Category: Cyber Security

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  • मुंबई में मोबाइल का IMEI नंबर बदलने वाला गिरोह पकड़ा गया, क्राइम ब्रांच ने दो को किया गिरफ्तार

    मुंबई में मोबाइल का IMEI नंबर बदलने वाला गिरोह पकड़ा गया, क्राइम ब्रांच ने दो को किया गिरफ्तार

    मुंबई क्राइम ब्रांच ने पवई इलाके से दो लोगों को गिरफ्तार किया, जो मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलने का गैरकानूनी काम कर रहे थे। पुलिस ने मौके से संदिग्ध मोबाइल जब्त किए और मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: पवई इलाके में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को एक मोबाइल शॉप में छापामारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलने का गैरकानूनी काम कर रहे थे।

    पकड़े गए आरोपियों के नाम हैं –

    • रामप्रसाद सरगुन राजभर (37)
    • गुलाम रसूल राशिद खान, जो पवई में मोबाइल शॉप चलाता है और टेक्नीशियन भी है।

    क्राइम ब्रांच यूनिट 6 को जब पुख्ता सूचना मिली, तो उन्होंने छापा मारकर इस धंधे का खुलासा किया।

    📱 IMEI नंबर क्या होता है और क्यों है ज़रूरी?

    IMEI (International Mobile Equipment Identity) एक 15 अंकों का यूनिक नंबर होता है, जो हर मोबाइल फोन की पहचान बताता है।

    • इससे फोन का असली मालिक और लोकेशन ट्रैक करना आसान होता है।
    • चोरी हुए या गुम फोन को ट्रेस करने में पुलिस को IMEI बहुत मदद करता है।
      👉 लेकिन जब इसका नंबर बदल दिया जाता है, तो मोबाइल की पहचान बदल जाती है और अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

    🔍 कैसे पकड़ा गया गिरोह?

    क्राइम ब्रांच यूनिट 6 (चेंबूर) की टीम को खबर मिली थी कि पवई के एक मोबाइल शॉप में संदिग्ध तरीके से IMEI नंबर बदला जा रहा है।

    • पुलिस ने छापा मारते समय पाया कि आरोपी “App Unlock Tool” (गूगल क्रोम के जरिए) इस्तेमाल कर रहे थे।
    • इस सॉफ्टवेयर की मदद से मोबाइल का असली IMEI बदलकर नया नंबर डाला जा रहा था।

    👮 पुलिस की कार्रवाई

    • छापे में कई संदिग्ध और फर्जी सेकेंड-हैंड मोबाइल बरामद हुए।
    • पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया।
    • उन्हें भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की संबंधित धाराओं में बुक किया गया।
    • मेडिकल टेस्ट के बाद उन्हें मुंबई कोर्ट में पेश किया गया।

    📌 पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    यह पूरी कार्रवाई पुलिस इंस्पेक्टर भारत घोणे (यूनिट 6, चेंबूर) की देखरेख में हुई।
    आगे की जांच का जिम्मा पुलिस इंस्पेक्टर सुशांत सावंत की टीम को सौंपा गया है।

    ⚖️ कानून और IMEI छेड़छाड़ का अपराध

    भारत में मोबाइल का IMEI नंबर बदलना या छेड़छाड़ करना एक गंभीर अपराध है।

    • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इस पर सख्त सज़ा और जुर्माना हो सकता है।
    • मोबाइल कंपनियों और पुलिस दोनों के लिए यह अपराध ट्रैकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

    🌐 मुंबई में बढ़ते साइबर क्राइम केस

    मुंबई जैसे बड़े शहर में मोबाइल और साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहे हैं।

    • IMEI नंबर बदलने वाले ऐसे गैंग चोरी हुए फोन, ब्लैक मार्केट और धोखाधड़ी में शामिल होते हैं।
    • कई बार इन मोबाइल का इस्तेमाल बड़े क्राइम (फ्रॉड, स्मगलिंग, ड्रग्स नेटवर्क) में किया जाता है।
      👉 इसीलिए पुलिस लगातार इस तरह के नेटवर्क पर नज़र बनाए हुए है।

    📊 मोबाइल यूज़र्स के लिए चेतावनी

    • सेकेंड हैंड फोन खरीदते वक्त हमेशा IMEI नंबर चेक करें।
    • IMEI चेक करने के लिए *#06# डायल करें।
    • नकली, ब्लैकलिस्टेड या बदले हुए IMEI वाले फोन पर नेटवर्क सर्विस बंद हो सकती है।
    • ऐसे फोन खरीदने पर कानूनी पचड़े में फंसने का खतरा रहता है।

    📱 IMEI नंबर कैसे चेक करें?

    (हर मोबाइल यूज़र के लिए ज़रूरी जानकारी)

    • अपने मोबाइल पर *#06# डायल करें 👉 IMEI नंबर स्क्रीन पर दिखेगा।
    • फोन की सेटिंग्स → अबाउट फोन → IMEI में भी यह नंबर मिलता है।
    • मोबाइल के डिब्बे और बिल पर भी IMEI प्रिंट होता है।
    • कभी भी सेकेंड-हैंड मोबाइल खरीदते समय IMEI ज़रूर मिलाएं।

    ⚖️ IMEI छेड़छाड़ पर क्या सज़ा है?

