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  • मुंबई की ये सोसाइटी देती है कमाई, मेंटेनेंस जीरो और सालाना लाखों का फायदा

    मुंबई की ये सोसाइटी देती है कमाई, मेंटेनेंस जीरो और सालाना लाखों का फायदा

    मुंबई के कफ परेड की जॉली मेकर 1 सोसाइटी जहां रहने वालों को मेंटेनेंस नहीं देना पड़ता, उल्टा हर साल लाखों रुपये का डिविडेंड मिलता है। जानिए कैसे बनी ये सोसाइटी फायदे का सौदा।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे महंगे शहर में जहां सोसाइटी मेंटेनेंस हर महीने जेब ढीली कर देती है, वहीं कफ परेड की जॉली मेकर 1 सोसाइटी एक ऐसा अनोखा उदाहरण है, जहां रहने वालों को न तो मेंटेनेंस देना पड़ता है और न ही प्रॉपर्टी टैक्स। बल्कि यहां के फ्लैट ओनर्स को हर साल लाखों रुपये का डिविडेंड मिलता है। यह सोसाइटी सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि एक स्मार्ट रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट मानी जाती है।

    🏙️ मुंबई में मेंटेनेंस का बोझ और जॉली मेकर 1 की कहानी

    आमतौर पर मुंबई की हाई-फाई सोसाइटियों में 2 से 25 रुपये प्रति वर्गफुट तक मेंटेनेंस देना पड़ता है। नई सोसाइटियों में यह दर 8 से 15 रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुंच चुकी है। लेकिन जॉली मेकर 1 सोसाइटी इस ट्रेंड को पूरी तरह तोड़ती है।

    🏢 क्या है जॉली मेकर 1 सोसाइटी?

    कफ परेड स्थित जॉली मेकर अपार्टमेंट 1 में दो 25 मंजिला टावर (A और B) और करीब 10 बंगले हैं। कुल 180 फ्लैट्स वाली यह सोसाइटी मुंबई की सबसे पॉश और महंगी हाउसिंग सोसाइटियों में गिनी जाती है।
    यहां फ्लैट साइज 1,285 से 2,590 वर्गफुट तक हैं और कई फ्लैट्स से सीधा अरब सागर का नज़ारा मिलता है।

    💸 क्यों नहीं देना पड़ता मेंटेनेंस और टैक्स?

    इस सोसाइटी की सबसे बड़ी खासियत इसका मजबूत फाइनेंशियल मॉडल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉली मेकर 1 के पास करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का रिजर्व और सिंकिंग फंड है।
    यही नहीं, सोसाइटी नगर निगम टैक्स, सिक्योरिटी, स्टाफ सैलरी, लिफ्ट, बिजली और पानी जैसे सभी खर्च खुद उठाती है। रहवासी सिर्फ 1 पैसा प्रति वर्गफुट नाममात्र का चार्ज देते हैं।

    🏦 डिविडेंड की असली वजह क्या है?

    जब इस सोसाइटी के फ्लैट्स बेचे गए थे, तब हर खरीदार को नरीमन पॉइंट की एक कमर्शियल बिल्डिंग में हिस्सेदारी भी दी गई थी।
    आज उस कमर्शियल बिल्डिंग से करीब 50 लाख रुपये महीना किराया आता है। इसी इनकम से सोसाइटी का पूरा मेंटेनेंस चलता है और बचे पैसे रहवासियों को डिविडेंड के तौर पर दिए जाते हैं।

    📈 कितनी होती है सालाना कमाई?

    • 2003 में: डिविडेंड 100 रुपये प्रति वर्गफुट
    • 2,500 वर्गफुट फ्लैट: करीब 2.5 लाख रुपये सालाना
    • 2012 में: डिविडेंड बढ़कर 300 रुपये प्रति वर्गफुट
    • सालाना कमाई: करीब 7.5 लाख रुपये

    हालांकि पिछले कुछ सालों में डिविडेंड बढ़ा या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    🏠 फ्लैट की कीमतें और रियल एस्टेट वैल्यू

    2012 में यहां एक फ्लैट 1.11 लाख रुपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से करीब 29 करोड़ रुपये में बिका था।
    आज भी प्रॉपर्टी पोर्टल्स के अनुसार जॉली मेकर 1 में फ्लैट की कीमत 75,000 रुपये प्रति वर्गफुट से ज्यादा है, जो इसे मुंबई की सबसे वैल्यूएबल प्रॉपर्टीज में शामिल करता है।

    💡 घर नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट

    जॉली मेकर 1 सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक ऐसा मॉडल है जहां

    • जीरो मेंटेनेंस
    • नो प्रॉपर्टी टैक्स
    • सालाना लाखों की कमाई
    • हाई रीसैल वैल्यू

    यही वजह है कि यह सोसाइटी मुंबई की सबसे अनोखी और चर्चित हाउसिंग सोसाइटी मानी जाती है।

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या सच में जॉली मेकर 1 में मेंटेनेंस नहीं देना पड़ता?
    हाँ, यहां सोसाइटी सभी खर्च खुद उठाती है।

