मुंबई के मलाड पूर्व में चॉल के पुनर्विकास को लेकर मराठी अभिनेता अभिजीत केलकर ने गंभीर आरोप लगाए। जान को खतरा बताते हुए देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से मदद मांगी।
मुंबई: मलाड पूर्व में चॉल के पुनर्विकास को लेकर मराठी अभिनेता अभिजीत केलकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि बिल्डर और कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में लोगों के पुश्तैनी घर तोड़े जा रहे हैं और विरोध करने वाले निवासियों को धमकियां दी जा रही हैं। अभिनेता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मदद की गुहार लगाई है।
31 अक्टूबर 2026 को सामने आई उनकी फेसबुक पोस्ट में मलाड पूर्व के पुष्पा पार्क और बाणडोंगरी इलाके का मामला उठाया गया है। केलकर का कहना है कि वह पिछले छह महीनों से इस पूरे विवाद को देख रहे हैं और खुद भी इसका सामना कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनका विरोध पुनर्विकास से नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं और लोगों के घरों पर अधिकार छीनने की कोशिशों से है।
अभिजीत केलकर ने फेसबुक पोस्ट में क्या आरोप लगाए?
अभिजीत केलकर ने अपनी पोस्ट में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें दोनों नेताओं पर भरोसा है, लेकिन मलाड पूर्व के पुष्पा पार्क और बाणडोंगरी में स्थानीय स्तर पर गरीब परिवारों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने लिखा कि इन इलाकों में उनके परिवार के पुश्तैनी घर हैं। उनके माता-पिता ने मेहनत करके यहां अपना घर बनाया और परिवार का पालन-पोषण किया। इन घरों से कई परिवारों की पीढ़ियों की यादें और जीवन जुड़ा हुआ है।
अभिनेता के अनुसार, कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि और बिल्डर मिलकर गरीब परिवारों के सिर से छत छीनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर के पैसे के प्रभाव से व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है और स्थानीय लोगों को कथित तौर पर गुंडों के जरिए धमकाया जा रहा है।
केलकर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ घर बिना उचित एग्रीमेंट और जरूरी दस्तावेज दिखाए तोड़े जा रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि वह किसी को बदनाम नहीं करना चाहते, इसलिए फिलहाल संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि आगे चलकर उन्हें नाम उजागर करने पड़ सकते हैं।
‘मेरी जान को खतरा है’, परिवार को बताकर घर से निकले अभिनेता
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात अभिजीत केलकर का अपनी सुरक्षा को लेकर जताया गया डर है।
उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा कि उनकी जान को खतरा है। उन्होंने बताया कि घर से निकलने से पहले अपनी मां, पत्नी और बच्चों को पूरी स्थिति के बारे में बता दिया है।
अभिनेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उनके अधिकार के घर मिलने चाहिए।
उनका कहना है कि जिन परिवारों ने वर्षों तक मेहनत करके अपने घर बनाए हैं, उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के बेघर नहीं किया जाना चाहिए।
घरों को आधा तोड़ने और पुनर्विकास की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अभिजीत केलकर ने अपनी एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में तोड़े गए घरों की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं। उन्होंने पुनर्विकास की प्रक्रिया और निर्माण स्थल की व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं।
उनके आरोपों के मुताबिक:
- कुछ घरों को कथित तौर पर आधा तोड़ दिया गया है, जबकि निर्माण स्थल के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
- प्रभावित लोगों को घर खाली करने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
- कुछ परिवारों के पास उचित एग्रीमेंट और पूरे दस्तावेज नहीं होने के बावजूद तोड़फोड़ की जा रही है।
- निर्माण स्थल तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सड़क की व्यवस्था नहीं है। वहां केवल एक संकरा पुल है, जिससे लोगों का आना-जाना संभव है।
- जिन जमीन मालिकों की जमीन पर पुनर्विकास प्रस्तावित है, उनसे कथित तौर पर NOC नहीं लिया गया है।
केलकर ने सवाल उठाया है कि अगर जमीन मालिक पहले ही कोर्ट का रुख कर चुके हैं और भविष्य में अदालत ने पुनर्विकास परियोजना पर रोक लगा दी, तो जिन लोगों के घर पहले ही तोड़े जा चुके होंगे, उन्हें घर या किराया कैसे मिलेगा?
50-60 साल से रह रहे परिवारों को SRA में अपात्र करने का आरोप
अभिनेता ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) की पात्रता प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि कुछ परिवार पिछले 50 से 60 वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं, लेकिन बिल्डर के सामने झुकने से इनकार करने वाले कुछ लोगों को SRA प्रक्रिया के तहत अपात्र घोषित कर दिया गया है।
इसके उलट, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय दबंगों ने कथित तौर पर अनधिकृत झोपड़ियां बनाकर उन्हें पात्र करवा लिया है।
केलकर ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए मांग की है कि लंबे समय से रहने वाले वास्तविक निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
सैन्य परिसर के पास निर्माण को लेकर भी उठाया सवाल
अभिजीत केलकर ने पुनर्विकास परियोजना की जगह के पास स्थित सैन्य परिसर और Central Ordnance Depot (COD) का मुद्दा भी उठाया है।
उनका सवाल है कि सैन्य प्रतिष्ठान के आसपास निर्माण की ऊंचाई और अन्य नियमों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को आवश्यक मंजूरियां मिली हैं या नहीं।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि घर तोड़ने के बाद रक्षा विभाग की ओर से निर्माण पर आपत्ति आती है या परियोजना को अनुमति नहीं मिलती, तो पहले से बेघर हो चुके परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह सवाल भी उठाया गया है कि परियोजना की सड़क कनेक्टिविटी, जमीन मालिकों की सहमति और निर्माण संबंधी मंजूरियों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
पुनर्विकास के खिलाफ नहीं हैं अभिजीत केलकर
अभिनेता ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया है कि वह मलाड के चॉल और झुग्गी बस्ती इलाकों में पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं।
उनकी मांग है कि पुनर्विकास की प्रक्रिया पारदर्शी हो और लंबे समय से रहने वाले परिवारों को उनके अधिकारों के अनुसार घर मिलें। जिन लोगों को SRA के तहत अपात्र घोषित किया गया है, उनकी पात्रता की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल किया है कि क्या वे लिखित रूप में यह जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं कि चॉल में रहने वाले सभी वास्तविक और प्रभावित परिवारों को उनका हक मिलेगा?
केलकर का कहना है कि यदि प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों और घरों की गारंटी लिखित रूप में दी जाती है, तो वे पुनर्विकास प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
फिलहाल इस मामले में बिल्डर, संबंधित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, SRA और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अभिजीत केलकर द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और मलाड पूर्व के प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।
