Category: Corruption

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  • Indian Railway: अनाड़ी बना खिलाड़ी

    Indian Railway: अनाड़ी बना खिलाड़ी

    Indian Railway के मुंबई मंडल में अनाड़ी अनिल जैन मध्यरेल का खिलाड़ी वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी बना हुआ है। इन्हें पीआर ऑफिसर के कामकाज का कुछ भी ज्ञान नहीं है। या करना नहीं चाहता कुछ पता नहीं।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    मध्यरेल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी अनिल जैन जब से मुंबई में जनसंपर्क विभाग में आये है। तब से आज तक एक भी प्रेस नोट नही बना सके और न ही इनको ज्ञान है। ये पूरी तरह अनाड़ी और अज्ञानी व्यक्ति है। जो अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों को धमकाकर उनसे प्रेसनोट और कोई लेख लिखवा लेता है। जो पत्रकार इनकी चाटूकारिता करते हैं उसको ये अपने चेंबर में बुलाकर दुसरो की बुराई करते है और अपने मनमानी तरीके से खबर छपवाते है। (Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी)

    अनाड़ी और अज्ञानी ..

    जैन किसी भी योग्य नही है केवल मुफ्त की पगार लेकर, दूसरों की बुराई करके अपना उल्लू सीधा कर रहे है। पता नही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी इनको किस आधार पर बिठाकर रखा है। आपको जानकारी देते हुए बता दें, कि ये तो भुसावल, सोलापुर और पूना स्टेधन के योग्य नही है। इनको मुंबई जैसे स्टेशन पर जीएम कार्यालय में नियुक्ति करके रखा है। एक सीपीआरओ तो इनके आतंक से रोकर अपना ट्रांसफर करवाकर चले गए। जो अपना कार्यकाल भी पूरा नही कर पाए थे। (Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी)

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/24/the-soil-of-the-cemetery-in-mumbai-will-be-investigated
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    Indian Railway, अनाड़ी बना खिलाड़ी,
    मुंबई सीएसटी रेलवे स्टेशन की फाइल तस्वीर

    इसके पूर्व भोपाल में भी इनका कार्य अच्छा नही था। अब देखना होगा कि जनरल मैनेजर नरेश लालवानी इन पर कार्रवाई करते है या इनको रिवार्ड देते है। अगर इस खबर के बाद लालवानी इनके ऊपर कार्रवाई नही करते, तो रेलवे का सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा। जैन से आंतरिक रूप से सारे कर्मचारी नाराज है। सभी चाहते है कि जैन जल्दी से जल्दी यहाँ से चले जाएं। ये दुसरो की बुराई करने में डिग्री हासिल कर चुके है। नए मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ शिवाजी मानसपुरे को भी कई लोगो के विरुद्ध उल्टा सीधा बताकर रखा है। (Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी)

    Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी

    जैन का रिटायरमेंट केवल तेरह महीने और बचा है। फिर भी अपने आदत से मजबूर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कालबादेवी के कुछ कपड़ा व्यापारियों का पत्रकार कोटे के अधीन टिकट का कोटा करवाना जो पत्रकार नही है और अन्य रेलवे के बारे में खबर भी छपवाते है। इसके साथ ही जैन समाज की नेतागिरी भी करते है। (Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी)

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    इनको कोई यह भी जानकारी नही है पत्रकारों को खबर संकलन करने के लिए आरटीआई की जरूरत नहीं पड़ती आरटीआई अधिनियम तो 2005 से लागू हुआ है क्या इसके पहले मीडिया काम ही नहीं करती थी। किसी भी खबर की जानकारी मांगने पर पत्रकारों को आरटीआई डालकर खबर निकालने के लिए जैन कहते है। ऐसे व्यक्ति को केंद्रीय विभाग में जनसंपर्क अधिकारी के पद पर कैसे बिठाया गया है यह भी एक जांच का विषय है बना हुआ है। (Indian Railway में अनाड़ी बना खिलाड़ी)

  • हिंदू क्यों नहीं अपनी लड़कियां सम्हाल कर रखते?

    हिंदू क्यों नहीं अपनी लड़कियां सम्हाल कर रखते?

