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  • मालवणी में लगेगा DIGNITY JOB FAIR 2025 — युवाओं और महिलाओं के लिए नया मौका!

    मालवणी में लगेगा DIGNITY JOB FAIR 2025 — युवाओं और महिलाओं के लिए नया मौका!

    मुंबई के मलाड (वेस्ट) में 2 नवंबर 2025 को DIGNITY JOB FAIR 2025 होने जा रहा है। सादिक पठान की पहल पर आयोजित इस जॉब फेयर में युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगों को रोजगार और ट्रेनिंग के नए अवसर मिलेंगे।

    मुंबई: मलाड (वेस्ट) के मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद ग्राउंड में इस साल का सबसे बड़ा रोजगार मेला — “DIGNITY JOB FAIR 2025 – Powering Futures” — आयोजित होने जा रहा है। स्थानीय कांग्रेसी विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री असलम शेख के जन्मदिन के शुभ अवसर पर ये पहल सादिक पठान द्वारा की गई है, जिसका मकसद है मालवनी के स्थानीय युवाओं, महिलाओं, दिव्यांगों और रोजगार के लिए परेशान लोगों को रोजगार, स्किल ट्रेनिंग और कैरियर गाइडेंस के जरिए नई दिशा देना।

    💼 कब और कहाँ होगा जॉब फेयर?

    📅 तारीख: रविवार, 2 नवंबर 2025
    📍 जगह: मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद ग्राउंड,
    स्वराज बिल्डिंग के पीछे, बस डिपो के पास,
    मालवणी गेट नं. 8, मलाड (वेस्ट), मुंबई – 400095
    🕙 समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक

    🎯 जॉब फेयर में क्या-क्या मिलेगा?

    • देश की टॉप कंपनियाँ और एम्प्लॉयर्स यहां मौजूद रहेंगे
    • ट्रेनिंग पार्टनर्स और कैरियर मेंटर्स से मिलने का मौका
    • ऑन-द-स्पॉट इंटरव्यू और जॉब ऑफर की संभावना
    • स्किल डेवलपमेंट और पर्सनैलिटी ग्रोथ पर सेशन
    • युवाओं और महिलाओं के लिए अलग Guidance Booths

    स्थानीय कांग्रेसी विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री असलम शेख के जन्मदिन के शुभ अवसर पर यह जॉब फेयर खासकर मिलेनियल्स, Gen-Z, जॉबसीकर्स और वर्किंग वुमन के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनने जा रहा है, जहां उन्हें रोजगार और आत्मविश्वास दोनों मिलेगा।

    🪪 जरूरी डाक्यूमेंट्स साथ लाना न भूलें:

    • आधार कार्ड
    • पैन कार्ड
    • अपडेटेड रेज़्यूमे (Resume)

    एंट्री बिल्कुल फ्री है, और स्पॉट रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। साथ ही त्वरित ऑनलाइन आवेदन के लिए लिंक भी शेयर किया जा रहा है। (यहां क्लिक करें)

    🗣️ सादिक पठान बोले:

    “हम चाहते हैं कि हर युवा और हर महिला को बिना झिझक और बिना सिफारिश, इज़्जत के साथ रोजगार का अवसर मिले। Dignity Job Fair 2025 इसी सोच से शुरू किया गया है — ताकि हर टैलेंट को उसका सही प्लेटफॉर्म मिले।”

    🌠 क्यों खास है ये जॉब फेयर?

    • यह मुंबई के सबसे बड़े कम्युनिटी-ड्रिवन जॉब इवेंट्स में से एक है।
    • यहां विभिन्न सेक्टर्स — IT, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, एजुकेशन, और BPO — के जॉब्स मौजूद होंगे।
    • दिव्यांग उम्मीदवारों (PWDs) के लिए समावेशी रोजगार अवसर (Inclusive Hiring) पर खास फोकस होगा।
    • आयोजन में कैरियर काउंसलिंग ज़ोन भी होगा, जहाँ उम्मीदवार अपने स्किल्स के अनुसार जॉब प्रोफाइल चुन सकते हैं।

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. क्या एंट्री के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?
    ➡️ नहीं, आप स्पॉट रजिस्ट्रेशन करके भी फेयर में शामिल हो सकते हैं।

    Q2. क्या कोई फीस देनी होगी?
    ➡️ नहीं, एंट्री पूरी तरह फ्री है।

    Q3. किन सेक्टर्स में जॉब्स मिलेंगी?
    ➡️ IT, कस्टमर सर्विस, हेल्थकेयर, एजुकेशन, BPO, रिटेल, और हॉस्पिटैलिटी जैसे कई सेक्टर्स में मौके मिलेंगे।

    Q4. क्या महिलाएँ और दिव्यांग उम्मीदवार भी शामिल हो सकते हैं?
    ➡️ बिल्कुल! यह इवेंट खासतौर पर महिलाओं, युवाओं और दिव्यांगों के लिए ही डिजाइन किया गया है।

  • मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई डेवलपर्स ने BMC से मांगी राहत, प्रीमियम पेमेंट के लिए 10:10:80 फार्मूला पेश

    मुंबई के रियल एस्टेट डेवलपर्स ने BMC कमिश्नर भूषण गगरानी से मुलाकात कर प्रीमियम पेमेंट को 10:10:80 स्ट्रक्चर में करने का प्रस्ताव दिया। इस बैठक में CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA जैसी प्रमुख संस्थाओं ने हिस्सा लिया।

    मुंबई: रियल एस्टेट डेवलपर्स की प्रमुख संस्थाओं — CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA — ने 24 अक्टूबर को BMC प्रमुख भूषण गगरानी से मुलाकात की। इस दौरान डेवलपर्स ने मौजूदा प्रीमियम भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने के लिए 10:10:80 पेमेंट स्ट्रक्चर का सुझाव दिया। इस बैठक में डेवलपर्स ने कहा कि यह फार्मूला प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार पेमेंट को बैलेंस करेगा और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देगा।

    🏗️ क्या है 10:10:80 प्रीमियम पेमेंट स्ट्रक्चर?

    • डेवलपर्स ने प्रस्ताव रखा कि कुल प्रीमियम का 10% पेमेंट प्रोजेक्ट अप्रूवल के समय,
      10% कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC) पर,
      और बाकी 80% ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) मिलने पर किया जाए।
    • इस मॉडल का उद्देश्य है कि डेवलपर्स पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो और पेमेंट्स प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति के साथ जोड़े जाएँ।

    💰 वर्तमान प्रीमियम सिस्टम से क्यों हैं परेशान डेवलपर्स

    • फिलहाल डेवलपर्स को फंजिबल FSI, ओपन स्पेस डेफिशियेंसी, फायर सर्विस चार्ज, डेवलपमेंट सेस, और स्क्रूटनी फीस जैसी करीब 20 अलग-अलग प्रीमियम फीस देनी पड़ती हैं।
    • इनका भुगतान शुरुआती चरण में करना पड़ता है, जबकि तब तक प्रोजेक्ट से कोई राजस्व नहीं आता।
    • कई बार ये फीस 12% ब्याज दर पर डिफर्ड स्कीम के तहत दी जाती है, जिससे लागत और बढ़ जाती है।
    • डेवलपर्स का कहना है कि 10:10:80 फार्मूला न सिर्फ कैश फ्लो को मैच करेगा बल्कि BMC के लिए भी रेवेन्यू न्यूट्रल रहेगा।

    🏢 BMC की पहल: रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बनेगी स्टीयरिंग कमेटी

    • बैठक में BMC कमिश्नर भूषण गगरानी ने घोषणा की कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई जाएगी।
    • इसमें CREDAI-MCHI, NAREDCO, PEATA, BDA के प्रतिनिधि और BMC के विभिन्न विभागों के अधिकारी, जैसे फायर ऑफिस, शामिल होंगे।
    • कमेटी हर दो हफ्ते में बैठक करेगी, ताकि नीति संबंधी मुद्दों, डेवलपमेंट अड़चनों और प्रक्रियाओं पर चर्चा हो सके।
    • उप मुख्य अभियंता चंद्रशेखर उंडगे इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे, जबकि BMC प्रमुख भी महीने में एक बार बैठक में शामिल होंगे।

    🧩 डेवलपर्स की राय क्या है?

    CREDAI-MCHI अध्यक्ष सुखराज नाहर ने कहा,

    “10:10:80 प्रीमियम पेमेंट मॉडल एक फेयर और प्रैक्टिकल अप्रोच है, जिससे प्रोजेक्ट प्रोग्रेस के साथ पेमेंट्स को जोड़ा जा सकता है। इससे पारदर्शिता और संतुलन दोनों बढ़ेंगे।”

    CREDAI-MCHI सचिव ऋषि मेहता ने कहा,

    “रियल एस्टेट इंडस्ट्री मुंबई के विकास की रीढ़ है। BMC के साथ नियमित संवाद से नीति में सुधार और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।”

    📘 क्या है ‘प्रीमियम’? (Premium Explained)

    • प्रीमियम वो चार्जेज हैं जो डेवलपर्स सिविक अथॉरिटी को अतिरिक्त निर्माण अधिकार या प्रोजेक्ट अप्रूवल के लिए देते हैं।
    • इनमें शामिल हैं:
    • फंजिबल FSI (Floor Space Index)
    • ओपन स्पेस डेफिशियेंसी फीस
    • फायर सर्विस चार्ज
    • कॉमन एरिया चार्ज (लॉबी, लिफ्ट, सीढ़ियाँ आदि के लिए)
    • मुंबई में प्रीमियम कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का लगभग 20–30% तक हिस्सा होता है।

    📈 रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए इसका मतलब क्या है?

