महाराष्ट्र में अनधिकृत फ्लैटों की रजिस्ट्री पर नए निर्देश। जानें जरूरी दस्तावेज, मंजूर नक्शे की जांच, पुराने घरों की बिक्री और खरीदारों पर असर।
मुंबई: महाराष्ट्र में अनधिकृत निर्माण और मंजूर नक्शे से ज्यादा क्षेत्रफल वाले फ्लैटों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने नए निर्देश जारी किए हैं। 12 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के जरिए दुय्यम निबंधकों को संपत्ति के दस्त रजिस्टर करते समय जरूरी कागजात और फ्लैट के मंजूर क्षेत्रफल की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले का मकसद घर खरीदने वालों को गलत जानकारी देकर फ्लैट बेचने और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामलों पर रोक लगाना है। हालांकि, पुराने भवनों के पास मंजूर नक्शे उपलब्ध नहीं होने की समस्या भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नए नियमों का असर पहले से बनी इमारतों में फ्लैट खरीदने और बेचने वालों पर कैसे पड़ेगा।
फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
नए निर्देशों के अनुसार, संपत्ति के दस्त रजिस्टर करते समय प्रोजेक्ट की कैटेगरी और लागू नियमों के हिसाब से जरूरी दस्तावेजों की जांच करनी होगी।
MahaRERA के दायरे में आने वाले प्रोजेक्टों के लिए संबंधित पंजीकरण प्रमाणपत्र या लागू निर्देशों के अनुसार ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (OC), मंजूर भवन नक्शा और उसमें दर्ज फ्लैट के क्षेत्रफल की जांच महत्वपूर्ण होगी।
वहीं, MahaRERA में रजिस्ट्रेशन से छूट वाले प्रोजेक्टों के लिए निर्माण अनुमति या कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC), मंजूर भवन नक्शा, जोन सर्टिफिकेट और माप या सर्वे नक्शे जैसे दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि CC और OC अलग-अलग दस्तावेज हैं। CC निर्माण शुरू करने की अनुमति से जुड़ा होता है, जबकि OC भवन के इस्तेमाल या उसमें रहने की अनुमति से संबंधित है। किसी प्रोजेक्ट का MahaRERA में रजिस्ट्रेशन होना भी इस बात की पूरी गारंटी नहीं है कि इमारत का हर हिस्सा मंजूर नक्शे के अनुसार बना है।
मंजूर नक्शे से ज्यादा क्षेत्रफल होने पर क्या होगा?
यदि फ्लैट के बिक्री दस्त में दर्ज क्षेत्रफल मंजूर भवन नक्शे में दर्ज क्षेत्रफल से ज्यादा पाया जाता है, तो नए निर्देशों के तहत रजिस्ट्री में रुकावट आ सकती है।
इसका सीधा संबंध उन मामलों से है, जिनमें खरीदार को फ्लैट का ऐसा क्षेत्रफल बताया जाता है जो मंजूर नक्शे या संबंधित दस्तावेजों से मेल नहीं खाता।
हालांकि, क्षेत्रफल की जांच करते समय कारपेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और दूसरे मापों के बीच अंतर समझना जरूरी है। इन सभी को एक ही मानकर तुलना नहीं की जा सकती। किसी मामले में अंतर दिखाई देने पर संबंधित दस्तावेजों और लागू नियमों की जांच जरूरी होगी।
निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करके दस्त रजिस्टर करने वाले संबंधित दुय्यम निबंधक के खिलाफ विभागीय जांच भी की जा सकती है।
पुरानी इमारतों में फ्लैट खरीदने वालों की बढ़ सकती है परेशानी
नए नियमों के सामने आने के बाद पुरानी इमारतों में फ्लैट की खरीद-बिक्री को लेकर भी सवाल उठे हैं। कई पुरानी इमारतों के मंजूर नक्शे उपलब्ध नहीं हैं। कुछ मामलों में संबंधित नगर निकाय या दूसरे सक्षम प्राधिकरण से पुराने रिकॉर्ड हासिल करना भी मुश्किल हो सकता है।
ऐसी स्थिति में फ्लैट का मालिक अपनी संपत्ति बेचना चाहता है, लेकिन जरूरी नक्शा या अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
पुरानी इमारतों के लिए किसी खास छूट या वैकल्पिक दस्तावेज प्रक्रिया की पुष्टि जरूरी है। फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि महाराष्ट्र में सभी पुराने फ्लैटों की बिक्री या रजिस्ट्री बंद हो गई है।
