महाराष्ट्र में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और कोकण के जिलों में IMD ने ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। प्रशासन ने बाढ़, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड से निपटने की तैयारी तेज कर दी है।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के जिलों में 30 सितंबर तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। खासतौर पर मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है।
🚨 बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को सतर्क रहने और नदी किनारे के इलाकों की लगातार निगरानी करने के आदेश दिए हैं। घाट वाले इलाकों में भूस्खलन और अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड (Flash Flood) का खतरा बना हुआ है।
🏞️ मराठवाड़ा में तबाही
20 सितंबर से हो रही लगातार बारिश और नदियों के उफान से मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है।
कम से कम 9 लोगों की मौत
लाखों एकड़ फसल बरबाद
जिलों में सड़कें और ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूटा
मराठवाड़ा के जिलों में औरंगाबाद (छत्रपती संभाजीनगर), जलना, लातूर, परभणी, नांदेड, हिंगोली, बीड और धाराशिव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
Q1. मुंबई में रेड अलर्ट का मतलब क्या है? 👉 रेड अलर्ट का मतलब है कि इलाके में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा है। लोगों को यात्रा से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी जाती है।
Q2. कौन-कौन से जिलों में सबसे ज्यादा खतरा है? 👉 मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में IMD ने रेड अलर्ट जारी किया है।
Q3. क्या मराठवाड़ा में बारिश से नुकसान हुआ है? 👉 हाँ, अब तक 9 लोगों की मौत और लाखों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है।
Q4. सरकार ने क्या तैयारी की है? 👉 कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं, NDRF की टीमें तैनात हैं और जिलों को अलर्ट रहने को कहा गया है।
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक सुनील प्रभु ने कपात सुझाव दिए थे, जिनका समय पर जवाब न मिलने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर प्रशासन की उदासीनता पर नाराज़गी जताई।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के पावसाली (मानसून) अधिवेशन में शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने नियम 256 के तहत नगरविकास विभाग से जुड़े कुल 8 कटौती सुझाव पेश किए थे। ये सुझाव मालाड पूर्व दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर आधारित थे और सार्वजनिक जनहित के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे थे।
संसदीय प्रथा के अनुसार, ऐसे सुझावों पर एक महीने के भीतर सरकार की तरफ से लिखित जवाब मिलना ज़रूरी होता है। लेकिन अधिवेशन खत्म हुए पूरे दो महीने बीत जाने के बाद भी नगरविकास विभाग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी
सुनील प्रभु ने इस लापरवाही पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि अगर समय पर जवाब मिलता, तो सदस्य संबंधित मुद्दों पर फॉलो-अप कर जनता को न्याय दिला सकते।
विधानसभा अध्यक्ष ने पहले भी कई बार इस पर निर्देश दिए हैं कि कटौती सुझावों के जवाब समय पर दिए जाएं, लेकिन प्रशासन की तरफ से इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
कटौती सुझावों का महत्व
ये सुझाव नगरविकास विभाग की योजनाओं और कामों से सीधे जुड़े हुए हैं।
दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दे इसमें शामिल हैं।
समय पर कार्रवाई होती तो स्थानीय जनता को राहत और पारदर्शिता मिल सकती थी।
प्रभु का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
❓ FAQ सेक्शन
Q1. कटौती सुझाव क्या होते हैं? 👉 विधानसभा में विपक्षी सदस्यों को बजट की विभिन्न मांगों में कटौती सुझाने का अधिकार होता है, जिन्हें कटौती सुझाव कहा जाता है।
Q2. इन सुझावों पर सरकार को जवाब कब देना होता है? 👉 संसदीय प्रथा के अनुसार, एक महीने के भीतर संबंधित विभाग की ओर से लिखित जवाब मिलना अनिवार्य है।
Q3. सुनील प्रभु ने कितने कटौती सुझाव पेश किए थे? 👉 कुल 8 कटौती सुझाव, जो नगरविकास विभाग और दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े थे।
