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मुख्यमंत्री ने कहा कि सहायता कोष योजना में एआई तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए, तालुकावार रोगी मित्रों की नियुक्ति की जानी चाहिए, पैनल में अधिक अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए, जियो-टैगिंग के माध्यम से रोगियों को नजदीकी अस्पतालों की जानकारी प्रदान की जानी चाहिए और एक टोल-फ्री नंबर शुरू किया जाना चाहिए। (Maharashtra Chief Minister’s Relief Fund service will now be available on WhatsApp also)
मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के अधिकारी एवं कर्मचारी हमेशा से ही हेराफेरी और घपले बाज़ी के लिए मशहूर रहे हैं। लेकिन आज आपके सामने कांदीवली पश्चिम का एक ऐसा मामला पेश करने जा रहे हैं, जो घपलेबाजों को भी शर्मसार कर दे। कहते हैं, बीएमसी जो कर दे, कोई पूछने वाला नहीं है। सत्ता या कुर्सी ही सर्वोपरि है। जब तक साहेब कुर्सी पर बैठे रहेंगे दीवान ही रहेंगे। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
क्या है पूरा मामला ?
वाकया है कि 14 अगस्त 1993 में अपने झोपड़े जिसकी माप 15 गुने 10 फीट रही। जिसके मालिक अब्दुल रहमान 90 हज़ार रुपये में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को बेच देते हैं जिसे 1976 के सेंसस में भी 15 गुने 10 का ही दर्ज किया गया है। बीएमसी के जल आपूर्ति विभाग ने 25/09/2017 को पेय जल का कनेक्शन सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या का पता शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग, त्रिकम दास रोड, कांदिवली (पश्चिम) के नाम पर दिया। जबकि बिजली का बिल आकांक्षा आर्केड CHS वड़ापाव शॉप त्रिकम दास रोड के पते पर आता है यानी फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसाइटी द्वारा मौर्या फास्ट फूड टी एंड कोलड्रिंक का प्रीमाइस में होने का पत्र सोसाइटी सेक्रेटरी द्वारा एक पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वॉर्ड को 12/03/2018 को लिखित रूप में दिया गया था। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
चाय की दुकान या फास्ट फूड की दुकान?
लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/03/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया। बीएमसी द्वारा यह पत्र mr. सावंत के नाम का केयर ऑफ दिया गया। जबकि बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स को सिर्फ चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को सिर्फ दो साल के लिए दिया गया। जिसमें शॉप आकांक्षा आर्केड का पता दर्ज किया गया था। हैरानी की बात यह कि गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम से वड़ा पाव बेचने का दर्ज किया गया है। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
क्या है घपला?
इस घपलेबाजी पर तमाम सवाल उठ खड़े होते हैं। वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड क्यों लिखा गया? यदि वड़ा पाव शॉप लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है, तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स शॉप का एक्सेप्ट कैसे हुआ? नेचर ऑफ बिजनेस के अनुसार सिर्फ मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स लिखा गया है तो लाइट बिल में आकांक्षा वड़ा पाव कैसे लिखा जा सकता है? शॉप एंड एस्टेब्लिश यानी गुमास्ता लाइसेंस में आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग के पते पर नेचर ऑफ बिजनेस वड़ा पाव है, तो टी एंड कोल्ड्रिंक्स का क्यों नहीं है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग
इतना ही नहीं सवाल यह भी है कि जब सेंसस में 150 वर्ग फीट है तो गुमास्ता में 120 वर्ग फीट कैसे दर्ज किया गया है? इसमें कौन सा सही है? जबकि झोपड़े की खरीदी में एरिया 150 वर्ग फीट है और फॉर्म P में आकांक्षा आर्केड लिखा है तो बिल्डिंग एंड फैक्टरी विभाग की एन ओ सी जो केवल चाल में लिया जाता है, तो बिल्डिंग में कैसे लिया गया? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
इतने सारे घपलों घोटालों में कौन सा बीएमसी विभाग, एप्लीकेंट और आर्केड बिल्डिंग का सेक्रेटरी सहित तमाम लोग शामिल हैं और तमाम अनियमितताएं हुई या जानबूझकर की गई, कहीं धोखाधड़ी के लिए तो साजिश नहीं की गई? जांच कौन करेगा? और गलत करने वालों को कानून के हवाले कौन करेगा? करेगा भी या नहीं? कौन बता सकता है नियमों कानूनों की हत्या में शामिल तमाम किरदार कौन है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल ने कहा कि भगवती अस्पताल को आम लोगों की सेवा के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) या धर्मार्थ आधार पर चलाया जाएगा।
