Category: Political News

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  • Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, लेकिन शहर को मेयर मिलने में वक्त लगेगा। जानिए मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से कैसे तय होता है, कानून क्या कहता है और इसमें एक हफ्ता क्यों लग सकता है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव खत्म हो चुके हैं और नई जनरल बॉडी भी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मुंबई को तुरंत नया मेयर नहीं मिलेगा। इसकी वजह सिर्फ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि मेयर के चुनाव से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून के मुताबिक, मेयर पद का आरक्षण लॉटरी सिस्टम से तय होता है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर का चुनाव संभव नहीं है। इसी कारण मुंबई को नया मेयर मिलने में कम से कम एक हफ्ते का वक्त लग सकता है।

    🏛️ Mumbai का मेयर तुरंत क्यों नहीं चुना जा सकता?

    बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद आमतौर पर लोगों को लगता है कि मेयर का नाम भी तुरंत सामने आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और उससे पहले कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
    सबसे अहम प्रक्रिया है मेयर पद का आरक्षण तय होना, जो सीधे चुनाव से नहीं बल्कि लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स से तय किया जाता है।

    🎟️ क्या है मेयर पद का आरक्षण सिस्टम?

    देशभर की शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
    इस व्यवस्था के तहत मेयर का पद अलग-अलग वर्गों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है, जैसे:

    • अनुसूचित जाति (SC)
    • अनुसूचित जनजाति (ST)
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
    • महिलाएं
    • सामान्य (ओपन) वर्ग

    यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता, बल्कि हर कार्यकाल में लॉटरी के ज़रिए तय किया जाता है।

    📜 आरक्षण रोटेशन क्यों जरूरी है?

    मेयर पद पर आरक्षण की व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है। इस संशोधन के तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और यह तय किया गया कि SC, ST और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें।
    महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगरपालिका अधिनियम (Municipal Corporations Act) के तहत लागू होती है, जिसमें OBC आरक्षण भी शामिल है।
    रोटेशन सिस्टम का मकसद यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर मेयर बनने का मौका मिले और कोई एक वर्ग लगातार फायदे में न रहे।

    🎲 मेयर पद का फैसला लॉटरी से ही क्यों?

    लॉटरी सिस्टम इसलिए अपनाया गया है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
    अगर सरकार या राजनीतिक दल तय करें कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा, तो उस पर पक्षपात और राजनीतिक दखल के आरोप लग सकते हैं।
    ड्रॉ ऑफ लॉट्स से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आरक्षण पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय हो।

    🗂️ लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

    1. शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) लॉटरी कराने का नोटिफिकेशन जारी करता है
    2. पिछले कार्यकालों के आधार पर आरक्षण रोटेशन की सूची तैयार की जाती है
    3. सार्वजनिक रूप से लॉटरी (ड्रॉ) निकाली जाती है
    4. जिस वर्ग का नाम निकलता है, वही मेयर पद के लिए आरक्षित माना जाता है
    5. इसके बाद आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है

    जब तक यह पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती, कोई भी पार्टी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती।

    🗳️ मेयर का चुनाव कैसे होता है?

    आरक्षण तय होने के बाद बीएमसी की विशेष बैठक बुलाई जाती है।
    मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच से ही किया जाता है।
    मुंबई की 227 सदस्यीय जनरल बॉडी में मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है।
    पिछले दो कार्यकालों में लॉटरी के ज़रिए मेयर पद ओपन जनरल कैटेगरी में गया था।

    👑 मुंबई मेयर के पास कितनी ताकत होती है?

    कानून के मुताबिक, मुंबई का मेयर बीएमसी का औपचारिक (Ceremonial) प्रमुख होता है।
    मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है और उनकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं:

    • जनरल बॉडी की बैठकों की अध्यक्षता
    • सदन में व्यवस्था बनाए रखना
    • बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
    • शहर के “First Citizen” के तौर पर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करना

    हालांकि, बीएमसी का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होता है, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी होते हैं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मेयर चुना जा सकता है?
    👉 नहीं, पहले मेयर पद का आरक्षण तय होना जरूरी है।

    Q2. मेयर पद का आरक्षण कौन तय करता है?
    👉 शहरी विकास विभाग लॉटरी के ज़रिए आरक्षण तय करता है।

    Q3. मुंबई को नया मेयर मिलने में कितना वक्त लग सकता है?
    👉 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक हफ्ता लग सकता है।

