सुरेंद्र राजभर मुंबई- कमाल की बात है। 15 दिनों में 54000 गड्ढे भरना। किसी अजूबे से कम नहीं है। मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि उसने मात्र 15 दिनों में ही महानगर के तीन एक्सप्रेस हाईवे सहित कुल 54000 गड्ढे भर दिए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने दावे किए थे कि मानसून के पूर्व ही उसने पहले ही छः हजार गड्ढे भर दिए थे।
ऐसे में बृहन्मुंबई महानगर पालिका का दावा है, कि इससे अब कम गड्ढे पड़ेंगे लेकिन 54 हजार छोटे बड़े गड्ढे उभरना सारे दावे की पोल खोल देते हैं। मनपा यह भी दावा करती है, कि इस बार उसने जनता की शिकायतों का इंतजार नहीं किया। यानी वह कहना चाहती है, कि “अब मुंबईकरों को शिकायत कर जगाने की जरूरत ही नहीं है।” यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बिना मुंबईकरों के जगाए जागती नहीं थी। सोई रहती थी। इस बार नींद से अपने आप जाग गई। सौ बार शिकायतें करने के बाद भी सोई रहने वाली बृहन्मुंबई महानगर पालिका प्रशासन अब जगाए जाने का इंतजार नहीं की। खुद जग गई और रिकार्ड समय में 54000 हजार गड्ढे भर कर मुंबईकरों पर एहसान कर दिया।
Indian fasttrack newsरास्तों की मरम्मत करते मनपा अधिकारी की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
क्या है सवाल..? बृहन्मुंबई महानगर पालिका
इतनी जल्दी और भारी मात्रा में गड्ढे भरने के दावे पर भी सवाल उठेंगे ही। जैसा कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका बहाना करती है, कि भारी वर्षा और ट्रैफिक के कारण गड्ढे भारी मात्रा में पड़ते हैं। तो सवाल यह है कि आरसीसी (RCC) की सड़कों में भी गड्ढे क्यों पड़ते हैं? साधारण सी बात है डांबर का शत्रु है पानी और जल भराव से गड्ढे पड़ेंगे ही, लेकिन सड़क बनाने की विधि में प्लास्टिक के उपयोग तक विज्ञान पहुंच गया है। लेकिन मनपा अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग क्यों नहीं करती। हर बार वही गिट्टी डालकर कोरम पूर्ति करना क्या उचित है? चलो इस बार शायद चुनावी वर्ष में बृहन्मुंबई महानगर पालिका अपने आप जागी।मुंबईकरों को जगाना नहीं पड़ा। इसके लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका बधाई की पात्र है।
महाराष्ट्र पुलिस का ढुलमुल रवैया, कई घर उध्वस्त की कगार पर
लोटस, यूनिक व इलेवन डॉट, खेलो इंडिया खेलो लाॅटरी से महाराष्ट्र राज्य और केंद्र के जीएसटी की खुली लूट..
सुरेंद्र राजभर मुंबई- भारत में डिजिटल क्रांति का दौर विकसित होता जा रहा है और हम तेजी से इस तकनीक का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में कर रहे हैं तथा यह तकनीक सर्वसामान्य जनों के लिए वरदान साबित हो रही है। किंतु इसी तकनीक का उपयोग असामाजिक तत्व धड़ल्ले से कर न सिर्फ आम जनता को ठग रहे हैं, बल्कि सरकार को भी हर महीने करोड़ों के राजस्व का आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।
सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लोटस, यूनिक व इलेवन डॉट, खेलो इंडिया खेलो लाॅटरी द्वारा राजस्व की खुलेआम लूट का गोरखधन्धा मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी चल रहा है। जहां धड़ल्ले से लाटरी माफिया प्रतिबंधित राजश्री लॉटरी के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाते आ रहे हैं। लेकिन सरकारी नियमों को ताख़ पर रखकर कुछ भ्रष्ट नौकरशाह कतिपय भ्रष्ट लोगों के सहारे लाटरी माफिया, सायबर उपकरणों का उपयोग कर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
Indian fasttrack newsअवैध लॉटरी कारोबार की ताजा तस्वीर
राजस्व की लूट, गलता समाज पैसे बटोरते कारोबारी