    भारत में IMEI नंबर बदलना या छेड़छाड़ करना है गंभीर अपराध।

    • 📌 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज होता है।
    • ⛔ अपराध साबित होने पर जेल + भारी जुर्माना हो सकता है।
    • 🚔 IMEI बदलने वाले फोन का इस्तेमाल ब्लैकलिस्ट हो जाता है।

    🚨 मुंबई पुलिस की चेतावनी

    • नकली या बदले हुए IMEI वाले मोबाइल का इस्तेमाल न करें।
    • सेकेंड-हैंड मोबाइल खरीदने से पहले IMEI ऑनलाइन चेक करें।
    • संदिग्ध मोबाइल की तुरंत पुलिस या सर्विस प्रोवाइडर को जानकारी दें।
  • मुंबई में बुज़ुर्ग महिला से फर्जी पेंशन स्कीम के नाम पर ठगी, लगभग ₹ 8 लाख का प्रीमियम

    मुंबई में बुज़ुर्ग महिला से फर्जी पेंशन स्कीम के नाम पर ठगी, लगभग ₹ 8 लाख का प्रीमियम

    मुंबई की 69 वर्षीय श्रीमती ललिता मल्होत्रा को एक प्राइवेट इंश्योरेंस एजेंट ने फर्जी पेंशन स्कीम के बहाने लगभग ₹ 7.95 लाख प्रीमियम भरवाकर धोखा दिया। एक साल बाद पेंशन न मिलने पर पुलिस में FIR दर्ज। जानिए पूरा मामला, सावधानियाँ और कानूनी प्रक्रिया।

    मुंबई: मलाड (वेस्ट) क्षेत्र की इक निवासी, ६९ वर्षीय ललिता मल्होत्रा नाम की एक बुज़ुर्ग महिला, पेंशन स्कीम का झांसा देकर लगभग ₹ 8 लाख से कम नहीं की गई राशि एक एजेंट को चुकाने के लिए मजबूर हुई। आरोपी संस्था एक निजी इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि कहलाई जा रही है।

    कैसे हुआ धोखा?

    घटनाविवरण
    पहला संपर्क2023 में, ललिता ने एक पॉलिसी ली 5 साल के लिए, और पहली किश्त के रूप में ₹ 61,350 बैंक चेक से चुकाई गई।
    दूसरी किश्त की दबावजनवरी 2024 में, एजेंट अशिष तिवारी ने दूसरी किस्त भरने के लिए फोन किया। लेकिन महिला ने कहा कि अभी एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है, तो नीति बंद़ करना चाहती हैं।
    वादा पेंशन कातिवारी ने कहा कि पॉलिसी में बोनस आ गया है, नीति का मूल्य बढ़ गया है, और यदि बाकी राशि चुकाई जाए तो नवंबर 2024 से पेंशन मिलना शुरू होगी।
    भुगतान की प्रक्रियामई 2024 से फ़रवरी 2025 तक, कुल 12 किश्तों में लगभग ₹ 7,95,000 गूगल पे से तिवारी द्वारा दिए गए बैंक खाते में जमा कराई गईं।
    पेंसन शुरू न होने पर आशंकानवंबर 2024 से पेंशन मिलने का जो वादा था, तिवारी ने वो पूरा नहीं किया। उसने कॉल और मैसेज का जवाब देना बन्द कर दिया।

    शिकायत और कानूनी कार्यवाही

    • ललिता-मल्होत्रा जब पेंशन न मिलने की बात पूछने लगीं, तब एजेंट उनसे बचने लगा। उसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को सूचित किया और मेई 2025 में बंगुर नगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
    • पुलिस ने मामला जांचा और आशिष तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जैसे कि धोकाधड़ी (cheating), फर्जी आश्वासन देना वगैरह के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

    ⚠️ वरिष्ठ नागरिकों के लिए चेतावनियाँ

    1. जाने-पहचाने एजेंटों या कंपनियों से ही व्यवसाय करें — यदि प्रतिनिधि का नाम, पहचान पत्र, कंपनी का नाम स्पष्ट नहीं हो, तो तुरंत संदिग्ध समझें।
    2. पहले लिखित दस्तावेज़ मांगें — पॉलिसी की पूरी जानकारी, प्रीमियम की राशि, पेंशन की शुरुआत की तिथि आदि सभी चीज़ों का दस्तावेज़ बने।
    3. भुगतान से पहले नीति की शर्तें पढ़ें — फाइन प्रिंट (terms & conditions), बोनस क्लॉज, पॉलिसी की समाप्ति आदि।
    4. लाखों त्वरित उपायों पर न बहकें — “पेंशन अब शुरू होगी”, “बोनस आ गया है”, “थोड़ी बार भुगतान करो” जैसे वादे सदैव सच नहीं होते।
    5. बैंक ट्रांज़ैक्शन्स के दस्तावेज़ सुरक्षित रखें — हर पेमेंट का रिकॉर्ड हो, चाहें चेक हो, ऑनलाइन ट्रांसफर हो या गूगल पे आदि।
    6. परिचित व्यक्ति या परिवार को जानकारी दें — यदि कोई निवेश प्रस्ताव बहुत अच्छा लगे, परिवार को बताएं, किसी भरोसेमंद से राय लें।

