मुंबई में 124 पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, IICT प्रोजेक्ट पर उठे कई सवाल

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मुंबई Film City में IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांट पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा।

मुंबई: Film City के पास प्रस्तावित Indian Institute of Creative Technologies (IICT) के स्थायी कैंपस के लिए 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मुंबई की Tree Authority की ओर से यह आवेदन रखा गया था। मामला Aarey में पेड़ों की कटाई से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की पहले से चल रही कार्यवाही से जुड़ा है।

IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को दूसरी जगह लगाने का प्रस्ताव

प्रस्तावित कैंपस के लिए कुल 457 पेड़ प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें 124 पेड़ों को काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मांगी गई है।

Tree Authority की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित जमीन Film City में है और Aarey Forest के अंदर नहीं आती। कोर्ट के सामने आवेदन इसलिए भी रखा गया क्योंकि जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति को लेकर Tree Authority पर बिना कोर्ट की मंजूरी के आगे बढ़ने पर रोक लगाई थी।

इस मामले में अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रस्तावित कैंपस की जमीन की वास्तविक कानूनी और भौगोलिक स्थिति क्या है और पेड़ों की कटाई तथा ट्रांसप्लांटेशन का मौजूदा प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया है।

IICT आखिर क्या है?

यह परियोजना केवल एक सामान्य फिल्म इंस्टीट्यूट नहीं है। Indian Institute of Creative Technologies को Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality यानी AVGC-XR क्षेत्र के लिए National Centre of Excellence के रूप में विकसित किया जा रहा है।

IICT एक Section 8 कंपनी के रूप में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और उद्योग जगत की भागीदारी से बनाई गई है। इसमें केंद्र सरकार की 34 प्रतिशत और महाराष्ट्र सरकार की 14 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। बाकी हिस्सेदारी उद्योग संगठनों की है।

केंद्र सरकार ने IICT की स्थापना के लिए 391.15 करोड़ रुपये की one-time budgetary support को मंजूरी दी थी। वहीं Film City के स्थायी कैंपस से जुड़ी पहले की जानकारी में अलग project cost सामने आई थी, इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही लागत मानना सही नहीं होगा।

IICT का मौजूदा काम पहले से जारी है। संस्थान ने मुंबई के NFDC परिसर से जुलाई 2025 में काम शुरू किया था। अप्रैल 2026 तक 18 courses में 136 students के enrolled होने की जानकारी सामने आई थी। Film City में प्रस्तावित परिसर इसका permanent campus होगा।

सरकार ने IICT को AVGC-XR ecosystem के विस्तार से भी जोड़ा है। 15,000 secondary schools और 500 colleges में AVGC Content Creator Labs स्थापित करने की योजना भी सामने आ चुकी है।

Aarey और Film City को लेकर क्यों उठ रहा है सवाल?

इस मामले में Aarey Forest, Aarey Colony और Film City को एक ही जगह मानना सही नहीं होगा। परियोजना पक्ष का कहना है कि जिस जमीन पर IICT campus प्रस्तावित है, वह Film City में है और Aarey Forest का हिस्सा नहीं है।

वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता और NGO Vanashakti की ओर से इस location और project के लिए वैकल्पिक जगहों की संभावना पर सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू ने कोर्ट में पूछा कि जंगल से सटे क्षेत्र में इस तरह का संस्थान बनाने के लिए यही जगह क्यों जरूरी है और क्या दूसरे स्थानों की suitability का अध्ययन किया गया है।

पेड़ों की संख्या में बदलाव ने भी सवाल खड़े किए

इस पूरे मामले में पेड़ों के आंकड़ों का बदलना भी ध्यान देने योग्य है। जनवरी 2026 में सामने आई जानकारी में इसी IICT campus के लिए 255 पेड़ों की कटाई और 201 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा बताया गया था। उस हिसाब से कुल 456 पेड़ प्रभावित होने थे।

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा रखा गया है। कुल संख्या 457 होती है, लेकिन दोनों प्रस्तावों में कटाई और transplantation की संख्या में बड़ा बदलाव है।

उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव revised tree survey, project design में परिवर्तन, पेड़ों की श्रेणी में बदलाव या किसी अन्य तकनीकी मूल्यांकन के कारण हुआ। इसलिए इस अंतर का आधिकारिक स्पष्टीकरण आगे महत्वपूर्ण हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र पेड़ मूल्यांकन का विकल्प

