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  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    ⚙️ योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    🧑‍⚖️ कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    🏛️ सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    🔍 आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    📉 अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    🪫 दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    🧾 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

  • RRC NER में 1104 अप्रेंटिस की भर्ती, मौका यूपी के युवाओं के लिए

    RRC NER में 1104 अप्रेंटिस की भर्ती, मौका यूपी के युवाओं के लिए

    रेलवे भर्ती सेल (RRC) नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे, गोरखपुर ने अप्रेंटिस के 1104 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। ITI पास उम्मीदवार 16 अक्टूबर से 15 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश: रेलवे में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है! नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (NER), गोरखपुर ने Act Apprentice भर्ती 2025 के लिए आवेदन मंगाए हैं। इस भर्ती में कुल 1104 पद हैं और आवेदन 16 अक्टूबर से 15 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन लिए जाएंगे। अगर आपने ITI किया है और रेलवे में ट्रेनिंग लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो ये आपके लिए बढ़िया मौका है।

    🚉 RRC NER Apprentice Recruitment 2025: ज़रूरी जानकारी

    रेलवे भर्ती सेल (RRC) नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे की यह भर्ती अप्रेंटिस एक्ट 1961 के तहत की जा रही है।
    इस प्रोग्राम में कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वो रेलवे या दूसरे टेक्निकल सेक्टर्स में काम के लिए तैयार हो सकें।

    📍 पोस्ट का नाम: Act Apprentice
    📊 कुल पद: 1104
    💰 स्टाइपेंड: सरकारी अप्रेंटिस नियमों के अनुसार
    📍 लोकेशन: उत्तर प्रदेश – गोरखपुर, इज़्ज़तनगर, लखनऊ, गोंडा और वाराणसी
    📅 आवेदन शुरू: 16 अक्टूबर 2025
    📅 लास्ट डेट: 15 नवंबर 2025

    🧾 RRC NER Apprentice Vacancy 2025: कितने पद कहाँ

    यूनिट / वर्कशॉपपदों की संख्या
    मेकैनिकल वर्कशॉप, गोरखपुर390
    सिग्नल वर्कशॉप, गोरखपुर कैंट63
    ब्रिज वर्कशॉप, गोरखपुर कैंट35
    मेकैनिकल वर्कशॉप, इज़्ज़तनगर142
    डीज़ल शेड, इज़्ज़तनगर60
    कैरिज एंड वैगन, इज़्ज़तनगर64
    कैरिज एंड वैगन, लखनऊ जंक्शन149
    डीज़ल शेड, गोंडा88
    कैरिज एंड वैगन, वाराणसी73
    TRD, वाराणसी40
    कुल1104

    🎓 योग्यता और उम्र सीमा (Eligibility Criteria)

    शैक्षणिक योग्यता:

    • कैंडिडेट ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास (कम से कम 50% मार्क्स) किया हो।
    • संबंधित ट्रेड में ITI सर्टिफिकेट होना ज़रूरी है।

    उम्र सीमा (Age Limit):

    • न्यूनतम उम्र: 15 साल
    • अधिकतम उम्र: 24 साल (16 अक्टूबर 2025 तक)

    आरक्षण के अनुसार छूट:

    • SC/ST: 5 साल
    • OBC: 3 साल
    • दिव्यांग (PwBD): 10 साल

    💸 सैलरी नहीं, मिलेगा ट्रेनिंग स्टाइपेंड

    ये भर्ती ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत है, इसलिए सैलरी नहीं बल्कि स्टाइपेंड दिया जाएगा।
    स्टाइपेंड की राशि सरकारी अप्रेंटिसशिप नियमों के हिसाब से तय की जाएगी।
    ये ट्रेनिंग आपके करियर के लिए बड़ी स्किल डेवलपमेंट ऑपर्च्युनिटी है — बाद में रेलवे की दूसरी भर्तियों (जैसे Group D) में फायदा भी मिल सकता है।

    🧾 सेलेक्शन प्रोसेस: बिना एग्ज़ाम, सिर्फ मेरिट से भर्ती

    • इसमें कोई लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं होगा।
    • सेलेक्शन 10वीं और ITI के मार्क्स के औसत प्रतिशत के आधार पर किया जाएगा।
    • मेरिट लिस्ट के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा।
    • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन गोरखपुर में होगा।

    जरूरी डॉक्यूमेंट्स:
    10वीं की मार्कशीट, ITI सर्टिफिकेट, फोटो, सिग्नेचर, कास्ट सर्टिफिकेट (अगर लागू हो), डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट आदि।

    🖥️ आवेदन कैसे करें (Apply Online Guide)

    1. RRC NER की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।
    2. “Act Apprentice Recruitment 2025” लिंक पर क्लिक करें।
    3. नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें।
    4. “Apply Online” पर क्लिक करें और अपनी बेसिक डिटेल भरें।
    5. लॉगिन करें और बाकी डिटेल्स, एजुकेशन वगैरह भरें।
    6. फोटो व सिग्नेचर अपलोड करें।
    7. फीस भरें (अगर लागू हो)।
    8. सबमिट करने से पहले फॉर्म चेक करें।
    9. सबमिट करने के बाद उसका प्रिंट निकाल लें।

    📅 जरूरी डेट्स

    इवेंटतारीख
    आवेदन शुरू16 अक्टूबर 2025
    आखिरी तारीख15 नवंबर 2025
    डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशनजल्द घोषित होगी

    💳 आवेदन फीस

    कैटेगरीफीस
    General / OBC₹100
    SC / ST / PwBD / महिला उम्मीदवारकोई फीस नहीं

