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  • Mumbai School Zones में Road Safety Alert: Andheri K-East के 34 स्कूलों के बाहर Missing Signage और टूटी Footpaths का खुलासा

    Mumbai School Zones में Road Safety Alert: Andheri K-East के 34 स्कूलों के बाहर Missing Signage और टूटी Footpaths का खुलासा

    Mumbai Road Safety Audit में बड़ा खुलासा—Andheri K-East ward के 34 स्कूलों के बाहर missing school zone signage, damaged footpaths और heavy traffic congestion। UNICEF-BMC pilot project ने बच्चों की safety को लेकर कई बड़े infrastructure gaps उजागर किए।

    मुंबई: स्कूल जाने वाले बच्चों की road safety को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। UNICEF, BMC और Centre for Advocacy and Research (CACR) की साझेदारी में किए गए एक road safety audit में पता चला है कि Andheri के K-East ward में कई स्कूलों के बाहर बुनियादी सुरक्षा इंतज़ाम ही नहीं हैं।

    फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच किए गए इस pilot project “Strengthening Road Safety for Children and Adolescents” में 34 स्कूलों के आसपास की सड़कों का ऑडिट किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि कई जगहों पर school zone signboards, speed limit signage और warning boards तक मौजूद नहीं हैं, जबकि कई फुटपाथ टूटे हुए या अतिक्रमण की वजह से इस्तेमाल लायक नहीं हैं।

    School Zones में Missing Signage बना बड़ा खतरा

    ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक कई स्कूलों के बाहर visible school zone signboards, distance warning boards और speed limit signage नहीं मिले।

    ऐसी स्थिति में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के अनुसार स्कूलों के आसपास स्पष्ट road safety signage होना बेहद जरूरी है ताकि ड्राइवरों को पहले से सावधान किया जा सके।

    Damaged Footpaths और Encroachment से बच्चों को खतरा

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों के बाहर footpaths या तो मौजूद नहीं हैं, या फिर टूटे हुए हैं, जबकि कई जगहों पर encroachment की वजह से फुटपाथ बंद हो गए हैं।

    इस वजह से बच्चों को मजबूर होकर सड़क के बीच से चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    School Timing पर Heavy Traffic Congestion

    ऑडिट में school arrival और dispersal hours के दौरान भारी ट्रैफिक जाम भी सामने आया।

    रिपोर्ट के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से इन वजहों से होती है:

    • स्कूल गेट के बाहर unplanned parking
    • designated pick-up and drop-off zones का अभाव
    • ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी

    इन कारणों से स्कूल के बाहर ट्रैफिक पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाता है।

    Teachers और Students को बनाया Road Safety Ambassador

    इस प्रोजेक्ट में सिर्फ सर्वे नहीं किया गया बल्कि participatory approach भी अपनाई गई।

    इसके तहत:

    • 57 teachers को “Road Safety Ambassadors” के रूप में ट्रेनिंग दी गई
    • 94 students को “Road Safety Messengers” बनाया गया

    इनके जरिए 2,600 से ज्यादा छात्रों तक road safety awareness sessions पहुंचाए गए।

    School Safety Committees भी बनाई गई

    सुरक्षा सुधारने के लिए सभी 34 स्कूलों में School Safety Committees बनाई गई हैं।

    अब तक इन कमेटियों की 144 meetings हो चुकी हैं, जिनमें स्कूल के आसपास की सड़क सुरक्षा समस्याओं की पहचान और समाधान पर चर्चा की गई।

    Nityanand Municipal School के पास हुआ बड़ा सुधार

    रिपोर्ट में Nityanand Municipal School, जो Western Express Highway के पास स्थित है, का उदाहरण भी दिया गया।

    यहां ऑडिट के दौरान पता चला कि:

    • speed breakers नहीं थे
    • स्कूल गेट के कारण traffic congestion हो रहा था

    इसके बाद प्रशासन ने वहां:

    • speed breakers लगाए
    • zebra crossings बनाए
    • school zone signboards लगाए
    • और separate entry-exit gates बनाए गए

    जिससे छात्रों की आवाजाही ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित हो गई।

    अब पूरे Mumbai में होगा Road Safety Audit

    अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का second phase जल्द शुरू किया जाएगा।

    इसमें Mumbai के अन्य municipal wards में भी स्कूलों के आसपास road safety audit किया जाएगा और यह भी मॉनिटर किया जाएगा कि सुझाए गए सुरक्षा उपाय वास्तव में लागू हो रहे हैं या नहीं।

    K-East ward के Administrative Officer (Schools) Gorakhnath Bhavri के अनुसार:
    स्कूलों के आसपास सुरक्षित माहौल बनाना और school arrival-dispersal hours के दौरान traffic management को सुधारना बेहद जरूरी है। इस ऑडिट से साफ हुआ है कि कई स्कूलों के बाहर basic road safety infrastructure अभी भी inadequate है और इसके लिए ट्रैफिक पुलिस व स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।


    FAQ

    Q1: Mumbai में Road Safety Audit कहाँ किया गया?

    यह ऑडिट Andheri के K-East ward में 34 स्कूलों के आसपास किया गया।

    Q2: Road Safety Audit किसने किया?

    यह ऑडिट UNICEF, BMC और Centre for Advocacy and Research (CACR) की साझेदारी में किया गया।

    Q3: रिपोर्ट में सबसे बड़ी समस्या क्या सामने आई?

    रिपोर्ट में missing school zone signage, damaged footpaths, encroachment और school timing पर traffic congestion को बड़ी समस्या बताया गया।

    Q4: इस प्रोजेक्ट में छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका रही?

    57 teachers को Road Safety Ambassadors और 94 students को Road Safety Messengers बनाकर awareness campaign चलाया गया।

    Q5: क्या यह प्रोजेक्ट पूरे मुंबई में लागू होगा?