    ⚖️ कानूनी प्रक्रिया और क्या हो सकता है आगे

    • पुलिस ने आशिष तिवारी के ख़िलाफ़ बनार जनता न्याय संहिता की धाराएँ लगाई हैं: धोकाधड़ी (cheating), फोटोग्राफ़ी या दस्तावेज़ फर्जीवाड़ा (forgery), आदि।
    • बैंक खाते की जांच की जाएगी कि पैसे कहाँ गए हैं, कौन-से खाते में जमा हुए, और क्या पैसे बरामद हों सकते हैं।
    • यदि साबित हुआ कि एजेंट ने फर्जी वादे किए, तो वह जवाबदेह होगा और आरोपी के खिलाफ FIR, बाद में चार्ज शीट, न्यायालयिक सुनवाई हो सकती है।
    • वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी/पुलिस हेल्पलाइन्स हैं जहाँ ऐसे प्रकरण दर्ज कराए जा सकते हैं, साइबर क्राइम सेल को सूचित किया जा सकता है।

    🛡️ वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी अधिकार और बचाव गाइड

    1. कानूनी अधिकार

    • धोखाधड़ी (Cheating): भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (पूर्व IPC 420) लागू होती है।
    • फर्जी दस्तावेज़ / जाली साक्ष्य: धारा 336 (पूर्व IPC 468, 471) लागू हो सकती है।
    • साइबर अपराध: IT Act की धाराएँ भी लागू हो सकती हैं, जैसे धारा 66D (cheating by personation using computer resources)।
    • वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार: Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा, देखभाल और सहायता मिलती है।

    2. कहाँ शिकायत करें?

    • स्थानीय पुलिस थाने (FIR दर्ज कराना ज़रूरी है)
    • साइबर क्राइम पोर्टल: cybercrime.gov.in
    • हेल्पलाइन नंबर: 1930 (साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन)
    • वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन (मुंबई पुलिस): 1090

    3. बचाव के उपाय

    ✔️ किसी भी पेंशन स्कीम या इंश्योरेंस पॉलिसी को ऑनलाइन वेरिफाई करें।
    ✔️ एजेंट का IRDAI रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करें (इंश्योरेंस रेग्युलेटर की वेबसाइट पर उपलब्ध)।
    ✔️ अनजाने खातों में गूगल पे / UPI से बड़ी रकम ट्रांसफर न करें।
    ✔️ परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को सभी निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दें।
    ✔️ हमेशा लिखित एग्रीमेंट / पॉलिसी डॉक्यूमेंट रखें।

    4. अगर धोखा हो जाए तो तुरंत क्या करें?

    1. अपने बैंक और UPI ऐप को कॉल कर “फ्रॉड रिपोर्ट” दर्ज कराएं।
    2. 1930 पर कॉल करें और साइबर पुलिस को सूचना दें।
    3. cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
    4. पुलिस थाने में FIR करवाएं और सारे पेमेंट स्क्रीनशॉट्स, बैंक स्टेटमेंट्स, मैसेजेस सबूत के तौर पर दें।

    👉 यह गाइड न सिर्फ इस केस में बल्कि हर उस स्थिति में काम आएगी, जहाँ बुज़ुर्गों को वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा हो।

    यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे बुज़ुर्ग लोग भरोसे के आधार पर आर्थिक नुक़सान उठा सकते हैं, खासकर जब उन्हें समय पर पेंशन या कोई वित्तीय लाभ मिलने का वादा किया जाए। सही जानकारी, दस्तावेज़, और धैर्य ही धोखाधड़ी से बचने की कुंजी है।

  • साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    साइबर सुरक्षा: सीईआरटी-इन का फ्री बॉट रिमूवल टूल डाउनलोड करें

    भारत सरकार का सीईआरटी-इन नागरिकों को साइबर सुरक्षा के लिए “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करने की सलाह दे रहा है। जानें कैसे बचे मालवेयर और बॉटनेट से। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    आज के डिजिटल दौर में हर कोई इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हैकर्स अक्सर बॉटनेट (Botnet) और मालवेयर (Malware) के जरिए लोगों के मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिवाइस पर हमला करते हैं। ऐसे हमलों से न केवल आपकी पर्सनल जानकारी चोरी हो सकती है, बल्कि बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारियां भी खतरे में पड़ जाती हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली सीईआरटी-इन (CERT-In) यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने आम जनता के लिए खास पहल की है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    सीईआरटी-इन का “फ्री बॉट रिमूवल टूल”

    सीईआरटी-इन ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://www.csk.gov.in से “फ्री बॉट रिमूवल टूल” डाउनलोड करें। यह टूल खास तौर पर ऐसे सॉफ़्टवेयर और प्रोग्राम को पहचानता है जो आपके डिवाइस को संक्रमित कर सकते हैं। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    इस टूल की मदद से –

    • आपके कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद हानिकारक बॉटनेट को हटाया जा सकता है।
    • डिवाइस की सिक्योरिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।
    • ऑनलाइन लेन-देन और पर्सनल डाटा को चोरी होने से बचाया जा सकता है।

    बॉटनेट और मालवेयर क्या हैं?

    बॉटनेट ऐसे संक्रमित डिवाइसों का नेटवर्क होता है जिसे साइबर अपराधी कंट्रोल करते हैं। एक बार डिवाइस संक्रमित हो जाए, तो उसे रिमोटली इस्तेमाल कर स्पैम ईमेल भेजने, ऑनलाइन धोखाधड़ी करने या बड़े स्तर पर साइबर अटैक करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
    मालवेयर यानी हानिकारक सॉफ़्टवेयर आपके डिवाइस में घुसकर आपकी जानकारी चुरा सकता है या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    कैसे बचें साइबर हमलों से?