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. RRC NER अप्रेंटिस 2025 में कितने पद हैं?
    👉 कुल 1104 पदों पर भर्ती निकली है।

    Q2. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?
    👉 15 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    Q3. क्या इसमें कोई परीक्षा होगी?
    👉 नहीं, सेलेक्शन मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा।

    Q4. कौन आवेदन कर सकता है?
    👉 जिसने 10वीं और ITI पास किया हो और उम्र 15 से 24 साल के बीच हो।

    Q5. ट्रेनिंग कहाँ होगी?
    👉 गोरखपुर, इज़्ज़तनगर, लखनऊ, गोंडा और वाराणसी में विभिन्न वर्कशॉप्स में।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।

  • मुंबई में मिठी नदी पर बनेगा नया ब्रिज, सायन-कुर्ला-BKC वालों को मिलेगी राहत

    मुंबई में मिठी नदी पर बनेगा नया ब्रिज, सायन-कुर्ला-BKC वालों को मिलेगी राहत

    मुंबई में धारावी के पास मिठी नदी पर नया ब्रिज बनने जा रहा है। पुराने पुल को तोड़कर नया चौड़ा और ऊंचा पुल बनाया जाएगा। करीब ₹303 करोड़ खर्च से बनने वाला ये ब्रिज सायन, कुर्ला और BKC जाने वालों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

    मुंबई: शहर वालों के लिए खुशखबरी है! धारावी में ड्राइव-इन थिएटर के पास मिठी नदी पर नया ब्रिज बनने वाला है। BMC ने पुराने पुल को तोड़कर नया चौड़ा पुल बनाने का काम शुरू कर दिया है। करीब ₹303 करोड़ की लागत से बन रहा ये ब्रिज दो साल में तैयार होगा। इससे सायन, कुर्ला और BKC की तरफ जाने वाली गाड़ियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

    🚧 नया मिठी नदी ब्रिज: क्या है प्लान?

    मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने पुराने मिठी नदी पुल को तोड़कर नया और मजबूत पुल बनाने का फैसला किया है।
    👉 पुराने पुल की चौड़ाई सिर्फ 9.3 मीटर थी, जिससे ट्रैफिक बार-बार जाम हो जाता था।
    👉 नया ब्रिज होगा 48 मीटर चौड़ा और 108 मीटर लंबा, जिससे बड़े-बड़े व्हीकल भी आसानी से निकल पाएंगे।
    👉 ये ब्रिज धारावी के ड्राइव-इन थिएटर के पास बनेगा, जो सायन-कुर्ला और BKC को जोड़ता है।

    💰 ₹303 करोड़ की लागत, दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

    इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹303.95 करोड़ का खर्च आएगा।
    BMC ने इसके लिए नया कॉन्ट्रैक्टर भी फाइनल कर लिया है।
    पूरा काम दो फेज में किया जाएगा।
    पहले फेज में पुराना ब्रिज तोड़ा जाएगा और नदी का चौड़ाई बढ़ाई जाएगी,
    जबकि दूसरे फेज में नया ब्रिज खड़ा किया जाएगा।

    🌊 क्यों जरूरी है नया पुल?

    2005 की मुंबई की बारिश सबको याद है — जब मिठी नदी में पानी भरने से पूरा शहर ठप पड़ गया था।
    उसके बाद डॉ. चितळे कमेटी ने सलाह दी थी कि नदी का चौड़ाई 68 मीटर से बढ़ाकर 100 मीटर किया जाए ताकि पानी का फ्लो ठीक रहे।
    अब उसी रिपोर्ट के हिसाब से ब्रिज की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में न ट्रैफिक जाम हो और न पानी भरने की दिक्कत।

    🚗 किन लोगों को फायदा होगा?

    इस ब्रिज से सबसे ज्यादा फायदा होगा उन लोगों को जो रोज़ सायन, कुर्ला, BKC और बांद्रा की तरफ जाते हैं।

    • ऑफिस टाइम पर लगने वाला जाम कम होगा
    • सिग्नल पर रुकने का टाइम घटेगा
    • नए ब्रिज से ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी और बेहतर बनेगी
    • ट्रक और बसों के लिए भी रास्ता आसान होगा

    ⚙️ कब तक बनेगा ये पुल?

    BMC के मुताबिक, पूरा प्रोजेक्ट दो साल में खत्म करने का टार्गेट है।
    काम चालू होते ही आस-पास के इलाकों में ट्रैफिक डाइवर्जन प्लान भी लागू किया जाएगा ताकि लोगों को ज्यादा दिक्कत न हो।

    📌 प्रोजेक्ट से जुड़ी खास बातें

    पॉइंटडिटेल
    जगहधारावी – ड्राइव-इन थिएटर के पास
    पुल की पुरानी चौड़ाई9.3 मीटर
    नई चौड़ाई48 मीटर
    कुल खर्च₹303.95 करोड़
    टाइमलाइन2 साल
    फेज2 (डिमॉलिशन + कंस्ट्रक्शन)

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. नया ब्रिज कहां बन रहा है?
    👉 धारावी के ड्राइव-इन थिएटर के पास, जहां से सायन-कुर्ला और BKC का रास्ता जाता है।

    Q2. कितना खर्च आएगा?
    👉 लगभग ₹303.95 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है।

    Q3. कब तक तैयार होगा?
    👉 दो साल में काम पूरा करने का टार्गेट है।

    Q4. नया ब्रिज कितना चौड़ा होगा?
    👉 नया पुल लगभग 48 मीटर चौड़ा बनाया जाएगा।

    Q5. किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
    👉 सायन, कुर्ला, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) की तरफ जाने वालों को सबसे बड़ा फायदा होगा।