बतादें कि महाराष्ट्र राज्य में राजश्री लाटरी पर प्रतिबंध है, लेकिन बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है। लाटरी माफिया सरकार को करोड़ों का चूना रोज लगा रहे हैं। क्योंकि एक तो यह प्रतिबंधित है और दूसरा फर्जी ऐप का उपयोग कर धड़ल्ले से इसे चलाया जा रहा है। लाटरी व्यवसायी और लॉटरी माफिया सरकार को कोई भी जीएसटी या टैक्स नहीं भरते हैं, जिसकी वजह से सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। सबसे बड़ी बात यह है की इस पूरे खेल मे लॉटरी माफियाओं के साथ कहीं न कहीं सरकारी महकमे के कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी शामिल हैं। इसलिये कोई कार्रवाई नहीं होती है। अवैध लॉटरी का गैरकानूनी व्यवसाय जोरों से फल-फूल रहा है।उपलब्ध विवरणों के अनुसार अवैध लाटरी का यह व्यवसाय वैसे तो मुंबई सिटी और महाराष्ट्र के हर प्रमुख शहर में शुरू है लेकिन हमने, जब जांच पड़ताल की तो देखा कि लॉटरी माफिया मुंबई के झुग्गी बस्तियों को टारगेट कर अपने काले साम्राज्य की नींव खड़ी कर अपने गैरकानूनी कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। मलाड पश्चिम के मालवानी इलाके में लगभग 20 से अधिक लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। ठीक वैसे ही कांदिवली पूर्व समता नगर पुलिस थाने के अंतर्गत लगभग 40 से 45 लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। चारकोप पुलिस थाना अंतर्गत कुछ दिनों पहले मुंबई पुलिस की समाज सेवा शाखा ने प्रतिबंधित लॉटरी के कारोबार पर कार्यवाही की थी अब कुछ दिनों बाद यहां पर फिर से चोरी चुपके लॉटरी का गोरख धंधा चालू कर दिया गया है।
जबकि कांदिवली पुलिस थाने अंतर्गत लगभग 10 से 12 लॉटरी सेंटर चलाए जा रहे हैं। गोरेगांव पूर्व एसवी रोड पर तो खुले आम लॉटरी का धंधा चलाया जा रहा है यहां सबसे ज्यादा लॉटरी सेंटर चलाने का मामला सामने आया है। मुंबई के अंधेरी से लेकर दहिसर तक के बीच कुकुरमुत्ते की तरह अवैध लॉटरी का सेंटर खोलकर सरकार को हर 15 मिनट के भीतर करोड़ों का चुना लगाया जा रहा है। मुलुंड परिसर में जब पता करने की कोशिश की तो वहां बाहर राजश्री लॉटरी का बोर्ड लगा मिला और अंदर लकी कूपन लॉटरी का साफ्टवेयर लगाया गया है, जो राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त राजश्री लॉटरी की नकल है। ऐसा देखने को मिला है कि 2016 में जीएसटी लागू होने के बाद कई लॉटरी कंपनियों में ताले लग गए थे। राजश्री लॉटरी भी उन्ही में शामिल रही है।
मुंबई के उपनगरों में विशेष कर अंधेरी से दहिसर तक के सभी उपनगरों में बोगस ऑनलाइन लॉटरी जो राज्य द्वारा संचालित लॉटरी की नकल कर के अन्य नामों से चलाई जा रही है। सरकारी नियमों के अनुसार ऑनलाइन लॉटरी पर 28% जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है। किंतु इस अवैध कारोबार पर ना तो जीएसटी का भुगतान किया जाता है और ना ही सरकारी अनुमति ली जाती हैं। सरकारी खजाने में सेंध लगाने का काम ऑनलाइन लॉटरी से हो रहा है। अवैध ऑनलाइन लॉटरी पर एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाता है। ऑपरेटिंग के लिए इंजीनियर को हर महीने तनख्वाह दी जाती है। अवैध सॉफ्टवेयर के हर शख्स को फ्रेंचाइजी दी जाती है। यह पूरा मामला टैक्स चोरी का है। ऐसे अवैध सॉफ्टवेयर पर ना तो साइबर की नजर पड़ती है ना ही जीएसटी अधिकारियों को कोई पता चल पाता है।यह भी बताया जाता है कि लॉटरी को रोजाना हजारों लोग खेलते हैं। यही कारण है, कि इसमें लगने वाला पैसा भी लाखों में होता है। इसी बात का फायदा उठाकर फर्जी लॉटरी एप्लीकेशन के माध्यम से गरीब जनता को अमीर बनने का झांसा देकर लाखों रुपए की हेराफेरी की जाती है। इस लॉटरी में 15 मिनट के भीतर विजेता के नाम की घोषणा हो जाती है और राज्य या केंद्र सरकार को कोई कर अदा नहीं किया जाता है। इस गैर कानूनी तरीके से चल रहे इस पूरे व्यवसाय में पैसे का जो लेनदेन कैश में किया जाता है। जिससे काली कमाई का हिसाब सरकार को नहीं देना पड़ता है।ध्यान देने योग्य है, कि साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि राजश्री कंपनी महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी से अपना लॉटरी बेचने का काम कर रही थी। वह फिलहाल बंद है। राजश्री लॉटरी बंद होने के बाद उसके डिस्ट्रीब्यूटरों ने मिलकर अपने कई ऐसी दुकानों की शुरुआत की है। सभी ने एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है जिसके द्वारा लाॅटरी माफिया कुछ भी धोखाधड़ी कर सकते हैं।