    हाँ, प्रोजेक्ट के second phase में इसे मुंबई के अन्य wards में भी लागू किया जाएगा।

  • Social Media Ban: Karnataka में 16 साल से कम बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव, सरकार ने बजट में किया ऐलान

    Social Media Ban: Karnataka में 16 साल से कम बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव, सरकार ने बजट में किया ऐलान

    Karnataka सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव रखा है। CM Siddaramaiah ने राज्य के ₹4,48,004 करोड़ के बजट में डिजिटल एडिक्शन, स्क्रीन टाइम और बच्चों की मानसिक सेहत को देखते हुए यह बड़ा कदम सुझाया है।

    देश में Digital Addiction और Social Media Use को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Karnataka सरकार ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। राज्य सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban लागू करने की योजना पर विचार कर रही है।

    यह प्रस्ताव Siddaramaiah ने शुक्रवार को राज्य का ₹4,48,004 करोड़ का बजट पेश करते समय रखा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों को Smartphone Addiction, Excessive Screen Time और Online Dependency से बचाना है।

    Budget Speech में सामने आया Social Media Ban का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने राज्य का 17वां बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार बच्चों में बढ़ती Digital Addiction को लेकर गंभीर है।

    सरकार का मानना है कि Social Media Platforms का अत्यधिक उपयोग बच्चों की पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाल रहा है।

    इसी कारण 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Access पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

    Smartphone Addiction और Screen Time बना बड़ी चिंता

    राज्य सरकार के अनुसार आजकल बच्चों में Smartphone Addiction, Online Gaming और Excessive Screen Time तेजी से बढ़ रहा है।

    सरकार को चिंता है कि सोशल मीडिया और मोबाइल गेमिंग के कारण बच्चों की Mental Health, Academic Performance और Physical Fitness पर असर पड़ रहा है।

    Vice-Chancellors Conclave में भी उठाया गया था मुद्दा

    इससे पहले Bengaluru में आयोजित Vice-Chancellors (VC) Conclave के दौरान भी मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने इस मुद्दे को उठाया था।

    उन्होंने वहां भी बच्चों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता जताई और इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जरूरत बताई थी।

    देश का पहला राज्य बन सकता है Karnataka

    अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो Karnataka भारत का पहला राज्य बन सकता है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban लागू किया जाएगा।

    इससे पहले राज्य के IT Minister Priyank Kharge ने भी संकेत दिए थे कि सरकार Minors के लिए Social Media Access Restriction पर विचार कर रही है।

    अन्य राज्यों में भी शुरू हुई चर्चा

    केवल Karnataka ही नहीं, बल्कि भारत के कई अन्य राज्यों में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है।

    • Andhra Pradesh सरकार ने पिछले साल स्कूलों में Mobile Phone Ban की संभावना पर चर्चा की थी।
    • वहीं Goa के IT मंत्री ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Restriction लागू करने की बात कही थी।

    बच्चों की Online Safety पर फोकस

    सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को Online Safety Risks, Cyberbullying और Digital Addiction से बचाना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से लागू किया गया तो यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।


    FAQ (People Also Ask)

    1. क्या Karnataka में बच्चों के लिए Social Media Ban लागू होगा?

    राज्य सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban का प्रस्ताव रखा है। अभी इस पर विचार चल रहा है।

    2. यह घोषणा किसने की?

    यह प्रस्ताव Karnataka के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने बजट भाषण के दौरान रखा।

    3. सरकार यह कदम क्यों उठाना चाहती है?

    सरकार का कहना है कि Smartphone Addiction, Screen Time और Mental Health Issues को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

    4. क्या भारत में पहले कहीं ऐसा Ban लागू है?

    अगर लागू हुआ तो Karnataka भारत का पहला राज्य होगा जहां ऐसा प्रतिबंध लागू किया जाएगा।

    5. क्या अन्य राज्य भी ऐसा सोच रहे हैं?

    हाँ, Andhra Pradesh और Goa में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने पर चर्चा हो चुकी है।

  • One Teacher, 101 Students: Goregaon Night School Crisis

    One Teacher, 101 Students: Goregaon Night School Crisis

    Mumbai के Goregaon की 75 साल पुरानी night school में 101 students के लिए सिर्फ एक teacher, ना headmaster, ना clerk, ना peon। Teachers Democratic Front (TDF) ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, 21 night schools बंद होने की कगार पर।

    मुंबई: Goregaon इलाके की एक 75 साल पुरानी state-run night school इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि 101 students के लिए सिर्फ एक ही teacher मौजूद है, जो Classes 8 से 10 तक के सभी subjects पढ़ाने के साथ-साथ पूरी administrative responsibility भी संभाल रहे हैं।

    यह school साल 1950 में स्थापित हुई थी और मुंबई की सबसे पुरानी night schools में गिनी जाती है। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर working-class students हैं, जो दिनभर labour या job करने के बाद evening classes में पढ़ने आते हैं, ताकि उन्हें job promotion, salary increment और बेहतर career opportunities मिल सकें।

    101 Students और सिर्फ एक Teacher

    इस academic year में कुल 101 students enrolled हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि school में ना कोई headmaster है, ना clerk और ना ही peon। पूरा institution एक ही teacher के भरोसे चल रहा है।

    Students का कहना है कि इससे उनकी पढ़ाई और exam preparation पर बुरा असर पड़ रहा है।

    एक student ने बताया,
    “हम दिन में काम करते हैं और रात को पढ़ाई करने आते हैं ताकि future secure हो सके। लेकिन जब हर subject के लिए सिर्फ एक teacher है, तो proper understanding और doubt solving मुश्किल हो जाता है। Exam में कैसे अच्छा perform करेंगे?”

    यह situation education crisis का साफ उदाहरण है, जहां government school infrastructure पूरी तरह से collapse की कगार पर है।

    NGO Masoom का Limited Support

    Class 10 के students के लिए NGO Masoom academic support दे रहा है, जिससे कुछ हद तक राहत मिली है। लेकिन students और teachers’ organisations का कहना है कि यह सिर्फ stop-gap arrangement है।

    NGO support permanent solution नहीं हो सकता। Regular teachers, headmaster, clerk और peon की नियुक्ति जरूरी है, तभी school sustainable तरीके से चल पाएगा।

    Mumbai Night School System में बड़ी गड़बड़ी

    Goregaon की यह स्थिति isolated case नहीं है। Teachers Democratic Front (TDF) Mumbai के अनुसार, मुंबई की 92 night schools में से 21 schools closure के कगार पर हैं।

    • 42 schools में सिर्फ एक ही teacher है
    • कई schools में वर्षों से clerk और peon नहीं हैं
    • Evening hours में electricity management जैसी basic operational problems भी unresolved हैं

    यह आंकड़े Mumbai education system की गंभीर हालत को दर्शाते हैं।

    TDF का आरोप: Salary भी नहीं मिली

    TDF Mumbai के president Janardan Jangle ने खुलासा किया कि Goregaon night school के lone teacher को पिछले कुछ महीनों से salary भी नहीं मिली है।

    उन्होंने सवाल उठाया,
    “अगर यही एक teacher बीमार पड़ जाए या किसी वजह से अनुपस्थित हो जाए, तो 101 students का क्या होगा?”