    Q2. डिविडेंड किस वजह से मिलता है?
    नरीमन पॉइंट की कमर्शियल बिल्डिंग से मिलने वाले किराए से।

    Q3. क्या आज भी डिविडेंड मिलता है?
    पहले मिलता था, मौजूदा दर की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं है।

    Q4. क्या आम आदमी यहां फ्लैट खरीद सकता है?
    कीमतें बहुत ज्यादा हैं, इसलिए यह सीमित लोगों के लिए संभव है।

  • मालाड वेस्ट स्कूल यौन शोषण मामला: 5 साल की बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मालाड वेस्ट स्कूल यौन शोषण मामला: 5 साल की बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड वेस्ट में स्कूल के पास 5 साल की बच्ची से कथित यौन शोषण का मामला सामने आया है। पुलिस ने स्कूल के चपरासी को गिरफ्तार किया है, जबकि कार्रवाई में देरी के आरोप में स्कूल के CEO पर भी केस दर्ज किया गया है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट इलाके में एक स्कूल के पास 5 साल की मासूम बच्ची से कथित यौन दुर्व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। मालाड पुलिस ने इस मामले में स्कूल के 30 वर्षीय चपरासी अनिल पांचाळ को गिरफ्तार किया है। बच्ची की मां का आरोप है कि आरोपी ने बच्ची को धमकाया और गलत तरीके से छुआ। शिकायत स्कूल प्रशासन तक पहुंचने के बावजूद कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने स्कूल के 65 वर्षीय CEO अनंत यज्ञीक के खिलाफ भी लापरवाही का केस दर्ज किया है।

    📍 कहां और कैसे हुआ मामला

    यह कथित घटना मालाड वेस्ट के एसवी रोड स्थित एक शैक्षणिक संस्थान के पास हुई। पीड़ित बच्ची रोज़ की तरह स्कूल जा रही थी, तभी आरोपी कर्मचारी ने उसे डरा-धमकाकर उसके साथ आपत्तिजनक हरकत की, ऐसा मां का आरोप है।

    🚨 स्कूल कर्मचारी गिरफ्तार

    मालाड पुलिस की डिटेक्शन टीम ने शुक्रवार को 30 साल के आरोपी स्कूल चपरासी को उसके रिहायशी इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी स्कूल में निचले स्तर पर काम करता था और बच्चों की आवाजाही से अच्छी तरह वाकिफ था।

    🏫 स्कूल प्रशासन पर भी सवाल

    पीड़िता की मां का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले स्कूल प्रशासन को इस घटना की जानकारी दी थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने स्कूल के 65 वर्षीय CEO के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, उन पर समय पर कार्रवाई न करने और लापरवाही बरतने का आरोप है।

    👮 पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए और कहां-कहां लापरवाही हुई। पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के लिए जांच जारी है।

    ⚖️ कानूनी धाराएं और बच्चों की सुरक्षा

    इस मामले में POCSO Act की धारा 10, 17 और 21(2) एवं भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 74, 351(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. यह घटना कहां हुई है?
    मालाड वेस्ट, एसवी रोड के पास एक स्कूल के नजदीक।

    Q2. आरोपी कौन है?
    आरोपी 30 वर्षीय स्कूल का चपरासी है।

    Q3. क्या स्कूल प्रशासन पर भी केस दर्ज हुआ है?
    हां, स्कूल के 65 वर्षीय CEO के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।

    Q4. मामला किस कानून के तहत दर्ज है?
    POCSO Act और IPC की संबंधित धाराओं के तहत।

    Q5. पुलिस आगे क्या कार्रवाई कर रही है?
    पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय की जा रही है।

  • BMC ने साफ किया: मुंबई की किसी भी स्कूल का निजीकरण नहीं हुआ

    BMC ने साफ किया: मुंबई की किसी भी स्कूल का निजीकरण नहीं हुआ

    BMC ने स्पष्ट किया है कि मुंबई में मराठी या किसी भी माध्यम की महानगरपालिका स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। छात्रों की संख्या और शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं जारी हैं।

    मुंबई: मराठी माध्यम की स्कूलों को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। महानगरपालिका प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं किया गया है। उल्टे, BMC छात्रों की संख्या बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे—इस उद्देश्य से लगातार योजनाएं और उपक्रम चला रही है।

    🏫 मराठी स्कूलों को लेकर BMC का स्पष्ट रुख

    BMC प्रशासन का कहना है कि:

    • मुंबई की मराठी माध्यम की स्कूलों के मुद्दे पर वह पूरी तरह संवेदनशील है
    • मराठी के साथ-साथ अन्य माध्यमों की स्कूलों को भी मजबूत किया जा रहा है
    • छात्रों की घटती संख्या को रोकने और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं

    📈 छात्र संख्या बढ़ाने के लिए लगातार पहल

    महानगरपालिका का साफ लक्ष्य है कि:

    • एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे
    • इसके लिए पालकों की काउंसलिंग की जाती है
    • स्कूलों में एडमिशन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं

    पिछले 10–15 वर्षों से BMC इस दिशा में निरंतर काम कर रही है।

    🏆 शानदार रिजल्ट: मराठी स्कूलों का 95% पास प्रतिशत

    शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों का नतीजा भी सामने आया है:

    • मार्च 2025 की 10वीं परीक्षा
    • BMC मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट
    • कई छात्रों ने 97% तक अंक हासिल किए

    इसके लिए:

    • नियमित सराव परीक्षाएं
    • गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम
    • शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण
      जैसे कदम उठाए गए।

    🎒 बिना फीस, 27 तरह की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री

    BMC स्कूलों की बड़ी खासियत:

    • किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती
    • छात्रों को 27 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री मुफ्त
    • किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी जैसी सुविधाएं

    साथ ही:

    • उपलब्ध जगहों में खेल प्रशिक्षण
    • खेलों में प्रावीण्य हासिल करने के अवसर

    📚 Khan Academy और डिजिटल लर्निंग का सहारा

    छात्रों को और मजबूत बनाने के लिए:

    • Khan Academy के जरिए गणित और विज्ञान का मुफ्त अभ्यास
    • डिजिटल कंटेंट से पढ़ाई आसान
    • छात्रों की प्रगति में बेहतर परिणाम सामने आए

    BMC का उद्देश्य है कि:

    “महानगरपालिका का छात्र निजी स्कूल से भी ज्यादा सक्षम बने।”

    🧠 FLN निपुण भारत से मजबूत बुनियाद

    Foundational Literacy & Numeracy (FLN) – निपुण भारत अभियान के तहत:

    • तीसरी कक्षा तक हर माध्यम का छात्र
    • सही से पढ़ने में सक्षम
    • गणित की बुनियादी समझ में निपुण

    इसके लिए विशेष शैक्षणिक रणनीतियां अपनाई गईं, जिनके अच्छे नतीजे अब दिख रहे हैं।

    निजीकरण का दावा पूरी तरह गलत

    BMC ने स्पष्ट किया है कि:

    • मराठी या किसी भी माध्यम की स्कूलों का
      निजीकरण नहीं किया गया
    • सोशल मीडिया या कुछ हलकों में जो
      “गलत तस्वीर” पेश की जा रही है
      वह पूरी तरह भ्रामक है

    🤝 मराठी अभ्यास केंद्र के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा

    हाल ही में:

    • मराठी अभ्यास केंद्र के शिष्टमंडल के साथ
    • BMC प्रशासन की विस्तृत बैठक हुई
    • हर मुद्दे पर बिंदुवार चर्चा की गई

    बैठक के बाद:

    • समिति के सदस्यों ने
      👉 संतोष व्यक्त किया

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. क्या BMC ने मराठी स्कूलों का निजीकरण किया है?
    ➡️ नहीं, BMC ने साफ किया है कि किसी भी माध्यम की स्कूलों का निजीकरण नहीं हुआ है।

    Q2. BMC स्कूलों में फीस लगती है क्या?
    ➡️ नहीं, छात्रों से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती।

    Q3. छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
    ➡️ 27 प्रकार की मुफ्त शैक्षणिक सामग्री, खेल प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग।

    Q4. 10वीं का रिजल्ट कैसा रहा?
    ➡️ मार्च 2025 में मराठी स्कूलों का 95% रिजल्ट रहा।

    Q5. FLN निपुण भारत का क्या फायदा हुआ?
    ➡️ तीसरी कक्षा तक के छात्र पढ़ने और गणित में ज्यादा सक्षम बने हैं।

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।

  • RIICO भर्ती 2026: राजस्थान में 98 सरकारी पदों पर बंपर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    RIICO भर्ती 2026: राजस्थान में 98 सरकारी पदों पर बंपर भर्ती, ऑनलाइन आवेदन शुरू

    RIICO भर्ती 2026 के तहत राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 98 पदों पर भर्ती निकली है। 12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट उम्मीदवार 20 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    राजस्थान: राजस्थान सरकार के प्रतिष्ठित उपक्रम Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation Limited (RIICO) ने भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत कुल 98 स्थायी पदों पर नियुक्ति की जाएगी। जूनियर असिस्टेंट, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर, प्रोग्रामर, ड्राफ्ट्समैन, जूनियर लीगल ऑफिसर सहित कई पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और 20 फरवरी 2026 अंतिम तारीख है। चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-5 से लेवल-16 तक वेतन मिलेगा।

    RIICO भर्ती 2026: संगठन और जॉब हाइलाइट्स

    RIICO राजस्थान में औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी सरकारी संस्था है। यहां नौकरी का मतलब है स्थिर करियर, अच्छा वेतन और सरकारी सुविधाएं।

    • भर्ती संस्था: राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (RIICO)
    • कुल पद: 98
    • नौकरी स्थान: राजस्थान
    • आवेदन मोड: ऑनलाइन
    • वेतनमान: 7वां वेतन आयोग (Pay Level 5 से 16)

    RIICO Vacancy 2026: पदों का पूरा विवरण

    पद का नामकुल पद
    जूनियर असिस्टेंट54
    असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर ग्रेड-II21
    पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II08
    ड्राफ्ट्समैन-कम-ट्रेसर (सिविल)08
    जूनियर लीगल ऑफिसर (JLO)04
    प्रोग्रामर01
    असिस्टेंट टाउन प्लानर01
    कंपनी सेक्रेटरी01
    कुल98

