Category: Civic Issues

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  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 45 हजार मैंग्रोव कटेंगे, बदले में तीन गुना पौधारोपण और 10 साल की निगरानी अनिवार्य होगी।

    मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर को मिरा-भायंदर से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट की मंजूरी मिल गई है। अदालत ने बीएमसी को करीब 45 हजार मैंग्रोव काटने की सशर्त अनुमति दी है। इसके बदले बीएमसी को तीन गुना पौधारोपण, चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण और अगले 10 वर्षों तक हर साल निगरानी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस फैसले से मुंबई के उत्तरी हिस्से की ट्रैफिक समस्या कम होने की उम्मीद है।

    हाईकोर्ट का अहम फैसला

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्सोवा–भायंदर डेवलपमेंट प्लान रोड (कोस्टल रोड नॉर्थ) को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
    हालांकि अदालत ने साफ किया कि—

    • परियोजना पर 10 साल तक निगरानी जरूरी होगी
    • हर साल कम्पनसेटरी प्लांटेशन की रिपोर्ट जमा करनी होगी

    अदालत का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी उतना ही जरूरी है।

    कितने मैंग्रोव कटेंगे, कितना होगा पुनरोपण

    परियोजना के तहत—

    • कुल मैंग्रोव: करीब 60,000
    • प्रभावित होंगे: 45,675 मैंग्रोव
    • सड़क निर्माण के लिए सीधे कटेंगे: करीब 9,000 मैंग्रोव (10 हेक्टेयर)

    बीएमसी ने भरोसा दिलाया है कि—

    • तीन गुना मैंग्रोव पुनरोपण किया जाएगा
    • चंद्रपुर जिले में 103 हेक्टेयर क्षेत्र में अनिवार्य वनरोपण होगा

    वर्सोवा से भायंदर तक कैसा होगा रोड नेटवर्क

    यह कोस्टल रोड मुंबई के पश्चिमी किनारे पर एक बड़ा ट्रैफिक कॉरिडोर बनेगा।

    रूट डिटेल्स

    • शुरुआत: वर्सोवा
    • बीच के इलाके: मलाड, मालवनी, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर
    • अंत: भायंदर (मिरा-भायंदर)

    संरचना

    • एलिवेटेड रोड
    • फ्लाईओवर और इंटरचेंज
    • टनल और ब्रिज
    • सतही ट्रैफिक कम करने की व्यवस्था

    दो फेज़ में बनेगी कोस्टल रोड

    • फेज-1: वर्सोवा से दहिसर
    • लंबाई: लगभग 20–25 किमी
    • इसे कोस्टल रोड फेज-2 या वर्सोवा–दहिसर लिंक रोड भी कहा जाएगा
    • फेज-2: दहिसर से भायंदर
    • एलिवेटेड रोड
    • लंबाई: 5.6 किमी, चौड़ाई 45 मीटर

    कुल मिलाकर इंटरचेंज और कनेक्टर मिलाकर नेटवर्क 60 किलोमीटर से ज्यादा का होगा।

    ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

    बीएमसी के अनुसार—

    • वेस्टर्न सबर्ब्स से मिरा-भायंदर का सफर तेज होगा
    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड पर दबाव घटेगा
    • रोज़ाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी

    पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज

    जहां एक तरफ इस प्रोजेक्ट को ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मैंग्रोव कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता भी बनी हुई है।
    हाईकोर्ट ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड क्या है?
    यह मुंबई को मिरा-भायंदर से जोड़ने वाली 26.3 किमी लंबी तटीय सड़क परियोजना है।

    Q2: कितने मैंग्रोव काटे जाएंगे?
    करीब 45,675 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 9,000 सीधे कटेंगे।

    Q3: बदले में क्या किया जाएगा?
    तीन गुना पौधारोपण और चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण किया जाएगा।

    Q4: कोर्ट ने क्या शर्त रखी है?
    10 साल तक निगरानी और हर साल रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा।

    Q5: इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    ट्रैफिक कम होगा और वेस्टर्न सबर्ब्स से भायंदर तक सफर तेज होगा।

  • मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    मुंबई को मिलेगी ‘पगड़ी सिस्टम’ से आज़ादी? राज्य सरकार ने बनाया नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क

    महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से मुक्त करने के लिए नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने का बड़ा फैसला किया। इससे 19,000 से ज्यादा पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई को दशकों पुराने ‘पगड़ी सिस्टम’ से बाहर निकालने की बड़ी पहल की है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में घोषणा की कि शहर के पुराने पगड़ी मॉडल पर चलने वाले मकानों के लिए एक अलग रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों — दोनों के हक सुरक्षित रहेंगे और 19,000 से ज्यादा जर्जर इमारतों का पुनर्विकास तेज होगा। यह निर्णय मुंबई की रियल एस्टेट मार्केट को मजबूत करने और सालों से लंबित हजारों विवादों को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    क्या है पगड़ी सिस्टम और क्यों जरूरी पड़ा बदलाव?

