Category: Civic Issues

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  • मोहन भागवत के वानप्रस्थ का समय आ गया है- तुषार गांधी

    मोहन भागवत के वानप्रस्थ का समय आ गया है- तुषार गांधी

    महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने नागपुर में कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है और अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है। साथ ही बिहार की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया।

    नागपुर: महात्मा गांधी के परपोते और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी ने नागपुर में ऐसा बयान दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधते हुए कहा कि, “अब उनका वानप्रस्थ का समय आ गया है।” The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    दरअसल कुछ दिनों पहले मोहन भागवत ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह काम ऋषि-मुनियों ने पहले ही कर दिया था। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तुषार गांधी ने व्यंग्य किया और कहा कि भागवत जी की ऋषि-मुनियों में रुचि बढ़ गई है, इसलिए अब उन्हें वानप्रस्थ की ओर बढ़ना चाहिए। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    गांधी परिवार और संघ की खींचतान

    यह पहली बार नहीं है जब तुषार गांधी ने संघ या उसके नेताओं को लेकर बयान दिया हो। लंबे समय से गांधी परिवार और संघ विचारधारा के बीच टकराव की स्थिति रही है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद से ही आरएसएस और गांधी परिवार के रिश्ते तल्ख़ रहे हैं। नागपुर में दिए गए इस बयान ने एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    बिहार राजनीति पर तुषार गांधी का बड़ा बयान

    नागपुर दौरे पर तुषार गांधी सिर्फ मोहन भागवत तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने बिहार में चल रही राहुल गांधी की यात्रा और वहां उठ रहे मुद्दों पर भी बात की।
    उन्होंने कहा – “बिहार के गांवों में बच्चों और आम लोगों के मुंह से एक ही नारा सुनाई दे रहा है – ‘वोट चोर गद्दी छोड़।’ ये नारा सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिंदुस्तान में गूंजेगा।” The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    तुषार गांधी के मुताबिक, बिहार के लोग इस बार बदलाव चाहते हैं। वहां के माहौल में एक बेचैनी है और लोग वोट चोरी के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। उन्होंने इसे एक बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    वानप्रस्थ टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?

    भारतीय परंपरा में वानप्रस्थ का मतलब जीवन के तीसरे चरण से है, जब इंसान सांसारिक मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ता है। तुषार गांधी ने जब मोहन भागवत के लिए वानप्रस्थ का जिक्र किया, तो इसे सिर्फ धार्मिक व्याख्या नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी संघ की भूमिका और भागवत की सक्रियता पर सवाल उठाती है। यह कहना कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है” सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि उन्हें अब सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक बयानों से दूरी बना लेनी चाहिए। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    बिहार से हिंदुस्तान तक जाएगा मुद्दा

    तुषार गांधी ने आगे कहा कि बिहार में लोगों का गुस्सा अब साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्रा में उन्होंने खुद यह अनुभव किया कि गांव-गांव के लोग वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    उन्होंने कहा –
    “हमने एक दिन की यात्रा में यह देखा कि बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी के मुंह से एक ही आवाज आ रही थी। यह नारा इतना बड़ा होगा कि बिहार से निकलकर पूरे हिंदुस्तान में फैलेगा।”

    परिवर्तन की उम्मीद

    तुषार गांधी ने कहा कि जनता के मन में बदलाव की उम्मीद है। उन्होंने इसे गांधीवादी आंदोलन की तर्ज पर जनभावनाओं की अभिव्यक्ति बताया। उनके अनुसार, बिहार का यह मुद्दा धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है और 2025 के राजनीतिक समीकरण पर बड़ा असर डाल सकता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

    नागपुर क्यों खास?

    तुषार गांधी का यह बयान नागपुर से आया, जो संघ (आरएसएस) का मुख्यालय है। इस वजह से यह और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। नागपुर से दिया गया हर बयान राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर गूंजता है।

    निष्कर्ष

    महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का यह बयान आने वाले समय में बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।
    एक तरफ उन्होंने मोहन भागवत पर तंज कसा कि “अब उनका वानप्रस्थ का समय है”, वहीं दूसरी ओर बिहार की राजनीति में उठ रही वोट चोरी की गूंज को देशव्यापी मुद्दा बताया।

    राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इस बयान के पीछे गहरा राजनीतिक संदेश छिपा है। यह न सिर्फ संघ और गांधी परिवार की पुरानी खींचतान को सामने लाता है, बल्कि देश की राजनीति में बढ़ते असंतोष और बदलाव की मांग को भी रेखांकित करता है। The time has come for Mohan Bhagwat to go on Vanaprastha- Tushar Gandhi