मुंबई- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मुंबई के बोरीवली इलाके में पुन: र्निर्मित भगवती अस्पताल में मरीजों को सस्ती चिकित्सा सेवा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवती अस्पताल को आम लोगों की सेवा के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) या धर्मार्थ आधार पर चलाया जाएगा। उत्तर मुंबई निर्वाचन क्षेत्र के सांसद पीयूष गोयल ने शनिवार को बोरीवली के स्थानीय मनपा कार्यालय में क्षेत्र में बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान बृहन्मुंबई महानगर पालिका कमिश्नर भूषण गगरानी और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। (Mumbai Bhagwati Hospital will provide cheap treatment under Ayushman Bharat scheme)
सस्ती चिकित्सा का लाभ
गोयल ने कहा, “भगवती अस्पताल को बिना लाभ और बिना नुकसान के आधार पर चलाया जाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि आम लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत सस्ती चिकित्सा मिले।” बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने 500 करोड़ रुपये की लागत से इस अस्पताल का रि डेवलपमेंट कार्य पूरा किया है। बीएमसी के प्रस्ताव के अनुसार, 148 बिस्तरों का उपयोग बीएमसी चिकित्सा उपचार दरों के अनुसार किया जाएगा, जबकि शेष 480 बिस्तरों का उपयोग निजी बिस्तरों के रूप में किया जाएगा। (Mumbai Bhagwati Hospital will provide cheap treatment under Ayushman Bharat scheme)
राजनीतिक दलों का विरोध
बीएमसी ने पुनर्विकसित नागरिक संचालित भगवती अस्पताल को सार्वजनिक और निजी भागीदारी के तहत चलाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं और इस निर्णय का नागरिकों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया जा रहा है। गोयल ने बोरीवली में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में एक ट्वॉय ट्रेन शुरू करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के लिए ट्वॉय ट्रेन के बारे में चर्चा की है। इस ट्वॉय ट्रेन का काम दो साल में पूरा हो जाएगा।” इसके अलावा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री पियुष गोयल ने मालाड के मालवनी क्षेत्र में मैंग्रोव पर अतिक्रमण को लेकर एक पुलिस चौकी स्थापित करने और क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का सुझाव दिया। (Mumbai Bhagwati Hospital will provide cheap treatment under Ayushman Bharat scheme)
उन्होंने उत्तरी मुंबई में तालाबों और रेलवे स्टेशनों के पुनरुद्धार का भी उल्लेख किया। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अधिकारी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की मदद से उत्तर मुंबई में लगभग 11 तालाबों को सुंदर बनाने की योजना बनाएंगे। पीयूष गोयल ने कहा, “दहिसर, बोरीवली, मालाड और कांदिवली रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत योजना में शामिल किया गया है।” उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ चर्चा की है और जनप्रतिनिधियों के परामर्श से जल्द ही स्टेशन विकास योजना तैयार किया जाएगा। (Mumbai Bhagwati Hospital will provide cheap treatment under Ayushman Bharat scheme)
BMC प्रशासन द्वारा जैन मंदिर ध्वस्त किए जाने पर सामुदायिक विवाद के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने मनपा के-ईस्ट वार्ड के प्रभारी सहायक आयुक्त नवनाथ घाडगे को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया। अब मंदिर वहीं बनाया जाएगा। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासन द्वारा शहर के विले पार्ले क्षेत्र में एक जैन मंदिर को गिराए जाने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि शनिवार को जैन समाज के लोगों ने लाखों की संख्या में मोर्चा निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया। तत्पश्चात मनपा प्रशासन ने उसी दिन आनन फानन में वार्ड के सहायक आयुक्त का तबादला कर दिया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
शनिवार को वार्ड कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला गया। महाराष्ट्र गौशाला संघ के परेश शाह ने दावा किया कि धार्मिक नेताओं और महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रसाद लोढ़ा, स्थानीय भाजपा विधायक पराग अलवानी और कुछ अन्य राजनीतिक नेताओं सहित 20,000 से अधिक लोगों ने मार्च में भाग लिया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
परेश शाह ने कहा, “बीएमसी की कार्रवाई से पूरा जैन समुदाय व्यथित है।” उन्होंने मांग की कि महानगर पालिका अधिकारी को निलंबित करे। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्टियों को जवाब देने का समय दिए बिना ही मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा, कि बीएमसी पर मुख्यमंत्री कार्यालय और शहरी विकास मंत्री का कार्यालय पूरी तरह से और सीधे तौर पर नियंत्रण रखता है, जिससे पता चलता है कि इस घटना के लिए वे ही जिम्मेदार हैं। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
The Jain Community is protesting against the @mybmc demolishing a Derasar in Mumbai, 2 days ago.
The BMC is now fully and directly controlled by the Chief Minister’s office and UD minister’s office.