  • BMC Election 2026: मतदान केंद्रों पर सुविधा और सख्ती, प्रचार सामग्री हटाने के सख्त निर्देश

    BMC Election 2026: मतदान केंद्रों पर सुविधा और सख्ती, प्रचार सामग्री हटाने के सख्त निर्देश

    BMC Election 2026 को लेकर मुंबई महानगरपालिका ने मतदान केंद्रों की सुविधाएं, स्टाफ प्लानिंग और प्रचार सामग्री हटाने को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। जानिए पूरी डिटेल।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वत्रिक चुनाव 2025-26 को लेकर प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शक बनाने के लिए मतदान केंद्रों की मूलभूत सुविधाओं, कर्मचारियों की तैनाती और चुनाव प्रचार खत्म होते ही बैनर-पोस्टर हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी ने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    🏛️ BMC चुनाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में 10 जनवरी 2026 को उप आयुक्तों और सहायक आयुक्तों की एक अहम समन्वय बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. (श्रीमती) अश्विनी जोशी ने की।
    बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि BMC चुनाव 2026 को पूरी तरह निर्भय, मुक्त और अनुशासित माहौल में संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर माइक्रो प्लानिंग की गई है।

    BMC-Election-2026-Convenience-and-strictness-at-polling-stations-strict-instructions-to-remove-promotional-material-news

    🗳️ मतदान केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं पर खास जोर

    डॉ. अश्विनी जोशी ने निर्देश दिए कि सभी मतदान केंद्रों पर पानी, बिजली, साफ-सफाई, रैंप, बैठने की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
    साथ ही मतदान केंद्र और उसके आसपास का परिसर साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

    👥 4,500 स्वयंसेवकों की होगी तैनाती

    मतदान के दिन लगभग 4,500 स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जाएगी।
    इन स्वयंसेवकों की मदद से:

    • मतदाताओं की लाइन मैनेजमेंट
    • भीड़ नियंत्रण
    • दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को सहयोग
      जैसे काम सुचारु रूप से किए जाएंगे।

    📮 ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए पोस्टल वोटिंग

    मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के लिए CPS (Central Polling System) कार्यालय में पोस्टल बैलेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
    प्रशासन ने सभी पात्र कर्मचारियों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है।

    🚫 प्रचार खत्म होते ही पोस्टर-बैनर हटाने का आदेश

    प्रचार का आधिकारिक समय 13 जनवरी 2026, शाम 5:30 बजे खत्म हो जाएगा।
    इसके बाद सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को:

    • बैनर
    • होर्डिंग
    • झंडे
    • प्रचार सामग्री
      तुरंत हटाने होंगे।
      डॉ. अश्विनी जोशी ने साफ कहा है कि देरी या अनदेखी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    🚓 फ्लाइंग स्क्वाड और स्टैटिक टीम रहेंगी एक्टिव

    चुनाव आचार संहिता के पालन के लिए:

    • Static Surveillance Team
    • Flying Squad Team
      को और अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
      किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

    🚚 मतदान के बाद EVM और सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था

    मतदान के बाद EVM और चुनाव सामग्री को स्ट्रॉन्ग रूम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था तय कर दी गई है।
    इसमें पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और RTO के साथ समन्वय किया जाएगा।

    📅 मतदान और मतगणना की तारीख

    • मतदान: गुरुवार, 15 जनवरी 2026
    • मतगणना: शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. BMC चुनाव 2026 की मतदान तारीख क्या है?
    👉 मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा।

    Q2. प्रचार सामग्री कब तक हटानी होगी?
    👉 13 जनवरी 2026 शाम 5:30 बजे के बाद तुरंत हटानी होगी।

    Q3. मतदान केंद्रों पर कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी?
    👉 पानी, बिजली, साफ-सफाई, रैंप और बैठने की व्यवस्था।

    Q4. चुनाव ड्यूटी वाले कर्मचारी कैसे वोट करेंगे?
    👉 CPS कार्यालय में पोस्टल बैलेट के जरिए।

  • BMC चुनाव 2025–26: मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान से मतदाता जागरूक

    BMC चुनाव 2025–26: मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान से मतदाता जागरूक

    Bmc चुनाव 2025–26 को लेकर मुंबई में मतदाता जागरूकता तेज। मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान के तहत पथनाट्य और जनजागृति रैली के जरिए लोगों को मतदान के महत्व की जानकारी दी गई।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की आगामी चुनाव 2025–26 के मद्देनज़र मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए SVEEP यानी ‘मतदारों का सुनियोजित शिक्षण और चुनावी सहभाग’ अभियान के तहत आज मुंबादेवी मंदिर परिसर में पथनाट्य और जनजागृति रैली का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान के प्रति जागरूक कर चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।

    🟠 SVEEP अभियान क्या है और क्यों जरूरी है?

    SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) अभियान चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष जनजागृति कार्यक्रम है, जिसका मकसद मतदाताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और मतदान प्रक्रिया की सही जानकारी देना है।

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    बीएमसी चुनाव जैसे बड़े स्थानीय निकाय चुनावों में आम नागरिकों की भागीदारी बेहद अहम होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में चलाया जा रहा है।

    🔵 मुंबादेवी मंदिर परिसर क्यों चुना गया?

    मुंबादेवी मंदिर परिसर मुंबई के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक इलाकों में से एक है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, व्यापारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहते हैं। ऐसे सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मतदान का संदेश पहुंचाना था।

    🎭 पथनाट्य के ज़रिए आसान भाषा में समझाया गया मतदान का महत्व

    SVEEP अभियान के तहत आयोजित पथनाट्य में कलाकारों ने आम मुंबईकर की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि—

    • मतदान क्यों जरूरी है
    • वोट न देने से लोकतंत्र को क्या नुकसान होता है
    • हर वोट कैसे विकास में भूमिका निभाता है

    पथनाट्य की भाषा सरल, प्रभावी और आम आदमी से जुड़ी हुई थी, जिससे वहां मौजूद लोगों ने इसे गंभीरता से सुना और सराहा।

    🚶 जनजागृति रैली ने खींचा लोगों का ध्यान

    पथनाट्य के बाद इलाके में जनजागृति रैली भी निकाली गई। रैली में “मतदान हमारा अधिकार है”, “लोकतंत्र मजबूत करें, वोट जरूर करें” जैसे नारे लगाए गए।
    रैली के दौरान नागरिकों को मतदान से जुड़ी जानकारी वाले पर्चे भी वितरित किए गए।

    🗳️ BMC चुनाव 2025–26 में बढ़ेगी मतदाता भागीदारी की उम्मीद

    प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के अभियान से खासतौर पर युवा मतदाता, पहली बार वोट डालने वाले नागरिक और शहरी क्षेत्र के व्यस्त लोग मतदान के लिए प्रेरित होंगे।
    SVEEP जैसे कार्यक्रमों से चुनाव को लेकर फैली गलतफहमियां भी दूर होती हैं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. SVEEP अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    SVEEP अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को उनके मतदान अधिकार और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।

    Q2. बीएमसी चुनाव 2025–26 कब होने की संभावना है?
    बीएमसी चुनाव 2025–26 के दौरान कराए जाने की संभावना है, जिसकी तैयारी प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है।

    Q3. पथनाट्य का चुनाव क्यों किया गया?
    पथनाट्य एक प्रभावी और आसान माध्यम है, जिससे आम जनता तक गंभीर संदेश सरल तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

    Q4. क्या यह अभियान आगे भी चलेगा?
    हां, SVEEP अभियान मुंबई के विभिन्न हिस्सों में आगे भी जारी रहेगा।

  • BMC चुनाव में पर्चों पर संकट: ठाकरे गुट के 5 उम्मीदवारों पर खतरा, डिजिटल साइन बना वजह

    BMC चुनाव में पर्चों पर संकट: ठाकरे गुट के 5 उम्मीदवारों पर खतरा, डिजिटल साइन बना वजह

    BMC चुनाव 2026 में नामांकन जांच के दौरान बड़ा सियासी विवाद सामने आया है। मालाड के पांच वार्डों में ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के पर्चों पर शिंदेसेना ने डिजिटल साइन को लेकर आपत्ति उठाई है, वहीं दो वार्डों में महायुति को झटका लगा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के लिए नामांकन पत्रों की छाननी शुरू होते ही सियासी घमासान तेज हो गया है। पश्चिमी उपनगर मालाड में ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवारों के पर्चे खतरे में पड़ गए हैं। शिंदेसेना ने आरोप लगाया है कि इन उम्मीदवारों के एबी फॉर्म पर हाथ से साइन की जगह डिजिटल साइन किए गए हैं, जो नियमों के खिलाफ हैं। दूसरी ओर, वार्ड 211 और 212 में शिंदेसेना और भाजपा को भी बड़ा झटका लगा है, जिससे चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    🗳️ BMC चुनाव 2026: त्रिकोणीय मुकाबला