Q4. अब तक प्रशासन का रुख कैसा रहा है? 👉 दो महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया है।
मालाड मढ सीआरज़ेड घोटाले की पूरी जांच रिपोर्ट – कैसे 24 हजार फाइलें गायब हुईं, SIT जांच पर उठे सवाल, और हाईकोर्ट ने अधिकारियों पर क्यों जताई नाराज़गी। जानिए घोटाले की पूरी टाइमलाइन और भ्रष्टाचार का खेल।
मुंबई: मालाड (Malad) के मढ (Madh) इलाके में समुद्र किनारे बने बंगले और अवैध बांधकाम (Illegal Constructions in CRZ Area) लंबे समय से विवादों में रहे हैं।
2010–2015: कई बिल्डरों और दलालों ने CRZ (Coastal Regulation Zone) नियमों को तोड़कर बंगले और होटल बनाए।
2016–2019: RTI कार्यकर्ताओं ने शिकायतें करना शुरू किया। पहली बार सामने आया कि महापालिका (BMC) और सरकारी अधिकारियों ने बनावट नक्शे (Fake Maps) पास किए।
2019: RTI में खुलासा हुआ कि इन बांधकामों को वैध दिखाने के लिए बनावट प्रमाणपत्र दिए गए।
🔹 SIT जांच और बनावट नक्शों का खुलासा
हाईकोर्ट के आदेश पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई।
SIT ने पाया कि दलाल और कुछ अधिकारी मिलकर पैसों के बदले बनावट नक्शे पास कर रहे थे।
अप्रैल 2025 में पुलिस ने एक गवाह का बयान दर्ज किया, जिसने माना कि उसने अधिकारियों और दलालों को नक्शा पास कराने के लिए रिश्वत दी।
इस गवाह ने कैसे, कब और किसे पैसे दिए, इसके सबूत भी पेश किए।
🔹 24 हजार फाइलें कैसे गायब हुईं?
RTI एक्टिविस्ट वैभव ठाकुर ने हाल ही में जानकारी मांगी तो बड़ा खुलासा हुआ – 👉 जिलाधिकारी कार्यालय से 24 हजार से ज्यादा कागजात गायब हो चुके हैं। ये वही कागज थे जिनमें अवैध बांधकामों से जुड़े नक्शे, अनुमति और प्रमाणपत्र दर्ज थे।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि –
कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए फाइलें गायब की गईं।
SIT की जांच में भी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, सिर्फ दलालों पर दबाव बनाया गया।
महाराष्ट्र के बीड जिले में एक सार्वजनिक सभा के दौरान उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ; बीड पुलिस ने जांच शुरू कर जल्द FIR दर्ज करने का ऐलान किया है। जानिए पूरी घटना, राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बीड के एक लोकल सभागार में आयोजित धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी गयी। कार्यक्रम के दौरान मंच पर खड़े एक वक्ता ने माइक्रोफोन पर कहा — “हिम्मत है तो इधर आओ, गाड़ देंगे…” — और उसी दौरान मंच व आसपास के हिस्सों में ‘I Love Mohammad’ के पोस्टर भी देखे गए। धमकी देने वाले बयान पर कई बार तालियाँ भी बजती दिखीं।
(नोट: यह रिपोर्ट घटना के उसी वीडियो और स्थानीय पुलिस के बयानों पर आधारित है।)
वीडियो कैसे वायरल हुआ और पुलिस की प्रतिक्रिया
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक और पुलिसिया हलकों में हलचल पैदा हो गयी। बीड पुलिस-सुप्रिंटेंडेंट ने कहा कि वीडियो की सत्यता जांची जा रही है और दोषियों की पहचान होने पर FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने बताया कि आयोजकों और वीडियो अपलोड करने वालों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।
कौन-कौन प्राथमिक जांच का हिस्सा हैं?
सभा के आयोजक और मंच पर मौजूद वक्ताओं से पूछताछ।
सोशल मीडिया पोस्ट/वीडियो अपलोड करने वालों का डिजिटल-ट्रैकिंग।
भीड़ में मौजूद लोगों की पहचान के लिए फुटेज-रिव्यू। पुलिस ने कहा कि कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि किसी भी नेता के ख़िलाफ़ खुले आम जान से मारने की धमकी गंभीर अपराध है।
घटना पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के नेताओं ने कहा कि ऐसी भाषा व व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून अपना काम करेगा। प्रदेश/केंद्र स्तर पर भी इस मामले पर टिप्पणी की जा सकती है — अभी तक स्थानीय नेताओं ने मामले की निंदा और कड़े कदम उठाने की मांग की है।
सोशल मीडिया और कानून — क्या जोखिम हैं?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज़ का सन्दर्भ अक्सर तेज़ी से फैलता है और माहौल गरमा सकता है। इस तरह की धमकियाँ सार्वजनिक शांति भंग कर सकती हैं और तुरंत जांच-पकड़ की मांग पैदा करती हैं। कानून के हिसाब से किसी को जान से मारने की धमकी देना, उकसाना या हिंसा के लिये भड़काना दंडनीय गतिविधियाँ हैं।
आगे क्या होगा?