शहरी विकास विभाग का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, जो प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के प्रमुख हैं।
खुद के खिलाफ विरोध का ढोंग
“संरक्षक मंत्री (लोढ़ा) किसके खिलाफ विरोध कर रहे थे? वह जो कर रहे हैं वह डेरासर (मंदिर) को बचाने के बजाय संरक्षक मंत्री के रूप में अपनी शक्तियों का उपयोग करके नाटक कर रहे हैं! “उनके पास बीएमसी में ही एक अवैध कार्यालय है, और उन्हें रियल एस्टेट और ऐसे मामलों का बहुत बड़ा अनुभव है। डेरासर की रक्षा करने के बजाय, अब वह विरोध का नाटक कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि हर कोई यह समझेगा – भाजपा किसी की नहीं है। यह भाजपा सरकार है जो सीएम कार्यालय के माध्यम से बीएमसी चला रही है, “श्री ठाकरे ने आरोप लगाया। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों और धार्मिक ग्रंथों का भी “अपमान” किया गया और इस “षड्यंत्र” के लिए “भाजपा गठबंधन की बुलडोजर सरकार” को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी से बात की जिन्होंने आश्वासन दिया कि उसी स्थान पर एक नया मंदिर बनाया जाएगा। (Mumbai BMC officer transferred after Jain temple controversy)
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भाजपा सरकार पर “अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बिना उचित नोटिस दिए किसी ढांचे को गिराना गलत है। इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”
Mumbai BJP News: मुंबई बीजेपी में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। बदलाव में पार्टी वरिष्ठों की छुट्टी कर रही है और युवाओं को प्राथमिकता दे रही है जिससे कि आगामी बीएमसी के चुनाव में उनका जमकर उपयोग किया जा सके। इससे मुंबई को नया अध्यक्ष मिलने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही पार्टी मंडल अध्यक्षों की संख्या बढ़ा रही है। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में भारतीय जनता पार्टी अपने पदाधिकारियों की सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव करने जा रही है। इस बदलाव में पार्टी वरिष्ठों की छुट्टी करने जा रही है और युवाओं को प्राथमिकता देने वाली है जिससे कि आगामी बीएमसी के चुनाव में उनका जमकर उपयोग किया जा सके। इससे मुंबई को भाजपा की ओर से नया अध्यक्ष मिलने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही पार्टी मंडल अध्यक्षों की संख्या बढ़ा रही है। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
मुंबई शहर में भारतीय जनता पार्टी की ओर से कुल 36 मंडल अध्यक्ष हुआ करते थे। जो इस बार बढ़ा कर इसे 100 कर दिया गया है। बीजेपी अब 100 बूथ के आसपास एक मंडल अध्यक्ष नियुक्त कर रही है। यानि मुंबई की छह लोकसभा, 36 विधानसभा और 227 वार्ड में 100 से ज्यादा मंडल अध्यक्ष हो जाएंगे जो, वर्तमान में 36 मंडल अध्यक्ष के मुकाबले लगभग 3 गुना बढ़ा दिया गया है। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
अमित शाह की नाराजगी
महाराष्ट्र में पदाधिकारियों की नियुक्ति और सदस्यता अभियान बहुत ही धीमी गति से चला, जिस पर अमित शाह ने नाराजगी व्यक्त की थी। उनकी नाराजगी के बाद मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार ने आनन फानन में पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई। लेकिन बैठक के दौरान कई सारे विधायक व पदाधिकारी नदारद रहे। एक पदाधिकारी ने बताया कि बैठक की पूर्व जानकारी नहीं थी। जल्दबाजी में बैठक बुलाई गई, परंतु वे शहर से बाहर होने की वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए सभी छह जिलों में निरीक्षक गए थे। बताया जाता है कि निरीक्षण में हर वार्ड के लिए 3 नाम का चयन किया गया है। सभी का नाम बंद लिफाफे में भेज दिया गया है। 20 अप्रैल को मुंबई सहित महाराष्ट्र भर के मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा की जाएगी। महाराष्ट्र में 1196 मंडल अध्यक्ष बनाए हैं। पहले जहां एक विधानसभा में एक मंडल अध्यक्ष होता था, वहीं अब 100 बुथ पर एक मंडल अध्यक्ष कर दिया है। यानी एक विधानसभा में दो से तीन मंडल अध्यक्ष होंगे। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
उम्र की सीमा तय
बीजेपी ने अनुभव रखने वाले उम्रदराज पदाधिकारियों को साइड कर युवाओं को प्राथमिकता दे रही है। 35 साल से कम उम्र का कार्यकर्ता बीजेपी युवा में काम करेगा। वार्ड अध्यक्ष की उम्र 35 से 45 वर्ष तय की है और 55 साल जिला अध्यक्ष के लिए तय किया है। (Mumbai Senior officials will be removed from the BJP, new posts will be created)
बृहन्मुंबई महानगर पालिका शहर में मानसून से पहले नाला सफाई अभियान की निगरानी करने के लिए वॉर रूम बनाने जा रहा है। साल 2016 में मुंबई नाला सफाई घोटाला के प्रकाश में आने के बाद ठेकेदारों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने नालों में गंदगी निकालने के काम की निगरानी करने के लिए एक समर्पित वॉर रूम स्थापित करने का निर्णय लिया है। जिसकी शुरुआत 1 अप्रैल से हुई थी। इस पहल का उद्देश्य मानसून से पहले पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल कीटाणुशोधन कार्य का लगभग 12 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बीएमसी ने शहर के नालों और मीठी नदी से 9.34 लाख मीट्रिक टन गंदगी हटाने का लक्ष्य रखा है। (Mumbai BMC will create a war room to monitor drain cleaning)
BMC का वॉर रूम कैसा होगा?
