मुंबई के 2009 मुलुंड हत्याकांड में 17 साल से फरार फिरोज शेख गिरफ्तार। बिहार से टिटवाला तक ठिकाना बदलकर रह रहा था आरोपी, पुलिस ने ऐसे पकड़ा।
मुंबई: मुलुंड में 2009 में हुए हत्या के मामले में 17 साल से फरार आरोपी फिरोज मोहम्मद सुलेमान शेख को मुलुंड पुलिस ने टिटवाला पूर्व के बनेली गांव से गिरफ्तार किया है। आरोपी बिहार में अपने पैतृक गांव से लेकर कई जगहों पर ठिकाना बदलकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी पहचान छिपाने के लिए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बदलता रहता था। आखिरकार गुप्त सूचना और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।
गिरफ्तार आरोपी की उम्र पुलिस से संबंधित उपलब्ध जानकारी में 39 वर्ष बताई गई है। वह बनेली गांव की लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में अपने परिवार के साथ रह रहा था और एक निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था।
पुराने विवाद में हुई थी मसकूर की हत्या
यह मामला 20 जून 2009 का है। मुलुंड पुलिस थाना क्षेत्र में इराम उर्फ मसकूर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फिरोज, अफरोज और उनके दो अन्य साथियों पर हत्या में शामिल होने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश थी। बताया जाता है कि फिरोज के भाई को मृतक के साथ काम करते समय आंखों में चोट लगी थी, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच गांव की जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा था।
इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर मसकूर के सिर पर हथौड़े से वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मुलुंड पुलिस थाने में CR No. 218/2009 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।
बिहार में तलाश के बाद टिटवाला में मिला ठिकाना
हत्या के बाद फिरोज पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो गया था। पुलिस ने बिहार में उसके पैतृक गांव में भी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद उसे वांटेड आरोपी घोषित किया गया।
पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि आरोपी अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है और मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड बदलता रहता है। इस वजह से उसकी तलाश में परेशानी आ रही थी।
मुलुंड पुलिस ने बिहार में अपने गुप्त मुखबिरों के नेटवर्क की मदद से उसकी जानकारी जुटाई। गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर पता चला कि आरोपी अब बिहार में नहीं, बल्कि टिटवाला पूर्व के बनेली गांव में रह रहा है।
इसके बाद पुलिस टीम ने लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया। वह वहां परिवार के साथ रह रहा था और निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था। पूछताछ और जांच में उसकी पहचान 2009 के हत्या मामले के वांटेड आरोपी के रूप में हुई।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) मनोज कुमार, अपर पुलिस आयुक्त पूर्व प्रादेशिक विभाग धनंजय कुलकर्णी, पुलिस उपायुक्त पूर्व परिमंडल-3 अभयसिंह देशमुख और सहायक पुलिस आयुक्त मुलुंड विभाग सुदर्शन होनवडजकर के मार्गदर्शन में की गई।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष घाटेकर की निगरानी में सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद लभडे और पुलिस उपनिरीक्षक स्वप्निल महाजन ने टीम के साथ कार्रवाई की।
इस टीम में पुलिस हवलदार चव्हाण, शेडगे और चौघुले तथा पुलिस सिपाही शिंपी, करदोरे, गावडे, सरकटे और आव्हाड शामिल थे। बिहार में मुखबिरों से मिली जानकारी और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में टीम को सफलता मिली।
गिरफ्तारी के बाद पुराने मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर
करीब 17 साल पुराने इस हत्या मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में शामिल बताए गए अन्य तीन आरोपियों की वर्तमान स्थिति और पुराने मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी सामने आना बाकी है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध गंभीर श्रेणी में आता है, जबकि धारा 34 साझा मंशा से किए गए अपराध में सामूहिक जिम्मेदारी से संबंधित है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और पुलिस जांच के अनुसार होगी।
