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  • सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। 15 अगस्त मांस प्रतिबंध पर देशभर में हंगामा

    महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना के नगरपालिकाओं ने 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानें और बूचड़खानों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर देशभर में विपक्षी नेता हंगामा कर रहे हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट ने तो नगर पालिका प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    15 अगस्त को सरकार द्वारा मांस की दुकानों को बंद करने को लेकर जारी फैसले के खिलाफ देशभर में हंगामा हो रहा है। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) और कल्याण-डोंबिवली के साथ-साथ तेलंगाना के नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र के बूचड़खानों और मांस की दुकानों को 15 अगस्त के दिन बंद रखने का निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं के हंगामे के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद आश्चर्य जता रहे हैं। राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया, कि सरकार को लोगों के खान-पान तय करने का अधिकार नहीं है। हम देश की स्वतंत्रता का पर्व मना रहे हैं। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    मनसे का विरोध

    गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कुछ नगर पालिका द्वारा मांस की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों का खान-पान नहीं निर्धारित करना चाहिए। राज ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि नगर पालिकाओं को इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लगा प्रतिबंध

    उन्होंने कहा, “सरकार और महानगर पालिका को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिये। एक तरफ हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और हमें क्या खाना चाहिए, यह चुनने की कोई आजादी नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाना सरकार का आम जनता के खिलाफ एक विरोधाभास है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    इसके साथ ही महाराष्ट्र से सटे तेलंगाना राज्य के ओल्ड हैदराबाद सिटी की नगरपालिका ने भी 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर मीट की दुकानें और बूचड़खाने बंद रखने के आदेश जारी किया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा, कि “यह धर्म का मामला नहीं है और न ही यह राष्ट्रीय हित का मामला है।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादूल मुस्लिमिन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को ओल्ड हैदराबाद सिटी के आदेश को असंवैधानिक बताया। कहा कि गोश्त खाने से 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस का क्या लेना-देना है। इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र में हंगामे के बीच शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने फैसले को गलत बताया है। The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

    ओवैसी ने क्या कहा?

    सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘गोश्त खाने और स्वतंत्रता दिवस में क्या रिश्ता है। तेलंगाना में 99 प्रतिशत लोग गोश्त खाते हैं। ओवैसी ने इस फैसले को लोगों की स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।’

    तेलंगाना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    तेलंगाना में यह मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने ग्रेटर हैदराबाद महानगर पालिका (जीएचएमसी) से स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के उसके आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। तेलंगाना सरकार के इस आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका में कहा गया है कि यह आदेश मनमाना है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजयसेन रेड्डी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

    महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “मैंने टीवी पर खबर देखी, श्रद्धा का प्रश्न होता है तो इस तरह बंदी लगाई जाती है। आषाढ़ी एकादशी, महावीर जयंती जैसे अवसरों पर यह निर्णय लिया जा सकता है। अगर हम कोकण में जाएं तो वहां हर सब्जी में सूखी मछली डालकर पकाया जाता है। ऐसी बिना कारण के खाने पीने की चीजों पर रोक लगाना ठीक नहीं है। अगर भावनात्मक मुद्दा हो तो उस समय के लिए बंदी लगाई जाए तो लोग समझ सकते हैं। लेकिन, 15 अगस्त को महाराष्ट्र में बंदी लगाना उचित नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा।

    खस्ताहाल सड़कों पर ध्यान दें।

    आदित्य ठाकरे ने मांस बिक्री बंदी के फैसले पर कहा, “ये हमारी च्वाइस है कि स्वतंत्रता दिवस पर हम क्या खाएं और क्या नहीं खाएं।कल्याण-डोंबिवली महापालिका कमिश्नर को इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। नागरिकों पर शाकाहार का फैसला थोपने के बजाय, खस्ताहाल सड़कों और बदहाल नागरिक सेवाओं को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।” The government has no right to decide the food habits of the people, There was uproar across the country on the meat ban on 15 August

  • कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।

    लोकतंत्र का हिस्सा

    संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?

    संसद में होती है गुंडो की भाषा

    पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही  सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।

    जवाब देने से क्यों भागती है मोदी सरकार?

    मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।

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    कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा

    अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।

    इस्तीफे देने का दायित्व

    यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर  नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?