    मुंबई में दशकों से चल रहा पगड़ी सिस्टम एक ऐसा मॉडल है जिसमें किरायेदार मकान में रहने के लिए एकमुश्त रकम देकर आंशिक मालिकाना हक जैसा अधिकार पा लेता है।

    • किराया बेहद कम
    • सबलेट करने की अनुमति
    • मकान मालिक को वास्तविक मूल्य का लाभ नहीं

    इस सिस्टम के कारण मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं। कई केस तो दशकों से अदालत में लंबित हैं।

    मुंबई में 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में

    डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि मुंबई में करीब 19,000 पुरानी, प्री-1960 सीज्ड इमारतें पगड़ी सिस्टम पर चल रही हैं।
    इनमें से—

    • कई इमारतें पहले ही जर्जर हो चुकी हैं
    • कुछ ढह चुकी हैं
    • और 13,000 से ज्यादा अभी भी पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही हैं

    यह सारी इमारतें महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट के दायरे में आती हैं, जिससे किरायेदार सुरक्षित रहते हैं, लेकिन मकान मालिक अपने अधिकारों की उचित भरपाई न मिलने की शिकायत करते हैं।

    Deputy chief minister eknath shinde

    क्यों आया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क का विचार?

    शिंदे ने विधानसभा में बताया—

    • 28,000 से ज्यादा किरायेदार–मकान मालिक विवाद अदालतों में अटके हैं
    • पुराने कानून जमीन पर असरदार साबित नहीं हो रहे
    • पुनर्विकास बाधित होने से इमारतें खतरे में हैं

    सरकार अब हाईकोर्ट की मंजूरी से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी, ताकि सभी मामले तीन साल के भीतर निपट जाएं।

    कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त पुनर्निर्माण की सुविधा

    FSI (Floor Space Index) बढ़ाना काफी नहीं है—यह बात भी शिंदे ने साफ कही।
    EWS और LIG वर्ग के पगड़ी धारकों के लिए—

    • मुफ्त पुनर्निर्माण
    • टेनेंट हिस्से के बराबर FSI
    • लैंड ओनर को मूल FSI
    • इंसेंटिव FSI

    अगर जमीन की ऊंचाई सीमा या अन्य रुकावटों के कारण FSI का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, तो बचा हुआ FSI TDR (Transfer of Development Rights) के रूप में दिया जाएगा।

    पुरानी इमारतों के लिए खुला रास्ता

    सरकार का कहना है कि यह नया फ्रेमवर्क—

    • जर्जर इमारतों के गिरने के खतरे को रोकेगा
    • जीवन और संपत्ति दोनों की सुरक्षा करेगा
    • लंबे समय से अटकी पुनर्विकास परियोजनाओं में नई जान डालेगा

    साथ ही मौजूदा पुनर्विकास विकल्प 33(7) और 33(9) भी उपलब्ध रहेंगे।

    मकान मालिक और किरायेदार—दोनों के लिए फायदे

    सरकार के अनुसार—

    • किरायेदारों का पुनर्विकास और घर की सुरक्षा
    • मकान मालिकों को उचित हिस्सा और कानूनी राहत
    • लंबे विवादों का निपटारा
    • शहर में रियल एस्टेट मार्केट को बल

    यह सिस्टम दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत समाधान प्रदान करेगा।


    FAQ सेक्शन

    1. पगड़ी सिस्टम क्या होता है?

    एक पुराना किरायेदारी मॉडल जिसमें किरायेदार एकमुश्त रकम देकर कम किराए पर आंशिक मालिकाना अधिकार जैसा लाभ पाता है।

    2. मुंबई में कितनी पगड़ी इमारतें हैं?

    करीब 19,000 से ज्यादा इमारतें पगड़ी सिस्टम में आती हैं।

    3. नया फ्रेमवर्क कब लागू होगा?

    सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, विस्तृत नियम जल्द सामने आएंगे।

    4. क्या किरायेदारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे?

    हाँ, सरकार ने साफ कहा है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे।

    5. क्या सभी केस जल्द निपटेंगे?

    फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी 28,000 केस अगले तीन साल में निपटाने की योजना है।

  • BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    BMC चुनाव से पहले भाजपा में तकरार? किरीट सोमैया ने मंत्री लोढा को लगाई फटकार

    मुंबई महापौर पद को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद उभरते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा के “भाजपा का महापौर” बयान पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“कसली कॉलर टाइट? भाजपा महापौर की रेस में नहीं है।”

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नज़दीक आते ही राजनीति गर्माती जा रही है। एक तरफ भाजपा नेता जहां BMC में सत्ता स्थापित करने की बात कर रहे हैं, वहीं भाजपा के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। मंत्री मंगलप्रभात लोढा द्वारा “मुंबई में भाजपा का महापौर बनेगा” इस दावे के बाद पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने उन्हें कड़े शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही है।” सोमैया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस बयान पर ध्यान देने की बात कही।

    मुंबई में महापौर पद पर सियासी बयानबाज़ी तेज़

    राज्य के 29 नगर निगम चुनावों की घोषणा से पहले ही मुंबई में राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। महायुती के नेताओं का दावा है कि इस बार मुंबई में उनका महापौर बनेगा।
    वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) भी लगातार यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि “मुंबई में फिर से शिवसेना का महापौर आएगा।”

    इसी माहौल में मंत्री मंगलप्रभात लोढा के बयान ने राजनीतिक हलचलों को और हवा दे दी।

    मंगलप्रभात लोढा का बयान: “भाजपा का महापौर बनेगा, कॉलर टाइट होगा!”

