मुंबई में सायन, विद्याविहार और गोरेगांव-मुलुंड मार्ग के 3 पुलों का लोकार्पण हुआ। जानें, इनसे ट्रैफिक और यात्रियों को क्या राहत मिलेगी।
मुंबई: शहर में ट्रैफिक की परेशानी कम करने और लोगों का सफर आसान बनाने की दिशा में तीन महत्वपूर्ण पुल शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 22 अक्टूबर 2026 को सायन रेलवे स्टेशन, विद्याविहार रेलवे स्टेशन और गोरेगांव-मुलुंड जोड़ मार्ग पर बने पुलों का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं से सड़क यातायात को बेहतर बनाने, समय बचाने और मुंबई के पूर्वी-पश्चिमी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा बंगले से ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया कि शहर में चल रहे सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तय समय पर और गुणवत्ता से समझौता किए बिना पूरे किए जाएं।
सायन ब्रिज तय समय से चार महीने पहले तैयार
सायन रेलवे स्टेशन के पास बना पुराना ब्रिटिशकालीन पुल करीब 112 साल पुराना था। सुरक्षा कारणों से इसे बंद करना पड़ा था। इसके बाद मध्य रेलवे और बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मिलकर नया पुल तैयार किया, जिसका काम तय समय से चार महीने पहले पूरा कर लिया गया।
इस पुल के शुरू होने से सायन और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे लाइन के आसपास सड़क यातायात की बाधाएं कम करने में भी यह पुल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विद्याविहार में 30 मिनट की दूरी अब 10 मिनट में
विद्याविहार रेलवे स्टेशन के पास बने नए पुल से पूर्व और पश्चिम हिस्सों के बीच आने-जाने वाले नागरिकों का समय बच सकता है। पहले इस इलाके में एक ओर से दूसरी ओर जाने में करीब आधे घंटे तक लग जाता था। अब यह सफर लगभग 10 मिनट में पूरा हो सकेगा।
इससे रोजाना नौकरी, कारोबार और दूसरे कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। स्टेशन के आसपास यातायात का दबाव कम करने और स्थानीय कनेक्टिविटी सुधारने के लिहाज से भी यह परियोजना अहम है।
गोरेगांव-मुलुंड मार्ग से पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी होगी मजबूत
गोरेगांव-मुलुंड जोड़ मार्ग पर बने पुल का उद्देश्य मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच आवागमन को आसान बनाना है। इस मार्ग पर सड़क, पुल और भूमिगत सुरंगों जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग इलाकों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सके।
इस परियोजना से यातायात का दबाव कम करने और लोगों को बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पूरे गोरेगांव-मुलुंड मार्ग पर यात्रा का समय कितना कम होगा, इसका कोई विस्तृत आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
25 से 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो रहा मुंबई का विकास
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई की पायाभूत सुविधाओं का विकास केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहर की योजना अगले 25 से 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी होने के साथ देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। इसलिए सड़कों, समुद्री किनारे के मार्ग, पुलों और सुरंगों जैसी परियोजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का असली उद्देश्य लोगों का जीवन आसान बनाना है। नागरिकों को ट्रैफिक में कम समय बिताना पड़े, उनका सफर सुरक्षित हो और वे समय पर अपने घर पहुंच सकें, इसी दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने महानगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को परियोजनाओं में आने वाली रुकावटें दूर करने तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए।
महापौर रितु तावड़े ने क्या कहा?
मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने कहा कि ये तीनों पुल केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि मुंबईकरों का कीमती समय बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने सायन के पुराने पुल का जिक्र करते हुए बताया कि इसे तय समय से चार महीने पहले तैयार किया गया।
महापौर ने कहा कि शहर में सड़कों का कंक्रीटीकरण, गड्ढों से राहत, पैदल चलने वालों की सुरक्षा और हरियाली बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना महानगरपालिका के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उपमहापौर संजय घाड़ी ने कहा कि मुंबईकरों को बेहतर सड़कें और पुल उपलब्ध कराना जरूरी है। दहिसर से मुंबई के दूसरे हिस्सों तक आने-जाने वाले लोगों को रोजाना ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है और कई बार सफर में दो घंटे तक लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि जोड़ मार्ग, पुल और भूमिगत सुरंगों के विकास से यात्रा के समय के साथ ईंधन की बचत में भी मदद मिल सकती है।
आयुक्त अश्विनी भिड़े ने बताया कि इन तीनों पुल परियोजनाओं से मुंबई की यातायात व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। शहर की बढ़ती आबादी और यातायात की जरूरतों को देखते हुए सड़क और पुल जैसी सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुआ?
लोकार्पण समारोह में उपमुख्यमंत्री सुनेत्राताई अजित पवार, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा सांस्कृतिक कार्य मंत्री और मुंबई उपनगर जिले के पालकमंत्री एडवोकेट आशीष शेलार शामिल हुए।
इसके अलावा सांसद अनिल देसाई और रविंद्र वायकर, विधायक अमित साटम, पराग शाह, कैप्टन आर. तमिल सेल्वन, अनंत नर, सुनील प्रभू, महेश सावंत और राजहंस सिंह भी कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

पूर्व सांसद राहुल शेवाले, सभागृह नेता गणेश खणकर, विरोधी पक्षनेता किशोरी पेडणेकर, शिवसेना गटनेते अमेय घोले, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, स्थापत्य समिति (उपनगर) अध्यक्ष संगीता शर्मा, एन प्रभाग समिति अध्यक्ष अश्विनी मते, एफ दक्षिण और एफ उत्तर प्रभाग समिति अध्यक्ष मानसी सातमकर तथा बाजार एवं उद्यान समिति के उपाध्यक्ष भास्कर शेट्टी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में नगरसेवक धर्मेश गिरी, सुरेश आवळे, एडवोकेट सुहास वाडकर, तुलसीराम शिंदे और सुषम सावंत तथा नगरसेविकाएं राखी जाधव, निर्मिती कानडे, अर्चना भालेराव, प्रीति सातम और साक्षी कनोजिया भी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा बंगले पर महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी और अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर मौजूद रहे।
इसके अलावा उपायुक्त (इंफ्रास्ट्रक्चर) गिरीश निकम, एन विभाग के सहायक आयुक्त जयदीप मोरे, पी पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त रुपाली सरमळकर, एफ उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त अरुण क्षीरसागर और प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुळे सहित विभिन्न अधिकारी भी अपने-अपने स्थानों पर उपस्थित रहे।
तीनों पुलों के शुरू होने से मुंबई की सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ट्रैफिक में वास्तविक राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आसपास की सड़कों पर यातायात का प्रबंधन कितना प्रभावी रहता है और बाकी जुड़ी हुई परियोजनाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं। महानगरपालिका के सामने अब इन सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने और शहर की बढ़ती यातायात जरूरतों के अनुरूप बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य पूरे करने की चुनौती है।