    TDF ने 2024 में government को legal notice भेजा था और 2025 में High Court में public interest litigation (PIL) भी दायर की। Court के निर्देश पर Principal Secretary के साथ meeting भी हुई, लेकिन ground level पर कोई substantial improvement नहीं दिख रहा है।

    Student Strength Norms और Surplus Teacher Issue

    कई night schools prescribed student strength norms पूरी नहीं कर पा रही हैं। इसका नतीजा यह है कि जरूरत होने के बावजूद teachers को surplus mark कर दिया जाता है, बजाय इसके कि उन्हें shortage वाले schools में appoint किया जाए।

    Experts का मानना है कि night schools के लिए separate policy framework होना चाहिए, क्योंकि इनका functioning time और challenges अलग होते हैं।

    Protest की चेतावनी

    Teachers Democratic Front (TDF) ने vacant posts तुरंत भरने की मांग की है — जिसमें teachers, headmaster, clerk और peon शामिल हैं।

    Organisation ने साफ चेतावनी दी है कि अगर government ने urgent corrective steps नहीं उठाए, तो protests किए जाएंगे।

    Conclusion: Mumbai Education System के लिए Alarm Bell

    Goregaon night school का मामला सिर्फ एक school की कहानी नहीं है, बल्कि Mumbai night school education system की ground reality को उजागर करता है।

    जहां एक तरफ Skill Development, Education Reform और Digital India जैसे keywords चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ 101 students का भविष्य सिर्फ एक teacher के भरोसे है।

    अब देखना होगा कि Maharashtra Government और Education Department इस गंभीर education crisis पर क्या कदम उठाते हैं।


    FAQ Section

    Q1: Goregaon night school में कितने students enrolled हैं?
    इस academic year में कुल 101 students Classes 8 से 10 में enrolled हैं।

    Q2: School में कितने teachers हैं?
    फिलहाल सिर्फ एक ही teacher पूरे school को संभाल रहे हैं।

    Q3: क्या school में headmaster या clerk मौजूद है?
    नहीं, school में headmaster, clerk और peon कोई भी नियुक्त नहीं है।

    Q4: NGO Masoom की क्या भूमिका है?
    NGO Masoom Class 10 students को academic support दे रहा है, लेकिन यह permanent solution नहीं है।

    Q5: Mumbai में कुल कितनी night schools हैं?
    Mumbai में कुल 92 night schools हैं, जिनमें से 21 closure की कगार पर हैं।

  • मुंबई में कॉलेज के नाम को लेकर बवाल! गुजराती बोर्ड को लेकर ठाकरे गुट की चेतावनी

    मुंबई में कॉलेज के नाम को लेकर बवाल! गुजराती बोर्ड को लेकर ठाकरे गुट की चेतावनी

    कांदिवली के बालभारती कॉलेज के गुजराती साइनबोर्ड पर बवाल। मराठी अनिवार्य नियम की अनदेखी का आरोप, युवा सेना ने प्रशासन को दी सीधी चेतावनी। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: कांदिवली इलाके में एक कॉलेज के नाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में होने का मामला सामने आते ही राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है। मराठी भाषा अनिवार्य होने के बावजूद कॉलेज ने अब तक मराठी में साइनबोर्ड नहीं लगाया, जिस पर ठाकरे गुट की युवा सेना ने आक्रामक रुख अपनाया है।

    क्या है पूरा साइनबोर्ड विवाद?

    राज्य सरकार के नियम के अनुसार महाराष्ट्र में सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।

    इसके बावजूद कांदिवली (पश्चिम) के इस कॉलेज का बोर्ड पूरी तरह गुजराती में लिखा हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह मराठी भाषा कानून (Marathi Language Law Maharashtra) का सीधा उल्लंघन है।

    मुंबई विश्वविद्यालय के आदेश का हवाला

    ठाकरे गुट की युवा सेना का कहना है कि मुंबई विद्यापीठ के परिपत्र क्र. संलग्नता/आय सी सी/(2021-22)/2022 के अनुसार महाविद्यालयों के नाम मराठी में होना अनिवार्य है।

    सवाल यह उठ रहा है कि जब विश्वविद्यालय का स्पष्ट आदेश है, तो फिर कॉलेज प्रशासन ने अब तक मराठी नामफलक क्यों नहीं लगाया?

    युवा सेना की आक्रामक एंट्री

    मामले ने तूल पकड़ा तो युवा सेना के पदाधिकारी सीधे कॉलेज पहुंच गए।

    युवा सेना के सिनेेट सदस्य प्रदीप सावंत, शशिकांत झोरे, पूर्व सिनेेट सदस्य राजन कोळंबेकर और कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक शिर्के ने कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात की और तुरंत मराठी में साइनबोर्ड लगाने की मांग की।

    उनका कहना था कि “राज्य में मराठी भाषा को प्राथमिकता देना कानूनन अनिवार्य है। संस्थान का यह रवैया अस्वीकार्य है।”

    Mumbai-college-name-row-Thackeray-faction-issues-warning-regarding-Gujarati-board-news

    विश्वविद्यालय प्रशासन से भी मुलाकात

    युवा सेना के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. अजय भामरे (प्र-कुलगुरु) और डॉ. प्रसाद कारंडे (कुलसचिव) से भी मुलाकात की।

    उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि संबंधित कॉलेज को तत्काल मराठी नामफलक लगाने का निर्देश दिया जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

    स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी

    कांदिवली इलाके के कई स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब राज्य सरकार ने स्पष्ट कानून बनाया है, तो उसका पालन हर संस्था को करना चाहिए।

    सिर्फ गुजराती भाषा में बोर्ड रखना कानून का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है।

    कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

    सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने जल्द ही मराठी में नामफलक लगाने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, अभी तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया है।

    युवा सेना ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाया गया, तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

    मराठी भाषा कानून क्या कहता है?