    शैक्षणिक योग्यता (Eligibility Criteria)

    जूनियर असिस्टेंट:
    12वीं पास + O Level / COPA / RSCIT / कंप्यूटर डिग्री या डिप्लोमा

    AAO ग्रेड-II:
    B.Com (60% अंक) + RSCIT / O Level / COPA / कंप्यूटर डिप्लोमा

    पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II:
    12वीं पास + कंप्यूटर योग्यता (शॉर्टहैंड/टाइपिंग स्किल टेस्ट अनिवार्य)

    ड्राफ्ट्समैन:
    डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर + AutoCAD या NCVT सर्टिफिकेट (सिविल)

    प्रोग्रामर:
    BE/B.Tech/MCA/M.Sc (IT/CS) / M.Tech

    JLO:
    लॉ ग्रेजुएट (55% अंक) या LLM

    असिस्टेंट टाउन प्लानर:
    B.Arch (60%) + PG इन टाउन प्लानिंग

    कंपनी सेक्रेटरी:
    ICSI फाइनल + मेंबरशिप + 5 साल का अनुभव

    आयु सीमा (20 फरवरी 2026 तक)

    • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
    • अधिकतम आयु: 40 वर्ष

    आयु में छूट:

    • राजस्थान के SC/ST/OBC/MBC/EWS पुरुष: 5 वर्ष
    • राजस्थान की महिला उम्मीदवार: 10 वर्ष

    वेतन और सरकारी सुविधाएं

    पदप्रोबेशन वेतनरेगुलर पे लेवल
    कंपनी सेक्रेटरी₹47,200लेवल-16
    असिस्टेंट टाउन प्लानर₹39,300लेवल-14
    प्रोग्रामर₹31,100लेवल-12
    AAO ग्रेड-II₹26,500लेवल-11
    JLO / PA₹23,700लेवल-10
    ड्राफ्ट्समैन₹18,500लेवल-8
    जूनियर असिस्टेंट₹14,600लेवल-5

    प्रोबेशन के बाद: DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, मेडिकल सुविधा सहित अन्य सरकारी लाभ।

    चयन प्रक्रिया (Selection Process)

    • लिखित परीक्षा (Part-I और Part-II)
    • स्किल / प्रोफिशिएंसी टेस्ट (पद के अनुसार)
    • इंटरव्यू (कंपनी सेक्रेटरी और टाउन प्लानर)
    • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

    ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

    1. RIICO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
    2. “Recruitment 2026 – Apply Online” पर क्लिक करें
    3. रजिस्ट्रेशन करें
    4. फॉर्म भरें और दस्तावेज अपलोड करें
    5. फीस जमा करें
    6. आवेदन फॉर्म का प्रिंट लें

    महत्वपूर्ण तिथियां

    • नोटिफिकेशन जारी: 20 जनवरी 2026
    • आवेदन शुरू: 21 जनवरी 2026
    • अंतिम तारीख: 20 फरवरी 2026
    • परीक्षा तिथि: जल्द घोषित होगी

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. RIICO भर्ती 2026 में कौन आवेदन कर सकता है?
    👉 12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट और प्रोफेशनल डिग्री वाले उम्मीदवार।

    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 20 फरवरी 2026।

    Q3. क्या ये पद स्थायी हैं?
    👉 हां, प्रोबेशन के बाद स्थायी नियुक्ति होगी।

  • BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    BMC: CBSC स्कूलों से 366 छात्र पहली बार देंगे दसवीं की परीक्षा

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के सीबीएसई बोर्ड से जुड़े 10 स्कूलों के 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे। परीक्षा से पहले छात्रों के लिए विशेष अभ्यास और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के शिक्षा विभाग से संचालित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के लिए यह साल ऐतिहासिक होने जा रहा है। बीएमसी की 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा की तैयारी को लेकर महानगरपालिका की ओर से विशेष अभ्यास कक्षाएं, सराव प्रश्नपत्रिकाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी।

    BMC की 18 सीबीएसई स्कूलें, 10 स्कूल पहली बार परीक्षा में

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के अंतर्गत फिलहाल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 10 स्कूल ऐसे हैं, जिनके छात्र पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने जा रहे हैं। इन स्कूलों के 366 छात्रों के लिए परीक्षा से पहले विशेष तैयारी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हो सकें।

    परीक्षा से पहले विशेष अभ्यास और मार्गदर्शन

    बीएमसी शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों से नियमित रूप से सराव प्रश्नपत्रिकाएं हल करवाई जा रही हैं। इसके साथ ही गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेज़ी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    छात्रों की बेहतर तैयारी के लिए कुछ नामी निजी सीबीएसई स्कूलों के अनुभवी शिक्षकों का भी सहयोग लिया गया है, जो ऑनलाइन माध्यम से उत्तर लिखने की तकनीक और समय प्रबंधन पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।

