राज्य में Drunk Driving पर सख्ती बढ़ा दी गई है। जानिए arrest, challan, vehicle seizure, Breath Analyser, Section 185 और पहली-दूसरी बार की सजा का पूरा मामला।
उत्तर प्रदेश: drunk driving करने वालों के खिलाफ अब enforcement और सख्त होने जा रही है। सड़क पर शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े गए तो मामला सिर्फ challan तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तारी, medical जांच और vehicle को लेकर भी आगे की कार्रवाई हो सकती है।
लेकिन यहां एक बात सबसे पहले समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में drunk driving का challan बंद कर दिया गया है या हर मामले में पकड़े गए व्यक्ति को सीधे जेल भेज दिया जाएगा। यह सख्ती फिलहाल उत्तर प्रदेश में चल रहे enforcement अभियान और वहां दिए गए निर्देशों से जुड़ी है।
UP में आखिर नया क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने drunk driving के खिलाफ मई 2026 में statewide special drive शुरू की। 9 और 10 मई को राज्य के 135 toll plazas पर 69,683 वाहनों की checking की गई और 2,654 motorists के खिलाफ drunk driving की कार्रवाई हुई। इस दौरान करीब ₹2.65 करोड़ के traffic fines लगाए गए। अभियान DGP Rajeev Krishna के direction में चलाया गया था।
इसके बाद 16 और 17 मई को enforcement को और बड़ा किया गया। इन दो दिनों में 2,52,122 vehicles check किए गए और 5,143 drunk-driving cases में कार्रवाई हुई। पूरे मई अभियान में 9, 10, 16 और 17 मई को कार्रवाई की गई और करीब ₹7.7 करोड़ के fines लगाए गए। इस drive की supervision ADG Traffic A Satish Ganesh कर रहे थे।
यानी अभी भी challan हो रहा है। फर्क यह है कि police drunk driving को सिर्फ पैसे के fine से निपटाने के बजाय कानून में मौजूद arrest और आगे की कार्रवाई वाली powers को ज्यादा सख्ती से लागू करने पर जोर दे रही है।
शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े गए तो सबसे पहले क्या होगा?
Checking के दौरान police को driver पर शराब के नशे में वाहन चलाने का शक होता है तो breath analyser से जांच की जा सकती है। Motor Vehicles Act में drunken driving के लिए Section 185 लागू होता है।
कानून के मुताबिक 30 mg alcohol per 100 ml blood से ज्यादा alcohol पाए जाने पर Section 185 के तहत मामला बन सकता है।
यहीं से मामला सामान्य traffic challan से आगे जा सकता है।
Police circumstances के अनुसार driver को arrest कर सकती है और उसके बाद medical examination की प्रक्रिया भी हो सकती है। Motor Vehicles Act की Section 202 police को Section 185 जैसे offences में बिना warrant arrest की power देती है।
Breath Analyser test से मना किया तो?
यह भी बहुत लोगों के लिए important सवाल है।
Motor Vehicles Act की Section 203 police को breath test लेने की power देती है। अगर किसी driver पर शराब पीकर वाहन चलाने का reasonable suspicion है तो उससे breath specimen मांगा जा सकता है।
Test के दौरान alcohol की presence सामने आने पर मामला आगे बढ़ सकता है। Breath test से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है, इसलिए checking के समय test देने से सिर्फ इस उम्मीद में मना करना कि मामला खत्म हो जाएगा, सही तरीका नहीं है।
क्या पकड़े जाते ही सीधे जेल भेज दिया जाएगा?
नहीं, arrest और jail की punishment को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा।
Police किसी व्यक्ति को कानून के तहत arrest कर सकती है, लेकिन final punishment judicial process के बाद तय होती है। Section 185 के तहत पहली बार offence साबित होने पर ₹10,000 तक fine या छह महीने तक imprisonment या दोनों हो सकते हैं।
अगर वही व्यक्ति दोबारा drunken driving offence में पकड़ा जाता है तो punishment बढ़ सकती है। Repeat offence में ₹15,000 तक fine या दो साल तक imprisonment या दोनों का provision है।
इसलिए “drunk driving में पकड़े गए तो सीधे छह महीने जेल” कहना सही नहीं होगा। आगे की कार्रवाई मामले और court process पर depend करेगी।
क्या गाड़ी भी जब्त होगी?
यहीं पर सबसे ज्यादा confusion है।
Drunk driving के मामले में police vehicle को अपने कब्जे में लेने या उसके temporary disposal के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर car या bike हमेशा के लिए confiscate हो जाएगी।
Vehicle को लेकर actual action case की circumstances और applicable legal procedure पर depend करेगा। इसलिए “गाड़ी पकड़ी तो हमेशा के लिए जब्त” जैसी बात को automatic rule समझना सही नहीं है।
यह distinction इसलिए भी जरूरी है क्योंकि vehicle seizure और permanent confiscation अलग legal actions हैं।
क्या यह नया कानून पूरे India में लागू हो गया?