    महाराष्ट्र शासन के नियमों के अनुसार:

    • सभी स्कूल, कॉलेज और संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।
    • मराठी को प्राथमिकता देना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
    • उल्लंघन की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

    इसी आधार पर इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. विवाद किस कॉलेज को लेकर है?
    कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स।

    Q2. विवाद की वजह क्या है?
    कॉलेज का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में है, जबकि मराठी अनिवार्य है।

    Q3. किस संगठन ने विरोध किया?
    ठाकरे गुट की युवा सेना ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की।

    Q4. विश्वविद्यालय का क्या आदेश है?
    मुंबई विश्वविद्यालय के परिपत्र के अनुसार कॉलेज का नाम मराठी में होना चाहिए।

    Q5. आगे क्या हो सकता है?
    अगर मराठी नामफलक नहीं लगाया गया तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

  • BMC Budget 2026-27: 25 फरवरी को पेश हुआ बीएमसी का बजट, शिक्षा विभाग का प्रस्ताव पहले हुआ पेश

    BMC Budget 2026-27: 25 फरवरी को पेश हुआ बीएमसी का बजट, शिक्षा विभाग का प्रस्ताव पहले हुआ पेश

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 25 फरवरी 2026 को पेश किया गया। शिक्षा विभाग का बजट सुबह 11 बजे और मुख्य बजट दोपहर 2 बजे स्थायी समिति में प्रस्तुत किया गया।

    मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाने वाली Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 25 फरवरी 2026 को पेश किया। बजट प्रस्तुति को लेकर मनपा मुख्यालय में दिनभर महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।

    सुबह 11 बजे शिक्षा विभाग का बजट पेश

    सबसे पहले अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्व उपनगर) Dr. Avinash Dhakane ने शिक्षा विभाग का बजट अनुमान 25 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे शिक्षा समिति सभागृह, दूसरे मंजिल, मुख्य इमारत, मनपा मुख्यालय में पेश किया।

    उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के शिक्षा विभाग के ‘ई’ बजट अनुमान को शिक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।

    शिक्षा समिति अध्यक्ष को सौंपा गया प्रस्ताव

    डॉ. अविनाश ढाकणे ने यह बजट प्रस्ताव शिक्षा समिति की अध्यक्ष Rajeshree Shirwadkar को सौंपा।

    इस दौरान शिक्षा समिति के सदस्य, उप आयुक्त (शिक्षण) Dr. Prachi Jambecker, महानगरपालिका सचिव Manjiri Deshpande सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

    दोपहर 2 बजे स्थायी समिति में मुख्य बजट पेश

    इसके बाद महानगरपालिका आयुक्त Bhushan Gagrani ने 25 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे स्थायी समिति सभागृह, पहली मंजिल, मुख्य इमारत, मनपा मुख्यालय में वर्ष 2026-27 का संपूर्ण बजट स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।

    मुंबईकरों के लिए यह बजट महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी सप्लाई, सड़क, स्वच्छता और विकास परियोजनाओं के लिए प्रावधान शामिल हैं।

    दोपहर 3:30 बजे मीडिया से संवाद

    महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी ने बजट पेश करने के बाद दोपहर 3:30 बजे आयुक्त सभागृह, दूसरे मंजिल, मनपा मुख्यालय, महापालिका मार्ग, मुंबई-400001 में मीडिया से संवाद किया।

    इस दौरान उन्होंने बजट के मुख्य बिंदुओं और आगामी वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर जानकारी दी।

    क्यों अहम है BMC Budget 2026-27?

    मुंबई महानगरपालिका का बजट देश में सबसे बड़े नगर निकाय बजट में गिना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा, जल आपूर्ति, बुनियादी ढांचा और नागरिक सुविधाओं को लेकर अहम घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है।

    मुंबईकरों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले साल में शहर के विकास और सुविधाओं को लेकर क्या नई योजनाएं लागू होंगी।


    FAQ

    Q1: BMC का बजट कब पेश किया गया?
    25 फरवरी 2026 को।

    Q2: शिक्षा विभाग का बजट किसने पेश किया?
    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने।

    Q3: मुख्य बजट किसके द्वारा पेश किया गया?
    महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी ने स्थायी समिति में पेश किया।

    Q4: मीडिया से संवाद कब हुआ?
    25 फरवरी 2026 को दोपहर 3:30 बजे।

    Q5: यह बजट क्यों महत्वपूर्ण है?
    क्योंकि इसमें शिक्षा, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए वित्तीय प्रावधान तय किए जाते हैं।

  • 6 साल के रचित ने बॉडीबिल्डिंग स्टेज पर मचाया धमाल, पिता का अधूरा सपना किया पूरा

    6 साल के रचित ने बॉडीबिल्डिंग स्टेज पर मचाया धमाल, पिता का अधूरा सपना किया पूरा

    मुंबई के 6 वर्षीय रचित पंचाल ने Junior Mumbai Shree 2026 में 55 किलो कैटेगरी और अंडर-23 ग्रुप में हिस्सा लेकर सबको चौंका दिया। पिता उमेश पंचाल के एक्सीडेंट के बाद बेटे ने उनका अधूरा बॉडीबिल्डिंग सपना पूरा किया।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने फिटनेस इंडस्ट्री, बॉडीबिल्डिंग जगत और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। सिर्फ 6 साल के रचित पंचाल ने Junior Mumbai Shree 2026 में हिस्सा लेकर 30 से ज्यादा एडल्ट बॉडीबिल्डर्स के बीच स्टेज पर जबरदस्त आत्मविश्वास दिखाया। 55 किलो वेट कैटेगरी और अंडर-23 एज ग्रुप में एंट्री लेकर रचित ने साबित कर दिया कि जज़्बा उम्र नहीं देखता।

    6-year-old-Rachit-dazzles-on-the-bodybuilding-stage-fulfilling-his-father-unfulfilled-dream-news

    Junior Mumbai Shree 2026 में 6 साल का चैंपियन

    Junior Mumbai Shree 2026 का आयोजन मलाड ईस्ट में जय भवानी जिम और Greater Bombay Bodybuilding Association द्वारा किया गया था। इसी मंच पर रचित पंचाल ने अपनी दमदार फिजीक, कट्स और ऑन-स्टेज कॉन्फिडेंस से सबको हैरान कर दिया।

