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  • Mumbai Traffic Police ने Holi पर 16,727 Challans जारी किए; ₹1.99 करोड़ से ज़्यादा Fines Recovery — Drunk Driving एवं Overspeeding पर सख्त कार्रवाई

    Mumbai Traffic Police ने Holi पर 16,727 Challans जारी किए; ₹1.99 करोड़ से ज़्यादा Fines Recovery — Drunk Driving एवं Overspeeding पर सख्त कार्रवाई

    Mumbai Traffic Police ने होली (Holi 2026) और Dhulivandan के दौरान city-wide special enforcement drive चलाकर 16,727 challans जारी किए और ₹1,99,91,650 से अधिक जुर्माना वसूला। इसके तहत ड्रंक ड्राइविंग, हेल्मेट न पहनना, ट्रिपल राइडिंग, सिग्नल जंपिंग जैसे violations पर कड़ी कार्रवाई हुई।

    मुंबई: होली (Holi 2026) और धुलिवंदन के त्योहार के दौरान Mumbai Traffic Police ने रोड सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए city-wide special traffic enforcement drive चलाया, जिसमें 16,727 challans जारी किए गए और लगभग ₹1.99 करोड़ का जुर्माना (penalty/fine) वसूला गया। जांच में drunk driving, overspeeding, helmet-less riding, triple riding और traffic signals के उल्लंघन जैसे मुख्य violations पर कड़ी कार्रवाई की गई।

    📍 Drive का Scope और Enforcement Strategy

    Special nakas और check posts city के बुधवारियों, junctions, मुख्य arterial roads और high-traffic highways पर लगाए गए थे। CCTV surveillance, e-challan systems और मोबाइल enforcement tools के ज़रिये violations का real-time पता लगाया गया और तुरंत challan जारी किये गए।

    🚔 मुख्य Viola­tions और Challans की संख्या

    Drive के दौरान अलग-अलग traffic offences पर challans इस प्रकार जारी किए गये:

    • 🏍️ Without Helmet: 4,317 challans — ₹42,97,000 approx
    • 🚗 Speed Limit Violation (Overspeeding): 4,486 challans — ₹8,29,100 approx
    • 🚦 Jumping Signal: 610 challans — ₹5,90,000 approx
    • 🧑‍✈️ Triple Seat Riding: 530 challans — ₹5,27,000 approx
    • 📄 Without Valid Driving Licence: 431 challans — ₹3,89,500 approx
    • 🚧 Obstructing Traffic Flow: 2,532 challans — ₹29,64,000 approx
    • No Entry in One-Way: 278 challans — ₹3,12,500 approx
    • 🚘 Wrong Side Driving: 20 challans — Sent to court
    • 📢 Honking Violation: 2 challans — ₹1,000
    • 🧾 Other Violations: 2,603 challans — ₹18,67,650 approx

    (कुल: 16,727 challans — ₹1,99,91,650+ fines)

    🍷 Drunk Driving (DUI) पर Zero Tolerance Policy

    Drive के दौरान 159 motorists/drivers को Drunk Driving के आरोप में FIR के तहत booked किया गया और उनकी Driving Licence suspension की कार्रवाई भी शुरू की गई। DUI जैसी गंभीर违规 गतिविधियों पर legal penalty और Licence suspension procedures लागू किये गये।

    📈 Mumbai City में Traffic Discipline और Safety Awareness

    Mumbai Traffic Police ने citizens से appeal की है कि हर ड्राइवर और commuter safety first रखें, traffic rules को strictly follow करें और खासकर त्योहारों के समय reckless driving से बचें ताकि road accidents और दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।

    📊 ये डेटा क्यों ज़रूरी है?

    गाड़ियों की बढ़ती संख्या और holiday season में reckless driving के कारण city में accidents की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में ये special drive public safety और law enforcement को balance करने का एक अहम प्रयास है।

    Holi Traffic Enforcement – FAQs (Frequently Asked Questions)

    Q1. होली enforcement drive कब और क्यों चलाया गया?
    👉 Holi 2026 और Dhulivandan के दौरान increased traffic violations और accidents की आशंका को देखते हुए specially traffic enforcement drive Mumbai Traffic Police द्वारा चलाया गया।

    Q2. सबसे ज़्यादा challans किस उल्लंघन के लिए जारी हुए?
    👉 Without helmet और overspeeding violations के लिए सबसे ज़्यादा challans जारी हुए।

    Q3. Drunk driving पर क्या कार्रवाई हुई?
    👉 159 drunk drivers को booked किया गया और licence suspension proceedings शुरू की गई।

    Q4. Wrong side driving के मामलों में क्या कार्रवाई?
    👉 Wrong side driving के 20 मामलों को court भेजा गया।

    Q5. E-challan system कैसे मदद करता है?
    👉 CCTV footage, e-challan digital tools से real-time violation detection होता है जिससे on-spot enforcement आसान होता है।

  • Borivali: ₹6.79 करोड़ ज्वेलरी चोरी केस: 45 दिन में राजस्थान से 4 आरोपी गिरफ्तार

    Borivali: ₹6.79 करोड़ ज्वेलरी चोरी केस: 45 दिन में राजस्थान से 4 आरोपी गिरफ्तार

    Borivali IC Colony के My Gold Point jewellery shop से ₹6.79 करोड़ की gold, silver और diamond jewellery चोरी मामले में MHB Colony Police की बड़ी कार्रवाई। 45 दिन की technical investigation के बाद Rajasthan के Rajsamand जंगल से 4 आरोपी गिरफ्तार, ₹4.65 करोड़ का माल बरामद।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम स्थित IC Colony में My Gold Point jewellery shop से करीब ₹6.79 करोड़ की gold, silver और diamond jewellery चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। MHB Colony Police ने लगातार 45 दिन की investigation के बाद राजस्थान के राजसमंद जिले के जंगलों से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अब तक ₹4.65 करोड़ का चोरी का माल बरामद कर लिया है, जबकि बाकी की recovery जारी है।

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    📍 कैसे सामने आया Jewellery Theft Case?