बीड पुलिस ने बताया है कि पहचान होते ही FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक रूप से यह मामला गर्म रहेगा और आगे जांच रिपोर्ट पर ही असली तस्वीर साफ होगी।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. यह घटना कब और कहां हुई? A: यह घटना बीड जिले के एक स्थानीय सभागार में हुई; वीडियो हाल-फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। (घटना की सही तारीख स्थानीय रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।)
Q2. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है? A: बीड पुलिस ने वीडियो की सत्यता की जांच शुरू की है, आयोजकों और पोस्ट करने वालों की पहचान की जा रही है और जल्द FIR दर्ज करने का ऐलान किया गया है।
Q3. क्या आरोपियों की पहचान हो चुकी है? A: जांच जारी है; पुलिस ने कहा है कि पहचान होते ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
Q4. ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है? A: किसी को जान से मारने की धमकी, उकसाना और सार्वजनिक शांति भंग करना दंडनीय अपराध है; अभियोजन के तहत FIR और जरूरी चालान/हिरासत हो सकती है।
Q5. राजनीतिक मतभेदों में किस तरह की सावधानी रखी जानी चाहिए? A: सार्वजनिक कार्यक्रमों में संयम, नफरत भाषण से बचाव और कानून का सम्मान जरूरी है; सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता की जांच के बाद साझा करें।
मुंबई में ट्रैफिक कम करने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। CM देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि कुरला से बांद्रा-BKC तक ये सेवा शुरू होगी। जानें कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट और क्या होंगे फायदे।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में जल्द ही लोगों को पॉड टैक्सी (Pod Taxi) की सुविधा मिलने वाली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा बैठक में कहा कि यह सेवा शहर में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देने और बढ़ते ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी।
कुर्ला और बांद्रा रेलवे स्टेशन से लेकर BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) तक ये पॉड टैक्सी नेटवर्क बनाया जाएगा।
समीक्षा बैठक की तस्वीर
🚆 प्रोजेक्ट की अहम बातें
कुल लागत: ₹1,016.34 करोड़
लोकेशन: कुर्ला – बांद्रा – BKC
समयसीमा: 3 से 4 साल में पूरा होने की उम्मीद
उद्देश्य: ट्रैफिक कम करना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देना
🏙️ क्यों जरूरी है पॉड टैक्सी?
CM फडणवीस ने कहा कि आने वाले समय में बुलेट ट्रेन स्टेशन और नया बॉम्बे हाई कोर्ट बनने से इस इलाके में ट्रैफिक काफी बढ़ जाएगा। मौजूदा ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर बोझ बढ़ने से लोगों को परेशानी होगी।
ऐसे में पॉड टैक्सी एक तेज, आरामदायक और पर्यावरण-फ्रेंडली विकल्प बनेगी।
पॉड टैक्सी Personal Rapid Transit (PRT) सिस्टम का हिस्सा है।
ये छोटी-छोटी ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक गाड़ियां होती हैं।
ऊँचे ट्रैक (Elevated Track) पर चलती हैं।
हर पॉड में सीमित लोग बैठ सकते हैं, जिससे सफर तेज और सुविधाजनक होता है।
🛣️ कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स का होगा रिलोकेशन
इस प्रोजेक्ट के लिए कुर्ला पुलिस क्वार्टर्स को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा ताकि वहां की जमीन का इस्तेमाल पॉड टैक्सी नेटवर्क के लिए हो सके।
💳 सभी ट्रांसपोर्ट के लिए सिंगल कार्ड सिस्टम
मुंबई में एक यूनिफाइड कार्ड सिस्टम लाने की तैयारी भी चल रही है। इस कार्ड से लोकल ट्रेन, मेट्रो, बस और आने वाली पॉड टैक्सी – सबका किराया चुकाया जा सकेगा।
🌉 स्टेशन और BKC को मिलेगा बेहतर कनेक्शन
कुर्ला और बांद्रा स्टेशन एरिया को पॉड टैक्सी से जोड़ने की तैयारी।
BKC के बड़े ऑफिस बिल्डिंग्स को भी इस सेवा से डायरेक्ट कनेक्ट किया जाएगा।
मौजूदा स्काईवॉक का भी स्मार्ट इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
📊 बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?