  • जरांगे पाटील आंदोलन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी, मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी

    जरांगे पाटील आंदोलन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी, मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी

    मुंबई प्रेस क्लब और टीवीजेए ने जरांगे पाटील समर्थकों पर महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप लगाया, कार्रवाई नहीं हुई तो मीडिया बॉयकॉट की चेतावनी। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    मुंबई | मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच मुंबई प्रेस क्लब और टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (TVJA) ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि आज़ाद मैदान पर मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ लगातार बदसलूकी और छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं से नाराज़ मीडिया संगठनों ने जरांगे पाटील को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो मीडिया संस्थान आंदोलन की कवरेज का बॉयकॉट कर सकते हैं। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    📌 प्रेस क्लब और टीवीजेए का कड़ा बयान

    मुंबई प्रेस क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में कहा,
    “हम महिला पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के साथ हो रही बदसलूकी, धमकी और अपमानजनक व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने भी जरांगे पाटील को लिखे पत्र में गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि रिपोर्टरों और कैमरामैन को लगातार अपशब्द, धक्कामुक्की और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

    📌 जरांगे पाटील का रुख और विवादित बयान

    टीवीजेए के अध्यक्ष उदय जाधव ने बताया कि जब संगठन ने यह शिकायत जरांगे पाटील के सामने रखी तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था।
    जरांगे पाटील ने कहा, “आप लोग यहां मेहमान हैं, कुछ दिन एडजस्ट कर लीजिए।”

    इस बयान पर पत्रकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि आखिर महिला पत्रकारों को “एडजस्ट” क्यों करना चाहिए, जब आंदोलन में शामिल लोग ही उनकी सुरक्षा और सम्मान को चुनौती दे रहे हैं। Women journalists were mistreated during the Jarange Patil movement, warning of media boycott

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    आंदोलन की ताज़ा तस्वीर

    📌 आंदोलन की पृष्ठभूमि

    मनोज जरांगे पाटील पिछले कई महीनों से मराठा समाज को ओबीसी कोटा दिलाने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका प्रमुख आग्रह है कि मराठवाड़ा क्षेत्र के सभी मराठाओं को “कुनबी” दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।

    जरांगे पाटील ने राज्य सरकार से मांग की है कि हैदराबाद और सतारा गैजेट्स में दर्ज मराठाओं को तुरंत कुनबी प्रमाणपत्र जारी किया जाए। साथ ही उन्होंने औंध और बॉम्बे गैजेट्स में दर्ज नामों को भी इस श्रेणी में शामिल करने की बात कही है।

    📌 मीडिया का अल्टीमेटम

    पत्रकार संगठनों ने साफ कहा है कि अगर जरांगे पाटील और उनकी टीम ने आंदोलन स्थल पर अनुशासन नहीं बनाए रखा और पत्रकारों, खासकर महिला रिपोर्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो मजबूरन मीडिया संस्थान कवरेज से पीछे हट जाएंगे।

    मुंबई प्रेस क्लब ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि “प्रेस की आज़ादी और महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

  • मराठा आरक्षण आंदोलन से मुंबई कारोबारियों को भारी नुकसान

    मराठा आरक्षण आंदोलन से मुंबई कारोबारियों को भारी नुकसान

    मराठा आरक्षण आंदोलन से दक्षिण मुंबई में यातायात ठप हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि भीड़ और अफरा-तफरी से व्यापार पर गहरा असर पड़ा है, सरकार से हस्तक्षेप की मांग।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का असर अब व्यापारियों और कारोबार पर गहराई से दिखाई देने लगा है। दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में मनोज जरांगे के नेतृत्व में हो रहे आंदोलन के कारण सड़कों पर भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम ने कारोबारी गतिविधियों को ठप कर दिया है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA) के अध्यक्ष वीरन शाह ने कहा कि “आज़ाद मैदान के आसपास का इलाका पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुका है। सड़कों पर जाम, पुलिस की नाकाबंदी और बढ़ती भीड़ के चलते कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही तो व्यापार पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।” Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    आंदोलन से शहर की रफ्तार थमी

    पिछले दो दिनों से मुंबई लगातार बारिश और मराठा आंदोलन की वजह से जाम की मार झेल रही है। खासकर CST, फोर्ट, मरीन लाइन्स और कोलाबा जैसे इलाकों में ट्रैफिक जाम और दुकानों पर कम ग्राहकों की आवक ने कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि भीड़ और अव्यवस्था के कारण लोग खरीदारी के लिए बाजार तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    व्यापारियों का सरकार से निवेदन