  • 30 साल बाद भी चल रहा DDLJ का जादू, आज भी बजते हैं माराठा मंदिर में तालियां

    30 साल बाद भी चल रहा DDLJ का जादू, आज भी बजते हैं माराठा मंदिर में तालियां

    मुंबई के माराठा मंदिर में 30 साल बाद भी ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का जादू बरकरार है। शाहरुख खान और काजोल की इस सुपरहिट फिल्म को देखने आज भी फैंस उमड़ते हैं। जानिए कैसे ‘DDLJ’ बन गई भारत की सबसे लंबी चलने वाली फिल्म।

    मुंबई: मशहूर Maratha Mandir Theatre में आज भी हर सुबह 11:30 बजे बजती है वही धुन — “मेरे ख्वाबों में जो आए”। जी हां, 1995 में रिलीज़ हुई शाहरुख खान और काजोल की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) को आज भी रोज़ाना दिखाया जा रहा है।
    यह फिल्म अब तक 1500 हफ्तों से ज़्यादा लगातार चल चुकी है और इसे देखने वाले फैंस की तादाद आज भी कम नहीं होती।

    ❤️ शाहरुख-काजोल की केमिस्ट्री ने रचा इतिहास

    ‘DDLJ’ ने न सिर्फ शाहरुख खान को किंग ऑफ रोमांस बना दिया, बल्कि हिंदुस्तानी सिनेमा में एक नया ट्रेंड भी शुरू किया — जहां प्यार, परिवार और परंपरा का मेल दिखा।
    फिल्म की कहानी राज और सिमरन की है, जो यूरोप में मिलते हैं और फिर भारत में पारिवारिक बंधनों को तोड़ते नहीं, बल्कि मनाकर एक होते हैं।
    आज भी जब सिमरन दौड़कर ट्रेन में कूदती है, तो थिएटर में तालियों और सीटी की गूंज उठती है।

    “वो सीन जब अमरीश पुरी कहते हैं – जा सिमरन जा… आज भी रोंगटे खड़े कर देता है,”
    — मनोज देसाई, माराठा मंदिर के थिएटर हेड

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    🎥 फैंस का जुनून, जो अब भी कम नहीं हुआ

    मुंबई के रहने वाले 60 साल के मोहम्मद शाकिर कहते हैं,

    “मैं DDLJ लगभग 30 बार देख चुका हूं… और आगे भी देखता रहूंगा।”

    वहीं 23 साल के ओंकार सराफ बताते हैं,

    “हमने इसे मोबाइल और टीवी पर देखा, लेकिन बड़े पर्दे पर देखना अलग ही एहसास देता है। आज भी गूजबम्प्स आते हैं।”

    हर रविवार को थिएटर में करीब 500 लोग सीटें भर देते हैं, और कई पुराने फैंस तो इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना चुके हैं।

    🕰️ लगातार 30 साल — DDLJ बना ‘सांस्कृतिक स्मारक’

    2015 में जब फिल्म को हटाने की बात चली थी, तो दर्शकों के विरोध के बाद थिएटर ने इसे जारी रखा।
    फिल्म समीक्षक बरद्वाज रंगन कहते हैं,

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    “DDLJ एक दौर की निशानी है — जहां नई और पुरानी सोच टकराई, और प्यार ने जीत हासिल की। यह फिल्म अब एक Cultural Monument बन चुकी है।”

    🌍 विदेशी दर्शकों के लिए भी ‘दिल से जुड़ी कहानी’

    स्पेन से आई पर्यटक केली फर्नांडीज़ बताती हैं,

    “भले ही हमें हिंदी नहीं आती, लेकिन इस फिल्म के संगीत और डांस ने हमें भावनाओं से जोड़ दिया। ये रोमियो-जूलियट की तरह है, बस हैप्पी एंडिंग के साथ।”


    FAQ सेक्शन

    Q1. DDLJ कब रिलीज़ हुई थी?
    ➡️ फिल्म 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज़ हुई थी।

    Q2. इसे सबसे ज़्यादा कहाँ चलाया गया है?
    ➡️ मुंबई के Maratha Mandir Theatre में पिछले 30 साल से रोज़ाना एक शो के साथ।

    Q3. DDLJ इतनी पॉपुलर क्यों है?
    ➡️ इसकी कहानी, रोमांस, संगीत और फैमिली वैल्यूज़ ने हर पीढ़ी को जोड़ रखा है।

    Q4. क्या अब भी लोग थिएटर में इसे देखने आते हैं?
    ➡️ हां, हर हफ्ते सैकड़ों दर्शक आते हैं, खासकर रविवार को।

  • दो बातें न्याय और अवसरवाद की: पेट्रोल-डीजल की लूट से लेकर दलितों पर अत्याचार तक — सवालों में घिरी सरकार और मायावती की चुप्पी

    दो बातें न्याय और अवसरवाद की: पेट्रोल-डीजल की लूट से लेकर दलितों पर अत्याचार तक — सवालों में घिरी सरकार और मायावती की चुप्पी

    भारत में पेट्रोल और रसोई गैस के बढ़ते दामों पर जनता सवाल उठा रही है। वहीं दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर बसपा सुप्रीमो मायावती की चुप्पी भी चर्चा में है। सरकार की नीतियों और विपक्ष की चुप्पी पर उठे दो बड़े सवाल।

    मुंबई: भारत में लगातार बढ़ते पेट्रोल और रसोई गैस के दामों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटे हैं, तो घरेलू बाजार में राहत क्यों नहीं मिल रही? वहीं दूसरी ओर, दलितों पर हो रहे अत्याचार और दलित अधिकारियों की आत्महत्याओं जैसे गंभीर मामलों पर बसपा सुप्रीमो मायावती की चुप्पी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में जनता के बीच दो बड़े सवाल गूंज रहे हैं — एक न्याय और लूट के नाम पर सरकार की नीतियों पर, और दूसरा अवसरवाद की राजनीति पर।

