अपलोड करना होगा
    • सत्यापन के बाद MHADA की ओर से NOC (No Objection Certificate) जारी की जाएगी

    🏡 कब्जा कब मिलेगा

    • पूरी रकम और स्टांप ड्यूटी भुगतान के बाद
    • MHADA की ओर से
    • अलॉटमेंट लेटर
    • पजेशन लेटर जारी किया जाएगा

    ❓ FAQ

    Q1. MHADA के फ्लैट कितने हैं?
    👉 कुल 120 फ्लैट।

    Q2. फ्लैट की कीमत कितनी है?
    👉 ₹38 लाख से ₹8 करोड़ तक।

    Q3. आवेदन कहां करना है?
    👉 bookmyhome.mhada.gov.in पर।

    Q4. क्या लॉटरी होगी?
    👉 नहीं, यह First Come First Serve आधार पर है।

  • Maharashtra: बार काउंसिल चुनाव पर हाईकोर्ट में याचिका, वोटर लिस्ट पर सवाल

    Maharashtra: बार काउंसिल चुनाव पर हाईकोर्ट में याचिका, वोटर लिस्ट पर सवाल

    बार काउंसिल ऑफ Maharashtra चुनाव 2026 की तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर एडवोकेट नितिन सतपुते की याचिका, 2.70 लाख वकीलों का सत्यापन बाकी।

    मुंबई: महाराष्ट्र बार काउंसिल चुनाव 2026 को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। एडवोकेट नितिन शिवराम सतपुते ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर 24 मार्च 2026 को प्रस्तावित चुनाव की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। याचिका में दावा किया गया है कि करीब 2 लाख 70 हजार वकीलों का अभी तक सत्यापन नहीं हुआ, जिससे वे आगामी चुनाव में मतदान से वंचित रह जाएंगे।

    ⚖️ किसके खिलाफ दायर हुई याचिका

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    यह रिट याचिका
    Adv. Nitin Shivram Satpute & Others बनाम Bar Council of Maharashtra एवं संबंधित प्राधिकरणों के खिलाफ दायर की गई है।

    याचिका का मुख्य तर्क है कि मौजूदा वोटर लिस्ट में गंभीर विसंगतियां हैं और बड़ी संख्या में पात्र वकीलों को मतदाता सूची से बाहर रखा गया है।

    📋 Maharashtra कितने वकील अब भी वेरिफाई नहीं

    याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र भर में
    👉 2,70,000 से अधिक वकीलों का सत्यापन अभी अधूरा है
    👉 ये वकील फिलहाल वोटर नहीं हैं
    👉 चुनाव तय तारीख पर हुए तो हजारों अधिवक्ताओं का मताधिकार खत्म हो जाएगा

    याचिकाकर्ता का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और वकीलों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

    🧾 वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का आरोप

    याचिका में यह भी कहा गया है कि:

    • वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम हैं
    • कई सक्रिय वकीलों के नाम गायब हैं
    • कुछ अयोग्य नाम सूची में शामिल हैं

    इन खामियों को दूर किए बिना चुनाव कराना अन्यायपूर्ण और अवैध होगा।

    🏛️ किस बेंच में होगी सुनवाई

    यह मामला
    सीनियर नंबर 912
    WPL/3468/2026
    कोर्ट रूम नंबर 52 में सूचीबद्ध है।

    मामले की सुनवाई
    👉 जस्टिस रविंद्र वी. घुगे
    👉 एवं माननीय डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी।

    👨‍⚖️ याचिकाकर्ता की ओर से पेश होने वाले वकील

    एडवोकेट नितिन सतपुते की ओर से निम्न वरिष्ठ वकील पेश होंगे:

    • एडवोकेट श्रवण गिरी
    • एडवोकेट एजाज नकवी
    • एडवोकेट शोभा बुद्धिवंत
    • एडवोकेट रचित सिंह
    • एडवोकेट अभिषेक बांदेकर
    • एडवोकेट दयानंद उडबाले
    • एडवोकेट मानाली गवली
    • एडवोकेट दीपक जगदेव

    📌 क्यों अहम है यह मामला

    बार काउंसिल चुनाव केवल एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं बल्कि पूरे वकील समुदाय की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय है। अगर समय रहते सत्यापन और वोटर लिस्ट सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर चुनाव की वैधता पर पड़ सकता है।


    ❓ FAQ

    Q1. बार काउंसिल चुनाव कब होने हैं?
    24 मार्च 2026 को प्रस्तावित हैं।

    Q2. याचिका किसने दायर की है?
    एडवोकेट नितिन शिवराम सतपुते ने।

    Q3. मुख्य आपत्ति क्या है?
    2.70 लाख वकीलों का सत्यापन पूरा नहीं हुआ और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां हैं।

    Q4. मामला किस कोर्ट में है?
    बॉम्बे हाईकोर्ट, कोर्ट रूम नंबर 52।

  • राजस्थान में मुंबई फायर ब्रिगेड का जलवा, 64 पदक जीतकर बढ़ाया शहर का मान

    राजस्थान में मुंबई फायर ब्रिगेड का जलवा, 64 पदक जीतकर बढ़ाया शहर का मान

    राजस्थान में आयोजित अखिल भारतीय अग्निशमन सेवा क्रीड़ा स्पर्धा 2026 में मुंबई फायर ब्रिगेड ने 21 स्वर्ण समेत कुल 64 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।