    14 जनवरी 2026 को MHB Colony Police Station में शिकायतकर्ता राकेश शांतिलाल पोरवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 13 जनवरी 2026 की रात 10:30 बजे से 14 जनवरी 2026 दोपहर 1:26 बजे के बीच Borivali West, IC Colony, Holy Cross Road स्थित My Gold Point ज्वेलरी शॉप की तिजोरी से सोना, चांदी और डायमंड के दागिने चोरी हो गए।

    चोरी की कुल अनुमानित कीमत ₹6,79,85,000 बताई गई। पुलिस ने इस मामले में BNSS 2023 की धारा 306 और 3(5) के तहत FIR (CR No. 23/2026) दर्ज की।

    🕵️‍♂️ दुकान के ही सेल्समैन निकले मास्टरमाइंड

    शिकायत के मुताबिक, दुकान में सेल्समैन के तौर पर काम करने वाले प्रभू सिंग नारायण सिंग ने साजिश रचकर चोरी को अंजाम दिया। आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर तिजोरी से कीमती ज्वेलरी चुरा ली और बिना मालिक की जानकारी के फरार हो गए।

    🎥 CCTV और Technical Surveillance से मिला सुराग

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में विशेष टीम बनाई गई। CCTV फुटेज और technical investigation के जरिए पता चला कि मुख्य आरोपी प्रभू गोप सिंग दसाणा और नारायण मोहन सिंग राजस्थान भाग गए हैं।

    तुरंत एक Crime Detection Team को राजस्थान रवाना किया गया।

    🌲 राजसमंद के जंगल में ड्रोन से सर्च ऑपरेशन

    28 जनवरी 2026 को पुख्ता सूचना मिली कि एक आरोपी राजसमंद जिले के कुवारीया गांव के पास घने जंगल में एक मंदिर में छिपा है। पुलिस ने वहां trap बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार किया।

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    पूछताछ में पता चला कि चोरी की साजिश में गणपत सिंह मोहन चंदाना, विशन सिंह वग्गालाल रेवारी, मोडसिंग चुनसिंग दसाना और देवी सिंह गोपसिंग दसाणा (सभी निवासी राजसमंद, राजस्थान) शामिल थे।

    राजस्थान पुलिस की मदद से राजसमंद जिले के तीन जंगल इलाकों में joint search operation चलाया गया। इस दौरान private thermal drone का भी इस्तेमाल किया गया। सर्च के दौरान मोडसिंग को भी पकड़ा गया।

    🚨 1 मार्च को दो और आरोपी दबोचे

    लगातार human intelligence और technical surveillance के जरिए 1 मार्च 2026 को खबर मिली कि फरार आरोपी गणपत सिंह और किशन सिंह कुवारीया गांव के आसपास देखे गए हैं।

    पुलिस ने गांव के जंगल से आने-जाने वाले रास्तों पर नाकाबंदी कर trap लगाया। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पीछा कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    💰 ₹4.65 करोड़ का माल बरामद

    अब तक गिरफ्तार आरोपियों से करीब:

    • 3 किलोग्राम सोने के दागिने (कीमत लगभग ₹4.50 करोड़)
    • 5 किलोग्राम चांदी के दागिने (कीमत लगभग ₹15 लाख)

    कुल ₹4,65,00,000 की संपत्ति बरामद की गई है। बाकी चोरी का माल बरामद करने की कार्रवाई जारी है।

    👮‍♂️ किन अधिकारियों के मार्गदर्शन में चला Borivali Operation?

    यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, सह पुलिस आयुक्त (Law & Order) सत्यनारायण चौधरी, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, डीसीपी संदीप जाधव (परिमंडल 11), एसीपी संतोष धनवटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवळी के मार्गदर्शन में हुई।

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    Operation में PI (Crime) अतुल आव्हाड, PSI निलेश पाटील, संदीप गोरडे, वसीम शेख, मंगेश किरपेकर, संतोष भोसले, API संभाजी खरात, हवालदार बबलू सालुंखे, संदीप परिट, तिरुपती रेकुळवाड, सतीश देवकर, अर्जुन आहेर सहित कई पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई।

    🔎 Mumbai Crime News में बड़ा खुलासा

    Borivali IC Colony Jewellery Theft Case ने एक बार फिर दिखा दिया कि अंदरूनी साजिश (insider conspiracy) किस तरह बड़े crime को अंजाम दे सकती है।

    Police investigation, technical surveillance और drone search operation की मदद से 45 दिन में आरोपियों को पकड़ना Mumbai Police के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. चोरी कितनी रकम की थी?
    करीब ₹6.79 करोड़ की gold, silver और diamond jewellery चोरी हुई थी।

    Q2. आरोपियों को कहां से पकड़ा गया?
    राजस्थान के राजसमंद जिले के जंगलों से।

    Q3. अब तक कितना माल बरामद हुआ है?
    करीब ₹4.65 करोड़ का सोना और चांदी बरामद हुआ है।

    Q4. क्या दुकान के कर्मचारी शामिल थे?
    हाँ, दुकान के सेल्समैन पर साजिश रचने का आरोप है।

    Q5. कौन सी धाराओं में केस दर्ज हुआ?
    BNSS 2023 की धारा 306 और 3(5) के तहत मामला दर्ज हुआ है।

  • Kandivali Redevelopment विवाद: MSFC ने Developer पर कसा शिकंजा

    Kandivali Redevelopment विवाद: MSFC ने Developer पर कसा शिकंजा

    Kandivali Samata Nagar staff quarters redevelopment मामले में MSFC ने SD Corporation के खिलाफ legal action शुरू किया। MahaRERA और Bombay High Court में मामला, consent agreement breach और ₹88 लाख के rent-deposit विवाद ने बढ़ाई हलचल।

    मुंबई: Kandivali के Samata Nagar में स्थित staff quarters के redevelopment को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Maharashtra State Financial Corporation (MSFC) ने developer SD Corporation के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला अब Bombay High Court और MahaRERA तक पहुंच चुका है, जहां consent agreement breach और alleged misconduct के आरोपों की जांच चल रही है।

    📍 क्या है पूरा Kandivali Staff Quarters Dispute?

