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  • एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    • CBI की एंट्री पर बैन मैं तमिलनाडू भी हुआ शामिल।
    • 2024 के चुनाव में सेंट्रल जांच एजेंसियों पर रोक का होगा कितना असर?

    नितिन तोरस्कर ( मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    विपक्ष शासित राज्यों में सीबीआई-ईडी जैसी सेंट्रल जांच एजेंसियों की एंट्री और एक्शन पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार के इशारे पर सीबीआई और ईडी विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। विपक्ष शासित 10 राज्य ऐसे हैं, जहां सीबीआई बिना राज्य सरकार के परमिशन के कोई जांच या धर-पकड़ नहीं कर सकती। ताजा मामला तमिलनाडु का है। एमके स्टालिन सरकार के गृह मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर कहा है, कि किसी भी तरह की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।

    तमिलनाडु सरकार का यह फैसला तब आया है, जब ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद एक्साइज मिनिस्टर बालाजी सेंदिल को गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु सरकार ने यह आदेश दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट एक्ट 1946 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया है। बिहार में लालू यादव के परिवार के लोग भी यही आरोप लगाते हैं, कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) का इस्तेमाल केंद्र सरकार अपने मतलब के लिए करती है। इसे एकतरफा कार्रवाई या बदले के भावना बताया जाता रहा है। चुनाव के संदर्भ में यह दलील दी जाती है, कि सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच हो रही है। क्या इसका चनावों पर असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।

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    सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर है बैन वाले राज्य ..

    भारत के कुल 10 राज्यों में सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम, मेघालय और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु भी केंद्रीय जांच एजेंसियों पर बैन लगाने वाले राज्यों में शुमार हैं। इन राज्यों में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी शिकायत पर बिना राज्य सरकार की सहमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। हां, इसमें एक छूट जरूर शामिल है। अगर जांच किसी न्यायालयी आदेश या राज्य सरकार की संस्तुति पर हो रही हो, तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हकीकत यह है कि जब भी किसी मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस होती है तो लोग हाईकोर्ट की शरण में जाते हैं। कोर्ट अगर इजाजत देता है तो जांच होती है।

    CBI,
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल तस्वीर

    बंगाल और झारखंड में बैन का कोई असर नहीं।

    बैन के बावजूद सेंट्रल एजेंसियां कुछ राज्यों में आराम से अपने काम को कर रही है। पड़ोस की बात करें तो बंगाल और झारखंड में भी केंद्रीय एजेंसियों (CBI) की जांच पर रोक है। बंगाल में शिक्षक नियुक्ति घोटाला की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रहे हैं। यह जांच भी राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ है। लेकिन बाध्यता यह है कि इसकी जांच का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया है। जांच का परिणाम यह है कि सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है तो कुछ अन्य की गिरफ्तारियां कभी भी हो सकती हैं। यहां राज्य सरकार की बंदिश का कोई रोड़ा सेंट्रल एजेंसियों की जांच या गिरफ्तारी में अटक नहीं रहा है।

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    सेंट्रल एजेंसियों के खिलाफ 14 दल..

    सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) के एक्शन से नाराज 14 राजनीतिक दलों के नेतों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसमें बिहार से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, झारखंड से सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि सेंट्रल एजेंसियों की जांच नहीं रोकी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट जाने वालों में अधिकतर वैसे दल शामिल थे, जिसके नेता या कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अदालतों ने सेंट्रल एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट से निराश होकर ये नेता जांच से बचने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं।

    एजेंसियों की जांच का, चुनाव पर असर…

    केंद्रीय जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्हें जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकारों ने ही कहा है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जांच के लपेटे में उनके पसंदीदा नेता रहे हैं या विरोधी। सामान्य भाव यही है कि चोर या भ्रष्टाचारी पकड़ा जाना चाहिए। लालू यादव के परिवार की बात करें तो उनके मामले में भी स्वजातीय को छोड़ कर किसी को इसकी परवाह नहीं है कि जांच एजेंसियां उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं।