    💸 पहली बात – पेट्रोल-डीजल के नाम पर लूट, जनता परेशान

    देश में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं जबकि सरकार दावा करती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम घटे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि भूटान में पेट्रोल ₹65 लीटर है और भारत में ₹105।

    केंद्र सरकार भारत से पेट्रोल और डीजल भूटान जैसे देशों को सस्ता भेजती है, जबकि अपने ही नागरिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ाती है।
    असल में, विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल भारत में मात्र ₹35 प्रति लीटर पड़ता है, बाकी रकम टैक्स और सेस के रूप में जनता से वसूली जाती है।

    🏦 कांग्रेस के जमाने में तेल महंगा, लेकिन जनता पर बोझ कम

    कांग्रेस सरकार के वक्त जब कच्चा तेल $110 प्रति बैरल था, तब पेट्रोल ₹65 और रसोई गैस ₹550 में मिलती थी।
    आज कच्चा तेल सिर्फ $70 प्रति बैरल है, फिर भी पेट्रोल ₹105 और गैस ₹1200 से ऊपर क्यों है?

    सरकार ने हाल ही में ₹200 कम करके राहत का ढोंग किया, लेकिन असल में यह जनता को बेवकूफ़ बनाने की कोशिश लगती है।

    ⚙️ एथेनॉल की मिलावट – जनता के साथ धोखाधड़ी?

    सरकार बिना जनता को बताए पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिला रही है, और उसे उसी रेट पर बेच रही है।
    यह फैसला जनता के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है क्योंकि एथेनॉल के कारण वाहनों की माइलेज घट रही है, और इंजन पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त में वाहन रखरखाव खर्च 28% था, जो अक्टूबर में बढ़कर 52% हो गया है।
    पुरानी गाड़ियां एथेनॉल के लिए बनी ही नहीं हैं, लेकिन सरकार ने शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol) का विकल्प ही खत्म कर दिया है।

    🚘 नेताओं के शाही काफिले और जनता की जेब पर वार

    जनता हर दिन महंगे पेट्रोल से परेशान है, लेकिन नेता और मंत्री सरकारी वाहनों में शाही अंदाज़ में घूम रहे हैं।
    कई नेता 20-25 गाड़ियों के काफिले में जनता के टैक्स का पेट्रोल उड़ाते हैं और खुद को जनता का सेवक कहते हैं।

    क्या यही है लोकतंत्र? जनता को त्याग करने की सलाह देने वाले नेता खुद ऐश कर रहे हैं।

    🧾 सरकार को जवाब देना होगा – एथेनॉल मिलावट से किसे फायदा?

    जनता का आरोप है कि एथेनॉल से जो मुनाफा हो रहा है, उसका फायदा मंत्रियों के बेटों और निजी कंपनियों को मिल रहा है
    क्या जनता का गला घोंटकर बेटों को अरबपति बनाना जनसेवा है? सरकार ने बिना पूर्व सूचना पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर पारदर्शिता की हत्या की है।

    दूसरी बात – मायावती की चुप्पी और दलितों पर अत्याचार

    जहां एक ओर देश में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं, वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती पर चुप्पी साधने के आरोप लग रहे हैं।

    दलित IAS अफसर आत्महत्या कर रहे हैं, गरीब दलितों की पीट-पीट कर हत्याएं हो रही हैं, लेकिन मायावती का कोई बयान सामने नहीं आता।

    ⚖️ राजनीति या अवसरवाद? बीजेपी की तारीफ में व्यस्त मायावती

    बीजेपी सरकार, खासकर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की मायावती बार-बार प्रशंसा करती हैं।
    कभी भाजपा को कोसने वाली मायावती आज भाजपा की मौन सहयोगी बन चुकी हैं।

    वहीं, इंडिया एलायंस संविधान और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन मायावती हर सीट पर चुनाव लड़कर विपक्ष को कमजोर कर रही हैं।

    💬 दलितों के मुद्दों पर मायावती की खामोशी क्यों?

    डॉ. आंबेडकर और कांशीराम की विचारधारा पर राजनीति करने वाली मायावती आज उन्हीं के नाम पर राजनैतिक सौदेबाजी कर रही हैं।
    राहुल गांधी जहां हर दलित पीड़ित परिवार से मिल रहे हैं, वहीं मायावती मौन साधे हैं।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मायावती की चुप्पी उनकी अवैध संपत्ति बचाने की रणनीति है।
    उन्हें डर है कि अगर उन्होंने सरकार के खिलाफ बोला तो सीबीआई और ईडी उनके पीछे लग जाएगी।

    🗣️ जनता पूछ रही है – क्या यही लोकतंत्र है?

    जब आम जनता महंगाई से कराह रही है, और दलित समाज अन्याय झेल रहा है, तब बड़े नेता और सरकार दोनों मौन हैं।
    जनता पूछ रही है —

    “क्या अब लोकतंत्र सिर्फ सत्ता और धन बचाने का माध्यम बन गया है?”


