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  • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    शिवसेना नेता और पूर्व महापौर सुनील प्रभु ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण कार्य का बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधाओं और भविष्य में होने वाली ट्रैफिक समस्याओं पर तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर चल रहे विकास कार्यों का शिवसेना नेता और विधायक सुनील प्रभु ने सोमवार को बीएमसी अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने नागरिकों को हो रही समस्याओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों को कई सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

    🏗️ स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

    विधायक सुनील प्रभु ने बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण से श्रमसाफल्य सोसायटी, श्रीकृष्ण नगर, जयभीम नगर और दिंडोशी महानगरपालिका वसाहत जैसे इलाकों के नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    उन्होंने बीएमसी के रस्ता विभाग, पूल विभाग और परिरक्षण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • श्रीकृष्ण नगर के नागरिकों के लिए संतोष नगर बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए अंडरपास (भुयारी मार्ग) बनाया जाए।
    • पर्जन्य जल वाहिनी (ड्रेनेज लाइन) को सड़क के एक ओर स्थानांतरित कर नया निर्माण किया जाए।
    • गणेश मंदिर-इंदिरा विकास केंद्र मार्ग पर नागरिकों और वाहनों को सुगम आवागमन की सुविधा दी जाए।
    • बीएसटी बसों के लिए टर्मिनल पॉइंट तैयार किया जाए ताकि यातायात में बाधा न आए।

    🚧 आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधा के लिए भी निर्देश

    निरीक्षण के दौरान सुनील प्रभु ने यह भी बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के टनल निर्माण कार्य के चलते बालासाहेब फालके चित्रनगरी के हबाले आदिवासी पाड़ा में लोगों का मुख्य मार्ग बंद हो गया था, जिससे उन्हें आवाजाही में भारी दिक्कतें हो रही थीं।
    अब बीएमसी ने इस “मिसिंग लिंक रोड” का काम शुरू कर दिया है, जिसका शुभारंभ स्वयं सुनील प्रभु ने किया।

    🚦 भविष्य की ट्रैफिक समस्या पर भी होगी बैठक

    दादासाहेब फालके चित्रनगरी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उड्डाणपुल का एग्जिट पॉइंट बनने वाला है।
    विधायक ने बताया कि इस क्षेत्र में भविष्य में वाहन जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
    इसलिए उन्होंने बीएमसी के पूल विभाग, रस्ते विभाग और परिरक्षण विभाग को नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि पहले से योजना बनाई जा सके।

    👥 अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

    निरीक्षण के दौरान विधायक सुनील प्रभु के साथ
    ** पूर्व उपमहापौर सुहास वाडकर**,
    *पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे*,
    ** उद्धव ठाकरे गुट के शाखाप्रमुख संपत मोरे**,
    तथा बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    💬 सुनील प्रभु ने क्या कहा

    “हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़क और पुल नहीं बनाना है, बल्कि आसपास के नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बीएमसी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी हों और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रहे।”
    सुनील प्रभु, विधायक (शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट)


    FAQ सेक्शन:

    Q1. गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड का निरीक्षण किसने किया?
    विधायक और शिवसेना नेता सुनील प्रभु ने बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।
    Q2. निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना और निर्माण कार्य में आवश्यक बदलाव के निर्देश देना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके प्रभावित हैं?
    श्रीकृष्ण नगर, दिंडोशी, जयभीम नगर और हबाले आदिवासी पाड़ा जैसे इलाके इस परियोजना से प्रभावित हैं।
    Q4. ट्रैफिक को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    फालके चित्रनगरी के पास संभावित ट्रैफिक जाम को रोकने के लिए नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
    Q5. इस मौके पर और कौन मौजूद थे?
    उपमहापौर सुहास वाडकर, पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे और बीएमसी अधिकारी।

  • मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में अब लगेंगे वॉटर मीटर, BMC करेगी सप्लाई मॉनिटरिंग शुरू

    मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में अब लगेंगे वॉटर मीटर, BMC करेगी सप्लाई मॉनिटरिंग शुरू

    मुंबई के गोरेगांव से दहिसर तक अब बीएमसी लगाएगी वॉटर मीटर। पानी की सप्लाई में दबाव की कमी और लीकेज की पहचान होगी आसान। पश्चिमी उपनगरों में पानी की कमी पर अब सख्ती से नज़र रखी जाएगी।

    मुंबई: शहर में पानी की सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) अब एक नई पहल शुरू करने जा रही है।
    गोरेगांव से लेकर दहिसर तक के वेस्टर्न उपनगरों (Western Suburbs) में अब वॉटर मीटर (Water Meter) लगाए जाएंगे, जिससे न सिर्फ पानी का दबाव (Water Pressure) मॉनिटर किया जा सकेगा, बल्कि लीकेज और कंटैमिनेशन जैसी दिक्कतों का तुरंत पता चल सकेगा।

    बीएमसी का मानना है कि इन वॉटर मीटरों से न्यायसंगत जल वितरण (Equitable Water Distribution) सुनिश्चित किया जा सकेगा और लंबे समय से परेशान इलाकों में राहत मिलेगी।