    सीईआरटी-इन और दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को कुछ आसान साइबर सुरक्षा टिप्स भी दिए हैं:

    1. फ्री बॉट रिमूवल टूल ज़रूर डाउनलोड करें।
    2. अपने मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा एंटीवायरस अपडेट रखें।
    3. अनजान लिंक या संदिग्ध ईमेल पर क्लिक करने से बचें।
    4. डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स में हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।
    5. समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और स्ट्रॉन्ग पासवर्ड रखें।

    क्यों है जरूरी यह टूल?

    मुंबई जैसे बड़े शहरों में रोज़ हजारों लोग ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं। साइबर फ्रॉड के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में कई मामलों में देखा गया कि लोगों के डिवाइस पर मालवेयर अटैक हुआ और उनकी बैंक अकाउंट डिटेल्स चोरी हो गईं। ऐसे में यह टूल हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

    नतीजा

    भारत सरकार की यह पहल आम नागरिकों को साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि हर कोई इस फ्री बॉट रिमूवल टूल को डाउनलोड कर लेता है और बुनियादी सावधानियां बरतता है, तो न केवल व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रहेगा बल्कि देश की साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी। Cyber ​​Security: Download CERT-In’s Free Bot Removal Tool

  • मुंबई: मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल, महिला का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल

    मुंबई: मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल, महिला का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल

    मुंबई में मैट्रिमोनियल साइट पर शादी का झांसा देकर महिला को फंसाया गया। आरोपी ने वीडियो चैट से निजी वीडियो बनाए और ब्लैकमेल कर पैसे वसूले। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    मुंबई: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मझगांव इलाके की 34 वर्षीय महिला को शादी के नाम पर मैट्रिमोनियल साइट धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा। आरोपी ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिला को शादी का झांसा दिया, उसका भरोसा जीता और फिर वीडियो चैट के जरिए निजी वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    आरोपी ने शादी का झांसा देकर जीता भरोसा

    9 अगस्त को महिला को एक कॉल आया। आरोपी ने खुद को शादी का इच्छुक बताया और धीरे-धीरे महिला से बातचीत कर उसका विश्वास हासिल किया। बातचीत के दौरान उसने चालाकी से महिला की निजी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए। इसके बाद वह ब्लैकमेलिंग पर उतर आया। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    वीडियो चैट के बाद असली खेला

    आरोपी ने महिला को वीडियो भेजकर धमकी दी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देगा। डर के चलते महिला ने शुरुआत में 30 हजार रुपये दे दिए, लेकिन मांग लगातार बढ़ती गई। जब महिला को एहसास हुआ कि यह साइबर ठगी है, तो उसने भायखला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    साइबर ठग गिरोह पर शक

    मुंबई पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस को शक है कि इस अपराध के पीछे कोई बड़ा साइबर ठग गिरोह सक्रिय है, जो महिलाओं को टारगेट कर इस तरह की ठगी कर रहा है। जांच जारी है और आरोपी की तलाश में टीमें जुटी हैं। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

    पुलिस की अपील

    यह घटना डिजिटल दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी का बड़ा उदाहरण है। खासकर मैट्रिमोनियल साइट पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन किसी भी अनजान शख्स पर जल्दी भरोसा न करें, निजी जानकारी और तस्वीरें साझा करने से बचें। यदि कोई ब्लैकमेलिंग करे तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। Mumbai: Fake profile on matrimonial site, blackmailed woman by making her video

  • 2000 रुपये का झटपट लोन और लड़की की अश्लील फोटो हो गई वायरल

    2000 रुपये का झटपट लोन और लड़की की अश्लील फोटो हो गई वायरल

    ऑनलाइन मोबाइल एप्लीकेशन से सिर्फ 2000 रुपये का लोन लेना 25 वर्षीय लड़की को महंगा पड़ गया। जबकि पीड़िता के मुताबिक उसने लोन का भुगतान कर दिया था। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    मुंबई: जोगेश्वरी की रहने वाली एक 25 वर्षीय लड़की के साथ बहोत बुरा हुआ है। ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनी ने उसके अंतरंग तस्वीरों को उसी की कॉन्टेक्ट लिस्ट हैक कर उसके रिश्तेदारों को फॉरवर्ड कर दिया। गनीमत रही की लड़की ने समझदारी दिखाते हुए अपने पिता को सारी हकीकत बता दी। लड़की ने दावा किया कि उसने लोन के पैसे चुका दिए, हालांकि उसमें देरी हुई। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    पुलिस के अनुसार, पीड़िता जोगेश्वरी की रहने वाली है। उसने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन देखा जिसमें एक ऐप के बारे में बताया गया था जो तुरंत नकद लोन प्रदान करता है। उसने 20 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे अपने फोन पर ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद उसने छह दिनों के लिए 2000 रुपये लोन के लिए अप्लाई किया। ऐप पर अपना बैंक खाता नंबर सहित व्यक्तिगत जानकारी अपलोड कर दी। साथ ही, आधार कार्ड की एक प्रति भी अपलोड जोड़ दी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    तस्वीरें वायरल करने की धमकी