    FAQ सेक्शन

    Q1. भूटान में पेट्रोल सस्ता और भारत में महंगा क्यों है?
    👉 भारत में टैक्स और सेस बहुत ज्यादा है, जिससे कीमतें 100 रुपए पार हैं।

    Q2. क्या एथेनॉल मिलावट से वाहनों को नुकसान होता है?
    👉 हां, खासकर पुरानी गाड़ियों में माइलेज घटती है और पार्ट्स जंग लगते हैं।

    Q3. मायावती दलित मुद्दों पर चुप क्यों हैं?
    👉 राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, वे सरकार से टकराव से बचना चाहती हैं।

    Q4. क्या सरकार जनता को सस्ते तेल का फायदा देती है?
    👉 नहीं, सरकार कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदकर भी टैक्स बढ़ाकर जनता को राहत नहीं देती।

    Q5. क्या एथेनॉल मुनाफा राजनीतिक परिवारों को जा रहा है?
    👉 आरोप यही हैं कि एथेनॉल कंपनियों से राजनीतिक संबंध जुड़े हैं।

  • मुंबई ट्रैफिक जाम में इंसानियत की मिसाल: वसई की मुस्लिम सोसायटी ने बांटा खाना, पानी और चाय – जीता सबका दिल ❤️

    मुंबई ट्रैफिक जाम में इंसानियत की मिसाल: वसई की मुस्लिम सोसायटी ने बांटा खाना, पानी और चाय – जीता सबका दिल ❤️

    मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर दो दिन चले भयंकर ट्रैफिक जाम के दौरान वसई की ज़ार एम्पायर सोसायटी के मुस्लिम परिवारों ने फंसे यात्रियों को खाना, पानी और चाय बांटकर इंसानियत की मिसाल पेश की।

    मुंबई–अहमदाबाद हाईवे पर इस हफ्ते जो नज़ारा देखने को मिला, वो किसी परेशानी से बढ़कर इंसानियत और एकता की तस्वीर बन गई।
    वसई फाटा के पास ज़ार एम्पायर सोसायटी के मुस्लिम परिवारों ने दो दिन चले ट्रैफिक जाम के बीच फंसे यात्रियों, छात्रों और मरीजों को खाना, पानी और चाय बांटकर सबका दिल जीत लिया।

    🤝 300 मुस्लिम परिवारों की पहल – “हमने ये काम सिर्फ इंसानियत के लिए किया”

    सोसायटी के करीब 300 परिवारों ने अपने घरों से फंड इकट्ठा किया और सैकड़ों लोगों को बोतलबंद पानी, बिस्किट, पोहा, शरबत और चाय वितरित की।
    सामाजिक कार्यकर्ता रिज़वान खान ने बताया,

    “हम तीन दिन से लगातार ट्रैफिक में फंसे लोगों को सर्व कर रहे हैं। सबने मिलकर योगदान दिया — किसी ने पानी दिया, किसी ने नाश्ता बनाया। ये सब हमने सिर्फ इंसानियत के नाते किया।”

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    मुंबई अहमदाबाद एक्सप्रेस हाईवे ट्रेफिक की तस्वीर

    👩‍🍳 महिलाओं की अहम भूमिका – घर से बनाई चाय और नाश्ता

    इस सेवा में सोसायटी की महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने घर पर ही चाय, पोहा और बिस्किट तैयार किए और बड़े कंटेनरों में हाईवे तक भिजवाए।
    ज़ार एम्पायर के सदस्य मोहसिन प्लसरा ने बताया,

    “तीन दिन तक हमने मुंबई और गुजरात की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को सर्व किया। हमने 500 से ज़्यादा पानी की बोतलें और करीब 400 लीटर शरबत बांटा।”

    🚙 मुस्लिम समाज की एकजुटता बनी मिसाल

    इस सेवा में सिर्फ ज़ार एम्पायर के लोग ही नहीं, बल्कि वसई वेस्ट की मुसाजी गली के सामाजिक कार्यकर्ता आरिफ़ जमी़ल अहमद शेख और उनकी टीम ने भी साथ दिया।
    उन्होंने ‘RoRo’ फेरी सर्विस के लिए वसई किले के पास फंसे लोगों को वड़ा पाव, बिस्किट और पानी बांटा।
    शेख ने कहा,

    “लोग धूप में घंटों खड़े थे। लगा कि कुछ करना ज़रूरी है। जो थोड़ा-बहुत हुआ, लोगों के चेहरे पर राहत दिखी।”

    🏫 स्कूलों ने टाले पिकनिक, लेकिन बच्चों ने सीखी इंसानियत की सीख

    लंबे जाम के कारण 20 से ज़्यादा स्कूलों ने अपनी पिकनिक टाल दीं।
    शिक्षक हिफ़ज़ुर रहमान अंसारी, जो ज़ार एम्पायर के ही निवासी हैं, ने कहा —

    “हमारा मकसद सिर्फ मदद करना था, किसी धर्म या पहचान के बिना। 300 परिवारों ने एक साथ मिलकर ये काम किया, और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।”

    💬 लोगों की प्रतिक्रिया – “किसी ने नहीं पूछा कौन हैं, बस मदद की”

    ट्रैफिक में फंसे एक यात्री ने कहा,

    “हम घंटों जाम में फंसे थे, पानी तक नहीं था। तभी कुछ लोग आए और शरबत व नाश्ता दिया। उन्होंने नहीं पूछा हम कौन हैं — बस इंसानियत दिखाई।”

    🌇 ट्रैफिक खुला, लेकिन ज़ार एम्पायर की कहानी याद रह गई

    गुरुवार को जब ट्रैफिक सामान्य हुआ, तब भी यात्रियों के दिलों में ज़ार एम्पायर के लोगों की सेवा भावना की याद रह गई।
    रिज़वान खान ने आखिर में कहा —

    “हमने ये शोहरत के लिए नहीं किया। हमारी मज़हब और इंसानियत दोनों यही सिखाती हैं — मदद करो, चाहे कोई भी हो।”