    🚰 गोरेगांव से दहिसर तक वॉटर मीटर लगाने की योजना

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर और मलाड (Marve क्षेत्र सहित) जैसे इलाकों में वॉटर मीटर लगाए जाएंगे।
    इन इलाकों में पिछले चार महीनों से लगातार कम दबाव की पानी की सप्लाई (Low Water Pressure) की शिकायतें मिल रही हैं।

    हालांकि मुंबई के सात झीलों में पर्याप्त पानी का भंडार मौजूद है, लेकिन पश्चिमी उपनगरों में पाइपलाइन दबाव और लीकेज की समस्या की वजह से कई सोसायटियों को अब भी कम सप्लाई मिल रही है।

    📉 कम दबाव की समस्या बनी बड़ी चुनौती

    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने हाल ही में उत्तर मुंबई के पानी संकट की समीक्षा बैठक की थी।
    उन्होंने बताया कि दहिसर, मागाठाणे और कांदिवली जैसे इलाकों में पानी का दबाव 40-45 लेवल तक ही रह जाता है, जबकि आदर्श स्तर 60-65 होना चाहिए।

    गोयल ने बीएमसी को सुझाव दिया कि ऐसे इलाकों में जोनल प्रेशर मीटर (Zonal Pressure Meter) लगाकर सप्लाई को ट्रैक किया जाए ताकि तुरंत सुधार किया जा सके।

    🧾 प्रदूषित पानी और पाइपलाइन लीकेज पर सख्त निगरानी

    बैठक में मंत्री ने कहा कि सबसे पहले प्रदूषित पानी और पाइपलाइन लीकेज जैसी शिकायतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों का डिजिटल मैप तैयार किया जाए और सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएं।

    हालांकि कुल सप्लाई बढ़ाने में समय लगेगा, लेकिन यह मॉनिटरिंग सिस्टम तत्काल राहत देने में मदद करेगा।

    🗣️ स्थानीय नेताओं की मांग – ‘बराबर पानी सप्लाई हो’

    बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय ने कहा,

    “शहर के दक्षिण हिस्से से बड़ी आबादी उपनगरों में शिफ्ट हो चुकी है, लेकिन पानी का वितरण उसी पुराने पैटर्न पर है। पश्चिमी उपनगरों को अब भी कम सप्लाई दी जा रही है, जो अनुचित है।”

    स्थानीय नेताओं ने मांग की है कि बीएमसी सप्लाई की रफ्तार बढ़ाए और वॉटर मीटर के जरिए पारदर्शी सिस्टम लाए।

    🏙️ बीएमसी की उम्मीद – अगले साल तक बड़ा बदलाव

    बीएमसी इंजीनियरिंग विभाग का कहना है कि अगले छह से आठ महीनों में यह वॉटर मीटरिंग प्रोजेक्ट पूरा कार्यान्वित (Implemented) हो जाएगा।
    इसके बाद हर ज़ोन में डिजिटल डेटा के ज़रिए पानी की खपत, दबाव और लीकेज की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी।


    FAQ सेक्शन

    Q1. बीएमसी कहां-कहां वॉटर मीटर लगाएगी?
    👉 पहले चरण में गोरेगांव से दहिसर तक के वेस्टर्न उपनगरों में।
    Q2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    👉 पानी का दबाव मॉनिटर करना, लीकेज पकड़ना और न्यायसंगत सप्लाई सुनिश्चित करना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
    👉 मागाठाणे, दहिसर, कांदिवली (वेस्ट) और मलाड (वेस्ट) के मार्वे क्षेत्र।
    Q4. क्या केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर कोई कदम उठाया है?
    👉 हां, उन्होंने बीएमसी को मीटर लगाने और पाइपलाइन लीकेज पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
    Q5. यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
    👉 बीएमसी का लक्ष्य है कि अगले 6–8 महीनों में इसे पूरी तरह लागू किया जाए।

  • दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दहिसर टोल प्लाजा का निरीक्षण कर अधिकारियों को 13 नवंबर तक टोल हटाने की अंतिम चेतावनी दी। कहा – “समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल उखाड़ दूंगा।”

    मुंबई: दहिसर टोल प्लाजा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
    परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शनिवार को टोल प्लाजा का निरीक्षण करते हुए 13 नवंबर तक इसे हटाने की डेडलाइन दी।
    उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी —

    “अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं खुद जाकर टोल प्लाजा उखाड़ दूंगा।”

    इस बीच भाजपा ने टोल को हाईवे पर शिफ्ट करने का विरोध किया है, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    🔹 टोल प्लाजा हटाने पर विवाद क्यों?