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री लोढा ने कहा था—

    “मुंबई महानगरपालिका में जब भाजपा का महापौर चुना जाएगा, तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उसके शपथ ग्रहण समारोह में आएंगे, और उस वक्त आपकी और मेरी कॉलर टाइट होगी!”

    उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में कई दल फडणवीस के संकेतों पर चलते हैं।

    उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा अकेले महापौर पद का दावा कर रही है।

    सैय्या—”किस तरह का कॉलर टाइट? बीजेपी मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ रही है!”

    मंगलप्रभात लोढा के बयान पर भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने नाराज़गी जताई।
    मीडिया से बातचीत में सोमैया ने कहा—

    “भाजपा महापौर पद के लिए लड़ ही नहीं रही। जो नेता महापौर पद की बात कर रहे हैं, उन्हें मैंने भी बताया है और फडणवीस जी को भी कहा है कि उन्हें रोको। कैसा कॉलर टाइट? कैसा महापौर पद?”

    सोमैया ने स्पष्ट किया कि भाजपा का ध्यान महापालिका में “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” और विकास पर है, न कि महापौर की कुर्सी पर।

    महा विकास अघाड़ी और ठाकरे गुट पर भी हमला

    मीडिया से बातचीत के दौरान सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को भी आड़े हाथों लिया।
    उन्होंने कहा—

    • “कोविड के दौरान ठाकरे सेना कमाई कर रही थी।”
    • “खिचड़ी घोटाला, रेमडेसिविर घोटाला—ये सब मुंबई को लूटने की कहानी है।”
    • “हमारा लक्ष्य BMC को भ्रष्टाचार से मुक्त कराकर मुंबई का विकास करना है।”

    उनके अनुसार भाजपा—चाहे फडणवीस हों या मोदी—पिछले 25 वर्षों से “लूट” का आरोप झेल रही मुंबई को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुंबई में क्या भाजपा एकजुट नहीं? उठने लगे सवाल

    लोढा का “भाजपा का महापौर” वाला दावा और सोमैया की “भाजपा महापौर पद की लड़ाई नहीं लड़ रही” वाली प्रतिक्रिया—दोनों ने मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—

    क्या BMC चुनाव में भाजपा की रणनीति स्पष्ट नहीं है?

    या फिर पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है?

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BMC चुनाव 2025 महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
    इसलिए भाजपा चाहती है कि हर बयान बेहद सोच–समझकर दिया जाए।


    FAQ सेक्शन

    1. महापौर पद को लेकर भाजपा में विवाद क्यों दिख रहा है?

    मंत्री लोढा ने कहा कि “भाजपा का महापौर बनेगा”, जबकि सोमैया ने कहा कि भाजपा महापौर की रेस में नहीं है। इसी वजह से मतभेद की चर्चा शुरू हुई।

    2. भाजपा की आधिकारिक रणनीति क्या है?

    सोमैया के मुताबिक, भाजपा का मुख्य फोकस महापालिका को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और विकास तेज़ करना है।

    3. BMC चुनाव कब होने की उम्मीद है?

    राज्य चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। 29 नगर निगमों के चुनाव एक साथ होने की संभावना है।

    4. शिवसेना (उद्धव गुट) का दावा क्या है?

    ठाकरे गुट का दावा है कि वे फिर से मुंबई में महापौर बनाएंगे।

  • BMC ने मतदाता सूचियों की 10,668 आपत्तियों पर फैसला दिया

    BMC ने मतदाता सूचियों की 10,668 आपत्तियों पर फैसला दिया

    BMC चुनाव 2025 की प्रारूप मतदाता सूची पर दर्ज 11,497 आपत्तियों में से 10,668 पर निर्णय हो चुका है। 829 मामले डुप्लीकेट वोटरों से जुड़े हैं। अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची से पहले कंट्रोल चार्ट तैयार किया जा रहा है।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव 2025 की प्रारूप मतदाता सूची पर कुल 11,497 आपत्तियाँ और सुझाव मिले थे, जिनमें से 10,668 पर निर्णय हो गया है। शेष 829 मामले डुप्लीकेट मतदाताओं के हैं। बीएमसी ने 26 वार्डों के अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी है और अंतिम मतदाता सूची के लिए कंट्रोल चार्ट तैयार किया जा रहा है। जिन प्रभागों में 100 से ज्यादा मतदाता स्थानांतरित दिखे हैं, उनकी Google Map पर सीमाओं के अनुसार फील्ड-वेरिफिकेशन के निर्देश दिए गए हैं।