    इस बार बीएमसी चुनाव में मुकाबला सीधा नहीं है।

    • एक तरफ शिंदेसेना-भाजपा (महायुति)
    • दूसरी तरफ ठाकरे बंधुओं का गुट
    • और तीसरी तरफ कांग्रेस-वंचित गठबंधन

    मंगलवार को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। अब पूरे मुंबई में नामांकन पत्रों की जांच चल रही है, और इसी दौरान कई जगहों से विवाद सामने आ रहे हैं।

    ⚠️ मालाड में बढ़ी ठाकरे गुट की परेशानी

    पश्चिमी उपनगर मालाड पूर्व के ईशान्य विभाग स्थित चुनाव कार्यालय में जब नामांकन की जांच शुरू हुई, तब ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ गईं।
    शिंदेसेना ने वार्ड क्रमांक 38, 39, 40, 41 और 42 में ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवारों के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई है।

    अगर यह आपत्ति मान्य मानी गई, तो इन सभी वार्डों में ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के पर्चे रद्द हो सकते हैं, जिससे वहां सीधा मुकाबला ही बदल जाएगा।

    ✍️ डिजिटल साइन पर क्यों हुआ विवाद?

    शिंदेसेना के विभाग प्रमुख वैभव भरडकर ने चुनाव अधिकारियों को बताया कि ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के एबी फॉर्म पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए हैं।
    जबकि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक,

    • एबी फॉर्म पर हाथ से की गई असली साइन जरूरी होती है
    • डिजिटल साइन को वैध नहीं माना जाता

    इसी आधार पर शिंदेसेना ने लिखित शिकायत दी है। चुनाव अधिकारियों ने शिकायत स्वीकार कर ली है और नियमों के तहत फैसला लेने का भरोसा दिया है।

    🔄 महायुति को भी झटका, दो वार्डों में पर्चे रद्द

    जहां एक ओर ठाकरे गुट के पांच उम्मीदवार संकट में हैं, वहीं दूसरी ओर महायुति को भी नुकसान झेलना पड़ा है।

    • वार्ड क्रमांक 211 में शिंदेसेना के उम्मीदवार का पर्चा जरूरी दस्तावेज पूरे न होने की वजह से रद्द कर दिया गया।
    • वार्ड क्रमांक 212 में भाजपा उम्मीदवार मंदाकिनी खामकर का नामांकन भी खारिज हो गया।

    बताया जा रहा है कि वे एबी फॉर्म मिलने के बाद नामांकन कार्यालय 15 मिनट देरी से पहुंचीं, जिस वजह से उनका पर्चा स्वीकार नहीं किया गया।

    🟠 वार्ड 212 में मनसे की स्थिति मजबूत

    भाजपा उम्मीदवार का पर्चा रद्द होते ही वार्ड 212 में सियासी गणित बदल गया है।
    अब यहां मनसे की उम्मीदवार श्रावणी हलदळकर को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

    इस वार्ड में

    • अखिल भारतीय सेना की गीता गवळी,
    • कांग्रेस
    • और अन्य दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं,

    लेकिन ठाकरे बंधुओं की एकजुट ताकत और मौजूदा हालात को देखते हुए मनसे उम्मीदवार की जीत की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ, तो बीएमसी में मनसे का खाता खुल सकता है।

    👀 आगे क्या होगा?

    अब सभी राजनीतिक दलों की नजर चुनाव अधिकारियों के फैसले पर टिकी है।

    • अगर डिजिटल साइन को नियमों के खिलाफ माना गया, तो मालाड के पांच वार्डों में ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगेगा।
    • वहीं महायुति पहले ही दो वार्डों में नुकसान झेल चुकी है।

    आने वाले फैसलों से साफ होगा कि किसका पत्ता कटेगा और किसे चुनावी फायदा मिलेगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. ठाकरे गुट के कितने उम्मीदवारों के पर्चे खतरे में हैं?
    👉 कुल 5 उम्मीदवारों के।

    Q2. विवाद की मुख्य वजह क्या है?
    👉 एबी फॉर्म पर डिजिटल साइन किया जाना।

    Q3. कौन-कौन से वार्ड प्रभावित हो सकते हैं?
    👉 वार्ड क्रमांक 38, 39, 40, 41 और 42।

    Q4. महायुति को कहां नुकसान हुआ है?
    👉 वार्ड 211 और 212 में।

    Q5. वार्ड 212 में किसे बढ़त मानी जा रही है?
    👉 मनसे उम्मीदवार श्रावणी हलदळकर को।

