Mumbai News: Malad West में बनने वाले bridge और elevated road project के ₹1,666 करोड़ के BMC tender पर विवाद खड़ा हो गया है। ROFR clause के जरिए J Kumar-RPS को कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर fairness और competitive bidding पर सवाल उठे हैं। जानिए पूरा मामला।
मुंबई: Malad West bridge project और elevated road project को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब ₹1,666 करोड़ के BMC tender पर अब पारदर्शिता और competitive bidding को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह कॉन्ट्रैक्ट J Kumar–RPS joint venture को मिलने जा रहा है, जिसने Right of First Refusal (ROFR) clause का इस्तेमाल कर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी की कीमत को मैच कर दिया।
Malad West Bridge Project पर क्यों उठे सवाल
मुंबई के Malad West infrastructure project के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने जो tender जारी किया था, अब उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि bidding process पूरी तरह से fair और transparent नहीं रही।

यह project bridge और elevated road के निर्माण से जुड़ा है, जिसकी कुल लागत ₹1,666 करोड़ बताई जा रही है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य इलाके में traffic congestion कम करना और connectivity बेहतर बनाना है।
ROFR Clause से J Kumar-RPS को मिला फायदा
जब financial bids खोले गए तो Larsen & Toubro (L&T) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी निकली। उसने ₹1,666 करोड़ की बोली लगाई, जो BMC के अनुमान से करीब 1.8% ज्यादा थी।
लेकिन tender में मौजूद Right of First Refusal (ROFR) clause के कारण J Kumar-RPS joint venture को प्राथमिकता दी गई। इस clause के तहत कंपनी को मौका दिया गया कि वह किसी तीसरी कंपनी की सबसे कम बोली को match कर सके।
J Kumar-RPS ने L&T की कीमत को match कर दिया और इसी वजह से अब contract उन्हें दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
2024 का पहला Tender क्यों रद्द हुआ
इस project के लिए BMC ने पहली बार October 2024 में ₹1,928 करोड़ का tender जारी किया था।
लेकिन July 2025 में यह tender bids खोले जाने से पहले ही रद्द कर दिया गया। उस समय MLA Aslam Shaikh ने एक पत्र लिखकर tender में cartelisation और bid rigging का आरोप लगाया था।

इसी वजह से BMC ने पूरा tender process रोक दिया और नया tender जारी करने का फैसला किया।
नया Tender और बढ़ा Project Scope
इसके बाद September 2025 में नया tender जारी किया गया, जिसमें project का scope बढ़ा दिया गया।
- Revised estimated cost: ₹2,250 करोड़
- Model: Design and Build
- Special clause: J Kumar-RPS के पक्ष में ROFR clause
यह बदलाव भी विवाद की वजह बन गया, क्योंकि इससे bidding process में preferential advantage मिलने का आरोप लगा।
BMC ने ROFR देने की वजह बताई
BMC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ROFR clause देने का कारण एक पुराना financial claim था।
दरअसल, J Kumar कंपनी ने ₹350 करोड़ का claim किया था, जो उन्होंने एक दूसरे project के लिए mobilization और preliminary work में खर्च होने का दावा किया था।
यह project था Eastern Freeway (Orange Gate) से Grant Road elevated road project, जिसे पहले J Kumar को दिया गया था लेकिन बाद में BMC ने इसे रद्द कर दिया।
अधिकारी के मुताबिक अगर ROFR नहीं दिया जाता तो मामला arbitration में चला जाता और BMC को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती।
Claim Verification पर भी उठे सवाल
कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि J Kumar के ₹350 करोड़ के claim की ठीक से verification नहीं की गई।
आलोचकों का कहना है कि बिना सही जांच के ROFR देना competitive bidding process को प्रभावित कर सकता है।
Cost Estimate पर भी बनी बहस
दिलचस्प बात यह है कि project का revised estimate ₹2,250 करोड़ था, लेकिन सबसे कम बोली ₹1,666 करोड़ ही आई।
इससे यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या project cost estimate ज्यादा रखा गया था।
MLA Aslam Shaikh के पत्र के अनुसार, पहले tender में भी सबसे कम बोली अनुमानित लागत से 13.6% कम थी।
Engineering Contracts में कम बोली कैसे संभव
BMC अधिकारियों का कहना है कि Engineering, Procurement and Construction (EPC) contracts में कम बोली आना सामान्य बात है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे:
- बेहतर design planning
- economies of scale
- contractor की internal cost efficiency
इसी वजह से कई बार contractors अनुमानित लागत से कम कीमत में भी project पूरा करने की पेशकश कर देते हैं।
Tender Cancel होने पर भी उठे सवाल
एक private company के अधिकारी, जो BMC के साथ काम करती है, ने कहा कि पहला tender बिना स्पष्ट कारण बताए रद्द कर दिया गया था।
हालांकि BMC अधिकारियों ने सफाई दी कि tender administrative reasons से रद्द किया गया था, जिसमें project scope बढ़ाने की जरूरत भी शामिल थी।
दूसरी Tender प्रक्रिया में कौन-कौन कंपनियां थीं
दूसरे tender में चार कंपनियां technical bid round तक पहुंची थीं
- Larsen & Toubro (L&T)
- J Kumar-RPS
- Ashoka Buildcon
- NCC Ltd
लेकिन L&T को छोड़कर बाकी सभी कंपनियों की बोली BMC के अनुमान से ज्यादा थी।
FAQ
1. Malad West bridge project की लागत कितनी है?
इस project की सबसे कम बोली ₹1,666 करोड़ की आई है, जो L&T ने लगाई थी।
2. ROFR Clause क्या होता है?
Right of First Refusal (ROFR) एक clause होता है जिसमें किसी कंपनी को यह अधिकार मिलता है कि वह किसी अन्य bidder की सबसे कम कीमत को match करके contract हासिल कर सकती है।
3. पहला BMC tender क्यों रद्द हुआ था?
MLA Aslam Shaikh ने tender में cartelisation और bid rigging के आरोप लगाए थे, जिसके बाद BMC ने tender रद्द कर दिया।
4. J Kumar कंपनी को ROFR क्यों दिया गया?
BMC के अनुसार कंपनी ने ₹350 करोड़ का claim किया था, जो पहले रद्द हुए elevated road project से जुड़ा था। arbitration से बचने के लिए ROFR दिया गया।
5. दूसरे tender में किन कंपनियों ने भाग लिया था?
L&T, J Kumar-RPS, Ashoka Buildcon और NCC Ltd technical round में qualified हुई थीं।
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