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  • 93% मुआवजा फिर भी सत्याग्रह क्यों? केन-बेतवा पर आदिवासियों की लड़ाई में राहुल गांधी की एंट्री, 14 गांवों में फिर होगा सर्वे

    93% मुआवजा फिर भी सत्याग्रह क्यों? केन-बेतवा पर आदिवासियों की लड़ाई में राहुल गांधी की एंट्री, 14 गांवों में फिर होगा सर्वे

    केन-बेतवा परियोजना पर आदिवासी सत्याग्रह के बीच राहुल गांधी का समर्थन, 93% मुआवजे के सरकारी दावे और 14 गांवों के नए सर्वे से जुड़े सवाल जानिए।

    भोपाल/छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में आदिवासी परिवारों का संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। 19 अगस्त 2026 को राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे आदिवासी भाई-बहनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं, मांगें और आपबीती सुनी और इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि सालों से अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे बुंदेलखंड के निवासी सम्मान और समर्थन के हकदार हैं। उन्होंने साफ कहा कि आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में वह और कांग्रेस उनके साथ हैं।

    लेकिन इस पूरी खबर में सबसे बड़ा सवाल राहुल गांधी का समर्थन नहीं, बल्कि यह है—

    जब सरकार खुद दावा कर रही है कि प्रभावित परिवारों को 93.78% rehabilitation compensation दिया जा चुका है, तो फिर आदिवासी परिवार अभी भी सत्याग्रह क्यों कर रहे हैं?

    यही सवाल अब केन-बेतवा परियोजना के पूरे विवाद के केंद्र में आ गया है।

    केन-बेतवा परियोजना आखिर क्यों इतनी बड़ी है?

    केन-बेतवा लिंक परियोजना का मकसद केन नदी के पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाना है। इसमें दाउधन बांध और करीब 221 किलोमीटर की link canal सहित कई बड़े infrastructure works शामिल हैं।

    सरकार का कहना है कि यह project बुंदेलखंड के लंबे समय से चले आ रहे water crisis को कम करने में मदद करेगा। सिंचाई का विस्तार होगा, किसानों को पानी मिलेगा और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में drinking water supply बेहतर होगी।

    Protest-against-Ken-Betwa-MP-Chhatarpur

    सरकारी project details के मुताबिक लाखों हेक्टेयर जमीन को irrigation coverage देने और लाखों लोगों तक drinking water पहुंचाने का target है।

    यानी एक तरफ सरकार इसे बुंदेलखंड के लिए पानी और विकास की बड़ी योजना बता रही है, वहीं दूसरी तरफ project area में रहने वाले परिवारों का सवाल है—

    “विकास होगा, लेकिन हमारी जमीन और हमारी जिंदगी का क्या होगा?”

    आदिवासी परिवारों का विरोध आखिर किस बात पर है?

    प्रदर्शन कर रहे परिवारों की शिकायत सिर्फ इतनी नहीं है कि उन्हें compensation नहीं चाहिए।

    उनकी मांग है कि अगर project की वजह से उन्हें अपनी जमीन, घर और livelihood छोड़ना पड़ रहा है, तो rehabilitation ऐसा होना चाहिए जिससे विस्थापन के बाद उनकी जिंदगी दोबारा खड़ी हो सके।

    आंदोलन में मुख्य तौर पर इन सवालों को उठाया गया है—

    • कौन-कौन से परिवार वास्तव में project से प्रभावित हैं?
    • क्या सभी eligible परिवारों के नाम rehabilitation list में हैं?
    • जमीन और मकान का assessment सही हुआ है या नहीं?
    • compensation कितना और किस आधार पर मिल रहा है?
    • rehabilitation के बाद खेती और रोजगार का क्या होगा?
    • जंगल और natural resources पर निर्भर परिवारों का क्या होगा?
    • नए स्थान पर घर, पानी, स्कूल और healthcare की व्यवस्था कैसी होगी?

    यानी मामला सिर्फ “पैसा कितना मिला” का नहीं है।

    मामला यह भी है कि “पैसा मिलने के बाद जिंदगी कैसे चलेगी?”

    सरकार का बड़ा दावा: 93.78% compensation paid

    इसी बीच केंद्र सरकार ने 19 अगस्त को केन-बेतवा परियोजना से जुड़े compensation और rehabilitation के आंकड़े सामने रखे हैं।

    सरकार के मुताबिक 5,039 project-affected families को rehabilitation के लिए चिन्हित किया गया है। इनके लिए ₹629.87 करोड़ के awards बनाए गए थे, जिसमें से ₹590.74 करोड़ यानी 93.78% भुगतान किया जा चुका है।

    कृषि भूमि से जुड़े 10,913 प्रभावित व्यक्तियों के लिए ₹360.66 करोड़ के awards बताए गए हैं। इनमें ₹320.45 करोड़ यानी 88.85% रकम का भुगतान होने की जानकारी दी गई है।

    आवासीय संपत्तियों के compensation में भी करीब 94% payment का सरकारी दावा है।

    सरकार का कहना है कि जिन मामलों में payment बाकी है, वहां जरूरी legal और administrative formalities पूरी होने के बाद भुगतान किया जाएगा और land records की verification भी जारी है।

    लेकिन फिर वही सवाल—

    अगर इतना बड़ा हिस्सा भुगतान हो चुका है, तो आंदोलन खत्म क्यों नहीं हुआ?