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लोगों का कहना है, कि ऐसे मामले पर पुलिस ही नहीं बल्कि जीएसटी के इंटेलिजेंस विंग को भी जांच करनी चाहिए।। जहां-जहां ऐसे सॉफ्टवेयर के नाम का यूज कर लॉटरी का कारोबार किया जा रहा है ऐसे जगहों पर उन्हें काफी सारा डाटा मिल सकता है। उनके सर्वर पर कितने टिकट का लेनदेन हुआ है और कितने का उन्होंने अब तक व्यापार किया है।इसकी पूरी जानकारी इनके साफ्टवेयर पर उपलब्ध होगी। गैंबलिंग एक्ट, फोर्जरी, 420, और जीएसटी के विभिन्न धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई। किंतु राज्य सरकार इन लाॅटरी माफियाओं के विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नही कर पा रही है? इसकी चर्चा पूरे मुंबई में चर्चा का विषय बनी हुई है ।
आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल।
नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- गोरेगांव पी/ दक्षिण वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हें किसी भी तरह का भय नहीं। चाहे जितना न्यूज लिखे, आरटीआई डाली जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती।
फरियाद तो सुने मनपा आयुक्त ..
खुद ही बांधकाम कराते हैं। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नहीं बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है।
नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण।
ताजा मामला गोरेगांव (पूर्व) शौर्य कंपाउंड, नियर बंजारा पाड़ा, इन बिटवीन शेटेलाइट गार्डन फेस -।।, अरुण कुमार वैद्य मार्ग, का है।जहां गैरकानूनी ढंग से 6000 चौरस फूट के जी + १ (दो मंजिला) के व्यापारिक गाले का निर्माण बना लिया जिसकी एवज में कथित रूप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिससे वार्ड ऑफिसर(प्रभारी) राजेश आक्रे, उपायुक्त विश्वास शंकरवार ने आपस में बांट लिया। दिखाने के लिए 354 (ए) की नोटिस दे दिया। बता दे कि मनपा अधिनियम 1888 के तहत 354 (ए) कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई जरूरी है। लेकिन अवैध व्यापारिक गाले का बांधकाम जी+१ (दो मंजिला) कुल 6000 वर्गफुट का गैरकानूनी निर्माण करने वाले ठेकेदार आशिफ फतेह मोहम्मद खान को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े।
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सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए। मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है की पी/ दक्षिण वार्ड के सभी बड़े अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई करें अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा।
आयुक्त के आदेश के बावजूद पी/दक्षिण के अधिकारियों द्वारा स्टूडियोज को नही हटाकर दे रहे हैं अर्हपूर्ण संरक्षण।
रिश्वत की ताल पर नाच रहा, मनपा का पी/दक्षिण विभाग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- बॉलीवुड फिल्मों व सीरियलों की शूटिंग हेतु बृहन्मुंबई महानगर पालिका के पी/दक्षिण वार्ड के कार्यक्षेत्र में बनाए गए अस्थाई स्टूडियो के मालिकों ने मनपा द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत भी पी/ दक्षिण वार्ड के जिम्मेदार अधिकारियों से अर्थपूर्ण सेटिंग कर निःसंकोच चलाए जा रहे हैं। जबकि मनपा ने उन्हें तत्काल हटाने की नोटिस महीनो पहले जारी कर दी थी। मगर मनपा अधिकारियों की आदत के अनुसार उक्त तीन स्टूडियोज को अर्थपूर्ण संरक्षण देकर न ही तोड़क कार्रवाई की गई है और ना ही स्टूडियो मालिकों के विरुद्ध भूमि पर अतिक्रमण करने का अपराध मनपा प्रशासन द्वारा कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) आरे कॉलोनी, रॉयल पॉम हॉटल के पास रूबी बिल्डिंग के पीछे स्थित मनपा द्वारा शूटिंग के लिए तीन स्टूडियो बनाने की अस्थायी परमिशन ली गई थी, जो काफी पहले ही मनपा आयुक्त द्वारा रद्द कर दी गई थी। तीनों में प्रत्येक स्टूडियो 20, हजार वर्गफिट क्षेत्र पर बनाया गया है। प्रत्येक स्टूडियो का मासिक भाड़ा 90 लाख रुपए है, जिसे परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत अब निजी तौर पर मनपा के अधिकारियों द्वारा वसूला जाता है, जो मनपा के कोष में नहीं जाता है। ऐसा मनपा सूत्रों ने बताया है।
Indian fasttrack newsमनपा पी/दक्षिण विभाग के भ्रष्टाचार की तस्वीर
रिश्वत का खेल क्या कहता है?