    आयुक्तों के मार्गदर्शन में चल रही तैयारी

    यह पूरा शैक्षणिक उपक्रम महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी तथा अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि बीएमसी के छात्र भी निजी स्कूलों के छात्रों की तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

    आठ भाषाओं और चार बोर्ड में शिक्षा

    बीएमसी का शिक्षा विभाग मराठी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी, गुजराती, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ – इन आठ भाषाओं में शिक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही एसएससी, सीबीएसई, आईसीएसई और आईबी जैसे चार अलग-अलग बोर्ड के पाठ्यक्रम भी महानगरपालिका की शालाओं में उपलब्ध हैं।

    SSC में 93% तक पहुंचा रिजल्ट, अब सीबीएसई पर नजर

    बीते कई वर्षों से बीएमसी के एसएससी बोर्ड के छात्रों के लिए विशेष मार्गदर्शन और अभ्यास योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक असर परीक्षा परिणामों पर भी दिखा है। एसएससी बोर्ड का परिणाम 93 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब इसी तर्ज पर सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए भी विशेष तैयारी करवाई जा रही है।

    परीक्षा की तारीखें तय

    सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इस दौरान छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने की रणनीति, उत्तर लेखन कौशल और परीक्षा के तनाव से निपटने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बीएमसी की कितनी सीबीएसई स्कूलों के छात्र परीक्षा दे रहे हैं?
    👉 10 सीबीएसई स्कूलों के कुल 366 छात्र पहली बार दसवीं की परीक्षा देंगे।

    Q2. परीक्षा कब से कब तक होगी?
    👉 परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक चलेगी।

    Q3. छात्रों के लिए क्या विशेष तैयारी करवाई जा रही है?
    👉 सराव प्रश्नपत्र, विशेष कक्षाएं और निजी स्कूलों के विशेषज्ञ शिक्षकों का ऑनलाइन मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

  • Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai को नया मेयर क्यों नहीं मिला? लॉटरी तय करेगी आरक्षण, एक हफ्ते तक इंतज़ार

    Mumbai: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, लेकिन शहर को मेयर मिलने में वक्त लगेगा। जानिए मेयर पद का आरक्षण लॉटरी से कैसे तय होता है, कानून क्या कहता है और इसमें एक हफ्ता क्यों लग सकता है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव खत्म हो चुके हैं और नई जनरल बॉडी भी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मुंबई को तुरंत नया मेयर नहीं मिलेगा। इसकी वजह सिर्फ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि मेयर के चुनाव से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून के मुताबिक, मेयर पद का आरक्षण लॉटरी सिस्टम से तय होता है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक मेयर का चुनाव संभव नहीं है। इसी कारण मुंबई को नया मेयर मिलने में कम से कम एक हफ्ते का वक्त लग सकता है।

    🏛️ Mumbai का मेयर तुरंत क्यों नहीं चुना जा सकता?

    बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद आमतौर पर लोगों को लगता है कि मेयर का नाम भी तुरंत सामने आ जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और उससे पहले कुछ कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
    सबसे अहम प्रक्रिया है मेयर पद का आरक्षण तय होना, जो सीधे चुनाव से नहीं बल्कि लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स से तय किया जाता है।

    🎟️ क्या है मेयर पद का आरक्षण सिस्टम?

    देशभर की शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
    इस व्यवस्था के तहत मेयर का पद अलग-अलग वर्गों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित किया जाता है, जैसे:

    • अनुसूचित जाति (SC)
    • अनुसूचित जनजाति (ST)
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
    • महिलाएं
    • सामान्य (ओपन) वर्ग

    यह आरक्षण पहले से तय नहीं होता, बल्कि हर कार्यकाल में लॉटरी के ज़रिए तय किया जाता है।

    📜 आरक्षण रोटेशन क्यों जरूरी है?

    मेयर पद पर आरक्षण की व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन से जुड़ी है। इस संशोधन के तहत शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और यह तय किया गया कि SC, ST और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें।
    महाराष्ट्र में यह व्यवस्था नगरपालिका अधिनियम (Municipal Corporations Act) के तहत लागू होती है, जिसमें OBC आरक्षण भी शामिल है।
    रोटेशन सिस्टम का मकसद यह है कि हर वर्ग को समय-समय पर मेयर बनने का मौका मिले और कोई एक वर्ग लगातार फायदे में न रहे।

    🎲 मेयर पद का फैसला लॉटरी से ही क्यों?

    लॉटरी सिस्टम इसलिए अपनाया गया है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
    अगर सरकार या राजनीतिक दल तय करें कि किस वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा, तो उस पर पक्षपात और राजनीतिक दखल के आरोप लग सकते हैं।
    ड्रॉ ऑफ लॉट्स से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आरक्षण पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तय हो।

    🗂️ लॉटरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

    1. शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) लॉटरी कराने का नोटिफिकेशन जारी करता है
    2. पिछले कार्यकालों के आधार पर आरक्षण रोटेशन की सूची तैयार की जाती है
    3. सार्वजनिक रूप से लॉटरी (ड्रॉ) निकाली जाती है
    4. जिस वर्ग का नाम निकलता है, वही मेयर पद के लिए आरक्षित माना जाता है
    5. इसके बाद आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है

    जब तक यह पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती, कोई भी पार्टी अपने मेयर उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सकती।

    🗳️ मेयर का चुनाव कैसे होता है?