    शिकायत के मुताबिक, इसके कुछ देर बाद ही लड़की के बैंक खाते में 1300 रुपये लोन के पैसे जमा हो गए। छह दिन बाद, लड़की को मैसेज मिला, जिसमें लोन चुकाने के लिए कहा गया। उसने जवाब दिया कि उसके पास इस समय पैसे नहीं है। उसे कुछ दिन और चाहिए लेकिन मैसेज भेजने वाले ने उसको तुरंत भुगतान करने को कहा। उसने धमकाते हुए कहा, कि ऐसा नहीं करने पर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दी जाएगी। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    पैसे चुकाने के बाद भी वायरल कर दी तस्वीर

    पीड़िता का दावा है कि वह इस मैसेज को पढ़कर डर गई। उसको 31 जुलाई को एक क्यूआर कोड भेजा गया, जिसमें तुरंत पैसों के भुगतान करने के लिए कहा गया था। पीड़िता ने उसी दिन क्यूआर कोड के माध्यम से 2000 रुपये चुका दिए। लेकिन उसी दिन शाम करीब 7 बजे पीड़िता की चाची को एक अज्ञात नंबर से उसकी मॉर्फ की गई नग्न तस्वीरें मिलीं। इसके बाद, उसके एक पुरुष मित्र को भी इसी तरह की तस्वीरें मिली। इससे लड़की डर गई और उसने अपने पिता को इस बारे में बताया, जिसके बाद दोनों ओशिवारा पुलिस का रुख किया। Instant loan of 2000 rupees and obscene photo of the girl went viral

    लोन एप की ठगी से कैसे बचें?

    • लोन लेने से पहले सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
    • ब्याज दर, पेमेंट साइकल और पेनाल्टी आदि की जानकारी ले लें।
    • लोन ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल ऐप प्लेस्टोर से ही डाउनलोड करें।
    • अनजान लिंक या वाट्सएप से आए डॉट एपीके फाइल्स से बचें।
    • ऐप्स को अनावश्यक अनुमतियां जैसे कॉन्टैक्ट्स, गैलरी या कैमरा) नहीं दें।
    • ठगी का शिकार बनने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
    • लोन से संबंधित कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और स्क्रीनशॉट्स को सेव करके रखें।

    मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज साइबर अपराध जनवरी 2024 से मार्च 2025

    सालदर्ज केसहल केस धोखाधड़ी राशिजब्त राशि
    202450871253846.71 करोड़ रु82.49 करोड़ रु
    20251106188 279.83 करोड़ रु40.29 करोड़ रु

    झटपट लोन देने वाले ऐप्लिकेशन संचालक करते क्या है?

    लोन ऐप्स के जरिए पैसे देने वाली कंपनियां अक्सर अर्जदार की गोपनीय जानकारियां चुरा लेती है और उन्हीं के कॉन्टेक्ट डिटेल्स की मदद से धमकाया और परेशान किया जाता है। यहां तक की उनके रिश्तेदारों और परिवार वालों को लगातार कॉल कर परेशान किया जाता है। ऐसे में कर्जदारों के कॉन्टैक्ट्स नंबरों पर धमकी भरे मैसेज भेजने से सामाजिक अपमान का डर बढ़ जाता है। ब्लैकमेलिंग कर लोगों को इतना परेशान किया जाता है कि लोग आत्महत्या को ही अंतिम रास्ता मान लेते हैं।

    सरकार को ध्यान देने की जरुरत

    लोन ऐप्स की ब्लैकमेलिंग और उच्च ब्याज दरों के कारण कई लोग मानसिक रोगी बन जाते हैं। कुछ लोग तनाव में आत्महत्या तक कर लेते हैं। वहीं, मुंबई पुलिस के अनुसार, साइबर जागरूकता की कमी के कारण लोग अपनी समस्याएं खुलकर साझा नहीं करते, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग भी कम होने के कारण केस सामने आ नहीं पाता है। साइबर दक्ष में पुलिसकर्मियों की कमी भी है, जो साइबर अपराध को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए, साइबर डिटेक्टशन रेट दो से तीन फीसदी रही है, जबकि साइबर केस बढ़कर 243 फीसदी तक मुंबई जैसे शहर में पहुंच चुकी है। इस ओर सरकार और प्रशासन को ध्यान देने की जरुरत है।

  • Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बिहार का रहने वाले आरोपी ने लिया ‘D’ कंपनी का नाम

    Mumbai: जीशान सिद्दीकी को धमकी भरे ई- मेल भेजकर फिरौती मांगने वाले मुख्य आरोपी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई इंटरपोल की मदद से सफल हो पाई है। आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार किया गया है।

    Mumbai: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जीशान सिद्दीकी को धमकी देने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुंबई पुलिस और इंटरपोल की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है।

    कहां है त्रिनिदाद और टोबैगो ?