    असल पेंच: कौन प्रभावित है और किसे कितना मिलेगा?

    यहीं से पूरा विवाद और complicated हो रहा है।

    किसी परिवार का नाम compensation list में होना और हर प्रभावित व्यक्ति की वास्तविक जरूरत पूरी होना एक ही बात नहीं है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों ने eligibility, beneficiary criteria, compensation calculation और rehabilitation package को लेकर सवाल उठाए हैं।

    कुछ प्रदर्शनकारियों की मांग है कि rehabilitation benefits तय करते समय परिवार में मौजूद eligible adult members और उनकी वास्तविक livelihood जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।

    यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि “एक परिवार को कितना मिला?”

    सवाल यह भी है—

    “उस परिवार में कितने लोग अपनी आजीविका के लिए उसी जमीन पर depend थे?”

    14 गांवों में फिर से survey क्यों कराया जा रहा है?

    इस विवाद के बीच एक बड़ा administrative development सामने आया है।

    छतरपुर प्रशासन ने 14 प्रभावित गांवों में fresh survey का आदेश दिया है।

    इन गांवों में Sukwaha, Bhaurkhuwa, Ghughri, Naiguwan, Kakra, Kadwara, Palkoha, Kharyani, Dhodhan, Mainari, Kupi, Shahpura, Basudha और Dugaria शामिल हैं।

    Fresh verification में जमीन, मकान, पेड़, दूसरी assets और प्रभावित परिवारों की जानकारी दोबारा देखी जा रही है।

    इसका मकसद यह पता लगाना है कि कोई eligible परिवार या asset compensation और rehabilitation process से बाहर तो नहीं रह गया।

    यही fresh survey अब आंदोलनकारियों की मांग और सरकार के आंकड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है।

    अप्रैल से अगस्त तक कैसे बढ़ा आंदोलन?

    यह विरोध आज से शुरू नहीं हुआ।

    प्रभावित परिवारों ने पिछले कई महीनों में अलग-अलग तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई।

    Protest-against-Ken-Betwa-news-Chhatarpur

    जल सत्याग्रह

    प्रदर्शनकारियों ने पानी में खड़े होकर अपना विरोध जताया।

    चिता आंदोलन

    आदिवासी महिलाओं ने symbolic चिताओं पर लेटकर protest किया। इसका संदेश था कि जमीन और livelihood छिनने के बाद उनके सामने जिंदगी और मौत जैसा सवाल खड़ा हो गया है।

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    Hunger Strike

    इसके बाद भूख हड़ताल शुरू हुई, जो कई दिनों तक चली।

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    Chulha Bandh

    जुलाई में protest का एक और symbolic तरीका सामने आया—Chulha Bandh। यानी खाना बनाना तक बंद कर विरोध जताया गया।

    Protest-against-Ken-Betwa-Project-MP-Chhatarpur

    आंदोलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने इसे और गंभीर बना दिया।

    19 जुलाई को police action के बाद विवाद और बढ़ा

    जुलाई में आंदोलन उस समय और बड़ा मुद्दा बन गया जब प्रशासन और पुलिस ने protest site खाली कराया।

    19 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को आंदोलन स्थल से हटाया गया। इसके बाद protesters की तरफ से police action पर सवाल उठाए गए।

    राहुल गांधी ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण protest को दबाया गया।

    हालांकि police और administration का पक्ष अलग है, इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

    राहुल गांधी पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा

    राहुल गांधी का यह इस मुद्दे पर पहला intervention नहीं है।

    7 अगस्त को Lok Sabha में भी Ken-Betwa project से जुड़े tribal displacement और rehabilitation का मुद्दा उठाया गया था।

    केंद्र के Tribal Affairs Ministry ने बताया कि इस विषय से जुड़ी complaints और representations मिली हैं और उन्हें मध्य प्रदेश सरकार को action और response के लिए भेजा गया है।

    इसके बाद 13 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के delegation से मुलाकात की।

    और अब 19 अगस्त को एक बार फिर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस संघर्ष को समर्थन दिया है।

    इससे साफ है कि Ken-Betwa का tribal displacement issue अब local protest से निकलकर national political debate का हिस्सा बन चुका है।

    सिर्फ जमीन नहीं, जंगल और पर्यावरण का भी सवाल

    केन-बेतवा project का दूसरा बड़ा विवाद environmental impact को लेकर है।

    Project के लिए forest land diversion और Panna Tiger Reserve के आसपास के ecological impact को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

    पर्यावरण को लेकर concerns में forest habitat, wildlife movement और river ecosystem शामिल हैं।

    दूसरी तरफ project को जरूरी environmental और forest clearances मिल चुकी हैं और सरकार mitigation measures तथा project benefits पर जोर देती रही है।

    इसलिए सवाल यह नहीं है कि सिर्फ “project सही है या गलत?”

    सवाल यह है—

    “बुंदेलखंड को पानी देने वाली इस project के साथ जंगल और wildlife पर पड़ने वाले असर को कितना कम किया जा सकता है?”