    दहिसर टोल प्लाजा पर लगातार ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।
    इसी वजह से टोल को स्थानांतरित करने की मांग उठ रही थी।
    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अधिकारियों को यह टोल हटाने और इसे वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज पार शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।

    लेकिन इस प्रस्ताव का भाजपा और मंत्री गणेश नाईक ने खुलकर विरोध किया।
    इससे सरकार के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं।

    🔹 निरीक्षण में भड़के सरनाईक

    शनिवार सुबह प्रताप सरनाईक दहिसर टोल प्लाजा पहुंचे।
    निरीक्षण के दौरान मुंबई पुलिस, MSRDC, मनपा, टोल कंपनी और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
    लेकिन सरनाईक ने देखा कि एक तरफ से फ्रेम हटाने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ।
    जब अधिकारियों ने और वक्त मांगा, तो मंत्री नाराज़ हो गए और कहा —

    “13 नवंबर को मैं फिर आऊंगा। अगर तब भी यही हाल रहा, तो खुद टोल बूथ तोड़ दूंगा।”

    🔹 निरीक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन

    सरनाईक जब टोल को वर्सोवा क्रीक ब्रिज के पार स्थानांतरित करने का निरीक्षण करने पहुंचे,
    तो कांग्रेस नेता विजय पाटिल और उनके समर्थकों ने विरोध जताया।
    विरोधियों ने कहा —

    “मुंबई का टोल प्लाजा वसई क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। यहां पहले से सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक भी है। यह स्वीकार्य नहीं होगा।”

    🔹 सड़क साफ करने और डिवाइडर हटाने के आदेश

    निरीक्षण के बाद मंत्री सरनाईक ने मुंबई की ओर आने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर हटाने और
    वाहनों के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया।
    उन्होंने कहा कि

    • क्रेन, बेंच और अन्य बाधाएं हटाई जाएं।
    • अनावश्यक होर्डिंग, लोहे के खंभे और अतिरिक्त बूथ तोड़े जाएं।
    • केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए जरूरी बूथ ही रहें।

    साथ ही, मीरा-भायंदर की ओर आने वाले टोल बूथ को भी शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।


    FAQ सेक्शन

    1. दहिसर टोल हटाने की आखिरी तारीख क्या है?
    → परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 13 नवंबर तक की डेडलाइन दी है।
    2. उन्होंने क्या चेतावनी दी?
    → सरनाईक ने कहा, “अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल तोड़ दूंगा।”
    3. टोल को कहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव है?
    → वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज के पार स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
    4. किसने विरोध किया है?
    → भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग का विरोध किया है।

  • HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    मुंबई के कांदिवली स्थित BMC के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को अपेंडिक्स की सर्जरी से मना कर दिया गया। मरीज को दो बार रेफर किया गया और बाद में नायर अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। जानिए क्या कहती है सरकार और कानून।

    मुंबई: कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को सर्जरी से इनकार किए जाने का मामला सामने आया है।
    37 वर्षीय यह व्यक्ति, जो मलवणी इलाके का रहने वाला है, गंभीर पेट दर्द और अपेंडिक्स की शिकायत के चलते 31 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था।
    अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में 7.5 mm का अपेंडिक्स और किडनी स्टोन की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने शुरू में आपातकालीन अपेंडिक्स सर्जरी की तैयारी की, लेकिन HIV रिपोर्ट आने के बाद सर्जरी रोक दी गई।

    मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर कुपर अस्पताल रेफर कर दिया गया — और रेफरल नोट में यह स्पष्ट लिखा गया कि वजह मरीज का HIV पॉज़िटिव होना है।

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    🔹 एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक — मरीज का दर्द बढ़ा

    कुपर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने रेफरल पर सवाल उठाए और मरीज को वापस लौटा दिया।
    इसके बाद शताब्दी अस्पताल ने फिर से मरीज को नायर अस्पताल रेफर किया, जहाँ अब उसका इलाज चल रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल जूनियर डॉक्टरों की गलती नहीं थी — क्योंकि मरीज को भर्ती करने और डिस्चार्ज करने दोनों में सीनियर डॉक्टरों की जानकारी शामिल थी।
    वर्तमान में मरीज नायर अस्पताल में ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।

    🔹 अस्पताल की सफाई में फंसी जान? शताब्दी अस्पताल ने दी सफाई

    शताब्दी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने भेदभाव के आरोपों से इनकार किया।
    उन्होंने बताया कि मरीज शुक्रवार को आया था, जबकि शनिवार को ऑपरेशन थिएटर (OT) की मासिक डीप क्लीनिंग निर्धारित थी।

    उनके अनुसार,

    “शनिवार को वार्ड के मरीजों की सर्जरी तय थी। HIV पॉज़िटिव मरीज की सर्जरी करने के बाद OT की पूरी स्टरलाइज़ेशन प्रक्रिया करनी होती है, जिससे बाकी 5 सर्जरी रद्द करनी पड़तीं। इसलिए हमने मरीज को नायर अस्पताल भेजा।”

    हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV पॉज़िटिव मरीज को इलाज से इनकार करना कानूनन अपराध है, और अस्पताल को यूनिवर्सल प्रिकॉशन के तहत इलाज करना चाहिए था।

    🔹 कानून क्या कहता है — HIV Act, 2017

    HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी HIV स्थिति के कारण इलाज से वंचित करना गैरकानूनी है।
    यह कानून मरीज की गोपनीयता की रक्षा करता है और

    • स्वास्थ्य सेवा,
    • रोजगार,
    • शिक्षा,
    • और आवास में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।

    सभी अस्पतालों को ‘यूनिवर्सल प्रिकॉशन’ (universal precautions) का पालन करना अनिवार्य है, ताकि HIV-संक्रमित मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह ही इलाज मिल सके।

    🔹 प्रशासनिक और नैतिक सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने BMC के अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    • क्या OT क्लीनिंग का बहाना वास्तव में देरी का कारण था या भेदभाव का मामला?
    • क्या BMC के अस्पताल HIV-पॉज़िटिव मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं?
    • और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी?