अब तक 1.11 लाख मीट्रिक टन गंदगी हटाई जा चुकी है। स्टॉर्मवॉटर ड्रेन विभाग के एक सिविल अधिकारी ने बताया कि वॉर रूम में तीन अधिकारी और 11 सहायक कर्मचारी होंगे। ये कर्मचारी दो शिफ्टों में काम करेंगे। वे सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात 11 बजे तक काम करेंगे।
एक अधिकारी ने बताया, “वॉर रूम नाले से गंदगी ले जाने वाले वाहनों की गतिविधियों पर नज़र रखेगा। यह ठेकेदारों द्वारा भेजे गए पहले और बाद के वीडियो की तुलना करके किए गए काम की पुष्टि भी करेगा। यह सेटअप सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि गंदगी को निर्धारित स्थान पर ही डाला जा रहा है और ठेकेदारों पर कड़ी नज़र रखी जा सकेगी।”
उन्होंने कहा, “गंदगी हटाने के लिए एक दैनिक योजना पहले ही तैयार कर ली गई है, जिससे प्रगति पर नजर रखना आसान हो जाएगा।” बीएमसी नालों और मीठी नदी से गंदगी हटाने के लिए दो साल में 550 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। बीएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मानसून के मौसम की शुरुआत से पहले 75 प्रतिशत नालों से गंदगी हटा दी जानी चाहिए और मानसून के मौसम के दौरान 15 प्रतिशत गंदगी हटा दी जानी चाहिए।
हो चुका है घोटाला
मुंबई में 215 किलोमीटर लंबे बड़े नाले, 156 किलोमीटर लंबे छोटे नाले और 22.25 किलोमीटर लंबी मीठी नदी है। 2016 में प्रकाश में आ चुके ‘मुंबई नाला सफाई घोटाले’ में 2005 से लेकर अब तक 1100 करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आई थीं। इस मामले की जांच फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है।
घोटाले से पहले बृहन्मुंबई महानगर पालिका दो साल के कार्यकाल के लिए ठेकेदारों की नियुक्ति करती थी। वर्ष 2016 के बाद जवाबदेही में सुधार के लिए प्रतिवर्ष अनुबंध प्रदान किये जा रहे हैं और सिर्फ एक साल के लिए कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त किया जा रहा है। (Mumbai BMC will create a war room to monitor drain cleaning)
एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की मांग भी कर रही है।
मुंबई– बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासक ने 3 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मनपा का वार्षिक बजट जारी किया। 744.27 बिलियन रुपए का यह बजट 2024-25 के बजट की तुलना में 20 प्रतिशत ज़्यादा रहा। इस बजट में बुनियादी ढांचे के कोई नए या मुख़्य काम को शुरू करने का उल्लेख नहीं है। हालांकि पहले से ही मंजूर बड़ी परियोजनाएं या फिर चल रही परियोजनाओं को जारी रखने के लिए भारी मात्रा में पैसा ख़र्च करना पड़ेगा। जिसपर मनपा प्रशासन ने संसाधनों का और अधिक बंटवारा करने के बजाय उनका विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए पुराने कार्य को ही पूरा करने पर जोर देते हुए समझदारी का परिचय दिया है।
Bmc चुनाव की संभावना
इस बजट में किसी नए कर की घोषणा नहीं की गई है। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि BMC के चुनाव इसी वर्ष होंगे। परंपरागत रूप से यह देखा गया है कि सरकारें कर वृद्धि की पृष्ठभूमि में चुनाव नहीं लड़ा करती हैं या चुनाव लड़ना पसंद नहीं करती हैं।
Bmc बजट पर काबू
बीएमसी के बजट में पूंजीगत निवेश के लिए 431.62 बिलियन रुपए या कुल बजट के 58 प्रतिशत राशि का प्रावधान दिखाई देता है। इसका उपयोग मुख़्यतः शहर में नई संपत्तियों के निर्माण पर किया जाना है। दूसरी ओर राजस्व ख़र्च में वेतन, पेंशन समेत अन्य संस्थागत ख़र्च भी शामिल हैं। इसके लिए 312.04 बिलियन रुपए या कुल बजट की 41.52 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया गया है। BMC का राजस्व बजट हमेशा से ही काफ़ी बढ़ा हुआ था और अब इसे काबू में लाने की कोशिश होती देखकर अच्छा लग रहा है।
खर्च पर ध्यान देना जरूरी
लेकिन साल जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे राजस्व ख़र्च के बर्ताव पर पहनी नज़र रखनी ज़रूरी होगी। यहां बुनियादी ढांचे के रखरखाव का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है। परंपरागत रूप से म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनुएल्स में मेंटेनेंस शेड्यूल दिया जाता है, जिस पर पूर्व निर्धारित समयावधि के हिसाब से अमल करना होता है। लेकिन नगरपालिका कर्मियों की ओर से होने वाली चूक की वजह से पूर्व में बुनियादी ढांचे की विफ़लता के अनेक मामले देखे गए हैं, जिसमें जनहानि भी हुई है।
ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है, कि राजस्व बजट में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया होगा। कुछ बुनियादी सुविधाओं को नियमित रखरखाव की ज़रूरत होती है जबकि कुछ को उनकी उम्र बढ़ने के बाद भारी या बड़े रखरखाव की आवश्यकता होती है। बुनियादी ढांचे के वार्षिक निरीक्षण और उन्हें बेहतर स्थिति में रखने के लिए राशि का प्रावधान उतना ही आवश्यक है जितना आवश्यक नई बुनियादी सुविधाओं संबंधी संपत्तियों के निर्माण पर पैसा ख़र्च करना होता है।
दुर्भाग्यवश देश की अर्बन लोकल बॉडीज (ULB ) यानी शहरी स्थानीय निकाय, संसाधनों को लेकर काफ़ी संघर्ष करती हैं। यह बात GST की ओर से इन संस्थाओं के राजस्व संबंधी सभी रास्तों पर कब्ज़ा करने के बाद और भी सटीकता से लागू होती है। BMC की स्थिति और भी गंभीर है। इसका कारण यह है कि BMC पर अनेक विशाल परियोजनाओं का काम डाल दिया गया है, जो BMC की पूर्व में मजबूत रही वित्तीय स्थिति पर दबाव में डालने का काम कर रही है।
BMC का कमिटेड फंड
बजट में पहले से चल रही परियोजनाओं पर होने वाले कुल बिल यानी ख़र्च के रूप में 2.32 ट्रिलियन रुपए दर्शाए गए हैं। इस राशि को कमिटेड लायबिलिटी अर्थात प्रतिबद्ध देय राशि के रूप में दिखाया गया है। इस राशि में से 882.51 बिलियन रुपए केवल सड़क और पुलों के लिए ही रखे गए हैं। चूंकि वार्षिक बजटीय प्रावधान से यह बोझ नहीं उठाया जा सकता। इसलिए BMC को अपने भारी भरकम रिजर्व यानी जमा राशि को हाथ लगाना होगा। 817.74 बिलियन रुपए की इस जमा राशि के एक बड़े हिस्से को कमिटेड लायबिलिटी और वर्तमान में जारी निर्माण कार्य पर ही ख़र्च करने की नौबत आ गई है।
BMC के खजाने पर बोझ
ऐसे में यह साफ़ है कि महानगरपालिका के पास मौजूद जमा निधि का खजाना तेजी से खाली होता जा रहा है और यह भविष्य में बहुत ज़्यादा सहायता करने की स्थिति में नहीं होगा। चूंकि हम अनिश्चितता के दौर में रह रहे हैं, जहां अचानक आने वाला संकट शहर के सुचारू संचालन में व्यवधान डालता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय निकाय के पास जमा निधि ही ऐसे संकट को पार करने में उसकी सहायता करती है। लेकिन भविष्य में उसे जमा निधि से सहायता मिलने की संभावना कम ही दिखाई देती है।
बड़ी परियोजनाओं के इस अत्यधिक बोझ को लेकर पड़ने वाला दबाव नगर पालिका के बजट में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी वजह से बजट का पहला स्टेटेड ऑब्जेक्टिव यानी लिखित उद्देश्य फिस्कल डिसिप्लिन अर्थात वित्तीय अनुशासन और सस्टेनेबिलिटी यानी वहनीयता है। इसके तहत दो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला है रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन यानी राजस्व वृद्धि हासिल करना और एक्सपेंडिचर रेशनलाइजेशन यानी व्यय युक्तिकरण अर्थात सोच-समझकर ख़र्च करना।
BMC ने की सरकार से गुजारिश
निश्चित रूप से महापालिका प्रशासन चिंतित है और वह सिविक मशीनरी यानी नगरीय व्यवस्था को अपनी कमर कसने के लिए तैयार होने को कह रहा है। राजस्व वृद्धि करने के लिए नगरपालिका प्रशासन आय अर्जित करने या संसाधन जुटाने के नए स्रोत ख़ोज रहा है। इसकी शुरुआत करते हुए BMC ने राज्य सरकार को गुजारिश की है, कि वह महापालिका की ओर से एकत्रित किए गए प्रीमियम में राज्य सरकार की हिस्सेदारी के प्रतिशत को कम करें, ताकि स्थानीय निकाय को प्रीमियम में ज़्यादा हिस्सेदारी मिल सके। यदि राज्य सरकार ने उसकी यह गुजारिश मान ली तो 2025- 26 के दौरान ही उसे 3 बिलियन रुपए की अतिरिक्त आय होगी।
अधिनियम में संशोधन पर विचार
BMC ने वेकेंट लैंड टेनेंसी (VLT) यानी खाली जमीन किरायेदारी नीति भी जारी की है। इसके तहत वह उसके पास उपलब्ध खाली जमीन को दीर्घावधि की लीज पर दे सकेगा। इसके चलते BMC को 20 बिलियन रुपए मिलने की उम्मीद है। BMC इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या वह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) यूजर चार्ज लगा सकता है? ऐसा करने के लिए वह 2006 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सैनिटेशन बायलॉज यानी अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। उसका मानना है कि ऐसा हुआ तो वेस्ट मैनेजमेंट को इंडिपेंडेंट सस्टेनेबल यानी स्वतंत्रता के साथ वहनीय किया जा सकेगा।
BMC का प्लान