    • यह प्रस्ताव लागू होने पर प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत कम होगी।
    • डेवलपर्स को वर्किंग कैपिटल मैनेज करने में मदद मिलेगी।
    • इससे नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की गति बढ़ सकती है, जिससे मकान खरीदारों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा।

    FAQ सेक्शन

    Q1. 10:10:80 प्रीमियम स्ट्रक्चर क्यों ज़रूरी है?
    ➡️ यह मॉडल डेवलपर्स को प्रोजेक्ट के कैश फ्लो के अनुसार भुगतान करने की सुविधा देता है, जिससे आर्थिक दबाव घटता है।

    Q2. क्या इससे BMC का राजस्व प्रभावित होगा?
    ➡️ नहीं। CREDAI-MCHI के अनुसार यह रेवेन्यू न्यूट्रल है — यानी BMC को कोई नुकसान नहीं होगा।

    Q3. क्या स्टीयरिंग कमेटी के फैसले बाध्यकारी होंगे?
    ➡️ यह एक सलाहकार निकाय होगी, जो नीति सुधार और अड़चनों को हल करने के लिए सुझाव देगी।

    Q4. क्या इस प्रस्ताव को तुरंत लागू किया जाएगा?
    ➡️ फिलहाल यह प्रस्ताव स्तर पर है। BMC इसे समीक्षा के बाद नीतिगत रूप से लागू कर सकती है।

  • मुंबई हवाई अड्डे पर 154 विदेशी जीवों के साथ तस्कर गिरफ्तार

    मुंबई हवाई अड्डे पर 154 विदेशी जीवों के साथ तस्कर गिरफ्तार

    Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport-मुम्बई में थाईलैंड से आए यात्री के सामान में छिपाकर लाई गई 154 एक्सोटिक सरीसृप व जीवों के साथ एक महिला तस्कर को कस्टम्स ने गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला, कानूनी कार्रवाई और जैव-विविधता पर असर।

    मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने थाईलैंड से आने वाली एक महिला यात्री को 154 विदेशी और दुर्लभ जीवों के साथ गिरफ्तार किया है। इन जीवों में सर्प, छिपकलियाँ, कछुए व अन्य शामिल थे। तस्करी के इस कथित प्रयास के तहत महिला को कस्टम्स एक्ट व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

    मामला क्या है?

    • कस्टम विभाग के ज़ोन III टीम को मिली एक विशेष सूचना के आधार पर अड़ान से उतरते ही आरोपी यात्री की तलाशी ली गई।
    • उसकी सामान में मिले 154 विदेशी जीव थे — जिनमें कोर्न स्नेक्स, हॉगनोज़ स्नेक्स, बेअर्ड ड्रैगन, येलो एनाकॉन्डा आदि शामिल बताये गये।
    • बताया गया है कि ये जीव थाईलैंड से मुंबई लाए गए थे, तस्करी के उद्देश्य से।
    • इस कार्रवाई में कस्टम्स ने आरोपित महिला के खिलाफ Customs Act, 1962 तथा Wildlife (Protection) Act, 1972 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

    तस्करी के तरीके एवं जीवों की संवेदनशीलता

    • रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन जीवों को प्लास्टिक कंटेनरों में छिपाकर लगेज में रखा गया था, जो जानवरों के लिए अत्यंत खतरनाक पाया गया।
    • विशेषज्ञों के अनुसार, इन विदेशी प्रजातियों की भारत में मांग बढ़ रही है — विशेष कर पालतू जानवर के रूप में — जिससे तस्करी को बढ़ावा मिलता है।
    • उल्लेखनीय है कि कुछ जीव (जैसे एनाकॉन्डा) भारत की मूल जैव विविधता से बिलकुल अलग हैं, और उनके अवैध आयात से न सिर्फ जानवरों को पीड़ा होती है बल्कि घरेलू इकोसिस्टम पर भी असर पड़ सकता है।

    कानूनी और संरक्षण-प्रभाव

    • ये प्राणी अंतरराष्ट्रीय संधि Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES) के अंतर्गत आते हैं तथा बिना अनुमति आयात करना निषिद्ध है।
    • इन घटनाओं से पता चलता है कि भारत में वन्यजीव तस्करी बड़ी समस्या है — और ऐसे मामलों में सक्रिय निरोध व प्रवर्तन की आवश्यकता है।
    • पकड़े गए जीवों को अग्रिम तौर पर संरक्षण व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपा गया है — बाद में संभवतः उन्हें मूल देश वापस भेजा जाएगा।

    क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

    • यह तस्करी का गंभीर संकेत है — 154 जीवों की संख्या इस तरह के मामलों में बहुत बड़ी है।
    • यह जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों को दर्शाता है — विदेशी प्रजातियों का अवैध आयात स्थानीय इकोसिस्टम को अस्थिर कर सकता है।
    • यह दर्शाता है कि हवाई अड्डों पर सक्रिय निगरानी एवं गहरी जांच कितनी महत्वपूर्ण है।
    • साथ ही यह आम नागरिकों को सचेत करता है कि पालतू जानवर के लिए विदेशी जीवों की खपत सिर्फ नियम-विपरीत नहीं बल्कि जानवरों के हित में भी नहीं है।

    आगे क्या हो सकता है?