नहीं।
Motor Vehicles Act में drunken driving के खिलाफ पहले से ही strict provisions मौजूद हैं। Section 185 offence और punishment बताता है, जबकि Section 202 और Section 203 police की arrest और breath-test powers से जुड़े हैं।
अभी सामने आया मामला उत्तर प्रदेश में enforcement को ज्यादा सख्त करने से जुड़ा है। इसलिए इसे “पूरे India में अब challan बंद और direct arrest” वाला नया national law समझना सही नहीं होगा।
UP Police इतनी सख्ती क्यों कर रही है?
उत्तर प्रदेश Police के road-safety programme में drunken driving को accident prevention के बड़े focus areas में रखा गया है।
DGP Rajeev Krishna के Zero Fatality District approach के तहत accident-prone locations पर Critical Corridor teams deploy की गई हैं। इन teams को breath analysers, speed laser guns और दूसरे enforcement equipment दिए गए हैं। Police के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में राज्य में पिछले साल की तुलना में road accidents में 7.43% और fatalities में 11.55% की कमी दर्ज हुई।
यानी drunk driving पर action किसी एक रात की checking तक सीमित नहीं है। इसे wider road-safety enforcement का हिस्सा बनाया गया है।
Drunk Driving से जुड़े आंकड़े क्या कहते हैं?
उत्तर प्रदेश Police के आंकड़ों के अनुसार राज्य में total road accidents में drunken driving का हिस्सा 2023 में 8.61%, 2024 में 6.05% और 2025 में 3.51% रहा।
इसके बावजूद police ने enforcement बढ़ाया है, क्योंकि सड़क पर नशे में driving एक ऐसा risk factor है जिसे driver की behaviour change और strict checking से सीधे target किया जा सकता है।
देशभर के 2023 road-accident data में 4,80,583 road accidents और 1,72,890 deaths दर्ज हुई थीं। इनमें drunken driving या alcohol/drugs से जुड़े 9,143 accidents और 3,674 deaths दर्ज की गईं। हालांकि road accidents का सबसे बड़ा कारण overspeeding था, इसलिए drunk driving को देश में सबसे बड़ा accident factor बताना सही नहीं होगा।
क्या सिर्फ UP में ही ऐसी सख्ती हो रही है?
ऐसा नहीं है।
Pune में 2026 के Holi enforcement के दौरान 676 motorists drunk driving में पकड़े गए और 250 से ज्यादा vehicles seize किए गए। Pune Police ने repeat drunk-driving offenders के vehicles पर भी सख्त action की बात कही थी।
Gurugram में भी drunk driving के मामलों में सिर्फ traffic challan तक सीमित न रहने और जरूरत पड़ने पर FIR की कार्रवाई की बात सामने आई।
दूसरे शहरों में भी weekend और festival periods में breath-analyser checking बढ़ाई जा रही है। Coimbatore में एक सप्ताह के दौरान 855 drunk-driving cases दर्ज हुए, जबकि Nagpur में पांच दिन की drive में 122 cases सामने आए।
इससे साफ है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में enforcement का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन drunk driving के खिलाफ checking और punishment को ज्यादा serious बनाया जा रहा है।
अगर शराब पी है तो driver क्या करे?
सबसे आसान जवाब है—drive न करें।
अगर शराब पी है तो cab, taxi या किसी sober driver का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित option है। “थोड़ी ही पी है”, “मैं आराम से चला लूंगा” या “घर पास में है” जैसी सोच accident का risk खत्म नहीं करती।
Alcohol reaction time, judgement और vehicle control को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से road-safety authorities drunk driving को रोकने के लिए checking, breath testing और strict enforcement पर जोर देती हैं।
इस सख्ती का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर enforcement लगातार और transparent तरीके से होता है तो इसका सबसे बड़ा असर driver behaviour पर पड़ सकता है। लोगों में यह डर बढ़ेगा कि शराब पीकर vehicle चलाना केवल fine देकर खत्म होने वाला traffic violation नहीं है।
Weekend nights, festivals और late-night gatherings के बाद drunk driving पर checking बढ़ने से cab या designated-driver culture को भी बढ़ावा मिल सकता है।
लेकिन enforcement के साथ proper procedure भी उतना ही जरूरी है। Breath test, medical examination, arrest और vehicle custody जैसी हर कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए, ताकि सड़क सुरक्षा के साथ लोगों के legal rights भी सुरक्षित रहें।
उत्तर प्रदेश में drunk driving के खिलाफ मामला अब ज्यादा serious तरीके से लिया जा रहा है। लेकिन “अब कोई challan नहीं होगा और हर drunk driver सीधे जेल जाएगा” कहना सही तस्वीर नहीं है।
असल बात यह है कि Motor Vehicles Act में पहले से मौजूद strict provisions के तहत police arrest और आगे की legal कार्रवाई कर सकती है, जबकि UP में enforcement को बड़े स्तर पर तेज किया गया है।
इसलिए अगर शराब पी है तो steering संभालने का risk न लें। कुछ घंटे की convenience के मुकाबले सुरक्षित घर पहुंचना ज्यादा जरूरी है।