BMC ने कहा, कि वह स्लम्स यानी झोपड़पट्टी में आने वाले 50,000 के आसपास कमर्शियल यूनिट्स पर संपत्ति कर लगाना चाहता है। यह एक साहसिक नवाचार है और इसके चलते ULB को 3.5 बिलियन रुपए मिल सकेंगे। इसके अलावा वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जुड़े दहिसर ‘चेक नाके’ पर एक ट्रांसपोर्टेशन और कमर्शियल हब बनाने का प्रस्ताव है। इससे भी अतिरिक्त आय हासिल हो सकेगी। इसके अलावा BMC की वरली और क्रॉफोर्ड मार्केट जैसे इलाकों में अंडर यूटिलाइज्ड प्लॉट्स यानी कम उपयोग में आने वाले प्लॉट्स की नीलामी करने की भी योजना है। BMC की मनोरंजन कर वसूलने में तेजी लाने, अपनी विज्ञापन नीति को अंतिम रूप देने तथा ट्रेड लाइसेंस फ़ीस में वृद्धि करने की भी योजना है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget
संसाधनों को बढ़ाना भी आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा बेहतर दिनों में शुरू किए गए गैर ज़रूरी ख़र्च में कटौती करके भी पैसा अर्जित किया जा सकता है। BMC अब इस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ऐसा करने के लिए वह ख़र्च में युक्तिकरण की नीति लागू करने की इच्छुक है। इस नीति के तहत वह आस्थापना ख़र्च को न्यूनतम करने, कार्यबल की कुशलता बढ़ाने, 10 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण और प्वाइंट ऑफ यूटिलिटी यानी उपयोगिता के हिसाब से कार्य का चयन करना चाहती है।
BMC की सेवाएं
BMC देश में सबसे ज़्यादा संख्या में सेवाएं मुहैया करवाती है। इसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। यह BMC की सेवाओं में सबसे अहम क्षेत्र है। इनके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। BMC को कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की आवश्यकता है। इसमें शहर की हवा, सॉलिड वेस्ट एंड सैनिटेशन मैनेजमेंट, ओपन स्पेसेस् और बगीचे, बाढ़ शमन एवं आपदा मुस्तैदी विशेषत: बाढ़ प्रबंधन का समावेश है। इन सभी के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं।
यह बात विशेष रूप से संशोधित BRIMSTOWAD (बृहन्मुंबई स्टॉर्म वॉटर डिस्पोजल सिस्टम) मास्टर प्लान के तहत स्टॉर्म वॉटर ड्रेंस यानी बरसाती पानी निकास नाली में की गई वृद्धि से साबित होती है। BRIMSTOWAD मास्टर प्लान में नई नालियों का निर्माण, पुरानी नालियों का विस्तार, होल्डिंग पॉन्ड्स यानी पानी को जमा करने के तालाब और नालों की संख्या में विस्तार के साथ मीठी नदी का समावेश है।
BMC का Water Sistema
BMC सबसे पुरानी बस सेवा BEST का भी संचालन करती है। इस अंडरटेकिंग यानी उपक्रम के लिए 10 बिलियन रुपए दिए गए हैं। इस राशि से वह बसों के अपने काफिले में नई बसों को जोड़ने के साथ ही 2,000 इलेक्ट्रिक बस भी शामिल कर रहा है। मुंबई के पास दशकों से एक मजबूत जलापूर्ति व्यवस्था है। वह इसे इसी तरह मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसी वजह से शहर के जलापूर्ति एवं सीवरेज विभाग को उन्नतिकरण के लिए 134.23 बिलियन रुपए की एक भारी-भरकम राशि दी गई है।
आश्चर्यजनक
आश्चर्यजनक रूप से शहर के डेवलपमेंट प्लान यानी विकास योजना (DP 2034) को लागू करने के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। शहर में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ यानी जिंदगी की गुणवत्ता मुख़्यत: विकास योजना के अमल पर ही निर्भर है। इस बात की संभावना है, कि व्यक्तिगत तौर पर विभागों के लिए किए गए प्रावधान के तहत विकास योजना पर होने वाला ख़र्च शामिल किया गया होगा। लेकिन बजट में DP के लिए अलग से हेड अर्थात मद बनाने को लेकर की गई सिफ़ारिश की उपेक्षा की गई है। DP में यह सिफ़ारिश की गई थी कि DP के लिए अलग से मद बनाकर उसके लिए किए गए प्रावधान को इसमें दर्शाया जाए।
कुल मिलाकर मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बजट में बेहतर करने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। लेकिन यह भी साफ़ है कि जिस ULB को देश की सबसे धनाढ्य यानी संपन्न महापालिका के रूप में पहचाना जाता था। वह अब अपने सामर्थ्य से अधिक काम लेने की वजह से मुश्किल में दिखाई दे रही है। एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की भी मांग कर रही है। यह ऐसे वक़्त में हुआ है जब निर्वाचित स्थानीय निकाय अस्तित्व में नहीं है और महापालिका पर इस वक़्त सीधे राज्य सरकार का ही नियंत्रण है। वर्तमान स्थिति में सावधानी बरतना आवश्यक है। इस स्थिति में बेकार के ख़र्च से बचने की कोशिश होनी चाहिए।