    सरकार ने दिया सेना को धोखा

    इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”

    कांग्रेस और मोदी में अंतर?

    आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।

    टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार

    दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।

    प्रशासन का गलत इस्तेमाल

    सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।

    विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?

    दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?

    विदेशनीति पर सवाल?

    ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?

    दुनिया की निगाहों में भारत?

    भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।

  • गिरफ्तारी से बचने के लिए आत्महत्या की कोशिश, पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

    गिरफ्तारी से बचने के लिए आत्महत्या की कोशिश, पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

    एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था।

    मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act

    पुलिस ने क्या कहा?

    नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act

    नाबालिग बच्ची का यौन शोषण

    नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।

    लड़की के बेडरूम में क्यों घूसा

    शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act

    आत्महत्या की कोशिश

    मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।

  • ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपये की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। इसमें डी-कंपनी की फंडिग सोर्स का अनुमान लगाया जा रहा है। मैसूर से बेंगलूर और फिर मुंबई होती थी ड्रग्स की तस्करी। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया कि ड्रग्स की तस्करी के लिए ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    मुंबई: कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपए की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। यह ड्रग तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। केस की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुंबई की साकीनाका पुलिस ने जांच के दौरान खुलासा किया कि किस तरह ड्रग्स की तस्करी का रैकेट काम करता था। कर्नाटक से महाराष्ट्र तक ड्रग्स की तस्करी और इंटरनेशनल स्तर तक इसकी सप्लाई होती थी। ड्रग्स सप्लायर इसके लिए अनोखा और बेहद गुप्त तरीका अपनाते थे। इस मामले को लेकर जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के डी-कंपनी का पैसा लगा हो सकता है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कौन है मास्टरमाइंड?

    मुंबई पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जांच में सामने आया कि ड्रग्स की सप्लाई और प्रोडक्शन की प्रक्रिया दो अलग-अलग गिरोह करते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों ही गैंग के सदस्यों को एक-दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं होता था। मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    पुलिस के लिए मुश्किलें

    यह ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री और इसके सप्लाई की चैन पूरे ऑपरेशन की सबसे खतरनाक और शातिर ‘मॉडस ओपेरेंडी’ अपनाती थी। पुलिस ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था से नेटवर्क की परतें खोलना बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि मुंबई पुलिस की हाईटेक टीम ने इसकी पर्तें खोल ही लीं। लेकिन अब भी बहोत सारे राज खुलने की आशंका जताई जा रही है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    बेंगलुरु में क्या होता था?

    अंधेरी पूर्व की साकीनाका पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मैसूर की फैक्ट्री में एमडी नामक ड्रग्स तैयार होती थी। यहां काम करने वालों को नहीं पता होता था कि गाड़ी में लोड करने के बाद ड्रग्स को कहां लेकर जाया जाएगा। खेप को एक दूसरे गैंग के जरिए सबसे पहले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचाया जाता था। बेंगलुरु में मुंबई के गैंग का एक मेंबर पहले से मौजूद होता था। ड्रग्स सप्लाई करने और उसे लेने आने वालों को एक दूसरे को एक कोड दिखाना होता था।

    कैसे होती थी ड्रग्स की डिलीवरी?

    पुलिस ने बताया यह कोड एक टीशर्ट होती थी। जो हर बार सप्लाई के लिए अलग-अलग यूज की जाती थी। दोनों के पास सेम टीशर्ट का फोटो वॉट्सऐप किया जाता था। फिर वे एक दूसरे को वह दिखाकर खेप की सप्लाई करते थे। इस तरह खेप को बेंगलुरु से मुंबई तक लाया जाता था। मुंबई लाने के बाद इसे मुंबई के विभिन्न इलाकों में स्थानीय सप्लायर्स के जरिए सप्लाई होती थी। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कैसे होता था ट्रांसपोर्टेशन?