    🕊️ संदेश साफ़ है — धर्म नहीं, इंसानियत सबसे बड़ी है

    मुंबई जैसे शहर में जहां रोज़ाना भीड़ और तनाव की खबरें आती हैं, वहीं ज़ार एम्पायर के इन लोगों ने एकता, भाईचारे और मोहब्बत की नई मिसाल कायम की है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर ट्रैफिक जाम कब लगा था?
    👉 मंगलवार से शुरू होकर दो दिन तक चला, जिससे सैकड़ों गाड़ियां फंसी रहीं।

    Q2. ज़ार एम्पायर सोसायटी कहाँ स्थित है?
    👉 वसई फाटा, मुंबई के पास।

    Q3. मुस्लिम समाज ने क्या मदद की?
    👉 यात्रियों को पानी, चाय, नाश्ता और शरबत बांटा।

    Q4. इस पहल में कितने परिवार शामिल थे?
    👉 लगभग 300 मुस्लिम परिवार।

    Q5. क्या यह सेवा किसी संगठन द्वारा थी?
    👉 नहीं, यह पूरी तरह स्थानीय निवासियों की स्वैच्छिक पहल थी।

  • इंडियन आर्मी 55th TES जुलाई 2026 भर्ती: 12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका, ₹56,100 तक सैलरी – ऐसे करें आवेदन

    इंडियन आर्मी 55th TES जुलाई 2026 भर्ती: 12वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका, ₹56,100 तक सैलरी – ऐसे करें आवेदन

    इंडियन आर्मी ने 55वीं टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। 12वीं (PCM) पास युवा इस भर्ती के तहत ऑफिसर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। सैलरी ₹56,100 से शुरू, कोई फीस नहीं, और ट्रेनिंग के साथ इंजीनियरिंग डिग्री भी मिलेगी।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: भारतीय सेना ने देशभर के युवा, अविवाहित और टेक्नोलॉजी के प्रति उत्साही उम्मीदवारों के लिए 55वीं टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES – 55) का नोटिफिकेशन जारी किया है।
    अगर आपने 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषयों के साथ 60% या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं और JEE (Mains) 2025 दिया है, तो ये भर्ती आपके लिए है।

    आवेदन की तारीखें:

    • आवेदन शुरू: 14 अक्टूबर 2025
    • अंतिम तिथि: 13 नवंबर 2025

    📋 भर्ती का पूरा विवरण

    भर्ती का नाम: 10+2 Technical Entry Scheme (TES-55)
    कुल पद: 90
    पोस्ट: ऑफिसर ट्रेनिंग कैडेट
    स्थान: पूरे भारत में
    सैलरी/स्टाइपेंड: ₹56,100/- प्रतिमाह से शुरुआत

    🎓 पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

    शैक्षणिक योग्यता:

    • उम्मीदवार ने 10+2 परीक्षा PCM विषयों के साथ कम से कम 60% अंकों के साथ पास की हो।
    • उम्मीदवार ने JEE (Main) 2025 में भाग लिया हो।

    आयु सीमा:

    • उम्मीदवार की आयु 1 जुलाई 2026 तक 16.5 से 19.5 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
    • जन्म तिथि: 2 जनवरी 2007 से 1 जनवरी 2010 (दोनों दिन सहित)।

    💪 मेडिकल और फिजिकल स्टैंडर्ड

    सभी उम्मीदवारों को भारतीय सेना के मेडिकल और फिजिकल फिटनेस स्टैंडर्ड्स को पूरा करना अनिवार्य है।
    इसमें लंबाई, वजन, दृष्टि परीक्षण, और सामान्य स्वास्थ्य जांच शामिल होती है।
    विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मेडिकल गाइडलाइंस देख सकते हैं।

    💰 सैलरी और भत्ते – सम्मान के साथ शानदार कमाई

    TES के अंतर्गत चयनित कैडेट्स को ट्रेनिंग के दौरान ₹56,100/- प्रति माह का स्टाइपेंड मिलेगा।
    कमिशनिंग के बाद उम्मीदवार को लेवल 10 पे-स्केल (₹56,100 – ₹1,77,500) में पदोन्नति मिलेगी।

    अन्य भत्ते:

    • महंगाई भत्ता (DA)
    • यूनिफॉर्म व किट मेंटेनेंस भत्ता
    • रेंट व हार्डशिप अलाउंस (पोस्टींग लोकेशन के आधार पर)
    • मेडिकल और ट्रैवल भत्ते

    नए कमीशंड लेफ्टिनेंट की CTC लगभग ₹17–18 लाख सालाना होती है।

    🧭 चयन प्रक्रिया (Selection Process)

    भारतीय सेना TES भर्ती के लिए तीन चरणों की प्रक्रिया अपनाती है:

    स्टेज 1: आवेदन की शॉर्टलिस्टिंग

    उम्मीदवारों को JEE Mains Common Rank List (CRL) के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

    स्टेज 2: SSB इंटरव्यू (5 दिन)

    चयनित उम्मीदवारों को प्रयागराज, भोपाल, बेंगलुरु या जालंधर के किसी एक चयन केंद्र पर SSB इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

    • पहला चरण: Officer Intelligence Rating (OIR) टेस्ट और Picture Perception & Discussion (PPDT)
    • दूसरा चरण: साइकोलॉजिकल टेस्ट, GTO टास्क, और पर्सनल इंटरव्यू

    स्टेज 3: मेडिकल टेस्ट

    SSB में सफल उम्मीदवारों की मेडिकल जांच सेना अस्पताल में की जाएगी।

    🧾 आवेदन प्रक्रिया – Step-by-Step गाइड

    1. भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं – joinindianarmy.nic.in
    2. Online Application” टैब पर क्लिक करें।
    3. रजिस्ट्रेशन करें और अपनी जानकारी भरें।
    4. 10वीं, 12वीं मार्कशीट और JEE (Main) 2025 स्कोर अपलोड करें।
    5. सबमिट करने से पहले सभी जानकारी जांचें।
    6. फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें।