यह हाई-लेवल मीटिंग सह्याद्री गेस्ट हाउस, मलबार हिल पर हुई। शामिल अधिकारी:
महाराष्ट्र सरकार ने नई योजना “मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी” का ऐलान किया है। इसके तहत हर साल राज्य के 51 बच्चों को NASA की सैर कराई जाएगी। जानिए योजना की पूरी जानकारी और इसका उद्देश्य।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा विभाग ने छात्रों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। अब विज्ञान प्रदर्शन सिर्फ प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विजेता छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव भी मिलेगा। इस योजना के तहत हर साल राज्य के 51 बच्चों को NASA (नासा) ले जाया जाएगा।
विज्ञान प्रदर्शन का नया स्वरूप
अब तक होने वाले विज्ञान प्रदर्शन में केवल नकद इनाम दिया जाता था। राज्यस्तर पर पहला इनाम 5 हजार रुपये, दूसरा और तीसरा इनाम ढाई हजार रुपये था। लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव हुआ है।
पहले स्थान वाले प्रयोग को अब 51 हजार रुपये मिलेंगे।
राज्य स्तर पर चुने गए पहले 51 बच्चों को NASA विज़िट का मौका मिलेगा।
उनके साथ 4 शिक्षक भी जाएंगे। कुल 55 लोगों के इस दौरे पर करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
इस योजना का खास उद्देश्य ग्रामीण और जिला परिषद स्कूलों के बच्चों में वैज्ञानिक सोच बढ़ाना है। बच्चों में विज्ञान और गणित की रुचि बढ़े, उनकी नींव मजबूत हो और भविष्य में वे वैज्ञानिक बन सकें – यही मकसद है। शालेय शिक्षा राज्यमंत्री पंकज भोयर ने कहा कि,
> “गांवों से पढ़ने वाले बच्चों को भी NASA जैसी बड़ी संस्था देखने और सीखने का मौका मिलेगा। अगले साल से योजना लागू होगी।”
योजना के उद्देश्य
बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।
विज्ञान और गणित में रुचि पैदा करना।
ग्रामीण बच्चों को वैश्विक स्तर का अनुभव देना।
भविष्य में बच्चों को वैज्ञानिक और नवप्रवर्तनकर्ता बनने के लिए प्रेरित करना।
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❓ FAQ सेक्शन
Q1. मुख्यमंत्री विद्यार्थी विज्ञान वारी योजना कब से शुरू होगी? ➡️ यह योजना अगले साल से लागू होगी।
Q2. कितने छात्रों को NASA जाने का मौका मिलेगा? ➡️ हर साल 51 छात्रों को NASA की सैर कराई जाएगी।
Q3. क्या सिर्फ NASA ही विजिट होगा? ➡️ नहीं, तालुका स्तर पर साइंस सेंटर और जिला स्तर पर ISRO की विजिट भी होगी।
Q4. योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? ➡️ बच्चों में विज्ञान और गणित के प्रति रुचि बढ़ाना और ग्रामीण छात्रों को अंतरराष्ट्रीय exposure देना।
Q5. खर्च कौन उठाएगा? ➡️ पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार उठाएगी।
सलमान खान अपनी अपकमिंग फिल्म Battle of Galwan की शूटिंग लद्दाख में कर रहे थे, जहां ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बीच उन्हें हल्की चोट लग गई। अब वह मुंबई लौट आए हैं और आराम करने के बाद फिल्म के अगले शेड्यूल में हिस्सा लेंगे।
मुंबई: बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खानइन दिनों अपनी बहुचर्चित फिल्म बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग कर रहे हैं। यह फिल्म 2020 के भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित है और इसका निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।
