मुंबई के सायन अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर शिवचरण अप्पा पाटिल की मौत हो गई। जानें घटनाक्रम, डीन प्रमोद इंगले का बयान और जांच की स्थिति।
मुंबई: सायन अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर शिवचरण अप्पा पाटिल की मौत का मामला सामने आया है। शनिवार शाम उनका शव अस्पताल के PG हॉस्टल स्थित कमरे के बाथरूम में मिला। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मामले में एनेस्थीसिया की दवाओं के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
शिवचरण पाटिल सायन अस्पताल के सर्जरी विभाग में पोस्टग्रेजुएट कोर्स के पहले वर्ष के छात्र थे। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच किए जाने की बात कही है।
ऐसे सामने आया मामला
शनिवार शाम शिवचरण पाटिल अस्पताल में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। उनके हॉस्टल में रहने वाले सहकर्मियों को चिंता हुई, जिसके बाद उनके कमरे में जाकर तलाश की गई।
कमरे में शिवचरण नहीं मिले। बाथरूम के अंदर से मोबाइल फोन की आवाज सुनाई देने पर सहकर्मियों को संदेह हुआ और इसकी जानकारी अन्य लोगों को दी गई। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बाथरूम का दरवाजा खुलवाया। अंदर शिवचरण पाटिल मृत पाए गए।
मौके पर मिली दवाओं की बोतलें
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शिवचरण के हाथ में IV सलाइन लाइन लगी हुई थी और बाथरूम में एनेस्थीसिया की दवाओं की दो बोतलें मिली थीं। इन परिस्थितियों के आधार पर दवाओं के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।
हालांकि, मौत का अंतिम कारण निर्धारित करने के लिए पोस्टमॉर्टम और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। उपलब्ध जानकारी में अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
डीन प्रमोद इंगले ने जताया दुख
सायन अस्पताल के डीन प्रमोद इंगले ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि अस्पताल ने एक होनहार भावी सर्जन को खो दिया है। उन्होंने मामले की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच के साथ अस्पताल की आंतरिक जांच किए जाने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन छात्रों के संपर्क में रहता है और इस घटना के बाद छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थितियां भी अहम
इस घटना के बीच रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थितियों, आराम के समय, वरिष्ठों से सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
सितंबर 2026 में महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों के कल्याण को लेकर चिंता जताई गई थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़ी चर्चाओं में लंबे ड्यूटी घंटे, कथित उत्पीड़न और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे विषय शामिल थे। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की टास्क फोर्स ने भी मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत सहायता पर चर्चा की है।
अब जांच के नतीजों पर नजर
फिलहाल मामले में मौत की परिस्थितियों और वास्तविक कारण का पता लगाना महत्वपूर्ण है। पोस्टमॉर्टम के निष्कर्ष, पुलिस की आधिकारिक जानकारी और अस्पताल की आंतरिक जांच से आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अस्पताल प्रशासन की जांच के साथ रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए उपलब्ध सहायता व्यवस्था पर भी ध्यान रहेगा।