    FRTWA समेत कई व्यापारी संगठनों ने सरकार से अपील की है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों की मांगें जायज़ हो सकती हैं लेकिन इस दौरान दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों को ठप होने से रोकना भी ज़रूरी है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    वीरन शाह ने साफ कहा कि “हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि आंदोलन को संवाद और चर्चा के ज़रिए हल किया जाए। व्यापारी और आम जनता रोज़ाना लाखों का नुकसान झेल रही है। सिर्फ यातायात ही नहीं बल्कि होटलों, रेस्टोरेंट्स और रिटेल दुकानों की बिक्री भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।” Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या

    आज़ाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के आसपास रोज़ाना हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो रहे हैं। इससे न सिर्फ ट्रैफिक ठप हो रहा है बल्कि सुरक्षा कारणों से कई दुकानों को बंद रखने की नौबत भी आ गई है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    प्रदर्शनकारियों ने यहां डेरा जमा लिया है और कई लोग सड़क किनारे खाना बना रहे हैं। इससे इलाके का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    पुलिस और प्रशासन की चुनौती

    मुंबई पुलिस और BMC के लिए भीड़ को नियंत्रित करना और व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस लगातार ट्रैफिक डायवर्ट कर रही है लेकिन इसके बावजूद दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    आंदोलन और आर्थिक नुकसान

    व्यापारियों का कहना है कि इस आंदोलन से रोज़ाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। कई व्यापारी संगठनों ने अंदेशा जताया है कि अगर आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ हुआ तो दक्षिण मुंबई की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

    नतीजा

    मराठा आरक्षण आंदोलन जहां एक तरफ समुदाय के अधिकारों की लड़ाई है, वहीं दूसरी ओर इसका असर मुंबई के आम नागरिकों और व्यापार पर भी साफ देखा जा रहा है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ आंदोलनकारियों की मांगों को पूरा करना और दूसरी ओर शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखना। Mumbai businessmen suffer huge losses due to Maratha reservation movement

  • मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई में प्रदर्शनकारियों को पानी-भोजन की कमी

    मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई में प्रदर्शनकारियों को पानी-भोजन की कमी

    मुंबई के आज़ाद मैदान में मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों को बारिश, भोजन और पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है, जबकि BMC सुविधाओं का दावा कर रही है।

    मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आज़ाद मैदान में चल रहा आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है। उनका मुख्य आग्रह है कि मराठा समुदाय को OBC श्रेणी में 10% आरक्षण दिया जाए। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    तेज़ बारिश और खराब मौसम ने प्रदर्शनकारियों की परेशानी बढ़ा दी है। कई लोग ट्रेन और बस से मुंबई पहुँचे हैं, लेकिन उन्हें भोजन, पानी और रहने की जगह की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के आसपास सड़क किनारे डेरा जमाए बैठे हैं और खुद ही खाना पकाने को मजबूर हैं। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल के आसपास की दुकानें और होटल बंद करा दिए गए हैं। उनका कहना है कि सरकार और BMC ने जानबूझकर भोजन और पानी की आपूर्ति रोक दी है। वहीं दूसरी तरफ, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने दावा किया है कि सभी जरूरी इंतज़ाम किए गए हैं। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    BMC के अनुसार –

    • 11 पानी के टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं।
    • 29 मुफ्त शौचालय मैदान में खोले गए हैं।
    • मोबाइल और पोर्टेबल टॉयलेट्स आसपास लगाए गए हैं।
    • गड्ढों में भरे पानी को सुखाने के लिए दो ट्रक बजरी मैदान में डाली गई है।
    • चिकित्सा सहायता केंद्र, चार मेडिकल टीम और दो एम्बुलेंस 24 घंटे तैनात हैं।
    • मैदान में अंधेरा न रहे, इसके लिए हाई इंटेंसिटी फ्लडलाइट्स लगाई गई हैं।

    इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हालात ज़मीनी स्तर पर अलग हैं। भोजन-पानी की वास्तविक कमी और शौचालयों की बदहाल स्थिति के चलते आंदोलनकारियों में गुस्सा है। Maratha reservation movement: Protesters in Mumbai face shortage of water and food

    मनोज जरांगे ने मीडिया से बात करते हुए कहा –
    “BMC प्रशासन मुख्यमंत्री के दबाव में काम कर रहा है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी रोक दिया है। गरीब मराठाओं को परेशान किया जा रहा है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”

    मुंबई पुलिस और प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, आंदोलन और तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • न्यूट्रिशन का ‘डार्क मैटर’: आखिर क्या खा रहे हैं हम?