    पुलिस ने बताया कि ड्रग्स का पूरा ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम सड़क मार्ग पर आधारित था। तस्कर हवाई या ट्रेन मार्गों में होने वाली जांच से बचने के लिए रोड का इस्तेमाल करते थे। पुलिस जांच में सामने आया, कि यह नेटवर्क ड्रग्स को बसों और निजी वाहनों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट करता था। मैसूर से बेंगलुरु और फिर मुंबई तक का सफर तय कर ड्रग्स को लगेज के भीतर छिपाकर पहुंचाया जाता था। इस तरह की रणनीति से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में तस्वीरों को काफी हद तक सफलता भी मिली।

    आईबी के अधिकारी कर रहे हैं पूछताछ

    इस मामले में अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की भी एंट्री कर चुकी है। सोमवार को आईबी अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसियों को शक है कि यह ड्रग्स फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसका लिंक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से भी हो सकता है। साकीनाका पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

  • शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।

    मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।

    देश में शिक्षा का भगवाकरण

    विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।

    India-BJP-government-education-system

    शिक्षा और परीक्षा का सौदा

    सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।

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    शिक्षा पर 18% की जीएसटी

    उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।

    विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा

    इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।

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    दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education

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    शिक्षा क्षेत्र मे भेदभाव

    शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

    धर्म की राजनीति

    हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

    मानसिक गुलामी

    सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education

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    मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं

    जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।

    मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार

    तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।

    कितनी सरकारी स्कूलें हुई बंद ?

    एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।

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    स्कूलें बंद मधुशालाओं का उद्घाटन

    राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।

    सरकारी स्कूलें बंद कराने का सरकारी फरमान

    दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।

    मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला

    दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।

  • तलाक के लिए पत्नी ने किया करोड़ों का घर 12 करोड़ रुपये की डिमांड, कोर्ट भी हैरान

    तलाक के लिए पत्नी ने किया करोड़ों का घर 12 करोड़ रुपये की डिमांड, कोर्ट भी हैरान

    सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पति- पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में गुजारे- भत्ते को लेकर एक हाई प्रोफाइल केस आया। पत्नी के गुजारे भत्ते की डिमांड सूनकर कोर्ट भी हैरान, कहा तुम नौकरी कर अपना गुजारा क्यों नही कर सकती पति पर आश्रित क्यों रहना है?

    न्यूज़ डेस्क
    नई दिल्‍ली:
    सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पति- पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में गुजारे- भत्ते को लेकर एक हाई प्रोफाइल केस आया। मुख्‍य न्‍यायधीश (CJI) भूषण आर. गवई की बेंच के सामने इस मुद्दे को लेकर दिलचस्प बहस हुई। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने कई बड़ी टिप्पणियां कर फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान CJI गवई ने महिला को नसीहत दी कि वो पढ़ी लिखी है तो उसे पति के गुजारे- भत्ते के भरोसे नहीं रहना चाहिए। खास बात ये है कि महिला अपने केस की खुद पैरवी कर रही है।

    18 महीने की शादी में करोड़ों की डिमांड

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर गवई ने महिला से पूछा, ‘आपकी क्या मांग है?’ इस पर महिला ने कहा कि बस मुंबई वाला घर और 12 करोड़ रुपये का गुजारा भत्ता चाहिए। इस पर CJI  गवई ने कहा, ‘वह घर तो कल्पतरु में है। जो अच्छे बिल्डरों में से एक है और आप तो IT एक्सपर्ट हैं, आपने MBA किया है। जबकि बेंगलुरु, हैदराबाद नौकरी के क्षेत्र में आपकी डिमांड है!  कभी भी आप नौकरी शुरू कर सकती हैं तो आप नौकरी भी क्यों नहीं करतीं?’ उन्होंने यह भी कहा, कि ‘आपकी शादी सिर्फ़ 18 महीने चली और अब आप एक BMW भी चाहती हैं? 18 महीने की शादी और आप हर महीने एक करोड़ चाहती हैं।’ महिला ने जवाब दिया, ‘लेकिन वो बहुत अमीर आदमी हैं। उसने मुझे सिजोफ्रेनिया का शिकार बताकर शादी रद्द करने की मांग की।’