    करीब 30 से ज्यादा सीनियर बॉडीबिल्डर्स के बीच एक 6 साल का बच्चा बिना डरे स्टेज पर खड़ा था — ये नज़ारा देखने लायक था।

    पिता का अधूरा सपना, बेटे ने किया पूरा

    रचित के लिए ये सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि उनके पिता Umesh Madhusudan Panchal का अधूरा सपना था।

    परेल निवासी उमेश पंचाल खुद बॉडीबिल्डिंग में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। 9 मार्च 2024 को उन्हें Mumbai Shree Bodybuilding Competition में हिस्सा लेना था, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

    सड़क हादसे ने बदल दी जिंदगी

    • 9 मार्च 2024 को उमेश को मुंबई श्री प्रतियोगिता में उतरना था।
    • उससे दो दिन पहले, 7 मार्च 2024 को, अंधेरी स्थित अपने ऑफिस से वसई क्लाइंट मीटिंग के लिए बाइक से जाते वक्त उनका एक्सीडेंट हो गया।
    • हादसे में उनके बाएं पैर (टिबिया) में गंभीर चोट आई।
    • उन्हें दो सर्जरी करानी पड़ी — पहली मार्च 2024 में और दूसरी सितंबर 2024 में।
    • करीब 8 महीने तक वे बिस्तर पर रहे और लंबी रिकवरी से गुजरे।

    जिस मंच पर उमेश उतरने वाले थे, उसी मंच पर अब उनका 6 साल का बेटा खड़ा था।

    अप्रैल 2025 से शुरू हुई नई कहानी

    अप्रैल 2025 में गिरगांव में हुई एक बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में जब रचित पहली बार स्टेज पर उतरे, तो उनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे।

    मां सोनल और पिता उमेश ने उस पल को अपनी जिंदगी का सबसे भावुक और गर्वभरा लम्हा बताया।

    स्कूल स्टूडेंट, लेकिन फिटनेस में प्रोफेशनल

    रचित पंचाल St Joseph’s High School, Wadala में सीनियर केजी के छात्र हैं। स्कूल यूनिफॉर्म में स्पीच देने वाला यही बच्चा जब जिम में ट्रेनिंग करता है तो प्रोफेशनल एथलीट जैसा दिखता है।

    रोजाना जिम ट्रेनिंग और मल्टी-स्पोर्ट एक्टिविटी

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    • रचित अपने पिता के साथ जिम में ट्रेनिंग करते हैं।
    • साइक्लिंग और रनिंग में भी एक्टिव रहते हैं।
    • उनकी ट्रेनिंग कराते हैं विशाल परब, जिन्होंने पहले उनके पिता को भी ट्रेन किया था।

    ये कहानी सिर्फ बॉडीबिल्डिंग की नहीं, बल्कि फैमिली सपोर्ट, डेडिकेशन और मुंबई स्पिरिट की मिसाल है।

    क्यों वायरल हो रही है ये खबर?

    • 6 साल का बॉडीबिल्डर
    • पिता के एक्सीडेंट के बाद बेटे का कमबैक
    • Junior Mumbai Shree 2026 में एडल्ट्स के बीच मुकाबला
    • सोशल मीडिया पर वायरल फिटनेस स्टोरी
    • मुंबई की इंस्पिरेशनल न्यूज़

    ये स्टोरी गूगल पर तेजी से सर्च हो रही है — “6 year old bodybuilder Mumbai”, “Rachit Panchal bodybuilding”, “Junior Mumbai Shree 2026 news” जैसे कीवर्ड ट्रेंड में हैं।


    FAQ

    Q1: रचित पंचाल की उम्र कितनी है?
    रचित की उम्र 6 साल है और वे सीनियर केजी के छात्र हैं।

    Q2: उन्होंने किस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया?
    उन्होंने Junior Mumbai Shree 2026 में 55 किलो कैटेगरी और अंडर-23 ग्रुप में हिस्सा लिया।

    Q3: उनके पिता के साथ क्या हुआ था?
    मार्च 2024 में बाइक एक्सीडेंट में उनके पिता उमेश पंचाल के पैर (टिबिया) में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद उन्हें दो सर्जरी करानी पड़ी।

    Q4: रचित की ट्रेनिंग कौन कराता है?
    उन्हें विशाल परब ट्रेन करते हैं, जो पहले उनके पिता के कोच भी रह चुके हैं।

    Q5: यह खबर क्यों खास है?
    क्योंकि 6 साल के बच्चे ने एडल्ट बॉडीबिल्डर्स के बीच स्टेज पर उतरकर पिता का अधूरा सपना पूरा किया।

  • मुंबई BMC Net Zero Plan: 2050 तक नगर भवन होंगे Net-Zero, Nair Hospital और R/Central Ward से होगी शुरुआत

    मुंबई BMC Net Zero Plan: 2050 तक नगर भवन होंगे Net-Zero, Nair Hospital और R/Central Ward से होगी शुरुआत

    मुंबई में BMC का बड़ा क्लाइमेट एक्शन प्लान – 2050 तक सभी म्युनिसिपल बिल्डिंग होंगी Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon. Nair Hospital और R/Central Ward Office में पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जानें पूरी डिटेल।

    मुंबई: Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) की इमारतों में बिजली खपत को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘Net Zero Action Plan for Municipal Buildings of Mumbai and Panvel’ स्टडी के मुताबिक, मुंबई के म्युनिसिपल स्कूल, ऑफिस, अस्पताल और ऑडिटोरियम मिलकर BMC की कुल बिजली खपत का 14.7 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं। वहीं C40 की आकलन रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के अधिकार क्षेत्र वाली इमारतें कुल नगरपालिका बिजली खपत का 19 प्रतिशत उपयोग करती हैं।

    🔎 मुंबई क्लाइमेट वीक में हुआ ऐलान

    यह एक्शन प्लान राज्य सरकार ने Mumbai Climate Week के दौरान घोषित किया। इस योजना का मकसद 2050 तक सभी मौजूदा नगर निगम भवनों को Net-Zero Energy और नए भवनों को Net-Zero Carbon में बदलना है।

    इस रिपोर्ट को ग्लोबल क्लाइमेट नेटवर्क C40 ने तैयार किया है।

    ⚡ सबसे ज्यादा बिजली खाते हैं BMC अस्पताल

    रिपोर्ट के मुताबिक BMC की बिजली खपत का बंटवारा इस तरह है:

    • 🏥 म्युनिसिपल अस्पताल – 9.8%
    • 🏢 म्युनिसिपल ऑफिस – 3.8%
    • 🏫 म्युनिसिपल स्कूल – 1.2%
    • 🎭 ऑडिटोरियम – 1%

    यानी अस्पताल और ऑफिस सबसे ज्यादा बिजली खर्च कर रहे हैं, इसलिए पहले इन्हीं पर फोकस किया जाएगा।

    🏫 किन-किन इमारतों का हुआ एनर्जी ऑडिट?