उक्त संबंध में मनपा के सहाय्यक आयुक्त राजेश आक्रे, परिमंडल -4 के उपायुक्त (डीएमसी) विश्वास शंकरवार पत्रकारों व शिकायत कर्ताओं को बताने या लिखित जवाब देने में टालमटोल करते हैं। इसकी शिकायत एक शिकायत कर्ता द्वारा दिनांक:13/06/2023 को किए जाने के बाद मनपा पी/दक्षिण के सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहाय्यक अभियंता ने एक पत्रक क्र.सआ पीद/ बी -53/7855 के माध्यम से शिकायतकर्ता को बतलाया है, कि आयुक्त के आदेश के साथ ही साथ दो स्टूडियो के मालिकों ने अदालत से स्टे – ऑर्डर ले लिया है।
बताया जा रहा है, कि मनपा प्रशासन द्वारा मनपा के विधि विभाग को स्टे-ऑर्डर शीघ्र हटवाने का आदेश दिया था। किंतु विधि विभाग (legal department) की कार्रवाई का कोई भी ले आउट नही आया है। यह भी बताया गया है, कि स्टूडियो की परमिशन रद्द किए जाने के बाद से ही स्टूडियो का भाड़ा आधिकारिक तौर पर नही वसूला जाता हैं। यानि कि 90 लाख × 3 = 2,70,00,000 (दो करोड़ 70 लाख मात्र) का भाड़ा, क्या मनपा के कोष में जमा किया जा रहा है? या मनपा के प्रशासनिक अधिकारियों की जेब में पहुंच रहा है? यह सवाल सर्व जागरूक नागरिकों का है। जिसका जवाब देने में मनपा अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं।
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जबकि आयुक्त द्वारा परमिशन रद्द किए जाने के उपरांत सभी स्टूडियोज को हटवा देना या डिमोलिशन कर देना चाहिए था। दो स्टूडियोज का स्टे – ऑर्डर जनहित के परिप्रेक्ष्य में निश्चित ही, मा. न्यायालय द्वारा हटा दिया गया होता, यदि मनपा प्रशासन विधिवत अपना पक्ष प्रस्तुत किया होता? किंतु मनपा पी/दक्षिण के अधिकारियों को तो प्रतिमाह 4 करोड़ 50 लाख की मलाई चाभनी थी ! शिकायत कर्ताओं ने भी स्टूडियो और मालिको व भ्रष्ट मनपा अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय जाने का मन बनाया है।
आर/दक्षिण विभाग के सक्षम अधिकारी है भ्रष्टाचार में लिप्त।
कर रहें हैं मोटी कमाई…
अवैध निर्माण को दे रहें हैं संरक्षण..
उड़ रही मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां..
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र सरकार के मुखिया ने आदेश दिया है, कि मुंबई में अब और अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए। झोपड़ों की भरमार से जीवनोपयोगी सुविधाओं से मुंबईकर वंचित होते हैं। किंतु कौन सुनता – मानता है मुख्यमंत्री का आदेश? भ्रष्ट मनपा अधिकारी दौलत कमाने के लिए अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे है और उसके बदले हो रही लाखों रुपयों की वसूली। जी हां!आइए चन्द गैरकानूनी बांधकाम का जायजा लेते हैं।
हम कांदिवली (पूर्व) आकुर्ली रोड़ स्थित गोविंद सेठ चाल, जूना खदान, अटल बिहारी वाजपेई हॉल के पास, वडार पाड़ा रोड क्रमांक -१, वार्ड क्रमांक २९, में विगत कई वर्षों से रिक्त पड़े भूखंड (open plot) पर ४ रूम का अवैध बांधकाम हो रहा है। बताया जा रहा है, कि उक्त अवैध बांधकाम को दो बार तोड़ा जा चुका है। किसी तरह की घाही नहीं दिख पड़ती आश्वस्त से लग रहें मजदूर मिस्त्री और भूमाफिया। उसने बताया कि लाखों रुपए गैरकानूनी बांधकाम करने की एवज में आर/दक्षिण वार्ड को वे दे चुके हैं।
Indian fasttrack newsभ्रष्ट अधिकारियों की फाइल तस्वीर
दुसरा है कांदिवली (पश्चिम) देवबाई चाल, कांदिवली गांवठान, कांदिवली गांवठन रोड स्थित रिक्त भूखंड (open plot) पर ५ मकान के आवासीय परिसर का गैरकानूनी निर्माण कार्य बिना किसी वैध अनुमति के इमारत विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से किया जा रहा है। स्थानीय जनता की माने तो सहाय्यक अभियंता प्रमोद ब्राम्हणकर स्वंय इस गैरकानूनी बांधकाम को पहले होने दिया। अब ऐसे में ५ (पांच) मकान के आवासीय परिसर का जमीनी सतह से पूर्ण हो चुके बांधकाम को दिनांक: 24/05/2023 को 354(A) की नोटिस जारी कर अभियंता ने स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त होने का अपना परिचय दिया है।