    MSFC ने अपने Kandivali स्थित staff quarters के redevelopment के लिए SD Corporation को नियुक्त किया था। शर्त साफ थी — redevelopment के बाद 40 flats MSFC को सौंपे जाएंगे।

    लेकिन 2019 में मामला उस वक्त उलझ गया जब यह सामने आया कि MSFC के आठ कर्मचारियों को developer की तरफ से ₹88 लाख rent और deposits के रूप में allegedly मिले थे।

    💰 ₹88 लाख Rent-Deposit और ₹12.45 लाख का नया खुलासा

    जांच में यह भी सामने आया कि चार कर्मचारियों ने MSFC से ही ₹12.45 लाख का rent वसूला।

    इतना ही नहीं, developer ने तय 40 flats में से आठ flats इन्हीं कर्मचारियों को उनके इस्तेमाल के लिए सौंप दिए थे।

    MSFC ने इसे redevelopment agreement का सीधा breach और कर्मचारियों की misconduct करार दिया।

    📜 MSFC ने Developer को भेजा Notice

    इन घटनाओं के बाद MSFC ने SD Corporation को औपचारिक notice जारी किया।

    Corporation का कहना है कि redevelopment terms का उल्लंघन हुआ है और बिना consent के flats कर्मचारियों को देना agreement breach है।

    ⚖️ Bombay High Court में मामला, Arbitrator की नियुक्ति

    सितंबर 2023 में Bombay High Court ने इस मामले में retired chief justice RD Dhanuka को arbitrator नियुक्त किया।

    मामला अदालत में लंबित रहते हुए भी developer ने MSFC के साथ consent agreement करने की इच्छा जताई। यह consent agreement 21 जून 2025 को execute किया गया।

    🤝 Consent Agreement में क्या था?

    Consent agreement के तहत developer ने 40 redevelopment flats के अलावा 650 sq ft carpet area के 12 और flats MSFC को देने पर सहमति दी।

    साथ ही यह भी तय हुआ कि अगर समय पर delivery नहीं हुई तो developer एक और अतिरिक्त flat MSFC को देगा।

    ❌ फिर हुआ Agreement Breach

    MSFC का आरोप है कि consent agreement के बावजूद developer ने शर्तों का पालन नहीं किया।

    40 flats में से आठ flats MSFC की अनुमति के बिना कर्मचारियों को दे दिए गए।

    इसके बाद MSFC ने उन कर्मचारियों को notice भेजा जो इन flats में रह रहे हैं और उनसे rent वापस करने को कहा है।

    🏠 Retired Employees से Recovery की मांग

    MSFC ने उन retired कर्मचारियों से भी रकम की recovery की मांग की है, जो allegedly अवैध रूप से premises में रह रहे हैं और जिन्होंने developer से रकम ली थी।

    🏛️ MahaRERA और High Court में Legal Action

    राज्य के industries minister Uday Samant ने legislative council में लिखित जवाब में बताया कि MSFC ने developer के खिलाफ legal process शुरू कर दिया है।

    Samant के अनुसार:

    • MSFC ने High Court में consent agreement breach के खिलाफ जाने के लिए legal counsel नियुक्त किया है।
    • साथ ही MahaRERA (Maharashtra Real Estate Regulatory Authority) से developer के खिलाफ regulatory action की मांग की है।

    🔎 Urban Redevelopment और Governance पर सवाल

    Kandivali redevelopment dispute ने Mumbai redevelopment projects में transparency, accountability और governance को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    Experts का कहना है कि staff quarters और सरकारी जमीनों के redevelopment में clear compliance और monitoring बेहद जरूरी है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. विवाद किस प्रोजेक्ट को लेकर है?
    Kandivali के Samata Nagar स्थित MSFC staff quarters के redevelopment को लेकर।

    Q2. MSFC ने developer पर क्या आरोप लगाए हैं?
    Agreement breach, बिना consent flats सौंपने और कर्मचारियों को rent-deposit देने के आरोप।

    Q3. ₹88 लाख का मामला क्या है?
    आठ कर्मचारियों को developer की तरफ से allegedly ₹88 लाख rent और deposit के रूप में मिले थे।

    Q4. मामला किस कोर्ट में है?
    Bombay High Court में मामला लंबित है और RD Dhanuka को arbitrator नियुक्त किया गया है।

    Q5. MahaRERA की क्या भूमिका है?
    MSFC ने developer के खिलाफ regulatory action के लिए MahaRERA से संपर्क किया है।

  • गोरेगांव BMC मीटिंग में हड़कंप! 30+ मुद्दों पर चर्चा, वृद्धाश्रम निर्माण जल्द पूरा करने का आदेश

    गोरेगांव BMC मीटिंग में हड़कंप! 30+ मुद्दों पर चर्चा, वृद्धाश्रम निर्माण जल्द पूरा करने का आदेश

    मुंबई नॉर्थ वेस्ट के सांसद रवींद्र वायकर ने पी दक्षिण Bmc बैठक में घास बाजार गोरेगांव पूर्व के वृद्धाश्रम निर्माण को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। पानी, ट्रैफिक और आरे सड़क कार्य पर भी बड़ी चर्चा।

    मुंबई: गोरेगांव में पी दक्षिण BMC कार्यालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग में 30 से ज्यादा ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवींद्र वायकर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गोरेगांव पूर्व के घास बाजार स्थित वृद्धाश्रम निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। बैठक में पानी, ट्रैफिक जाम, आरे कॉलोनी सड़क और अन्य लंबित विकास कार्यों पर भी गंभीर मंथन हुआ।

    घास बाजार वृद्धाश्रम निर्माण पर सख्त निर्देश

    सांसद वायकर ने स्पष्ट कहा कि गोरेगांव पूर्व के घास बाजार में रिजर्व जमीन पर बन रहे वृद्धाश्रम का काम तेजी से पूरा किया जाए।

    उन्होंने संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन सहायक आयुक्त पाटणे के साथ मौके पर जाकर निर्माण कार्य का निरीक्षण भी किया।

    पूर्व नगरसेवक साधना माने द्वारा इस वृद्धाश्रम का प्रस्ताव दिया गया था, जिसके बाद बीएमसी ने 11 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार कर निर्माण कार्य शुरू किया।