    मुंबई: राजस्थान के उदयपुर में हुई अखिल भारतीय अग्निशमन सेवा क्रीड़ा स्पर्धा 2026 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुंबई अग्निशमन दल ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 21 स्वर्ण, 21 रजत और 22 कांस्य पदक, यानी कुल 64 पदक अपने नाम किए। देशभर से आए 1200 से ज्यादा अग्निशमन जवानों के बीच मुंबई टीम ने अपनी फिटनेस, अनुशासन और कौशल का लोहा मनवाया।

    🏅 उदयपुर में दिखा मुंबई फायर ब्रिगेड का दम

    दिनांक 27 से 31 जनवरी 2026 के बीच राजस्थान के उदयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मुंबई अग्निशमन दल के 42 जवानों ने हिस्सा लिया। कठिन अग्निशमन कवायदों और खेल स्पर्धाओं में मुंबई टीम ने लगातार बेहतर प्रदर्शन कर पदकों की झड़ी लगा दी।

    खास बात यह रही कि 10 महिला अग्निशमन जवानों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए पदक जीतने में अहम योगदान दिया, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संदेश है।

    🏓 एक अधिकारी, 12 पदक – संकेत नाईक की खास उपलब्धि

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    स्पर्धा में केंद्र अधिकारी संकेत नाईक ने टेबल टेनिस, लॉन टेनिस और बैडमिंटन जैसे खेलों में कुल 12 पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि मुंबई फायर ब्रिगेड सिर्फ आपदा प्रबंधन में ही नहीं, खेलों में भी अव्वल है।

    👨‍🚒 नेतृत्व भी दमदार, अनुभव भी काम आया

    मुंबई अग्निशमन दल की विजेता टीम का नेतृत्व उप प्रमुख अग्निशमन अधिकारी डॉ. दीपक घोष ने किया।
    डॉ. घोष ने न सिर्फ टीम को मार्गदर्शन दिया, बल्कि 55 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग की व्यक्तिगत अग्नि कवायद स्पर्धा में 2 रजत पदक भी अपने नाम किए।

    🏛️ बीएमसी के शीर्ष अधिकारियों ने जताया गर्व

    इस शानदार सफलता पर

    • महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी,
    • अतिरिक्त आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी,
    • उप आयुक्त किशोर गांधी,
    • प्रमुख अग्निशमन अधिकारी रविंद्र अंबुलगेकर

    ने पूरे दल को बधाई देते हुए कहा कि मुंबई फायर ब्रिगेड शहर की शान है और हर मोर्चे पर बेहतरीन काम कर रही है।

    🌍 पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम

    मुंबई अग्निशमन दल की यह सफलता कोई पहली नहीं है।

    • World Police & Fire Games 2025 (अमेरिका, अलाबामा) में 4 पदक
    • जनवरी 2025, नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय स्पर्धा में 16 स्वर्ण समेत 40 पदक

    यह बताता है कि मुंबई के अग्निशमन जवान लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।


    ❓ FAQ Section

    Q1. यह प्रतियोगिता कहां आयोजित हुई थी?
    राजस्थान के उदयपुर में।

    Q2. मुंबई फायर ब्रिगेड ने कुल कितने पदक जीते?
    कुल 64 पदक – 21 स्वर्ण, 21 रजत और 22 कांस्य।

    Q3. क्या महिला जवानों ने भी हिस्सा लिया था?
    हां, 10 महिला अग्निशमन जवानों ने भाग लिया और पदक भी जीते।

    Q4. टीम का नेतृत्व किसने किया?
    उप प्रमुख अग्निशमन अधिकारी डॉ. दीपक घोष ने।

  • सरपंच बनने की सनक: नांदेड़ में पिता ने 6 साल की बेटी की कथित हत्या की

    सरपंच बनने की सनक: नांदेड़ में पिता ने 6 साल की बेटी की कथित हत्या की

    महाराष्ट्र के नांदेड़ में पंचायत चुनाव लड़ने की योग्यता पाने के लिए एक पिता ने कथित तौर पर अपनी 6 साल की बेटी की हत्या कर दी। यह मामला राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सामाजिक दबाव की भयावह तस्वीर दिखाता है।

    बॉबी शेख
    महाराष्ट्र: नांदेड़ जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सरपंच बनने की चाहत में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी 6 साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी। आरोपी पंचायत चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन तीन बच्चों का पिता होने के कारण अयोग्य माना जा रहा था। इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है और राजनीति की अमानवीय हदों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    📍 क्या है नांदेड़ का पूरा मामला

    जानकारी के मुताबिक, आरोपी व्यक्ति स्थानीय पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए दावेदारी करना चाहता था। चुनावी नियमों के अनुसार, उसे दो से अधिक बच्चों का पिता होने के कारण अयोग्य घोषित किया जा रहा था।
    इसी अयोग्यता को खत्म करने के लिए उसने पहले अपनी 6 साल की बेटी को गोद देने की कोशिश की, लेकिन जब यह प्रयास असफल रहा तो उसने कथित तौर पर अपनी ही बेटी की हत्या कर दी।

    😨 समाज को झकझोर देने वाली सच्चाई

    यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि

    • टूटते पारिवारिक मूल्यों
    • अंधी राजनीतिक महत्वाकांक्षा
    • और सामाजिक दबाव की खतरनाक तस्वीर

    को उजागर करती है।
    जिस पिता को अपनी बेटी का रक्षक होना चाहिए था, वही उसकी जान का दुश्मन बन गया।

    🗳️ राजनीति की कीमत पर मासूम की जान?