    स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की है।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. क्या अस्पताल HIV मरीज का इलाज मना कर सकता है?
    नहीं, HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत इलाज से इनकार करना अवैध है।
    Q2. मरीज की हालत अभी कैसी है?
    वह फिलहाल नायर अस्पताल में भर्ती है और ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।
    Q3. क्या शताब्दी अस्पताल ने भेदभाव स्वीकार किया?
    अस्पताल प्रशासन ने इनकार किया, उन्होंने कहा कि OT की डीप क्लीनिंग के कारण सर्जरी संभव नहीं थी।
    Q4. क्या सरकार इस मामले की जांच करेगी?
    संभावना है कि BMC और राज्य स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की जाएगी, क्योंकि यह कानून का उल्लंघन है।
    Q5. क्या HIV मरीजों को विशेष सुरक्षा दी जाती है?
    हाँ, कानून के तहत मरीज की पहचान गोपनीय रखनी होती है, और सभी डॉक्टरों को यूनिवर्सल सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

  • कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड में प्रभारी अभियंता अभय जगताप पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और विधायक के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने से लोग नाराज़ हैं। सवाल उठ रहा है — क्या कानून से ऊपर हैं कार्यकारी अभियंता एवं डी. ओ. अभय जगताप?

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में स्थित मनपा आर/दक्षिण वार्ड कार्यालय में तैनात (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
    निवासियों का आरोप है कि वार्ड के अंतर्गत आने वाले सागवाडी आदिवासी पाड़ा, समाज मंदिर के पास अवैध निर्माण होने के बावजूद, जगताप कार्रवाई से बच रहे हैं।

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    लोगों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शौचालय और बोरिंग के लिए मांग की थी, जिसको लेकर 10 लाख रुपये सरकारी फंड भी पास किया गया। लेकिन उस पर कुछ लोगों ने तीन अवैध कमरे बना लिए। विधायक और सहाय्यक आयुक्त के आदेश के बाद भी तोड़क कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में नाराज़गी है।

    सार्वजनिक शौचालय के लिए दी गई भूमि पर हुआ कब्ज़ा

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है।
    इसी वजह से गुरुचरण की भूमि पर शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया गया था।
    लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर वहाँ तीन अवैध रूम बना लिए।

    नागरिकों ने इस संबंध में तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे को पत्र लिखा और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
    इसके साथ ही, विधायक योगेश सागर ने भी मनपा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया।

    अभय जगताप पर मिलीभगत के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
    आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ताओं से पैसे लेकर कार्रवाई रोक दी है।
    स्थानीयों के अनुसार, जगताप का रवैया मनमाना है और वे कहते हैं —

    “मेरी मर्जी है, कोई काम करूं या न करूं। मेरा क्या बिगाड़ लेंगे अधिकारी या विधायक?”

    यह बात न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है बल्कि मनपा की साख पर भी सवाल उठाती है।

    सहाय्यक आयुक्त और विधायक के आदेशों की अनदेखी

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    सूत्रों के मुताबिक, विधायक योगेश सागर ने खुद सहाय्यक आयुक्त से फोन पर बात कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
    अभय जगताप का कहना है कि यह मामला अब वर्तमान सहाय्यक अभियंता शिशिर खोखले या पूर्व अभियंता ब्रह्मणकार को देखना चाहिए। जबकि ब्रह्मणकर का तबादला हो चुका है।
    हालांकि जगताप का यह बयान जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मानी जा रही है।

    स्थानीय समाज का विरोध — कार्रवाई की मांग

    इस पूरे मामले में आदिवासी समाज और स्थानीय महिलाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं।
    चंदू बंजारा, गोपाल, अजय, कमल काली, दिनेश और कई अन्य लोगों ने पत्रकार को बुलाकर आदिवासी समाज मंदिर के पास बने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी।
    उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मनपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
    इसी सिलसिले में अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प के मुंबई उपाध्यक्ष राजेश किसन मंजाळ से मुलाकात की तो उन्होंने और भी चौकाने वाला खुलासा किया मनपा आर/ दक्षिण विभाग के इमारत व कारखाना विभाग की ओर से शिकायत क्रमांक RS/022/14- 12 – 2024/333 से संबंधित राजेश पवार के खिलाफ नोटिस क्रमांक RS/DO1RS/022/351-MMC ACT/RS333NO1/16-12-2024 जारी किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने यहां रिश्वतखोरी की हुई है।

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    निवासियों ने मांग की है कि

    “सबसे पहले भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चले।”

    कनिष्ठ अभियंता पर भी सवाल — ‘जगताप से क्यों डरते हैं अधिकारी?’