    पी दक्षिण BMC में संयुक्त बैठक

    गोरेगांव विधानसभा क्षेत्र के लंबित मुद्दों को लेकर पी दक्षिण bmc (गोरेगांव) कार्यालय में संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में उपायुक्त भाग्यश्री कापसे, सहायक आयुक्त अनिरुद्ध कुलकर्णी, आरे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिपुरकर, गोरेगांव, दिंडोशी, वनराई और बांगुरनगर पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मौजूद थे।

    इसके अलावा ट्रैफिक शाखा, आरे पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, अग्निशमन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए।

    पानी और ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या

    बैठक में 30 से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा की गई।

    जीवन ज्योत सोसायटी, अरुणा सोसायटी, निरलॉन, कृष्णा सोसायटी, वसंत गैलेक्सी, ओबेरॉय सोसायटी, बेस्ट नगर, अंकुर सोसायटी समेत कई इलाकों के निवासियों ने पानी की कमी और ट्रैफिक जाम की समस्या उठाई।

    स्थानीय लोगों ने कहा कि रोजाना की ट्रैफिक समस्या और जल आपूर्ति की अनियमितता से जीवन प्रभावित हो रहा है।

    आरे कॉलोनी सड़क का फेज-1 पूरा

    आरे के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि आरे कॉलोनी की अंदरूनी सड़क का फेज-1 का काम पूरा हो चुका है।

    फेज-2 का काम फिलहाल जारी है और इसे अप्रैल तक पूरा करने का आश्वासन दिया गया।

    यह परियोजना इलाके के ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम मानी जा रही है।

    सिद्धार्थ हॉस्पिटल और टोपीवाला मार्केट पर भी निर्देश

    सांसद वायकर ने सहायक आयुक्त को निर्देश दिए कि सिद्धार्थ हॉस्पिटल और टोपीवाला मार्केट के लंबित कार्यों को लेकर जल्द ही संबंधित अधिकारियों के साथ अलग से बैठक आयोजित की जाए और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा किया जाए।

    विकास कार्यों पर फोकस, जनता को राहत का भरोसा

    इस बैठक को गोरेगांव के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्थानीय बुनियादी समस्याओं से लेकर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक पर चर्चा हुई।

    सांसद ने साफ कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए और विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. बैठक कहां आयोजित की गई थी?
    पी दक्षिण बीएमसी कार्यालय, गोरेगांव में।

    Q2. मुख्य मुद्दा क्या था?
    घास बाजार स्थित वृद्धाश्रम निर्माण कार्य को जल्द पूरा करना।

    Q3. कितनी लागत का प्रोजेक्ट है?
    करीब 11 करोड़ रुपये का।

    Q4. आरे कॉलोनी सड़क का क्या अपडेट है?
    फेज-1 पूरा हो चुका है, फेज-2 अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है।

    Q5. किन समस्याओं पर चर्चा हुई?
    पानी की कमी, ट्रैफिक जाम, हॉस्पिटल और मार्केट के लंबित कार्य।

  • अंधेरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: मंदिर–मस्जिद में दान के बहाने ठगी करने वाला ईरानी आरोपी गिरफ्तार, 30 केस का खुलासा

    अंधेरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: मंदिर–मस्जिद में दान के बहाने ठगी करने वाला ईरानी आरोपी गिरफ्तार, 30 केस का खुलासा

    अंधेरी पुलिस ने मंदिर और मस्जिद में दान देने के बहाने सोने की चेन ठगने वाले ईरानी आरोपी वसीम अब्बास सिराज उर्फ वसीम इरानी को गिरफ्तार किया। 2017 से फरार चल रहे इस शातिर पर मुंबई और उपनगरों में 30 ठगी के मामले दर्ज। जानिए पूरा खुलासा।

    मुंबई: अंधेरी इलाके में मंदिर और मस्जिद में दान देने के नाम पर लोगों को झांसा देकर सोने की चेन ठगने वाले एक सराईत आरोपी को आखिरकार अंधेरी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी साल 2017 से पुलिस की नजरों से बचता फिर रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद मुंबई शहर और उपनगरों में दर्ज 30 ठगी के मामलों का खुलासा हुआ है।

    यह कार्रवाई अंधेरी पुलिस स्टेशन की क्राइम डिटेक्शन टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर की।

    कैसे देता था वारदात को अंजाम?

    24 फरवरी 2026 को दर्ज शिकायत के मुताबिक, 8 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे एक अनजान व्यक्ति शिकायतकर्ता के पास आया। उसने कहा,
    “इधर किधर मस्जिद है क्या? मैंने नया सोने का दुकान शुरू किया है, मस्जिद में खैरात देना है।”

    उसने 500-500 रुपये की दो नोटें शिकायतकर्ता को दीं और गले की सोने की चेन उन नोटों में लपेटने को कहा। नोटों में चेन लपेटने के बहाने वह 71 तोला वजन की सोने की चेन लेकर फरार हो गया।

    इस मामले में अंधेरी पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 68/26 धारा 318(4) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया।

    तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस

    Andheri-Police-arrests-Iranian-man-who-allegedly-cheated-people-under-the-pretext-of-donating-to-temples-and-mosques-news

    मामले की गंभीरता को देखते हुए अंधेरी पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने टेक्निकल सर्विलांस और फील्ड इनपुट के जरिए आरोपी का लोकेशन ट्रैक किया।

    आखिरकार उसे अडीवली, कल्याण पूर्व, ठाणे इलाके से शातिराना तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने कई वारदात कबूल कीं।

    आरोपी की पहचान

    गिरफ्तार आरोपी का नाम:
    वसीम अब्बास सिराज उर्फ वसीम जाफरी उर्फ वसीम इरानी

    Andheri-Police-arrests-Iranian-man-who-allegedly-cheated-people-under-the-pretext-of-donating-to-temples-and-mosques-1

    पता:
    रूम नं. 103, ब्राइट बिल्डिंग, गणेश चौक के पास, अडीवली, कल्याण पूर्व, ठाणे
    मूल पता: इंदिरानगर, संतोषी माता मंदिर रोड, वाल्मिकि स्कूल के पास, अटाली, आंबिवली, कल्याण, ठाणे