    BMC चुनाव 2025: मतदाता सूची पर आई आपत्तियों पर तेज़ी से काम

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 2025 के आगामी चुनावों के लिए तैयार की गई प्रारूप मतदाता सूची पर लोगों से मिली आपत्तियों और सुझावों पर तेजी से कार्रवाई की है। बीएमसी की ओर से कुल 11,497 हरकतियाँ और सुझाव मिले थे, जिनमें से 10,668 मामलों पर निर्णय दे दिया गया है। यह जानकारी बीएमसी की अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी ने मीडिया को दी।

    प्रेस वार्ता के दौरान सह आयुक्त (करनिर्धारण व संकलन) विश्वास शंकरवार और सहायक आयुक्त डॉ. गजानन बेल्लाळे भी मौजूद थे।

    BMC-decides-on-10668-objections-to-voter-lists-news

    26 प्रशासनिक विभागों से आई थीं शिकायतें

    बीएमसी के 26 प्रशासनिक विभागों में मतदाता सूची को लेकर लोगों ने बदलाव और सुधार से जुड़ी 11,497 आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं।

    • इनमें से 10,668 का निपटारा कर दिया गया है।
    • शेष 829 मामले डुप्लीकेट मतदाताओं से संबंधित हैं, जिनकी अलग से जांच की जा रही है।

    इसके लिए हर वॉर्ड के सहायक आयुक्तों को “प्राधिकृत अधिकारी” नियुक्त किया गया है।

    अंतिम मतदाता सूची से पहले तैयार हो रहा ‘कंट्रोल चार्ट’

    डॉ. जोशी ने बताया कि अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्णयों के आधार पर अंतिम मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए “कंट्रोल चार्ट” बनाया जा रहा है, जो अंतिम सूची का आधार होगा।

    जहां 100 से ज्यादा मतदाता स्थानांतरित दिखे, वहां फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य

    बीएमसी ने खास तौर पर उन प्रभागों का निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है, जहां
    100 से अधिक मतदाता स्थानांतरित दिख रहे हैं।

    इस प्रक्रिया में—

    • Google Map पर दिखाई गई प्रभाग सीमाएँ
    • ज़मीन पर मौजूद घर, इमारतें, चॉल, वसाहतें
      इनकी भौतिक जांच कराई जाएगी, ताकि कोई गलती न रहे।
      सभी संबंधित उपायुक्तों और सह आयुक्तों को
      फोटो और प्रमाण-पत्र सहित रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।

    डुप्लीकेट मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर जांच

    बीएमसी ने डुप्लीकेट वोटर मामलों के लिए एक मानक प्रक्रिया तय की है।

    • BLO (Booth Level Officer) और वॉर्ड कर्मचारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।
    • मतदाता से “परिशिष्ट-1” फॉर्म भरवाया जाएगा।
    • यदि मतदाता घर पर नहीं मिले, तो उनके घर के दरवाज़े पर नोटिस चिपकाया जाएगा।
    • नोटिस में वॉर्ड कार्यालय से संपर्क करने की अपील होगी।

    बीएमसी ने मतदाताओं से इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने की अपील की है।

    BMC का लक्ष्य: अंतिम मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिविहीन बनाना

    मोटे तौर पर देखें, तो बीएमसी की कोशिश है कि 2025 के चुनाव से पहले मतदाता सूची से—

    • डुप्लीकेट नाम
    • गलत पतों वाले मतदाता
    • स्थानांतरित लोग
    • गलत प्रविष्टियाँ

    इन सभी को हटाकर एक सटीक और साफ मतदाता सूची बनाई जाए।


    FAQ Section

    1. बीएमसी को कुल कितनी आपत्तियाँ मिली थीं?

    मतदाता सूची पर कुल 11,497 आपत्तियाँ और सुझाव मिले थे।

    2. इनमें से कितने मामलों पर फैसला हो चुका है?

    10,668 आपत्तियों का निपटारा कर दिया गया है।

    3. 829 शेष आपत्तियाँ किस बारे में हैं?

    ये सभी मामले डुप्लीकेट मतदाताओं से संबंधित हैं।

    4. डुप्लीकेट वोटरों की जांच कैसे होगी?

    BLO और वॉर्ड कर्मचारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और परिशिष्ट-1 फॉर्म भरवाएँगे। उपलब्ध न होने पर घर पर नोटिस लगाया जाएगा।

    5. बीएमसी गूगल मैप का उपयोग क्यों कर रही है?