फिल्म का पहला शेड्यूल लद्दाख की बर्फीली वादियों में रखा गया था, जहां मौसम बेहद सख्त और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियां थीं।
एक्शन सीन के दौरान लगी चोट
शूटिंग के दौरान सलमान खान को हल्की चोट आई। हालांकि, उन्होंने शूटिंग बीच में छोड़ी नहीं और पूरा शेड्यूल पूरा किया। एक टीम मेंबर ने बताया – “सलमान भाई ने हर सीन पूरे जोश और समर्पण के साथ किया। मौसम कितना भी खराब रहा हो, उन्होंने कभी बहाना नहीं बनाया।”
45 दिन का शेड्यूल, सलमान रहे 15 दिन मौजूद
इस लद्दाख शेड्यूल को 45 दिनों तक चलाया गया। इसमें सलमान लगभग 15 दिन सेट पर मौजूद रहे। उन्होंने ज़्यादातर एक्शन सीन खुद किए, जिससे बाकी टीम भी मोटिवेट हुई।
मुंबई लौटे सलमान, अगला शेड्यूल जल्द
अब सलमान खान मुंबई लौट आए हैं और यहां थोड़ी देर आराम करेंगे। अगले हफ्ते से फिल्म का दूसरा शेड्यूल शुरू होगा, जिसमें मुख्य रूप से इमोशनल और ड्रामेटिक सीन शूट किए जाएंगे।
फिल्म का मोशन पोस्टर पहले ही रिलीज़ हो चुका है, जिसमें सलमान खान का खून से सना चेहरा और तेज़ नज़रें काफी चर्चा में हैं। हालांकि, फिल्म की रिलीज़ डेट अब तक अनाउंस नहीं की गई है।
फिल्मों के साथ-साथ सलमान खान टीवी शो बिग बॉस 19 भी होस्ट कर रहे हैं। लद्दाख शेड्यूल के दौरान उन्होंने कुछ एपिसोड मिस किए, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी वह फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स में अच्छा बैलेंस बना रहे हैं।
फैंस की उम्मीदें
सलमान खान के डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को देखते हुए कहा जा रहा है कि बैटल ऑफ गलवान उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हो सकती है। फैंस बेसब्री से इसके अगले शेड्यूल और रिलीज़ डेट का इंतजार कर रहे हैं।
❓ FAQ Section
Q1. सलमान खान को चोट कैसे लगी? 👉 लद्दाख में बैटल ऑफ गलवान की शूटिंग के दौरान एक्शन सीन करते वक्त उन्हें हल्की चोट लगी।
Q2. क्या शूटिंग रोकी गई थी? 👉 नहीं, सलमान खान ने चोट लगने के बाद भी पूरा शेड्यूल पूरा किया।
Q3. अगला शेड्यूल कब होगा? 👉 फिल्म का दूसरा शेड्यूल मुंबई में अगले हफ्ते शुरू होगा।
Q4. फिल्म का निर्देशन कौन कर रहा है? 👉 बैटल ऑफ गलवान का निर्देशन अपूर्व लखिया कर रहे हैं।
Q5. फिल्म की रिलीज़ डेट क्या है? 👉 अभी तक फिल्म की रिलीज़ डेट आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने पाइपलाइन डिविजन अपरेंटिस भर्ती 2025 के लिए 537 पदों पर नोटिफिकेशन निकाला है। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख अब 28 सितंबर 2025 तक बढ़ा दी गई है। जानें पूरी डिटेल्स – योग्यता, आयु सीमा, स्टाइपेंड और अप्लाई करने का तरीका।
डिजिटल डेस्क मुंबई: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), जो देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी और फॉर्च्यून 500 लिस्टेड PSU है, ने पाइपलाइन डिविजन में अपरेंटिस भर्ती 2025 निकाली है। इस भर्ती में कुल 537 पद हैं, जो अलग-अलग राज्यों में भरे जाएंगे।
👉 पहले आवेदन की लास्ट डेट 21 सितंबर थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 28 सितंबर 2025 कर दिया गया है।
कितने पद, कहां-कहां?