    स्टडी के तहत कई प्रमुख भवनों में एनर्जी ऑडिट वॉकथ्रू किया गया:

    स्कूल

    • LK Waghji Mumbai Public School
    • Chhatrapati Shivaji Maharaj Nag. School No.1
    • Sodawala Municipal School

    अस्पताल

    • KEM Hospital
    • Nair Hospital

    वार्ड ऑफिस

    • R/Central Ward Office
    • H/West Ward Office

    ऑडिटोरियम

    • Kalidas Natyagriha
    • Prabodhankar Natyagriha

    🏗️ नए BMC भवनों के लिए 5 बड़ा फॉर्मूला

    नई म्युनिसिपल बिल्डिंग को Net-Zero Carbon बनाने के लिए रिपोर्ट में पांच अहम सुझाव दिए गए हैं:

    1. Passive Design (प्राकृतिक रोशनी और हवा का इस्तेमाल)
    2. Active Energy Efficient सिस्टम
    3. Low-Carbon Construction Material
    4. Renewable Energy Integration (Rooftop Solar)
    5. Clean Energy Procurement

    💡 पुराने भवनों में कम खर्च वाले उपाय

    BMC के बजट दबाव को देखते हुए रिपोर्ट ने लो-कॉस्ट एनर्जी सेविंग उपाय सुझाए हैं:

    • पारंपरिक लाइट की जगह LED
    • सामान्य पंखों की जगह BLDC Fans (30-40% कम बिजली खपत)
    • पुराने AC की जगह Energy Efficient AC
    • Green Cess Revenue का इस्तेमाल

    🔄 फेज़ वाइज पंखों की बदली

    • पहले चरण में 6–10 साल पुराने पंखे बदले जाएंगे
    • दूसरे चरण में 5 साल से कम पुराने पंखे

    💰 क्लाइमेट बजट में सोलर के लिए सिर्फ 0.1%

    रिपोर्ट बताती है कि BMC के कुल कैपिटल बजट का 32.18% हिस्सा क्लाइमेट संबंधित गतिविधियों में जाता है।
    लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 0.1% (करीब 32.5 करोड़ रुपये) ही Rooftop Solar और LED रेट्रोफिट के लिए रखा गया है।

    🎯 2030 और 2040 के टारगेट

    2050 के अंतिम लक्ष्य से पहले चरणबद्ध योजना बनाई गई है:

    • 2030 तक: बेसलाइन ऑडिट और लो-कॉस्ट उपाय पूरे करना
    • 2040 तक: 50% भवनों को Rooftop Solar और एनर्जी एफिशिएंसी से Net-Zero की ओर लाना
    • 2050 तक: सभी पुराने भवन Net-Zero Energy, नए भवन Net-Zero Carbon

    🏥 Nair Hospital और BMC R/Central Ward में पायलट प्रोजेक्ट

    ऊर्जा खपत ज्यादा होने के कारण पायलट प्रोजेक्ट इन दो जगहों पर शुरू होगा:

    • Nair Hospital
    • R/Central Ward BMC Office

    प्रस्तावित बदलाव:

    • AC का तापमान नियंत्रण
    • पुराने पंखों की बदली
    • AC अपग्रेड
    • Rooftop Solar Installation

    ⏳ Payback Period

    • Nair Hospital: 2.5 से 5 साल
    • R/Central Ward Office: 6 से 10 साल

    📊 क्यों अहम है यह योजना?

    मुंबई जैसे महानगर में बढ़ते बिजली बिल, कार्बन उत्सर्जन और क्लाइमेट चेंज के खतरे को देखते हुए यह योजना शहर को ग्रीन और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

    अगर यह मॉडल सफल रहा तो इसे BMC की सभी इमारतों में लागू किया जाएगा।


    ❓ FAQ Section

    Q1: BMC की कितनी बिजली खपत म्युनिसिपल भवनों में होती है?

    करीब 14.7% बिजली खपत स्कूल, अस्पताल, ऑफिस और ऑडिटोरियम में होती है।

    Q2: सबसे ज्यादा बिजली कौन-सा विभाग खर्च करता है?

    म्युनिसिपल अस्पताल 9.8% बिजली खर्च करते हैं।

    Q3: Net-Zero Energy और Net-Zero Carbon में क्या फर्क है?

    Net-Zero Energy में जितनी ऊर्जा खपत होती है, उतनी ही रिन्यूएबल ऊर्जा से बनाई जाती है।
    Net-Zero Carbon में निर्माण से लेकर संचालन तक कार्बन उत्सर्जन शून्य के करीब लाया जाता है।

    Q4: पायलट प्रोजेक्ट कहाँ शुरू होगा?

    Nair Hospital और R/Central Ward Office में।

    Q5: क्या इससे बिजली बिल कम होगा?

    हाँ, LED, BLDC Fan और Solar Rooftop से बिजली बिल में भारी कमी संभव है।

  • Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    महाराष्ट्र सरकार ने 5% मुस्लिम आरक्षण खत्म करने का GR जारी किया। फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर। जानिए पूरा कानूनी और राजनीतिक अपडेट।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दिया जा रहा 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले ने सियासी और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। 17 फरवरी 2026 को जारी एक Government Resolution (GR 181) के जरिए यह निर्णय लागू किया गया। अब इस फैसले को Bombay High Court में चुनौती दी गई है।

    📜 क्या है पूरा मामला?

    मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक एवं विशेष न्याय विभाग ने एक GR जारी कर 5% मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने की घोषणा की।

    यह आरक्षण 2014 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के दौरान लागू किया गया था, जिसमें मराठा समुदाय को 16% और मुस्लिम समुदाय को 5% आरक्षण “Special Backward Class” कैटेगरी में दिया गया था।

    बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां मराठा आरक्षण रद्द कर दिया गया, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र में आंशिक राहत मिली थी।

    🏛️ हाई कोर्ट में कानूनी चुनौती

    सरकार के इस ताजा फैसले के खिलाफ Civil Writ Petition No. 5063/2026 दायर की गई है।

    याचिकाकर्ता हैं Syed Ejaz Abbas Naqvi, जिन्होंने इस GR को “असंवैधानिक और सामुदायिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम” बताया है।

    यह याचिका 23 फरवरी 2026 को जस्टिस Riyaz I. Chagla की बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है।

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता Nitin Satpute और Ejaj Naqvi पेश होंगे।

    🗳️ सियासी प्रतिक्रिया

    विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध किया है।

    • कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र के लिए हानिकारक” बताया।
    • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) ने भी इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ कदम कहा।

    सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार का तर्क है कि यह फैसला “कानूनी और संवैधानिक समीक्षा” के आधार पर लिया गया है।

    📚 2014 का इतिहास क्या कहता है?

    2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने अध्यादेश जारी कर मराठा और मुस्लिम समुदाय को आरक्षण दिया था।

    मामला अदालत में गया और बॉम्बे हाई कोर्ट ने:

    • मराठा आरक्षण को निरस्त किया
    • मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र तक सीमित राहत दी

    बाद में सत्ता में आई बीजेपी-शिवसेना सरकार ने मुस्लिम आरक्षण का विरोध किया था।

    🔎 अब आगे क्या?

    23 फरवरी की सुनवाई में यह तय होगा कि:

    • क्या GR 181 पर अंतरिम रोक लगेगी?
    • क्या सरकार से जवाब तलब किया जाएगा?
    • क्या आरक्षण फिलहाल बहाल रहेगा या रद्द ही रहेगा?

    इस मामले का असर हजारों छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ सकता है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: मुस्लिम आरक्षण कब रद्द किया गया?
    17 फरवरी 2026 को जारी GR 181 के जरिए।

    Q2: किसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की?
    एडवोकेट सैयद एजाज़ अब्बास नक़वी ने सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर की।

    Q3: सुनवाई कब है?
    23 फरवरी 2026 को जस्टिस रियाज़ चागला की बेंच के सामने संभावित सुनवाई।

    Q4: क्या आरक्षण फिलहाल लागू है?
    यह कोर्ट के अंतरिम आदेश पर निर्भर करेगा।

  • Aligarh Muslim University में 27 नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती 2026, सैलरी ₹2.18 लाख तक – ऐसे करें अप्लाई

    Aligarh Muslim University में 27 नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती 2026, सैलरी ₹2.18 लाख तक – ऐसे करें अप्लाई

    AMU Non Teaching Vacancy 2026 के तहत Librarian, Registrar, Principal समेत 27 पदों पर भर्ती निकली है। सैलरी ₹56,100 से ₹2,18,200 तक। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 04 मार्च 2026। जानें योग्यता, फीस, चयन प्रक्रिया और पूरा आवेदन तरीका।

    नई दिल्ली: देश की प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) ने नॉन-टीचिंग स्टाफ के 27 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर आपके पास मास्टर्स डिग्री और संबंधित अनुभव है तो यह मौका हाथ से न जाने दें। यहां सैलरी ₹56,100 से लेकर ₹2,18,200 प्रति माह तक मिलेगी। ऑनलाइन आवेदन 04 मार्च 2026 तक और हार्ड कॉपी 19 मार्च 2026 तक भेजनी होगी।

    📌 AMU Non Teaching Recruitment 2026: मुख्य हाइलाइट्स

    • संस्थान: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (NAAC A+ ग्रेड)
    • कुल पद: 27
    • पोस्ट नाम: Librarian, Deputy Registrar, Assistant Registrar, Principal, Medical Superintendent आदि
    • जॉब लोकेशन: अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
    • सैलरी: ₹56,100 – ₹2,18,200 (7th Pay Commission के अनुसार)
    • ऑनलाइन लास्ट डेट: 04 मार्च 2026
    • हार्ड कॉपी लास्ट डेट: 19 मार्च 2026

    📝 कौन-कौन से पदों पर निकली है भर्ती?

    पद का नामकुल वैकेंसीपे लेवल
    Librarian1AL-14 (₹1,44,200 – ₹2,18,200)
    Deputy Librarian1AL-12
    Assistant Librarian7AL-10
    Deputy Registrar4Level 12
    Deputy Finance Officer2Level 12
    Internal Audit Officer1Level 12
    Assistant Registrar3Level 10
    School Principal5Level 12
    Director Physical Education2AL-10
    Medical Superintendent1Level 12

    नोट: 1 Assistant Librarian पद PwBD (Hearing Handicapped) के लिए आरक्षित है।

    🎓 योग्यता क्या चाहिए?

    ✔ Librarian

    • Library Science में 55% के साथ मास्टर्स
    • Ph.D अनिवार्य
    • 10 साल का अनुभव

    ✔ Assistant / Deputy Registrar

    • 55% के साथ मास्टर्स डिग्री
    • 5 से 9 साल का प्रशासनिक अनुभव
    • CA/CS/ICWA भी मान्य

    ✔ Principal (स्कूल)

    • मास्टर्स + B.Ed
    • 12 साल का शिक्षण अनुभव
    • उम्र 35 से 50 वर्ष

    ✔ Medical Superintendent

    • PG Medical Degree
    • 10 साल का प्रोफेसर लेवल अनुभव

    💰 कितनी मिलेगी सैलरी? (In-Hand Salary Details)

    AMU में 7th Pay Commission के अनुसार वेतन दिया जाएगा।

    • Level 10: लगभग ₹75,000 इन-हैंड
    • Level 12: लगभग ₹1,10,000 इन-हैंड
    • AL-14: ₹2 लाख+ सैलरी

    साथ में मिलेगा:

    • DA (महंगाई भत्ता)
    • HRA
    • NPS पेंशन
    • LTC सुविधा
    • मेडिकल बेनिफिट
    • कैंपस में आवास सुविधा

    🧾 चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

    1️⃣ लिखित परीक्षा (जरूरत पड़ने पर)