निश्चित रूप से देश की अग्रणी ULB पर 2024 में हुए राष्ट्रीय और उसके बाद नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव का असर पड़ा है। इसी तरह वह अपने आसन्न चुनावों का दबाव भी झेल रही है। इन सारे दबावों के बावजूद मौजूदा स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को आकर्षित करने वाले बुनियादी कार्यों की घोषणा करने की होड़ के कारण शहर के वित्तीय स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम न पड़े। ऐसा हुआ तो एक वक़्त आएगा जब BMC के वित्तीय संसाधनों पर इतना बोझ बढ़ेगा कि वह टूटने की कगार पर पहुंच जाएगी। ऐसा हुआ तो यह घोर त्रासदी होगी।
अदालती दिशा निर्देश के मुताबिक, कलेक्टर या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को याचिकाकर्ता और उनके प्रतिवादी संस्था तथा विवादित जमीन पर कब्जा करने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ नोटिस जारी करें। इसके पश्चात, उन्हें विवादित जमीन का सर्वेक्षण करना होगा और सभी पक्षों की सुनवाई करनी होगी। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
आरोपों की जांच के निर्देश
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई उपनगरीय कलेक्टर को आदेश दिया है कि वह मालाड (पश्चिम) के अक्सा में सरकारी जमीन पर अवैध पे-एंड-पार्क प्रणाली के संचालन के संबंध में अतिक्रमण के आरोपों की जांच करें और 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
पुलिस बीट चौकी की जमीन
9 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति मकरंद एस कार्णिक की बेंच ने नागरिक सेवा सुधार समिति (NGO) के अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान शेख द्वारा दायर जनहित याचिका पर निर्णय सुनाया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिलाधिकारी (Collector) और बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने कंसारी माता आदिवासी सामाजिक विकास संस्था के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, जिसने अवैध पार्किंग सेवा के लिए पुलिस बीट चौकी की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सरकारी निर्देशों के अनुसार, उस जमीन का उपयोग केवल पेवर ब्लॉक, सौर प्रकाश, लाल रेत, वृक्षारोपण और पर्यटन के लिए सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों के लिए किया जाना चाहिए था। मीरचंदानी ने कोर्ट से अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश देने की मांग की। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
कलेक्टर को दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके पश्चात बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि “किसी ने सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण किया है या नहीं, यह एक तथ्यात्मक मुद्दा है और आमतौर पर यह विवादास्पद होता है।” इसीलिए अदालत ने कलेक्टर या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता और उनके प्रतिवादी संस्था और विवादास्पद जमीन पर काबिज अन्य व्यक्तियों को नोटिस भेजें। इसके बाद, कलेक्टर विभाग को विवादित जमीन का सर्वेक्षण करना होगा और सभी पक्षों की सुनवाई करनी होगी। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
Uअतिक्रमण हटाने के निर्देश
अदालत ने यह भी कहा कि अगर संबंधित जमीन सरकारी संपत्ति के रूप में पहचानी जाती है, तो कलेक्टर विभाग कानून के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि यह पूरी प्रक्रिया 12 हफ्ते यानी 3 महिनों के भीतर संपन्न होनी चाहिए और यदि अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता है, तो पुलिस की सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। (The issue of illegal pay and park in Malad West Aksa echoed in Bombay High Court)
मुंबई में पानी सप्लाई करने वाले टैंकरों के हड़ताल से शहर में हाहाकार मच गया है। 10 अप्रैल गुरुवार से शुरू हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर में पानी की किल्लत होने लगी है। अब बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने इस समस्या से निपटने के लिए मुंबई में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
मुम्बई- देश की आर्थिक राजधानी एवं मायानगरी मुंबई शहर में 10 अप्रैल गुरुवार से पानी सप्लाई करने वाले टेंकर संचालकों द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल से पानी का संकट मंडरा रहा है। शहर के रैस्टोरेंट, हॉटेल और कंस्ट्रक्शन साइट्स बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने शहर में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
क्या है मामला ?