    उन प्रभागों में, जहाँ 100 से अधिक मतदाता स्थानांतरित दिखे, वहां Google Map पर सीमाओं की तुलना कर फील्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा।

  • मालवनी में नया हेल्थ सेंटर शुरू, साढ़े 3 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

    मालवनी में नया हेल्थ सेंटर शुरू, साढ़े 3 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

    मालाड पश्चिम के मालवनी में नया नागरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र शुरू। मंगलप्रभात लोढा और अशिष शेलार की मौजूदगी में लोकार्पण। अब 3.5 लाख नागरिकों को नज़दीक इलाज मिलेगा।

    मुंबई: पश्चिम उपनगर में रहने वाले करीब साढ़े तीन लाख लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मालाड मालवनी में बने नए नागरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (Urban Health Training Centre) का उद्घाटन मुंबई उपनगर के सहपालकमंत्री मंगलप्रभात लोढा के हाथों आज किया जाएगा। इस मौके पर महाराष्ट्र के सूचना प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशिष शेलार भी मौजूद रहेंगे।

    यह स्वास्थ्य केंद्र उन लोगों के लिए बड़ा बदलाव साबित होने वाला है, जिन्हें अब तक इलाज के लिए दूर-दराज स्थित बड़े अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था।

    🏥 क्यों खास है यह नागरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र?

    यह सेंटर खासतौर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तैयार किया गया है। इस मेडिकल सेंटर को सेठ गोवर्धनदास सुंदरदास मेडिकल कॉलेज और KEM अस्पताल टीम के डॉक्टर्स, रेजिडेंट्स, कर्मचारियों व मेडिकल स्टूडेंट्स चलाएंगे।

    यहां रोजाना सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक OPD सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    📌 उपलब्ध मेडिकल सुविधाएं

    इस सेंटर में कई अहम मेडिकल विभाग शामिल किए गए हैं, जिनमें—

    • जनरल ओपीडी
    • महिला एवं प्रसूति स्वास्थ्य सेवाएं
    • दंत चिकित्सा (Dental care)
    • त्वचा रोग विभाग
    • एक्स-रे व TB से रिलेटेड उपचार
    • लसीकरण व बच्चों की स्वास्थ्य सेवाएं

    रोजाना यहां 250–300 मरीजों के इलाज की क्षमता है।

    🧑‍⚕ स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव

    इस सेंटर में उपचार के बाद गंभीर मरीजों को आस-पास के बीएमसी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जैसे—

    • भगवती अस्पताल
    • भाभा अस्पताल बांद्रा
    • कूपर अस्पताल विले पार्ले
    • HBT मेडिकल कॉलेज तथा डॉ. R.N. कूपर रुग्णालय

    इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा और छोटे इलाकों के लोगों को घर के पास ही इलाज मिल सकेगा।

    🏢 बिल्डिंग और भविष्य की योजनाएं

    यह एक 5 मंजिला बिल्डिंग है, जिसमें से 3 मंज़िलें सिर्फ मेडिकल टीम और सुविधाओं के लिए रिज़र्व रखी गई हैं।

    जल्द ही यहां:

    • HMIS डिजिटल हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम
    • रिसर्च सेंटर
    • लाइब्रेरी
    • हेल्थ म्यूज़ियम
    • सामुदायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम

    भी शुरू किए जाएंगे।

    इसके अलावा जगह-जगह स्वास्थ्य जागरुकता कार्यक्रम, मेडिकल कैम्प, रैली और NGO के साथ कम्युनिटी हेल्थ प्रोजेक्ट भी चलाए जाएंगे।


    ❓ FAQ Section

    Q1. यह स्वास्थ्य केंद्र किसके लिए बनाया गया है?
    यह सेंटर खासकर मालाड-मालवनी और आसपास के लगभग साढ़े तीन लाख नागरिकों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाया गया है।

    Q2. क्या यहां इलाज मुफ्त होगा?
    हाँ, बीएमसी की अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की तरह यहां भी ज़्यादातर उपचार मुफ्त या कम शुल्क पर उपलब्ध होंगे।

    Q3. इस सेंटर का समय क्या है?
    सेंटर की OPD सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक खुलेगी।

    Q4. क्या यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टर मिलेंगे?
    हाँ, यहां महिला स्वास्थ्य, त्वचा रोग, दंत सेवा और टीबी उपचार जैसे विशेष विभाग उपलब्ध रहेंगे।

  • इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस ठप होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सांसद वर्षा गायकवाड ने एयरपोर्ट पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरकार व एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    मुंबई: पिछले तीन दिनों से देशभर में IndiGo Airlines की फ्लाइट ऑपरेशन में बड़ा बवाल देखने को मिला। इस गड़बड़ी की वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे, जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    न पानी, न सही जानकारी और न स्टाफ की मदद, ऐसा माहौल बना रहा जैसे यात्री “ओलीस” बना दिए गए हों।
    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रा. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने इस स्थिति को सरकार की नाकामी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    🔹 सरकार और सिस्टम की बड़ी नाकामी: गायकवाड

    सांसद वर्षा गायकवाड ने मुंबई एयरपोर्ट का दौरा कर यात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