    • प्रवर्तन एजेंसियाँ तस्करी के स्रोत, नेटवर्क व मार्ग का पता लगायेंगी।
    • आरोपी के खिलाफ अभियोजन चल रहा है, कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
    • पकड़े गए जीवों की देखभाल व संभवतः देश वापसी की प्रक्रिया होगी।
    • इस तरह की घटनाओं के पुनरावृत्ति रोकने के लिए हवाई अड्डों पर और कड़ी जाँच-निगरानी की संभावना बढ़ेगी।

    Frequently Asked Questions (FAQ)

    Q1: क्या इतने विदेशी जीव लाना कानूनन पूरी तरह से निषिद्ध है?
    हाँ। इन जीवों में से बहुत सी प्रजातियाँ CITES की सूची में हैं और बिना अनुमति भारत में लाना कानूनी अपराध है।

    Q2: पकड़े गए जीवों के साथ क्या होगा?
    उनका स्वास्थ्य परीक्षण व देखभाल की जाएगी। फिर प्राधिकरणों के निर्देशानुसार संभवतः उन्हें मूल देश वापस भेजा जा सकता है।

    Q3: यदि कोई व्यक्ति इन जानवरों को पालतू के रूप में रखना चाहता है तो क्या कर सकता है?
    पालतू के रूप में जीव-प्रजातियों को रखने के लिए विशेष अनुमति चाहिए होती है। विदेशी प्रजातियों के लिए अधिक कड़े नियम होते हैं। बिना अनुमति रखना अपराध माना जा सकता है।

    Q4: इस तरह की तस्करी क्यों होती है?
    क्योंकि विदेशी और दुर्लभ जीवों की मांग पालतू बाजार में अधिक है, जिससे तस्करों को लाभ मिलता है। साथ ही जानवरों के लिए कम-सुरक्षित मार्ग व कम-कड़ी जाँच का फायदा मिलता है।

  • मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई में ब्रेकअप के बाद गर्लफ्रेंड पर हमला कर, कर ली खुदकुशी

    मुंबई के काला चौकी इलाके से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। ब्रेकअप से परेशान युवक ने शक के चलते अपनी गर्लफ्रेंड पर हमला किया और फिर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: परेल के काला चौकी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को चौंका दिया है।
    यहां एक युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड पर चाकू से हमला किया और फिर खुद आत्महत्या कर ली
    जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच कुछ दिन पहले ब्रेकअप हुआ था और युवक को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है।

    पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घायल लड़की की हालत गंभीर बताई जा रही है जबकि युवक की मौत हो चुकी है।

    😔 ब्रेकअप के बाद बढ़ा शक, बना हत्या और सुसाइड का कारण

    पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसकी गर्लफ्रेंड का करीब आठ दिन पहले ही ब्रेकअप हुआ था
    ब्रेकअप के बाद से युवक मानसिक रूप से परेशान था और इस पूरे मामले के लिए वह अपनी गर्लफ्रेंड को दोष दे रहा था।
    उसे लगता था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी दूसरे शख्स से अफेयर चल रहा है।

    इसी शक में शुक्रवार सुबह वह लड़की से मिलने गया, लेकिन अपने साथ किचन का चाकू भी ले गया।
    दोनों के बीच बहस बढ़ी और आरोपी ने गुस्से में आकर गर्लफ्रेंड पर कई वार कर दिए

    🏥 अस्पताल में भर्ती, एक की मौत — एक की हालत नाजुक

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    इलाज के दौरान आरोपी युवक की मौत हो गई, जबकि उसकी गर्लफ्रेंड गंभीर रूप से घायल है और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से खून से सना चाकू बरामद किया गया है और मामला आत्महत्या व हत्या के प्रयास के रूप में दर्ज किया गया है।

    🧠 रिश्तों में बढ़ती हिंसा पर उठे सवाल

    यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि रिश्तों में असहिष्णुता और मानसिक असंतुलन का भी संकेत है।
    पिछले कुछ महीनों में मुंबई, पुणे और ठाणे से ब्रेकअप के बाद आत्महत्या या हिंसा के कई केस सामने आए हैं।
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता बेहद जरूरी है।

    ⚖️ पुलिस जांच जारी

    काला चौकी पुलिस ने बताया कि दोनों के मोबाइल और सोशल मीडिया चैट की जांच की जा रही है ताकि विवाद का असली कारण पता लगाया जा सके।
    फिलहाल लड़की का बयान नहीं लिया जा सका है क्योंकि वह अभी ICU में भर्ती है।


    ❓ FAQs

    Q1. यह घटना कहां की है?
    यह घटना मुंबई के काला चौकी इलाके की है।

    Q2. आरोपी ने हमला क्यों किया?
    आरोपी को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से रिश्ता है, और ब्रेकअप के बाद वह मानसिक रूप से परेशान था।

