Category: Civic Issues

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  • गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    • बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
    • शिक्षा को व्यापार की तरह चलाया जा रहा माफियाओं के हाथों
    • पचास हजार के ऊपर सरकारी स्कूल बंद
    • हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
    • निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
    • दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
    • सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
    • 18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
    • गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
    • उत्तर प्रदेश के 70 प्रतिशत इंजीनियर बेकार
    • देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के…!
    • धर्म की सियासत चमकाने में व्यस्त बीजेपी सरकार
    • बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
    • पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की बूंद जैसा
    • मुफ्त राशन प्रचार में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन का खर्च
    • विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
    • 95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    मुंबई: बीजेपी के कथित चाणक्य अमित शाह ने अंग्रेजी नहीं पढ़ने की वकालत की है। लेकिन सबसे पहले उन्हें अपने बेटे को जिसे बीसीसीआई का सेक्रेटरी दबाव में बनाया है, इससे कहें कि अंग्रेजी न बोले। इसके साथ ही अपनी सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पार्टी से बाहर करें जो विदेश से पढ़कर आए हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी ही पढ़ाई जाती है। साथ ही उन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी जिनके बेटे, बेटियां विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे और जो वहां सेटल्ड हो चुके हैं।

    देश के सारे कॉन्वेंट स्कूल बंद कर दें। सीबीएससी जिसमें अंग्रेजी मीडियम से शिक्षा दी जाती है उसकी मान्यताएं खत्म कर दें। संसद में अंग्रेजी बोलने, सेक्रेटरियो द्वारा अंग्रेजी बोलने लिखने की मनाही कर दें। यहां तक कि संसद में अंग्रेजी बोलने वालों को बरखास्त कर दें। तब आम गरीब आदमी या देशवासियों से अंग्रेजी पढ़ने को मना करें।
    लेकिन अब कोई छात्र किस मीडियम में पढ़ेगा। किस भाषा में बात करेगा सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है?

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    बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ

    एक तो वैसे ही बीजेपी सरकार ने शिक्षा को माफियाओं के हाथों में सौप दिया है, जिसे व्यापार की तरह चलाया जा रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। स्कूल बैग, जूता, मोजा और किताबें वह भी प्राइवेट स्कूलों की जिनका मूल्य चार सौ से कम नहीं है। उसमें भी कमीशन मिलता है। तमाम प्राइवेट स्कूलों में न लाइब्रेरी है, न कंप्यूटर हाल और ना ही साइंस लैब।

    फिर भी स्कूलों को दो चार लाख रुपए लेकर मान्यताएं दी जा रही है, जहां शिक्षा के नाम पर नील बटा सन्नाटा है। ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है। सरकार जिसका दायित्व है कि निःशुल्क शिक्षा देना।नहीं दे रही। तमाम सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। स्कूलों को मर्च किया जा रहा दूर के स्कूलों में।

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    हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां

    शिक्षक आंदोलन रत हैं। बिजली कर्मचारी आंदोलन रत हैं, लेकिन बीजेपी सरकारें दो कार्य कर रही। अब तक पचास हजार से ऊपर तक के सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां किए जाने पर हाईकोर्ट ने सारी नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। वहीं शिक्षा निःशुल्क देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस लाखों में रखी गई है।

    उसके अलावा हर वर्ष एडमिशन फीस और तमाम तरह की फीस की वसूली की जा रही है। यहां तक कि फीस जमा नहीं कर पाने वाले छात्रों को गेट से ही घर लौटाया जा रहा। केंद्र सरकार की नाक के नीचे दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल द्वारा तीन साल में हजारों रुपए बढ़ा दिए जाने और छात्रों के घर लौटाए जाने के कारण अभिभावकों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया। अगर पांच दस वर्ष जीवित रहते तो शिक्षा को समवर्ती सूची से निकालकर समूचे देश में एक ही शिक्षा पद्धति लागू कर देते। पाठ्यक्रम भी एक होते ताकि असमय स्थल परिवर्तन का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। छः से चौदह वर्ष आयु तक शिक्षा का अधिकार देने के बाद उनकी योजना कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दे देते। लेकिन देश का दुर्भाग्य उनकी मृत्यु की साजिश रची गई।जिससे उनका शिक्षा को लेकर सारी योजना ही बंद हो गई।

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    सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..

    अब तो सरकारें सारे के सारे सरकारी स्कूल बंद करने पर तुली हुई हैं। हमारी सरकारों ने नारे बड़े लोकलुभावन दिए थे, कि “पड़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” लेकिन कार्य उसके ठीक विपरित किए जा रहे हैं। भारी भरकम फीस के कारण लाखों छात्र पांचवीं और आठवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा पाना देश के नब्बे प्रतिशत लोगों के बूते में नहीं है।

    18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित

    शिक्षा पर 18% की जीएसटी लगाकर सरकार ने आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया है। कैसे पड़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया?
    देश में एक भी कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जो दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में स्थान पा सके। इसका कारण है शिक्षा मद में केंद्र सरकार द्वारा कटौती।

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    गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक

    अंग्रेजी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी पढ़े लिखे छात्रों को ही खुद अपने ही देश में प्राइवेट जॉब मिल पाता है। बिना अंग्रेजी के कहीं भी कोई पूछता तक नहीं है। विदेश जाने, उच्च शिक्षा प्राप्ति अथवा जॉब पाने के लिए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य है। ज्ञान विज्ञान की समस्त पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए अरबों खरबों रूपये व्यय करने होंगे। बिना अंग्रेजी ज्ञान के कोई भी विदेश जाकर उच्च शिक्षा या नौकरी या व्यवसाय कर ही नहीं सकता। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी नहीं पढ़ाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक है।केंद्रीय मंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।

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    निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें

    जबकि शिक्षा को व्यापार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का दायित्व है, कि सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करना। लेकिन सरकार अपने दायित्व पालन से भाग रही है। निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देकर प्रति परिवार एक रोजगार के संसाधन जुटाना सरकार का दायित्व है। जब नब्बे प्रतिशत बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगे। शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि उत्तर प्रदेश के सत्तर प्रतिशत इंजीनियर बेकार हैं। उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि प्राइवेट शिक्षा संस्थान प्रैक्टिकल कहां करते हैं? बिना प्रेक्टिकल के ज्ञान कैसे आयेगा?

    देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के हैं जिनका लक्ष्य दौलत अर्जित करना है। इसीलिए सरकार शिक्षा को माफियाओं के हाथों सौंप चुकी है। सरकार डरती है कि कहीं शिक्षा व्यवसाय पर नकेल कसी गई तो उसके लोग ही सरकार गिरा देंगे। सत्ता बचाने के लिए देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना सरकार को शोभा नहीं देता। शायद यही वजह है, कि सरकार को चुनाव जीतने के लिए धर्म, नफरत का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने वादों को जो कभी पूरे ही नहीं किए सरकार ने, वोट मांगने की हिम्मत ही नहीं है। इसलिए धर्म की सियासत चमकाने का कार्य कर रही सरकार।

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    बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद

    सिर्फ़ दो बीजेपी शासित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में ही 60% सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। दोनों राज्यों के दो करोड़ बच्चे चौथी या आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है, कि पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की भी बूंद जैसा नहीं है। माता पिता मेहनत करते हैं। महीने में आठ से दस दिन मजदूरी मिलती है शेष दिन फांका कटता है। परिवार का पेट भरे कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा लेने भेजें?

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    95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    दरअसल पांच किलो मुफ्त राशन का प्रचार करने में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन खर्च आ जाता है। विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकारें नहीं चाहती कि अस्सी करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाएं। ऊपर से अंग्रेजी नहीं पढ़ाने की वकालत? यह वकालत वे लोग करते हैं जो कभी अंग्रेजों की दलाली करते और गांधी के आंदोलन को कुचलने के लिए वायसराय को खत लिखा करते थे। आज उन्हीं की औलादें सत्ता में आई हैं, तो देश को निरक्षर रखने के तमाम उपाय करते रहते हैं। विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था चंद पूंजीपतियों की है जबकि सच तो यह है कि देश की 95% आबादी बीजेपी शासन में हैंड टू माउथ हो चुकी है।

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    विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार

    इतने टैक्स तो लुटेरे अंग्रेजों ने भी नहीं लगाए थे जितनी हिंदुत्ववादी सरकार टैक्स लगाकर 95% जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र करती है। गरीबी झेली है। गरीब मां का बेटा हूं। बर्तन माजती थी मां कहने वाले पीएम दिन में पांच ड्रेस वह भी लाखों के बदलते रहते हैं। नेहरू पर आरोप लगाने वाले सोचें कहां राजा भोज कहां गंगू तेली। नेहरू परिवार आजादी के पहले से ही संपन्न रहा था। उनकी बराबरी तो क्या पैरों की धूल बराबर आज कोई नेता नहीं। हर मोर्चे पर नाकाम सरकार केवल विज्ञापनों, व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के द्वारा ब्रेन वाश करके मूर्ख बनाती और धर्म आस्था के नाम पर वोट मांगती सरकार।

  • महाराष्ट्र में 5 महीने में 30,000 से अधिक लोग लापता, मुंबई में सबसे ज्यादा

    महाराष्ट्र में 5 महीने में 30,000 से अधिक लोग लापता, मुंबई में सबसे ज्यादा

    महाराष्ट्र में पुलिस रिकार्ड के मुताबिक एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां औरतन रोजाना 200 से अधिक लोग गायब हो रहे हैं। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    महाराष्ट्र में अचानक लापता होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले 5 महीने में पूरे राज्य में 30,000 से अधिक लोग लापता हो गए हैं।
    पुलिस के आंकड़ों के हवाले से पता चला है कि लापता होने वालों में मुंबई शहर को सबसे अव्वल बताया जा रहा है। राज्य में और शहरों के मामले में मुंबई सबसे आगे है, जहां जनवरी से मई के बीच में 3475 लोग गायब हुए हैं। जो कुल मामलों का 10 प्रतिशत से अधिक मालूम होता है। जबकि यह आंकड़े पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। More than 30,000 people missing in Maharashtra in 5 months, most in Mumbai

    रोज लापता हो रहे 200 लोग

    खबरों के मुताबिक, राज्य में पिछले 5 महीने में 30,113 लोग, यानी रोजाना औसतन 200 लोग गायब हो रहे हैं।
    लापता लोगों के मामले में मुंबई के बाद दूसरे स्थान पर ठाणे का नंबर सामने आ रहा है। जहां 5 महीन में 2,003 लोगों की गुगशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वैसे भी यहां अक्सर लापता व्यक्तियों की संख्या ज्यादा होती है। इसके बाद तीसरे स्थान पर अहिल्याबाई नगर बताया जा रहा है, जो आबादी में बेहद कम है। लेकिन यहां 1411 गुमशुदगी के मामले दर्ज हैं।

    लापता लोगों में महिलाएं अधिक

    सबसे अधिक गुमशुदगी के मामले मुंबई, ठाणे और अहिल्या नगर के बाद पुणे और नासिक ग्रामीण में हैं। पुणे में 1,364 और नासिक में 1,338 लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज हैं। ये राज्य के शीर्ष-5 शहर हैं, जहां लापता व्यक्तियों की संख्या अधिक है।
    लापता कुल 30,113 लोगों में 12,467 पुरुष और 17,646 महिलाएं हैं। इसमें नाबालिग शामिल नहीं है क्योंकि उनका केस अपहरण में दर्ज किया जाता है। फरवरी में लापता लोगों की संख्या कम है, जबकि मार्च में 17 प्रतिशत बढ़ी है। More than 30,000 people missing in Maharashtra in 5 months, most in Mumbai

    गुमशुदा होने के क्या कारण हो सकते हैं?

    पुलिस रिकार्ड में दर्ज मामलों के मुताबिक, लापता होने के अलग-अलग कारण होते हैं। इन लापता लोगों में खुद से घर छोड़ने वाले, मानसिक बीमारी, मानव तस्करी और प्राकृतिक आपदा में गायब लोग शामिल हैं। इनका पता लगाने के लिए पुलिस तकनीक का सहारा ले रही है। साथ ही सार्वजनिक सहयोग को भी बढ़ा रही है। More than 30,000 people missing in Maharashtra in 5 months, most in Mumbai

  • अब मुंबई की सड़कों से हटेंगे बेकार, कबाड़ और लावारिश गाड़ियां, बीएमसी ने शुरू की सख्त कार्रवाई

    अब मुंबई की सड़कों से हटेंगे बेकार, कबाड़ और लावारिश गाड़ियां, बीएमसी ने शुरू की सख्त कार्रवाई