    गिरफ्तारी दिनांक: 17 फरवरी 2026
    फिलहाल आरोपी न्यायालयीन हिरासत में है।

    2017 से दर्ज हैं कई गंभीर मामले

    आरोपी पर पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें चोरी और ठगी के केस शामिल हैं। उसके खिलाफ निम्न पुलिस थानों में केस दर्ज रहे हैं:

    • वाकोला पुलिस स्टेशन (मुंबई) – धारा 379, 34
    • मानगांव पुलिस स्टेशन (रायगढ़) – धारा 420
    • पोलादपुर पुलिस स्टेशन (रायगढ़) – धारा 420, 406, 34
    • कर्जत पुलिस स्टेशन
    • पहाड़ी शरीफ पुलिस स्टेशन (तेलंगाना)
    • शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन (मुंबई)
    • टिलक नगर पुलिस स्टेशन (मुंबई)
    • भुसावल रेलवे पुलिस (जलगांव)
    • मुंब्रा पुलिस स्टेशन (ठाणे)
    • कासारवडवली पुलिस स्टेशन
    • महिधरपुरा पुलिस स्टेशन (सूरत)

    इन सभी मामलों में आरोपी पर चोरी (Theft), धोखाधड़ी (Cheating), आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) जैसी धाराएं लगी थीं।

    मुंबई में 30 केस का खुलासा

    अंधेरी पुलिस की पूछताछ में मुंबई और उपनगरों के कुल 30 केस का खुलासा हुआ। इनमें प्रमुख रूप से निम्न पुलिस स्टेशन शामिल हैं:

    • अंधेरी पुलिस स्टेशन
    • ट्रॉम्बे पुलिस स्टेशन
    • एमआईडीसी पुलिस स्टेशन
    • विले पार्ले पुलिस स्टेशन
    • दहिसर पुलिस स्टेशन
    • जोगेश्वरी पुलिस स्टेशन
    • वर्सोवा पुलिस स्टेशन
    • दिंडोशी पुलिस स्टेशन
    • वनराई पुलिस स्टेशन
    • कुरार पुलिस स्टेशन
    • मेघवाड़ी पुलिस स्टेशन

    इन सभी जगहों पर मंदिर/मस्जिद में दान देने का बहाना बनाकर बुजुर्गों और महिलाओं को निशाना बनाया गया।

    पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

    यह सफल कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के मार्गदर्शन में की गई।

    साथ ही पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) सत्यनारायण, अपर पुलिस आयुक्त पश्चिम प्रादेशिक विभाग परमजीत सिंह दहिया, पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावड़े (परिमंडल 10), सहायक पुलिस आयुक्त गजानन पवार (अंधेरी डिवीजन) के मार्गदर्शन में टीम ने काम किया।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उमेश मरचिडर और पुलिस निरीक्षक (गुन्हे) विनोद पाटिल की देखरेख में
    पुलिस उपनिरीक्षक किशोर परकाले, समाधान मुंगे, स. फौजदार पेडणेकर, कांबळे, पुजारी, घडवले, शिंदे, पाटील, म्हात्रे, गवली, लोंढे, राके, तिघोटे, घुले, नरबट, मोरे और तकनीकी सहायता में विशाल पिसाळ ने यह ऑपरेशन सफल बनाया।

    जनता के लिए जरूरी चेतावनी

    • अजनबी व्यक्ति अगर मंदिर/मस्जिद में दान या सोना दिखाकर बात करे तो सतर्क रहें
    • किसी भी हालत में अपनी चेन या गहने हाथ में न दें
    • तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में सूचना दें
    • बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. आरोपी कितने साल से फरार था?
    साल 2017 से आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर था।

    Q2. आरोपी किस तरह ठगी करता था?
    मंदिर/मस्जिद में दान देने के बहाने सोने की चेन नोटों में लपेटने को कहकर फरार हो जाता था।

    Q3. कितने केस का खुलासा हुआ?
    मुंबई शहर और उपनगरों में कुल 30 मामलों का खुलासा हुआ।

    Q4. आरोपी अभी कहां है?
    फिलहाल न्यायालयीन हिरासत में है।

  • मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग बनकर 30 लाख की रंगदारी मांगने वाले 4 गिरफ्तार

    मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग बनकर 30 लाख की रंगदारी मांगने वाले 4 गिरफ्तार

    मुंबई के बोरीवली के ज्वेलर से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 30 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले झारखंड के चार आरोपियों को पुलिस ने महिम, बांद्रा और जोगेश्वरी से गिरफ्तार किया। आरोपियों का असली गैंग से कोई संबंध नहीं है।

    मुंबई: बोरीवली स्थित एक ज्वेलरी दुकान को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी देकर 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगने वाले चार आरोपियों को मुंबई पुलिस ने मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार सभी आरोपी झारखंड के वासेपुर इलाके के रहने वाले हैं और उनका असली Lawrence Bishnoi गैंग से कोई संबंध नहीं है।

    लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर दी धमकी

    आरोपियों ने बोरीवली के ज्वेलर को मोबाइल नंबर पर कॉल और मैसेज कर धमकी दी थी कि अगर 30 लाख रुपये नहीं दिए तो “बाबा सिद्दीकी जैसा अंजाम होगा।”

    धमकी भरे संदेश में लिखा था कि 24 घंटे के अंदर “लॉरेंस बिश्नोई गैंग अमेरिका” के लिए पैसे का इंतजाम करो, वरना ज्वेलर और उसके परिवार को गोलियों से भून दिया जाएगा।

    18 फरवरी से शुरू हुई धमकियों की श्रृंखला

    18 फरवरी को सुबह करीब 7:20 बजे दुकान के मोबाइल नंबर पर एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से मैसेज आया। उसमें लिखा था:

    “Rs 30 lakh firauti tumko dena hai Lawrence Bishnoi giroh ko, agar manage na kiya toh jaise Baba Siddiqui ko mare hai, waisa hi tumko bhi maarenge…”