  • BMC चुनाव 2025-26: नामांकन के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र जरूरी

    BMC चुनाव 2025-26: नामांकन के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र जरूरी

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2025-26 में उम्मीदवारों के लिए नामांकन पत्र के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र देना अनिवार्य, नहीं देने पर नामांकन हो सकता है रद्द।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वत्रिक चुनाव 2025-26 की प्रक्रिया को लेकर राज्य चुनाव आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब हर उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य होगा। यदि जांच के दौरान यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को नामांकन पत्र अवैध घोषित करने का अधिकार होगा।

    BMC-Elections-2025-26-Toilet-usage-certificate-mandatory-with-nomination

    राज्य चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश

    माननीय राज्य चुनाव आयोग, महाराष्ट्र ने चुनाव कार्यक्रम घोषित करते समय साफ किया है कि नामांकन के साथ उम्मीदवार द्वारा दिए जाने वाले सभी शपथपत्रों और घोषणाओं में शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र भी शामिल होगा। यह नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू रहेगा।

    स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ा है नियम

    यह शर्त स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाई गई थी। खुले में शौच को खत्म करने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक 19 (2016) में संशोधन किया गया था।
    इसके अनुसार,

    • जो व्यक्ति नियमित रूप से शौचालय का उपयोग नहीं करता
    • या उसका प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करता

    वह चुनाव लड़ने और निर्वाचित होने के लिए अपात्र माना जाएगा। यह नियम 2017 के महानगरपालिका चुनाव से पहले ही लागू कर दिया गया था।

    किसे और कैसा प्रमाणपत्र देना होगा

    BMC चुनाव 2025-26 में उम्मीदवारों को निम्न में से कोई एक जानकारी देना जरूरी होगा:

    • अगर खुद के घर में शौचालय है, तो उसका प्रमाण
    • अगर किराए के घर में शौचालय है, तब भी प्रमाणपत्र
    • अगर घर में शौचालय नहीं है, तो सामुदायिक शौचालय के उपयोग का उल्लेख

    यह प्रमाणपत्र सहायक आयुक्त या प्रभाग अधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार जारी किया जाएगा या स्व-प्रमाणपत्र स्वीकार किया जाएगा।

    तस्वीर की जरूरत नहीं, प्रक्रिया सरल

    महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि

    • शौचालय या व्यक्ति की फोटो खींचने की कोई जरूरत नहीं है
    • केवल नियमों के अनुसार प्रमाणपत्र देना पर्याप्त होगा

    इस संबंध में 22 दिसंबर 2025 को BMC मुख्यालय में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भी विस्तृत जानकारी दी गई थी।

    नामांकन जांच में होगी सख्ती

    चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नामांकन पत्र की जांच के दौरान यदि शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र नहीं पाया गया, तो नामांकन तुरंत खारिज किया जा सकता है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शौचालय उपयोग प्रमाणपत्र किसके लिए जरूरी है?
    ➡️ BMC चुनाव 2025-26 लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए।

    Q2. प्रमाणपत्र नहीं देने पर क्या होगा?
    ➡️ नामांकन पत्र अवैध घोषित किया जा सकता है।

    Q3. किराए के घर में रहने वालों को क्या करना होगा?
    ➡️ शौचालय उपयोग का प्रमाणपत्र या स्व-प्रमाणपत्र देना होगा।

    Q4. क्या शौचालय की फोटो देनी होगी?
    ➡️ नहीं, फोटो की कोई आवश्यकता नहीं है।

    Q5. यह नियम कब से लागू है?
    ➡️ 2016 के संशोधित कानून के तहत, 2017 से लागू।

  • BMC की सख्ती: चुनाव आचार संहिता में मुंबई से 2103 अवैध राजनीतिक होर्डिंग हटाए

    BMC की सख्ती: चुनाव आचार संहिता में मुंबई से 2103 अवैध राजनीतिक होर्डिंग हटाए

    मुंबई महानगरपालिका चुनाव की घोषणा के बाद BMC ने आदर्श आचार संहिता लागू होते ही 2103 अवैध राजनीतिक बैनर, होर्डिंग और फ्लेक्स हटाने की बड़ी कार्रवाई की। जानिए पूरी रिपोर्ट।

    मुंबई: नगर पालिका चुनाव घोषणा के तुरंत बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 दोपहर 3 बजे तक, मुंबई भर में कुल 2,103 अनधिकृत राजनीतिक विज्ञापन फलक, बैनर, फ्लेक्स और होर्डिंग हटाए गए हैं। यह कार्रवाई चुनाव में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए युद्ध स्तर पर की गई।