    यह मामला बताता है कि कैसे

    • सत्ता की लालसा
    • राजनीतिक करियर की दौड़
    • और “किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने” की सोच

    इंसान को हैवानियत की हद तक ले जा सकती है
    राजनीति, जो समाज की सेवा का माध्यम होनी चाहिए, यहां खूनी महत्वाकांक्षा में बदलती नजर आई।

    👶 बच्चों के अधिकारों पर बड़ा सवाल

    इस घटना ने बाल अधिकारों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    एक 6 साल की बच्ची, जो न तो राजनीति समझती थी और न ही चुनावी नियम, उसे अपने पिता की महत्वाकांक्षा की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

    ⚖️ कानून और नैतिकता दोनों की हार

    यह मामला न केवल

    • कानून के खिलाफ है
    • बल्कि समाज की नैतिकता पर भी करारा तमाचा है

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त सजा और सामाजिक चेतना दोनों जरूरी हैं, ताकि भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके।

    🧠 राजनीतिक संस्कृति बदलने की जरूरत

    यह घटना एक चेतावनी है कि

    • राजनीति में स्वार्थ हावी हो चुका है
    • इंसानियत पीछे छूटती जा रही है
    • और सत्ता की भूख रिश्तों को भी निगल रही है

    समाज को यह सोचने की जरूरत है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा की सीमा क्या होनी चाहिए


    ❓ FAQ

    Q1. यह घटना कहां की है?
    यह मामला महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले का है।

    Q2. आरोपी ने ऐसा क्यों किया?
    पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता खत्म करने के मकसद से।

    Q3. बच्ची की उम्र कितनी थी?
    करीब 6 साल।

    Q4. यह मामला क्या दर्शाता है?
    राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सामाजिक दबाव किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं।

  • गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    मुंबई में फेरीवालों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नो-फेरीवाला जोन बनाने की योजना, बुलडोजर कार्रवाई और लाइसेंस के सवाल पर गरीब फेरीवालों का भविष्य फिर संकट में है।

    मुंबई: एक बार फिर गरीब फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाने की तैयारी चल रही है। रेलवे स्टेशन इलाकों से अभियान की शुरुआत होगी। सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री से लेकर सरकारें फेरीवालों को सुरक्षा देने की बात करती हैं, तो ज़मीन पर बुलडोजर ही क्यों गरजता है?

    🏙️ मुंबई में फेरीवालों की समस्या: पुरानी, लेकिन अनसुलझी

    मुंबई में फेरीवालों की समस्या कोई नई नहीं है। दशकों से लाखों लोग फल, सब्ज़ी, कपड़े और रोजमर्रा का सामान बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।
    हकीकत यह है कि फेरीवाले शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मार भी इन्हीं पर पड़ती है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers
    अंधेरी पश्चिम बीएमसी तोडफोड की ताजा तस्वीर

    🧨 बुलडोजर, तोड़-फोड़ और डर का माहौल

    जहां देखो वहीं BMC के तोड़क दस्ते, ट्रॉली तोड़ना, रेहड़ी जब्त करना और सामान फेंक देना—ये सब अब आम बात हो चुकी है।
    चुनाव से पहले कार्रवाई रोक दी जाती है और चुनाव खत्म होते ही फिर से अभियान शुरू हो जाता है। गरीब फेरीवालों के लिए यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।

    🗳️ चुनाव से पहले राहत, बाद में कार्रवाई

    महानगरपालिका चुनाव से पहले फेरीवालों को हटाने के लिए विशेष दस्ते तैनात किए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई।
    अब चुनाव खत्म होते ही फिर से फेरीवालों को शहर से हटाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    🚉 रेलवे स्टेशन पहले निशाने पर

    सूत्रों के अनुसार, अभियान के पहले चरण में

    • रेलवे स्टेशन परिसर
    • स्टेशन रोड
    • प्रमुख जंक्शन

    से फेरीवालों को हटाया जाएगा। इसके लिए मनपा की अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी जा रही है।

    🏢 गुप्त आदेश, गुप्त कार्रवाई

    बताया जा रहा है कि

    • कार्रवाई की योजना सहायक आयुक्त स्तर तक ही सीमित रहेगी
    • किस इलाके में कब कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी बाहर नहीं जाएगी
    • हर विभाग को अपने स्तर पर प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं

    इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि फेरीवालों को पहले से भनक न लगे

    💸 हफ्ता, राजनीति और दोहरा मापदंड

    हकीकत यह भी है कि

    • कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग फेरीवालों से हफ्ता वसूलते हैं
    • कई जगह मनपा कर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर मुफ्त फल-सब्ज़ी लेते हैं
    • प्रांतीयता और भाषा के आधार पर भी भेदभाव होता है

    इस सिस्टम में सबसे आसान शिकार हमेशा गरीब फेरीवाले ही बनते हैं।

    ❓ लाइसेंस क्यों नहीं?