    आरक्षण तय होने के बाद बीएमसी की विशेष बैठक बुलाई जाती है।
    मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच से ही किया जाता है।
    मुंबई की 227 सदस्यीय जनरल बॉडी में मेयर बनने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है।
    पिछले दो कार्यकालों में लॉटरी के ज़रिए मेयर पद ओपन जनरल कैटेगरी में गया था।

    👑 मुंबई मेयर के पास कितनी ताकत होती है?

    कानून के मुताबिक, मुंबई का मेयर बीएमसी का औपचारिक (Ceremonial) प्रमुख होता है।
    मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है और उनकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं:

    • जनरल बॉडी की बैठकों की अध्यक्षता
    • सदन में व्यवस्था बनाए रखना
    • बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
    • शहर के “First Citizen” के तौर पर आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करना

    हालांकि, बीएमसी का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होता है, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी होते हैं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. क्या चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मेयर चुना जा सकता है?
    👉 नहीं, पहले मेयर पद का आरक्षण तय होना जरूरी है।

    Q2. मेयर पद का आरक्षण कौन तय करता है?
    👉 शहरी विकास विभाग लॉटरी के ज़रिए आरक्षण तय करता है।

    Q3. मुंबई को नया मेयर मिलने में कितना वक्त लग सकता है?
    👉 कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक हफ्ता लग सकता है।

  • BMC चुनाव 2025–26: मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान से मतदाता जागरूक

    BMC चुनाव 2025–26: मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान से मतदाता जागरूक

    Bmc चुनाव 2025–26 को लेकर मुंबई में मतदाता जागरूकता तेज। मुंबादेवी मंदिर परिसर में SVEEP अभियान के तहत पथनाट्य और जनजागृति रैली के जरिए लोगों को मतदान के महत्व की जानकारी दी गई।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की आगामी चुनाव 2025–26 के मद्देनज़र मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए SVEEP यानी ‘मतदारों का सुनियोजित शिक्षण और चुनावी सहभाग’ अभियान के तहत आज मुंबादेवी मंदिर परिसर में पथनाट्य और जनजागृति रैली का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान के प्रति जागरूक कर चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।

    🟠 SVEEP अभियान क्या है और क्यों जरूरी है?

    SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) अभियान चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष जनजागृति कार्यक्रम है, जिसका मकसद मतदाताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और मतदान प्रक्रिया की सही जानकारी देना है।

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    बीएमसी चुनाव जैसे बड़े स्थानीय निकाय चुनावों में आम नागरिकों की भागीदारी बेहद अहम होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में चलाया जा रहा है।

    🔵 मुंबादेवी मंदिर परिसर क्यों चुना गया?

    मुंबादेवी मंदिर परिसर मुंबई के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक इलाकों में से एक है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, व्यापारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहते हैं। ऐसे सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मतदान का संदेश पहुंचाना था।

    🎭 पथनाट्य के ज़रिए आसान भाषा में समझाया गया मतदान का महत्व

    SVEEP अभियान के तहत आयोजित पथनाट्य में कलाकारों ने आम मुंबईकर की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि—

    • मतदान क्यों जरूरी है
    • वोट न देने से लोकतंत्र को क्या नुकसान होता है
    • हर वोट कैसे विकास में भूमिका निभाता है

    पथनाट्य की भाषा सरल, प्रभावी और आम आदमी से जुड़ी हुई थी, जिससे वहां मौजूद लोगों ने इसे गंभीरता से सुना और सराहा।

    🚶 जनजागृति रैली ने खींचा लोगों का ध्यान

    पथनाट्य के बाद इलाके में जनजागृति रैली भी निकाली गई। रैली में “मतदान हमारा अधिकार है”, “लोकतंत्र मजबूत करें, वोट जरूर करें” जैसे नारे लगाए गए।
    रैली के दौरान नागरिकों को मतदान से जुड़ी जानकारी वाले पर्चे भी वितरित किए गए।

    🗳️ BMC चुनाव 2025–26 में बढ़ेगी मतदाता भागीदारी की उम्मीद

    प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के अभियान से खासतौर पर युवा मतदाता, पहली बार वोट डालने वाले नागरिक और शहरी क्षेत्र के व्यस्त लोग मतदान के लिए प्रेरित होंगे।
    SVEEP जैसे कार्यक्रमों से चुनाव को लेकर फैली गलतफहमियां भी दूर होती हैं।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. SVEEP अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    SVEEP अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को उनके मतदान अधिकार और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।

    Q2. बीएमसी चुनाव 2025–26 कब होने की संभावना है?
    बीएमसी चुनाव 2025–26 के दौरान कराए जाने की संभावना है, जिसकी तैयारी प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है।

    Q3. पथनाट्य का चुनाव क्यों किया गया?
    पथनाट्य एक प्रभावी और आसान माध्यम है, जिससे आम जनता तक गंभीर संदेश सरल तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