    Q3. क्या दोनों की मौत हो गई?
    नहीं, आरोपी की मौत हो गई है, लेकिन लड़की गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जारी है।

    Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी साक्ष्य जुटा रही है।

    Q5. क्या यह मामला मानसिक तनाव से जुड़ा है?
    हाँ, शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी डिप्रेशन और शक के कारण यह कदम उठाया।

  • मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील ने NHRC से की शिकायत, कहा– “खतरनाक पटाखे बन गए ज़हर”

    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने मानवाधिकार आयोग (NHRC) से मांग की है कि कार्बाइड आधारित खतरनाक पटाखों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ये पटाखे लोगों की सेहत, पर्यावरण और जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

    मुंबई: जाने-माने वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने कार्बाइड बेस्ड (Carbide-Based) खतरनाक पटाखों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    उनका कहना है कि ये पटाखे न सिर्फ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं, बल्कि जानवरों और बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

    गांधी ने NHRC से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्ययन कराया जाए, सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की जाए, और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कड़े कदम उठाए जाएं — ताकि दिवाली की धार्मिक भावना बनी रहे, पर सेहत और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

    🌫️ दिवाली के बाद बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

    वकील की याचिका में कहा गया है कि सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशन और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर साल दिवाली के बाद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों में तेज़ उछाल दिखाते हैं।
    कई शहरों में दिवाली की रातों के बाद हवा की स्थिति “Very Poor” से “Severe” कैटेगरी तक पहुंच जाती है।

    हालांकि ग्रीन क्रैकर्स को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पहले से मौजूद है, लेकिन वकील का कहना है कि अभी भी गैर-प्रमाणित और जहरीले पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं

    🚫 “ग्रीन पटाखे” के बावजूद नहीं थमा जहरीले धुएं का असर

    हितेंद्र गांधी का कहना है कि “ग्रीन पटाखे” के नियमों के बावजूद गैर-लाइसेंसशुदा फायरवर्क्स और कार्बाइड बेस्ड पटाखों की बिक्री जारी है।
    इनसे निकलने वाला धुआं न सिर्फ इंसानों के लिए सांस संबंधी खतरे पैदा करता है बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों पर भी सीधा असर डालता है।

    🐶 जानवरों पर भी गहरा असर

    याचिका में बताया गया है कि पशु कल्याण संस्थाएं और वेटरनरी क्लीनिक दिवाली के बाद घायल और डरे हुए जानवरों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज करते हैं।
    कई शहरों में सैकड़ों पालतू और आवारा जानवर धमाकों और धुएं के कारण घायल या भाग जाते हैं।
    यह स्थिति हर साल मानवता और करुणा की भावना को ठेस पहुंचाती है।

    💣 कार्बाइड गन — नया खतरा बनते “घरेलू बम”

    हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में “कार्बाइड गन” या घरेलू विस्फोटक उपकरणों की भी चर्चा की है।
    इन गैरकानूनी और असुरक्षित पटाखों के कारण भोपाल से बेंगलुरु तक 130 से ज्यादा लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    इन “कार्बाइड गनों” के वीडियो सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं और कोई भी इन्हें घर पर बना सकता है।
    यह चलन अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट (Public Safety Crisis) बन चुका है।

    ⚖️ “मानवाधिकार का उल्लंघन” – याचिका में गंभीर आरोप

    वकील ने कहा,

    “ये घटनाएं सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सीधा हनन हैं — खासकर जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार का।”

    उन्होंने आयोग से अपील की है कि NHRC सरकार को सिफारिश करे कि

    • कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाए,
    • Explosives Act और अन्य नियमों को सख्ती से लागू किया जाए,
    • और इस मामले पर जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि उत्सव का असली प्रकाश जीवन और करुणा के साथ जुड़ा रहे।

    ❓FAQs

    Q1. किसने NHRC में याचिका दाखिल की है?
    मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने यह याचिका दाखिल की है।

    Q2. याचिका में क्या मांग की गई है?
    कार्बाइड आधारित पटाखों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध, और सुरक्षा नियमों की सख्त पालना की मांग की गई है।

    Q3. क्या “ग्रीन क्रैकर्स” से प्रदूषण कम हुआ है?
    नहीं, वकील का कहना है कि ग्रीन क्रैकर्स के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं आया।

    Q4. जानवरों पर क्या असर पड़ता है?
    तेज धमाकों और धुएं से जानवर डर जाते हैं, कई घायल या भाग जाते हैं।

    Q5. “कार्बाइड गन” क्या है?
    यह एक असुरक्षित घरेलू विस्फोटक उपकरण है जो दिवाली में धमाके के लिए बनाया जाता है, और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