सरकार की ओर से यदि इस विषय पर कोई नया स्पष्टीकरण या राहत जारी होती है, तो पुराने भवनों में रहने वाले परिवारों और हाउसिंग सोसायटियों के लिए यह महत्वपूर्ण अपडेट होगा।
डोंबिवली की 65 इमारतों का मामला भी चर्चा में
डोंबिवली में 65 ऐसी इमारतों का मामला सामने आया है, जिनके MahaRERA में रजिस्टर्ड होने के बावजूद निर्माण की वैधता पर सवाल उठे हैं। इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट की कार्यवाही और निवासियों से संबंधित हलफनामे का भी उल्लेख हुआ है।
यह मामला नए परिपत्र से अलग है, लेकिन इससे एक महत्वपूर्ण बात समझ आती है कि सिर्फ MahaRERA नंबर देखकर किसी इमारत की सभी कानूनी मंजूरियों को सही नहीं मान लेना चाहिए।
घर खरीदने वालों को संबंधित प्राधिकरण की निर्माण अनुमति, मंजूर नक्शे और लागू होने पर OC जैसे दस्तावेजों की भी जांच करनी चाहिए। यदि किसी इमारत के निर्माण की वैधता पर सवाल हैं, तो खरीदने से पहले कानूनी सलाह लेना बेहतर होगा।
क्या सरकार के फैसले से घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी?
नए निर्देशों से इल्लीगल कंस्ट्रक्शन और मंजूर नक्शे से अलग क्षेत्रफल वाले फ्लैटों की बिक्री को रोकने में मदद मिल सकती है। इससे खरीदारों को संपत्ति के दस्तावेजों की जांच पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा।
लेकिन दूसरी ओर, जिन पुरानी इमारतों के रिकॉर्ड अधूरे हैं, उनके मालिकों को फ्लैट बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। बिल्डरों के लिए भी निर्माण अनुमति, प्रोजेक्ट पंजीकरण और मंजूर क्षेत्रफल से जुड़े दस्तावेज सही रखना जरूरी होगा।
फ्लैट की कीमतों पर इस फैसले का कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर फिलहाल कोई प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि नए नियमों से संपत्ति की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी।
फ्लैट खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
घर खरीदने से पहले कुछ जरूरी जांच करने से भविष्य में होने वाली परेशानियों का जोखिम कम किया जा सकता है।
- MahaRERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन और उपलब्ध जानकारी जांचें।
- संबंधित प्राधिकरण से मंजूर भवन नक्शे की कॉपी मांगें।
- बिक्री दस्त में दर्ज फ्लैट के क्षेत्रफल का मंजूर नक्शे से मिलान करें।
- लागू होने पर OC, CC और अन्य जरूरी अनुमतियों की स्थिति जांचें।
- पुरानी इमारत में नक्शा उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित प्राधिकरण से रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया जानें।
- दस्त रजिस्टर करने में परेशानी आने पर लिखित कारण मांगें और जरूरत पड़ने पर संपत्ति कानून के विशेषज्ञ से सलाह लें।
MahaRERA की आधिकारिक वेबसाइट https://www.maharera.maharashtra.gov.in/ पर प्रोजेक्ट से संबंधित उपलब्ध जानकारी देखी जा सकती है। रजिस्ट्री से जुड़ी शिकायतों के लिए महाराष्ट्र के पंजीकरण एवं मुद्रांक विभाग के शिकायत पोर्टल https://grievanceigr.maharashtra.gov.in/ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
परिपत्र की कानूनी वैधता पर भी उठे सवाल
नए निर्देशों को लेकर रियल एस्टेट टेक्नो-लीगल सलाहकार सथ्येन प्रसाद ने सवाल उठाया है कि क्या कार्यकारी परिपत्र के जरिए कानून में दिए गए अधिकारों से आगे जाकर व्यापक प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
फिलहाल घर खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि फ्लैट की कीमत और लोकेशन के साथ उसके मंजूर नक्शे, निर्माण अनुमति और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की भी जांच करें। वहीं, पुरानी इमारतों के मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर किन वैकल्पिक प्रक्रियाओं या छूट का लाभ मिल सकता है।