    सबसे बड़ा सवाल यही है—
    अगर सरकार और मनपा चाहें तो फेरीवालों को लाइसेंस देकर “अवैध” शब्द खत्म किया जा सकता है।
    लेकिन ऐसा नहीं किया जाता, क्योंकि अवैध रहेंगे तो

    • हफ्ता वसूली चलेगी
    • दबाव बनाना आसान रहेगा
    • तोड़क कार्रवाई का डर बना रहेगा

    🏗️ अवैध इमारतें सुरक्षित, गरीब असुरक्षित

    मुंबई में हजारों इमारतें ऐसी हैं

    • जिनका नक्शा पास नहीं
    • जिनके पास NOC नहीं
    • जो सरकारी ज़मीन पर बनी हैं

    लेकिन उन पर बुलडोजर चलाने की हिम्मत कोई नहीं करता।
    वहीं गरीब फेरीवाले पर कार्रवाई सबसे आसान मानी जाती है।

    🏚️ झोपड़ी मुक्त आदेश की खुलेआम अवहेलना

    आरोप यह भी है कि

    • झोपड़ी मुक्त आदेश के बावजूद
    • लाखों रुपये के लेन-देन से
    • झोपड़ियां और कमर्शियल गाले बनवाए जाते हैं
    • और उन्हें संरक्षण दिया जाता है

    यह दोहरा रवैया गरीबों के खिलाफ व्यवस्था की सोच को उजागर करता है।

    ⚖️ नागरिक अधिकारों का सवाल

    गरीब फेरीवाले भी भारत के नागरिक हैं।
    राज्य का दायित्व लोगों को रुलाना नहीं, बल्कि रोजगार और आय के साधन देना है।
    संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखने चाहिए।


    ❓ FAQ

    Q1. क्या पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाया जाएगा?
    सूत्रों के अनुसार, ऐसी योजना पर काम चल रहा है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।

    Q2. कार्रवाई की शुरुआत कहां से होगी?
    पहले चरण में रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों से फेरीवालों को हटाया जाएगा।

    Q3. फेरीवालों को लाइसेंस क्यों नहीं दिया जाता?
    आरोप है कि सिस्टम में अवैध स्थिति बनाए रखना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद है।

    Q4. क्या यह कार्रवाई सभी अवैध निर्माणों पर होगी?
    जमीनी हकीकत में कार्रवाई ज़्यादातर गरीब फेरीवालों तक ही सीमित रहती है।

  • FDA को मिला फुल-टाइम आयुक्त, डूबे-पाटील से कड़े एक्शन की उम्मीद

    FDA को मिला फुल-टाइम आयुक्त, डूबे-पाटील से कड़े एक्शन की उम्मीद

    करीब तीन महीने बाद महाराष्ट्र FDA को स्थायी आयुक्त मिला। IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील की फुल-टाइम नियुक्ति से प्रशासनिक मजबूती, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती की उम्मीद बढ़ी।

    मुंबई: करीब तीन महीने तक प्रभारी व्यवस्था में चल रहे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (FDA) को आखिरकार फुल-टाइम आयुक्त मिल गया है। राज्य सरकार ने IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील को FDA का स्थायी आयुक्त नियुक्त किया है। अब तक वे प्रभारी आयुक्त की भूमिका निभा रहे थे। लंबे समय से नेतृत्व के अभाव में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे, ऐसे में इस नियुक्ति को प्रशासनिक सख़्ती, पारदर्शिता और सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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    🔹 तीन महीने बाद मिली स्थायी कमान

    पूर्व FDA आयुक्त राजेश नार्वेकर पिछले लगभग तीन महीनों से अवकाश पर थे। इस दौरान विभाग प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहा था। ऐसे में श्रीधर डूबे-पाटील को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जो महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं।
    अब सरकार ने इसी अस्थायी व्यवस्था को खत्म करते हुए उन्हें फुल-टाइम आयुक्त बना दिया है।

    🔹 प्रभारी व्यवस्था से बिगड़ी प्रशासनिक रफ्तार

    प्रभारी आयुक्त के भरोसे चल रहे FDA में नीतिगत फैसलों, निरीक्षण और कार्रवाई की गति पर असर पड़ने की चर्चा लंबे समय से थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी दौर में विभाग के भीतर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बढ़ गए थे।
    निगरानी ढीली पड़ने से शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई, जिससे आम जनता और व्यापारियों दोनों में नाराज़गी देखी गई।

    🔹 राजेश नार्वेकर की छुट्टी और उठते सवाल

    पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश को लेकर प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल उठते रहे। उनके अवकाश के पीछे अलग-अलग कारण बताए जाते हैं।
    सूत्रों का कहना है कि वे FDA के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ थे। एक ईमानदार अधिकारी की सराहना करना उन्हें महंगा पड़ गया, क्योंकि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे तोड़-मरोड़कर विधानसभा तक पहुंचा दिया।

    🔹 भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर

    इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि FDA में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की जड़ें कितनी गहरी हैं।
    इतना ही नहीं, FSO उत्तरेश्वर बड़े जैसे अधिकारियों को लेकर व्यापारियों द्वारा कई शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक उन पर जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। इससे विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।