    कोर्ट ने मांगा आयटी रिटर्न

    इस दौरान पति की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा, ‘उसे भी काम करना पड़ता है। हर चीज की मांग ऐसे नहीं पूरी की जा सकती।’ महिला ने सवाल किया, ‘क्या मैं सिजोफ्रेनिया से पीड़ित दिखती हूं ?’ CJI गवई ने कहा, ‘आयटी रिटर्न दाखिल करें। लेकिन समझ लीजिए कि आप उसके पिता की संपत्ति पर भी दावा नहीं कर सकतीं’ लंच के बाद फिर सुनवाई शुरू हुई। CJI गवई की बेंच ने पति का आयटी रिटर्न देखा। Wife demands Rs 12 crore for a house worth crores for divorce, court is also surprised

    आप भी कमाया सकते हैं।

    वरिष्ठ वकील दीवान ने कहा, ‘कृपया पूरी कॉपी दें। 2015-16 में आय ज्‍यादा है क्योंकि उस समय वो नौकरी करते थे। 2 करोड़ 50 लाख और 1 करोड़ का बोनस, प्रॉक्सी बिजनेस के भी आरोप हैं। चलिए इसे भी उदाहरण के तौर पर लेते हैं। वो बैलेंस शीट भी है। जिस फ्लैट में वह रह रही हैं, उसके अलावा। दो कार पार्किंग भी हैं। वह उससे कमाई कर सकती है।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने हामी भरी, ‘हां हां, मुंबई में सभी जगहों से पैसा कमाया जा सकता है।’  दीवान ने आगे कहा, ‘जिस BMW का वह सपना देख रही हैं, वह 10 साल पुरानी है और बहुत पहले ही बंद हो चुकी है।’  Wife demands Rs 12 crore for a house worth crores for divorce, court is also surprised

    खुद कमाकर खाइए

    CJI गवई मे महिला से कहा, ‘या तो आपको बिना किसी बोझ के फ्लैट मिलेगा या कुछ भी नहीं मिलेगा। जब आप उच्च शिक्षित हों और अपनी इच्छा से काम न करने का फैसला करें।या तो आप वो 4 करोड़ रुपये ले लें, पुणे/हैदराबाद/बेंगलुरु में कोई अच्छी नौकरी ढूंढ लें। आईटी केंद्रों में आप जैसी होनहार लोगों की मांग है।’ इस पर याचिकाकर्ता महिला ने शिकायत की, ‘मेरी नौकरी भी इन्हीं ने छुड़वा दी। मुझ पर FIR भी दर्ज करा दी।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘आप FIR दे दीजिए, हम वो भी रद्द कर देंगे। हम निर्देश देंगे कि कोई भी पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं करेगा।’ इस पर पति की वकील ने बताया कि ये तो समझौते में है ही। फैसला सुरक्षित रखते हुए CJI गवई ने महिला से कहा, ‘आपको खुद मांगना नहीं चाहिए बल्कि, आपको खुदको कमाकर खाना चाहिए।’

  • तमिलनाडु में हुआ ट्रेन हादसा, तिरुवल्लूर के पास डीजल टैंकर में लगी आग, सेवाएं निलंबित

    तमिलनाडु में हुआ ट्रेन हादसा, तिरुवल्लूर के पास डीजल टैंकर में लगी आग, सेवाएं निलंबित

    तमिलनाडु में मालगाड़ी पटरी से उतरी, 18 बोगियां जलकर हुए खाक। तिरुवल्लूर रेलवे स्टेशन का इलाका खाली करवाया गया। सेवाएं हुई ठप्प।

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    नेशनल डेस्क
    तमिलनाडु:
    तिरुवल्लूर रेलवे स्टेशन के पास मनाली से जोलारपेट होते हुए कर्नाटक जा रही एक डीजल मालगाड़ी पटरी से उतर गई है। इसके बाद उसमें आग लग गई। शुरुआत में पांच बोगियों में आग लगी। बाद में कुल 18 बोगियां आग की चपेट में आ गईं। घटना रविवार सुबह 5.30 बजे की है। मालगाड़ी में 52 बोगियां थीं। जिला कलेक्टर एम प्रताप ने बताया कि 40 बोगियों को जलती हुई ट्रेन से अलग कर लिया गया है। वहीं, रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों को निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। फायर ब्रिगेड की कई टीमें बुलाई गईं है। Train accident in Tamil Nadu, diesel tanker catches fire near Tiruvallur, services suspended