    अगर आवेदन ज्यादा आए तो 100 नंबर की स्क्रीनिंग टेस्ट होगी।

    2️⃣ इंटरव्यू

    शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

    3️⃣ डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

    मूल प्रमाण पत्र दिखाना जरूरी।

    🖥️ ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन – Step by Step

    1. AMU Careers Portal पर जाएं
    2. नया अकाउंट बनाएं
    3. अलग-अलग पोस्ट के लिए अलग फॉर्म भरें
    4. ₹500 आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें (PwBD मुक्त)
    5. सभी डॉक्यूमेंट अपलोड करें
    6. 04 मार्च 2026 से पहले सबमिट करें
    7. प्रिंट निकालकर 19 मार्च 2026 तक स्पीड पोस्ट से भेजें

    पता: Selection Committee Section (Non-Teaching), Registrar’s Office, AMU, Aligarh – 202001

    📅 महत्वपूर्ण तिथियां

    इवेंटतारीख
    नोटिफिकेशन जारी19 जनवरी 2026
    ऑनलाइन अंतिम तिथि04 मार्च 2026
    हार्ड कॉपी अंतिम तिथि19 मार्च 2026

    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. AMU Non Teaching Vacancy 2026 की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 ऑनलाइन आवेदन 04 मार्च 2026 तक और हार्ड कॉपी 19 मार्च 2026 तक।

    Q2. आवेदन फीस कितनी है?
    👉 ₹500 प्रति आवेदन (PwBD उम्मीदवारों के लिए निशुल्क)।

    Q3. क्या इंटरव्यू होगा?
    👉 हां, शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों का इंटरव्यू होगा।

    Q4. क्या यह सेंट्रल गवर्नमेंट जॉब है?
    👉 हां, AMU एक Central University है, इसलिए वेतन और सुविधाएं केंद्र सरकार के अनुसार मिलेंगी।

  • RTE 25% Admission 2026: मुंबई में 17 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू, 5,939 सीटें उपलब्ध

    RTE 25% Admission 2026: मुंबई में 17 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन शुरू, 5,939 सीटें उपलब्ध

    BMC RTE Admission 2026-27 प्रक्रिया 17 फरवरी से शुरू। मुंबई की 323 स्कूलों में 5,939 सीटें। RTE 25% ऑनलाइन फॉर्म, eligibility, last date 10 मार्च, जरूरी दस्तावेज और पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (bmc) ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए RTE 25% एडमिशन प्रक्रिया 17 फरवरी 2026 से शुरू करने का ऐलान किया है। इस बार मुंबई क्षेत्र की 323 स्कूलों में कुल 5,939 सीटें उपलब्ध हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आखिरी तारीख 10 मार्च 2026 रखी गई है।

    क्या है RTE 25% एडमिशन स्कीम?

    RTE यानी “बालकांचा मोफत व सक्तीच्या शिक्षणाचा अधिकार अधिनियम 2009” के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी और बिना अनुदानित स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित दी जाती हैं। इन बच्चों को आठवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

    यह योजना खास तौर पर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आती है जो महंगे प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं भर सकते।

    मुंबई में कितनी स्कूलों में कितनी सीटें?

    BMC क्षेत्र में इस साल:

    • महाराष्ट्र राज्य बोर्ड की 252 स्कूलों में – 4,558 सीटें
    • अन्य बोर्ड (CBSE/ICSE आदि) की 71 स्कूलों में – 1,381 सीटें
    • कुल स्कूल – 323
    • कुल उपलब्ध सीटें – 5,939

    यह आंकड़ा मुंबई के पैरेंट्स के लिए बड़ा मौका है।

    आवेदन की तारीख और वेबसाइट

    RTE 25% ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया:

    • शुरूआत: 17 फरवरी 2026
    • आखिरी तारीख: 10 मार्च 2026
    • ऑफिशियल वेबसाइट: https://student.maharashtra.gov.in

    माता-पिता को तय समय सीमा के अंदर फॉर्म भरना अनिवार्य है।

    किन क्लास में मिलेगा एडमिशन?

    RTE के तहत एडमिशन:

    • पहली कक्षा (Class 1)
    • पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary)

    इच्छुक पालकों को पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।

    जरूरी दस्तावेज क्या-क्या लगेंगे?

    ऑनलाइन आवेदन करते समय जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करना अनिवार्य है। साथ ही प्रवेश के समय मूल और सत्यापित कॉपी तैयार रखनी होगी।

    संभावित जरूरी दस्तावेज:

    • जन्म प्रमाण पत्र
    • निवास प्रमाण पत्र
    • आय प्रमाण पत्र
    • आधार कार्ड
    • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
    • पासपोर्ट साइज फोटो

    1 किलोमीटर के दायरे में ही दिखेंगी स्कूलें

    RTE पोर्टल पर पालकों को उनके घर से 1 किलोमीटर या उससे कम दूरी वाली स्कूलें दिखाई देंगी। इसलिए आवेदन करते समय सही पता भरना बेहद जरूरी है।

    10 स्कूलों का चयन सोच-समझकर करें

    ऑनलाइन फॉर्म भरते समय:

    • अधिकतम 10 स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं
    • पहले से RTE के तहत एडमिशन ले चुके बच्चे दोबारा आवेदन नहीं कर सकते
    • आवेदन प्रक्रिया के बाद ऑनलाइन लॉटरी (सोडत) की तारीख घोषित की जाएगी

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. RTE 25% एडमिशन 2026 की आखिरी तारीख क्या है?

    10 मार्च 2026 आवेदन की अंतिम तारीख है।

    Q2. आवेदन कहां करना होगा?

    ऑफिशियल वेबसाइट https://student.maharashtra.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

    Q3. कितनी सीटें उपलब्ध हैं?

    मुंबई में कुल 5,939 सीटें उपलब्ध हैं।

    Q4. क्या सभी निजी स्कूल इसमें शामिल हैं?

    केवल स्वयं अर्थसहाय्यित और बिना अनुदानित (अल्पसंख्यक स्कूल छोड़कर) स्कूल शामिल हैं।

    Q5. क्या दोबारा RTE से एडमिशन मिल सकता है?

    नहीं। पहले से RTE के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चे दोबारा आवेदन नहीं कर सकते।