    सूत्र बताते हैं कि जब से अभय जगताप प्रभारी डी.ओ. बने हैं, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को धमकाते और दबाव डालते हैं।
    कई अधिकारी उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं।
    स्थानीयों का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता नितिन ठाकुर ही इस मामले की सच्चाई बता सकते हैं कि आखिर “जगताप का डर” इतना क्यों है? लेकिन उनका भी तबादला हो गया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    A1. कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड, पटेल नगर रोड नंबर 4 का मामला है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर है?
    A2. नागरिकों द्वारा दी गई भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है, जिस पर कार्रवाई नहीं की गई।
    Q3. किस अधिकारी पर आरोप लगे हैं?
    A3. प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर।
    Q4. क्या विधायक और मनपा अधिकारी इस मामले में शामिल हुए?
    A4. हाँ, विधायक योगेश सागर और तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे दोनों ने कार्रवाई का आदेश दिया था।
    Q5. नागरिकों की क्या मांग है?
    A5. अभय जगताप के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही अवैध निर्माण का तुरंत तोड़फोड़ अभियान।

  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।

  • मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए BMC को 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए

    मुंबई की वेस्टर्न सबर्ब्स में कोस्टल रोड नॉर्थ, माध–वर्सोवा ब्रिज व अन्य लिंक रोड्स के लिए BMC ने 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया है — जानिए पूरी जानकारी, क्या बन रहा है, क्या चुनौतियाँ हैं।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महापालिका (BMC) वेस्टर्न उपनगरों में आने वाले बड़े पब्लिक-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 346 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित करने जा रही है। इस ज़मीन का इस्तेमाल 20 किमी लंबी Mumbai Coastal Road Project‑North (MCRP-North) (वर्सोवा–भायंदर लिंक रोड) के एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड्स, वर्क स्पेस और डेवलपमेंट प्लान रोड्स के लिए होगा। इसके साथ ही 2.06 किमी लंबी केबल-स्टे ब्रिज Madh–Versova Bridge और अन्य सबर्ब लिंक रोड्स पर भी काम चल रहा है।

    क्या बन रहा है / प्रोजेक्ट का विवरण

    MCRP-North (वर्सोवा–भायंदर लिंक)

    • पहली फेज पूरी होने के बाद अब MCRP-North में करीब 20 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है।
    • अनुमानित लागत लगभग ₹16,621 करोड़ है।
    • इसका उद्देश्य वर्तमान में 90-120 मिनट चलने वाली यात्रा को मात्र 15-20 मिनट में बदलना है।
    • इसके अलावा इस सड़क से 55% तक कार्बन उत्सर्जन कम होने का लक्ष्य है।

    अन्य लिंक ब्रिज व सबर्ब कनेक्शन

    • माध–वर्सोवा ब्रिज (लगभग 2.06 किमी) प्रस्तावित है, लागत करीब ₹3,990 करोड़
    • एक अन्य लिंक रोड, अंधेरी–मालाड कनेक्शन लगभग ₹2,200 करोड़ की लागत से 2028 तक पूरा होगा।
    • इसके अतिरिक्त मार्वे–मनोरी ब्रिज भी प्रस्तावित है, जिससे 29 किमी की दूरी सिर्फ 1.5 किमी में घट जाएगी।

    ज़मीन अधिग्रहण व क्लियरेंस की चुनौतियाँ

    • इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए BMC को कुल 346 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए, जिसमें सड़क एलाइन्मेंट, इंटरचेंज, एक्सेस रोड और विकास-रोड्स शामिल हैं।
    • सिर्फ MCRP-North के लिए ही करीब 200 हेक्टेयर ज़मीन आवश्यक है।
    • BMC ने ₹5.24 करोड़ के टेंडर के माध्यम से एक कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए निविदा आमंत्रित की है, जो ज़मीन अधिग्रहण और क्लियरेंस कार्य करेगा। सबमिशन की आखिरी तारीख 17 नवंबर है।
    • पर्यावरणीय व क्रूज़ जोन (CRZ) नियम, मैंग्रोव संरक्षण जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मैंग्रोव व कुछ सरकारी ज़मीनों के हस्तांतरण संबंधी क्लियरेंस मिल चुकी है।

    क्यों महत्वपूर्ण है ये बदलाव?

    • मुंबई के वेस्टर्न उपनगरों में ट्रैफिक और यात्रा समय बड़ी समस्या है — ये प्रोजेक्ट्स उन बॉटलनेक्स को दूर करेंगे।
    • बेहतर कनेक्टिविटी से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, मलाड, अंधेरी, वर्सोवा आदि इलाकों के लिए लाभदायक होगा।
    • भूमि विकास व सड़क नेटवर्क बेहतर होने से आसपास के रियल एस्टेट एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।
    • पर्यावरण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करना व सड़क-यात्रा सुरक्षित व तेज़ बनाना उद्देश्य है।

    क्या देखना है आगे?

    • ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा — सरकारी व गैर-सरकारी ज़मीन, मैंग्रोव ज़मीन व CRZ ज़ोन जैसी वरीयताएँ।
    • पर्यावरणीय क्लियरेंस व कोर्ट ऑर्डर समय-समय पर मुद्दा बने रह सकते हैं।
    • कार्यान्वयन की गति और समय-सीमा (2028 तक कई लिंक रोड्स की समयसीमा) चेक होगी।
    • स्थानीय समुदायों, मछुआरों, वर्सोवा-कोलीवाडा आदि पर असर का ध्यान देना जरूरत है।

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. 346 हेक्टेयर का ये आंकड़ा क्या पूरी परियोजना के लिए है?
    A1. हाँ — यह सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स (MCRP-North + लिंक ब्रिज व एक्सेस रोड्स) के लिए कुल ज़मीन की आवश्यकता को दर्शाता है।
    Q2. इस प्रक्रिया में पर्यावरण को लेकर क्या सावधानी ली जा रही है?
    A2. मैंग्रोव व CRZ ज़ोन की क्लियरेंस मिल चुकी है — उदाहरण के लिए MCRP-North के लिए मदती लैंड व मैंग्रोव डायवर्शन के लिए इन-प्रिंसिपल ऑप्रूवल मिला है।
    Q3. इन कार्यों की समयसीमा क्या है?
    A3. कुछ लिंक रोड्स व ब्रिज्स की लक्ष्य समयसीमा 2028 तक रखी गयी है। MCRP-North के लिए भी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
    Q4. स्थानीय लोगों के लिए क्या फायदे होंगे?
    A4. ट्रैफिक कम होगा, यात्रा समय घटेगा, वेस्टर्न उपनगरों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी — साथ ही आसपास के इलाकों में विकास व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
    Q5. लागत कितनी अनुमानित है?
    A5. उदाहरण के लिए MCRP-North का अनुमानित बजट लगभग ₹16,621 करोड़ है, माध-वर्सोवा ब्रिज का अनुमान लगभग ₹3,990 करोड़ है।

  • उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    उपपालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के नेतृत्व में मालवणी के सरकारी जमीन अतिक्रमणमुक्त!

    मुंबई के मालाड-मालवणी इलाके में बीएमसी और कलेक्टर विभाग ने मिलकर बड़ी कार्रवाई की। 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन से अवैध झोपड़ियां हटाई गईं। कार्रवाई पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेश पर की गई।

    मुंबई: मालाड (पश्चिम) के मालवणी इलाके में बृहन्मुंबई महानगर पालिका और कलेक्टर विभाग की सरकारी यंत्रणाओं ने मिलकर बड़ी अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त किया गया। यह कार्रवाई बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के अतिक्रमण की शिकायतों के बाद की गई।

    इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया, जिन्होंने इस पर तीन बार — 17 अक्टूबर, 27 अक्टूबर और 6 नवंबर को लगातार बैठकें लेकर स्थिति की समीक्षा की थी। लोढ़ा ने साफ शब्दों में कहा कि “सरकारी जमीन पर कोई भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

    🏗️ पहले चरण में मिली बड़ी सफलता

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में मालवणी और मालाड के आसपास स्थित सरकारी जमीन से झोपड़पट्टियों को हटाया गया है। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बने घरों, झोपड़ियों और टीन के शेड को जेसीबी मशीन की मदद से तोड़ा गया। प्रशासन का कहना है कि आगे भी इस तरह की अतिक्रमणविरोधी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि किसी को भी दोबारा अवैध निर्माण करने का मौका न मिले।

    🧱 लोढ़ा ने दिए नए निर्देश: संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी के लिए निधी

    कार्रवाई के बाद पालक मंत्री लोढ़ा ने अधिकारियों को आदेश दिया कि जहाँ जमीन खाली कराई गई है, वहाँ तुरंत “संरक्षक दिवार” (बाउंड्री वॉल) का निर्माण किया जाए, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
    साथ ही, स्थानीय बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोढ़ा ने अंगणवाड़ी केंद्रों के लिए निधी जारी करने के निर्देश भी दिए।

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    सैकड़ों परिवार हुए बेघर

    इस तोड़क कार्रवाई से प्रभावित परिवारों पर अगर नजर डालें, तो अली तलाव गावदेवी मंदिर के पास, राठोडी और चिकूवाडी मे हुए तोड़क कार्रवाई से सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं। पीड़ितों का कहना है कि सरकार को अगर इस जमीन की इतनी ज्यादा जरूरत थी तो हमारे लिए भी पर्याय व्यवस्था की जानी चाहिए थी। ये रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर हमारे उपर ज़ुल्म किया गया है। बांगलादेशी और रोहिंग्या के नाम पर हमारी जांच तो करते, लेकिन इन्होंने जांच नही की। कुछ लोगों ने प्रशासन की सख्ती को लेकर बददुआएं भी दी।