टैंकरों को जलापूर्ति करने वाले निजी कुओं के मालिकों को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा जारी नोटिस के विरोध में गुरुवार 10 अप्रैल से मुंबई पानी टैंकर एसोसिएशन (Mumbai Water Tanker Association) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। एसोसिएशन के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन के पास करीब 1,800 पंजीकृत टैंकर हैं, जो शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 350 एमएलडी पानी की आपूर्ति करते हैं। सभी टैंकरों को अनिश्चिकाल के लिए रोक दिया गया। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
व्यापार किया बंद
उन्होंने कहा कि प्राधिकारियों ने 200 वर्ग मीटर जमीन, कुएं के पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड, डिजिटल जल प्रवाह मीटर की स्थापना, बीआईएस मानक का पालन, दैनिक जलग्रहण का सटीक माप और कुछ अन्य चीजों एवं नियमों को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी लेना अनिवार्य कर दिया है। मुंबई जैसे शहर में इन सभी नियमों को लागू करना मुश्किल है। जब तक सरकार इन शर्तों में कुछ ढील नहीं देती, टैंकर सेवाएं फिर से शुरू नहीं होंगी। ऐसी जानकारी देते हुए एसोसिएशन के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि “हमने अपना व्यापार ही बंद कर दिया है।” Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
शहर में पानी की सप्लाई बंद होने से सीधे तौर पर यहां का ज्यादातर कारोबार बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। शहर में हॉटेल, रैस्टोरेंट और इमारतों के कंस्ट्रक्शन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसको देखते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने शहर में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू करने का ऐलान कर दिया है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
क्या है आपदा प्रबंधन अधिनियम ?
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 का उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय तंत्र स्थापित करना है। यह अधिनियम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDA) की स्थापना करता है। यह आपदा प्रबंधन योजनाओं को लागू करने, वित्तीय सहायता प्रदान करने और आपदाओं के दौरान और बाद में आवश्यक सहायता प्रदान करने का प्रावधान करता है। Mumbai Chaos due to strike by water tanker operators, BMC implements Disaster Management Act
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDA): प्रत्येक राज्य में एक SDA होता है जो राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को लागू करता है।
आपदा प्रबंधन योजनाएं: राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाएं बनाई जाती हैं। इन योजनाओं में आपदा की रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्वास शामिल हैं।
वित्तीय सहायता: अधिनियम में आपदा राहत और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
अधिनियम का उल्लंघन: अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।
आपदा प्रबंधन का क्षेत्र: अधिनियम प्राकृतिक आपदाओं, मानव निर्मित आपदाओं और गंभीर दुर्घटनाओं को शामिल करता है।
राज्य आपदा प्रबंधन योजनाएं (SDMP): राज्य आपदा प्रबंधन योजनाएं राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।
अधिनियम के उद्देश्य
प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए एक तंत्र स्थापित करना।
आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना।
आपदाओं से प्रभावित लोगों को राहत और सहायता प्रदान करना।
आपदा प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण करना।
आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना।
मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका क्षेत्र में महिला बचत गट की महिलाएं अब यात्रियों के लिए ऑटो रिक्शा चलाएंगी। मंगलवार, 8 अप्रैल को 50 ऑटोरिक्शा का वितरण विधायक मंगेश कुडालकर, दिव्याज़ फाउंडेशन की अध्यक्षा अमृता फड़नवीस और बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के निदेशक (योजना) डॉ. प्राची जांभेकर के हाथों किया गया। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने महिलाओं को रिक्शा चलाने का निःशुल्क प्रशिक्षण और सभी प्रकार के लाइसेंस उपलब्ध कराए। (50 autorickshaws distributed in Mumbai, now women will drive rickshaws for passengers)
बृहन्मुंबई महानगर पालिका मुंबई में महत्वाकांक्षी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को विभिन्न मंच प्रदान करता है। इसमें बचत गट समूहों को विभिन्न माध्यमों से रोजगार उपलब्ध किया जाता हैं। इसके तहत अब बैंकों द्वारा महिलाओं को कम ब्याज दरों पर ये रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। (50 autorickshaws distributed in Mumbai, now women will drive rickshaws for passengers)
ये रिक्शा अब इन महिला चालकों द्वारा यात्रियों को ले जाने के लिए तैयार हैं। इसके लिए महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण, आवश्यक लाइसेंस, रिक्शा पंजीकरण बैज आदि सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की गईं है। इन 50 महिलाओं में से अधिकतर भांडुप और कुर्ला इलाके की निवासी महिलाएं हैं। (50 autorickshaws distributed in Mumbai, now women will drive rickshaws for passengers)