    “तीन दिन तक देशभर में फ्लाइट सर्विस ठप रही लेकिन सरकार की तरफ से एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों को छोड़ दिया गया जैसे उनकी कोई सुनने वाला नहीं। यह नागरी विमानन मंत्रालय की सीधी नाकामी है।”

    🔹 टिकटों के दाम 5 हजार से 60 हजार तक

    इसी दौरान कई यात्रियों ने शिकायत की कि कुछ एयरलाइंस ने हालात का फायदा उठाते हुए टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी की।

    • जो टिकट पहले ₹5,000 में मिल रहा था
    • वही टिकट ₹50,000 से ₹60,000 तक बेचा गया।

    सांसद गायकवाड ने इसे “यात्रियों की खुली लूट” बताया।

    🔹 यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं

    एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद खराब रही। कई घंटों तक इंतज़ार के बावजूद:

    • कोई जानकारी नहीं
    • पानी नहीं
    • फूड सप्लाई नहीं
    • हेल्प डेस्क नदारद

    यात्रियों का कहना था कि एयरलाइंस स्टाफ गायब था और कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था।

    🔹 इंडिगो और केंद्र सरकार कैसे भरेंगी भरपाई?

    सांसद वर्षा गायकवाड ने सवाल उठाया:

    “जो बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था में फंसे रहे, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नुकसान की भरपाई सरकार और इंडिगो कैसे करेगी?”

    🔹 जांच, एक्शन और सुधार की मांग

    उन्होंने कहा कि यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि ऑपरेशनल फेल्योर है और इसकी:

    • सख्त जांच
    • जिम्मेदारी तय
    • और भविष्य में रोकथाम के लिए सिस्टम सुधार

    जरूरी है।


    FAQ Section


    Q1. इंडिगो फ्लाइट में समस्या क्यों आई?
    ✔ अभी आधिकारिक कारण अस्पष्ट बताया जा रहा है, लेकिन यह बड़ा ऑपरेशनल और मैनेजमेंट फेल्योर माना जा रहा है।


    Q2. क्या यात्रियों को रिफंड या मुआवज़ा मिलेगा?
    ✔ सांसद वर्षा गायकवाड ने इसकी मांग की है, लेकिन अब तक एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं।


    Q3. क्या सरकार जांच करेगी?
    ✔ मांग की गई है, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक इन्वेस्टिगेशन आदेश नहीं दिया गया है।


    Q4. क्या टिकटों की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई?
    ✔ हां, यात्रियों ने बताया कि 5 हजार के टिकट 50–60 हजार में बेचे गए।

  • गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    गोरेगांव कॉलेज में हिजाब विवाद, 3 छात्रों पर FIR दर्ज, कॉलेज बोला — हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं

    मुंबई के गोरेगांव स्थित विवेक कॉलेज में कथित हिजाब प्रतिबंध को लेकर छात्रों और AIMIM कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन। कॉलेज प्रशासन ने जारी किया लिखित स्पष्टीकरण—”हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं”। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर तीन छात्रों पर FIR दर्ज की।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक विद्याालय एंड जूनियर कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया। कुछ छात्राओं और AIMIM मुंबई यूनिट के सदस्यों ने कॉलेज प्रशासन पर हिजाब पहनने पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुए कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर पुलिस ने तीन छात्रों के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में FIR दर्ज की। वहीं कॉलेज प्रबंधन ने लिखित बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं है और पूरा मामला “गलतफहमी” के कारण हुआ।

    🎓 कैसे शुरू हुआ विवाद?

    सूत्रों के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने AIMIM से शिकायत की कि कॉलेज में उन्हें कक्षा में प्रवेश करने से पहले हिजाब उतारने के लिए कहा गया। छात्राओं ने इसे धार्मिक आस्था का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई।

    इसके बाद AIMIM मुंबई अध्यक्ष फ़ारूक मक़बूल शबदी छात्रों के साथ कॉलेज आए और उन्होंने कॉलेज गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला सुर्खियों में आ गया।

    🏫 कॉलेज प्रबंधन का स्पष्टीकरण

    विवाद बढ़ता देख कॉलेज की प्रिंसिपल शीजा मेनन ने लिखित बयान जारी करते हुए कहा:

    “हमारे संस्थान में छात्राओं के हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसा कोई आदेश कॉलेज की तरफ से जारी नहीं किया गया है। शायद कुछ गलतफहमी के कारण यह विवाद खड़ा हुआ, जिसकी आवश्यकता नहीं थी।”

    कॉलेज प्रशासन ने यह भी कहा कि वे विविध समुदायों का सम्मान करते हैं और संस्थान में सभी छात्रों के लिए समान और सुरक्षित माहौल बनाए रखना उनका उद्देश्य है।

    👮 पुलिस की कार्रवाई

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    गोरेगांव पुलिस स्टेशन ने बताया कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए तीन छात्रों के खिलाफ BNSS की धारा 35(3) के तहत FIR दर्ज की गई। हालांकि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।