    🔹 श्रीधर डूबे-पाटील से क्यों हैं ज्यादा उम्मीदें

    श्रीधर डूबे-पाटील पहले ही प्रभारी आयुक्त के तौर पर FDA की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे में विभाग की आंतरिक समस्याओं, अधिकारियों की भूमिका और सिस्टम की कमजोरियों से वे भली-भांति परिचित हैं।
    सरकारी हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि वे अपने कार्यकाल में—

    • FDA की प्रशासनिक पकड़ मजबूत करेंगे
    • भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे
    • खाद्य सुरक्षा और दवा नियंत्रण को प्रभावी बनाएंगे
    • जनहित से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस अपनाएंगे

    🔹 जनहित से जुड़ा अहम विभाग

    FDA ऐसा विभाग है जिसका सीधा संबंध आम जनता के स्वास्थ्य से है। मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली दवाएं और अवैध कारोबार पर लगाम लगाना इसकी मुख्य जिम्मेदारी है।
    ऐसे में फुल-टाइम आयुक्त की नियुक्ति से न सिर्फ प्रशासनिक स्थिरता आएगी, बल्कि भरोसा भी मजबूत होगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. महाराष्ट्र FDA के नए फुल-टाइम आयुक्त कौन बने हैं?
    👉 IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील।

    Q2. FDA को फुल-टाइम आयुक्त मिलने में देरी क्यों हुई?
    👉 पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश के कारण विभाग प्रभारी व्यवस्था में चल रहा था।

    Q3. नई नियुक्ति से क्या बदलाव उम्मीद की जा रही है?
    👉 भ्रष्टाचार पर सख्ती, तेज़ कार्रवाई और प्रशासनिक पारदर्शिता।

    Q4. किन अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं?
    👉 FSO उत्तरेश्वर बड़े सहित कुछ अधिकारियों पर व्यापारियों ने शिकायतें की हैं।

  • मुंबई में थूकने पर ₹250 और कचरा फैलाने पर ₹500 जुर्माना, BMC ने जारी किए नए स्वच्छता नियम

    मुंबई में थूकने पर ₹250 और कचरा फैलाने पर ₹500 जुर्माना, BMC ने जारी किए नए स्वच्छता नियम

    BMC ने मुंबई में स्वच्छता को लेकर नए Bylaws 2025 लागू किए हैं। सार्वजनिक स्थान पर थूकने, कचरा फैलाने, गीला-सूखा कचरा अलग न करने और बिना परमिट मलबा ढोने पर भारी जुर्माना लगेगा। पूरी जानकारी पढ़ें।

    मुंबई: शहर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने घनकचरा प्रबंधन, स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े नए उपविधि (Bylaws-2025) जारी कर दिए हैं। इन नियमों के तहत अब सार्वजनिक जगह पर थूकने पर 250 रुपये, कचरा फेंकने पर 500 रुपये, गीला-सूखा कचरा अलग न करने पर 200 रुपये और बिना अनुमति मलबा ढोने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ये नियम मुंबई शहर और उपनगरों के सभी नागरिकों, दुकानों, संस्थानों और आयोजनों पर लागू होंगे।

    🏛️ BMC ने क्यों जारी किए नए स्वच्छता Bylaws?

    Bmc प्रशासन का कहना है कि मुंबई में रोज़ाना हजारों टन कचरा पैदा होता है।
    इसे सही तरीके से अलग-अलग वर्गीकृत कर प्रोसेस करना,
    सार्वजनिक स्थानों को गंदगी से बचाना
    और नागरिकों की स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी तय करना अब बेहद ज़रूरी हो गया है।

    इसी उद्देश्य से घनकचरा (व्यवस्थापन और हाताळणी), स्वच्छता और स्वच्छताविषयक उपविधी – 2025 लागू किए गए हैं।

    👤 किनके निर्देश पर लागू हुए ये नियम?

    यह निर्णय—

    • BMC आयुक्त व प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर
    • अतिरिक्त आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी के मार्गदर्शन में
    • उपायुक्त (घनकचरा प्रबंधन) किरण दिघावकर की निगरानी में

    लिया गया है।

    🚮 अब किन बातों पर लगेगा जुर्माना? (मुख्य दंड सूची)

    बीएमसी ने कुल 21 तरह के अपराधों पर जुर्माना तय किया है, जिनमें प्रमुख हैं—

    🔸 सार्वजनिक गंदगी से जुड़े दंड

    • सड़क, फुटपाथ, गली, बाग या सार्वजनिक जगह पर कचरा फेंकना – ₹500
    • सार्वजनिक स्थान पर थूकना – ₹250
    • खुले में नहाना – ₹300
    • खुले में पेशाब करना – ₹500
    • खुले में शौच करना – ₹500

    🔸 कचरा प्रबंधन से जुड़े दंड

    • गीला और सूखा कचरा अलग न करना – ₹200
    • बड़े कचरा उत्पादकों के लिए – ₹1000
    • सूखा कचरा अलग न देना – ₹200
    • मछली, मांस, पोल्ट्री कचरा अलग न करना – ₹750