    न्यूट्रिशन का ‘डार्क मैटर’: आखिर क्या खा रहे हैं हम?

    जानिए न्यूट्रिशन का ‘डार्क मैटर’ क्या है और क्यों आपका खाना सिर्फ कैलोरी और विटामिन तक सीमित नहीं है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    जब 2003 में वैज्ञानिकों ने ह्यूमन जीनोम (मानव का पूरा जेनेटिक कोड) सीक्वेंस किया था, तब उम्मीद थी कि इससे बीमारियों के रहस्य खुल जाएंगे। लेकिन रिसर्च से पता चला कि जेनेटिक्स यानी हमारे जीन्स, बीमारियों का सिर्फ 10% कारण बनते हैं। बाकी 90% फैक्टर हमारे एनवायरनमेंट और डाइट (खानपान) से जुड़े हैं। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    पूरी दुनिया में खराब खानपान हर साल 25 साल से ऊपर के करीब हर 5 में से 1 व्यक्ति की मौत से जुड़ा है। यूरोप में लगभग आधी हार्ट डिजीज मौतें पुअर डाइट के कारण होती हैं। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    पिछले कई दशकों से हमें कम फैट, कम नमक और कम शुगर खाने की सलाह मिलती रही है। लेकिन मोटापा और डाइट-रिलेटेड बीमारियाँ लगातार बढ़ रही हैं। यानी कहीं न कहीं न्यूट्रिशन को समझने के हमारे तरीके में कुछ कमी है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    न्यूट्रिशन सिर्फ प्रोटीन और विटामिन तक नहीं

    अब तक डाइट को अक्सर सरल रूप में समझा गया है – खाना यानी ईंधन, और न्यूट्रिएंट्स यानी शरीर की ईंटें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट और विटामिन – यानी लगभग 150 ज्ञात केमिकल्स ही हमारी थाली के मुख्य किरदार माने गए। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    लेकिन नई रिसर्च बताती है कि हमारी डाइट में 26,000 से ज्यादा कम्पाउंड्स होते हैं, जिनमें से ज्यादातर के बारे में हमें पता तक नहीं है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

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    प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    जैसे अंतरिक्ष में डार्क मैटर, वैसे ही हमारे खाने में भी

    खगोल विज्ञान (Astronomy) बताता है कि ब्रह्मांड का लगभग 27% हिस्सा डार्क मैटर से भरा है। ये दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके ग्रेविटेशनल असर से वैज्ञानिक जानते हैं कि यह मौजूद है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    इसी तरह न्यूट्रिशन साइंस भी डार्क मैटर की तरह एक रहस्य से भरा है। हमारी थाली में ढेर सारे ऐसे केमिकल्स हैं जिन्हें हम रोज खाते हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि उनका शरीर पर क्या असर पड़ता है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    इन्हें ही वैज्ञानिक “Nutritional Dark Matter” कहते हैं।

    फूडोमिक्स (Foodomics) क्या है?

    इस डार्क मैटर को समझने के लिए एक नई रिसर्च फील्ड है – Foodomics
    यह चार साइंस की ब्रांच को जोड़ती है:

    • Genomics (जीन्स का रोल)
    • Proteomics (प्रोटीन्स का स्टडी)
    • Metabolomics (सेल एक्टिविटी)
    • Nutrigenomics (जीन्स और डाइट का रिश्ता)

    इससे पता चल रहा है कि खाना सिर्फ कैलोरी और विटामिन का खेल नहीं, बल्कि एक जटिल केमिकल वेब है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    उदाहरण: मेडिटेरेनियन डाइट क्यों काम करती है?

    मेडिटेरेनियन डाइट (Mediterranean Diet) में फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, होल ग्रेन्स, लेग्यूम्स, नट्स, ऑलिव ऑयल और मछली शामिल होती है। इसे हार्ट डिजीज से बचाव के लिए बेस्ट माना जाता है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    लेकिन क्यों?

    👉 रिसर्च से पता चला है कि जब हम रेड मीट और अंडे खाते हैं तो गट बैक्टीरिया उन्हें तोड़कर TMAO (Trimethylamine N-oxide) बनाते हैं। TMAO की हाई लेवल हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाती है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    लेकिन लहसुन में मौजूद कुछ पदार्थ TMAO के बनने को ब्लॉक कर देते हैं। यानी डाइट में एक चीज दूसरी के नेगेटिव असर को कंट्रोल कर सकती है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    गट बैक्टीरिया और डाइट का रिश्ता

    हमारे आंतों के बैक्टीरिया कई कम्पाउंड्स को नए केमिकल्स में बदल देते हैं, जो इंफ्लेमेशन, इम्युनिटी और मेटाबोलिज्म पर असर डालते हैं। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    उदाहरण:

    • Ellagic Acid (फ्रूट्स और नट्स में पाया जाने वाला) गट बैक्टीरिया की मदद से Urolithins में बदल जाता है।
    • ये यू्रोलिथिन्स हमारी माइटोकॉन्ड्रिया (शरीर की एनर्जी फैक्ट्री) को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

    जेनेटिक्स और डाइट का कनेक्शन

    डाइट सिर्फ शरीर पर असर नहीं डालती, बल्कि हमारे जीन्स को भी ऑन-ऑफ कर सकती है। इसे कहते हैं EpigeneticsThe ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    उदाहरण:
    दूसरे विश्व युद्ध में जब नीदरलैंड में अकाल पड़ा, उस समय गर्भवती माताओं के बच्चों में आगे चलकर हार्ट डिजीज, डायबिटीज और स्किज़ोफ्रेनिया का खतरा ज्यादा पाया गया। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    सालों बाद पता चला कि उनकी जीन एक्टिविटी उनकी माँ की डाइट से बदल गई थी। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    फूडोम प्रोजेक्ट: खाने का नक्शा बनाना

    आज Foodome Project जैसे इंटरनेशनल रिसर्च चल रहे हैं, जिनमें अब तक 1.3 लाख से ज्यादा फूड मॉलिक्यूल्स को लिस्ट किया जा चुका है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    इनका मकसद है एक ऐसा Atlas of Food Chemistry बनाना जिससे पता चले कि कौन सा कम्पाउंड शरीर पर क्या असर करता है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    क्यों जरूरी है ये समझना?

    • क्यों एक डाइट कुछ लोगों पर काम करती है और कुछ पर नहीं?
    • क्यों कुछ फूड्स बीमारी से बचाते हैं और कुछ उसे बढ़ाते हैं?
    • कौन से फूड कम्पाउंड्स को नई दवाइयों या न्यूट्रिशनल फूड्स में बदला जा सकता है?

    ये सारे जवाब Nutritional Dark Matter को समझे बिना नहीं मिल सकते। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    निष्कर्ष

    हमारी थाली में सिर्फ कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स ही नहीं, बल्कि हजारों छुपे हुए केमिकल्स भी हैं। यह डार्क मैटर ऑफ न्यूट्रिशन हमारी सेहत, जीन्स और आने वाली पीढ़ियों पर असर डाल सकता है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

    जिस तरह डार्क मैटर ने ब्रह्मांड की समझ बदल दी, उसी तरह न्यूट्रिशनल डार्क मैटर को समझना हमारी सेहत, बीमारियों के इलाज और खाने की आदतों को बदल सकता है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

  • मुंबई के कांदीवली शताब्दी अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र केंद्र

    मुंबई के कांदीवली शताब्दी अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र केंद्र

    मुंबई महानगरपालिका ने कांदीवली शताब्दी अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र केंद्र शुरू किया। अब पश्चिमी उपनगरों के दिव्यांगों को बड़ी राहत मिलेगी। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से कांदीवली पश्चिम स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जनरल हॉस्पिटल (शताब्दी) में नया दिव्यांग परीक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणपत्र वितरण केंद्र शुरू किया गया है। इस पहल से पश्चिमी उपनगरों के दिव्यांग नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले दस्तावेज़ और प्रमाणपत्र बनाने के लिए जेजे या कूपर अस्पताल तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

    किस तरह के प्रमाणपत्र मिलेंगे?

    इस नए केंद्र पर चार श्रेणियों में दिव्यांग प्रमाणपत्र उपलब्ध होंगे:

    1. हड्डी से जुड़ी विकलांगता (Orthopaedic disabilities)
    2. कान से जुड़ी विकलांगता (Ear-related conditions)
    3. आंखों की विकलांगता (Eye impairments)
    4. कुष्ठ रोग से संबंधित विकलांगता (Leprosy-related deformities)

    किन क्षेत्रों के लोगों को मिलेगी राहत?