नोटिस देकर तीन महीने हो गए हैं, लेकिन कार्रवाई जीरो! जरा रुको गैरकानूनी बांधकाम का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 354(A) की नोटिस के तुरंत बाद ही ठीक उसी बांधकाम को ग्राउंड +1 (दो मंजिला) के शक्ल में गैरकानूनी निर्माण कार्य को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। ताकि नोटिस धारक उक्त नोटिस के आधार पर बकायदा कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने में सफल हो सके और वह बड़ी आसानी से कोर्ट का स्टे ऑर्डर ला सके। यहां भी वही कहानी दोहराई गई।
तीसरा है कांदिवली (पश्चिम) ईरानी वाड़ी,रोड नंबर – ४, नियर शिवशंभु मंदिर स्थित रामनारायण पांडे चाल में रिक्त भूखंड (open plot) पर 200 वर्गफिट के अंतर्गत एक व्यापारिक गाले का गैर कानूनी तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस गैरकानूनी बांधकाम का ठेकेदार है अजय पांडे। जिसके चेहरे पर जंग जीतने की खुशी झलक रही है। सहाय्यक अभियंता ने बताया कि परिमंडल -७ की उपायुक्त, भाग्यश्री कापसे बेहद प्रभावशाली महिला अधिकारी है। जिनका संबंध राज्य के नेताओं से है। उनका संरक्षण भी। यह भी ज्ञात हुआ कि अपने पद और पॉवर का नाजायज फायदा उठाते हुए मैडम ने सहाय्यक आयुक्त ललित तलेकर, डीओ अभय जगताप पर दबाव बनाकर गैरकानूनी बांधकाम कराती और संरक्षण देती हैं। लाखों में खेलती है।
Live video on Indian fasttrack news channelकांदिवली के अवैध निर्माण की तस्वीर
राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अपील ..
इस काले कारोबार में सहाय्यक आयुक्त और डीओ लिप्त है। ये दोनो भी भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद भी मालामाल हो रहे हैं। अब ऐसे में ठेकेदार और अवैध निर्माण कर्ता, भूमाफिया मूंछों पर ताव देते हुए कहता है, कि यहां का वार्ड और नेता उसके साथ है कोई कितनी भी कंप्लेंन करें! मेरा कुछ भी नही उखड़ेगा। वाह मानना होगा गैरकानूनी बांधकाम करने वाले ठेकेदार और भूमाफिया की हेकड़ी को जिसके सामने आर/दक्षिण, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारी या तो विवश है या उनकी जेबें गर्म हो चुकी हैं। राज्य के मुखिया से हमारी मांग है कि निष्पक्ष पारदर्शी जांच पूरे मुंबई शहर में कराएं। अवैध बांधकाम की सूची बनवाएं। अवैध निर्माण तोड़ने, उसका वीडियो बनवाकर शिकायत कर्ताओं को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। साथ ही भूमाफियाओं और ठेकेदारों को कानूनी ढंग से दंडित करने की पहल करें।
वी बी माणिक कल्याण– पिछले वर्ष नवंबर 2022 में मध्यरेल के सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ का एक फर्जी लोकोपायलट उमाशंकर बर्मा उर्फ नटवरलाल को कोलसे वाड़ी पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और अन्य धाराओं के तहत गिफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस केस की जाँच उपनिरीक्षक सचिन सालवी को दिया गया था। (Indian fasttrack)
इस केस के सिलसिले में आपको जानकारी देते हुए बता दें कि सालवी ने नटवरलाल से मिलकर केस को पूरी तरह बिगाड़ दिया और चार्जशीट भी 60 दिनों में कोर्ट में नही डाला। जिसके कारण नटवरलाल को कोर्ट से डिफॉल्ट जामिन मिल गया। उसके बाद नटवरलाल का आतंक फिर से बढ़ गया और नटवरलाल के विरुद्ध कुर्ला में शिकायत भी दर्ज हो गयी। वही दूसरी ओर कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक देशमुख ने इसकी रिपोर्ट डीसीपी सचिन गुंजाल से कर दिया।