IOCL की इस भर्ती में पूरे देश में अलग-अलग राज्यों के लिए वैकेंसी निकली है। सबसे ज़्यादा पद गुजरात (84) और पश्चिम बंगाल (64) में हैं। कुछ प्रमुख राज्यों की वैकेंसी इस तरह है:
पश्चिम बंगाल – 64
राजस्थान – 53
उत्तर प्रदेश – 53
ओडिशा – 51
तमिलनाडु – 39
बिहार – 38
महाराष्ट्र – 15
दिल्ली – 14
कुल मिलाकर – 537 पद
कौन कर सकता है अप्लाई? (Eligibility)
इस भर्ती के लिए अलग-अलग ट्रेड और पोस्ट के हिसाब से योग्यता तय है।
Technician Apprentice (Mechanical/Electrical/Instrumentation) → 3 साल का डिप्लोमा
Trade Apprentice (HR/Accountant) → किसी भी विषय में ग्रेजुएशन / कॉमर्स ग्रेजुएशन
Data Entry Operator (DEO) → न्यूनतम 12वीं पास
Domestic DEO (Skill Certificate Holder) → 12वीं + स्किल सर्टिफिकेट
👉 जनरल/OBC/EWS उम्मीदवारों को कम से कम 50% मार्क्स, और SC/ST/PwBD को 45% मार्क्स चाहिए।
👉 SC/ST को 5 साल, OBC को 3 साल और PwBD को 10 साल तक की छूट मिलेगी।
स्टाइपेंड (Salary/Stipend)
सभी चयनित कैंडिडेट्स को Apprentices Act, 1961 के अनुसार मासिक स्टाइपेंड मिलेगा। हालांकि यह पक्की नौकरी नहीं है, लेकिन ट्रेनिंग IOCL जैसी बड़ी कंपनी में होगी, जो करियर के लिए बहुत फायदेमंद है।
सिलेक्शन प्रोसेस (Selection Process)
इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं होगा।
सिर्फ अकादमिक मेरिट (अंक प्रतिशत) के आधार पर लिस्ट बनेगी।
टाई होने पर उम्र (बड़ा उम्मीदवार) और फिर 10वीं के नंबर देखे जाएंगे।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल फिटनेस ज़रूरी होगी।
कैसे करें अप्लाई? (How to Apply)
सबसे पहले NATS/NAPS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें (डिप्लोमा/ग्रेजुएट या DEO के हिसाब से)।
फिर IOCL की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन करें।
आवेदन की प्रक्रिया दो स्टेप्स में होगी –
Part-I: बेसिक डिटेल्स भरें और रजिस्ट्रेशन नंबर लें।
Part-II: फोटो, सिग्नेचर, एजुकेशन डिटेल्स और NATS/NAPS नंबर अपलोड करें।
फाइनल सबमिशन के बाद प्रिंटआउट ज़रूर लें।
👉 कोई आवेदन शुल्क (Application Fee) नहीं है।
ज़रूरी डेट्स (Important Dates)
ऑनलाइन आवेदन शुरू – 29 अगस्त 2025
आवेदन की आखिरी तारीख (Extended) – 28 सितंबर 2025
कट-ऑफ डेट (Eligibility Check) – 31 अगस्त 2025
❓ FAQ
Q1: IOCL Apprentice Recruitment 2025 में कितने पद हैं? Ans: कुल 537 पद हैं।
Q2: आवेदन की आखिरी तारीख क्या है? Ans: अब बढ़ाकर 28 सितंबर 2025 कर दी गई है।
Q3: IOCL Apprentice में सलेक्शन कैसे होगा? Ans: सलेक्शन सिर्फ मेरिट (अंक प्रतिशत) के आधार पर होगा, कोई परीक्षा या इंटरव्यू नहीं है।
Q4: योग्यता क्या चाहिए? Ans: डिप्लोमा, ग्रेजुएशन या 12वीं पास (पोस्ट के हिसाब से)।
Q5: क्या आवेदन शुल्क है? Ans: नहीं, सभी कैंडिडेट्स के लिए आवेदन फ्री है।
Lodha Developers ने Palava (मुंबई क्षेत्र) में 24.34 एकड़ जमीन STT GDC को लगभग ₹499-500 करोड़ में बेची है। ये सौदा Lodha-Maharashtra सरकार के ₹30,000 करोड़ के डेटा सेंटर पार्क योजना से जुड़ा है जिससे 6,000 नौकरियाँ और 2 GW प्लानिंग की जा रही है।
मुंबई: नवी मुंबई के Palava क्षेत्र में Lodha Developers ने Singapore-based ST Telemedia Global Data Centres (STT GDC) को लगभग ₹500 करोड़ में करीब 24.34 एकड़ भूमि बेच दी है। इस जमीन की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
जमीन का ब्योरा
कुल भूमि: 24.34 एकड़
Lodha Developers ने बेची: 1.74 एकड़
उसकी सहायक कंपनी Palava Induslogic 4 Pvt Ltd ने बेची: 22.60 एकड़
मूल्यांकन राशि: लगभग ₹499-500 करोड़
बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ी पहल
इस सौदे से Lodha की महाराष्ट्र सरकार के साथ हुई MoU (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) की योजना को बल मिलेगा, जिसमें Palava में एक ग्रीन इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर पार्क बनाया जाना है।