    👉 इस भर्ती के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है।

    📅 महत्वपूर्ण तिथियां

    इवेंटतिथि
    आवेदन शुरू14 अक्टूबर 2025
    आवेदन समाप्त13 नवंबर 2025
    SSB इंटरव्यू (अनुमानित)फरवरी/मार्च 2026

    ❓FAQ सेक्शन

    Q1: क्या TES 55 भर्ती के लिए फीस देनी होगी?
    नहीं, इस भर्ती के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है।

    Q2: क्या लड़कियां इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकती हैं?
    नहीं, TES योजना केवल अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों के लिए है।

    Q3: क्या JEE (Mains) देना जरूरी है?
    हां, TES-55 के लिए JEE (Main) 2025 में भाग लेना अनिवार्य है।

    Q4: चयन प्रक्रिया कितनी लंबी होती है?
    पूरा चयन (शॉर्टलिस्टिंग, SSB और मेडिकल) आमतौर पर 3-4 महीने का समय लेता है।

    Q5: ट्रेनिंग कहाँ होती है?
    सफल उम्मीदवारों को Indian Military Academy (IMA), देहरादून में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • मुंबई से सिर्फ ₹5,000 में घूमने लायक 5 शानदार वीकेंड डेस्टिनेशन – सुकून, नेचर और एडवेंचर एक साथ!

    मुंबई से सिर्फ ₹5,000 में घूमने लायक 5 शानदार वीकेंड डेस्टिनेशन – सुकून, नेचर और एडवेंचर एक साथ!

    मुंबई की भागदौड़ से ब्रेक चाहिए? सिर्फ ₹5,000 में घूम आइए इन 5 शानदार वीकेंड डेस्टिनेशन पर – झरनों से लेकर बीच और पहाड़ों तक, सब कुछ कुछ घंटों की दूरी पर!

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी एवं मायानगरी मुंबई एक ऐसी सिटी है जो कभी रुकती नहीं। भीड़, ट्रैफिक और काम की दौड़ के बीच कभी-कभी खुद के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है। लेकिन खुशखबरी ये है कि सुकून पाने के लिए आपको ज्यादा खर्च करने की ज़रूरत नहीं। मुंबई के आस-पास कई ऐसी जगहें हैं जहाँ आप सिर्फ ₹5,000 में एक यादगार वीकेंड बिता सकते हैं।

    🌄 1. लोनावला और खंडाला – मुंबई की क्लासिक हिल स्टेशन जोड़ी

    मुंबई से सिर्फ 2 घंटे की दूरी पर बसे लोनावला और खंडाला हमेशा से मुम्बइकरों के दिल के करीब रहे हैं। यहां की हरियाली, झरने और पुराने किले वाकई रिलैक्स करने का परफेक्ट तरीका हैं।

    बजट ब्रेकडाउन:

    • ट्रेन किराया (राउंड ट्रिप): ₹150
    • होटल: ₹800-1,200
    • खाना और लोकल ट्रेवल: ₹800 तक
    • कुल खर्च: ₹2,500 प्रति व्यक्ति

    जरूरी जगहें: भूशी डैम, लोहागढ़ किला, टाइगर पॉइंट, कारला गुफाएं
    बेस्ट टाइम: जून से सितंबर (झरनों के लिए), नवंबर से फरवरी (ठंडे मौसम के लिए)

    🦜 2. कर्नाळा बर्ड सैंक्चुअरी – नेचर लवर्स के लिए ग्रीन ट्रेल

    मुंबई से सिर्फ 50 किमी दूर, कर्नाळा बर्ड सैंक्चुअरी बर्ड वॉचिंग और हल्के ट्रेकिंग के लिए बेहतरीन जगह है। यहां 150 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां मिलती हैं।

    बजट ब्रेकडाउन:

    • ट्रेन (मुंबई-पनवेल): ₹30
    • ऑटो: ₹100
    • एंट्री: ₹50
    • खाना: ₹300
    • कुल खर्च: ₹600 के अंदर

    बेस्ट टाइम: अक्टूबर से मार्च
    टिप: अपने कैमरे में चार्ज रखिए – यहां की तस्वीरें बेहद खूबसूरत आती हैं!

    🌊 3. अलीबाग – बीच वाइब्स बिना गोवा प्राइस टैग के

    अगर आप समंदर और सुकून पसंद करते हैं तो अलीबाग परफेक्ट जगह है। सिर्फ एक फेरी राइड में मुंबई की भीड़ से दूर शांत बीच, सीफूड और किला घूमने का मज़ा।

    बजट ब्रेकडाउन:

    • फेरी टिकट (राउंड ट्रिप): ₹300
    • लोकल बस: ₹100
    • होटल: ₹1,000
    • खाना व ट्रेवल: ₹1,000
    • कुल खर्च: ₹2,500-3,000 प्रति व्यक्ति

    जरूरी जगहें: कोलाबा किला, अलीबाग बीच, कीहिम बीच
    बेस्ट टाइम: नवंबर से फरवरी

    🏞️ 4. इगतपुरी – पहाड़ों में शांति और मेडिटेशन का ठिकाना

    इगतपुरी, सह्याद्री की गोद में बसा एक शांत शहर है। अगर आप मेडिटेशन, ट्रेकिंग और नेचर की खामोशी पसंद करते हैं, तो ये जगह आपके लिए है।

    बजट ब्रेकडाउन:

    • ट्रेन: ₹150
    • होटल: ₹1,000
    • खाना और ट्रेवल: ₹800
    • कुल खर्च: ₹2,000-2,500 प्रति व्यक्ति

    जरूरी जगहें: त्रिंगलवाड़ी किला, भातसा नदी, विपश्यना सेंटर
    बेस्ट टाइम: अक्टूबर से मार्च

    🌌 5. भंडारदरा – झीलों, झरनों और तारों से सजी रातें

    भंडारदरा एक छुपा हुआ ट्रेज़र है। यहां का आर्थर लेक और रंधा फॉल्स आपकी थकान पलभर में मिटा देते हैं। यहां कैम्पिंग का मज़ा ही अलग है – टेंट, बोनफायर और तारों भरा आसमान!

