वी बी माणिक
कल्याण– पिछले वर्ष नवंबर 2022 में मध्यरेल के सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ का एक फर्जी लोकोपायलट उमाशंकर बर्मा उर्फ नटवरलाल को कोलसे वाड़ी पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और अन्य धाराओं के तहत गिफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस केस की जाँच उपनिरीक्षक सचिन सालवी को दिया गया था। (Indian fasttrack)
इस केस के सिलसिले में आपको जानकारी देते हुए बता दें कि सालवी ने नटवरलाल से मिलकर केस को पूरी तरह बिगाड़ दिया और चार्जशीट भी 60 दिनों में कोर्ट में नही डाला। जिसके कारण नटवरलाल को कोर्ट से डिफॉल्ट जामिन मिल गया। उसके बाद नटवरलाल का आतंक फिर से बढ़ गया और नटवरलाल के विरुद्ध कुर्ला में शिकायत भी दर्ज हो गयी। वही दूसरी ओर कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक देशमुख ने इसकी रिपोर्ट डीसीपी सचिन गुंजाल से कर दिया।
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पुलिस उपायुक्त सचिन गुंजाल ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक सालवी को वहाँ से हटाकर कंट्रोल रूम में तबादला कर दिया। आपको यह भी बता दें कि उपनिरीक्षक सचिन सालवी को बात करने की तमीज नही है। अपराध को खत्म करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम करता है। आरोपियों के जरिए आम नागरिकों को अपने नाम से धमकी भी दिलवाता है। कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में इसकी काफी शिकायत है।
फोन करने पर कल अधिकारी फोन ही नही उठाते ये बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। अब लोग ठग नटवरलाल से निजात पाने के लिए पुलिस पर भरोसा किया। लेकिन आम नागरिकों के भरोसे पर पानी फिर गया। क्योंकि सचिन सालवी जैसे भ्र्ष्ट ऑफिसर के हाथ मे ये केस चला गया।