    बाद में पुलिस स्टेशन में बैठक हुई, जिसमें:

    • प्रबंधन का लिखित स्पष्टीकरण पढ़ा गया
    • AIMIM प्रतिनिधियों और छात्राओं को जानकारी दी गई
    • सभी पक्ष सहमत हुए कि मामला समझौते के साथ शांतिपूर्वक समाप्त किया जाए

    पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में कोई तनाव या सांप्रदायिक असहमति नहीं है

    🧾 राजनीतिक प्रतिक्रिया

    विवाद की जानकारी मिलते ही पूर्व बीजेपी पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उन्हें स्थिति समझाई, जिसके बाद वे वापस लौट गए।

    📍 सोशल मीडिया में बहस

    यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे “धार्मिक आज़ादी का मामला” बताया, जबकि कुछ ने छात्रों द्वारा बिना परमिशन प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए।

    जमीनी हकीकत

    जबकि प्रदर्शन से पहले जिसमें बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोका जाता हुआ वीडियो सामने आया। वीडियो में छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच बहस होती भी दिखाई दी। कुछ छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाया, तो कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर नियम पसंद नहीं है, तो प्रवेश रद्द करा दें।

    1 दिसंबर को एआईएमआईएम की एडवोकेट जाहानारा शेख के साथ कई छात्राएं गोरगांव वेस्ट के टीन डोंगरी स्थित गोरेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद कॉलेज की प्रिंसिपल को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया।

    एडवोकेट जाहानारा शेख के मुताबिक, “हमने नियम वापस लेने की मांग रखी है, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि वह प्रबंधन से बात करने के बाद ही फैसला लेंगी।” इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नही किया गया। उसके बाद ही छात्रों ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।


    FAQs

    Q1: विवाद किस कॉलेज में हुआ?
    ➡ गोरेगांव वेस्ट स्थित विवेक कॉलेज में।

    Q2: FIR क्यों दर्ज की गई?
    ➡ बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सरकारी आदेश की अवहेलना के आरोप में।

    Q3: क्या कॉलेज ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था?
    ➡ कॉलेज ने लिखित में स्पष्ट किया—हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं।

    Q4: क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है?
    ➡ नहीं, सिर्फ नोटिस देकर मामला शांतिपूर्वक सुलझाया गया।

    Q5: प्रदर्शन कौन आयोजित कर रहा था?
    ➡ AIMIM कार्यकर्ताओं और कुछ छात्राओं ने भाग लिया।

  • मालाड मस्ती 2025 में सितारों ने जमाया रंग, सुबह को बना दिया सेलिब्रेशन का त्योहार

    मालाड मस्ती 2025 में सितारों ने जमाया रंग, सुबह को बना दिया सेलिब्रेशन का त्योहार

    मालाड मस्ती 2025 में बॉलीवुड सितारों, लाइव म्यूज़िक, डांस और सोशल मेसेज के साथ हजारों लोगों की भागीदारी। MLA असलम शेख की अगुवाई में इवेंट ने फिर जीता लोगों का दिल।

    मुंबई: मालाड में आयोजित मालाड मस्ती 2025 रविवार सुबह सितारों की मौजूदगी, म्यूज़िक और डांस परफॉर्मेंस के साथ एक रंगीन उत्सव में बदल गया। इस खास मौके पर MLA असलम शेख और आयोजकों ने न सिर्फ मनोरंजन बल्कि समाजसेवा का संदेश भी दिया। इस मौके पर फ़िल्म “Mastii 4” की स्टारकास्ट, रियलिटी स्टार, कलाकार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हुए, जिससे जनता में गजब का उत्साह देखने को मिला।

    ⭐ इवेंट की मुख्य झलकियां

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    🎬 बॉलीवुड सेलेब्स ने लगाया चार चांद

    इस साल मालाड मस्ती में फ़िल्म मस्तानी 4 की टीम—

    ने मंच गर्मा दिया।

    रूही सिंह की ग्लैमरस एंट्री और श्रेया शर्मा के स्टाइलिश लुक ने फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं डांसिंग कॉप अमोल कांबले की परफॉर्मेंस पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं।

    💃 रियलिटी स्टार सना सुल्तान की धमाकेदार मौजूदगी

    सना सुल्तान ने फैंस के साथ डांस किया और लाइव इंटरैक्शन करके दर्शकों का दिल जीत लिया। सुबह के इस इवेंट में ऐसा जोश दिखा जैसे बड़ा कॉन्सर्ट हो रहा हो।

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    🎤 नए होस्टिंग जोड़ी ने बांधा माहौल

    इस बार होस्ट थे:

    दोनों की मजेदार एंकरिंग और दर्शकों से सीधा संवाद पूरे इवेंट की हाइलाइट रही।

    🤝 समाजसेवा भी साथ— किसानों के लिए समर्थन

    मालाड मस्ती ने मनोरंजन के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए हाल ही में बाढ़ से प्रभावित किसानों की सहायता का ऐलान किया।