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका अब सड़कों पर खड़े बेकार, टूटे-फूटे लावारिश गाडिय़ों पर कार्रवाई करते हुए कबाड़ में बेचने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पुलिस की मदद से एक्शन लेने के बीएमसी कमिश्नर ने आदेश दे दिए हैं।

    मुंबई: शहर की सड़कों पर खड़े बेकार, टूटे-फूटे और लावारिश गाड़ियों को अब तुरंत हटाया जाएगा। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) कमिश्नर भूषण गगराणी ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसे वाहनों को तुरंत हटाकर उनकी सही तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करें। मुंबई जैसे बड़े शहर में लावारिश और कबाड़ गाड़ियों को सड़कों के किनारे खड़े रहने से ट्रैफिक में परेशानी होती है। आम लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत होती है। इसी वजह से बीएमसी ने यह फैसला लिया है कि अब ऐसे वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। Now useless, junk and abandoned vehicles will be removed from the roads of Mumbai, BMC has started strict action

    ट्रैफिक में रुकावट और लोगों को परेशानी

    पत्रकारों से एक ख़ास बातचीत में भूषण गगराणी ने कहा कि सड़कों को साफ और अड़चन मुक्त बनाना बीएमसी की प्राथमिकता है। बीएमसी ने मई 2025 से हर वॉर्ड में बाहरी एजेंसियों को नियुक्त किया गया हैं जो बीएमसी अधिकारियों के साथ मिलकर बेकार और भंगार गाड़ियों की पहचान कर रहे हैं और उन्हें हटाने के लिए प्रोसिजर चालू कर दिया हैं। अब इस काम में तेजी लाने के लिए सभी को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सिर्फ जुर्माना नहीं, मकसद है सड़कें खाली करना – मुंबई बीएमसी

    भूषण गगराणी ने कहा कि “हमारा उद्देश्य सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि सड़कों को बेकार वाहनों और कबाड़ से मुक्त करना है ताकि मुंबई के लोग आराम से चल-फिर सकें।” Now useless, junk and abandoned vehicles will be removed from the roads of Mumbai, BMC has started strict action

    क्या-क्या हटेगा?

    टूटे-फूटे, छोड़े हुए वाहन, बेकार स्क्रैप और कबाड़, सड़क पर छोड़ी गई अनाधिकृत चीजें।

    आगे क्या होगा?

    पुलिस की मदद से चलाए जाएंगे विशेष अभियान, हर वॉर्ड में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा जो बीएमसी, पुलिस और ठेकेदारों के बीच तालमेल बनाएगा, जिन लोगों ने सड़क पर वाहन या कबाड़ छोड़ा है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। अब बीएमसी ने सड़कों को साफ और सुगम बनाने के लिए कमर कस ली है। अगर आपके इलाके में कोई बेकार वाहन या कबाड़ सड़क पर पड़ा है, तो वह जल्द ही हटाया जाएगा। इस कदम से मुंबई की ट्रैफिक और सफाई व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा। Now useless, junk and abandoned vehicles will be removed from the roads of Mumbai, BMC has started strict action

  • भारत ने की पूर्ण बंदी की घोषणा: 7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक अवकाश निर्धारित

    भारत ने की पूर्ण बंदी की घोषणा: 7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक अवकाश निर्धारित

    भारत सरकार क्या आम लोगों की तरक्की के लिए काम कर रही हैं या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को गिनाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रही है। हालही में भारत सरकार ने देशव्यापी बंद का ऐलान कर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की घोषणा कर दी है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    सोमवार 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद घोषित करने के भारत के फैसले ने पूरे देश में व्यापक रुचि और जिज्ञासा पैदा कर दी है। जबकि यह जानना जरूरी है कि एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पडेगा? सरकार फिलहाल इतिहास में अपना नाम दर्ज करने में सबसे ज्यादा रुची दिखा रही है। उसे फर्क नही पड़ता की इससे देश की जनता पर कैसा असर पड सकता है। जबकि कानून व्यवस्था में इस तरह की कोई भी निति मौजूद नही है। बंद सिर्फ सार्वजनिक हितों के मुद्दों को प्रबलता के साथ सरकार को समझने और अपनी बात मनवाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन यहां तो सरकार खुद की महिमा बखान करने के लिए सार्वजनिक नुकसान करने पर उतारु हो गई है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

    बंद से हागा नुकसान

    सीआईआई (Confederation of Indian Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत के तुरंत 25 से 90 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है। सेवाओं के दोबारा शुरू होने के बाद भी नुकसान चलता रहता है और इसकी भरपाई कभी नहीं हो पाती है।

    सरकारी फरमान

    सरकारी घोषणा के मुताबिक, सार्वजनिक अवकाश मनाने का यह अभूतपूर्व कदम देश के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाने के साधन के रूप में पेश किया गया है। सरकार ने देश की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं को पहचानने और उन पर विचार करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ठहराव की योजना बनाई है। इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल होने के लिए एक दिन प्रदान करना है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय की भावना बढ़े।

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    बंद का कानूनी प्रावधान

    आपको जानकारी देते हुए बता दें कि बंद का प्रावधान क्यों अपनाया जाता है? ये दक्षिण एशियाई देशों जैसे भारत और नेपाल में सरकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर असंतोष जताने का तरीका है। भारत में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए बंद का अधिकार है। संविधान की धारा 19 के तहत राइट टू प्रोटेस्ट मिला हुआ है, जिसे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 का सहारा मिलता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

    इसके तहत सेवाएं ठप पड़ जाती हैं, फिर चाहे वो बैंकिंग हो या फिर ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य। इससे आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है और कई बार मारपीट और खूनखराबे की नौबत भी आ जाती है। कई बार राजनैतिक पार्टियां अपने नीतिगत विरोधों के चलते बंद बुलाती हैं। उनसे असहमत लोग बंद के दौरान अपनी सेवाएं जारी रखने की कोशिश करते हैं तब मारपीट और लूटपाट जैसी घटनाएं होती हैं।

    एक दिन के बंद से कितना नुकसान होता है?

    फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एकदिवसीय देशबंद से लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का सीधा नुकसान होता है। अलग-अलग सेक्टरों में बंद से होने वाला नुकसान अलग-अलग है। जैसे देशभर के बैंक कर्मचारी एक दिन के बंद पर चले जाएं तो तकरीबन 25 हजार करोड़ का नुकसान होता है। रेलवे का नुकसान एक दिन में 24 सौ करोड़ है, वहीं देशभर के मजदूर (असंगठित सेवा) एक दिवसीय हड़ताल करें तो 26 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

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    महामारी के बाद के प्रयास

    महामारी के दौरान, मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया और गैरजरूरी खर्चों को सीमित रखा. इससे जीडीपी तो बढ़ी लेकिन वेतन और खपत में सुधार नहीं हुआ। सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के वरिष्ठ फेलो संजय कथूरिया कहते हैं, “भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह 6.5 से 7.5 फीसदी की विकास दर बनाए रख पाएगी या 5-6 फीसदी तक गिर जाएगी।” India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

    माधवी अरोड़ा कहती हैं कि भारत फिलहाल एक ऊहापोह की स्थिति में है, जहां लोग खर्च नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक रोजगार में सुधार नहीं होता और वेतन वृद्धि धीमी रहती है।

    7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक अवकाश को समझना

    • गृह मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
    • छुट्टियों का असर सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा।
    • दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
    • परिवहन सेवाएँ केवल आवश्यक आवश्यकताओं तक ही सीमित रहेंगी।

    राष्ट्रव्यापी बंद का सरकारी ऐलान क्या है?

    7 जुलाई 2025 को होने वाले पूर्ण बंद से अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं सहित कई क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रुकावट आ सकती है। शटडाउन का उद्देश्य व्यवधानों को कम करना और नागरिकों को नियोजित सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देना है। व्यवसायों को किसी भी संभावित आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए पहले से तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, और स्कूल इस अवसर का उपयोग छात्रों को देश के इतिहास और उपलब्धियों के बारे में शिक्षित करने के लिए करेंगे। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

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    शहरकार्यक्रम स्थल
    दिल्लराष्ट्रीय परेड राजपथ
    मुंबईसांस्कृतिक शो गेटवे ऑफ इंडिया
    बेंगलुरुटेक एक्सपो पैलेस ग्राउंड्स
    कोलकातालिटरेरी फेस्ट विक्टोरिया मेमोरियल
    चेन्नईसंगीत समारोह मरीना बीच
    हैदराबादफूड फेस्टिवल चारमीनार
    जयपुरकला प्रदर्शनी अल्बर्ट हॉल संग्रहालय
    अहमदाबादनृत्य प्रदर्शन साबरमती आश्रम

    बंद की तैयारी का आदेश

    चूंकि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन होने वाला है, इसलिए नागरिकों को सलाह दी गई है, कि वे एक सहज और आनंददायक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए तदनुसार तैयारी करें। व्यक्तियों और परिवारों को सार्वजनिक परिवहन और अन्य सेवाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अपनी गतिविधियों की योजना पहले से बनाने के लिए कहा गया है। व्यवसायों को सलाह दी गई है कि वे छुट्टी के दौरान परिचालन परिवर्तनों के बारे में कर्मचारियों और ग्राहकों को सूचित करें। स्कूल और शैक्षणिक संस्थान को ऐसी गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए कमर कसने के लिए कहा गया हैं, जो छात्रों को इस दिन के महत्व के बारे में शिक्षित कर सके। योजनाओं में किसी भी अपडेट या बदलाव के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सूचित रहना के लिए सभी को महत्वपूर्ण बताया गया है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

    • अपने दिन और गतिविधियों की योजना पहले से बना लें।
    • सार्वजनिक परिवहन के शेड्यूल के बारे में जानकारी रखें।
    • स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लें।
    • दिन का उपयोग पारिवारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करें।
    • सरकार की किसी भी घोषणा से अवगत रहें।

    शटडाउन में सरकार की भूमिका

    7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन की योजना बनाने में सरकार की भूमिका इसकी सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताया गया है। संस्कृति मंत्रालय, अन्य विभागों के साथ मिलकर, राष्ट्रीय एकता और गौरव के विषय से जुड़े कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए अथक प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके, केंद्र सरकार का लक्ष्य इस छुट्टी को निर्बाध रूप से मनाना बताया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय सूचना और अपडेट प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि नागरिक इस दिन के लिए अच्छी तरह से सूचित और तैयार हों जाएं।

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    विभागजिम्मेदारी
    संस्कृति मंत्रालयसांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना
    गृह मंत्रालयसार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना
    शिक्षा मंत्रालयशैक्षिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना
    परिवहन मंत्रालयपरिवहन सेवाओं का समन्वय करना
    स्वास्थ्य मंत्रालयस्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन करना
    सूचना मंत्रालयअपडेट और जानकारी प्रसारित करना

    जन भागीदारी और सहभागिता

    भारत सरकार की घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को राष्ट्रव्यापी बंद सिर्फ़ आराम का दिन नहीं है, बल्कि जन भागीदारी और सहभागिता का आह्वान है। इसमें कहा गया, कि नागरिकों को सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से लेकर सामुदायिक सेवाओं में स्वयंसेवा करने तक, व्यक्तियों के लिए दिन की भावना में योगदान देने के कई तरीके हैं। स्थानीय संगठनों और सामुदायिक समूहों को ऐसे कार्यक्रमों की मेजबानी करने के लिए आमंत्रित किया जाता है जो राष्ट्रीय एकता की थीम के साथ संरेखित हों, लोगों को एक साथ आने और अपनी साझा पहचान का जश्न मनाने के लिए मंच प्रदान करें। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday

    • आयोजित कार्यक्रमों और समारोहों में भाग लें।
    • स्वयंसेवी कार्यक्रमों और सामुदायिक सेवा में भाग लें।
    • स्थानीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गतिविधियों में भाग लें।
    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुभव और कहानियाँ साझा करें।

    लोगों के लिए अवसर बता कर मूर्ख बनाया जा रहा है।

    सरकारी घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद होने से चिंतन और उत्सव मनाने का एक अनूठा अवसर मिलता है, जिससे राष्ट्र गौरव और एकता के साझा क्षण में एक साथ आ सकता है। इस दिन को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार के प्रयास समाज के ताने-बाने को मजबूत करने और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

    7 जुलाई 2025 को बंद का उद्देश्य क्या है?