    Q4. क्या यह अभियान आगे भी चलेगा?
    हां, SVEEP अभियान मुंबई के विभिन्न हिस्सों में आगे भी जारी रहेगा।

  • BMC चुनाव 2025: 50 हजार कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए BMC प्रशासन पूरी तरह तैयार

    BMC चुनाव 2025: 50 हजार कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए BMC प्रशासन पूरी तरह तैयार

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2025-26 को लेकर BMC प्रशासन ने करीब 50 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की पूरी तैयारी कर ली है। 29 दिसंबर से 7 जगहों पर शुरू होंगे ट्रेनिंग सेशन, जानिए पूरी डिटेल।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वत्रिक चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए महानगरपालिका प्रशासन ने कमर कस ली है। चुनाव में शामिल होने वाले करीब 50 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है। यह प्रशिक्षण सत्र सोमवार, 29 दिसंबर 2025 से शुरू होंगे और मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए 7 प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों पर आयोजित किए जाएंगे।

    निष्पक्ष चुनाव के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम

    BMC चुनाव 2025-26 की प्रक्रिया में किसी भी तरह की चूक न हो, इसके लिए महानगरपालिका प्रशासन ने पहले से ही गहन तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित स्टाफ ही निष्पक्ष चुनाव की सबसे बड़ी ताकत होता है। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम को बेहद व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से तैयार किया गया है।

    मास्टर ट्रेनर सिस्टम से होगा प्रशिक्षण

    इस बार चुनाव प्रशिक्षण में “मास्टर ट्रेनर सिस्टम” अपनाया गया है।
    चुनाव का लंबा अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया गया है। ये मास्टर ट्रेनर आगे मतदान केंद्राध्यक्ष (PRO), सहायक मतदान केंद्राध्यक्ष (APRO), मतदान अधिकारी (PO) और अन्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे।
    इसका मकसद है—हर स्तर पर चुनाव प्रक्रिया की पूरी और एक जैसी समझ बनाना।

    7 अलग-अलग जगहों पर होंगे ट्रेनिंग सेशन

    BMC प्रशासन ने मुंबई के अलग-अलग परिमंडलों में 7 प्रशिक्षण केंद्र तय किए हैं, ताकि कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्र के पास ही ट्रेनिंग मिल सके। ये केंद्र हैं:

    • अण्णाभाऊ साठे सभागृह, भायखला
    • न. म. जोशी मार्ग महानगरपालिका शाळा, करी रोड (लोअर परेल)
    • लोकमान्य टिळक महानगरपालिका सर्वसाधारण रुग्णालय सभागृह, शीव (पूर्व)
    • बालगंधर्व सभागृह, लिंक रोड, बांद्रा (पश्चिम)
    • मास्टर दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह, विलेपार्ले
    • महाकवि कालिदास नाट्यगृह, मुलुंड (पश्चिम)
    • प्रबोधनकार केशव सीताराम ठाकरे नाट्यगृह, बोरीवली (पश्चिम)

    कब तक चलेगा प्रशिक्षण?

    प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:

    • 29 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026
    • 5 जनवरी 2026 से 9 जनवरी 2026

    इन दिनों में हजारों कर्मचारियों को अलग-अलग बैच में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

    प्रशिक्षण सत्रों में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी हर अहम बात को शामिल किया गया है, जैसे:

    • आदर्श आचार संहिता का पालन
    • मतदान केंद्र का प्रबंधन
    • मतदान की पूरी प्रक्रिया
    • मतगणना की प्रक्रिया
    • कानून और व्यवस्था बनाए रखना
    • शिकायत निवारण की प्रक्रिया

    साथ ही, चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और नियमों का सख्ती से पालन कैसे करना है, इस पर भी विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा।

    मॉक पोल और EVM की पूरी जानकारी

    सहायक आयुक्त गजानन बेल्लाळे ने बताया कि प्रशिक्षण में कंप्यूटर प्रेजेंटेशन के जरिए मतदान वाले दिन की पूरी प्रक्रिया को स्टेप-बाय-स्टेप समझाया जाएगा।
    मॉक पोल कैसे लिया जाता है, उसकी एंट्री कैसे होती है और मॉक पोल के बाद मतदान मशीन (EVM) को सील करने की प्रक्रिया—इन सब बातों पर खास फोकस रहेगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में समीक्षा बैठक

    28 दिसंबर 2025 को आयोजित समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:

    • सह आयुक्त (कर निर्धारण व संकलन) विश्वास शंकरवार
    • अतिरिक्त जिल्हाधिकारी (कोकण) फरोग मुकादम
    • उप जिल्हाधिकारी अंजली भोसले
    • 23 रिटर्निंग ऑफिसर (RO)
    • परिमंडल उप आयुक्त (DMC) और सहायक आयुक्त (AC)

    शामिल थे।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. BMC चुनाव के लिए कितने कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है?
    करीब 50 हजार अधिकारी और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    Q2. ट्रेनिंग कब से शुरू होगी?
    29 दिसंबर 2025 से प्रशिक्षण सत्र शुरू होंगे।

