Mumbai Metro 7A: ₹250 करोड़ का काम खतरे में, आखिर जनता के पैसे की जिम्मेदारी किसकी?

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Mumbai Metro 7A में Airport Colony के पास करीब ₹250 करोड़ का काम खतरे में है। AAI clearance, OHE height और जिम्मेदारी पर अब बड़े सवाल उठ रहे हैं।

मुंबई: Mumbai Metro 7A के Airport Colony वाले हिस्से पर करीब ₹250-260 करोड़ का काम अब सवालों में है। वजह है Airport के air funnel में metro viaduct और OHE की height का mismatch। अगर Airports Authority of India (AAI) से अतिरिक्त height की मंजूरी नहीं मिली, तो Vile Parle East में करीब 1 किलोमीटर का बना हुआ elevated हिस्सा बदलना या दोबारा बनाना पड़ सकता है। अभी demolition final नहीं हुआ है और AAI की technical report का इंतजार है।

सवाल सिर्फ Metro का नहीं, जनता के पैसे का है

Metro 7A करीब 3.42 किलोमीटर लंबी extension है, जो Andheri East से Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport के Terminal 2 तक पहुंचेगी। इसका करीब 2.5 किलोमीटर हिस्सा underground और लगभग 1 किलोमीटर हिस्सा elevated है।

दिक्कत Airport Colony station और उससे जुड़े ramp/viaduct के हिस्से में सामने आई। Metro को चलाने के लिए सिर्फ track की height काफी नहीं होती, ऊपर OHE यानी बिजली की व्यवस्था के लिए भी अतिरिक्त जगह चाहिए। इसी requirement को लेकर मौजूदा structure और AAI की permissible height के बीच अंतर सामने आया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर aviation restrictions पहले से लागू थे, तो construction आगे बढ़ने से पहले final height requirement पूरी तरह clear क्यों नहीं हुई?

2024 में clearance मिली, फिर समस्या कहां हुई?

MMRDA ने नवंबर 2023 में Airport Colony station और ramp के लिए AAI से clearance मांगी थी। 2 जनवरी 2024 को मंजूरी मिली, लेकिन इसमें project design के मुकाबले करीब 2.9 मीटर कम height की सीमा थी।

इसके बाद 31 जनवरी 2024 को Airport Colony station और ramp के बीच viaduct के लिए अलग clearance मांगी गई। 18 मार्च 2024 को AAI ने इस हिस्से के लिए 0.53 से 2.75 मीटर तक की height limit तय की, जो Metro operation के लिए जरूरी height से कम बताई गई।

यहीं से मामला उलझ गया। MMRDA के अनुसार, design और statutory permissions के coordination की जिम्मेदारी general consultant SYSTRA-CEG-SMCIPL की थी और OHE के लिए जरूरी अतिरिक्त height को planning में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया। SYSTRA ने इस जिम्मेदारी पर आपत्ति जताई है।

कितना पैसा खतरे में है?

संभावित financial exposure ₹250 करोड़ से ₹260 करोड़ से ज्यादा बताया गया है। यह रकम अभी “डूब गई” नहीं है। AAI अगर अतिरिक्त height को मंजूरी देता है या कोई technical solution निकल आता है, तो reconstruction की जरूरत टल सकती है।

लेकिन अगर मौजूदा structure को हटाकर दोबारा बनाना पड़ा, तो जनता के पैसे से तैयार किया जा चुका बड़ा हिस्सा दोबारा खर्च मांग सकता है। खबर के मुताबिक करीब 1 किलोमीटर का elevated stretch प्रभावित हो सकता है।

यानी असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि structure दोबारा बनेगा या नहीं। सवाल यह भी है कि अगर दोबारा बनाना पड़ा तो अतिरिक्त खर्च किसकी जिम्मेदारी होगी?

हर जगह समस्या एक जैसी नहीं है

Height mismatch सभी locations पर समान नहीं बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जगह अतिरिक्त requirement करीब 2.5 सेंटीमीटर से शुरू होकर लगभग 2.4 मीटर तक है।

Airport Colony station खुद approved height limit के भीतर बताया गया है, लेकिन उससे जुड़े ramp में OHE poles के लिए करीब 2.4 मीटर अतिरिक्त height की जरूरत बताई गई है। यही वजह है कि मामला सिर्फ “station बहुत ऊंचा बन गया” इतना सीधा नहीं है।

काम कितना हो चुका था?

समस्या तब सामने आई जब project का बड़ा हिस्सा काफी आगे बढ़ चुका था। फरवरी 2026 तक MMRDA के project status में elevated viaduct का civil work 100%, elevated ramp करीब 95% और Airport Colony station से जुड़े ज्यादातर काम काफी आगे बताए गए थे।

Underground section में भी बड़ा काम पूरा हो चुका है। 2025 में Andheri East से Airport की तरफ twin tunnel construction के अहम breakthroughs हुए और underground tunnelling पूरा किया गया।

यानी height issue किसी शुरुआती drawing stage पर नहीं रुका; यह उस समय सामने आया जब जमीन पर बड़ी construction हो चुकी।

अब जिम्मेदारी किसकी?

MMRDA की तरफ से consultant की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। SYSTRA-CEG-SMCIPL general consultant था, जबकि J Kumar Infraprojects civil construction से जुड़ा contractor है।

इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि design, aviation clearance और OHE requirement के बीच coordination में चूक हुई तो contractual responsibility किस पर तय होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी पर final financial liability तय होने की बात सामने नहीं आई है।

SYSTRA और MMRDA के बीच पहले भी contractual विवाद रहा है। 2025 में Bombay High Court ने MMRDA द्वारा SYSTRA का contract खत्म करने का आदेश रद्द कर fresh decision लेने को कहा था। हालांकि उस मामले को मौजूदा Metro 7A height issue का सीधा सबूत नहीं माना जा सकता।

Metro 7A इतनी जरूरी क्यों है?

Metro 7A का मकसद सिर्फ Airport तक एक और metro line पहुंचाना नहीं है। यह Line 7 और Line 9 के network को Airport के Terminal 2 से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण link है।

Terminal 2 तक Metro 3 की connectivity पहले से है, लेकिन 7A के शुरू होने से Mira-Bhayandar, Dahisar और northern suburbs की तरफ से आने वाले passengers को airport network से ज्यादा सीधा connection मिलेगा।

इसीलिए construction में एक साल की देरी भी सिर्फ project deadline का मामला नहीं है—इसका असर airport connectivity और पूरे metro network की planning पर पड़ता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण फैसला AAI की final technical assessment पर टिका है। MMRDA अतिरिक्त height की अनुमति मिलने की उम्मीद कर रहा है और technical solution की संभावना भी देखी जा रही है।

अगर मंजूरी मिलती है तो मौजूदा structure को बचाया जा सकता है। अगर मंजूरी नहीं मिली और कोई workable engineering solution नहीं निकला, तभी modification या reconstruction की स्थिति गंभीर होगी।

और जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—जिस height और aviation clearance का पता 2024 में चल गया था, उसका समाधान construction इतनी आगे बढ़ने के बाद क्यों खोजा जा रहा है और अगर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किस पर तय होगी?

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