    • बीजेपी आरएसएस और शंकराचार्य..
    • हिंदू लड़कियां ही क्यों लव जिहाद की शिकार होती है?
    • हिंदू समाज में भेदभाव और तिरस्कार ही धर्म बदलने को प्रेरित करता है।
    • आरएसएस, विहिप, बजरंग दल और बीजेपी गोवंश के नाम पर मुस्लिमों को मारते हैं।
    • गोहत्या कर मांस विदेश भेजने वाले चार बड़े बूचड़खाने हिंदुओं के क्यों?
    • बीजेपी के साथ वही संत है जो जानते ही नहीं कि सनातन धर्म क्या है?
    • अपराधियों को बचने के लिए दो ही रास्ते एक राजनीति दुसरा धर्म का चोला।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    बीजेपी दो मुहीं नहीं तीन-तीन मुहिं चाल चलती है। एक तरफ बीजेपी के तमाम बड़े नेता अपनी बेटियों को मुस्लिम से व्याहते हैं। तो दूसरी तरफ गौवंश को लेकर मुस्लिमों की हत्या भी करते हैं। लव जिहाद की बात कर प्रताड़ित करते हैं। जहां तक लव जिहाद का मामला है इसमें हिंदू लड़की की रजामंदी रहती है। जब गोमांस खाने,शमजहब बदलने की बात होती है। तो तब हिंदू लड़कियों का इश्क और मोहब्बत फना हो जाता है।

    संभव है कुछ हिंदू लड़कियां अपहृत कर चंगुल में फंसाई जाती हैं। लेकिन उसमें भी कहीं न कहीं इशारेबाजी होती ही है। क्यों नहीं हिंदू अपनी लड़कियां सम्हाल कर रखते? क्यों हिंदू लड़कियां ही लव जिहाद की शिकार होती हैं? तड़क-भड़क पसंद करने वाली लड़कियां चंगुल में आसानी से फंसती हैं। इसका अर्थ है, कि हिंदू अपनी लड़कियों की परवरिश और संस्कार उपयुक्त तरीके से नहीं देते। दोषी हिंदू ही हैं।

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    बीजेपी, आरएसएस, शंकराचार्य,
    शंकराचार्य महाराज की फाइल तस्वीर

    यक्षप्रश्न है, कि केवल हिंदू पुरुष ही सहपरिवार धर्म बदलते हैं। कोई मुस्लिम या ईसाई नहीं। खासकर दलित अधिकतर धर्म बदलते देखे जाते हैं। ईसाई का एजेंट गैदरिंग करता है जिसमें ओबीसी और एस सी की महिलाएं अधिकतर जाती और ज्ञान लेती हैं। फिर ईसाई बन जाती हैं। धन का लोभ खुली जिंदगी छुआछूत का अभाव। जातियों का बंधन नहीं। हिंदू समाज में भेदभाव और तिरस्कार ही धर्म बदलने को प्रेरित करता है।

    गोहत्या कर मांस विदेश भेजने वाले चार बड़े बूचड़खाने हिंदुओं के क्यों?

    एक तरफ आर एस एस, विहिप, बजरंग दल और बीजेपी गोवंश के नाम पर मुस्लिमो को मारते हैं। तो दूसरी तरफ कथित रूप से हिन्दुत्व की राजनीति करने वाली सरकार गोमांश निर्यात में विश्व का प्रथम राष्ट्र बनाने के लिए करोड़ों रुपए सब्सिडी देती है। देश की सबसे बड़ी गोहत्या कर मांस विदेश भेजने वाली चार बड़े बूचड़खाने हिंदुओं के क्यों हैं? बीजेपी की सरकार हिंदुत्व का नाम केवल हिंदुओं को मूर्ख बनाकर वोट लेने और सत्ता में आने पर मनमानी करती है।

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    बीजेपी आरएसएस और शंकराचार्य..

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वर नंद ने बीजेपी और आर एस एस की कलई खोल कर रख दिया है। जिन हिंदू साधु संतों को बीजेपी अपने खेमे में लाकर चुनाव में पोलराइजेशन करना चाहती है। उनमें किसी का भी कद शंकराचार्य के पैरों से अधिक नहीं है। शंकराचार्य परिपाटी ढाई हजार साल पूर्व आदि शंकर ने चलाई थी। बीजेपी के साथ वही संत हैं, जो जानते ही नहीं, कि सनातनधर्म क्या है। ऐसे लोगों का बैकग्राउंड तलाशा जाए तो अधिकांश क्रिमिनल्स होंगे। अपराधियों के बचने के लिए दो ही रास्ते हैं एक राजनीति दूसरा धर्म का चोला गेरुआ ओढ़ लो। यदि ये सच्चे संत होते तो महिला पहलवानों के यौन शोषण करने के आरोपी बृजभूषण का साथ क्यों देते? मैत्री समान विचारधारा वालों में ही होती है।