    बजट ब्रेकडाउन:

    • ट्रेन + बस: ₹200
    • कैम्पिंग: ₹800
    • खाना और ट्रेवल: ₹1,000
    • कुल खर्च: ₹2,000-2,400 प्रति व्यक्ति

    बेस्ट टाइम: अक्टूबर से फरवरी
    हाइलाइट: रात के समय तारों की झिलमिलाहट – एक याद जो कभी नहीं मिटती।

    💡 बजट ट्रिप को शानदार बनाने के टिप्स

    • वीकडेज़ में ट्रेवल करें, सस्ता और भीड़-फ्री
    • ट्रेन या फेरी टिकट पहले से बुक करें
    • हल्का पैक करें, जरूरी चीजें जैसे सनस्क्रीन, जैकेट और पानी की बोतल साथ रखें
    • ग्रुप ट्रेवल करें – खर्च कम और मज़ा दोगुना
    • मौसम की जानकारी चेक करें, खासकर मॉनसून में

    ❓FAQ सेक्शन

    Q1: क्या इन जगहों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से पहुंचा जा सकता है?
    हां, सभी जगहों तक ट्रेन, बस या फेरी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    Q2: क्या ₹5,000 में स्टे और खाना दोनों शामिल हो जाएंगे?
    बिलकुल! अगर आप होमस्टे, लोकल खाना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट चुनते हैं तो ये बजट काफी है।

    Q3: सबसे सस्ता और नजदीकी ऑप्शन कौन-सा है?
    कर्नाळा बर्ड सैंक्चुअरी – सिर्फ ₹600 में एक शानदार दिन ट्रिप।

    Q4: कपल्स या फैमिली के लिए कौन सी जगह बेहतर है?
    अलीबाग और लोनावला दोनों ही कपल्स और फैमिली ट्रिप्स के लिए बेस्ट हैं।

  • “जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा वही टिप्पणी कर रहे हैं” — NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का विपक्ष पर पलटवार

    “जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा वही टिप्पणी कर रहे हैं” — NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का विपक्ष पर पलटवार

    NCP प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी चुनाव नहीं लड़े और जिन्हें बूथ स्तर की प्रक्रिया की जानकारी नहीं, वही मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आयोग की देखरेख में होती है।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: 16 अक्टूबर – राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने बुधवार को विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा,

    “जिन लोगों ने कभी चुनाव नहीं लड़ा और जिन्हें बूथ स्तर की मतदान प्रक्रिया की जानकारी नहीं, वही आज टिप्पणी कर रहे हैं।”

    तटकरे का यह बयान हाल ही में विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग से की गई मुलाकात के संदर्भ में आया है, जिसमें विपक्ष ने मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।

    🏛️ “हमने खुद चुनाव लड़ा, पोलिंग एजेंट भी रहे हैं”

    सुनील तटकरे ने कहा कि वह और उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ता जमीनी स्तर से राजनीति में आए हैं।

    “हमने खुद कई बार चुनाव लड़ा है, पोलिंग एजेंट के रूप में काम किया है, मतदाता पर्चियां बांटी हैं, और काउंटिंग एजेंट भी रहे हैं।”

    उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती है और हर दल को DLO (Designated Liaison Officer) नियुक्त करने की अनुमति होती है, जो मतदान केंद्रों पर निगरानी रखता है।

    🗳️ “मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी”

    NCP नेता ने कहा कि मतदान के समय मतदाता की पहचान पत्र के माध्यम से जांच की जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना नहीं रहती।

    “हर राजनीतिक दल के पोलिंग एजेंट मतदान केंद्रों पर मौजूद रहते हैं। यह कहना कि प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, सिर्फ भ्रम फैलाने जैसा है।”

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    💬 “विपक्ष नैरेटिव सेट करना चाहता है”

    तटकरे ने विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

    “यदि विपक्ष को कोई नैरेटिव सेट करना है, तो करने दीजिए। जनता सब जानती है और सच्चाई देख रही है।”

    उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली मजबूत है और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर संदेह करना अनुचित है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. सुनील तटकरे ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
    उन्होंने कहा कि जो लोग कभी चुनाव नहीं लड़े और बूथ प्रक्रिया नहीं जानते, वही मतदान प्रणाली पर टिप्पणी कर रहे हैं।

    Q2. उन्होंने मतदान प्रक्रिया को लेकर क्या कहा?
    तटकरे ने कहा कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और हर दल के पोलिंग एजेंट केंद्रों पर मौजूद रहते हैं।

    Q3. विपक्ष ने चुनाव आयोग से क्यों मुलाकात की?
    विपक्षी दलों ने मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

    Q4. सुनील तटकरे कौन हैं?
    सुनील तटकरे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद हैं।

    Q5. तटकरे ने विपक्ष के दावे को क्या बताया?
    उन्होंने विपक्ष के दावों को “नैरेटिव सेट करने की कोशिश” बताया और कहा कि जनता सब समझती है।