    🔸 मलबा और निर्माण कचरा

    • तय जगह के अलावा मलबा फेंकना – ₹20,000 प्रति वाहन
    • बिना परमिट मलबा ढोना – ₹25,000 प्रति वाहन

    🛒 दुकानदार, फेरीवाले और आयोजकों के लिए खास नियम

    • बिना कचरा डिब्बे के फेरीवाले – ₹750
    • कचरा अलग न करने वाले फेरीवाले – ₹750
    • सार्वजनिक कार्यक्रम के 4 घंटे के भीतर सफाई न करने पर – जमा राशि जब्त
    • वाहन धोना या सार्वजनिक जगह पर बर्तन धोना – ₹300 से ₹500

    🌱 BMC की अपील: नागरिक बनें जिम्मेदार

    डॉ. अश्विनी जोशी ने कहा कि—

    “मुंबई को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना केवल बीएमसी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।”

    बीएमसी ने लोगों से अपील की है कि वे—

    • घर और परिसर साफ रखें
    • कचरे का सही तरीके से वर्गीकरण करें
    • सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें
    • नियमों का पालन कर महानगरपालिका को सहयोग दें

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. क्या ये नियम पूरे मुंबई में लागू होंगे?

    हाँ, मुंबई शहर और उपनगरों के सभी इलाकों में लागू होंगे।

    Q2. गीला-सूखा कचरा अलग न करने पर कितना जुर्माना है?

    पहली बार ₹200, बड़े कचरा उत्पादकों के लिए ₹1000

    Q3. बिना परमिट मलबा ढोने पर क्या सजा है?

    ₹25,000 प्रति वाहन जुर्माना।

    Q4. क्या दुकानदार और फेरीवाले भी नियमों के दायरे में हैं?

    हाँ, उनके लिए अलग-अलग जुर्माने तय किए गए हैं।

  • मोहम्मद अली रोड पर BMC की बड़ी कार्रवाई, अवैध फेरीवाले और अतिक्रमण हटाए

    मोहम्मद अली रोड पर BMC की बड़ी कार्रवाई, अवैध फेरीवाले और अतिक्रमण हटाए

    मुंबई के मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट रोड पर बीएमसी के बी वार्ड ने अवैध फेरीवालों और फुटपाथ पर बने अनधिकृत निर्माण हटाए। 7 दुकानें, 12 ओटे और 2 लावारिस वाहन हटाए गए।

    मुंबई: सबसे व्यस्त और संवेदनशील व्यावसायिक इलाकों में गिने जाने वाले मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने बड़ी कार्रवाई की है। BMC के ‘बी’ प्रशासकीय विभाग ने फुटपाथों पर किए गए अनधिकृत निर्माण और अवैध फेरीवालों को हटाते हुए इलाके को अतिक्रमण मुक्त किया। इस कार्रवाई से पैदल यात्रियों और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    BMC ‘बी’ वार्ड की सख्त कार्रवाई

    दिनांक 2 फरवरी 2026 को बीएमसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई—

    • अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी के निर्देश पर
    • उप आयुक्त (परिमंडल-1) चंदा जाधव के मार्गदर्शन में
    • सहायक आयुक्त (बी विभाग) योगेश देसाई के नेतृत्व में

    अंजाम दी गई।

    क्यों ज़रूरी थी यह कार्रवाई?

    मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग—

    • भेंडी बाजार
    • मस्जिद बंदर
    • भायखला
    • नागदेवी
    • मांडवी

    जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते हैं। इन सड़कों पर—

    • फुटपाथों पर अवैध दुकानें
    • बढ़ाए गए ओटे
    • लोहे-पत्रे के शेड
    • फेरीवालों का जमावड़ा

    होने से यातायात और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही थी।

    अवैध निर्माण और फेरीवालों पर चला बुलडोज़र

    बीएमसी की इस कार्रवाई में—

    • 7 अनधिकृत दुकानें हटाई गईं
    • 12 अवैध ओटे तोड़े गए
    • पत्रे और लोहे के शेड हटाए गए
    • 10 बोलार्ड निकाले गए
    • 2 लावारिस वाहनों पर कार्रवाई की गई

    पूरा ऑपरेशन आधुनिक मशीनरी की मदद से किया गया।

    भारी मशीनरी और पुलिस बंदोबस्त तैनात

    अतिक्रमण हटाने के लिए—

    • 4 अतिक्रमण निर्मूलन वाहन
    • 2 जेसीबी मशीनें
    • अन्य तकनीकी उपकरण

    लगाए गए थे।
    इसके साथ ही, मौके पर 40 से अधिक बीएमसी अधिकारी-कर्मचारी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

    स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष

    कार्रवाई के बाद स्थानीय दुकानदारों, रहवासियों और राहगीरों ने राहत की सांस ली। नागरिकों का कहना है कि—

    • अब फुटपाथ चलने लायक हुए हैं
    • ट्रैफिक की समस्या कम होगी
    • इलाके की सुरक्षा और सफ़ाई बेहतर होगी

    BMC का साफ संदेश

    महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि—

    “शहर में अनधिकृत फेरीवालों और बढ़ी हुई निर्माण गतिविधियों के खिलाफ आगे भी नियमित रूप से कार्रवाई जारी रहेगी।”


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी ने यह कार्रवाई कब की?
    👉 2 फरवरी 2026 को।