सुनवाई के दौरान पेड़ों की संख्या और उनके मूल्यांकन को लेकर भी चर्चा हुई। Tree Authority की ओर से यह बताया गया कि जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र संस्था से assessment कराया जा सकता है। इसके लिए IIT Bombay, VJTI और Bombay Natural History Society जैसे संस्थानों के नाम भी सामने आए।

इससे मामले का फोकस सिर्फ पेड़ काटने की संख्या तक सीमित नहीं रहता। यह भी देखा जा सकता है कि कौन से पेड़ काटने की श्रेणी में रखे गए हैं, किन पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जा सकता है और क्या परियोजना में पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक डिजाइन या व्यवस्था संभव है।

5,000 पेड़ लगाने का undertaking

परियोजना पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट को compensatory afforestation के तहत महाराष्ट्र Forest Development Corporation के माध्यम से 5,000 पेड़ लगाने का undertaking दिए जाने की जानकारी दी है।

लेकिन compensatory plantation में सिर्फ संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती। plantation की जगह, पेड़ों की प्रजातियां, survival monitoring और लंबे समय तक उनकी देखरेख भी महत्वपूर्ण होंगी।

Aarey से जुड़े पुराने मामलों में भी compensatory afforestation और पेड़ों के survival की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सामने महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। इसलिए इस मामले में भी 5,000 पेड़ों के plantation की वास्तविक निगरानी आगे अहम हो सकती है।

2025 के 95 पेड़ों वाले मामले से भी जुड़ता है मामला

Film City क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर 2025 में Goregaon-Mulund Link Road से संबंधित 95 पेड़ों का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। उस मामले में भी Film City की जमीन और Aarey से संबंधित कोर्ट के आदेश के बीच संबंध को लेकर सवाल उठा था।

सुप्रीम कोर्ट ने उस कार्यवाही में alternative options, expert assessment और compensatory afforestation जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया था। वर्तमान IICT मामले में भी alternative site और पेड़ों के independent assessment का मुद्दा सामने आया है।

जनवरी 2025 का सुप्रीम कोर्ट आदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

10 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में Tree Authority द्वारा पेड़ काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। Tree Authority आवेदन पर विचार कर सकती है, लेकिन Aarey Colony में पेड़ों की कटाई के लिए कोर्ट की अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ सकती।

इसी पृष्ठभूमि में वर्तमान IICT आवेदन सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। हालांकि वर्तमान मामले में परियोजना पक्ष का स्पष्ट कहना है कि संबंधित जमीन Aarey Forest के भीतर नहीं है।

Environmental clearance और tree-cutting permission अलग-अलग हैं

IICT campus को लेकर environmental और wildlife clearance से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। अगस्त 2026 में परियोजना के Sanjay Gandhi National Park के आसपास के eco-sensitive zone से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं पर भी मंजूरी और शर्तों की जानकारी सामने आई थी।

इन शर्तों में wildlife conservation के लिए राशि जमा करना, compound wall और सुरक्षा उपाय तथा wildlife को प्रभावित करने वाली high-intensity lighting पर नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल बताए गए थे।

हालांकि environmental या wildlife clearance को Supreme Court की tree-felling permission के बराबर नहीं माना जा सकता। वर्तमान सुनवाई में 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के लिए Court की भूमिका इसी वजह से महत्वपूर्ण है।

IICT का विस्तार भी जारी

IICT का permanent campus ऐसे समय में प्रस्तावित है जब संस्थान अपने education और industry ecosystem का विस्तार कर रहा है। अगस्त 2026 में Netflix के साथ partnership के तहत 100 students के लिए scholarships की घोषणा की गई थी। छह professional programmes के लिए financial support का प्रावधान किया गया है।

इससे IICT का दायरा traditional filmmaking से आगे animation, VFX, gaming और अन्य creative technologies तक दिखाई देता है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद कोर्ट tree-felling proposal, पेड़ों की संख्या, project location, alternative possibilities और compensatory afforestation से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार कर सकता है।

अगर स्वतंत्र tree assessment कराया जाता है, तो 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के मौजूदा आंकड़ों की स्वतंत्र जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल स्थिति साफ है: IICT के स्थायी Film City campus के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, लेकिन पेड़ काटने की अंतिम अनुमति अभी नहीं मिली है। आने वाले दो सप्ताह में महाराष्ट्र सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

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