तमिलनाडु में पानी का संकट बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री विजय की चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात अहम है। चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी और जल बंटवारे पर नजरें।
चेन्नई: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के लिए कृष्णा नदी से मिलने वाले पानी की कमी अब अंतरराज्यीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय मंगलवार, 13 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से विजयवाड़ा में मुलाकात करने पहुंचे हैं। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति बढ़ाना और दक्षिण भारत की नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित योजना पर चर्चा करना है।
सबसे अहम बात यह है कि तेलुगु गंगा योजना के तहत तमिलनाडु को हर साल 12 हजार मिलियन घन फुट पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन 9 अक्टूबर तक राज्य को केवल 2.251 हजार मिलियन घन फुट पानी ही मिला था। ऐसे में विजय की यह बैठक चेन्नई की पेयजल जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तय मात्रा का करीब 19 प्रतिशत पानी ही मिला
तेलुगु गंगा योजना के तहत आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु की सीमा तक कृष्णा नदी का पानी पहुंचाया जाता है। इसका एक अहम उद्देश्य चेन्नई की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। दोनों राज्यों के बीच वर्ष 1983 में हुए समझौते से इस व्यवस्था की नींव पड़ी थी।
निर्धारित सालाना मात्रा 12 हजार मिलियन घन फुट है। इसमें जुलाई से अक्टूबर के बीच 8 हजार मिलियन घन फुट और जनवरी से अप्रैल के बीच 4 हजार मिलियन घन फुट पानी देने की व्यवस्था बताई गई है।
लेकिन इस साल 9 अक्टूबर तक तमिलनाडु को केवल 2.251 हजार मिलियन घन फुट पानी मिला। यानी तय सालाना मात्रा का करीब 18.8 प्रतिशत। इस आंकड़े से पानी की आपूर्ति में बड़ी कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह 9 अक्टूबर तक का आंकड़ा है, पूरे साल का अंतिम हिसाब नहीं।
जलाशयों में कम भंडारण भी बड़ी वजह
कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति पर जलाशयों में उपलब्ध पानी का सीधा असर पड़ता है। श्रीशैलम, सोमशिला और कंडालेरू जैसे जलाशयों में कम भंडारण होने से पानी छोड़ने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आंध्र प्रदेश को अपनी सिंचाई और पेयजल जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में दोनों राज्यों के सामने चुनौती यह है कि उपलब्ध पानी का प्रबंधन करते हुए चेन्नई की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की बैठक में इसी कमी को दूर करने और पानी की आपूर्ति तेज करने का मुद्दा प्रमुख रहने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ने या किसी नई समय-सारणी पर सहमति बनने की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
गोदावरी-कृष्णा-कावेरी नदी जोड़ने पर भी चर्चा
विजय और नायडू की बातचीत का दूसरा प्रमुख विषय गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों को जोड़ने की प्रस्तावित योजना है। इस परियोजना के जरिए अतिरिक्त पानी को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।
प्रस्तावित योजना में गोदावरी नदी से लगभग 41 हजार मिलियन घन फुट पानी अंतरराज्यीय सीमा तक पहुंचाने की बात सामने आई है। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने वर्ष 2023 में इस परियोजना की विस्तृत योजना में संशोधन किया था। तमिलनाडु ने कत्तलाई बैराज के पास मणिमुक्तनदी क्षेत्र के नजदीक नहर को अधिक ऊंचाई वाले स्तर तक ले जाने का अनुरोध किया था।
हालांकि, नदी जोड़ने की योजना एक लंबी प्रक्रिया है। इसके लिए पानी की उपलब्धता, निर्माण लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और संबंधित राज्यों की सहमति जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
पवन कल्याण और अनंतन भी चर्चा से जुड़े
विजयवाड़ा दौरे के कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से मुलाकात भी शामिल थी। तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री अनंतन के भी जल संबंधी बातचीत में शामिल होने की संभावना बताई गई थी।
पर्यावरण कार्यकर्ता जी. सुंदरराजन ने भी मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया था कि वह आंध्र प्रदेश से कंडालेरू जलाशय से पानी तुरंत छोड़ने और तेलुगु गंगा योजना के लिए श्रीशैलम से पानी उपलब्ध कराने का अनुरोध करें। उन्होंने चेन्नई की मौजूदा पेयजल जरूरतों, पूंडी सहित प्रमुख जलाशयों में पानी के स्तर और इस साल मिली कृष्णा नदी की जल मात्रा से जुड़े आंकड़े बातचीत में रखने की सलाह दी थी।
इससे स्पष्ट है कि मामला केवल निर्धारित पानी की मात्रा तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जल भंडारण, भविष्य की जरूरतों और दोनों राज्यों के बीच समन्वय पर भी ध्यान देना होगा।
कनक दुर्गा मंदिर और विजयवाड़ा उत्सव का कार्यक्रम
मुख्यमंत्री विजय के दौरे में प्रशासनिक बातचीत के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। उनके प्रसिद्ध कनक दुर्गा मंदिर में दर्शन करने और विजयवाड़ा उत्सव के दूसरे संस्करण में शामिल होने का कार्यक्रम है।
विजयवाड़ा उत्सव 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन कृष्णा नदी के किनारे पुन्नमी घाट क्षेत्र में किया गया है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न गतिविधियों के जरिए शहर की कला और परंपराओं को सामने लाने पर जोर दिया गया है।
विजय की यात्रा को दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद आंध्र प्रदेश का यह उनका पहला दौरा है।
अब चेन्नई को कितनी राहत मिलेगी?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बातचीत के बाद चेन्नई के लिए कृष्णा नदी के पानी की आपूर्ति में कितनी तेजी आएगी। तमिलनाडु के सामने तय मात्रा के मुकाबले बड़ी कमी है, जबकि आंध्र प्रदेश को अपने जलाशयों की स्थिति और घरेलू जरूरतों का भी संतुलन बनाना है।
दोनों राज्यों के बीच किसी ठोस सहमति, अतिरिक्त पानी छोड़ने के आदेश या नई आपूर्ति समय-सारणी की आधिकारिक पुष्टि सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि चेन्नई को तत्काल कितनी राहत मिल सकती है। तब तक इस बैठक का महत्व पानी की कमी पर बातचीत और आगे के समाधान की संभावनाओं तक सीमित है।