    पुलिस की जांच

    मिली जानकारी के मुताबिक 10 गाड़ियों की मदद से आग पर लगभग काबू पा लिया गया है। इधर, रेलवे और पुलिस घटना वाली जगह से 100 मीटर दूर पटरी पर मिली दरार की भी जांच कर रहे हैं। रेलवे ने एक बयान में बताया कि मालगाड़ी के तीसरे डिब्बे में आग लगने की खबर मिलते ही, लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए। तिरुवल्लूर के स्टेशन मास्टर ने ओवरहेड (OHE) बिजली आपूर्ति बंद कर दी।

    ट्रेनें हुई रद्द

    हालांकि, जब तक ट्रेन रोकी गई, आग 19वें डिब्बे तक फैल गई थी। इस हादसे के कारण चेन्नई को बैंगलोर, केरल और रेणुगुंटा/तिरुपति से जोड़ने वाले चेन्नई अरकोणम सेक्शन में रेल परिचालन स्थगित करना पड़ा। चेन्नई सेंट्रल से शुरू होने वाली या वहां तक जाने वाली 12 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, और कई अन्य ट्रेनों का या तो रूट बदल दिया गया या उन्हें बीच में ही रोक दिया गया है। ट्रेन हादसे के कारण डॉ. एमजीआर चेन्नई सेंट्रल स्टेशन से रवाना होने वाली ट्रेनों सहित कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं या प्रभावित हुईं।

    रेलवे की यात्रियों से अपील

    दक्षिण रेलवे ने एक बयान में कहा कि तिरुवल्लूर के पास आग लगने की घटना के कारण सुरक्षा उपाय के तौर पर ओवरहेड पावर बंद कर दिया गया है। इसके कारण ट्रेनों के समय में बदलाव किए गए हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले लेटेस्ट अपडेट देख लें। Train accident in Tamil Nadu, diesel tanker catches fire near Tiruvallur, services suspended

  • आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम से मुंबई मे ड्रग्स की तस्करी

    आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम से मुंबई मे ड्रग्स की तस्करी

    ज्यादा पैसों की लालच में बिहार का कपड़ा व्यापारी मुंबई के मालवनी में ड्रग्स की तस्करी करते गिरफ्तार। बताया कि आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम से लाया था ड्रग्स .. Drugs smuggled from Visakhapatnam in Andhra Pradesh to Mumbai

    मुंबई: मालाड़ पश्चिम के मालवनी पुलिस ने लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये के गांजा नामक नशीले पदार्थ के साथ बिहार के कपड़ा व्यापारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप हैं कि 48 वर्षीय परवेज़ अहमद अमिरुद्दीन सैय्यद लगभग 6 किलो 398 ग्राम गांजा लेकर मालवनी में किसी को बेचने आया था। पुलिस को उसके हाल-चाल पर संदेह हुआ तो आरोपी के लाले पड़ गए। Drugs smuggled from Visakhapatnam in Andhra Pradesh to Mumbai

    पुलिस का संदेश और खुल गया राज

    मालवनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शैलेन्द्र रघुनाथ नागरकर ने बताया, कि शुक्रवार 4 जुलाई को मालवनी गेट नंबर 1 के पास लगभग शाम 4 बजे के करीब जनकल्याण नगर के रोड़ पर जब पुलिस हमेशा की तरह गश्त लगा रही थी, तो पुलिस उपनिरीक्षक डॉ दीपक हांडे को इस व्यक्ति पर संदेह हुआ, वह अपनी थैली में कुछ लिपट कर यहां वहां घूम रहा था। पहले तो पुलिस ने इग्नोर किया। लेकिन जब गाड़ी घुमाकर वापस उसकी तरफ देखा तो उसे पसीने छूटने लगे। ताबड़तोड़ पुलिस को पूरा यकीन हो गया, कि हो न हो लेकिन कुछ तो गडबड है। Drugs smuggled from Visakhapatnam in Andhra Pradesh to Mumbai

    गांजे की महक ने खोले राज

    जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक डॉ दीपक हांडे ने बताया, कि जब हमने उसे बुलाकर पूछताछ की तो वो हडबडाने लगा और जब सामान की तलाशी ली तो कहने लगा साहब ये खाद है। ये खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस ने कहा, कि गांजा और उसकी महक तुरंत पहचान में आ गई। हमने इसकी सूचना पुलिस निरीक्षक रकमजी को दी और पुलिस थाने ला कर पूछताछ की तो सारा हकीकत सामने आ गया। हांडे ने बताया कि पुलिस निरीक्षक रकमजी मार्गदर्शन में अपराध दर्ज किया। Drugs smuggled from Visakhapatnam in Andhra Pradesh to Mumbai

    कहां से लाया था ड्रग्स?