योजना के अनुसार परियोजना में निवेश होगा ₹30,000 करोड़ का, इससे अनुमानित रूप से 6,000 डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियाँ सृजित होंगी।
पार्क का क्षेत्रफल होगा 370 एकड़, और इसकी क्षमता होगी लगभग 2 गीगावाट बिजली की।
Lodha की रणनीति और महत्व
Lodha Developers ने Palava में बड़े पैमाने पर ज़मीन बँकी (land bank) बनाई हुई है, जिसे अब वो आवासीय, वाणिज्यिक, वेयरहाउसिंग और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोग कर रही है।
इस तरह की पहल भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और डेटा स्टोरेज / क्लाउड कम्प्यूटिंग / AI आदि क्षेत्रों की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।
यह सौदा न सिर्फ Lodha के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि महाराष्ट्र और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए भी एक संकेत है कि कैसे निजी और सरकारी साझेदारी से बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण संभव हो रहा है। यह निवेश न सिर्फ आर्थिक विकास बढ़ाएगा बल्कि पर्यावरण-अनुकूल (ग्रीन) उपायों के सहारे टिकाऊ मॉडल की नींव भी रखेगा।
FAQ सेक्शन
प्रश्न
उत्तर
इस सौदे में कितने एकड़ जमीन बेचे गए?
कुल 24.34 एकड़ जमीन बेची गई है — जिसमें से Lodha ने 1.74 एकड़ और उसकी सहायक कंपनी ने 22.60 एकड़।
मूल्य कितना था इस ज़मीन का?
लगभग ₹499-500 करोड़।
इस सौदे का उद्देश्य क्या है?
यह सौदा Palava में एक ‘ग्रीन इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर पार्क’ के हिस्से के रूप में है, जो महाराष्ट्र सरकार और Lodha द्वारा नियोजित है।
इस डेटा सेंटर पार्क में कुल निवेश कितना होगा?
लगभग ₹30,000 करोड़ निवेश की योजना है।
कुल कितनी नौकरियों की उम्मीद है?
लगभग 6,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियाँ इससे बनेंगी।
डेटा सेंटर पार्क की प्लान की गई बिजली क्षमता क्या है?
मुंबई सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में फेरीवालों पर हो रही पुलिस कार्रवाई और भारी जुर्माने के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने मंत्रालय में अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने इस मुद्दे को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने का भरोसा दिलाया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में फुटपाथ पर रोज़ी-रोटी कमाने वाले फेरीवालों पर बार-बार की जा रही कार्रवाई को लेकर सामाजिक संगठनों ने आवाज़ बुलंद की है। फेरीवालों का कहना है कि मुंबई पुलिस अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग कर उनसे हजारों रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। इसी मुद्दे पर 18 सितंबर 2025 को मंत्रालय में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
🚶♂️ फेरीवालों का संघर्ष और परेशानी
मुंबई महानगर और उपनगरों में हज़ारों लोग फेरी लगाकर अपना पेट पालते हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा रोज़ाना किए जाने वाले छापों और कार्रवाई के कारण इनकी ज़िंदगी मुश्किल हो गई है।
एक ही फेरीवाले पर ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
कई बार दिन में दो-दो बार भी जुर्माना वसूला जाता है।
कई पुलिस कर्मियों पर धारा 102, 115 और 117 का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।
🏢 मंत्रालय में हुआ प्रतिनिधिमंडल
इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने के लिए महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन सहित कई संगठन एक साथ आए। बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख लोग:
कर्नल प्रकाश रेड्डी
श्री मिलिंद ताम्बड़े
कर्नल सुरेश सावंत
शांताराम जाधव
कर्नल अखिलेश गौड़
इन सभी ने मिलकर फेरीवालों पर हो रहे अन्याय की विस्तृत जानकारी दी और अधिकारियों को ठोस सबूत भी दिखाए।