    बुंदेलखंड को project से क्या फायदा मिलेगा?

    सरकार का तर्क है कि बुंदेलखंड लंबे समय से पानी की कमी से जूझता रहा है।

    Ken-Betwa project से:

    • irrigation coverage बढ़ेगा
    • किसानों को पानी मिलेगा
    • drinking water supply बेहतर होगी
    • water-stressed गांवों को फायदा मिलेगा
    • hydropower और दूसरे energy benefits मिलेंगे

    सरकार इसे बुंदेलखंड की water security से जोड़कर देख रही है।

    लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए सवाल है—

    “अगर बुंदेलखंड को पानी मिलेगा, तो जिस जमीन पर हम रहते हैं, वहां रहने वाले लोगों का भविष्य भी सुरक्षित होगा या नहीं?”

    मुआवजा मिलना और जिंदगी दोबारा बसना एक बात नहीं

    यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी मानवीय तस्वीर है।

    एक किसान के लिए जमीन सिर्फ जमीन नहीं होती।

    उसी जमीन से:

    खेती → income → पशुपालन → घर → परिवार का future

    जुड़ा होता है।

    आदिवासी परिवारों के लिए जंगल और आसपास के natural resources भी रोजमर्रा की livelihood का हिस्सा हो सकते हैं।

    ऐसे में compensation मिलने के बाद भी असली सवाल रहता है—

    नया घर कहां होगा? खेती कैसे होगी? रोजगार कहां मिलेगा? बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी? पानी और healthcare की सुविधा कैसी होगी?

    यही वजह है कि rehabilitation को सिर्फ bank account में पहुंची रकम से नहीं, बल्कि विस्थापित परिवार की नई जिंदगी कितनी स्थिर हुई, इससे भी देखा जाता है।

    देश में अकेला नहीं है Ken-Betwa विवाद

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में बड़े dams, mining और infrastructure projects को लेकर tribal displacement और rehabilitation के सवाल उठते रहे हैं।

    राजस्थान के Mahi Bajaj Sagar से जुड़े मामलों में भी displaced families के rehabilitation और दोबारा विस्थापन की चिंता सामने आई है।

    छत्तीसगढ़ के Hasdeo क्षेत्र में mining, forest rights और tribal communities के अधिकारों को लेकर विरोध जारी रहा है।

    इन सभी मामलों में एक common सवाल सामने आता है—

    क्या development project की planning जितनी मजबूत होती है, उतनी ही मजबूत प्रभावित लोगों को बसाने की planning भी होती है?

    अब आगे क्या होगा?

    अब केन-बेतवा विवाद में सबसे ज्यादा नजर 14 गांवों के fresh survey पर रहेगी।

    देखना होगा कि दोबारा verification में कितने नए eligible families या assets सामने आते हैं और compensation तथा rehabilitation से जुड़े pending मामलों का क्या होता है।

    दूसरी तरफ आदिवासी संगठनों की मांगें और तेज होती हैं या सरकार के साथ बातचीत का रास्ता निकलता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    राहुल गांधी के समर्थन से इस आंदोलन को political momentum मिला है, जबकि केंद्र ने अपने ताजा आंकड़ों के जरिए compensation process पर अपना पक्ष सामने रखा है।

    लेकिन इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—

    “93% से ज्यादा मुआवजा दिया जा चुका है, फिर भी आदिवासी सड़क पर क्यों हैं?”

    इस सवाल का जवाब सिर्फ compensation के आंकड़े में नहीं, बल्कि जमीन, rehabilitation, livelihood, जंगल और प्रभावित परिवारों की वास्तविक जिंदगी में छिपा है।

  • Gas Crisis के बीच बड़ा फैसला: अब घरों के लिए Kerosene मिलेगा, मोदी सरकार का ऐलान

    Gas Crisis के बीच बड़ा फैसला: अब घरों के लिए Kerosene मिलेगा, मोदी सरकार का ऐलान

    Iran crisis और global oil supply impact के बीच Modi Government ने घरेलू इस्तेमाल के लिए kerosene supply बढ़ाने का फैसला लिया। जानिए कौन-कौन से राज्यों में मिलेगा फायदा।

    नई दिल्ली: दुनिया में बढ़ते Energy Crisis और ईरान से जुड़े तनाव के बीच नरेंद्र मोदी सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है।

    मुंबई स्टाइल में बोले तो – “अब गैस की टेंशन थोड़ी कम होने वाली है भाई!”

    रविवार को केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि घरेलू जरूरतों के लिए kerosene distribution rules में ढील दी जाएगी, ताकि लोगों को खाना बनाने और रोशनी के लिए परेशानी न हो।

    Middle East Crisis का सीधा असर

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान संकट के चलते global oil supply पर असर साफ दिख रहा है।

    सप्लाई चेन डिस्टर्ब
    fuel prices में उतार-चढ़ाव
    LPG availability पर दबाव

    इसी को ध्यान में रखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas ने kerosene supply बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।

    क्या है सरकार का नया फैसला?

