Crime & Corruption Control Association और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 61 लकड़ी की बल्लियां जब्त हुईं। तीन आरोपियों को तीन दिन की वन हिरासत मिली।
महाराष्ट्र/चालीसगांव : अवैध पेड़ कटाई और जंगल से लकड़ी निकालने के मामले में Crime & Corruption Control Association और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की है। कार्रवाई में सागौन और अंजन की कुल 61 लकड़ी की बल्लियां, एक ट्रैक्टर और ट्रॉली जब्त की गई। तीन आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन की वन हिरासत मिली है।
जानकारी के अनुसार, Crime & Corruption Control Association को संरक्षित वन क्षेत्र में जीवित पेड़ों की कथित अवैध कटाई की सूचना मिली थी। संगठन ने करीब पांच दिन तक जानकारी का सत्यापन और निगरानी करने के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ कार्रवाई की।


पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोकुल आनंदा गोपाल, उम्र 40 वर्ष, अरविंद विजय जाधव, उम्र 20 वर्ष और निलेश एकनाथ राठोड, उम्र 25 वर्ष, सभी निवासी बोद्रा के रूप में हुई है।
कार्रवाई में 4 सागौन और 57 अंजन की बल्लियां जब्त की गईं। इसके अलावा ट्रैक्टर MH 19 CV 4603 और ट्रॉली MH 19 E 2685 भी जब्त की गई है।
हालांकि 61 बल्लियों का मतलब 61 कटे हुए पेड़ नहीं है। वास्तविक रूप से कितने जीवित पेड़ काटे गए, यह कटाई स्थल की जांच, पेड़ों के ठूंठ और जब्त लकड़ी के माप से स्पष्ट होगा।
मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26(1)(f)(d), 41 और 42 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303(2) के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। लागू धाराओं की अंतिम स्थिति एफआईआर और आधिकारिक वन अपराध रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
जांच का अगला फोकस लकड़ी की पूरी कड़ी पर
Crime & Corruption Control Association के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने जांच को केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं रखने की मांग की है। संगठन के अनुसार, अभयारण्य से काटी गई लकड़ी को गन्ना कटाई मजदूरों के मुकादमों को बेचने की जानकारी मिली है। इसलिए कथित खरीदारों, लकड़ी की बिक्री, भुगतान और परिवहन की कड़ी की जांच की मांग की गई है।
संगठन ने छह महीने के CDR और संबंधित मोबाइल संचार तथा WhatsApp बातचीत की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग भी की है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच की बात कही गई है। फिलहाल किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं है।
अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच पर भी जोर दिया गया है। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ मामलों में अधूरे दस्तावेजों के कारण आरोपियों को कम अवधि की वन हिरासत के बाद जमानत मिल गई थी। इस मामले में जब्ती पंचनामा, लकड़ी का माप, कटाई स्थल, वाहन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
वन संरक्षण के लिहाज से मामला क्यों अहम
गौताला-औट्रामघाट वन्यजीव अभयारण्य 260.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला संरक्षित वन क्षेत्र है। 2026 के अध्ययनों में यहां तेंदुए के आवास, वन क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बाघों की संभावित वापसी से जुड़े पहलुओं को महत्वपूर्ण बताया गया है।
गौताला क्षेत्र में पहले भी बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई का मामला सामने आ चुका है। 2021 में पटनेदेवी क्षेत्र में जांच के दौरान 479 चंदन के पेड़ों की कटाई और 593 अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। उस मामले में तीन वन कर्मचारियों के निलंबन और विभागीय जांच का उल्लेख किया गया था।
हालांकि पुराने मामले को मौजूदा कार्रवाई से जोड़ने का कोई स्वतंत्र आधार सामने नहीं आया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब्त लकड़ी वास्तव में कितने जीवित पेड़ों से आई, कटाई का सटीक स्थान क्या था और लकड़ी कहां ले जाई जा रही थी। यदि जांच खरीदारों, भुगतान, वाहन और मोबाइल संपर्कों तक पहुंचती है, तो इससे अवैध पेड़ कटाई की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है। Crime & Corruption Control Association ने आगे की जांच पर नजर रखने की बात कही है।