संगठनों ने मंत्रालयीन अधिकारियों को जो ज्ञापन सौंपा, उसमें मुख्य रूप से यह मुद्दे उठाए गए:
पुलिस द्वारा धारा 102, 115 और 117 का दुरुपयोग।
अनुचित और भारी जुर्माना, जिससे फेरीवालों की रोज़ी-रोटी पर असर।
पुलिसकर्मियों द्वारा एक ही दिन में बार-बार जुर्माना लगाने की घटनाएँ।
गरीब और मेहनतकश तबके पर आर्थिक बोझ।
स्थायी समाधान की ज़रूरत ताकि फेरीवाले सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
⚖️ अधिकारियों की प्रतिक्रिया
मंत्रालय के उप सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुना।
उन्होंने आश्वासन दिया कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।
अधिकारियों ने माना कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियाँ हो सकती हैं।
आगे की कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है।
🗣️ संगठनों की मांग
संगठनों ने साफ कहा कि:
फेरीवालों को रोज़ परेशान करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
मुंबई पुलिस अधिनियम में बदलाव कर फेरीवालों के लिए अलग गाइडलाइन बने।
पुलिस और स्थानीय निकायों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर निगरानी समिति बने।
📊 फेरीवालों की संख्या और अहमियत
सिर्फ मुंबई में अनुमानित 2.5 से 3 लाख फेरीवाले रोज़ाना काम करते हैं।
ये छोटे कारोबार शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
आम जनता को सस्ता सामान और रोज़मर्रा की ज़रूरतें उपलब्ध कराते हैं।
फेरीवालों का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा और कामकाज सुनिश्चित हो तो वे भी टैक्स और रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार हैं।
🛑 लगातार कार्रवाई का असर
फेरीवालों के परिवारों पर आर्थिक संकट।
बच्चों की पढ़ाई पर असर।
छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाना मुश्किल।
रोज़ कमाने-खाने वालों की रोज़ी-रोटी खतरे में।
🚨 नतीजा और आगे की राह
यह मुलाकात फेरीवालों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है। अगर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होती है और ठोस कदम उठाए जाते हैं तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।
❓ FAQ – मुंबई में फेरीवालों पर कार्रवाई और मंत्रालय को सौंपा गया ज्ञापन
Q1. फेरीवालों पर बार-बार कार्रवाई क्यों की जा रही है? 👉 स्थानीय निकाय और पुलिस प्रशासन मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 का हवाला देकर कार्रवाई करते हैं। इन धाराओं के तहत फुटपाथ अतिक्रमण और असुविधा को रोकने के लिए प्रावधान है, लेकिन सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इन धाराओं का दुरुपयोग हो रहा है।
Q2. एक फेरीवाले पर कितना जुर्माना लगाया जाता है? 👉 फेरीवालों पर नियमित रूप से ₹1200 तक का जुर्माना लगाया जाता है। कुछ मामलों में तो एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटा जाता है।
Q3. इस मुद्दे पर मंत्रालय में किन-किन संगठनों ने ज्ञापन सौंपा? 👉 महाराष्ट्र हॉकर्स फेडरेशन, लाल बावटा जनरल वर्कर्स यूनियन, महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय मजदूर संघ, शहीद भगत सिंह हॉकर्स यूनियन मुंबई, महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन समेत कई संगठन शामिल रहे।
Q4. सरकार की ओर से क्या आश्वासन मिला है? 👉 मंत्रालयीन अधिकारियों और उप सचिव ने कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में इसे उठाने का प्रयास किया जाएगा।
Q5. फेरीवालों की मुख्य मांगें क्या हैं? 👉
अनुचित और बार-बार किए जा रहे जुर्माने को रोका जाए।
मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 102, 115 और 117 के दुरुपयोग पर रोक लगे।
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत फेरीवालों को कानूनी सुरक्षा मिले।
नगर पालिका और पुलिस की ओर से पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाई जाए।