  • बाइक सवारों के लिए राहत! अब बिना हेलमेट चालान में बड़ा बदलाव

    बाइक सवारों के लिए राहत! अब बिना हेलमेट चालान में बड़ा बदलाव

    बिना हेलमेट बाइक चलाने पर अब चालान की प्रक्रिया बदली जाएगी। ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने ई-चालान सिस्टम शुरू किया है, जो AI कैमरों से चालान जनरेट करेगा। जानिए नया नियम क्या कहता है और किन शहरों में लागू हुआ है।

    नई दिल्ली: भारत में बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने बिना हेलमेट चालान से जुड़े नियमों में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। अब से चालान सीधे मौके पर नहीं, बल्कि ई-चालान सिस्टम के जरिए काटा जाएगा।

    इस बदलाव का मकसद ट्रैफिक सिस्टम को ज़्यादा पारदर्शी, स्मार्ट और रिश्वत-मुक्त बनाना है। हालांकि हेलमेट पहनना अब भी अनिवार्य रहेगा।

    ⚙️ नया नियम क्या कहता है?

    अब ट्रैफिक पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काटने की बजाय AI-सक्षम कैमरा सिस्टम पर निर्भर होगी। अगर किसी सड़क या चौराहे पर CCTV या ट्रैफिक कैमरा लगा है और किसी बाइक सवार ने बिना हेलमेट वाहन चलाया, तो सिस्टम वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर चालान अपने आप जनरेट कर देगा

    ➡️ यानी कि अगर कैमरा कवरेज है, तो चालान ऑटोमेटिक होगा।
    ➡️ अगर कैमरा नहीं है, तो ट्रैफिक पुलिस मौके पर चालान काट सकती है।

    🪖 हेलमेट की अनिवार्यता अब भी बरकरार

    नए नियम का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बिना हेलमेट चलाना अब छूट गया है।
    मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत, बाइक चालक और पीछे बैठने वाला दोनों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। अगर आप बिना हेलमेट पकड़े गए, तो चालान तो कटेगा ही — बस तरीका अब डिजिटल होगा।

    🎥 अब चालान तय करेंगे AI कैमरे

    देशभर के कई शहरों में हाईटेक AI ट्रैफिक कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे न सिर्फ बिना हेलमेट बल्कि सीट बेल्ट, रेड लाइट जंप, मोबाइल यूज़ जैसे उल्लंघनों को भी पहचान सकते हैं।

    इन कैमरों से

    • वाहन की नंबर प्लेट स्कैन होती है
    • सिस्टम डेटा को ट्रैफिक सर्वर भेजता है
    • और ई-चालान सीधे वाहन मालिक के नाम जारी होता है

    इससे भ्रष्टाचार, झगड़े और गलत चालान की संभावना खत्म हो जाती है।

    🏙️ किन राज्यों में लागू हुआ नया ई-चालान सिस्टम?

    फिलहाल यह सिस्टम देश के कई बड़े शहरों में शुरू किया जा चुका है—
    📍 दिल्ली
    📍 लखनऊ
    📍 भोपाल
    📍 पुणे
    📍 जयपुर
    📍 अहमदाबाद

    अब धीरे-धीरे इसे छोटे शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर भी लागू किया जा रहा है।

    ⚠️ सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर

    सरकार का लक्ष्य सिर्फ चालान बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है।
    सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें बिना हेलमेट के होती हैं।
    AI आधारित सिस्टम से अब यह पता लगाना आसान होगा कि किसने नियम तोड़े, और यह सब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के होगा।


    ❓FAQs

    Q1. क्या अब बिना हेलमेट चलाने पर चालान नहीं कटेगा?
    चालान अभी भी कटेगा, लेकिन अब यह ऑटोमेटिक ई-चालान सिस्टम से कैमरा मॉनिटरिंग के जरिए होगा।

    Q2. क्या हेलमेट पहनना अब वैकल्पिक हो गया है?
    नहीं, हेलमेट अब भी जरूरी है। बिना हेलमेट बाइक चलाना अभी भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन है।

    Q3. किन शहरों में यह नया सिस्टम लागू हुआ है?
    दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, पुणे, जयपुर और अहमदाबाद में यह सिस्टम सक्रिय है।

    Q4. क्या पुलिस अब चालान नहीं काटेगी?
    जहां कैमरा कवरेज नहीं है, वहां पुलिस मैन्युअल रूप से चालान काट सकती है।

    Q5. क्या इससे गलत चालान की संभावना कम होगी?
    हां, क्योंकि यह सिस्टम AI आधारित है और मानवीय त्रुटियों या पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहती।

  • दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक द्वारा पूरग्रस्तों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये की दी धनराशि

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्त लोगों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 5 लाख रुपये का चेक सौंपा। अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वर्षा निवास पर मुलाकात की।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: मालाड़ पूर्व स्थित दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए मराठवाड़ा और विदर्भ में आए हालिया बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। भाजपा के पूर्व नगरसेवक एवं बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने बैंक की ओर से मुख्यमंत्री सहायता निधि (Chief Minister Relief Fund) में ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का चेक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा।