    हां, थोड़ा-बहुत संदेह तब तक बरकरार रहता है, जब तक दोष न सिद्ध हो जाए। सुखद पहलू यह है कि ईडी ने जितने मामलों की अब तक जांच की है, उनमें अधिकतर के खिलाफ दोष सिद्ध हुए हैं और सजा भी हुई हैं। सामाजिक न्याय के मसीहा, समाज के वंचित लोगों को स्वर्ग नहीं, स्वर देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद के बारे में भी जब चारा घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हुई थी तो यही कहा जाता था कि उन्हें फंसाया गया है। दोष सिद्ध होने और सजा के बाद सबकी बोलती बंद हो गई थी।

  • क्या आरएसएस बदलेगी पीएम का चेहरा?

    क्या आरएसएस बदलेगी पीएम का चेहरा?

    • भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।
    • चुनावी सर्वे में मोदी मैजिक खत्म होने के संकेत।
    • गुजरात लॉबी केवल दो उद्योगपतियों के लिए कर रही है काम।
    • पूर्व राज्यपाल ने चालीस जवानों के हत्या की कथित साजिश का किया खुलासा।
    • आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार की संभावना।
    • कांग्रेस का दामन थाम रहे बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    आसार तो यही नजर आ रहे हैं, कि अब मोदी मैजिक खत्म हो रहा है। जिस तरह मोदी के चेहरे पर दो बार लोकसभा और अन्य कई राज्यों में विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में दो बार मोदी चेहरे ने प्रचंड जीत दिलाई थी। उसके आसार खत्म होने के संकेत चुनावी सर्वे में मिलने लगे हैं। मोदी का चेहरा, हिंदुत्व कार्ड, हिंदू-मुस्लिम और पाकिस्तान की बार-बार रट अब नहीं चलने वाली है। अहम बात यह कि ऐसा क्यों हो रहा?कारण अनेक हैं जिनमें एक कारण है गुजरात लॉबी द्वारा खुद को बीजेपी, सरकार और देश समझने की भ्रांति।

    पूरे देश को लगने लगा है कि जिस तरह देश की विरासतें जिन्हें पिछले सत्तर वर्षों में अथक श्रम से निर्मित किया गया था उसे एक झटके में खत्म करने के लिए औने-पौने दाम पर केवल दो गुजराती व्यापारियों को बेचने के कारण जनता समझने लगी है कि गुजरात लॉबी केवल उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। पिछले समय में अडानी पर हिडेनबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार फेक कंपनी द्वारा अडानी डिफेंस में बीस हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट शंकाएं पैदा करने लगा है।

    गुजरात लॉबी..

    चालीस जवानों की हत्या की कथित साजिश जिसको लेकर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने खुलासे किए हैं, जो बेहद शर्मनाक हैं। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश ने दो बार 80 लोकसभा सीटों में अधिकतम सीटें दिलाने वाले राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ के उपर जिस तरह से गुजरात लॉबी ने दूसरे दलों के लोगों को डिप्टी सीएम बनाकर योगी को बांध दिया गया और गुजरात लॉबी ने योगी को अपंग बनाने के लिए संगठन में प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त किए उससे योगी समर्थकों में मायूसी होने से यूपी की चालीस सीटों पर पेंच फंस गया है।

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    भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।

    कर्नाटक में बुरी तरह हार हुई है। सर्वे बताते हैं, कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में बीजेपी की करारी हार संभावित है। जिस तरह बीजेपी की लेफ्ट वाहिनी बजरंग दल के लोग कांग्रेस का दामन थाम रहे, जिस तरह बीजेपी से मोह भंग होने के कारण बीजेपी छोड़ रहे है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार सुनिश्चित लगने के बाद आरएसएस को चिंता में डाल दिया है।

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    आरएसएस समझ चुका है कि मोदी अब रेस जीतने वाले नहीं रहे इसलिए वह मोदी के स्थान पर दूसरा चेहरा आगे लाने पर विचार कर रहा है। जिसे देखकर स्पष्ट है कि अब गुजरात लॉबी के दिन खत्म होने वाले हैं। यद्यपि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मुस्लिमों को साधने में लगे हैं लेकिन इतना तय है कि भारत का मुसलमान सिर्फ उस दल को वोट देगा जो बीजेपी को हरा सके।

  • पैन नंबर को आधार से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ी

    पैन नंबर को आधार से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ी

    सरकार ने समय बढ़ाते हुए पैन और आधार को लिंक करना अनिवार्य बताते हुए इसकों लेकर ऐलान कर दिया है। जोड़ने की प्रक्रिया भी आज हम आप को बता दे..