    पूरे वेस्टइंडीज में त्रिनिदाद छठे स्थान का सबसे बड़ा आईलैंड है। त्रिनिदाद और टोबैगो जो कैरिबियन सागर में स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्व में वेनेजुएला के तट के पास है। यहीं से मुंबई पुलिस ने इंटरपोल की मदद से बिहार के दरभंगा का रहने वाला आरोपी को डिटेंड कर गिरफ्तार किया है।

    ईमेल से मिली थी धमकी

    पुलिस के अनुसार, धमकी देने वाला बिहार के दरभंगा का रहने वाले आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद नावेद खुद को डी-कंपनी का सदस्य बताते हुए अप्रैल में जीशान को जान से मारने की धमकी दी थी और 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी भरे ईमेल 19, 20 और 21 अप्रैल को भेजे गए थे।

    बांद्रा पुलिस का एक्शन

    इस मामले में जीशान सिद्दीकी ने बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया, कि आरोपी ने कई ईमेल भेजकर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनकी हत्या कर दी जाएगी, जैसा कि उनके पिता बाबा सिद्दीकी के साथ करने की बात कही गई थी।

    भारत के बाहर से मिली थी धमकी

    पुलिस ने शिकायत के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी थी और अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 23 अप्रैल को यह केस मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी भारत से बाहर है, जिसके बाद 28 अप्रैल को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और फिर इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।

    फिरौती का था मामला

    इंटरपोल की मदद से आरोपी को त्रिनिदाद और टोबैगो में गिरफ्तार किया गया और फिर बुधवार को भारत डिपोर्ट कर मुंबई लाया गया है। अब आरोपी से क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने धमकी देकर फिरौती वसूलने की मंशा से यह साजिश रची थी।

    हो सकते हैं कई खुलासे

    क्राइम ब्रांच का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद देश में दहशत का माहौल बन गया था। उसी वक्त उनके बेटे को मिली धमकी में उनके पिता की हत्या का जिक्र किया गया था। फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पीछे कोई और गिरोह या नेटवर्क तो नहीं है।

  • Mumbai: पाकिस्तानी जासूस के नाम पर 22.4 लाख रुपये की ठगी

    Mumbai: पाकिस्तानी जासूस के नाम पर 22.4 लाख रुपये की ठगी

    साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। इस सिलसिले में मुंबई पुलिस की सायबर सेल ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है।

    मुंबई: साइबर जालसाजों ने एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए दक्षिण मुंबई की एक 64 वर्षीय महिला पर “पाकिस्तानी जासूस” होने का झूठा आरोप लगाकर 22.4 लाख रुपये की उगाही की है। जालसाजों ने वरिष्ठ नागरिक को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके लिए अपराधियों ने विडियो कॉल का भी इस्तेमाल किया और फर्जी दस्तावेजों की फोटो कॉपी दिखाई।

    कैसे किया मजबूर?

    जब महिला ने वीडियो कॉल मे सायबर जालसाजों को सरकारी वर्दी पहने हुए देखा तो वह घबरा गई और पहले तो वो उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश करती रही कि शायद उनसे कोई चूक हुई है। लेकिन जालसाज उनके कनेक्शन पाकिस्तान से बताने के नकली प्रमाणित दस्तावेज दिखाकर धमकाने लगे और सीधे-सीधे केस से बचने के लिए उन्हें 22.4 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।

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    फर्जी जासूसी घोटाला

    आखिरकार घबराहट के मारे पीड़ित महिला ने उनके कहे अनुसार पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर किए और राहत की सांस ली। घटना के बारे में पता चलने पर, दक्षिण साइबर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और मामले की जांच शुरू कर दी। अधिकारी इस व्यापक फर्जी जासूसी घोटाले में शामिल जालसाजों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं।

  • महिलाओं और लड़कियों को सोशल मीडिया पर टार्गेट करने वाला शुभम गिरफ्तार

    महिलाओं और लड़कियों को सोशल मीडिया पर टार्गेट करने वाला शुभम गिरफ्तार

    सोशस मीडिया पर महिलाओं के नाम पर अश्ली फोटो और विडियो का राज आखिरकार मुंबई पुलिस की सायबर सेल ने खोल कर रख दी है। आए दिन बदनामी के डर से होने वाली महिलाओं और लडकियों की मौत के पीछे सायबर जालसाज देखो क्या कर रहे हैं।

    मुंबई: सोशल मीडिया पर लड़कियों का अश्ली डाटा प्रसारित करने वाला 25 वर्षीय शुभम मनोजप्रसाद सिंह को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुंबई के दहिसर सायबर सेल ने बिहार के बागलपुर निवासी शुभम कुमार मनोजप्रसाद सिंह को कर्नाटक के सांदुर, जिला बेल्लारी से गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक में यह सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहा था। इसके मोबाइल से पुलिस को मिली जानकारी में कहा गया कि आरोपी ने 100 से अधिक महिलाओं के नाम से ईमेल आईडी बनाई हुई थी और इंस्टाग्राम पर 11 अलग-अलग महिलाओं की आईडी बना रखी थी। आरोपी ने 2015-16 में दिल्ली के रेहान आय.टी. सेंटर से सॉफ्ट स्किल कंप्यूटर ट्रेनिंग प्रोग्राम डिप्लोमा हासिल किया है। इसके मोबाइल फोन मे अलग-अलग महिलाओं और लडकियों के 13500 फोटो स्क्रीन शॉट निकाल कर इकट्ठा किया हुआ था।