  • फूल पगारी फोकटिया जनसंपर्क अधिकारी अनिल जैन

    फूल पगारी फोकटिया जनसंपर्क अधिकारी अनिल जैन

    क्या ऐसे ही कामचोर और अयोग्य व्यक्तियों को जनसंपर्क अधिकारी के नौकरी के पद पर रेलवे प्रशासन रखता है। जिससे पत्रकारों के प्रश्नों को उनसे दूर रखा जा सके।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    मध्यरेल के सीनियर जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार जैन अयोग्य, अज्ञानी  और एक भी डिक्टेशन न देने वाला जनसंपर्क अधिकारी साबित हो गया है। जिसको कुछ भी नही आता, अपने चेंबर में नई-नई महिला पत्रकारों को बैठाकर गप्पे मारने और अपने को ईमानदार घोषित करने वाला अधिकारी बन रहा है। जिसको कहते है ‘अपने मुँह मिट्ठू मियां’ वाली कहावत साबित हो रही है।

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    जनसंपर्क अधिकारी,
    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल की तस्वीर

    कुछ पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करता है। मध्यरेल में कई जगहों पर जनसंपर्क अधिकारी की जगह खाली है। फिर भी इसका ट्रांसफर नही हो रहा है। कई वर्षों से एक ही जगह पर फेविकॉल की तरह कुर्सी से चिपका हुआ है। रेलवे बोर्ड से पत्रकारों के नाम पर आने वाले पैसों में भी घपला करता है। आजकल ये प्रिंट मीडिया का कामकाज देख रहे है। इनका रिटायरमेंट करीब है फिर भी सुधरने को तैयार नही है।

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    फोकटिया जनसंपर्क अधिकारी..

    अनिल जैन से किसी भी प्रकार की जानकारी मांगने पर आरटीआई डालने को बोलते है। जिस पीआरओ को जानकारी नही है तो उसको किस आधार पर रेलवे पगार देती है और किस आधार पर इनको नौकरी पर रखा गया है। यह एक विचारणीय प्रश्न है ? क्या ऐसे ही कामचोर और अयोग्य व्यक्तियों को नौकरी पर रेलवे प्रशासन रखता है। जिससे पत्रकारों के प्रश्नों को उनसे दूर रखा जा सके।

  • मुंबई में कब्रिस्तान की मिट्टी की होगी जांच।

    मुंबई में कब्रिस्तान की मिट्टी की होगी जांच।

    मुंबई के गोवंडी इलाके में कब्रिस्तान का मिट्टी घोटाला को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। यहां की मिट्टी को लेकर मानवाधिकार आयोग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    गोवंडी के कब्रिस्तानों की मिट्टी का जायजा लेने के लिए सरकारी एजेंसियों को कोर्ट ने जांच के आदेश दे दिए हैं। आपको बता दें कि यहां स्थानीय लोगों के लिए दो कब्रिस्तान मौजूद है इन दोनों स्थानों पर ताला लगा दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक कब्रिस्तान में नए शव दफन करने के लिए जगह नहीं है। पुराने दफन शवों को गले में काफी ज्यादा का समय लग रहा है जिस कारण नए शवों की एंट्री बंद कर दी गई है।

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    गोवंडी के देवनार कब्रिस्तान की तस्वीर

    लाखों की आबादी वाला गोवंडी का इलाका जहां बड़ी संख्या मे मुस्लिम समुदाय के लोग रहते है। वहां लोग अपने परिजनों का शव कांधे पर लिए दरबदर भटक रहे है। देवनार और रफी नगर के नाम पर यहां 2 कब्रिस्तान है। जहाँ इनदिनों ताला लगा दिया गया है। शवों को यहां दफ़न करने से रोक दिया गया है। जिसके पीछे की वजह कब्रिस्तान मै जगह नही होना बताया जारहा है वहीं कब्रिस्तान मैं दफनाये गए शव सही वक्त पर मिट्टी में नही मिलने के कारण कब्र को दोबारा उसमे शव दफनाने पर रोक लगाई गई है।