    Q2. किन इलाकों में अतिक्रमण हटाया गया?
    👉 मोहम्मद अली मार्ग और इब्राहिम मर्चेंट मार्ग।

    Q3. कितनी अवैध दुकानें हटाई गईं?
    👉 कुल 7 अनधिकृत दुकानें।

    Q4. क्या आगे भी ऐसी कार्रवाई होगी?
    👉 हां, बीएमसी ने नियमित कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

  • दिंडोशी में पानी संकट पर बड़ी राहत, 3 लाख लीटर की टंकी के काम का शुभारंभ

    दिंडोशी में पानी संकट पर बड़ी राहत, 3 लाख लीटर की टंकी के काम का शुभारंभ

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र की महानगरपालिका, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत में लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान के लिए 3 लाख लीटर क्षमता की नई पानी टंकी के निर्माण का काम शुरू हो गया है।

    मुंबई: दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले हजारों नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। महानगरपालिका वसाहत, संतोष नगर, श्रीकृष्ण नगर, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत में लंबे समय से कम दबाव और अनियमित पानी आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे लोगों को अब स्थायी समाधान मिलने जा रहा है। शिवसेना के प्रयासों से यहां 3 लाख लीटर क्षमता की सहायक पानी टंकी (AST) के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया है, जिससे इलाके की पानी किल्लत हमेशा के लिए दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    चुनाव में दिया गया वादा अब ज़मीन पर उतरा

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता, आमदार और पूर्व महापौर सुनिल प्रभु ने विधानसभा और मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान दिंडोशी क्षेत्र के नागरिकों को यह भरोसा दिलाया था कि पानी की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। अब उसी वादे को पूरा करते हुए यह अहम परियोजना शुरू की गई है।

    कहां बनेगी 3 लाख लीटर की पानी टंकी?

    यह नई सहायक पानी टंकी—

    • दिंडोशी वसाहत
    • संतोष नगर
    • सेक्टर C, G, L, H, M और D
    • ए–1 स्वीट के पास
    • दिंडोशी वसाहत स्थित महानगरपालिका के भूखंड पर

    निर्मित की जा रही है, जिससे आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।

    क्यों थी दिंडोशी में पानी की बड़ी समस्या? (पार्श्वभूमी)

    दिंडोशी वसाहत का एक बड़ा हिस्सा भौगोलिक रूप से ऊंचाई पर स्थित है। इसी वजह से यहां—

    • कई सालों से कम दबाव में पानी आता था
    • पानी की सप्लाई सिर्फ सुबह सीमित समय के लिए होती थी
    • ऑनलाइन पंपिंग सिस्टम होने के बावजूद ऊंचे हिस्सों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता था

    इससे महिलाओं, बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों को रोज़ाना भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी।

    महापालिका रिपोर्ट में क्या सामने आया? (तकनीकी जानकारी)

    बीएमसी के जल अभियंता विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आए—

    • मौजूदा टंकी की क्षमता: 1.25 लाख लीटर
    • टंकी का निर्माण वर्ष: 2007
    • पंपिंग सिस्टम: ऑनलाइन पंपिंग + गुरुत्वाकर्षण
    • ज़ोन–I: सेक्टर D, H, M
    • ज़ोन–II: सेक्टर C, G, L

    पानी की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद ऊंचे इलाकों में दबाव की समस्या बनी रही।

    तीन साल की मेहनत के बाद मिली मंज़ूरी

    आमदार सुनिल प्रभु, नगरसेवक तुलशीराम शिंदे और एडवोकेट सुहास वाडकर ने पिछले तीन वर्षों तक लगातार बीएमसी जल अभियंता विभाग के साथ बैठकें कर इस मुद्दे को आगे बढ़ाया।

    • 4 दिसंबर 2024 को AST टंकी का प्रस्ताव रखा गया
    • 6 जनवरी 2025 को संयुक्त बैठक में परियोजना को मंज़ूरी मिली

    नई पानी टंकी की प्रमुख विशेषताएं

    • लाभार्थी आबादी: 17,690 नागरिक
    • रोज़ाना पानी की मांग: 8 लाख लीटर
    • टंकी क्षमता: 3,00,000 लीटर
    • पंप: 2 (एक कार्यरत, एक स्टैंडबाय)
    • पंप क्षमता: 3300 लीटर प्रति मिनट
    • परियोजना लागत: ₹1.77 करोड़
    • काम शुरू: 15 दिसंबर 2025
    • अनुमानित पूर्णता: 14 नवंबर 2027

    हजारों परिवारों को होगा सीधा फायदा

    इस नई टंकी के शुरू होने से—

    • ऊंचे इलाकों में पूरा दबाव मिलेगा
    • पानी की सप्लाई नियमित होगी
    • सुबह-सुबह पानी भरने की मजबूरी खत्म होगी
    • महिलाओं और बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी

    क्या बोले आमदार सुनिल प्रभु?

    आमदार सुनिल प्रभु ने कहा—

    “दिंडोशी के ऊंचाई वाले इलाकों की पानी समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी हुई थी। हमने 3 लाख लीटर की सहायक पानी टंकी मंज़ूर करवाई है। यह प्रोजेक्ट पूरा होते ही यहां की पानी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। हम जो कहते हैं, उसे करके दिखाते हैं।”

    कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद?

