Category: National News

  • मालाड में विकास कार्य बना सिरदर्द, लोगों की बढ़ी मुश्किलें

    मालाड में विकास कार्य बना सिरदर्द, लोगों की बढ़ी मुश्किलें

    मालाड में चल रहे बीएमसी के विकास प्रोजेक्ट से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पुल, सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों से ट्रैफिक जाम और धूल-मिट्टी से नागरिकों का जीना मुश्किल हुआ। करोड़ों के प्रोजेक्ट के बावजूद सुविधाओं की जगह बढ़ी दिक्कतें।

    मुंबई: मालाड इलाके में चल रही कई विकास परियोजनाएं अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी हैं। सड़कों की खुदाई, अधूरे पुल और धूल-मिट्टी के बीच नागरिकों का रोजमर्रा का जीवन कठिन हो गया है। बीएमसी ने यातायात सुधारने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 2,200 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए हैं, लेकिन काम की धीमी रफ्तार और खराब प्लानिंग से जनता नाराज़ है।

    🏗️ एक साथ कई प्रोजेक्ट, जनता बेहाल

    मालाड पश्चिम में इस समय कई बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं — जिनमें नए पुलों का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, और पुराने ब्रिज का पुनर्निर्माण शामिल है।
    बीएमसी का दावा है कि ये काम मुंबई के पश्चिमी उपनगरों की ट्रैफिक समस्या को कम करेंगे, लेकिन फिलहाल इसका उल्टा असर दिख रहा है। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम, रास्तों की खुदाई और डाइवर्जन के चलते यात्रियों को रोज घंटों की देरी झेलनी पड़ रही है।

    🌉 लगून रोड पुल: बड़ा सपना, बड़ी मुसीबत

    मालाड-पश्चिम में इंफिनिटी मॉल से अंधेरी तक के मालवनी कच्चा रोड़ यानी लगून रोड को जोड़ने के लिए एक केबल-स्टेयड वाहन पुल बनाया जा रहा है।
    इसकी लागत लगभग ₹1,700 करोड़ और लंबाई 380 मीटर है।
    बीएमसी का कहना है कि इससे लिंक रोड और एस.वी. रोड का ट्रैफिक कम होगा, मगर स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के काम ने रोजमर्रा की ज़िंदगी को मुश्किल बना दिया है।

    🏞️ रामचंद्र लेन नाले पर एलिवेटेड रोड का काम अटका

    रामचंद्र लेन नाले के ऊपर बन रही एलिवेटेड रोड जो रायन इंटरनेशनल स्कूल से एमडीपी रोड को जोड़ेगी, फिलहाल अधर में लटकी है।
    करीब ₹400 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट से एवरशाइन नगर और अथर्व कॉलेज के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद थी, मगर लोगों का कहना है कि “काम चल रहा है, लेकिन खत्म होने का कोई टाइम नहीं दिखता।”

    🛣️ तटीय सड़क और चौड़ीकरण कार्य से बढ़ी दिक्कतें

    तटीय सड़क (Coastal Road) से जोड़ने के लिए मार्वे रोड पर नया लिंक बनाया जा रहा है।
    साथ ही मालाड-मार्वे रोड को महाकाली जंक्शन से चारकोप नाका तक चौड़ा किया जा रहा है, लेकिन महीनों से ये काम अधूरा पड़ा है।
    पुराने पुलों को गिराकर नए बनाने की योजना ने भी स्थानीय नागरिकों की नींद उड़ा दी है।

    🏚️ दुकानदारों का विरोध और नागरिकों की नाराज़गी

    नवंबर 2022 में एसवी रोड पर पुल बंद करने की मनपा की योजना के खिलाफ दुकानदारों ने विरोध किया था।
    उनका कहना था कि अचानक नोटिस देकर कुछ ही दिनों में दुकानें खाली करने को कहा गया, जिससे कई व्यापारियों का रोज़गार खतरे में पड़ गया।
    स्थानीय निवासी सुखदेव सिंह ने कहा —

    “हर बार मनपा विकास का नाम लेकर सड़कें खोद देती है, लेकिन काम कभी टाइम पर पूरा नहीं होता। अच्छी-भली सड़कों को तोड़कर लोगों को परेशान किया जा रहा है।”

    ⚙️ परियोजना 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य

    बीएमसी ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन शहर के अनुभव बताते हैं कि शायद ही कोई प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ हो।
    लोगों का कहना है कि ‘टेंडर तो पास हो जाते हैं, लेकिन काम जनता को राहत नहीं देते।’