    स्टाफ ने यह संदेश दुकान मालिक को बताया।

    19 फरवरी को आया व्हाट्सऐप कॉल

    19 फरवरी को फिर एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने पूछा कि पैसे का इंतजाम क्यों नहीं हुआ और बातचीत रिकॉर्ड करने की चुनौती भी दी।

    उसने फिर से जान से मारने की धमकी दी और कहा कि “बोरीवली में कोई भी तुम्हें बचा नहीं पाएगा।” बाद में दोबारा कॉल आया, लेकिन स्टाफ ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद एक और मैसेज आया जिसमें ज्वेलर को जल्द गोली मारने की धमकी दी गई।

    शुरुआत में स्टाफ ने इन धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया।

    21 फरवरी को तड़के फिर धमकी

    21 फरवरी को सुबह 3:10 बजे फिर धमकी भरा संदेश आया। इस बार स्टाफ ने जवाब दिया कि वे ज्यादा से ज्यादा 1 लाख रुपये दे सकते हैं और आगे किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते।

    इस पर आरोपी ने जवाब दिया कि “10 लाख रुपये तो बच्चे सिगरेट खरीदने में खर्च कर देते हैं” और ज्वेलर को अपनी जान के लिए तैयार रहने को कहा।

    बातचीत के दौरान स्टाफ ने 4 लाख रुपये देने की बात कही और बैंक खाता नंबर मांगा। आरोपी ने कहा कि वह अगले दिन बताएगा क्योंकि रात ज्यादा हो गई है।

    इसके बाद दुकान मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।

    पुलिस ने बिछाया जाल, सोने के सिक्कों के बहाने पकड़े गए

    मुंबई पुलिस ने जाल बिछाकर ज्वेलर से आरोपियों को यह कहने को कहा कि वह सोने के सिक्के देने को तैयार है। जैसे ही आरोपी सोने के सिक्के लेने पहुंचे, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

    चारों आरोपियों को महिम, बांद्रा और जोगेश्वरी के अलग-अलग ठिकानों से गिरफ्तार किया गया।

    गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

    • रियाजुद्दीन बशीर (29)
    • मोहम्मद फैयाज मंसूरी (27)
    • मोहम्मद अशरफुल (36)
    • मोहम्मद अरबाज अंसारी (27)

    सभी झारखंड के वासेपुर क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

    पहले भी कर चुके हैं रंगदारी की वारदात

    पुलिस के अनुसार, आरोपी विले पार्ले और डीएन नगर इलाके में भी इसी तरह की रंगदारी और धमकी के मामलों में शामिल रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद वे मामले भी सुलझा लिए गए हैं।


    FAQ

    Q1: ज्वेलर से कितनी रकम की मांग की गई थी?
    30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी।

    Q2: क्या आरोपियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध है?
    नहीं, पुलिस के अनुसार उनका गैंग से कोई संबंध नहीं है।

    Q3: आरोपी कहां से गिरफ्तार किए गए?
    महिम, बांद्रा और जोगेश्वरी के अलग-अलग स्थानों से।

    Q4: धमकी कब से मिलनी शुरू हुई?
    18 फरवरी को पहली बार धमकी भरा मैसेज आया था।

    Q5: आरोपियों ने किसका नाम लेकर धमकी दी?
    उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम लेकर और बाबा सिद्दीकी जैसा अंजाम देने की धमकी दी।

  • BMC Budget 2026-27: 25 फरवरी को पेश हुआ बीएमसी का बजट, शिक्षा विभाग का प्रस्ताव पहले हुआ पेश

    BMC Budget 2026-27: 25 फरवरी को पेश हुआ बीएमसी का बजट, शिक्षा विभाग का प्रस्ताव पहले हुआ पेश

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 25 फरवरी 2026 को पेश किया गया। शिक्षा विभाग का बजट सुबह 11 बजे और मुख्य बजट दोपहर 2 बजे स्थायी समिति में प्रस्तुत किया गया।

    मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाने वाली Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट 25 फरवरी 2026 को पेश किया। बजट प्रस्तुति को लेकर मनपा मुख्यालय में दिनभर महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।

    सुबह 11 बजे शिक्षा विभाग का बजट पेश

    सबसे पहले अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्व उपनगर) Dr. Avinash Dhakane ने शिक्षा विभाग का बजट अनुमान 25 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे शिक्षा समिति सभागृह, दूसरे मंजिल, मुख्य इमारत, मनपा मुख्यालय में पेश किया।

    उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के शिक्षा विभाग के ‘ई’ बजट अनुमान को शिक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।

    शिक्षा समिति अध्यक्ष को सौंपा गया प्रस्ताव

    डॉ. अविनाश ढाकणे ने यह बजट प्रस्ताव शिक्षा समिति की अध्यक्ष Rajeshree Shirwadkar को सौंपा।

    इस दौरान शिक्षा समिति के सदस्य, उप आयुक्त (शिक्षण) Dr. Prachi Jambecker, महानगरपालिका सचिव Manjiri Deshpande सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

    दोपहर 2 बजे स्थायी समिति में मुख्य बजट पेश

    इसके बाद महानगरपालिका आयुक्त Bhushan Gagrani ने 25 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे स्थायी समिति सभागृह, पहली मंजिल, मुख्य इमारत, मनपा मुख्यालय में वर्ष 2026-27 का संपूर्ण बजट स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।

    मुंबईकरों के लिए यह बजट महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी सप्लाई, सड़क, स्वच्छता और विकास परियोजनाओं के लिए प्रावधान शामिल हैं।

    दोपहर 3:30 बजे मीडिया से संवाद

    महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी ने बजट पेश करने के बाद दोपहर 3:30 बजे आयुक्त सभागृह, दूसरे मंजिल, मनपा मुख्यालय, महापालिका मार्ग, मुंबई-400001 में मीडिया से संवाद किया।

    इस दौरान उन्होंने बजट के मुख्य बिंदुओं और आगामी वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर जानकारी दी।

    क्यों अहम है BMC Budget 2026-27?