पुलिस उपायुक्त सचिन गुंजाल ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक सालवी को वहाँ से हटाकर कंट्रोल रूम में तबादला कर दिया। आपको यह भी बता दें कि उपनिरीक्षक सचिन सालवी को बात करने की तमीज नही है। अपराध को खत्म करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम करता है। आरोपियों के जरिए आम नागरिकों को अपने नाम से धमकी भी दिलवाता है। कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में इसकी काफी शिकायत है। फोन करने पर कल अधिकारी फोन ही नही उठाते ये बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। अब लोग ठग नटवरलाल से निजात पाने के लिए पुलिस पर भरोसा किया। लेकिन आम नागरिकों के भरोसे पर पानी फिर गया। क्योंकि सचिन सालवी जैसे भ्र्ष्ट ऑफिसर के हाथ मे ये केस चला गया।
जहरीला दूध : महाराष्ट्र सरकार को जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी की परवाह ही नहीं। सच तो यह है कि सरकारी मशीनरी फेल हो चुकी है। सरकारी उपेक्षा, उदासीनता और अकर्यमण्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र राज्य में खेतिहरों (किसानों) और पशुपालकों द्वारा मात्र 14 हजार करोड़ लीटर दूध उत्पादित किया जाता है, लेकिन बिक्री है 64 हजार करोड़ लीटर। सरकार को बताना चाहिए कि उत्पादन के अलावां 50 हजार करोड़ लीटर दूध आता कहां से है? सरकार बताए कि ये पचास हजार करोड़ लीटर अधिक दूध कैसे बनता है? यूरिया से या दूसरे केमिकल से? यह नकली जहरीला दूध बनाने वाले कौन हैं? (जहरीला दूध)
क्या सरकार ने इन्हें नकली जहरीला दूध बनाने का लाइसेंस दिया है? स्वास्थ्य मंत्रालय, कृषि पशुधन मंत्रालय कहां सोया है? क्या सांख्यिकी का ज्ञान है? क्या मार्केट में मिलने वाले दूध के असली नकली होने की जांच व्यवस्था सरकार ने की है? यदि की है तो फिर बाजार में पचास हजार करोड़ लीटर जहरीला दूध कैसे बेचा जाता है? क्या सरकार का दायित्व नहीं है, कि केमिकल से बने जहरीले दूध निर्माता लोगों का पता है सरकार को। सच तो यह है कि महाराष्ट्र सरकार को जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी की परवाह ही नहीं है। सच तो यह है कि सरकारी मशीनरी फेल हो चुकी है। सरकारी उपेक्षा, उदासीनता और अकर्यमण्यता का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है। (जहरीला दूध)
ऐसा नहीं है कि सरकार और राज्य के 288 खासदारों (सांसद) को यह तथ्य मालूम नहीं है लेकिन कोई बोलता ही नहीं। सब चुप हैं। विषैले दूध से जनता बीमार पड़ रही है। जो दूध स्वास्थ्य वर्धक होता है वही दूध जहरीला बेचकर जनता को मारा जा रहा है। (जहरीला दूध) महाराष्ट्र राज्य सरकार के मानसून सत्र मे यह जहरीले दूध बनाने और बेचने का मामला अकेले उठाने वाले माननीय विधायक एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू जी ही हैं। अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता लेकिन अकेला आइना असली सूरत तो दिखा सकता है। माननीय विधायक बच्चू कडू जी को कोटि कोटि बधाई। (जहरीला दूध)
घटिया सड़क निर्माण की भी उत्तम जांच रिपोर्ट लगाता है दुय्यम अभियंता अमोल जाधव।
दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के कार्यो की जांच कराने की मांग।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- यदि जलवाहिनी में मध्य रास्ते पर सुराख हो तो उससे पानी बहकर जाया हो जाता है। तथा गंतव्य तक उतना पानी नहीं पहुंच पाता, जितना की उद्धिस्ट होता है। यही दृष्टांत शत प्रतिशत लागू होता है। मनपा आर/दक्षिण में दुय्यम अभियंता के रूप में कार्यरत अमोल जाधव का, जो मनपा के परिरक्षण (maintenence) हेतु जारी की गई निधि को उद्दिष्ट कार्य में नहीं पहुंचने देते और जलवाहीनी के सुराख की भांति निधि को निजी स्वार्थों के चलते ठेकेदारों की मदद से बंदरबाट कर लेते हैं।
अभियंता अमोल जाधव का कारनामा ..