    FAQ सेक्शन

    Q1. मालाड में कौन-कौन से बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं?
    👉 मालवनी लगून रोड पुल, रामचंद्र लेन नाले पर एलिवेटेड रोड, तटीय सड़क लिंक और मालाड-मार्वे रोड चौड़ीकरण जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
    Q2. बीएमसी ने इन प्रोजेक्ट्स पर कितना खर्च तय किया है?
    👉 लगभग ₹2,200 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है।
    Q3. क्या इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक समस्या कम होगी?
    👉 फिलहाल उल्टा असर दिख रहा है। निर्माण कार्यों से सड़कों पर भारी ट्रैफिक और नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरे होंगे?
    👉 बीएमसी का लक्ष्य 2028 तक पूरा करने का है, लेकिन लोगों को देरी की चिंता है।

  • जोगेश्वरी की 14 मंजिला इमारत में आग, बड़ा हादसा टला — कोई हताहत नहीं

    जोगेश्वरी की 14 मंजिला इमारत में आग, बड़ा हादसा टला — कोई हताहत नहीं

    मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में स्थित 14 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग ‘JNS बिज़नेस सेंटर’ में गुरुवार सुबह आग लग गई। दमकल विभाग की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    मुंबई: जोगेश्वरी (पश्चिम) में गुरुवार सुबह एक 14 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। आग की लपटें 9वें से 12वें माले तक फैल गईं। मौके पर फायर ब्रिगेड की 20 से ज्यादा गाड़ियां पहुंचीं और कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया।
    सौभाग्य से इस हादसे में किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है।

    🏢 JNS बिज़नेस सेंटर में लगी आग

    यह घटना जोगेश्वरी पश्चिम के एस.वी. रोड, बेहरामपाड़ा स्थित JNS बिज़नेस सेंटर की है, जो गांधी स्कूल के पास स्थित है।
    मुंबई फायर ब्रिगेड (MFB) के अनुसार आग की सूचना सुबह 10:51 बजे मिली थी।
    लपटें बिल्डिंग के 9वें से 12वें माले तक पहुंच चुकी थीं और कांच की दीवारों से आग साफ़ दिखाई दे रही थी।

    🚨 फायर ब्रिगेड ने बढ़ाया अलर्ट लेवल

    दमकल विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए 10:46 बजे लेवल-1 अलर्ट से शुरू किया और कुछ ही मिनटों में इसे लेवल-3 तक बढ़ा दिया।
    मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) के नेतृत्व में कई फायर स्टेशन अधिकारी, डिप्टी सीएफओ, असिस्टेंट डीएफओ और दर्जनों दमकलकर्मी राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे।

    घटना स्थल पर पहुंचे फायर इंजन, टैंकर, क्विक रेस्क्यू व्हीकल, जेट टेंडर, एरियल हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और 108 एम्बुलेंस सेवाएं तैनात की गईं।
    सभी फायर कर्मियों ने ब्रिदिंग अपरेटस (BA सेट) के साथ अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

    🧯 कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू

    कई घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद आग पर काबू पा लिया गया।
    फायर डिपार्टमेंट के अनुसार किसी के घायल या झुलसने की जानकारी नहीं मिली है।
    हालांकि, इमारत के ऊपरी हिस्से में कई दफ्तरों को नुकसान पहुंचा है।
    आग लगने के कारणों की जांच बीएमसी और फायर ब्रिगेड की टीम कर रही है।

    🔥 मालाड और बोरिवली में भी लगी आग

    बुधवार सुबह मालाड पश्चिम के लिंक रोड स्थित ‘भूमि क्लासिक’ नामक सात मंजिला रिहायशी इमारत में भी आग लगी थी।
    यह घटना सुबह 5:06 बजे हुई, जिसमें छठे और सातवें माले के फ्लैट्स जलकर खाक हो गए।
    इस हादसे में 24 वर्षीय निवासी शुभम अघोटारिया और एक दमकलकर्मी को मामूली चोटें आईं।
    दोनों को अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

    उसी दिन बोरिवली (गोराई इलाके) में भी दोपहर को आग लगने की घटना सामने आई, लेकिन इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ।

    🧩 शहर में बढ़ती आग की घटनाएं

    पिछले कुछ महीनों में मुंबई में इमारतों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं।
    विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वायरिंग सिस्टम, एयर कंडीशन यूनिट्स में शॉर्ट सर्किट और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी इसका मुख्य कारण है।
    बीएमसी ने अब सभी कमर्शियल बिल्डिंग्स में फायर ऑडिट कराने का आदेश दिया है।