    मुंबई महानगरपालिका का बजट देश में सबसे बड़े नगर निकाय बजट में गिना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा, जल आपूर्ति, बुनियादी ढांचा और नागरिक सुविधाओं को लेकर अहम घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है।

    मुंबईकरों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले साल में शहर के विकास और सुविधाओं को लेकर क्या नई योजनाएं लागू होंगी।


    FAQ

    Q1: BMC का बजट कब पेश किया गया?
    25 फरवरी 2026 को।

    Q2: शिक्षा विभाग का बजट किसने पेश किया?
    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने।

    Q3: मुख्य बजट किसके द्वारा पेश किया गया?
    महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी ने स्थायी समिति में पेश किया।

    Q4: मीडिया से संवाद कब हुआ?
    25 फरवरी 2026 को दोपहर 3:30 बजे।

    Q5: यह बजट क्यों महत्वपूर्ण है?
    क्योंकि इसमें शिक्षा, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए वित्तीय प्रावधान तय किए जाते हैं।

  • Borivali Flat Scam: पती-पत्नी ने किराए के फ्लैट को बेचा अपना बताकर, 60 लाख की ठगी,

    Borivali Flat Scam: पती-पत्नी ने किराए के फ्लैट को बेचा अपना बताकर, 60 लाख की ठगी,

    मुंबई के बोरीवली में फ्लैट बेचने के नाम पर 60 लाख की कथित धोखाधड़ी। आरोपी दंपती किरायेदार निकले, फ्लैट पर पहले से 35 लाख का होम लोन। पुलिस जांच जारी।

    मुंबई: बोरिवली इलाके से प्रॉपर्टी फ्रॉड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फ्लैट खरीद के नाम पर करीब 60 लाख रुपये की कथित ठगी का आरोप एक पती-पत्नी पर लगा है। इस मामले में बोरिवली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    आरोपी दंपती के खिलाफ FIR

    पुलिस के अनुसार, आरोपी गणेश केशव रहाटे और सविता गणेश रहाटे के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता बोरिवली में रहने वाले एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत व्यक्ति हैं।

    बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता की मेहुणी और साडू ने न्यू एमएचबी कॉलोनी स्थित एक सोसायटी में आरोपी दंपती से फ्लैट खरीदने का सौदा किया था।

    60 लाख रुपये लेने के बाद भी नहीं दिया कब्जा

    शिकायत के मुताबिक, फ्लैट और मेंटेनेंस के नाम पर करीब 60 लाख रुपये आरोपियों को दिए गए। लेकिन पूरी रकम देने के बावजूद फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया।

    जब बार-बार टालमटोल होने लगी तो खरीदार पक्ष को शक हुआ और उन्होंने सोसायटी में जाकर जांच-पड़ताल की।

    जांच में सामने आया बड़ा खुलासा

    सोसायटी से मिली जानकारी ने सभी को हैरान कर दिया। पता चला कि गणेश रहाटे ने उसी फ्लैट पर एक निजी बैंक से 35 लाख रुपये का होम लोन लिया हुआ है।

    सबसे बड़ा खुलासा यह था कि वह फ्लैट उनकी खुद की प्रॉपर्टी ही नहीं थी। दोनों आरोपी उस फ्लैट में मालिक नहीं बल्कि किरायेदार के रूप में रह रहे थे।

    कैसे हुआ शक और फिर शिकायत?

    पूरी रकम चुकाने के बाद भी जब रजिस्ट्री और कब्जा नहीं मिला तो खरीदार पक्ष ने दस्तावेजों की जांच कराई। इसी दौरान बैंक लोन और असली मालिक की जानकारी सामने आई।

    इसके बाद सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

    प्रॉपर्टी डील में सावधानी की जरूरत

    मुंबई जैसे बड़े शहर में फ्लैट खरीदते समय टाइटल क्लियरेंस, ओनरशिप डॉक्युमेंट और बैंक लोन स्टेटस की जांच बेहद जरूरी है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि बिना लीगल वेरिफिकेशन के करोड़ों का निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।


    FAQ Section

    Q1. यह मामला किस इलाके से जुड़ा है?

    यह मामला मुंबई के बोरिवली स्थित न्यू एमएचबी कॉलोनी का है।

    Q2. कितनी रकम की कथित ठगी हुई?

    करीब 60 लाख रुपये फ्लैट और मेंटेनेंस के नाम पर लिए गए।

    Q3. आरोपियों ने क्या किया?

    कथित तौर पर किराए के फ्लैट को अपना बताकर बेचा और उसी पर 35 लाख का होम लोन भी लिया।

    Q4. पुलिस क्या कर रही है?

    बोरिवली पुलिस ने FIR दर्ज कर दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

  • Malad SRA Project में ₹5 करोड़ का घोटाला, शाह हाउसकॉन के दो डायरेक्टर पर FIR

    Malad SRA Project में ₹5 करोड़ का घोटाला, शाह हाउसकॉन के दो डायरेक्टर पर FIR

    मुंबई के मलाड स्थित SRA प्रोजेक्ट में ₹5.15 करोड़ की कथित धोखाधड़ी। शाह हाउसकॉन प्राइवेट लिमिटेड के दो डायरेक्टरों पर केस दर्ज, जांच EOW को ट्रांसफर।

    मुंबई: मलाड के SRA (Slum Rehabilitation Authority) रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में करीब ₹5 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। जांच की गंभीरता को देखते हुए केस को अब मुंबई पुलिस आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर कर दिया गया है।

    पिता-पुत्र पर लगा ठगी का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी कंपनी Shah Housecon Private Limited के डायरेक्टर मनसुख शाह और आकाश मनसुख शाह हैं। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि दोनों ने कथित तौर पर इसी तरह के फर्जी एग्रीमेंट कर कई बिल्डरों से बड़ी रकम वसूली है।

    शिकायतकर्ता कौन हैं?