    पुलिस ने जब थाने लेजाकर पूछताछ की तो पता चला कि आरोपी बिहार का रहने वाला है और वहां भोजपुर जिले के संदेश तालुका में कपड़े का व्यापार करता है। ज्यादा पैसे कमाने के लालच में उसने आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम से मुंबई में गांजा बेचने के लिए आया था। पुलिस अब यह पता करने मे जुटी है कि इस आरोपी से मुंबई में कितने लोगों का संपर्क था और क्या इसने इससे पहले भी ऐसी तस्करी की है। पुलिस आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम भी जाने की तैयारी कर रही है। Drugs smuggled from Visakhapatnam in Andhra Pradesh to Mumbai

  • महिलाओं और लड़कियों को सोशल मीडिया पर टार्गेट करने वाला शुभम गिरफ्तार

    महिलाओं और लड़कियों को सोशल मीडिया पर टार्गेट करने वाला शुभम गिरफ्तार

    Shubham-arrested-for-targeting-women-and-girls-on-social-media

    सोशस मीडिया पर महिलाओं के नाम पर अश्ली फोटो और विडियो का राज आखिरकार मुंबई पुलिस की सायबर सेल ने खोल कर रख दी है। आए दिन बदनामी के डर से होने वाली महिलाओं और लडकियों की मौत के पीछे सायबर जालसाज देखो क्या कर रहे हैं।

    मुंबई: सोशल मीडिया पर लड़कियों का अश्ली डाटा प्रसारित करने वाला 25 वर्षीय शुभम मनोजप्रसाद सिंह को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुंबई के दहिसर सायबर सेल ने बिहार के बागलपुर निवासी शुभम कुमार मनोजप्रसाद सिंह को कर्नाटक के सांदुर, जिला बेल्लारी से गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक में यह सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहा था। इसके मोबाइल से पुलिस को मिली जानकारी में कहा गया कि आरोपी ने 100 से अधिक महिलाओं के नाम से ईमेल आईडी बनाई हुई थी और इंस्टाग्राम पर 11 अलग-अलग महिलाओं की आईडी बना रखी थी। आरोपी ने 2015-16 में दिल्ली के रेहान आय.टी. सेंटर से सॉफ्ट स्किल कंप्यूटर ट्रेनिंग प्रोग्राम डिप्लोमा हासिल किया है। इसके मोबाइल फोन मे अलग-अलग महिलाओं और लडकियों के 13500 फोटो स्क्रीन शॉट निकाल कर इकट्ठा किया हुआ था।

    कॉलेज की लड़की को बनाया शिकार

    दहिसर पूर्व, परिमंडल 12 के पुलिस उपायुक्त महेश चिमटे ने बताया, कि जनवरी के अंत में एक शिकायत मिली थी। कॉलेज मे पडने वाली एक लड़की को आरोपी ने ब्लैकमेल किया हुआ था और उसके नाम से इंस्टाग्राम पर अश्ली फोटो और पोस्ट किए जा रहे थे। जिसके कारण उस लड़की की काफी बदनामी हो रही थी और वह मानसिक रुप से प्रताड़ित हो रही थी। दहिसर पुलिस की सायबर सेल ने उसे अच्छे से पहले समझाया और सांत्वना दी। इसके बाद गु.र.क्र. 95/2005 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 78, 79 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 (सी), 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस कहा कि ऐसे मामलों से किसी भी महिला को घबराने की जरूरत नही है। हमेशा पुलिस की मदद लें।