    बंद का उद्देश्य भारत के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाना है, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है।

    क्या बंद के दौरान आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी?
    हाँ, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी।

    बंद के दौरान नागरिक किन गतिविधियों में भाग ले सकते हैं?
    नागरिक देश भर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामुदायिक सेवा और शैक्षिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

    बंद का व्यवसायों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
    व्यवसायों में अस्थायी परिचालन परिवर्तन हो सकते हैं, और उन्हें न्यूनतम व्यवधान के लिए तदनुसार योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

    शटडाउन के बारे में अपडेट कहां से मिलेगी?
    अपडेट और जानकारी आधिकारिक सरकारी चैनलों और मीडिया आउटलेट के माध्यम से प्रसारित की जाएगी।

  • Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहनों को अब बैंक से मिलेगा जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज

    Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहनों को अब बैंक से मिलेगा जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज

    महाराष्ट्र की लाडकी बहनों को अब आर्थिक निर्भर बनाने के लिए उन्हें मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की तरफ से जीरो इंट्रेस्ट पर कर्ज देने की योजना बनाई गई है। बैंक अब उन लाभार्थी महिलाओं को खुद का व्यवसाय करने के लिए लोन देने जा रही है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    Ladki Bahin Yojana:
    राज्य सरकार की लोकप्रिय ‘लाड़की बहन योजना‘ के तहत अब महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज मिलने जा रहा है। यह योजना मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा लागू की जा रही है, जिसे राज्य सरकार की ब्याज सब्सिडी योजना के साथ जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। इस बैठक में राज्य सरकार के चार महत्वपूर्ण महामंडलों के निदेशक और संबंधित विभागों के सचिव मौजूद थे। बैठक के बाद बैंक के अध्यक्ष प्रवीण दरेकर ने योजना की जानकारी साझा की।

    बैठक में हुआ फैसला

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में वर्षा निवास पर हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई है। बैठक में चार सरकारी महामंडलों के अधिकारी, संबंधित विभागों के सचिव और मुंबई जिला बैंक के अध्यक्ष प्रवीण दरेकर भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा, कि “महिलाओं को बिना ब्याज के कर्ज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।”

    मिलेगा ब्याज पर सब्सिडी

    आई योजना (पर्यटन महामंडल), अण्णासाहेब आर्थिक विकास महामंडल, भटक्या विमुक्त महामंडल, ओबीसी महामंडल इन सभी चार महत्वपूर्ण महामंडलों को इस योजना में ब्याज सब्सिडी के लिए शामिल किया गया है। इन योजनाओं से महिलाओं को 12% तक ब्याज की भरपाई की जाएगी। फायदा यह होगा कि इससे महिलाओं को ज़ीरो इंटरेस्ट पर लोन मिलेगा। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

    मिलेगा 1 लाख तक का लोन

    एक महिला को 1 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए 5 से 10 महिलाओं का समूह बनाकर भी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। बैंक व्यवसाय की जांच-पड़ताल करने के बाद लोन को पास करेगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को मुंबई जिला बैंक में आवेदन करना होगा। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

    12 लाख से अधिक महिलाओं को मिलेगा फायदा

    वर्तमान में 12 से 13 लाख महिलाएं ‘लाड़की बहन’ योजना की लाभार्थी हैं। इनमें से लगभग 1 लाख महिलाएं मुंबई जिला बैंक की सदस्य भी हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। Ladki Bahin Yojana: Now girl sisters will get loan from bank at zero interest

  • बॉम्बे हाईकोर्ट: संविधान झुग्गीवासियों का रक्षक, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का अधिकार

    बॉम्बे हाईकोर्ट: संविधान झुग्गीवासियों का रक्षक, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का अधिकार

    सरकार झुग्गी-झोपड़ियों पर जबरन तोड़क कार्रवाई नहीं कर सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट में हुए ऐतिहासिक फैसले में न्यायाधीशों ने स्पष्ट कह दिया, कि संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है।

    मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि भारत का संविधान एक ‘जीवंत ढांचा’ है, साथ ही कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों को संविधान के तहत संरक्षण दिया जाता है। हाईकोर्ट ने विकास नियंत्रण और संवर्धन विनियमन (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो DCPR 2034 के तहत ‘खुले स्थान’ के रूप में आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण किए गए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास का प्रावधान करता है। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

    वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते

    जस्टिस अमित बोरकर और ज‌स्टिस सोमशेखर सुंदरसन की खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कहा, कि मुंबई में खुले स्थानों को बनाए रखने का एकमात्र समाधान कानूनों को सख्ती से लागू करना और अतिक्रमण करने वालों – झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को बेदखल करना है। जजों ने आदेश में कहा, “निश्चित रूप से, जनसंख्या दबाव, आर्थिक असमानता और शहरी गरीबी से मुक्त एक आदर्श दुनिया में, इस दृष्टिकोण को मजबूत संवैधानिक समर्थन मिल सकता है। लेकिन यह न्यायालय मुंबई में शहरी जीवन की वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

    परिस्थितियों को समझना होगा

    संविधान केवल एक सैद्धांतिक दस्तावेज नहीं है, यह एक जीवंत ढांचा है, और यह जिन अधिकारों की गारंटी देता है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, उन्हें वास्तविक, रोजमर्रा की परिस्थितियों के प्रकाश में समझा जाना चाहिए। यह सच है कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है। लेकिन यह भी उतना ही सच है, और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है कि आश्रय और पर्याप्त आवास का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मानव सम्मान और व्यक्तिगत सुरक्षा का एक हिस्सा है।

    हालांकि वह वैध नहीं है पर निंदा नहीं की जानी चाहिए

    अपने 191-पृष्ठ के फैसले में, न्यायाधीशों ने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों या अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोग संविधान के संरक्षण से बाहर नहीं हैं। जस्टिस बोरकर की ओर से लिखे गए आदेश में कहा गया है, “उनके पास भूमि का कानूनी स्वामित्व नहीं हो सकता है, लेकिन उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। जब वे अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि तत्काल आवश्यकता और मजबूरी के कारण भूमि पर कब्जा करते हैं, तो उनके कृत्य की, हालांकि वह वैध नहीं है, निंदा नहीं की जानी चाहिए, बल्कि उसे सहानुभूति के साथ देखा जाना चाहिए। संविधान अपने मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों के माध्यम से यह मानता है कि गरीबी और असमानता संरचनात्मक समस्याएं हैं, और राज्य से उन्हें कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने के लिए कहता है।

    गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार

    जजों ने कहा कि पर्यावरण अधिकारों और आवास अधिकारों को एक दूसरे के विरोधी के रूप में मानने का याचिकाकर्ताओं का तर्क एक गलती होगी। पीठ ने कहा, “दोनों अनुच्छेद 21 का हिस्सा हैं और दोनों ही गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार की रक्षा करते हैं। जिस तरह प्रदूषित हवा और पानी मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, उसी तरह असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और अस्वास्थ्यकर रहने की स्थिति भी नुकसान पहुंचाती है। हरे-भरे स्थानों की इस तरह से रक्षा करना कानूनन गलत और सिद्धांत रूप में अनुचित होगा, जिससे हजारों परिवार बेघर हो जाएं और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया या विकल्प न मिलें। इस तरह की कार्रवाई अनुच्छेद 21 की रक्षा करने के बजाय उसका उल्लंघन कर सकती है।