    अब जोगेश्वरी से दहिसर और मीरा रोड से विरार तक के दिव्यांग नागरिकों को दस्तावेज़ीकरण के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुविधा सीधे कांदीवली पश्चिम के शताब्दी अस्पताल में उपलब्ध होगी। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

    प्रक्रिया और पंजीकरण

    • दिव्यांग नागरिकों को पहले Unique Disability ID (UDID) के लिए सरकारी वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा।
    • पंजीकरण के बाद योग्य उम्मीदवारों को हर बुधवार मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
    • अस्पताल में एक विशेष अटेंडेंट भी तैनात रहेगा जो मरीजों को सभी विभागों तक लेकर जाएगा, रिपोर्ट जमा कराने में मदद करेगा और उनकी प्रक्रिया को आसान बनाएगा।

    अस्पताल प्रबंधन की भूमिका

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका अस्पतालों के मुख्य अधीक्षक डॉ. चंद्रकांत पवार ने बताया कि यह कदम न सिर्फ स्थानीय मरीजों को फायदा देगा बल्कि कूपर अस्पताल पर बोझ भी कम करेगा। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

    शुरुआत में यह केंद्र प्रति सप्ताह केवल 3–4 मरीजों को प्रमाणपत्र जारी करेगा क्योंकि कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि फर्जी दावों को रोका जा सके। अनुभव और प्रशिक्षण बढ़ने के साथ प्रमाणपत्र वितरण की गति भी बढ़ाई जाएगी। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

    मुंबई महानगरपालिका की यह पहल दिव्यांग नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल समय और यात्रा की परेशानी कम होगी बल्कि दिव्यांगों को एक सम्मानजनक और सुविधाजनक व्यवस्था भी मिलेगी। Disability Certification Centre at Shatabdi Hospital, Kandivali, Mumbai

  • साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    भारत सरकार का सीईआरटी-इन नागरिकों को साइबर सुरक्षा के लिए “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करने की सलाह दे रहा है। जानें कैसे बचे मालवेयर और बॉटनेट से। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    आज के डिजिटल दौर में हर कोई इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हैकर्स अक्सर बॉटनेट (Botnet) और मालवेयर (Malware) के जरिए लोगों के मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिवाइस पर हमला करते हैं। ऐसे हमलों से न केवल आपकी पर्सनल जानकारी चोरी हो सकती है, बल्कि बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारियां भी खतरे में पड़ जाती हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली सीईआरटी-इन (CERT-In) यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने आम जनता के लिए खास पहल की है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    सीईआरटी-इन का “फ्री बॉट रिमूवल टूल”

    सीईआरटी-इन ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://www.csk.gov.in से “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करें। यह टूल खास तौर पर ऐसे सॉफ़्टवेयर और प्रोग्राम को पहचानता है जो आपके डिवाइस को संक्रमित कर सकते हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इस टूल की मदद से –

    • आपके कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद हानिकारक बॉटनेट को हटाया जा सकता है।
    • डिवाइस की सिक्योरिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।
    • ऑनलाइन लेन-देन और पर्सनल डाटा को चोरी होने से बचाया जा सकता है।

    बॉटनेट और मालवेयर क्या हैं?

    बॉटनेट ऐसे संक्रमित डिवाइसों का नेटवर्क होता है जिसे साइबर अपराधी कंट्रोल करते हैं। एक बार डिवाइस संक्रमित हो जाए, तो उसे रिमोटली इस्तेमाल कर स्पैम ईमेल भेजने, ऑनलाइन धोखाधड़ी करने या बड़े स्तर पर साइबर अटैक करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
    मालवेयर यानी हानिकारक सॉफ़्टवेयर आपके डिवाइस में घुसकर आपकी जानकारी चुरा सकता है या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    कैसे बचें साइबर हमलों से?

    सीईआरटी-इन और दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को कुछ आसान साइबर सुरक्षा टिप्स भी दिए हैं:

    1. फ्री बॉट रिमूवल टूल ज़रूर डाउनलोड करें।
    2. अपने मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा एंटीवायरस अपडेट रखें।
    3. अनजान लिंक या संदिग्ध ईमेल पर क्लिक करने से बचें।
    4. डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स में हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।
    5. समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखें।

    क्यों है जरूरी यह टूल?

    मुंबई जैसे बड़े शहरों में रोज़ हजारों लोग ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं। साइबर फ्रॉड के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में कई मामलों में देखा गया कि लोगों के डिवाइस पर मालवेयर अटैक हुआ और उनकी बैंक अकाउंट डिटेल्स चोरी हो गईं। ऐसे में यह टूल हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    नतीजा

    भारत सरकार की यह पहल आम नागरिकों को साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि हर कोई इस फ्री बॉट रिमूवल टूल को डाउनलोड कर लेता है और बुनियादी सावधानियां बरतता है, तो न केवल व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रहेगा बल्कि देश की साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

  • मनोज जारंगे आंदोलन को मिला विधायकों और सांसदों का समर्थन

    मनोज जारंगे आंदोलन को मिला विधायकों और सांसदों का समर्थन

    मराठा आरक्षण आंदोलन में मनोज जारंगे पाटिल को विधायकों और सांसदों का बड़ा समर्थन मिल रहा है। मुंबई की ओर रैली से सरकार पर दबाव बढ़ा।

    महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे मनोज जारंगे पाटिल का आंदोलन अब और तेज़ हो गया है। “चलो मुंबई” के नारे के बाद पूरे महाराष्ट्र में मराठा समाज बड़ी संख्या में उनके साथ खड़ा हो रहा है। खास बात यह है कि पहले चुप रहने वाले विधायक और सांसद अब समर्थन जताने के लिए आगे आने लगे हैं। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    जारंगे की यह स्पष्ट चेतावनी कि “जो विधायक और सांसद मराठा समाज के साथ नहीं होंगे, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी”, नेताओं पर दबाव डालने लगी है। नतीजा यह हुआ कि अब विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि खुले तौर पर जारंगे के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    बीड जिले से बढ़ा समर्थन

    बीड के विधायक संदीप क्षीरसागर ने अंतरवली सराटी जाकर मनोज जारंगे से मुलाकात की और आंदोलन का समर्थन किया। इतना ही नहीं, वे मराठा युवकों के साथ रैली में भी शामिल हुए। बीड से ही सांसद बजरंग सोनवणे और माजलगांव के विधायक प्रकाश सोलंके ने भी आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    वहीं, गेवराई विधायक विजयसिंह पंडित ने पहले ही सोशल मीडिया के जरिए “चलो मुंबई” का आह्वान कर दिया था और निर्वाचन क्षेत्र में बड़े-बड़े बैनर भी लगाए गए थे। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    धाराशिव और अन्य जिलों का रुख

    धाराशिव के विधायक कैलास पाटिल ने फेसबुक पोस्ट कर जारंगे के आंदोलन को जॉइन करने की अपील की है। ओमराजे निंबालकर ने भी सरकार से अपील की है कि मराठा समाज की मांगों को तुरंत सुलझाया जाए। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    राज्य के अन्य हिस्सों में भी नेताओं की ओर से समर्थन मिलने लगा है। एनसीपी (शरद पवार गुट), एनसीपी (अजित पवार गुट), शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और कांग्रेस—all पार्टियों ने आंदोलन को समर्थन दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात ने भी मराठा समाज की मांगों को जायज़ बताते हुए आंदोलन के पक्ष में आवाज़ उठाई। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    गाँवों से उमड़ा जनसैलाब

    सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक स्तर पर भी आंदोलन को भारी समर्थन मिल रहा है। महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों से मराठा समाज के लोग ट्रैक्टर, बस और गाड़ियों में भरकर मुंबई की ओर रवाना हो गए हैं। कई गांवों के युवा अपने गाँव के बैनर और झंडे लेकर जारंगे की रैली में शामिल हो रहे हैं। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

    सरकार पर बढ़ता दबाव

    जारंगे के आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक और सामाजिक समर्थन सरकार के लिए चुनौती बन गया है। नेताओं का झुकाव और जनता का बढ़ता दबाव यह साफ दिखा रहा है कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस समाधान नहीं निकाला, तो मुंबई में बड़ा जनसैलाब खड़ा हो सकता है। Manoj Jarange movement got the support of MLAs and MPs

  • मुंबई लोकल ट्रेन में बुर्का पहनी लड़की से बदसलूकी, वीडियो वायरल | महिला बोली – ‘नक़ाब उतारकर करो नंगा नाच’

    मुंबई लोकल ट्रेन में बुर्का पहनी लड़की से बदसलूकी, वीडियो वायरल | महिला बोली – ‘नक़ाब उतारकर करो नंगा नाच’

    मुंबई लोकल ट्रेन में बुर्का पहनी लड़की को हिंदू दोस्तों के साथ देखकर महिला ने भरी ट्रेन में अपमानित किया। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पहचान, धर्म और स्वतंत्रता पर बहस छिड़ी। A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance’

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की लोकल ट्रेन, जिसे आमतौर पर शहर की “लाइफलाइन” कहा जाता है, एक बार फिर विवाद की वजह से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला ने बुर्का पहनी युवती को उसके हिंदू दोस्तों के साथ यात्रा करने पर जमकर अपमानित किया। यह घटना जैसे ही सामने आई, लोगों के बीच धार्मिक स्वतंत्रता, पहचान और सामाजिक दबाव को लेकर बहस छिड़ गई। A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance’

    महिला की भरी ट्रेन में अपमानजनक टिप्पणी

    वायरल वीडियो में महिला को गुस्से में चिल्लाते हुए सुना जा सकता है। वह बुर्का पहनी लड़की को निशाना बनाते हुए कहती है – “देखो इस मुस्लिम लड़की को, यह हमारी कौम की बदनामी कर रही है। अगर नंगा नाच करना है तो नक़ाब उतारकर करो, हमारे बुर्के को बदनाम मत करो।” A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance’