    सरकार ने पेट्रोलियम से जुड़े safety और licensing rules में temporary relaxation दिया है।

    इसका मकसद:

    • आम लोगों को तुरंत राहत
    • fuel shortage से बचाव
    • rural और गरीब इलाकों में energy access बढ़ाना

    इन 21 राज्यों/UTs में मिलेगा फायदा

    सरकार ने साफ किया है कि यह सुविधा देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी:

    • दिल्ली (NCT)
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • दादरा और नगर हवेली और दमन-दीव
    • पुडुचेरी
    • आंध्र प्रदेश
    • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
    • राजस्थान
    • उत्तर प्रदेश
    • गोवा
    • गुजरात
    • उत्तराखंड
    • लक्षद्वीप
    • जम्मू-कश्मीर
    • लद्दाख
    • तेलंगाना
    • हिमाचल प्रदेश
    • नागालैंड
    • मध्य प्रदेश
    • सिक्किम

    👉 यानी देश के बड़े हिस्से में अब kerosene आसानी से उपलब्ध होगा।

    Petrol Pump से भी मिलेगा Kerosene

    नई व्यवस्था के तहत अब:
    सरकारी तेल कंपनियां (Oil PSUs)
    Petrol Pumps और retail outlets

    के जरिए भी kerosene बेच सकेंगी।

    यह सुविधा अगले 60 दिनों तक लागू रहेगी।

    इससे फायदा:

    • लंबी लाइन से छुटकारा
    • पास के पंप से ही kerosene मिलेगा
    • supply shortage कम होगी

    डीलर कितना स्टॉक रख सकेंगे?

    सरकार ने dealers को भी राहत दी है:

    हर retail unit पर
    2500 लीटर तक kerosene stock रखने की अनुमति

    इससे:

    • supply chain मजबूत होगी
    • emergency में तुरंत availability मिलेगी

    कानून में क्या प्रावधान है?

    यह फैसला पेट्रोलियम अधिनियम 1934 और 2002 के नियमों के तहत लिया गया है।

    इन कानूनों में सरकार को special situations में
    rules relax करने का अधिकार होता है

    और अभी के global crisis को देखते हुए इसी power का इस्तेमाल किया गया है।

    आम जनता को क्या फायदा?

    इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत मिलेगी:

    गरीब परिवार
    ग्रामीण इलाके
    जहां LPG पहुंच कम है

    अब वे:

    • kerosene से खाना बना सकेंगे
    • lighting की जरूरत पूरी कर सकेंगे
    • LPG price hike से बच पाएंगे

    Related Links (जानकारी के लिए)

    • Ministry of Petroleum Official Updates
    • Energy Crisis Global News
    • LPG vs Kerosene Usage Guide

    (लेटेस्ट अपडेट के लिए PIB India, Indian Oil, BPCL जैसी आधिकारिक साइट्स देखें)


    FAQ

    Q1. क्या अब हर जगह kerosene मिलेगा?
    नहीं, फिलहाल 21 राज्यों और UTs में ही यह सुविधा लागू होगी।

    Q2. क्या petrol pump पर kerosene मिलेगा?
    हां, अब petrol pumps और retail outlets पर भी मिलेगा।

    Q3. यह सुविधा कितने समय के लिए है?
    अभी के लिए 60 दिनों तक लागू रहेगी।

    Q4. एक डीलर कितना kerosene स्टॉक कर सकता है?
    अधिकतम 2500 लीटर।

  • RERA का बड़ा आदेश: Omaxe को घर खरीदारों को देने होंगे ₹53.65 लाख, 3BHK पजेशन में 5 साल की देरी

    RERA का बड़ा आदेश: Omaxe को घर खरीदारों को देने होंगे ₹53.65 लाख, 3BHK पजेशन में 5 साल की देरी

    RERA Order Against OmaxeChandigarh Extension Developers को 3BHK फ्लैट की पजेशन में देरी के मामले में ₹53.65 लाख मुआवजा देने का आदेश। Mumbai के Andheri East के होमबायर्स को मिला बड़ा राहत।

    मुंबई: रियल एस्टेट सेक्टर में देरी से परेशान होमबायर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Punjab Real Estate Regulatory Authority (RERA) ने Omaxe Chandigarh Extension Developers को आदेश दिया है कि वह मुंबई के Andheri East में रहने वाले दो घर खरीदारों को करीब ₹53.65 लाख का मुआवजा (compensation) दे। यह फैसला New Chandigarh, Mohali में स्थित “The Lake Project” में 3BHK फ्लैट की पजेशन में पांच साल से ज्यादा की देरी के कारण सुनाया गया है।

    मुंबई के होमबायर्स ने RERA में दर्ज कराई थी शिकायत

    यह मामला Reena Thakur और Sujit Thakur, जो मुंबई के Andheri East के निवासी हैं, द्वारा दायर शिकायत के बाद सामने आया।

    दोनों ने Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 की Section 31 के तहत RERA में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं की ओर से Advocate M Shahnawaz Khan ने पैरवी की, जबकि डेवलपर की ओर से Advocate Tejeshwar Singh अदालत में पेश हुए।

    2015 में बुक किया था 3BHK फ्लैट

    शिकायत के अनुसार, होमबायर्स ने 9 जुलाई 2015 को The Lake Project के Tower Caspean-B की 12वीं मंजिल पर एक 3BHK residential unit बुक किया था।