ऐसी जानकारी संवाददाता को दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के प्रिय ठेकेदार ने दूरभाष पर प्रदान की है। बताया गया है, कि दुय्यम अभियंता अमोल जाधव मनपा आर/दक्षिण के परिरक्षण विभाग में कार्यरत हैं। तथा वे ठेकेदारों के प्रिय पात्र है, क्योंकि वह ठेकेदारों को खाने और खिलाने की भरपूर सुविधा देते हैं, कि उनकी इच्छानुसार काम का परसेंटेज व जारी की गई निधि के आधार पर तय रहती है।अब ठेकेदार काम घटिया करे या बढ़िया, किंतु उसे जारी की गई धनराशि तत्काल मिल जाती है।
Indian fasttrack newsसब- इंजीनियर अमोल जाधव की फाइल तस्वीर
यही कारण है कि दोगुनी काली कमाई करने के लिए सड़कों के दुरुस्तीकरण के निर्माण में या गड्ढों को भरने के लिए घटिया कांक्रीट, तारकोल (डांबर) या सीमेंट का उपयोग करते हैं ताकि सड़क की लागत से अधिकतम धनराशि बचाई जा सके।भले ही सड़क का निर्माण एक तरफ से पूरा हो और दूसरी तरफ पुनः टूटना – फूटना शुरू हो जाय,किंतु दुय्यम अभियंता अमोल जाधव घटिया सड़क के निर्माण की भी गलत रिपोर्ट लगा देता है और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाता है।
ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पूर्व भ्रष्टाचार के आरोप में इसके खिलाफ अपराधिक मामला भी दर्ज हुआ है और वर्तमान में वह जमानत पर रिहा किया गया है और अपनी ड्यूटी पर आर/दक्षिण विभाग में कार्यरत हैं।ठेकेदारों को ठेके का टेंडर दिलवाने में अमोल जाधव काफी मदद करता है, इसीलिए उसे मनपा कर्मियों द्वारा सड़क इंजीनियर भी कहा जाता है। उसकी देखरेख में बनाई गई सड़के, बनाए जाने के साथ ही टूटने – फूटने व ऊबड़ खाबड़ होने लगती हैं। दुय्यम अभियंता अमोल जाधव के भ्रष्ट कारनामों की जांच कराकर उसके द्वारा सड़क निर्माणों में किए गए भ्रष्टाचारों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई किए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने मनपा के शीर्ष अधिकारियों से की है।
सूचना-प्रसारण विभाग के आदेश के बावजूद भी नहीं लगाए सीसीटीवी कैमरे।
भ्रष्टाचार के आरोप पर महापालिका आयुक्त का कार्यवाही को लेकर आश्वासन।
इस्माईल शेख मिराभायंदर- महापालिका प्रभाग क्रमांक 6 की कार्यालय, इमारत में सी. सी. टी.वी. कैमरे लगाये जाने के राज्य सरकार द्वारा दिनांक 4 मार्च 2013 को ही जारी निर्देश के उपरांत भी मिराभायंदर महापालिका अधिकारियों ने सरकारी प्रभाग क्रमांक 6 के कार्यालय की इमारत में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए। इसे महापालिका अधिकारियों की मनमानी कार्यप्रणाली माना जा रहा है। ऐसी शिकायत एक स्थानीय पत्रकार ने की है।
आपको राज्य सरकार द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, बता दें, कि इसी तरह का आदेश पूणे नगर महापालिका एवं अन्य नगर पालिकाओं को भी निर्देश दिए गए हैं जहां कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। शिकायत में कहा गया है, कि मिराभायंदर महापालिका अंतर्गत प्रभाग क्रमांक 6 में नया कार्यालय करदाताओं के पैसे से बनाया गया है, यहां सरकारी परिपत्र के अनुसार, सरकारी कार्यालय में सीसीटीवी लगाया जाना चाहिए। जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। पिछले 6 महीनों से यहां सरकारी दफ्तर मैं अधिकारी एवं कर्मचारी काम तो कर रहे हैं। लेकिन सीसीटीवी कैमरा लगाने को लेकर इन्हें कुछ खास रुझान नहीं दिखाई पड़ रहा है।
Indian fasttrack newsमहाराष्ट्र राज्य परिपत्र एवं महापालिका को दी गई शिकायत पत्र की तस्वीर
मिराभयंदर महापालिका का भ्रष्टाचार..