    🙏 मुख्यमंत्री से वर्षा निवास पर मुलाकात

    इस अवसर पर भाजपा के मुंबई महानगरपालिका नेता और पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने वर्षा निवास पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को दीवाली की शुभकामनाएं भी दीं। मुलाकात के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी मौजूद थे।

    🌊 मराठवाड़ा और विदर्भ में बाढ़ से नुकसान

    हाल ही में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में हुई भारी बारिश और बाढ़ से कई परिवारों को नुकसान झेलना पड़ा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, घर क्षतिग्रस्त हुए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे में मालाड सहकारी बैंक का यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है कि निजी संस्थाएं भी आपदा के समय सरकार के साथ खड़ी हैं।

    🏦 बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

    दी मालाड सहकारी बैंक लिमिटेड मुंबई की एक पुरानी और भरोसेमंद वित्तीय संस्था है, जो समाजसेवा में भी सक्रिय रहती है। बैंक ने पहले भी शिक्षा सहायता, चिकित्सा सहायता और सामाजिक अभियानों में सहयोग दिया है। इस बार बैंक ने पूरग्रस्तों की मदद कर सामाजिक दायित्व निभाने का एक और उदाहरण पेश किया है।

    🌟 सीएम फडणवीस ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी मालाड सहकारी बैंक और अध्यक्ष विनोद मिश्रा का धन्यवाद किया और कहा कि समाज के सभी घटक यदि ऐसे ही एकजुट होकर योगदान दें, तो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद तेज़ी से संभव हो सकेगी।


    ❓FAQs

    Q1. दी मालाड सहकारी बैंक ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में कितनी राशि दी?
    बैंक ने मराठवाड़ा और विदर्भ के पूरग्रस्तों की मदद के लिए 5 लाख रुपये का चेक मुख्यमंत्री सहायता निधि में सौंपा।

    Q2. चेक किसे सौंपा गया?
    बैंक के अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वर्षा निवास पर चेक सौंपा।

    Q3. इस अवसर पर और कौन मौजूद थे?
    इस मौके पर भाजपा युवा मोर्चा के माजी जिल्हा उपाध्यक्ष प्रकाश वकानी भी उपस्थित थे।

    Q4. पूरग्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
    मुख्य रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।

  • विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    विधायक सुनील प्रभु की मांग — आप्पापाडा से पोयसर नदी तक 13.4 मीटर चौड़ा DP रोड ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित किया जाए

    दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या को देखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के 13.4 मीटर चौड़े DP रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग की है।

    मुंबई: मालाड़ पूर्व के दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले आप्पापाडा इलाके में सड़कों की चौड़ाई बहुत कम होने से रोज़ाना ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है। नागरिकों को ऑफिस या काम के स्थान तक पहुँचने में काफी देरी होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विधायक सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आप्पापाडा नर्सिंग होम से पोयसर नदी तक के प्रस्तावित 13.4 मीटर चौड़े विकास नियोजन (DP) रोड को “वाइटल प्रोजेक्ट (Vital Project)” घोषित करने की मांग की है।

    🏙️ आप्पापाडा क्षेत्र में सड़कें संकरी, ट्रैफिक जाम आम

    दिंडोशी के आप्पापाडा, गोकुलनगर और आसपास के इलाकों में सड़कें बेहद संकरी हैं। पश्चिम द्रुतगती महामार्ग (Western Express Highway) से इन इलाकों की दूरी ज्यादा होने के कारण यहां ट्रैफिक जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है। इस कारण लोगों को समय पर ऑफिस या स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    🏗️ समानांतर रोड से पश्चिम उपनगरों को मिलेगी राहत

    प्रभु ने कहा है कि बोरीवली और लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों से जोड़ने वाला पश्चिम द्रुतगती महामार्ग के समानांतर रोड बेहद ज़रूरी है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक लोड कम होगा बल्कि नागरिकों को वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

    🌊 पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प भी इससे जुड़ा

    आप्पापाडा क्षेत्र में पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प (Poisar River Rejuvenation Project) पहले से ही चल रहा है और इसे पहले से ही “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया गया है। लेकिन इस प्रकल्प के तहत बनने वाले सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP) और मलनिस्सारण वाहिनियां (Drainage pipelines) जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए सड़क (access road) उपलब्ध नहीं है।

    प्रभु का कहना है कि अगर 13.4 मीटर चौड़ा डीपी रोड तत्काल बनाया गया और उसे वाइटल प्रोजेक्ट घोषित किया गया, तो बीएमसी के इन अधूरे कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

    🏛️ बीएमसी और सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

    प्रभु ने मांग की है कि इस सड़क को प्राथमिकता (priority) पर लेकर इसे “वाइटल प्रोजेक्ट” घोषित किया जाए। इससे न केवल बीएमसी के कामों को गति मिलेगी, बल्कि आप्पापाडा और आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों को लंबे समय से मिल रही ट्रैफिक की समस्या से भी राहत मिलेगी।