    कॉलेज की लड़की को बनाया शिकार

    दहिसर पूर्व, परिमंडल 12 के पुलिस उपायुक्त महेश चिमटे ने बताया, कि जनवरी के अंत में एक शिकायत मिली थी। कॉलेज मे पडने वाली एक लड़की को आरोपी ने ब्लैकमेल किया हुआ था और उसके नाम से इंस्टाग्राम पर अश्ली फोटो और पोस्ट किए जा रहे थे। जिसके कारण उस लड़की की काफी बदनामी हो रही थी और वह मानसिक रुप से प्रताड़ित हो रही थी। दहिसर पुलिस की सायबर सेल ने उसे अच्छे से पहले समझाया और सांत्वना दी। इसके बाद गु.र.क्र. 95/2005 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 78, 79 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 (सी), 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस कहा कि ऐसे मामलों से किसी भी महिला को घबराने की जरूरत नही है। हमेशा पुलिस की मदद लें।

    वायरल पोस्ट

    दहिसर डिविजन के सहायक पुलिस आयुक्त किशोर खैरनार ने बताया, कि आरोपी पहले महिलाओं और लडकियों को सोशल मीडिया पर फोलो कर मेसेज भेजता था और जबरदस्ती अश्ली विडियो बनाने के लिए जोर देता था इसमे अश्ली भाषा का भी उपयोग करता था। ऐसा नही करने पर उसका नाम और फोटो का इस्तेमाल कर इंटरनेट पर अश्ली पोस्ट और स्टोरीज़ वायरल करता था। पुलिस ने पहले उस अकाउंट का पता लगाया जिस अकाउंट से उसने लड़की को मेसेज भेजा था। इसके बाद सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म और गुगल से उसका पता लगाया गया। तब जाकर सायबर सेल को पता चला कि आरोपी कर्नाटक से ऑपरेटर कर रहा है।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    दहिसर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक होनमाने ने बताया, कि जैसे ही जानकारी मिली की आरोपी कर्नाटक के सांदुर, जिला बेल्लारी से ऑपरेटर कर रहा है। सायबर सेल के सहायक पुलिस निरीक्षक अंकुश दांडगे और उनकी टीम को रवाना किया गया। आरोपी वहां सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहा था। 6 जुन को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां बोरीवली कोर्ट ने उसे 16 जुन तक की पुलिस कस्टडी में जांच के निर्देश दिए।

    जांच अधिकारी ने क्या कहा?

    मामले की जांच कर रहे पुलिस निरीक्षक एएस. देसाई और सहायक पुलिस निरीक्षक अंकुश दांडगे ने बताया, कि आरोपी के मोबाइल फोन में लगभग 100 से भी ज्यादा अलग-अलग महिलाओं के बनावटी ईमेल आईडी प्राप्त हुए हैं और 11 इंस्टाग्राम आईडी जो महिलाओं के नाम से नकली बनाकर कई अश्ली पोस्ट किए गए है उन सभी की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ने अपने मोबाइल फोन मे अलग-अलग महिलाओं और लडकियों के 13500 फोटो स्क्रीन शॉट निकाल कर इकट्ठा किया हुआ था। पुलिस ने इसके खिलाफ और भी शिकायतें मिलने की गुंजाइश जता रही है।

  • Mumbai: सोशल मीडिया के अश्लील कंटेंट पर छात्र को क्लिक करना पड़ा भारी: देखो क्या हुआ?

    Mumbai: सोशल मीडिया के अश्लील कंटेंट पर छात्र को क्लिक करना पड़ा भारी: देखो क्या हुआ?

    Mumbai News: एक छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अश्लील कंटेंट पर क्लिक क्या कर दिया जालसाजों ने उसे ऐसा फंसाया कि उनसे बचने के लिए उसे पुलिस के पास दौड़कर जाना पड़ा। हालांकि पुलिस भी अब बस लड़के को संमझाने का काम कर रही है।

    मुंबई: अगर आप इंस्टाग्राम या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट के लालच में आकर किसी लिंक पर क्लिक करते हैं, तो यह आपके लिए बहुत भारी पड़ सकता है। इसमें न सिर्फ मानसिक, बल्कि आर्थिक रूप से भी आप को तोड़ कर रख सकता है। हालांकि सरकारी सभी सुरक्षा एजेंसियां ऐसे खतरे से दूर रहने की अपील करती रहती है। लेकिन सोशल मीडिया पर आजकल जिस तरीके से अश्लीलता फैल रही है उसकी जाल से बच पाना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। इसका कारण भी हमारी ही मानसिकता है। जो अश्लीलता के पीछे अपना होश खो बैठते हैं।

    लड़के को कैसे फंसाया?

    मुंबई के भांडुप इलाके से ऐसी ही एक घटना प्रकाशमें आ रही है। यहां एक कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र ने इंस्टाग्राम (Instagram) के एक अश्लील कंटेंट पर क्लिक किया, जिसमें अश्लील फोटो और वीडियो कॉल का वादा किया गया था। इसमें एक व्हाट्सएप (WhatsApp) लिंक दिया गया था और दूसरी तरफ से लालच देने के लिए कुछ न्यूड फोटो भेज कर सब्सक्राईब करने को कहा गया जिसमें शुरुआती 2000 रुपये फीस बताया गया। इसमें बताया गया कि ग्राहक को लड़कियों की न्यूड फोटो और विडियो कॉल की सुविधा दी जाएगी। लेकिन जल्द ही यह लालच का खेल एक बड़े जाल में तब्दील हो गया।