    🧱 नागरिकों से अपील

    फायर ब्रिगेड ने अपील की है कि सभी बिल्डिंग्स में नियमित रूप से फायर सिस्टम की जांच की जाए और आपात स्थिति में सही एग्जिट रूट्स की जानकारी सभी को होनी चाहिए।


    FAQ सेक्शन

    Q1. जोगेश्वरी की इमारत में कब और कहां आग लगी?
    👉 गुरुवार सुबह 10:51 बजे जोगेश्वरी पश्चिम के JNS बिज़नेस सेंटर में आग लगी।
    Q2. क्या इस हादसे में कोई घायल हुआ है?
    👉 नहीं, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
    Q3. फायर ब्रिगेड ने कितनी देर में आग पर काबू पाया?
    👉 कई घंटों की मेहनत के बाद दमकलकर्मियों ने आग पर नियंत्रण पा लिया।
    Q4. क्या अन्य जगहों पर भी आग लगी थी?
    👉 हां, मालाड पश्चिम और बोरिवली के गोराई इलाके में भी बुधवार को आग लगी थी।
    Q5. आग लगने का कारण क्या बताया जा रहा है?
    👉 प्रारंभिक अनुमान के अनुसार शॉर्ट सर्किट की आशंका है, जांच जारी है।

  • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निरीक्षण पर पहुंचे MLA सुनील प्रभु, बीएमसी अधिकारियों को दी कई अहम निर्देश

    शिवसेना नेता और पूर्व महापौर सुनील प्रभु ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण कार्य का बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधाओं और भविष्य में होने वाली ट्रैफिक समस्याओं पर तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर चल रहे विकास कार्यों का शिवसेना नेता और विधायक सुनील प्रभु ने सोमवार को बीएमसी अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने नागरिकों को हो रही समस्याओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों को कई सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

    🏗️ स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

    विधायक सुनील प्रभु ने बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के निर्माण से श्रमसाफल्य सोसायटी, श्रीकृष्ण नगर, जयभीम नगर और दिंडोशी महानगरपालिका वसाहत जैसे इलाकों के नागरिकों को असुविधा हो रही है।
    उन्होंने बीएमसी के रस्ता विभाग, पूल विभाग और परिरक्षण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि

    • श्रीकृष्ण नगर के नागरिकों के लिए संतोष नगर बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए अंडरपास (भुयारी मार्ग) बनाया जाए।
    • पर्जन्य जल वाहिनी (ड्रेनेज लाइन) को सड़क के एक ओर स्थानांतरित कर नया निर्माण किया जाए।
    • गणेश मंदिर-इंदिरा विकास केंद्र मार्ग पर नागरिकों और वाहनों को सुगम आवागमन की सुविधा दी जाए।
    • बीएसटी बसों के लिए टर्मिनल पॉइंट तैयार किया जाए ताकि यातायात में बाधा न आए।

    🚧 आदिवासी पाड़ा के लोगों की सुविधा के लिए भी निर्देश

    निरीक्षण के दौरान सुनील प्रभु ने यह भी बताया कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के टनल निर्माण कार्य के चलते बालासाहेब फालके चित्रनगरी के हबाले आदिवासी पाड़ा में लोगों का मुख्य मार्ग बंद हो गया था, जिससे उन्हें आवाजाही में भारी दिक्कतें हो रही थीं।
    अब बीएमसी ने इस “मिसिंग लिंक रोड” का काम शुरू कर दिया है, जिसका शुभारंभ स्वयं सुनील प्रभु ने किया।

    🚦 भविष्य की ट्रैफिक समस्या पर भी होगी बैठक

    दादासाहेब फालके चित्रनगरी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास उड्डाणपुल का एग्जिट पॉइंट बनने वाला है।
    विधायक ने बताया कि इस क्षेत्र में भविष्य में वाहन जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
    इसलिए उन्होंने बीएमसी के पूल विभाग, रस्ते विभाग और परिरक्षण विभाग को नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि पहले से योजना बनाई जा सके।

    👥 अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

    निरीक्षण के दौरान विधायक सुनील प्रभु के साथ
    ** पूर्व उपमहापौर सुहास वाडकर**,
    *पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे*,
    ** उद्धव ठाकरे गुट के शाखाप्रमुख संपत मोरे**,
    तथा बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    💬 सुनील प्रभु ने क्या कहा

    “हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़क और पुल नहीं बनाना है, बल्कि आसपास के नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बीएमसी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी हों और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रहे।”
    सुनील प्रभु, विधायक (शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट)


    FAQ सेक्शन:

    Q1. गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड का निरीक्षण किसने किया?
    विधायक और शिवसेना नेता सुनील प्रभु ने बीएमसी अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।
    Q2. निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना और निर्माण कार्य में आवश्यक बदलाव के निर्देश देना।
    Q3. कौन-कौन से इलाके प्रभावित हैं?
    श्रीकृष्ण नगर, दिंडोशी, जयभीम नगर और हबाले आदिवासी पाड़ा जैसे इलाके इस परियोजना से प्रभावित हैं।
    Q4. ट्रैफिक को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    फालके चित्रनगरी के पास संभावित ट्रैफिक जाम को रोकने के लिए नियोजन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
    Q5. इस मौके पर और कौन मौजूद थे?
    उपमहापौर सुहास वाडकर, पूर्व नगरसेवक तुलसीराम शिंदे और बीएमसी अधिकारी।

  • Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड कर दिए गए हैं, जबकि पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू की गई है। मामला अब जांच के घेरे में है।

    मुंबई: जोगेश्वरी पश्चिम के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों के कथित “अशोभनीय व्यवहार” के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि पांच अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। यह कार्रवाई 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद की गई है।

    ⚖️ ओशिवारा थाने में तनाव: क्या हुआ था उस दिन

    4 नवंबर की शाम को बजरंग दल के जिला अधिकारी शंकर उर्फ़ वृशभ जाधव करीब 10–15 कार्यकर्ताओं के साथ ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।
    उन्होंने आरोप लगाया कि जोगेश्वरी (पश्चिम) के गुप्ता किराना स्टोर के पास एक परिवार पर दूसरे परिवार ने हमला किया है।
    उसी वक्त एक नाबालिग लड़की और उसकी मां भी छेड़छाड़ की शिकायत लेकर थाने पहुंचीं।

    पुलिस अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन माहौल अचानक गरम हो गया।
    इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों पर “गलत व्यवहार” और “कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने” के आरोप लगे।

    🚨 दो पुलिस अधिकारी सस्पेंड, पांच पर जांच आदेश

    घटना के बाद डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम ने इसकी पुष्टि की।
    उन्होंने बताया कि दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, हालांकि उनके नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
    साथ ही, पांच अन्य पुलिसकर्मियों —
    एपीआई रमेश केंगर, एपीआई गणेश गायके, पीएसआई बाबू तोत्रे, पीएसआई दीपक बारवे और कॉन्स्टेबल अज़ीम ज़री — पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

    🕵️ सात दिन में स्पष्टीकरण रिपोर्ट देनी होगी

    सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण रिपोर्ट (Self-Explanatory Report) जमा करें।
    अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
    आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ अशोभनीय व्यवहार किया और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई।

    📢 प्रशासन सख्त, जांच जारी

    घटना के बाद से ही ओशिवारा पुलिस स्टेशन में माहौल तनावपूर्ण है।
    वरिष्ठ अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं।
    सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल व्यवहारिक नहीं बल्कि प्रक्रियात्मक लापरवाही पर भी केंद्रित है — यानी क्या पुलिस ने शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने में देरी की थी या नहीं।


    FAQ सेक्शन:

    Q1. ओशिवारा पुलिस स्टेशन में क्या हुआ था?
    👉 4 नवंबर की शाम बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस पर अशोभनीय व्यवहार का आरोप लगा।
    Q2. कितने पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं?
    👉 दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया है और पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू है।
    Q3. जांच की निगरानी कौन कर रहा है?
    👉 डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
    Q4. क्या पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं?
    👉 हां, पांच पुलिसकर्मियों के नाम जांच आदेश में दर्ज हैं — रमेश केंगर, गणेश गायके, बाबू तोत्रे, दीपक बारवे और अज़ीम ज़री।

  • दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    दहिसर टोल हटाओ या मैं खुद तोड़ दूंगा – परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सख्त चेतावनी

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दहिसर टोल प्लाजा का निरीक्षण कर अधिकारियों को 13 नवंबर तक टोल हटाने की अंतिम चेतावनी दी। कहा – “समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल उखाड़ दूंगा।”

    मुंबई: दहिसर टोल प्लाजा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
    परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने शनिवार को टोल प्लाजा का निरीक्षण करते हुए 13 नवंबर तक इसे हटाने की डेडलाइन दी।
    उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी —

    “अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं खुद जाकर टोल प्लाजा उखाड़ दूंगा।”

    इस बीच भाजपा ने टोल को हाईवे पर शिफ्ट करने का विरोध किया है, जिससे शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    🔹 टोल प्लाजा हटाने पर विवाद क्यों?