    आपको जानकारी देते हुए बता दे, कि एक शव को दफनाने के बाद लगभग 6 से 8 महीनों में वह शरीर गर्ल कर मिट्टी हो जाता है। उसके कुछ दिनों बाद उसी कबर को दोबारा खनकर उसमें नए शव को दफना दिया जाता है। यह निरंतर सभी कब्रिस्तान में जारी है। जिस कारण मुंबई में जगह की कमतरता आभार नहीं होता। लेकिन गोवंडी के कब्रिस्तानों में एक नया ही मामला पेश आ रहा है। यहां दफनाये गए शवों को गलने में और भी ज्यादा का समय लग रहा है। जिसकी वजह से यहां की मिट्टी पर घोटाला होने के आरोप नागरिकों द्वारा लगाए जा रहे हैं।

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    कब्रिस्तान का मिट्टी घोटाला

    गोवंडी के स्थानीय लोगों ने कब्रिस्तान के कामों में और मिट्टी डलवाने में घोटाला होने का आरोप लगाया है। लंबे समय से यह के लोग शासन प्रशासन के साथ बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को कब्रिस्तान मे होने वाले घोटाले से अवगत कराते रहे है। उसके बाद भी किसी तरह की करवाई नही की गई और आज यहां के लोगों के लिए कब्रिस्तानों में ताला लगा दिया गया है। इसको लेकर सामाजिक संस्था ‘सिटिजन फोरम’ ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है। मानवाधिकार आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट को मिट्टी की जांच का आदेश करते हुए रिपोर्ट मांगी है।

  • मुंबई के बाजार में 500 के नकली नोट।

    मुंबई के बाजार में 500 के नकली नोट।

    मुंबई के मालाड पश्चिम मालवणी पुलिस ने नकली नोटों के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पैसों की लेनदेन करने वालों के लिए यह खास खबर है।

    FAKE CURRENCY NOTES IN MUMBAI

    इस्माईल शेख
    मुंबई- 
    FAKE CURRENCY NOTES से सावधान रहे मुंबईकर बाजार में आज भी नकली नोट का चलन जारी है। नकली नोट बनाकर बाजार में पेश करने वालों की नजर में आज भी मुंबई शहर पसंदीदा बनी हुई है। जबकि ज्यादातर लोग इसे ध्यान से परखर ही लेनदेन करते हैं। लेकिन जब भी किसी के हाथ यह नकली नोट लग जाता है उसका सीधे तौर पर उतने ही पैसों का नुकसान हो जाता है।

    ना वह उस नोट को कहीं चला पाता और ना ही किसी को बता पाता है। क्योंकि नकली नोट होना ही भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत गुनाह के हम पात्र हो जाते हैं। ऐसे में सीधे तौर पर आम नागरिक को नुकसान सहना पड़ता है। यह जानकारी फिर से इसलिए दोहराई जा रही है, क्योंकि हाल ही में मलाड पश्चिम के मालवानी पुलिस थाने ने एक शख्स को 500 रुपये के कुल आठ नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है। इसकी पड़ताल में और भी कई खुलासे हुए जिसको लेकर पुलिस अधिकारियों ने लगभग 7 लाख 27 हज़ार रुपयों का माल जब्त कर लिया है।

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    मालवनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढ़ाव ने बताया, कि पुलिस उप निरीक्षक हसन मूलानी को विश्वसनीय सूत्रों के आधार पर एक गुप्त सूचना मिली थी, की पुलिस थाना अंतर्गत मालवानी के एक नंबर, गणेश मंदिर के पास कोई व्यक्ति नकली नोटों का सैंपल लेकर बाजार में वितरित करने के लिए आने वाला है। पुलिस में जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।

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    ₹500 की फोटो

    पुलिस उप निरीक्षक हसन मूलानी ने जांच के हवाले से बताया, कि जब हम घटनास्थल पर पुलिस का पहरा दे रहे थे। उस वक्त संदेहास्पद व्यक्ति अपने साथ एक छोटे से बच्चे को भी लेकर आया हुआ था और काली थैली में कुछ सामान लेकर एक जगह पर रुका हुआ था। लगातार यहां से वहां घूम कर किसी का इंतजार करता हुआ दिखाई पड़ रहा था। पुलिस ने अपने सरकारी पंचों के साथ जब गहनता से उस पर निगाह डाली तो सूत्रों से प्राप्त जानकारी के हूबहू उस व्यक्ति की पहचान नजर आई। तुरंत मालवानी पुलिस ने अपने साथ ले गए सरकारी पंचों के साथ उसे घेराबंदी मे करते हुए अपने ताबे में लिया और गवाहों के समक्ष जब उसकी झढ़ती ली गई, तो उसके पास से 500 रूपये के कुल 8 नोट नकली प्राप्त हुए हैं। जो हूबहू भारतीय चलन नोटों के बराबर प्रतीत हो रहे हैं।