    यूपी पुलिस का आया कॉल

    पहले उसे छोटी-छोटी फीसों के नाम पर कुल 4999 रुपये तक का भुगतान करवाया गया। जब उसने और पैसे देने से इनकार किया, तो एक नए नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को “रविंद्र सिंह, यूपी पुलिस” का अफसर बताया और छात्र को धमकाया कि उस पर एक लड़की के यौन उत्पीड़न का केस दर्ज है। डर के मारे छात्र ने अलग-अलग किश्तों में कुल 2.74 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब पैसे खतम होने लगे तो लड़के को कोई रास्ता समझ नहीं आया।

    लड़के ने खुद की गलती

    जैसे ही छात्र को ठगी का एहसास हुआ, उसने भांडुप पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन पुलिस भी उस लड़के के पैसों को वापस लाने में विफल हो रही है। कारण बैंक खाता धारक ने खुद ही अपनी मरजी से पैसे ट्रांसफर किए थे। शुरुआत में लड़के ने जो पैसे ट्रांसफर किए वो इसलिए कि वह अपनी इज्जत को शर्मसार होने से बचा सके। लेकिन क्या ऐसा हुआ, नहीं। उलटे पैसे भी गए और पुलिस का सहारा लेना पड़ा। गलती तो उस लड़के की है जो अश्लीलता के लालच में जालसाजों के झांसे में फंस गया। लोगों से अपील की जाती है कि ऐसे किसी भी आपत्तिजनक सामग्री से दूर रहे, वरना पैसा ही नही और भी चीजों का नुकसान हो सकता है।

  • बिना ब्याज लोन का झांसा देकर 1 करोड़ 14 लाख रूपये की ठगी

    बिना ब्याज लोन का झांसा देकर 1 करोड़ 14 लाख रूपये की ठगी

    Mumbai Cyber Fraud: मुंबई के साइबर क्राइम पुलिस ने दिल्ली की एक नकली कॉल सेंटर पर छापामारी कर करोड़ों रुपये के फर्जीवाडे का खुलासा किया है। जो नकली मुहर और डॉक्यूमेंट बनाकर आम लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे।

    Mumbai Cyber Crime: मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम विभाग ने दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छापामारी के दौरान 105 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी आम लोगों को ज़ीरो इंटरेस्ट रेट पर लोन देने का झांसा देकर ठगी करते थे। (1 crore 14 lakh rupees were defrauded by giving the false promise of interest free loan)

    नकली मुहर और डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल

    पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी कॉल सेंटर के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को फोन करते थे और उनसे कहते थे कि वह बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) और यस बैंक (Yes Bank) से बोल रहे हैं। उनके साथ धोखाधड़ी करने के लिए जीरो इंटरेस्ट रेट पर लोन देने का झांसा देते थे। इसके बाद जैसे ही उनका शिकार लोन के लिए अपने डॉक्यूमेंट भेज देते थे, तो उनपर नकली मुहर और डॉक्यूमेंट बनाकर अलग-अलग माध्यमों से उनकी ठगी किया करते थे।

    बजाज फायनेंस पर भरोसा

    पुलिस ने बताया कि मुंबई के एक बुजुर्ग व्यक्ति को इसी तरिके से 1 करोड़ 14 लाख रूपये का धोखा दिया गया। शिकायत में पीड़ित बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि बीना ब्याज के लोन का झांसा देकर पहले आरोपियों ने उनके डॉक्यूमेंटस मांगे। बजाज फायनेंस का नाम सुनकर उन्हें भरोसा हुआ और जैसे ही लोन के लिए उन्होंने अपने डॉक्यूमेंटस भेजे इसके बाद अकाउंट डिटेल और ओटीपी शेयर किया, आरोपियों ने उनके डॉक्यूमेंटस से छेड़छाड़ कर उनके अकाउंट में लोन का पैसा ट्रान्सफर करवाया और बाद में उनके अकाउंट से सारे पैसे उड़ा लिए। (1 crore 14 lakh rupees were defrauded by giving the false promise of interest free loan)

    नकली कल सेंटर का खुलासा

    मुंबई साइबर सेल से मिली जानकारी के मुताबिक, शिकायत के आधार पर मुंबई साइबर पुलिस की टीम ने दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो मैक्सिमाइजर मार्केटिंग (OPC) प्राइवेट लिमिटेड, आनंद विहार, हरी नगर, नई दिल्ली के नाम से कॉल सेंटर ऑपरेट कर रहे थे।

    105 मोबाइल फोन

    गिरफ्तार किये गए आरोपियों के नाम शहजाद लाल मोहम्मद खान उर्फ रहमान, अनुज उत्तम सिंह रावत उर्फ अनिल कुमार यादव और मोहम्मद आमिर हुसैन बताए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से 105 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप बरामद किए गए है।

    132 मामलों में शामिल

    पुलिस को जांच में पता चला कि जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आरोपी कर रहे थे वो नंबर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज देशभर के अलग-अलग 132 मामलों में शामिल है। जांच में यह भी बात सामने आई है कि आरोपियों ने अलग-अलग प्रकार से नागरिकों का भरोसा जीतकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की है। (1 crore 14 lakh rupees were defrauded by giving the false promise of interest free loan)

    पुलिस ने क्या कहा?

    मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी दत्ता नलावडे ने बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और BNS की तमाम धाराओं के तहत केस रजिस्टर किय गया है और मामले की अभी और अधिक तहकीकात की जा रही है।