    FAQ सेक्शन

    Q1. मालवणी में कितनी जमीन अतिक्रमणमुक्त की गई?
    👉 करीब 9,000 वर्गमीटर सरकारी जमीन बीएमसी और कलेक्टर प्रशासन ने खाली कराई।
    Q2. यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
    👉 कार्रवाई उपपालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के आदेशानुसार हुई।
    Q3. क्या कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
    👉 हाँ, अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
    Q4. खाली जमीन का क्या उपयोग होगा?
    👉 वहाँ संरक्षक दिवार और अंगणवाड़ी केंद्र बनाए जाने की योजना है।

  • मालाड में 22वीं मंज़िल से कूदने जा रहे बुज़ुर्ग को पुलिस और फायर ब्रिगेड ने बचाया, तलाक के बाद तनाव में था शख्स

    मालाड में 22वीं मंज़िल से कूदने जा रहे बुज़ुर्ग को पुलिस और फायर ब्रिगेड ने बचाया, तलाक के बाद तनाव में था शख्स

    मुंबई के मालाड पूर्व में 60 वर्षीय बुज़ुर्ग आत्महत्या के लिए 22वीं मंज़िल से कूदने जा रहे थे, लेकिन कुुरार पुलिस और फायर ब्रिगेड की समय रहते कार्रवाई से उनकी जान बच गई। तलाक के बाद तनाव में चल रहे व्यक्ति को पुलिस ने काउंसलिंग देकर सुरक्षित घर भेज दिया।

    मुंबई: मालाड पूर्व इलाके में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब एक 60 वर्षीय बुज़ुर्ग व्यक्ति ने आत्महत्या करने की कोशिश की।
    वह दुर्गामाता एसआरए बिल्डिंग, दिंडोशी कोट (जेपी डेक्स के पास) की 22वीं मंज़िल से कूदने की तैयारी कर रहे थे।

    सूचना मिलते ही कुरार पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड की मदद से बुज़ुर्ग को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
    इस त्वरित कार्रवाई ने एक ज़िंदगी बचा ली।

    कंट्रोल रूम की कॉल से शुरू हुई बचाव कार्रवाई

    पुलिस के मुताबिक, 4 नवंबर की सुबह करीब 8 बजे, नॉर्थ कंट्रोल रूम से कॉल मिला कि एक व्यक्ति इमारत की 22वीं मंज़िल से छलांग लगाने की कोशिश कर रहा है।
    शख्स की पहचान विवेक गोगटे (60) के रूप में हुई, जो पेशे से वॉचमैन हैं और उसी बिल्डिंग के एक रूम में रहते हैं।

    जानकारी मिलते ही नाइट शिफ्ट सुपरवाइजर संदीप वेदपाठक, ऑफिसर मनोज क्षीरसागर, और बीट मार्शल 1 टीम लेकर मौके पर पहुंचे।
    साथ ही दिंडोशी फायर ब्रिगेड की टीम भी पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया।

    फायर ब्रिगेड और पुलिस ने मिलकर बचाई जान

    जब टीम पहुंची, तब विवेक गोगटे इमारत की दीवार पर चढ़ चुके थे और छलांग लगाने ही वाले थे।
    टीम ने तेजी से एक्शन लेते हुए सुरक्षा रस्सियों और नेट का इस्तेमाल किया, और उन्हें नीचे उतारने में सफलता पाई।

    बचाव के बाद उन्हें कुरार पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां काउंसलिंग दी गई और मानसिक रूप से शांत करने का प्रयास किया गया।

    तलाक के बाद मानसिक तनाव से जूझ रहे थे विवेक गोगटे

    पूछताछ में विवेक गोगटे ने बताया कि पिछले साल उनका तलाक हो गया था, और तब से वे अकेले रह रहे थे।
    पारिवारिक परेशानियों और मानसिक तनाव के कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाने की कोशिश की।

    पुलिस ने गोगटे से उनके किसी परिचित का नंबर मांगा, जिसके बाद उन्होंने अपने मित्र अमर उमेश सिंह (47) का नाम बताया।
    सिंह को बुलाकर पूरा मामला समझाया गया, और गोगटे को उनकी देखरेख में घर भेज दिया गया।

    पुलिस ने दी मानसिक स्वास्थ्य सहायता

    कुरार पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई के बजाय मानसिक सहायता देना अधिक ज़रूरी है।
    टीम ने बताया कि उन्होंने “संकट में फंसे व्यक्ति की काउंसलिंग” कराई है ताकि आगे वह ऐसा कदम न उठाएं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. घटना कब और कहाँ हुई?
    A1. यह घटना 4 नवंबर की सुबह मालाड ईस्ट के दुरगामाता एसआरए बिल्डिंग, दिंडोशी कोट में हुई।
    Q2. आत्महत्या की कोशिश करने वाला व्यक्ति कौन था?
    A2. 60 वर्षीय विवेक गोगटे, जो वहां वॉचमैन के रूप में काम करते हैं।
    Q3. पुलिस को घटना की जानकारी कैसे मिली?
    A3. नॉर्थ कंट्रोल रूम से सुबह 8 बजे फोन आने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची।
    Q4. व्यक्ति को कैसे बचाया गया?
    A4. फायर ब्रिगेड और पुलिस ने मिलकर सुरक्षा उपकरणों की मदद से उन्हें 22वीं मंज़िल से नीचे उतारा।
    Q5. क्या व्यक्ति पर कोई कानूनी कार्रवाई की गई?
    A5. नहीं, पुलिस ने उन्हें काउंसलिंग देकर मानसिक सहायता दी और एक परिचित के साथ घर भेज दिया।