    जिस्म का कारोबार और शिवसेना का नेता! अड्डे पर मिलीं 44 लड़कियां

    तुरंत उसे पुलिस थाने में लाकर पूछताछ की गई तो 32 वर्षीय आरोपी उमेश जय किशन कुमार ने बताया, कि वह एक कारोबारी है और कांदिवली पश्चिम के जनकल्याण नगर के पास, भूमि पार्क के एक इमारत में रहता है। जो घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर है। पुलिस ने तुरंत गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक 748/23 में भारतीय दंड संहिता की धारा 489 (ब) और 489 (क) के तहत उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से बरामद 500 रुपये के 8 नकली नोट और भारतीय चलन के असली 3000 रुपयों के साथ मोबाइल फोन जब्त किया गया।

    जांच के लिए जब पुलिस उसके फ़्लैट पर पहुंची तो वहां एक लैपटॉप, एप्पल कंपनी का आईपैड और दो पेनड्राइव, 4 मोबाइल, कोरा बॉन्ड पेपर, माइक्रो मेमोरी कार्ड, उसके रहते घर के पार्किंग स्लॉट में खड़ी उसकी निजी महिंद्रा एसयूवी 500 वाहन क्रमांक एचआर 26 सीएन 0597 और इस गाड़ी के भीतर रखा हुआ प्रिंटर सभी को पुलिस ने अपराध के तहत जप्त कर लिया है। इस पूरे कार्रवाई के बीच पुलिस द्वारा जब्त सामानों का बाजार मूल्यांकन 7 लाख 27 हज़ार रुपये आंकें जा सकते हैं।

    Mumbai: मालाड़ पूर्व दिंडोशी के इलाके में फायरिंग

    इस पूरे कार्यवाही की निगरानी उत्तर प्रादेशिक विभाग के मुंबई अप्पर पुलिस आयुक्त राजीव जैन, मुंबई पुलिस परिमंडल 11 के उपायुक्त अजय कुमार बंसल, सहायक पुलिस आयुक्त मालवणी डिवीजन शैलेंद्र धीवार कर रहे थे। मालवनी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढ़ाव साहब मामले के हर पहलू से जुड़े पल-पल की जानकारियां आला अधिकारियों की इजाजत के साथ पुलिस निरीक्षक शेलके, क्राइम डिटेक्शन अधिकारी हसन मूलानी को निर्देशित कर रहे थे।

    पूरे अपराध का खुलासा करने में मालवनी पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस उपनिरीक्षक माणिक मोरे, पुलिस सिपाही पाटिल, पुलिस सिपाही वत्रे, पाटिल, महिला पुलिस सिपाही गोसावी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जिसकी आला सभी अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस विभाग में भी गुड वर्क के लिए शाबाशी दी जाती है। फिलहाल नकली नोटों से बाजार को सुरक्षित करने में मालवानी पुलिस ने अपनी अच्छी भूमिका निभाई है।

  • Mumbai: फर्जी शेयर बाजार चलाने वाला गिरफ्तार, एप के जरिये 3 महीने में की 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग

    Mumbai: फर्जी शेयर बाजार चलाने वाला गिरफ्तार, एप के जरिये 3 महीने में की 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग

    Mumbai में फर्जी शेयर बाजार चलाने वाले जतिन मेहता को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह एप के जरिये तीन महीने में 4,672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग कर टैक्स चोरी से सरकार को लगभग 1.95 करोड़ रुपये का चूना लगा चुका है। पुलिस ने उसे कांदीवली से किया गिरफ्तार।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    फर्जी शेयर बाजार चलाने वाले जतिन मेहता को क्राईम ब्रांच यूनिट 11 की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह एप के जरिये तीन महीने में 4672 करोड़ रुपयों की शेयर ट्रेडिंग कर टैक्स चोरी से सरकार को लगभग 1.95 करोड़ रुपये का चूना लगा चुका है। उसे मंगलवार को मुंबई उपनगर (Mumbai suburbs) कांदीवली से गिरफ्तार किया गया। बिना किसी वैध लाइसेंस के वह ‘मूडी’ नामक मोबाइल एप के जरिये कैश से फर्जी शेयर बाजार चला रहा था।

    Mumbai में डिब्बा ट्रेडिंग..