    वायरल पोस्ट

    दहिसर डिविजन के सहायक पुलिस आयुक्त किशोर खैरनार ने बताया, कि आरोपी पहले महिलाओं और लडकियों को सोशल मीडिया पर फोलो कर मेसेज भेजता था और जबरदस्ती अश्ली विडियो बनाने के लिए जोर देता था इसमे अश्ली भाषा का भी उपयोग करता था। ऐसा नही करने पर उसका नाम और फोटो का इस्तेमाल कर इंटरनेट पर अश्ली पोस्ट और स्टोरीज़ वायरल करता था। पुलिस ने पहले उस अकाउंट का पता लगाया जिस अकाउंट से उसने लड़की को मेसेज भेजा था। इसके बाद सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म और गुगल से उसका पता लगाया गया। तब जाकर सायबर सेल को पता चला कि आरोपी कर्नाटक से ऑपरेटर कर रहा है।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    दहिसर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक होनमाने ने बताया, कि जैसे ही जानकारी मिली की आरोपी कर्नाटक के सांदुर, जिला बेल्लारी से ऑपरेटर कर रहा है। सायबर सेल के सहायक पुलिस निरीक्षक अंकुश दांडगे और उनकी टीम को रवाना किया गया। आरोपी वहां सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहा था। 6 जुन को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां बोरीवली कोर्ट ने उसे 16 जुन तक की पुलिस कस्टडी में जांच के निर्देश दिए।

    जांच अधिकारी ने क्या कहा?

    मामले की जांच कर रहे पुलिस निरीक्षक एएस. देसाई और सहायक पुलिस निरीक्षक अंकुश दांडगे ने बताया, कि आरोपी के मोबाइल फोन में लगभग 100 से भी ज्यादा अलग-अलग महिलाओं के बनावटी ईमेल आईडी प्राप्त हुए हैं और 11 इंस्टाग्राम आईडी जो महिलाओं के नाम से नकली बनाकर कई अश्ली पोस्ट किए गए है उन सभी की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ने अपने मोबाइल फोन मे अलग-अलग महिलाओं और लडकियों के 13500 फोटो स्क्रीन शॉट निकाल कर इकट्ठा किया हुआ था। पुलिस ने इसके खिलाफ और भी शिकायतें मिलने की गुंजाइश जता रही है।

  • मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रही सरकार

    मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रही सरकार

    • नितीश कुमार के वोटरों में नाराजगी
    • नायडू के वोटर्स में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय
    • दिसंबर में बिहार राज्य का विधानसभा चुनाव
    • राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल
    • वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिंदू मतों को लुभाने की कोशिश

    मुंबई: अभी दो साल भी नहीं बैठे कि एन डी ए सरकार में बीजेपी को समर्थन देने वाली पार्टी जे डी यू के नेता सुशासन बाबू उर्फ पलटू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के वोटरों ने जबरदस्त नाराजगी जताकर नीतीश कुमार को केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं। government moving towards mid term elections

    बीजेपी के समर्थन से बिखरने लगे लोग

    वैसे बीजेपी सरकार ने जे डी यू में से कुछ लोगों को केंद्र में मंत्री बनाकर तोड़ फोड़ पहले ही चालू कर दी थी। नीतीश पशोपेश में चाहे जितना भी रहें उनकी पार्टी का टूटना सुनिश्चित है। बचे हुए लोग पार्टी को कितने दिनों तक बचा पाएंगे कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू के वोटर्स जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते हैं बीजेपी को समर्थन देने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।

    वक्फ संशोधन कानून का असर

    केंद्र द्वारा नायडू के समर्थन से वक्फ कानून संशोधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जहां नीतीश कुमार अपना अस्तित्व बचाने में लगे हैं वहीं नायडू भी काफी परेशान नजर आते हैं। दोनों के फॉलोवर और मतदाता नाराज़ चल रहे हैं। यह नाराजगी दोनों के अस्तित्व पर भारी पड़ने वाली है। government moving towards mid term elections

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    विधानसभा चुनाव

    ऐसे में जबकि दिसंबर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले है उससे पहले ही नीतीश कुमार और नायडू को फिर से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई नजर आने लगी है। नीतीश कुमार और नायडू के लिए अपनी अपनी पार्टी बचाने का अंतिम मौका है। अतः संभव है कि दोनों केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर शहीद हो जाएं।

    राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

    उसके पूर्व मानसून सेशन के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव करने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दें। दोनों ही स्थितियों में मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल हैं। जिसमें बीजेपी वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिन्दू मतों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। अतः देश को जनता के द्वारा दिए गए अरबों टैक्स की बर्बादी देखने को मिल सकती है। government moving towards mid term elections