    Q3. ट्रेनिंग कहां-कहां होगी?
    मुंबई में 7 अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों पर ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी।

    Q4. ट्रेनिंग में किन विषयों पर जोर रहेगा?
    मतदान प्रक्रिया, मॉक पोल, मतगणना, आचार संहिता और शिकायत निवारण पर।

  • मुंबई में एग्जाम पेपर लीक, फर्जी पहचान पत्र देकर छात्र को परीक्षा में बैठाने का आरोप

    मुंबई में एग्जाम पेपर लीक, फर्जी पहचान पत्र देकर छात्र को परीक्षा में बैठाने का आरोप

    मुंबई के बोरीवली में एग्जाम पेपर लीक का मामला सामने आया है। एक ट्यूशन टीचर ने 14 साल के छात्र को फर्जी पहचान से गणित की परीक्षा में बैठाया। पुलिस ने FIR दर्ज की है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में परीक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक सामने आई है। बोरीवली की एक ट्यूशन टीचर पर आरोप है कि उसने 14 साल के छात्र को फर्जी पहचान के साथ परीक्षा में बैठाया और उससे गणित का प्रश्नपत्र लीक करवाया। मामला सामने आने के बाद बोरीवली पुलिस ने टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    📚 किस परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा?

    यह मामला एक प्रतिष्ठित मैथ्स फोरम द्वारा आयोजित की जाने वाली मैथ्स प्रॉफिशिएंसी एग्जाम से जुड़ा है।
    यह परीक्षा हर साल
    👉 कक्षा 5, 7 और 8 के छात्रों के लिए आयोजित की जाती है।

    परीक्षा के लिए:

    • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है
    • फीस जमा करनी होती है
    • उम्मीदवार को हॉल टिकट दिया जाता है

    🏫 गोराई परीक्षा केंद्र पर कैसे खुला राज?

    रविवार को बोरीवली के गोराई स्थित परीक्षा केंद्र पर

    • दोपहर 12 से 2 बजे तक परीक्षा थी
    • चार कमरों में 139 छात्र परीक्षा दे रहे थे

    करीब 1:30 बजे एक कमरे के सुपरवाइजर को
    👉 एक छात्र की हरकतें संदिग्ध लगीं
    👉 वह बार-बार प्रश्नपत्र लेकर वॉशरूम जा रहा था

    तलाशी लेने पर:

    • छात्र के पास मोबाइल फोन मिला
    • मोबाइल में व्हाट्सएप ग्रुप पर दोपहर 12 बजे से प्रश्नपत्र भेजे जा रहे थे

    📱 “राखी बहन” को भेज रहा था पेपर!

    फोन चेक करने पर छात्र ने दावा किया कि
    👉 वह प्रश्नपत्र अपनी “राखी बहन” को भेज रहा है

    लेकिन जब उसकी जानकारी ली गई तो:

    • हॉल टिकट पर नाम फर्जी निकला
    • माता-पिता के फोन नंबर गलत थे
    • स्कूल का नाम भी झूठा बताया
    • जन्मतिथि बताने से इनकार कर दिया

    इसके बाद केंद्र के प्रिंसिपल छात्र को लेकर सीधे बोरीवली पुलिस स्टेशन पहुंचे।

    👩‍🏫 पुलिस स्टेशन पहुंची ‘मां’, निकली ट्यूशन टीचर

    पुलिस स्टेशन में एक महिला पहुंची और
    👉 खुद को छात्र की मां बताने लगी

    लेकिन जब पुलिस ने

    • आधार कार्ड या पहचान पत्र मांगा
      तो वह कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी।

    जांच में खुलासा हुआ कि:

    • छात्र मालाड के एक स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है
    • महिला उसकी ट्यूशन टीचर है
    • वह गणित और अंग्रेजी पढ़ाती थी

    🚔 टीचर ने रची पूरी साजिश

    पुलिस के मुताबिक:
    👉 ट्यूशन टीचर ने ही छात्र को
    👉 फर्जी पहचान से परीक्षा में बैठने को कहा
    👉 और प्रश्नपत्र बाहर भेजने की योजना बनाई

    चौंकाने वाली बात यह है कि
    ❗ छात्र के माता-पिता को इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी

    ⚖️ पुलिस की कार्रवाई

    बोरीवली पुलिस ने

    • परीक्षा में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया है
    • मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है
    • व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच जारी है

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि
    👉 क्या पहले भी इस तरह से परीक्षा में धांधली की गई है।

    ⚠️ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    इस घटना ने

    • परीक्षा केंद्र की सुरक्षा
    • पहचान जांच की प्रक्रिया
      पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि
    👉 ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई
    👉 और तकनीकी निगरानी जरूरी है।


    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. मामला कहां का है?
    👉 मुंबई के बोरीवली इलाके का।

    Q2. छात्र की उम्र कितनी है?
    👉 14 साल।

    Q3. किस परीक्षा का पेपर लीक हुआ?
    👉 मैथ्स प्रॉफिशिएंसी एग्जाम।

    Q4. आरोपी कौन है?
    👉 छात्र की ट्यूशन टीचर।