    इस फ्लैट की कुल कीमत ₹82,11,487 तय की गई थी।

    खरीदारों का कहना है कि उन्होंने कुल रकम का 90% से ज्यादा यानी ₹76,05,041 पहले ही डेवलपर को भुगतान कर दिया था।

    जनवरी 2019 तक मिलनी थी फ्लैट की पजेशन

    Buyer Agreement के अनुसार, डेवलपर को 42 महीने के भीतर यानी 8 जनवरी 2019 तक फ्लैट का पजेशन देना था

    लेकिन प्रोजेक्ट में लगातार देरी होती गई और पांच साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भी घर खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया

    RERA ने ₹53.65 लाख ब्याज के रूप में देने का आदेश दिया

    मामले की सुनवाई के बाद Punjab RERA ने Omaxe डेवलपर को निर्देश दिया कि वह खरीदारों को जमा की गई राशि पर Highest MCLR Rate + 2% के हिसाब से ब्याज दे।

    इस गणना के अनुसार कुल मुआवजा करीब ₹53,65,000 बनता है, जिसे डेवलपर को होमबायर्स को देना होगा।

    हर महीने बढ़ता रहेगा मुआवजा

    RERA के आदेश में यह भी कहा गया है कि जब तक डेवलपर Occupation Certificate (OC) या Completion Certificate (CC) लेकर फ्लैट का वैध पजेशन नहीं देता, तब तक मुआवजा बढ़ता रहेगा।

    आदेश के मुताबिक हर महीने करीब ₹62,383 की दर से compensation बढ़ता रहेगा

    Covid-19 को अनंत समय तक बहाना नहीं बना सकता डेवलपर

    RERA ने अपने आदेश में साफ कहा कि डेवलपर कोविड-19 महामारी को हमेशा के लिए देरी का कारण नहीं बता सकता

    अथॉरिटी ने कहा कि अगर प्रोजेक्ट में देरी हुई है तो उसके लिए डेवलपर जिम्मेदार होगा और उसे खरीदारों को उचित मुआवजा देना पड़ेगा।

    आदेश का पालन नहीं किया तो होगी सख्त कार्रवाई

    RERA ने चेतावनी दी है कि अगर डेवलपर इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ RERA Act की Section 63 के तहत अलग से non-compliance proceedings शुरू की जा सकती हैं।

    इसका मतलब है कि कंपनी को भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


    FAQ (Frequently Asked Questions)

    1. RERA ने Omaxe को कितना मुआवजा देने का आदेश दिया है?

    RERA ने करीब ₹53.65 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।

    2. यह मामला किस प्रोजेक्ट से जुड़ा है?

    यह मामला The Lake Project, New Chandigarh (Mohali) से जुड़ा है।

    3. शिकायत किसने दर्ज कराई थी?

    मुंबई के Andheri East के निवासी Reena Thakur और Sujit Thakur ने शिकायत दर्ज कराई थी।

    4. फ्लैट कब तक मिलना था?

    Agreement के अनुसार 8 जनवरी 2019 तक पजेशन मिलना था।

    5. हर महीने कितना अतिरिक्त मुआवजा बढ़ेगा?

    जब तक पजेशन नहीं मिलता, ₹62,383 प्रति माह मुआवजा बढ़ता रहेगा।

  • इन बॉलीवुड सितारों को सबके सामने पड़ी थप्पड़! इसमें एक ₹2900 करोड़ के सुपरस्टार ने किया टॉप — जानिए पूरी कहानी

    इन बॉलीवुड सितारों को सबके सामने पड़ी थप्पड़! इसमें एक ₹2900 करोड़ के सुपरस्टार ने किया टॉप — जानिए पूरी कहानी

    बॉलीवुड के कई बड़े सितारे ऐसे रहे हैं जिन्हें सार्वजनिक जगहों पर थप्पड़ खाना पड़ा। कभी विवादों में, कभी ग़लतफहमी में और कभी गुस्से के कारण। आइए जानते हैं उन स्टार्स के बारे में जिन्हें पब्लिक में थप्पड़ पड़ा।

    मुंबई: बॉलीवुड की दुनिया जितनी चमकदार दिखती है, उतनी ही विवादों से भरी भी है। कई बार बड़े सितारे ऐसी अजीबोगरीब स्थितियों में फंस जाते हैं जब भीड़ के बीच थप्पड़ खाने तक की नौबत आ जाती है। आज जानते हैं कुछ ऐसे चौंकाने वाले ‘स्लैपगेट’ (Slapgate) किस्सों के बारे में, जिनमें बॉलीवुड के नामचीन चेहरों को सबके सामने तमाचा सहना पड़ा।

    1. गौहर खान को लाइव शो के दौरान मारा थप्पड़

    These-Bollywood-stars-were-publicly-slapped-A-29-billion-superstar-topped-the-list-learn-the-full-story-1

    मॉडल और एक्ट्रेस गौहर खान उस वक्त हैरान रह गईं जब उन्हें लाइव टीवी शो के दौरान एक शख्स ने थप्पड़ मार दिया।
    यह घटना रियलिटी शो ‘इंडिया रॉ स्टार’ के फिनाले के दौरान हुई थी।
    एक दर्शक ने आरोप लगाया कि गौहर ने छोटी और बोल्ड ड्रेस पहनकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
    इस घटना के बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी को सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत काबू में कर लिया।

    सलमान खान ने दिखाई जबरदस्त फ्लेक्सिबिलिटी, शेयर की मजेदार स्ट्रेचिंग फोटो

    2. रणवीर सिंह को अपने ही बॉडीगार्ड से पड़ा थप्पड़!