    🗳️ चुनाव घोषणा के बाद तुरंत लागू हुई आचार संहिता

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 15 दिसंबर 2025 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आम चुनाव की घोषणा किए जाने के बाद पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई। इसके तहत किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या समर्थक को सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति नहीं है।

    🚧 2103 अवैध होर्डिंग्स, बैनर और फ्लेक्स हटाए गए

    BMC के लाइसेंस विभाग द्वारा पूरे शहर में नियमबाह्य और बिना अनुमति लगाए गए:

    • राजनीतिक होर्डिंग
    • बैनर और फ्लेक्स
    • कियोस्क और स्टिकर्स
    • झंडे, निशान और बोर्ड
    • दीवारों पर की गई राजनीतिक पेंटिंग

    जैसी कुल 2,103 वस्तुएं हटाई गईं। यह कार्रवाई प्रमुख चौकों, मुख्य सड़कों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक स्थलों पर की गई।

    👮‍♂️ वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चली मुहिम

    यह पूरी कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त एवं चुनाव अधिकारी श्री. भूषण गगराणी के निर्देश पर की जा रही है।
    मुहिम का नेतृत्व:

    • अतिरिक्त आयुक्त (शहर) डॉ. (श्रीमती) जोशी
    • उप आयुक्त (विशेष) श्रीमती चंदा जाधव

    के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

    🗣️ BMC अधिकारियों ने क्या कहा?

    अतिरिक्त आयुक्त डॉ. जोशी ने कहा कि

    “चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आदर्श आचार संहिता का पालन बेहद जरूरी है। किसी भी तरह का अनुचित राजनीतिक प्रभाव रोकने के लिए समय रहते सख्त कदम उठाए गए हैं।”

    वहीं उप आयुक्त चंदा जाधव ने बताया कि

    “मुंबई के हर प्रमुख इलाके में अवैध राजनीतिक विज्ञापन हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। सभी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की जाती है।”

    ⚠️ आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

    BMC ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में भी अगर कहीं आचार संहिता का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महानगरपालिका ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और शहर की सुंदरता व कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें।


    ❓ FAQ Section

    Q1. मुंबई में कितने अवैध राजनीतिक होर्डिंग हटाए गए?
    ➡️ कुल 2,103 अवैध राजनीतिक बैनर, फ्लेक्स और होर्डिंग हटाए गए।

    Q2. यह कार्रवाई कब तक की गई?
    ➡️ 16 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजे तक।

    Q3. कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
    ➡️ महानगरपालिका आयुक्त एवं चुनाव अधिकारी भूषण गगराणी के निर्देश पर।

    Q4. आगे भी कार्रवाई होगी क्या?
    ➡️ हां, आचार संहिता के उल्लंघन पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • NCP नेता नोवेल साल्वे पर हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर धरना शुरू

    NCP नेता नोवेल साल्वे पर हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर धरना शुरू

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के पूर्व राज्य सचिव नोवेल साल्वे पर उल्हासनगर में हुए हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में धरना प्रदर्शन शुरू।

    मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पूर्व महाराष्ट्र स्टेट सेक्रेटरी नोवेल साल्वे पर हुए कथित हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में धरना आंदोलन शुरू हो गया है। साल्वे का आरोप है कि उल्हासनगर में 9 जून को उन पर हमला हुआ, जिसके बाद पुलिस ने सही कार्रवाई नहीं की और अब वह न्याय की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

    🔹 हमला कैसे हुआ?

    जानकारी के मुताबिक, 9 जून की शाम नोवेल साल्वे उल्हासनगर कैंप-3, सेक्शन 17 के रास्ते से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कुछ लोग एक बुजुर्ग सिंधी व्यक्ति को पीट रहे हैं। साल्वे ने बीच-बचाव करने की कोशिश की लेकिन उन लोगों में से एक ने पीछे से बांस लेकर साल्वे पर हमला कर दिया।

    हमले के बाद साल्वे की हालत बिगड़ गई, उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और उन्हें कार्डियक अटैक आया। स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल आनंद हॉस्पिटल पहुंचाया।

    🔹 परिवार ने की पुलिस से शिकायत

    घटना के तुरंत बाद साल्वे की पत्नी और बेटे ने उल्हासनगर के सेंट्रल पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने:

    • आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की
    • बाेले के बयान दर्ज किए बिना ही केस दर्ज कर दिया
    • जांच में जानबूझकर लापरवाही बरती

    🔹 आनंद अस्पताल से आजाद मैदान तक आंदोलन

    अपनी हालत सुधरने के बाद साल्वे ने सोमवार को मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने कहा:

    “जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे और पुलिस की मिलीभगत पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन रुकेगा नहीं।”

    🔹 साल्वे की स्थिति गंभीर थी, हुआ ओपन हार्ट सर्जरी

    हमले के बाद स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि साल्वे की ओपन हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। उनका कहना है कि इस हमले का सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ा है और जिम्मेदार लोग आज भी खुले घूम रहे हैं।

    🔹 मांगें क्या हैं?

    नोवेल साल्वे ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

    1. हमले में शामिल आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी हो
    2. जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
    3. केस की सुनवाई तेजी से की जाए

    FAQ सेक्शन:

    Q1: आंदोलन कहां हो रहा है?
    ➡ आंदोलन मुंबई के आजाद मैदान में चल रहा है।

    Q2: हमला कब हुआ था?
    ➡ हमला 9 जून 2025 को उल्हासनगर में हुआ था।

    Q3: आरोपी अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुए?
    ➡ साल्वे का आरोप है कि पुलिस आरोपियों को बचा रही है और ठोस कार्रवाई नहीं कर रही।

    Q4: साल्वे की सेहत पर क्या असर हुआ?
    ➡ हमले के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया जिसके कारण उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई।

  • इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस ठप होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सांसद वर्षा गायकवाड ने एयरपोर्ट पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरकार व एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    मुंबई: पिछले तीन दिनों से देशभर में IndiGo Airlines की फ्लाइट ऑपरेशन में बड़ा बवाल देखने को मिला। इस गड़बड़ी की वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे, जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    न पानी, न सही जानकारी और न स्टाफ की मदद, ऐसा माहौल बना रहा जैसे यात्री “ओलीस” बना दिए गए हों।
    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रा. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने इस स्थिति को सरकार की नाकामी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    🔹 सरकार और सिस्टम की बड़ी नाकामी: गायकवाड

    सांसद वर्षा गायकवाड ने मुंबई एयरपोर्ट का दौरा कर यात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

    “तीन दिन तक देशभर में फ्लाइट सर्विस ठप रही लेकिन सरकार की तरफ से एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों को छोड़ दिया गया जैसे उनकी कोई सुनने वाला नहीं। यह नागरी विमानन मंत्रालय की सीधी नाकामी है।”

    🔹 टिकटों के दाम 5 हजार से 60 हजार तक

    इसी दौरान कई यात्रियों ने शिकायत की कि कुछ एयरलाइंस ने हालात का फायदा उठाते हुए टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी की।

    • जो टिकट पहले ₹5,000 में मिल रहा था
    • वही टिकट ₹50,000 से ₹60,000 तक बेचा गया।

    सांसद गायकवाड ने इसे “यात्रियों की खुली लूट” बताया।

    🔹 यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं

    एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद खराब रही। कई घंटों तक इंतज़ार के बावजूद:

    • कोई जानकारी नहीं
    • पानी नहीं
    • फूड सप्लाई नहीं
    • हेल्प डेस्क नदारद

    यात्रियों का कहना था कि एयरलाइंस स्टाफ गायब था और कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था।

    🔹 इंडिगो और केंद्र सरकार कैसे भरेंगी भरपाई?

    सांसद वर्षा गायकवाड ने सवाल उठाया:

    “जो बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था में फंसे रहे, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नुकसान की भरपाई सरकार और इंडिगो कैसे करेगी?”

    🔹 जांच, एक्शन और सुधार की मांग

    उन्होंने कहा कि यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि ऑपरेशनल फेल्योर है और इसकी:

    • सख्त जांच
    • जिम्मेदारी तय
    • और भविष्य में रोकथाम के लिए सिस्टम सुधार

    जरूरी है।


    FAQ Section


    Q1. इंडिगो फ्लाइट में समस्या क्यों आई?
    ✔ अभी आधिकारिक कारण अस्पष्ट बताया जा रहा है, लेकिन यह बड़ा ऑपरेशनल और मैनेजमेंट फेल्योर माना जा रहा है।


    Q2. क्या यात्रियों को रिफंड या मुआवज़ा मिलेगा?
    ✔ सांसद वर्षा गायकवाड ने इसकी मांग की है, लेकिन अब तक एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं।