महाराष्ट्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने 4 मार्च 2013 को सीसीटीवी कैमरा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए एक परिपत्र जारी किया है। उक्त परिपत्र के अनुसार सभी सरकारी कार्यालयों को इन निर्देशों के अनुसार कार्य करने का आदेश दिया गया है। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में सी. सी.टी.वी कैमरे आईपी बेस होने के लिए बाध्य किया गया है। जो भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए अति आवश्यक माना गया है। आपको जानकारी देते हुए बता दें, कि मीरा रोड के मुंबई एक्सप्रेस हाईवे पर काशीमीरा पुलिस स्टेशन के बगल में मीरा भयंदर महापालिका प्रभाग क्रमांक 6 का नया कार्यालय की इमारत पिछले 6 महीनों से शुरू कर दिया गया है।
मुंबई वॉच अखबार के संपादक एवं पत्रकार प्रमोद देठे ने मीरा भयंदर महापालिका आयुक्त दिलीप ढ़ोले साहब को एक पत्र देकर इस विषय पर संबंधित कांट्रैक्टर अधिकारी एवं कर्मचारी के खिलाफ जांच के साथ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस मौके पर कहा, कि “शासनादेश का उल्लंघन करने वाले संबंधित विभाग के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए और जिम्मेदार ठेकेदारों, नगर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।” मौके पर महापालिका आयुक्त दिलीप ढ़ोले साहब ने कार्यवाही का एवं जल्द से जल्द सीसीटीवी कैमरे लगवाने का आश्वासन दिया।
उपायुक्त विश्वास शंकरवार की लापरवाही से मिल रहा अवैध निर्माणों को अभयदान।
डीओ. राजन प्रभु, वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने आपस में बांट लिया। Malad BMC
सुरेंद्र राजभर मुंबई- मालाड, पी/नॉर्थ वार्ड को सर्वाधिक भ्रष्टाचारी होने का तमगा दिया जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। इस वार्ड के सभी आला अफसर भ्रष्टाचार के पंक में पूरी तरह डूबे हैं। इन्हे किसी भी तरह का भय नही। चाहे जितनी न्यूज प्रकाशित की जाए। इनकी कानों में जूं नहीं रेंगती। खुद ही बांधकाम कराते है। तोड़ने की नोटिस भेजते हैं और फिर नोटिस के संदर्भ में स्पीकिंग ऑर्डर देकर गैरकानूनी निर्माण कर्ता से लाखों रुपए वसूलकर उसे स्टे आर्डर लेने की सलाह देते हैं और कोर्ट में बीएमसी विधि विभाग के अधिकारी वकील मौन साध लेता है। स्टे के खिलाफ नही बोलता, जिससे तुरंत ही गैरकानूनी बांधकाम करने वाले को कोर्ट से स्टे मिल जाता है। (BMC, अभयदान)
Indian fasttrack newsअवैध निर्माण को दिया गया नोटिस और डिओ. राजन प्रभु के साथ मालाड पी/उत्तर विभाग सहायक आयुक्त किरण दिघावकर की तस्वीर
अवैध निर्माणों को अभयदान.. BMC.
ताजा मामला मालाड (पश्चिम) गेट नंबर -३, रूम नंबर – ५२४, अब्दुल हमीद रोड, मुंबई -९५ का है। जहां गैरकानूनी ढंग से २००० चौरस फूट के ग्राउंड+२ (तीन मंजिला) के व्यापारिक गालों का निर्माण बना लिया, जिसकी एवज में कथित रुप से लाखों की रिश्वत दी गई। जिसे डीओ. राजन प्रभु, वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर ने आपस में बांट लिया है। इस तरह की बयानबाजी मनपा गलियारों से आ रही है। जिसकी वजह से उक्त अवैध निर्माण पर किसी प्रकार की कार्यवाही का न होना ही इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। (BMC, अभयदान)
वहीं देखा जाय तो परिमंडल – ४ के उपायुक्त विश्वास शंकरवार को मिली शिकायतों पर बरती जा रही लापरवाही भी अवैध निर्माणों के लिए अभयदान साबित हो रही है। दिखाने के लिए ३५४(ए) की नोटिस भेज दिया। जिसके नोटिस की संदर्भ संख्या १७०७१२ है। फिर गैरकानूनी निर्माण करने वाले को बुलाकर कोर्ट से स्टे लेने को कहा। बात बढ़े नही, भ्रष्टाचार का खुलासा न हो, इसके लिए अभियंता को जबरन छुट्टी पर भेज दिया। (BMC, अभयदान)
बता दें, कि मनपा अधिनियम १८८८ के तहत ३५४(ए) की नोटिस देने के २४ घंटे के भीतर तोड़क कार्रवाई करने का जरूरी प्रावधान है लेकिन अवैध व्यापारिक गालों का बांधकाम ग्राउंड+२(तीन मंजिला) कुल २००० चौरस फूट का निर्माण कराने वाले अवैध निर्माण कर्ता को तुरंत कोर्ट से स्टे लेने की मौखिक सलाह दी, ताकि तोड़क कार्रवाई न करनी पड़े। “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” यानी तोड़क कार्रवाई न होने से गैरकानूनी निर्माण बच जाए। (BMC, अभयदान)
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बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) आयुक्त (Commissioner) इकबाल सिंह चहल से हमारी मांग है, कि पी/नॉर्थ, वार्ड (P/North, ward) के सभी आला अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर कर इनके भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच पारदर्शी तरीके से कराकर आरोप तय कर दंडात्मक कार्रवाई कराए अन्यथा आपकी साख पर भी बट्टा लगेगा। (BMC, अभयदान)