    These-Bollywood-stars-were-publicly-slapped-A-29-billion-superstar-topped-the-list-learn-the-full-story-2

    2022 के SIIMA Awards के रेड कार्पेट पर एक हैरान करने वाली घटना हुई, जब रणवीर सिंह को उनके अपने बॉडीगार्ड ने गलती से थप्पड़ जड़ दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब भीड़ बहुत बढ़ गई थी, तब बॉडीगार्ड भीड़ को संभालने की कोशिश में थे। उसी अफरातफरी में उन्होंने गलती से रणवीर को ही थप्पड़ मार दिया। हालांकि रणवीर ने इस पर मुस्कुराकर रिएक्ट किया और माहौल को हल्का बना दिया।

    3. कंगना रनौत को CISF महिला जवान ने मारा थप्पड़

    These-Bollywood-stars-were-publicly-slapped-A-29-billion-superstar-topped-the-list-learn-the-full-story-3

    2024 में बॉलीवुड अभिनेत्री और अब सांसद कंगना रनौत के साथ एक बड़ा विवाद हुआ। वह चंडीगढ़ एयरपोर्ट से दिल्ली जा रही थीं जब CISF की एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। बाद में सामने आया कि उस महिला की मां किसान आंदोलन में शामिल थीं और उसे कंगना के उस बयान से गुस्सा था जिसमें उन्होंने किसानों को लेकर टिप्पणी की थी।
    घटना के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत मामले को शांत किया।

    4. करीना कपूर और बिपाशा बसु का सेट पर झगड़ा

    These-Bollywood-stars-were-publicly-slapped-A-29-billion-superstar-topped-the-list-learn-the-full-story-4

    साल 2001 में फिल्म ‘अजनबी’ की शूटिंग के दौरान करीना कपूर और बिपाशा बसु के बीच झगड़े की खबरों ने खूब सुर्खियाँ बटोरीं। बताया गया कि करीना ने बिपाशा को “काली बिल्ली” कहा और गुस्से में थप्पड़ मार दिया। दरअसल, करीना के डिजाइनर ने बिपाशा की मदद कर दी थी जिससे बात बढ़ गई। हालांकि दोनों अभिनेत्रियों ने बाद में इस पर चुप्पी साध ली।

    5. करण सिंह ग्रोवर को जेनिफर विंगेट ने मारा थप्पड़

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    टीवी और फिल्म एक्टर करण सिंह ग्रोवर भी इस लिस्ट में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी तत्कालीन पत्नी और एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट ने उन्हें सेट पर थप्पड़ मार दिया था। बताया जाता है कि जेनिफर को करण के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर की भनक लगी थी और उन्होंने गुस्से में ऐसा किया। इसके कुछ समय बाद दोनों का तलाक हो गया।

    ₹2900 करोड़ के सुपरस्टार का नाम टॉप पर

    इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम उस सुपरस्टार का है जिसकी नेटवर्थ करीब ₹2900 करोड़ बताई जाती है। हालांकि जेनिफर विंगेट नाम को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग बातें आई हैं, लेकिन यह घटना लंबे समय तक ‘स्लैपगेट’ की सुर्खियों में रही।


    FAQ सेक्शन

    Q1. क्या गौहर खान को सच में थप्पड़ मारा गया था?
    हां, ‘इंडिया रॉ स्टार’ शो के दौरान एक दर्शक ने उन्हें थप्पड़ मारा था।

    Q2. रणवीर सिंह को किसने थप्पड़ मारा था?
    उनके अपने बॉडीगार्ड ने भीड़ को संभालते वक्त गलती से थप्पड़ मार दिया था।

    Q3. कंगना रनौत को CISF अधिकारी ने क्यों मारा?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारी की मां किसान आंदोलन में शामिल थीं और कंगना के बयानों से नाराज थीं।

    Q4. करीना-बिपाशा झगड़े की क्या सच्चाई थी?
    फिल्म ‘अजनबी’ के सेट पर दोनों के बीच डिज़ाइनर को लेकर विवाद हुआ था।

    Q5. कौन सा सुपरस्टार इस लिस्ट में टॉप पर है?
    ₹2900 करोड़ नेटवर्थ वाले एक सुपरस्टार जेनिफर विंगेट का नाम मीडिया में चर्चा में रहा, हालांकि पुष्टि नहीं हुई।

  • BJP ने Municipal and Panchayat Elections बैलेट पेपर से कराने का फैसला किया।

    BJP ने Municipal and Panchayat Elections बैलेट पेपर से कराने का फैसला किया।

    नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत चुनाव EVM मशीन के बीना बैलेट पेपर से होने जा रहे हैं। इसका फैसला छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने लिया है। कांग्रेस ने इसका स्वागत किया।