    पिछले 9 सालों से यह कार्यक्रम सिर्फ मस्ती नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग का संदेश देता रहा है।

    🎯 आयोजन टीम

    • आयोजन: MLA असलम शेख
    • सह-समर्थन: किशन जैन (Gold Medal Company) और योगेश लखानी (Bright Outdoor)
    • इवेंट मैनेजमेंट: महेश राव – Mashraw Events

    🎤 FAQ सेक्शन


    Q. मालाड मस्ती कहां आयोजित की जाती है?

    👉 यह कार्यक्रम मुंबई के मालाड क्षेत्र में हर साल आयोजित किया जाता है।

    Q. इस साल मालाड मस्ती की मुख्य खासियत क्या रही?

    👉 बॉलीवुड सितारों की परफॉर्मेंस, लाइव संगीत और किसानों की मदद की घोषणा ने इसे खास बनाया।

    Q. क्या यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन के लिए होता है?

    👉 नहीं, यह सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक एकता को भी प्रोत्साहित करता है।

  • शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    मुंबई के दहिसर पूर्व स्थित शुक्ला कंपाउंड में 400 परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। विकासक द्वारा 1962 से पहले के दस्तावेज़ मांगने पर दिंडोशी के MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस नियम में बदलाव की मांग की है। मामला अब शीतकालीन अधिवेशन में उठेगा।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: दहिसर पूर्व के रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले करीब 400 परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है, क्योंकि प्रोजेक्ट डेवलपर ने इन सभी परिवारों से घर पुनर्विकास पात्रता के लिए 1962 से पहले के दस्तावेज़ देने की शर्त रखी है।

    इन दस्तावेज़ों को उपलब्ध न करा पाने के कारण सैकड़ों परिवार बेघर होने की चिंता में हैं। अब यह मामला राजनीतिक रूप से बड़ा रूप ले चुका है।

    🏘 45 साल से रहने वाले परिवारों पर बेघर होने का खतरा

    शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले अधिकतर परिवार पिछले चार से पांच दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवार छोटे उद्योग और मजदूरी कर अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं।

    इन निवासियों का कहना है कि उन्होंने बिजली बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पानी के बिल सहित कई सरकारी दस्तावेज़ जमा किए हैं, लेकिन डेवलपर केवल 1962 के पहले की ओनरशिप प्रूफ स्वीकार कर रहा है — जो लगभग असंभव है।

    🏗 डेवलपर पर स्वार्थी प्रोजेक्ट प्लानिंग का आरोप

    मौजूदा ज़मीन का असली मालिक गोविंद पाटिल ने यह प्लॉट साल 1920 में इकबाल मिर्ची से जुड़े नामों और शेलाजी इंफ्रास्ट्रक्चर के अशोक जैन को बेचा था।

    अब विकासक अशोक जैन इस जमीन पर हाई-राइज़ हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    रहवासियों का आरोप है कि—

    “डेवलपर खुद का फायदा ज्यादा देख रहा है और पुराना डेट ऑफ लाइन दिखाकर लोगों को बाहर करने की कोशिश कर रहा है।”

    🧾 MLA सुनील प्रभु पैरवी में, मुख्यमंत्री को पत्र

    दिंडोशी विधानसभा के शिवसेना नेता एवं MLA सुनील प्रभु ने इस मामले में दखल देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।

    प्रभु ने पत्र में लिखा कि—

    “मुंबई और महाराष्ट्र में किसी भी हाउसिंग स्कीम में पात्रता के लिए अधिकतर जगह 2012 से पहले का डॉक्यूमेंट पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में शुक्ला कंपाउंड में 1962 की शर्त अन्यायपूर्ण है और इसे बदला जाना चाहिए।”

    उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे इस मुद्दे को आगामी नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधान सभा अधिवेशन में ‘ध्यान आकर्षण’ के रूप में उठाएँगे।

    🔍 इस बदलाव से अन्य प्रोजेक्ट भी होंगे प्रभावित

    यदि सरकार दस्तावेज़ की पात्रता 1962 से बदलकर 2012 या वर्तमान नियम के अनुसार करती है, तो उसका सीधा लाभ—

    ✔ मुंबई
    ✔ ठाणे
    ✔ पालघर
    ✔ नवी मुंबई

    में हो रहे हज़ारों पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को मिल सकता है।


    FAQ सेक्शन:

    प्रश्नउत्तर
    क्या नियम अभी बदले गए हैं?नहीं, नियम बदलने की मांग की गई है और मामला विधानसभा में उठेगा।
    क्या सभी रहवासियों को घर मिलेगा?फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। नियम बदलने पर ही रास्ता स्पष्ट होगा।
    क्या यह मामला कानूनी रूप से कोर्ट में जा सकता है?हाँ, यदि समाधान न मिला तो रहवासी कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।