    Q3. क्या सरकार जांच करेगी?
    ✔ मांग की गई है, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक इन्वेस्टिगेशन आदेश नहीं दिया गया है।


    Q4. क्या टिकटों की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई?
    ✔ हां, यात्रियों ने बताया कि 5 हजार के टिकट 50–60 हजार में बेचे गए।

  • गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    मुंबई के गोरेगांव स्थित विवेक कॉलेज में कथित हिजाब प्रतिबंध को लेकर छात्रों और AIMIM कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन। कॉलेज प्रशासन ने जारी किया लिखित स्पष्टीकरण—”हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं”। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर तीन छात्रों पर FIR दर्ज की।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक विद्याालय एंड जूनियर कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया। कुछ छात्राओं और AIMIM मुंबई यूनिट के सदस्यों ने कॉलेज प्रशासन पर हिजाब पहनने पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुए कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर पुलिस ने तीन छात्रों के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में FIR दर्ज की। वहीं कॉलेज प्रबंधन ने लिखित बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं है और पूरा मामला “गलतफहमी” के कारण हुआ।

    🎓 कैसे शुरू हुआ विवाद?

    सूत्रों के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने AIMIM से शिकायत की कि कॉलेज में उन्हें कक्षा में प्रवेश करने से पहले हिजाब उतारने के लिए कहा गया। छात्राओं ने इसे धार्मिक आस्था का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई।

    इसके बाद AIMIM मुंबई अध्यक्ष फ़ारूक मक़बूल शबदी छात्रों के साथ कॉलेज आए और उन्होंने कॉलेज गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला सुर्खियों में आ गया।

    🏫 कॉलेज प्रबंधन का स्पष्टीकरण

    विवाद बढ़ता देख कॉलेज की प्रिंसिपल शीजा मेनन ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा:

    “हमारे संस्थान में छात्राओं के हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसा कोई आदेश कॉलेज की तरफ से जारी नहीं किया गया है। शायद कुछ गलतफहमी के कारण यह विवाद खड़ा हुआ, जिसकी आवश्यकता नहीं थी।”

    कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि वे विविध समुदायों का सम्मान करते हैं और संस्थान में सभी छात्रों के लिए समान और सुरक्षित माहौल बनाए रखना उनका उद्देश्य है।

    👮 पुलिस की कार्रवाई

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    गोरेगांव पुलिस स्टेशन ने बताया कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए तीन छात्रों के खिलाफ BNSS की धारा 35(3) के तहत FIR दर्ज की गई। हालांकि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।

    बाद में पुलिस स्टेशन में बैठक हुई, जिसमें:

    • प्रबंधन का लिखित स्पष्टीकरण पढ़ा गया
    • AIMIM प्रतिनिधियों और छात्राओं को जानकारी दी गई
    • सभी पक्ष सहमत हुए कि मामला समझौते के साथ शांतिपूर्वक समाप्त किया जाए

    पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में कोई तनाव या सांप्रदायिक असहमति नहीं है

    🧾 राजनीतिक प्रतिक्रिया

    विवाद की जानकारी मिलते ही पूर्व बीजेपी पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उन्हें स्थिति समझाई, जिसके बाद वे वापस लौट गए।

    📍 सोशल मीडिया में बहस

    यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे “धार्मिक आज़ादी का मामला” बताया, जबकि कुछ ने छात्रों द्वारा बिना परमिशन प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए।

    जमीनी हकीकत

    जबकि प्रदर्शन से पहले जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ वीडियो सामने आया। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई दी। कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    1 दिसंबर को एआईएमआईएम की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी स्थित गोरेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक, “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।” इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नही किया गया। उसके बाद ही छात्रों ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।


    FAQs

    Q1: विवाद किस कॉलेज में हुआ?
    ➡ गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक कॉलेज में।

    Q2: FIR क्यों दर्ज की गई?
    ➡ बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सरकारी आदेश की अवहेलना के आरोप में।

    Q3: क्या कॉलेज ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था?
    ➡ कॉलेज ने लिखित में स्पष्ट किया—हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं।

    Q4: क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
    ➡ नहीं, सिर्फ नोटिस देकर मामला शांतिपूर्वक सुलझाया गया।

    Q5: प्रदर्शन कौन आयोजित कर रहा था?
    ➡ AIMIM कार्यकर्ताओं और कुछ छात्राओं ने भाग लिया।