  • मालवनी में चला बुलडोजर 135 झोपड़े हुए क्षतिग्रस्त

    मालवनी में चला बुलडोजर 135 झोपड़े हुए क्षतिग्रस्त

    मालाड पश्चिम के मालवनी इलाके में कलेक्टर ऑफिस और बीएमसी की संयुक्त कार्रवाई में 135 अवैध झोपड़ों को तोड़ा गया। कार्रवाई अली तालाव और चिकूवाड़ी इलाकों में हुई। प्रशासन ने कहा – अवैध निर्माण पर आगे भी सख्त कदम जारी रहेंगे।

    मुंबई: मालाड पश्चिम के मालवनी इलाके में सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए 135 अवैध झोपड़े बीएमसी और कलेक्टर ऑफिस की संयुक्त कार्रवाई में ढहा दिए गए। यह अभियान अली तालाव और चिकूवाड़ी इलाकों में चलाया गया, जिसमें भारी मशीनरी और मजदूरों की मदद से अवैध निर्माण हटाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे दोबारा न हों।

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    अवैध झोपड़ियों पर चला बुलडोजर

    मालाड पश्चिम के मालवनी इलाके में सोमवार और मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। कलेक्टर ऑफिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की टीम ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए 135 झोपड़ियों को तोड़ डाला।
    इस संयुक्त ऑपरेशन में बीएमसी के कई विभागों ने सहयोग किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रहे अवैध निर्माण पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई है।

    कहाँ हुई कार्रवाई — अली तालाव और चिकूवाड़ी में हटाए गए कब्जे

    बीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई दो प्रमुख जगहों — अली तालाव और चिकूवाड़ी में की गई।

    • अली तालाव क्षेत्र में 127 अवैध झोपड़ियाँ हटाई गईं।
    • वहीं चिकूवाड़ी इलाके में 6 झोपड़ियाँ और 2 अन्य अवैध संरचनाएँ गिराई गईं।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों में पिछले कुछ महीनों में झोपड़ियाँ बढ़ती जा रही थीं। प्रशासन ने कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आखिरकार बुलडोज़र चलाना पड़ा।

    बीएमसी की तैयारी और भारी मशीनरी का इस्तेमाल

    कार्रवाई के दौरान बीएमसी की ओर से भारी जेसीबी मशीनें, ट्रक और बड़ी संख्या में मजदूर तैनात किए गए। मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बने।
    बीएमसी अधिकारियों ने कहा कि यह सिर्फ एक शुरुआत है, और भविष्य में भी ऐसे एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव (Encroachment Drive) लगातार चलाए जाएंगे ताकि सरकारी संपत्ति पर कोई नया कब्जा न कर सके।

    सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने का अभियान जारी

    प्रशासन का कहना है कि मालवनी और आसपास के इलाके में कई ऐसी सरकारी भूमि हैं जिन पर वर्षों से अवैध झोपड़पट्टियाँ बनी हैं। इस ऑपरेशन के जरिए न सिर्फ जमीन को खाली कराया गया, बल्कि आगे पुनः कब्जा रोकने के लिए निगरानी टीम भी तैनात की गई है।
    बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,

    “यह कार्रवाई केवल आज की नहीं है। आने वाले हफ्तों में भी अन्य जगहों पर इसी तरह की सख्त कार्यवाही की जाएगी। हमारा उद्देश्य सार्वजनिक भूमि की रक्षा करना है।”

    स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

    कुछ स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया, यह कहते हुए कि अवैध झोपड़ियों से इलाके में गंदगी और भीड़भाड़ बढ़ रही थी। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग भी की, क्योंकि तोड़ी गई झोपड़ियों में रहने वाले कई मजदूरों के पास अब रहने की जगह नहीं है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. यह कार्रवाई कहाँ हुई?
    A1. यह कार्रवाई मुंबई के मालाड पश्चिम के मालवनी इलाके में अली तालाव और चिकूवाड़ी में की गई।
    Q2. कितनी झोपड़ियाँ तोड़ी गईं?
    A2. कुल 135 अवैध झोपड़ियाँ और संरचनाएँ गिराई गईं।
    Q3. कार्रवाई किसने की?
    A3. कार्रवाई कलेक्टर ऑफिस और बीएमसी (BMC) की संयुक्त टीम ने की।
    Q4. क्या आगे और कार्रवाई होगी?
    A4. हाँ, बीएमसी ने साफ कहा है कि आने वाले दिनों में ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
    Q5. क्या किसी को पुनर्वास दिया जाएगा?
    A5. फिलहाल कोई आधिकारिक पुनर्वास योजना घोषित नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन इस दिशा में विचार कर रहा है।