    न्यूज़ डेस्क
    रायपुर-
    छत्तीसगढ़ नगर निगम और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में भाजपा सरकार ने ईवीएम मशीन के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव करने का फैसला किया है। 28 दिसंबर से शुरु होने वाली त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए यहां आरक्षण प्रक्रिया के शेड्यूल में फिर से बदलाव कर दिया गया है। 3 जनवरी को इसके लिए सूचना का प्रचार प्रसार किया जाएगा। अब 8 से 10 जनवरी तक आरक्षण की कार्यवाही होगी। इसकी जानकारी राज्य के उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने दी।

    बता दें, कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इस बार पंचायत और नगर निगम चुनाव को एक साथ कराने की तैयारी कर रही है। इस बार दोनों इलेक्शन बैलेट पेपर से होंगे। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, कि “ईवीएम की तैयारी में समय लग रहा था। इसलिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला किया गया है। साथ ही नियमों में परिवर्तन हुआ है। आरक्षण की प्रक्रिया हो रही है। सरकार जल्द से जल्द चुनाव करने के लिए प्रतिबद्ध है।” दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने का स्वागत किया है।

    कितने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत हैं?

    बता दें कि वर्तमान में प्रदेश में 14 नगर निगम, 52 नगर पालिका परिषद और 123 नगर पंचायत हैं। वहीं त्रि-स्तरीय पंचायतराज संस्थाओं के अंतर्गत 27 जिला पंचायतें, 146 जनपद पंचायतें एवं 11664 ग्राम पंचायतें हैं।

    चुनाव कब है?

    छत्तीसगढ़ में नगर निगम, नगर पालिका और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एक साथ आयोजित किए जाने की तैयारी है। चुनाव बैलेट पेपर से होने वाले है इसको लेकर प्रत्याशियों की आरक्षण प्रक्रिया जनवरी के पहले सप्ताह में पूरी हो जाएगी। चुनाव की तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं।

    आरक्षण प्रकृया में बदलाव

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। अब 8 से 10 जनवरी तक आरक्षण की कार्यवाही होगी, जबकि पहले यह 28 दिसंबर से शुरू होने वाली थी। इसके लिए 3 जनवरी को सूचना का प्रकाशन किया जाएगा।

  • Election Card में फोटो कैसे चेंज करे ?

    Election Card में फोटो कैसे चेंज करे ?

    इस आर्टिकल को पढ़कर आप भी घर बैठे इलेक्शन कार्ड (Election Card) में अपना फोटो, पता और बाकी जानकारियों में बदलाव कर सकेंगे। हम खास आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर आए हैं।

    डिजिटल डेस्क (Indian Fasttrack News Network)
    एक मतदाता पहचान पत्र आपके भारतीय होने और पते के प्रमाण के लिए एक आवश्यक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है। इसलिए, भविष्य में असुविधा से बचने के लिए, आपका नाम, पता, जन्म पत्र आदि जैसी जानकारी में किसी भी गड़बड़ी को ठीक करना आवश्यक है। अगर आप भी ऑनलाइन और ऑफलाइन वोटर आईडी (Election Card) में सुधार करना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रियाओं की जांच के लिए पढ़ना जारी रखें।

    Election Card सुधार के लिए आवेदन कैसे करें

    संभावित मतदाता पहचान पत्र में अपना नाम, पता और अन्य जानकारी बदलने के लिए ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुन सकते हैं। आवेदक का नाम, पता और जन्म तिथि बदलने के लिए प्रत्येक चरण को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित हैं।

    यह भी पढ़ें:- महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल मैं फेरबदल के साथ विभागीय है आवंटन की घोषणा।

    Voter ID Card में नाम बदलना

    Election Card पर ऑनलाइन नाम बदलने के तरीके के बारे में निम्नलिखित चरणों पर एक नज़र डालें:-

    Step 1: एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं। अपना यूजर नेम और पासवर्ड डालकर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें। यदि आप मौजूदा सदस्य हैं तो लॉगिन करें।
    Step 2: “निर्वाचक विवरण में सुधार” चुनें और फॉर्म 8 पर क्लिक करें।
    Step 3: आपको दूसरे पृष्ठ पर भेज दिया जाएगा और निम्नलिखित विवरण दर्ज करें

    • आपका संसदीय क्षेत्र या राज्य विधानसभा।
    • अपना नाम, उम्र, लिंग और मतदाता सूची का भाग संख्या टाइप करें।
    • अपने परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी दर्ज करें, जैसे पति या पत्नी, पिता या माता।
    • अपना आवासीय पता लिखें।

    Step 4: आवश्यक दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि अपलोड करें।
    Step 5: अपना गलत या गलत वर्तनी वाला नाम बदलने या संपादित करने के लिए “My Name” टैब चुनें। अपना आवासीय शहर, तिथि और संपर्क विवरण जैसे – ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
    Step 6: सभी विवरणों को सत्यापित करें और चुनाव कार्ड को अपडेट करने के लिए सबमिट करें।

    एक बार जब आपका आवेदन संसाधित और सत्यापित हो जाता है, तो आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक सूचना (Massage) प्राप्त होगा। तदनुसार, इसे अपने निकटतम निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करें।

    Voter ID Card में पता बदलना..