    ❓FAQs

    Q1. आप्पापाडा से पोयसर नदी तक की सड़क क्यों जरूरी है?
    इस क्षेत्र में सड़कें संकरी होने से भारी ट्रैफिक जाम लगता है। नया डीपी रोड बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को सुगम आवागमन मिलेगा।

    Q2. इस रोड को ‘वाइटल प्रोजेक्ट’ घोषित करने की मांग किसने की है?
    दिंडोशी विधानसभा के आमदार सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यह मांग की है।

    Q3. इससे बीएमसी के कौन-कौन से प्रोजेक्ट पूरे होंगे?
    पोयसर नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प, सांडपानी प्रक्रिया संयंत्र (STP), इंटरसेप्टर और ड्रेनेज पाइपलाइन जैसे कई अधूरे काम पूरे हो पाएंगे।

    Q4. यह रोड किस चौड़ाई का प्रस्तावित है?
    यह विकास नियोजन सड़क 13.4 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है।

  • 2028 तक 500 रुपये में एयर टैक्सी का सफर संभव

    2028 तक 500 रुपये में एयर टैक्सी का सफर संभव

    पंजाब के स्टार्टअप Nalwa Aero ने स्वदेशी eVTOL एयर टैक्सी विकसित की है। यह 2028 तक दिल्ली-एनसीआर में शुरू होने की दिशा में है, 10-12 मिनट में 3 घंटे का सफर पूरा कर सकती है।

    नई दिल्ली: एनसीआर में 2028 से एयर टैक्सी सेवा शुरू हो सकती है। पंजाब के मोहाली स्थित स्टार्ट अप Nalwa Aero ने इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयर टैक्सी विकसित की है और Directorate General of Civil Aviation (DGCA) से डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल (DOA) सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया है। इन टैक्सियों से 3 घंटे के सफर को मात्र 10-12 मिनट में पूरा करना संभव होगा एवं शुरुआती किराया लगभग ₹500 रहने का अनुमान है।

    विकास-परिदृश्य

    Nalwa Aero के सीईओ Kuljeet Singh Sandhu के अनुसार, कोविड-19 के दौरान एक मित्र के मेडिकल इमरजेंसी के समय न एयर एम्बुलेंस थी न हेलीपैड। यही कारण बना कि उन्होंने ऐसी मशीन विकसित करने का विचार किया जो कहीं से कहीं वर्टिकल टेक-ऑफ कर सके।

    तकनीकी विशेषताएँ

    • यह टैक्सी 8 रोटर सिस्टम से लैस है, यदि दो फेल भी हों तो सुरक्षित लैंडिंग संभव है।
    • क्रूज स्पीड लगभग 350 किमी/घंटा है, और बैटरी मॉडल में 300 किमी या 90 मिनट की उड़ान संभव है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल मॉडल में 800 किमी तक की रेंज की योजना है।
    • रनवे की जरूरत नहीं; इमारतों की छत या छोटे वर्टिपोर्ट से टेक-ऑफ और लैंडिंग संभव होगी।

    अनुमानित सेवा एवं किराया

    Nalwa Aero ने बताया है कि शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सेवा होगी। उदाहरण-स्वरूप, Indira Gandhi International Airport (IGI) से आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद या पानीपत तक सड़क से 1-3 घंटे लगते हैं, लेकिन एयर टैक्सी द्वारा यह सफर 10-12 मिनट में पूरा हो सकता है और शुरुआती किराया लगभग ₹500 प्रति व्यक्ति होगा।

    चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

    हालाँकि DOA मिल चुका है, लेकिन व्यावसायिक उड़ान शुरू करने के लिए प्रकार प्रमाणन (type-certification), वर्टिपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, चार्जिंग नेटवर्क, वायु-यातायात प्रबंधन तथा परिचालन लागत जैसे कई बिंदुओं पर काम बाकि है।

    भविष्य की दिशा

    Nalwa Aero ने 2028 तक इस सेवा को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। दिल्ली के बाद मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे बड़े मेट्रो शहरों में भी इसे लागू करने की योजना है।


    FAQs

    Q1. एयर टैक्सी सेवा कब शुरू हो सकती है?
    A1. Nalwa Aero ने 2028 तक व्यावसायिक सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है।

    Q2. इस टैक्सी की उड़ान दूरी और गति क्या होगी?
    A2. बैटरी मॉडल में लगभग 300 किमी रेंज और 90 मिनट का उड़ान समय; क्रूज स्पीड लगभग 350 किमी/घंटा।

    Q3. इसमें किराया कितना रहने का अनुमान है?
    A3. शुरुआती अनुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में किराया लगभग ₹500 प्रति व्यक्ति हो सकता है।

    Q4. यह सेवा सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में होगी या अन्य शहरों में भी?
    A4. शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में लॉन्च की जाएगी, बाद में मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में विस्तार की योजना है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।