    23 मार्च से 20 जून के बीच बिना किसी वैध लाइसेंस के वह ‘मूडी’ नामक मोबाइल एप के जरिये कैश से फर्जी शेयर बाजार चला रहा था। ऐसे शेयर बाजार को मुंबई (Mumbai) में डिब्बा ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता है। इस मामले के जांच अधिकारी अभिजीत जाधव के अनुसार, जतिन बिल्कुल शेयर दलालों जैसा व्यवहार करता था और शेयर बाजार से जुड़ने के इच्छुक लोगों को अपने एप का पासवर्ड दे देता था। वह लोगों से 50-50 हजार का डिपाजिट भी लेता था।

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/22/kurar-police-arrested-4-one-absconding
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    Mumbai, डिब्बा ट्रेडिंग,
    क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की पुलिस और आरोपी की तस्वीर

    तीन महिनों में किया 4,672 करोड़ रुपयों का कारोबार

    उन्होंने आगे बताया कि शेयर बाजार में लाभ होने पर वह लाभ की राशि अपना कमीशन काट कर नकद ही अपने ग्राहकों को भिजवा देता था। घाटा होने पर उनकी डिपाजिट राशि से पैसे काट लिए जाते थे और बाद में उतने पैसे डिपाजिट में और जमा करवा लिए जाते थे। इस प्रकार उसने तीन माह में इस फर्जी शेयर बाजार से 4,672 करोड़ रुपयों का कारोबार किया। शेयर बाजार में लाभ होने पर शेयरधारकों को 15 से 30 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है। लेकिन, फर्जी शेयर बाजार में वे टैक्स देने से बच जाते थे।

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    इस प्रकार सरकार को करीब दो करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ है। इसके अलावा जतिन मेहता ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, कैपिटल गेन्स टैक्स, राज्य सरकार के स्टांप ड्यूटी शुल्क, सेबी की टर्नओवर फीस जैसे कई टैक्सों की चोरी की है। उस पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस को नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) एवं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के अधिकारियों की भी मदद लेनी पड़ी। डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने आरोपी के पास से 5 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक राउटर, एक टैब, एक पैन ड्राइव और काफी कैश भी जब्त किया है।

  • ए विभाग के मनपाकर्मी दबा के कर रहे हैं वसूली।

    ए विभाग के मनपाकर्मी दबा के कर रहे हैं वसूली।

    • BMC का काला कारोबार। मुंबई उच्च न्यायालय की फटकार।
    • जारी है लगातार BMC में भ्रष्टाचार।
    • बीएमसी के कई वार्डो का यही हाल है।
    • बिना टेंडर के अवैध पार्किंग।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ए वार्ड अंतर्गत बॉम्बे समाचार मार्ग पर आजकल अवैध पार्किंग जोरो पर चलाई जा रही है। इस काली (Black money) की कमाई वार्ड ऑफिसर और यहां के मनपाकर्मी खा रहे हैं। इन कारोबारों पर कोई पूछने वाला नही है। जब से इकबाल सिंह चहल ने मनपा आयुक्त (BMC Commissioner) का पदभार संभाला है। तब से मनपा (BMC) में अवैध वसूली और अवैध निर्माण का काम जोरो से चल रहा है।

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    मुंबई का कोई भी नागरिक कितना भी शिकायत कर ले उस पर कोई कार्रवाई नही होती। यहां तक की राजस्व को लगाए जा रहे चूने को उजागर करने के लिए शिकायतकर्ता को काफी पैसे खर्च कर धक्के खाने पड़ते हैं। लेकिन सुनवाई नहीं होती। इस विषय पर बॉम्बे उच्चन्यायालय ने भी मनपा प्रशासन को कई बार कड़ी फटकार लगाई है। फिर भी ये सुधरने को तैयार नही है। क्योंकि मनपाकर्मी मोटी चमड़ी वाले हो गए हैं।

    दो घंटे में गायब हो जायेंगे मुंबई की सड़कों के गड्ढे, BMC लेकर आई है नई तकनीक

    BMC,
    बीएमसी ए वार्ड अंतर्गत अवैध पार्किंग की तस्वीर

    BMC का काला कारोबार..