    शिकायतकर्ता निलेश नरेंद्र राघाणी, जो कांदिवली के ठाकुर विलेज में रहते हैं, एक रियल एस्टेट डेवलपर हैं। वह अपनी कंपनी क्लासिक ट्रेजर प्राइवेट लिमिटेड अपने पार्टनर जिगर देसाई के साथ मिलकर SRA और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं।

    ऐसे रचा गया कथित निवेश जाल

    शिकायत के मुताबिक, मार्च 2025 में एक साझा परिचित के जरिए राघाणी की मुलाकात आरोपियों से हुई। आरोपियों ने दावा किया कि वे मलाड के रानी सती मार्ग स्थित खोथोडोंगरी SRA सोसायटी के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

    बताया गया कि 5,600 वर्ग मीटर के प्लॉट पर निर्माण होना है। डील के अनुसार, निर्माण खर्च राघाणी की कंपनी उठाएगी, जबकि आरोपियों की कंपनी परमिशन और झोपड़पट्टी निवासियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी संभालेगी। बदले में राघाणी को सेल कंपोनेंट एरिया दिया जाना था।

    ₹5.15 करोड़ ट्रांसफर, लेकिन काम शुरू नहीं

    मई से जुलाई 2025 के बीच राघाणी ने कुल ₹5.15 करोड़ आरोपियों को ट्रांसफर किए। लेकिन एग्रीमेंट के तीन महीने बाद भी न तो झोपड़पट्टी खाली कराई गई और न ही टाइटल क्लियर हुआ।

    शक होने पर राघाणी ने खुद जांच कराई तो पता चला कि प्लॉट का मालिकाना हक आरोपियों की कंपनी के पास नहीं, बल्कि एक चैरिटेबल ट्रस्ट के पास है।

    फर्जी कब्जे और किराया वसूली का आरोप

    जांच में यह भी सामने आया कि प्लॉट पर दिखाए गए कई “कब्जाधारी” असली निवासी नहीं थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों की मदद से फर्जी अतिक्रमण करवाए गए और उनसे किराया वसूला जा रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, इसी तरह के एग्रीमेंट कर अन्य डेवलपर्स से भी करीब ₹14 करोड़ की रकम हड़पी गई।

    पैसे मांगने पर मिली धमकी

    जब राघाणी ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें प्रोजेक्ट से बाहर करने और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद राघाणी ने DCP कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।

    EOW करेगी विस्तृत जांच

    FIR दर्ज होने के बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों को जल्द पूछताछ के लिए समन जारी किया जा सकता है। पुलिस पूरे SRA प्रोजेक्ट और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है।


    FAQ Section

    Q1. यह मामला किस इलाके से जुड़ा है?

    यह मामला मुंबई के मलाड स्थित SRA रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा है।

    Q2. कितनी रकम की कथित धोखाधड़ी हुई है?

    करीब ₹5.15 करोड़ की रकम ट्रांसफर की गई थी।

    Q3. जांच कौन कर रहा है?

    मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा गया है।

    Q4. आरोपियों पर क्या आरोप हैं?

    फर्जी एग्रीमेंट, निवेश ठगी, फर्जी कब्जे दिखाकर रकम वसूलना और धमकी देने के आरोप लगे हैं।

  • Mumbai Traffic Police में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले सिपाही को धमकियाँ और हाई कोर्ट का संरक्षण

    Mumbai Traffic Police में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले सिपाही को धमकियाँ और हाई कोर्ट का संरक्षण

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस में भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले कॉन्स्टेबल सुनील टोके को मिली हाई कोर्ट से राहत। विभागीय उत्पीड़न, निलंबन की धमकियों और “रिश्वत रेट-कार्ड” के आरोपों का पूरा सच पढ़ें।

    मुंबई: मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल Sunil Toke (सुनील टोके) ने जब अपने ही विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और “रिश्वत रेट-कार्ड” का खुलासा किया, तो उन्हें लगातार विभागीय दबाव, ट्रांसफर की धमकी और सस्पेंशन की चेतावनी का सामना करना पड़ा। मामला इतना बढ़ा कि आखिरकार उन्हें Bombay High Court का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।

    🔎 क्या है पूरा मामला?

    मुंबई ट्रैफिक विभाग के अंदर कथित तौर पर अलग-अलग उल्लंघनों के लिए “फिक्स रेट” पर रिश्वत वसूली का आरोप सामने आया था। सुनील टोके ने दावा किया कि यह वसूली संगठित तरीके से हो रही थी और आम जनता से नकद लेन-देन के जरिए चालान से बचाने का खेल चल रहा था।

    जब उन्होंने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई, तो कार्रवाई के बजाय उन्हें ही निशाना बनाया गया।

    ⚠️ शिकायत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न

    सूत्रों के मुताबिक शिकायत के बाद:

    • बार-बार स्पष्टीकरण नोटिस
    • अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
    • ड्यूटी में बदलाव
    • निलंबन की धमकी

    जैसी कार्रवाइयाँ शुरू हो गईं। टोके ने इसे “व्हिसलब्लोअर के खिलाफ प्रतिशोध” बताया।

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    ⚖️ हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

    मामला जब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने यह साफ कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से जांचना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रताड़ना या दंडात्मक कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जाएगी जब तक निष्पक्ष जांच पूरी न हो।

    इस आदेश के बाद विभाग को अपनी कार्रवाई पर पुनर्विचार करना पड़ा।

    📊 क्यों अहम है यह मामला?

    • पुलिस विभाग के अंदर से भ्रष्टाचार का खुलासा
    • व्हिसलब्लोअर सुरक्षा पर बड़ा सवाल
    • न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका
    • ट्रैफिक चालान और वसूली सिस्टम पर बहस

    यह मामला सिर्फ एक कॉन्स्टेबल का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन गया है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: सुनील टोके कौन हैं?
    वे मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल हैं जिन्होंने विभाग में कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया।

    Q2: उन्होंने क्या आरोप लगाए?
    उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रैफिक उल्लंघनों के लिए “रिश्वत रेट-कार्ड” चल रहा था।

    Q3: हाई कोर्ट ने क्या कहा?
    कोर्ट ने कहा कि शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रताड़ना न की जाए।

    Q4: क्या जांच अभी जारी है?
    मामला जांच प्रक्रिया में है और विभागीय स्तर पर समीक्षा चल रही है।