    क्या आप एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं और सोच रहे हैं कि मतदाता पहचान पत्र ( Election Card) में पता कैसे बदला जाए, तो चिंता न करें। नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें:-

    Step 1: एनवीएसपी पोर्टल पर लॉग इन करें। टैब “नए मतदाता के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें/एसी से स्थानांतरित होने के कारण” का चयन करें और यदि आप वर्तमान में एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हुए हैं तो Form 6 चुनें।
    Step 2: यदि आप एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर एक आवासीय क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित हो गए हैं तो Form 8A चुनें।
    Step 3: आवश्यक जानकारी जैसे नाम, निर्वाचन क्षेत्र, राज्य, जन्म तिथि आदि के साथ संबंधित फॉर्म भरें। अपना संपर्क विवरण जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि प्रदान करें।
    Step 4: प्रासंगिक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि अपलोड करें। संबंधित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करें।
    Step 5: घोषणा विकल्प का चयन करें। कैप्चर टाइप करें और सबमिट करें।

    यह भी पढ़ें:- दिनदहाड़े मुंबई की ऑटो रिक्शा में महिला का रेप

    Election card,
    वोटर आईडी अपडेट पर प्रतिकारात्मक तस्वीर

    Voter ID Card में जन्म तारीख बदलना..

    यहां बताया गया है कि आप NVSP पोर्टल पर पहुंचकर voter ID पर अपनी जन्मतिथि ऑनलाइन कैसे बदल सकते हैं।

    Step 1: पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद, Form 8 चुनें।
    Step 2: अपना नाम, संसदीय क्षेत्र या राज्य या जिला विधानसभा से संबंधित जानकारी दर्ज करें। अन्य जानकारी में शामिल हैं:

    • एपिक या मतदाता का फोटो पहचान पत्र संख्या।
    • उस विकल्प का चयन करें जिसे आप अपडेट करना चाहते हैं, इस मामले में, आपकी जन्म तिथि।
    • अपनी सही जन्मतिथि दर्ज करें और आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड जैसे दस्तावेज प्रदान करें।

    Step 3: घोषणा विकल्प का चयन करें और सबमिट करें।

    इसके अतिरिक्त, आप वोटर पोर्टल के माध्यम से voter ID सुधार का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह एक सरकारी पोर्टल है जहां आवेदक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं या मतदाता पहचान पत्र पर जानकारी बदल सकते हैं।
    इसे एक्सेस करने के लिए आपको एक अकाउंट बनाना होगा। लॉग इन करने के बाद, “voter ID में सुधार” का विकल्प चुनें। अन्य चरण ऊपर बताए गए चरणों के समान हैं।

    Voter ID सुधार ऑफलाइन कैसे करें?

    इंटरनेट एक्सेस के बिना आवेदक निर्वाचन कार्यालय में जाकर ऊपर उल्लिखित सभी सूचनाओं को बदल सकते हैं। Form 8, 8A या 6 के लिए पूछें। आप इसे NVSP की आधिकारिक वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं।
    आप इसे कैसे डाउनलोड कर सकते हैं, इसके चरण यहां दिए गए हैं।

    • NVSP पोर्टल पर जाएं। “फॉर्म” पर क्लिक करें।
    • राज्य चुनें”। अब “डाउनलोड” अनुभाग पर नेविगेट करें और “फ़ॉर्म” चुनें।
    • आवश्यक फॉर्म डाउनलोड करें – Form 6, 8, या 8A

    अपना नाम, आयु, निर्वाचन क्षेत्र इत्यादि जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को भरें। इसे सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित निर्वाचन कार्यालय में जमा करें। इसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि शामिल हैं।

    आपको Voter ID सुधार का विकल्प क्यों और कब चाहिए?

    एक मतदाता पहचान पत्र चुनाव के दौरान आपके वोट डालने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह एक आवश्यक पहचान प्रमाण भी है। इसलिए, इसमें कोई भी गड़बड़ी असुविधा का कारण बन सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने काम के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुनें।

    मतदाता पहचान पत्र सुधार स्थिति की जांच कैसे करें?

    एक बार जब आप Voter Id सुधार के लिए आवेदन कर देते हैं, तो आपको एक संदर्भ संख्या प्राप्त होगी। वोटर आईडी सुधार के लिए अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।

    Step 1: एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नीचे उल्लिखित “ट्रैक एप्लिकेशन स्थिति” पर क्लिक करें।
    Step 2: संदर्भ आईडी दर्ज करें और आवेदन की स्थिति देखने के लिए “ट्रैक स्थिति” चुनें।

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    आवेदक 1950 पर कॉल करके भी मतदाता पहचान पत्र सुधार के लिए आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।
    आप दो आसान चरणों के साथ वोटर पोर्टल के माध्यम से भी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं
    पंजीकृत सदस्य “Track Status” का चयन करके स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।

    आवेदन की स्थिति देखने के लिए संदर्भ संख्या दर्ज करें।

    इस प्रकार, यह सब वोटर आईडी सुधार के बारे में है। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरणों को सत्यापित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, एक सुगम आवेदन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों को संभाल कर रखें।