    बड़ा शर्म आता है इन मनपाकर्मीयो पर जो कितने निर्लज्ज है। इनको वसूली के अलावा कुछ नही आता। बीएमसी के कई वार्डो का यही हाल है। बिना टेंडर के अवैध पार्किंग चलाई जा रही है। जिसमे वार्ड ऑफिसर और परिरक्षण विभाग के लोग मलाई खा रहे हैं और नागरिक मनपा कार्यालय के धक्के खा रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। जो भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए आम नागरिकों को ही जूझना पड़ रहा है।

  • एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    एक दो नहीं दस राज्यों में CBI की एंट्री पर बैन

    • CBI की एंट्री पर बैन मैं तमिलनाडू भी हुआ शामिल।
    • 2024 के चुनाव में सेंट्रल जांच एजेंसियों पर रोक का होगा कितना असर?

    नितिन तोरस्कर ( मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    विपक्ष शासित राज्यों में सीबीआई-ईडी जैसी सेंट्रल जांच एजेंसियों की एंट्री और एक्शन पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार के इशारे पर सीबीआई और ईडी विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। विपक्ष शासित 10 राज्य ऐसे हैं, जहां सीबीआई बिना राज्य सरकार के परमिशन के कोई जांच या धर-पकड़ नहीं कर सकती। ताजा मामला तमिलनाडु का है। एमके स्टालिन सरकार के गृह मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर कहा है, कि किसी भी तरह की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।

    तमिलनाडु सरकार का यह फैसला तब आया है, जब ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद एक्साइज मिनिस्टर बालाजी सेंदिल को गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु सरकार ने यह आदेश दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट एक्ट 1946 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया है। बिहार में लालू यादव के परिवार के लोग भी यही आरोप लगाते हैं, कि केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) का इस्तेमाल केंद्र सरकार अपने मतलब के लिए करती है। इसे एकतरफा कार्रवाई या बदले के भावना बताया जाता रहा है। चुनाव के संदर्भ में यह दलील दी जाती है, कि सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच हो रही है। क्या इसका चनावों पर असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।

    Indian fasttrack news

    सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर है बैन वाले राज्य ..

    भारत के कुल 10 राज्यों में सेंट्रल एजेंसियों (CBI) पर बैन लगा दिया गया है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम, मेघालय और राजस्थान के बाद अब तमिलनाडु भी केंद्रीय जांच एजेंसियों पर बैन लगाने वाले राज्यों में शुमार हैं। इन राज्यों में सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी शिकायत पर बिना राज्य सरकार की सहमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। हां, इसमें एक छूट जरूर शामिल है। अगर जांच किसी न्यायालयी आदेश या राज्य सरकार की संस्तुति पर हो रही हो, तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हकीकत यह है कि जब भी किसी मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की जरूरत महसूस होती है तो लोग हाईकोर्ट की शरण में जाते हैं। कोर्ट अगर इजाजत देता है तो जांच होती है।

    CBI,
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल तस्वीर

    बंगाल और झारखंड में बैन का कोई असर नहीं।

    बैन के बावजूद सेंट्रल एजेंसियां कुछ राज्यों में आराम से अपने काम को कर रही है। पड़ोस की बात करें तो बंगाल और झारखंड में भी केंद्रीय एजेंसियों (CBI) की जांच पर रोक है। बंगाल में शिक्षक नियुक्ति घोटाला की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रहे हैं। यह जांच भी राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ है। लेकिन बाध्यता यह है कि इसकी जांच का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया है। जांच का परिणाम यह है कि सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कई नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है तो कुछ अन्य की गिरफ्तारियां कभी भी हो सकती हैं। यहां राज्य सरकार की बंदिश का कोई रोड़ा सेंट्रल एजेंसियों की जांच या गिरफ्तारी में अटक नहीं रहा है।

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    सेंट्रल एजेंसियों के खिलाफ 14 दल..

    सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) के एक्शन से नाराज 14 राजनीतिक दलों के नेतों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसमें बिहार से आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव, झारखंड से सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि सेंट्रल एजेंसियों की जांच नहीं रोकी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट जाने वालों में अधिकतर वैसे दल शामिल थे, जिसके नेता या कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ अदालतों ने सेंट्रल एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट से निराश होकर ये नेता जांच से बचने की नयी तरकीब तलाश रहे हैं।

    एजेंसियों की जांच का, चुनाव पर असर…

    केंद्रीय जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्हें जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकारों ने ही कहा है। आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जांच के लपेटे में उनके पसंदीदा नेता रहे हैं या विरोधी। सामान्य भाव यही है कि चोर या भ्रष्टाचारी पकड़ा जाना चाहिए। लालू यादव के परिवार की बात करें तो उनके मामले में भी स्वजातीय को छोड़ कर किसी को इसकी परवाह नहीं है कि जांच एजेंसियां उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं।

    हां, थोड़ा-बहुत संदेह तब तक बरकरार रहता है, जब तक दोष न सिद्ध हो जाए। सुखद पहलू यह है कि ईडी ने जितने मामलों की अब तक जांच की है, उनमें अधिकतर के खिलाफ दोष सिद्ध हुए हैं और सजा भी हुई हैं। सामाजिक न्याय के मसीहा, समाज के वंचित लोगों को स्वर्ग नहीं, स्वर देने का दावा करने वाले लालू प्रसाद के बारे में भी जब चारा घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हुई थी तो यही कहा जाता था कि उन्हें फंसाया गया है। दोष सिद्ध होने और सजा के बाद सबकी बोलती बंद हो गई थी।

  • मंत्री का घर फूंका, पीएम चले विदेश।

    मंत्री का घर फूंका, पीएम चले विदेश।

    • मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका दिया।
    • संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया है।
    • यह कमाल केवल कमल कर सकता है।

    सुरेंद्र राजभर
    वाराणसी-
    मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका है। मंत्री उस वक्त घर में नहीं थे। बीजेपी चाहे जितने दावे करे लेकिन सच तो यह है, कि शासन करना इसके बूते का नहीं है। झूठ पर खड़ी ताश की इमारत कभी न तो ठोस धरातल बना पाती है न ठोस इमारत। फितरत जिसकी रग-रग में भरा हो। ईर्ष्या जिसका भाव हो। बदला जिसकी प्रकृति हो। दंभ जिसका स्वभाव हो। ऐसा व्यक्ति गांव के मुखिया का भी पदभार सम्हाल नहीं सकता तो देश कैसे सम्हालेगा?

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    मंत्री का घर फूंका,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    झूठ सिर्फ झूठ, वादे कोरे, जिन्हें पूरे नहीं किए जाएं। लोकलुभावन नारे,विज्ञापन पर अरबों खरबों अपव्यय कर अपनी सफलता का झूठा प्रचार करना। पांच ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था जिसका फितूर हो। समस्या का समाधान नहीं कर सके। समस्या पर चुप्पी साध ले। शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में छिपा ले। प्रश्न पूछने पर चुप रहे क्योंकि जवाब नहीं और फिर प्रश्न कर्ता को जेल भेज दे। विपक्षी नेताओं के घर कभी सीबीआई तो कभी ईडी भेजकर डराए।

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    किसान आंदोलन चलता रहे कुछ न बोले अंत में माफी मांग ले।महिला पहलवानों की यौनशोषण आरोप पर चुप्पी साध ले फिर दिल्ली पुलिस पर दबाव डालकर आरोपी को क्लीन चिट दिला दे। कभी देश की बेटियां कहे तो कभी पुलिस द्वारा जबरन उन्हें उठाकर फेंकवा दे। पीड़िताओं से पुलिस कितनी बेहयाई के साथ सबूत मांगे और धमकी देकर, परिवार को खत्म करने का भय दिखाकर बयान बदलवाए। बस यही तो किया है। कभी नोट बंदी कर आम जनता को परेशान करे तो कानून बनाकर जनता को दंडित करे। अच्छे दिन के ख्वाब दिखाए। इसी का नाम है बीजेपी।

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    मंत्री का घर फूंका..

    संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया हो। मणिपुर में मैती को आरक्षण का वादा करे दूसरी तरफ विरोधियों को विरोध के लिए उकसाए। जिस तरह रोम को जलते देख अनदेखा कर नीरो बंसी बजाता रहा वैसे ही अपने मंत्री का घर फूंके जाने पर छवि निर्माण हेतु, विदेश पलायन कर जाए। यह कमाल केवल कमल ही कर सकता है। मत भूले कि हमेशा के लिये सत्ता नही मिली है। राज्यों की तरह सिमटता साम्राज्य खत्म होते देख भी सम्राट समझने की भ्रांति पालने वाले का हश्र अगले चुनाव में मालूम पड़ेगा।