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (Central Board Of Direct Taxes, Government Of India) यानी सीबीडीटी ने एक बार फिर पैन नंबर (Pan Card Number) को ‘आधार’ (Aadhar Card) से लिंक करने की डेडलाइन बढ़ा दी गई है। अब इस समय सीमा को 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया गया है। करदाताओं को आधार कार्ड को पैन कार्ड से जोड़ने के लिए थोड़ा और समय दिया है। अभी तक जिन लोगों ने पैन को आधार से लिंक (Aadhar Pan link) नहीं कराया है, वे 30 जून तक लिंक करा सकते हैं। सीबीडीटी ने पैन को आधार से लिंक करने की समय सीमा पांचवीं बार बढ़ा दी है।

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    पैन नंबर को आधार से लिंक की प्रक्रिया..

    आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139AA के अनुसार, जिनके पास आधार कार्ड और पैन कार्ड दोनों हैं, उनके लिए दो कार्डों को लिंक करना अनिवार्य है। अब इसकी अंतिम तारीख को बदलकर 30 जून कर दिया गया है। सीबीडीटी के मुताबिक आखिरी तारीख के बाद भी अगर आप ने पैन और आधार को लिंक नहीं किया, तो आपका पैन कार्ड काम नहीं करेगा और आप फाइनेंस से जुड़ा कोई भी काम नहीं कर पाएंगे। बैंक खाते से संबंधित लेन-देन भी नहीं हो पाएंगे। ऐसे में इस एक्सटेंशन से उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्होंने अभी तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करवाया है।

    पैन आधार लिंक,
    Pan Aadhar link

    ऑनलाइन कैसे जांचें?

    इनकम टैक्स विभाग की ऑफिशल वेबसाइट पर जाएं। आप यहां से भी क्लीक कर के वेबसाइट पर जा सकते हैं। (income tax India) यहां क्लीक करने के बाद लिंक आधार (link Aadhar) पर क्लीक करें। इसके बाद वैलिडेट बटन को क्लीक करें। अब आप का आधार कार्ड पैन कार्ड से लिंक हो गया है। इसके अलावा आप को बता दें, कि यदि दोनों कार्ड पहले से लिंक हैं, तो संदेश में “आपका पैन पहले से ही दिए गए आधार से जुड़ा हुआ है” दिखाई देगा।
    यदि आपका पैन और आधार कार्ड लिंक नहीं हैं, तो आपको एक संदेश दिखाई देगा कि पैन आधार से लिंक नहीं है।
    यदि लिंक प्रक्रिया में है, तो करदाता अपनी विंडो पर देखेगा कि आपका आधार-पैन लिंकिंग अनुरोध सत्यापन के लिए UIDAI को भेज दिया गया है। कृपया होम पेज पर ‘लिंक आधार स्थिति’ लिंक पर क्लिक करें और फिर स्थिति की जांच करें।

    एसएमएस के जरिए से लिंक कैसे करें ?

    आप को अधिक जानकारी के मुताबिक, बताते चलें, कि पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने के लिए आप मोबाइल की एसएमएस सेवा का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए अपने आधार कार्ड से पंजीकृत (Registered Mobile Number) से UIDPAN<12 अंको का आधार कार्ड नंबर><10 अंकों का पैन कार्ड नंबर> 567678 या 56161 पर एसएमएस (SMS) भेज दें। इसके साथ ही आप को मोबाइल पर पुष्टिकरण एसएमएस प्राप्त हो जाएगा, कि आप का पैन आधार से लिंक हो गया है।

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