    पुनर्वास की अनुमति

    ये टिप्पणियां विकास नियंत्रण एवं संवर्धन विनियमन (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए की गईं, जो झुग्गी-झोपड़ियों द्वारा अतिक्रमण की गई मूल रूप से आरक्षित खुली भूमि का उपयोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास के लिए करने की अनुमति देता है। विनियमन ऐसी भूमि के केवल 65 प्रतिशत के उपयोग की अनुमति देता है, यदि उक्त भूमि 500 ​​वर्ग मीटर से अधिक है और यह अनिवार्य करता है कि उक्त भूमि का 35 प्रतिशत हिस्सा खुली जगह, पार्क, उद्यान और/या मनोरंजन के मैदान आदि के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए।

    संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है

    हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि उनके निर्णय को शहर में खुली जगहों को कम करने के लिए राज्य को खुली छूट देने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने स्पष्ट कर दिया, कि संविधान झुग्गीवासियों की रक्षा करता है, उन्हें सम्मान, सुरक्षा और जीवन के बुनियादी मानकों के साथ जीने का समान अधिकार है। Bombay High Court: Constitution is the protector of slum dwellers, they have right to live with dignity, security and basic standards of living

  • शिवसेना के डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर लोगों से की अपील

    शिवसेना के डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर लोगों से की अपील

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    शिवसेना शिंदे गुट के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया और लोगों से इसे अपने जीवन में उतारने की अपील की। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    योग का महत्व

    डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    योग की आवश्यकता

    अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।” Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

    इसे भी पढ़े:- योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं, हमारी सनातन संस्कृति का मूल भी है- अभिषेक वर्मा

    श्रीमती अंका वर्मा ने कहा, “योग ने मुझे मातृत्व, व्यवसाय और अध्यात्म में संतुलन बनाना सिखाया—यह मेरे जीवन का आंतरिक मार्गदर्शक बन गया है।”

    राजकुमारी निकोल वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में योग मुझे मानसिक शांति और स्थिरता देता है—यह मेरा आत्मबल है।”

    कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, प्रसाद वितरण और योग को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम साबित हुआ। Shiv Sena’s Dr. Abhishek Verma appealed to the people on Yoga Day

  • महाराष्ट्र की सरकार क्या करप्शन को खत्म करने के लिए काम कर रही है? भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी कैसे मिला मंत्री पद

    महाराष्ट्र की सरकार क्या करप्शन को खत्म करने के लिए काम कर रही है? भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी कैसे मिला मंत्री पद

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दुसरी बार जब से मुख्यमंत्री का पद भार संभाला है तब से ही भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर सख्त हो गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि फडणवीस ने अतीत में जिनपर करप्‍शन के आरोप लगाए थे, अब वे नेता उनकी कैबिनेट में मंत्री बने हुए हैं। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    महाराष्‍ट्र में इस बार का विधानसभा मुख्‍य रूप से दो खेमों के बीच लड़ा गया था। एक तरफ भाजपा की अगुआई वाली महायुति और दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्‍व में महाविकास अघाड़ी मैदान में थी। महायुति ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्‍ता में वापसी की और देवेंद्र फडणवीस को फिर से प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने का मौका मिला। महाराष्‍ट्र में भ्रष्‍टाचार पर सीएम फडणवीस ने बड़ी बात कही है. उन्‍होंने कहा कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनके शासनकाल में करप्‍शन पर लगाम लगाने की कोशिश किया जाएगा और उस दिशा में काम भी महायुति की सरकार करेगी। जबकि महाराष्‍ट्र में करप्‍शन हमेशा से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    खुद ने लगाया था भ्रष्टाचार के आरोप

    दरअसल, महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा गया था कि अतीत में उन्‍होंने जिनपर भ्रष्‍टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था। जैसे अजित पवार और छगन भुजबल जैसे और भी नेता अब महायुति गठबंधन की सरकार में कैबिनेट मंत्री कैसे बन गए हैं। ऐसे में भ्रष्‍टाचार पर लगाम कैसे लगाई जा सकता है? इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपनी तरफ से गारंटी देते हुए जोर दिया कि पहले जो हुआ वो हो गया लेकिन हमारी सरकार में भ्रष्टाचारी के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    महाविकास अघाडी मे थे मंत्री

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनकी सरकार भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए काम करेगी। बता दें कि अजित पवार और छगन भुजबल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। महाविकास अघाड़ी की सरकार के दौरान मंत्री रहे अजित पवार पर अनियमितता के आरोप लगे थे। अब अजित पवार महाराष्‍ट्र महायुति गठबंधन की मौजूदा सरकार में राज्य के उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाल रहे हैं। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    उद्धव ठाकरे ने दिया धोखा

    भ्रष्‍टाचार पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि “राजनीति की यही सच्चाई है। राजनीति में आप इन चीजों से मुंह मोड़कर आगे नहीं बढ़ सकते। साल 2019 में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद और जब ये घोषणा हुई कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, तो मेरे रास्ते में रोड़े अटकाए गए। घोषणा के बाद भी उद्धव ठाकरे ने हमें धोखा दिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने हमें धोखा दिया।” उन्होंने कहा, राजनीति मे आपको टीके रहने के लिए रास्ता खोजना पड़ता है, तो हमने रास्ता निकाला। एक सही रास्ता था, लेकिन हमारे साथी उस रास्ते से भटक गए, तो हमने जिन्हें साथ ले सकते थे, उन्हें साथ लिया और आगे बढ़े।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    समझौता करना पड़ा

    उन्होंने यह भी कहा कि “मैंने राजनैतिक सिद्धांत का हमेशा से पालन किया है और हमेशा इसे कायम रखा है। इसलिए मैंने हमेशा अपनी राजनीति को पकड़े रखा। लेकिन जब आप राजनीति में काम करते हैं, तो कभी-कभी आपको समझौता करना पड़ता है। लेकिन, अगर मैं मुख्यमंत्री हूं, तो मैं अपने मंत्रिमंडल में किसी को भी गलत काम नहीं करने दूंगा। मैं आपको गारंटी देता हूं कि यह सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    राजनीतिक अवसरवाद पर क्‍या बोले?

    मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राजनीतिक अवसरवादिता पर भी सवाल पूछा गया। उनसे पूछा गया कि क्या राजनीतिक अवसरवादिता तब से बदल गई है, जब आपने शुरुआत की थी? या यह हमेशा से ऐसा ही रहा है? सीएम फडणवीस ने कहा, “यह हमेशा से ऐसा ही था। इसे इस तरह के चक्र के रूप में देखें। जैसे 1978 में महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव हुआ था। उस वक्त शरद पवार ने ठीक इसी तरह सरकार बनाई, फिर अगर आप 1992 को देखें, तो शरद पवार की सरकार के पास बहुमत नहीं था और उन्होंने शिवसेना को तोड़कर सरकार बनाई।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

    राजनीति में गिरावट स्वीकार करना होगा

    फडणवीस ने जानकारी देते हुए बताया, कि “उस समय छगन भुजबल उनके साथ गए और शिवसेना को तोड़कर उन्होंने अपनी सरकार बनाई। मुझे लगता है कि राजनीतिक अवसरवादिता कोई नई बात नहीं है। यह हमेशा से होता आया है। मुझे लगता है कि राजनीतिक मूल्य में गिरावट आई है। हमें इसे स्वीकार करना होगा और हमें इसके बारे में सोचना भी होगा।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?

  • बीन अनुभवी अब सुप्रीम कोर्ट में करेंगे वकालत, मोदी के आशीर्वाद से मंत्री की बेटियां बन गई सरकारी वकील

    बीन अनुभवी अब सुप्रीम कोर्ट में करेंगे वकालत, मोदी के आशीर्वाद से मंत्री की बेटियां बन गई सरकारी वकील

    Narendra-modi-nitish-kumar-sanjay-jha
    • वकालत का मौका बहुत ही कम मिलता है सुप्रीम कोर्ट में..!
    • गठबंधन करने वाले दल को ही खत्म कर देना बीजेपी की खासियत
    • नितीश कुमार की पार्टी को खत्म करने की चाल..
    • मोदी और शाह के अत्यंत करीबी संजय झा की दोनो बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
    • झा ने स्वयं सोशल मिडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए किया पोस्ट
    • सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन

    मुंबई: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट बनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वकालत का अनुभव या किसी सीनियर के अंडर में वर्षों तपस्या करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत का मौका बहुत कम ही मिलता है लेकिन मोदी सरकार जिस पर मेहरबां हो जाए। जिस पर कृपा दृष्टि पड़ जाए तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता।
    जेडीयू के सांसद ही नहीं कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं संजय झा और मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री भी।

    कौन है संजय झा?

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    मोदी शाह के अत्यंत विश्वसनीय भी हैं, इसलिए उन पर विशेष कृपा दृष्टि बरस रही है क्यों कि संजय झा और अन्य मंत्री जो जेडीयू के हैं मोदी को तीसरी बार बहुमत नहीं मिलने के बावजूद जेडीयू का समर्थन मिला, लेकिन मंत्रियों को तोड़ने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी को ही खत्म करने की चाल चली गई है। सबको अपने कर्म का फल भोग मिलना निश्चित है।

    सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति

    नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद बगावत पर उतर कर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।बीजेपी की यही खासियत है। जिस दल के साथ गठबंधन करती है, उसे ही खत्म कर देती है। अकाली दल और शिवसेना का हश्र सभी को याद होगा। अब बारी नीतीश कुमार के जेडीयू पार्टी की है। इसीलिए सारी मान मर्यादा तोड़कर संजय झा की दो बेटियों जिनमें से एक ने 2023 में और दूसरी ने 2025 में एलएमएम किया है। जिन्हें वकालत का अनुभव भी नहीं है इनको सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति मिल चुकी है।

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    संविधान की मर्यादा ही नही

    जिसका जिक्र स्वयं झा ने सोशल मीडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए पोस्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन है यह। इसी मुद्दे पर जेडीएस नेता ने पूछा है, कि कितने ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सुप्रीमकोर्ट में सरकार की सेवा का अवसर दिया गया है? इसके पहले भी आरएसएस विचारधारा के लोगों को बिना आई ए एस परीक्षा उत्तीर्ण हुए ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष नियुक्त कर मोदी सरकार ने जता दिया था कि उसे संविधान की मर्यादा या कोर्ट और कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है।

  • डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    इजराईल के यहूदी जर्मनी से हिटलर की तानाशाही और लाखों यहूदियों को पकड़कर ज्वलनशील चैंबर में बंद कर जलाए जाने के डर से अपना जीवन बचाने के लिए भाग खड़े हुए। दुनिया के किसी देश ने उन्हें पनाह नहीं दी। लेकिन चूंकि फिलिस्तीन उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था तब अंग्रेजों ने उन्हें फिलिस्तीन में शरण दिया। लेकिन यहूदियों ने धीरे धीरे फिलिस्तीनी इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
    प्रसिद्ध और संपन्न नगर गाजा पर इतनी अधिक बमबारी की जिसमें अस्पताल तक नहीं छोड़ा। दूध मुहे बच्चों का भी नरसंहार किया। गाजा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टेढ़ी नजर है। वे गाजा को हड़पना और वहां इजराईल की सहायता से व्यापारिक संकुल बनाना चाहते हैं। जिस तरह भारत में मुसलमानों को किरायेदार कहा जा रहा है उसी तरह यहूदी तो किरायेदार भी नहीं शरणार्थी हैं। जैसे कश्मीर से भगाए गए पंडित खानाबदोश हालत में ट्रांजिट कैंपों में नरकीय जीवन जीने को अभिशप्त कर दिए गए हैं।
    हिंदू वादी सरकार पिछले ग्यारह वर्षों में कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने की बात करती रही, लेकिन कुछ किया नहीं। अनाथ बनाकर छोड़ दिया। बीमारी, अभाव और गंदगी में घुट-घुट कर मरने के लिए।
    कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण करने का आरोप लगाने वाली हिंदूवादी सरकार और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए प्रयत्नशील आरएसएस ने उन कश्मीरी पंडितों की ओर झांकने की जहमत तक नहीं उठाई। फिर उनके लिए आवाज कैसे उठाती?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की दोगली अनीति देखिए। एक तरफ वे ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने के लिए वार्ता कर रहे हैं, तो वहीं इजराईल को ईरानी परमाणु प्रोजैक्ट पर हमला करने को भी कह रहे हैं। परमाणु वार्ता संपन्न हुई नहीं कि इजराईल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर दो सौ बम वर्षक विमान भेजकर आधा दर्जन ठिकानों पर बम गिरा कर दो वैज्ञानिकों, सेना के कमांडरों की हत्या कर दी।
    स्वाभाविक है ईरान बदले की भावना से इजराईल पर हमला करता रहा। जिस तरह भारत को आत्मरक्षार्थ आतंकवादी पाकिस्तान पर हमला करने का अधिकार है। उसी तरह ईरान को भी इजराईल पर हमला करने का मौलिक अधिकार मिल जाता है। ईरान ने इजराईल पर इतनी अधिक बमबारी की, कि उसके परमाणु ठिकानों और सेना का संहार कर दिया। इस वज़ह से इजराईल के पास सैनिकों की कमी हो गई है। जिस कारण वह सेना में नई भरती करने को मजबूर हो गया है।
    इजराईल अपने नुकसान को हमेशा छुपाता रहता है। नए सैनिक भरती करने से ही पता चल जाता है कि ईरान ने उसे कितनी क्षति पहुंचाई है? धूर्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान पर इजराईली हमले में उनका कोई हाथ नहीं है। ईरानी हमले से डर कर अमेरिका ने अरब देशों से अपने सैनिक हटा लिए हैं। दियागोगरसिया में अमेरिका ने अपना सैनिक बेस बनाया हुआ है। ईरान के पास सात सौ किलोमीटर दूर तक मार करने के लिए मिसाइल की कमी है। इसलिए दियागोगरसिया पर हमला नहीं कर पा रहा। इसका मतलब यह नहीं कि ईरान चीन और रूस से लंबी दूरी तक मारक मिसाइल नहीं ले सकता। जिस दिन ईरान ने रूस और चीन से लंबी दूरी तक मार करने की मिसाइल खरीद ली, उसी दिन अमेरिकी बेस पर हमला करके अमेरिका को भारी क्षति पहुंचा सकता है।
    जो डोनॉल्ड ट्रंप बारंबार भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू से तौलते हुए सीज फायर का ऐलान करते हुए बार-बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापार का दबाव डालकर सीजफायर करा दिया है। दर्जनों बार यही दोहराते रहने वाला धूर्त ट्रंप अब कहने लगा, कि उसने दबाव डालकर सीजफायर नहीं कराया।
    धूर्त ट्रंप की जुबान का क्या भरोसा? वह तो भारत को चीन के खिलाफ एक मोहरा मानता है। दूसरी तरफ भारत को विकसित होते देख उसकी छाती पर सांप लौटने लगता है। भारत को कमजोर करने के लिए ट्रंप पाकिस्तान को सैन्य हथियारों और विभिन्न स्रोतों से अरबों डॉलर्स कर्ज दिलाकर पाकिस्तान पर आजमान करते हुए चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है।
    भारत को बारंबार अपमानित करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा। अमेरिकी सेना की 250 वी वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आमंत्रित कर भारत को फिर से अपमानित किया है। पता नहीं मोदी की कौन सी दुखती रग वह जब चाहे दबा देता है और भारत के प्रधानमंत्री सरेंडर हो जाते हैं। बड़बोले ट्रंप की किसी बात का जवाब ही नहीं दे सकते। शायद मोरल ही नहीं है वर्ना शक्ति संपन्न राष्ट्र भारत के प्रधानमंत्री होते हुए भी क्यों ट्रंप की घुड़की सहन करते हैं?
    राहुल गांधी इसी बात पर नरेंद्र का सरेंडर कहकर तंज कसते हैं। ईरान और इजराईल का घमासान ट्रंप क्यों नहीं रुकवा देते? रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को रुकवाने की हैसियत क्यों नहीं है ट्रंप में?
    ट्रंप के दोगलेपन और कुटनीतियों के कारण उनके खिलाफ अमेरिकी जनता उठ खड़ी हो चुकी है। सड़कों पर उतरकर अमेरिकी नागरिक ट्रंप का विरोध करने लगे हैं। उनकी चुनाव में जीत दिलाने में हजारों करोड़ डॉलर लुटा देने वाले अरबपति मस्क भी ट्रंप को गद्दी से उतारने में लगे हैं। संभव है कि जिस बिल को ट्रंप ब्यूटीफुल कहते हुए तारीफों के पुल बांधते हैं सीनेट से पास ही नहीं हो सके। क्योंकि यदि मस्क ने सीनेटरों को ट्रंप के विरोध में लाने के लिए रिपब्लिकन के दो तीन और सीनेटरों को ट्रंप के खिलाफ लाने में सफल हुए तो बिल सीनेट में पास नहीं हो सकेगा। जबकि चार सीनेटर ट्रंप की नीतियों की आलोचना प्रबल तरीके से करके ट्रंप को चेतावनी दे दी है। अगर सीनेट से ट्रंप को ब्यूटीफुल बिल पास नहीं हो सका तो अविश्वास प्रस्ताभ लाकर ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है।
    बहरहाल भारत के सामने चुनौती है। हमारे भारत देश के ईरान और इजराईल दोनों से रिश्ते अच्छे हैं इसलिए भारत को दोनों के साथ संबंध बनाए रखने होंगे, ताकि कोई विरोधी नहीं हो जाए। भारत को रूस के राष्ट्रपति को रूस चीन भारत संगठन पर भी पुनः विचार करना होगा, जो डोकलाम में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद पटरी से उतर गई थी।
    तेहरान में बमों के धमाके सुनाई देने की बात पर ट्रंप को अंदेशा हो गया है कि अब ईरान इजराईल और अमेरिकी बेस पर परमाणु हमला कर सकता है। इसी डर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जी 7 देशों की मीटिंग छोड़कर अमेरिका जाने की योजना ही नहीं बनाई बल्कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को एलर्ट कर दिया है।
    अमेरिका जाकर ट्रंप इमरजेंसी मीटिंग करेंगे इसलिए सभी अधिकारियों को तैयार रहने का आदेश दे दिया है। इजराईली हमले का करारा जवाब देने की योजना ईरान ने बना ली है। कब और कैसे जवाबी हमला ईरान करेगा यह जल्द ही मालूम होगा। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपने सहयोगी स्टॉफ को एलर्ट कर दिया है। ट्रंप को भय है कि रूस चीन और नॉर्थ कोरिया के हस्तक्षेप के बाद विश्वयुद्ध छिड़ना तय है।

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