    इस शुभारंभ कार्यक्रम में—

    • नगरसेवक तुलशीराम शिंदे
    • एडवोकेट सुहास वाडकर
    • शाखाप्रमुख संदीप जाधव
    • संपत मोरे
    • सामाजिक कार्यकर्ता संपतदादा उतेकर
    • बीएमसी के अभियंता
    • शिवसैनिक, महिला-पुरुष पदाधिकारी
    • बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक

    मौजूद रहे। काम शुरू होते ही इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. दिंडोशी में कितनी क्षमता की पानी टंकी बन रही है?
    👉 3 लाख लीटर क्षमता की सहायक पानी टंकी।

    Q2. इस परियोजना से कितने लोगों को फायदा होगा?
    👉 करीब 17,690 नागरिकों को।

    Q3. टंकी कब तक पूरी होगी?
    👉 नवंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

    Q4. सबसे ज़्यादा फायदा किन इलाकों को मिलेगा?
    👉 संतोष नगर, श्रीकृष्ण नगर, नागरी निवारा और म्हाडा वसाहत के ऊंचाई वाले इलाके।

  • कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में पांच लैब टेक्नीशियन बिना महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के काम करते पाए गए. शिकायत के बाद MPC ने कार्रवाई के निर्देश दिए. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल (शताब्दी अस्पताल) में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में कम से कम पांच लैब टेक्नीशियन ऐसे पाए गए हैं, जो महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल (MPC) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसके बावजूद वे इमरजेंसी लैब में भी सेवाएं दे रहे थे. एक शिकायत के बाद MPC ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.

    कैसे सामने आया पूरा मामला?

    यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिवक्ता तुषार भोसले ने “आपले सरकार” पोर्टल के जरिए महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि शताब्दी अस्पताल में बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लैब टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल, जांच और इमरजेंसी मामलों को संभाल रहे हैं, जो कानून और मरीजों की सुरक्षा—दोनों के खिलाफ है.

    शिकायत मिलने के बाद MPC ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

    MPC के निर्देश के बाद अस्पताल का आदेश

    पैरामेडिकल काउंसिल के निर्देश के बाद शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि सभी लैब टेक्नीशियन के लिए MPC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.

    हालांकि, इस आदेश का विरोध अस्पताल के कुछ स्थायी और वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन जरूरी योग्यता और मान्यता प्राप्त डिग्री के अभाव में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे.

    अस्पताल प्रशासन की दुविधा

    अस्पताल प्रशासन इस समय असमंजस में है. एक ओर कानून का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का भविष्य भी सवालों में है.

    इस मुद्दे पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में कुल 18 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल है. इनमें से पांच टेक्नीशियन फिलहाल महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

    पांच टेक्नीशियन ने किया आवेदन, फिर भी अड़चन

    डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार,

    • सभी पांच टेक्नीशियन ने MPC रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है
    • प्रत्येक ने ₹2,000 की निर्धारित फीस जमा की है
    • आवेदन की रसीद भी उन्हें मिल चुकी है

    लेकिन समस्या यह है कि इनमें से कुछ के पास BSc माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री है या वे ऐसे संस्थानों से पासआउट हैं, जो MPC की मान्यता सूची में शामिल नहीं हैं. इसी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन पर अंतिम फैसला अटका हुआ है.

    DMLT अनिवार्य, कानून साफ

    स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मुताबिक,
    ब्लड बैंक टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) अनिवार्य है.

    अतीत में कई भर्तियां इन नियमों को दरकिनार कर की गईं, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों और अस्पताल—दोनों को भुगतना पड़ रहा है.

    कानूनी चेतावनी: अपराध है बिना रजिस्ट्रेशन काम करना

    इस मामले पर शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार भोसले ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:

    “कानून के मुताबिक लैब टेक्नीशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, भले ही इसके लिए उन्हें अब DMLT करना पड़े. बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. महाराष्ट्र स्टेट पैरामेडिकल एक्ट पूरे राज्य में लागू है, जिसमें BMC भी शामिल है. इस पर कोई भ्रम नहीं है.”

    उन्होंने बताया कि MPC ने इस बाबत BMC आयुक्त को भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और CMS ने भी समर्थन में सर्कुलर जारी किया है.

    मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

    बिना रजिस्टर्ड टेक्नीशियन द्वारा इमरजेंसी लैब सेवाएं संभालना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जरा-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शताब्दी अस्पताल में कितने लैब टेक्नीशियन बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए?
    👉 कुल पांच लैब टेक्नीशियन MPC में रजिस्टर्ड नहीं थे.

    Q2. क्या वे इमरजेंसी सेवाओं में काम कर रहे थे?
    👉 हां, आरोप है कि वे इमरजेंसी लैब में भी कार्यरत थे.

    Q3. लैब टेक्नीशियन के लिए कौन-सी योग्यता जरूरी है?
    👉 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT अनिवार्य है.

    Q4. क्या बिना रजिस्ट्रेशन काम करना अपराध है?
    👉 हां, यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है.

    Q5. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
    👉 MPC के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और सभी पांच टेक्नीशियन ने आवेदन किया है.