    उस समय ट्रेन में मौजूद यात्री महिला की बातों से हक्के-बक्के रह गए। कई लोग एक-दूसरे की तरफ चिंता से देखने लगे, जबकि कुछ यात्री चुपचाप तमाशा देखते रहे। पूरी घटना के दौरान लड़की ने ज्यादातर चुप्पी साधे रखी और खुद का बचाव नहीं किया। A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance’

    यात्रियों और सोशल मीडिया पर बहस

    मुंबई लोकल ट्रेन में होने वाली यह घटना जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आई, वीडियो ने धूम मचा दी।

    • कुछ नेटिज़न्स ने महिला की टिप्पणियों को असहिष्णु और पिछड़े विचारों वाला बताया।
    • वहीं कुछ ने कहा कि लड़की का किसके साथ सफर करना उसकी निजी स्वतंत्रता है, इसमें दूसरों को दखल देने का कोई अधिकार नहीं।

    सोशल मीडिया पर यह वीडियो अब पहचान, व्यक्तिगत आज़ादी और धार्मिक संवेदनशीलता पर चर्चा का केंद्र बन चुका है।

    मुंबई लोकल – सिर्फ सफर नहीं, कहानियों का मंच

    मुंबई की लोकल ट्रेनें रोज़ाना लाखों लोगों को उनकी मंज़िल तक पहुंचाती हैं। यहां दोस्ती, बहस, संघर्ष और मानवीय रिश्तों की हजारों कहानियां जन्म लेती हैं। लेकिन यह घटना दिखाती है कि सार्वजनिक परिवहन कभी-कभी समाज के अंदरूनी तनाव और असहिष्णुता को भी उजागर कर देता है। A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance’

    विवाद और सवाल

    यह स्पष्ट नहीं है कि घटना कब घटी, लेकिन 26 अगस्त 2025 को वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर यूज़र Treeni द्वारा साझा किया गया था।
    हालांकि Indian Fasttrack News ने भी स्पष्ट किया कि वह इस वीडियो की प्रामाणिकता की गारंटी नहीं देता।

    🔎 निष्कर्ष

    मुंबई लोकल ट्रेन में हुई यह घटना सिर्फ एक झगड़ा नहीं बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है, जहां पहचान, धर्म और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर लोगों के विचार टकराते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस बात को और गहराई से सामने ला दिया है कि आज भी समाज में सहनशीलता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर लंबी दूरी तय करनी बाकी है। A burqa-clad girl was mistreated in Mumbai local train, video went viral | The woman said – ‘Remove the veil and do a nudist dance

  • HC का झटका: मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे अब मुंबई में बिना परमिशन प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे

    HC का झटका: मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे अब मुंबई में बिना परमिशन प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने गणेशोत्सव को देखते हुए मनोज जरांगे को बिना अनुमति प्रदर्शन से रोका। अब सिर्फ तय जगह पर ही हो सकेगा आंदोलन।

    मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने साफ कहा कि अब जरांगे बिना परमिशन के मुंबई में आंदोलन या प्रदर्शन नहीं कर सकते। कोर्ट ने ये आदेश इसलिए दिया क्योंकि गणेशोत्सव के दौरान पुलिस पहले से ही शहर की सुरक्षा और भीड़ कंट्रोल में व्यस्त रहेगी।

    हाईकोर्ट की बेंच ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना सबका हक है, लेकिन ये सिर्फ निर्धारित जगहों पर और सरकार की इजाजत लेकर ही किया जा सकता है। जरांगे और उनके समर्थकों को सरकार चाहे तो नवी मुंबई के खारघर में वैकल्पिक जगह भी दे सकती है, ताकि मुंबई की लाइफ और ट्रैफिक पर असर न पड़े।

    जरांगे ने हाल ही में सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर मराठा समाज को OBC कोटे में 10% आरक्षण नहीं मिला, तो वह 29 अगस्त से मुंबई में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे। इसी को लेकर अदालत में एमी फाउंडेशन ने जनहित याचिका दायर की थी।

    राज्य सरकार ने भी कोर्ट में कहा कि वे शांतिपूर्ण आंदोलन का विरोध नहीं करते, लेकिन गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहार में भीड़ और ट्रैफिक की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसी कारण कोर्ट ने परमिशन की शर्त रखी।

    अब अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी और जरांगे को इस मामले में जवाब दाखिल करना होगा।