    दहिसर टोल प्लाजा पर लगातार ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।
    इसी वजह से टोल को स्थानांतरित करने की मांग उठ रही थी।
    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अधिकारियों को यह टोल हटाने और इसे वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज पार शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।

    लेकिन इस प्रस्ताव का भाजपा और मंत्री गणेश नाईक ने खुलकर विरोध किया।
    इससे सरकार के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं।

    🔹 निरीक्षण में भड़के सरनाईक

    शनिवार सुबह प्रताप सरनाईक दहिसर टोल प्लाजा पहुंचे।
    निरीक्षण के दौरान मुंबई पुलिस, MSRDC, मनपा, टोल कंपनी और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
    लेकिन सरनाईक ने देखा कि एक तरफ से फ्रेम हटाने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ।
    जब अधिकारियों ने और वक्त मांगा, तो मंत्री नाराज़ हो गए और कहा —

    “13 नवंबर को मैं फिर आऊंगा। अगर तब भी यही हाल रहा, तो खुद टोल बूथ तोड़ दूंगा।”

    🔹 निरीक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन

    सरनाईक जब टोल को वर्सोवा क्रीक ब्रिज के पार स्थानांतरित करने का निरीक्षण करने पहुंचे,
    तो कांग्रेस नेता विजय पाटिल और उनके समर्थकों ने विरोध जताया।
    विरोधियों ने कहा —

    “मुंबई का टोल प्लाजा वसई क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता। यहां पहले से सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक भी है। यह स्वीकार्य नहीं होगा।”

    🔹 सड़क साफ करने और डिवाइडर हटाने के आदेश

    निरीक्षण के बाद मंत्री सरनाईक ने मुंबई की ओर आने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर हटाने और
    वाहनों के लिए रास्ता खोलने का आदेश दिया।
    उन्होंने कहा कि

    • क्रेन, बेंच और अन्य बाधाएं हटाई जाएं।
    • अनावश्यक होर्डिंग, लोहे के खंभे और अतिरिक्त बूथ तोड़े जाएं।
    • केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए जरूरी बूथ ही रहें।

    साथ ही, मीरा-भायंदर की ओर आने वाले टोल बूथ को भी शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।


    FAQ सेक्शन

    1. दहिसर टोल हटाने की आखिरी तारीख क्या है?
    → परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 13 नवंबर तक की डेडलाइन दी है।
    2. उन्होंने क्या चेतावनी दी?
    → सरनाईक ने कहा, “अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं खुद टोल तोड़ दूंगा।”
    3. टोल को कहां शिफ्ट करने का प्रस्ताव है?
    → वर्सोवा हाईवे या खाड़ी ब्रिज के पार स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
    4. किसने विरोध किया है?
    → भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग का विरोध किया है।

  • मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड के आर्मी कैंप में चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक बंदूक, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद हुई है। एक नाबालिग भी शामिल है।

    मुंबई: मालाड पूर्व इलाके में स्थित सीओडी (Central Ordnance Depot) आर्मी कैंप में हुई चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है।
    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस ने इनके पास से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद किए हैं। हालांकि नगदी भी चोरी हुआ था लेकिन पुलिस को गिरफ्तारी में नगद बरामद नहीं हुए हैं।

    🔹 कैसे हुई थी चोरी

    यह वारदात 1 नवंबर की दोपहर की है, जब मालाड पूर्व के आर्मी कैंप में स्थित एक बंद क्वार्टर की कुंडी तोड़कर चोरी की गई।
    कमरा कुछ समय से बंद था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने अंदर घुसकर गहने, नकद और हथियार उड़ा लिए।
    घटना सामने आने के बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

    🔹 पुलिस ने ऐसे पकड़ा गिरोह

    मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस के नेतृत्व में जांच शुरू की गई।
    पुलिस टीम ने घटनास्थल की जांच, CCTV कैमरों की पड़ताल, और तकनीकी विश्लेषण (technical analysis) की मदद से संदिग्धों की पहचान की।
    मुखबिरों की जानकारी के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    🔹 बरामदगी और आगे की जांच

    पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस और लगभग 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद हुए हैं।
    दोनों वयस्क आरोपियों को दिंडोशी पुलिस के हवाले किया गया है, जबकि नाबालिग को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया है।
    फिलहाल दिंडोशी पुलिस आगे की जांच कर रही है कि क्या ये गिरोह किसी और चोरी में भी शामिल था।

    🔹 वरिष्ठ अधिकारी का बयान

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस ने बताया —

    “यह मामला संवेदनशील था क्योंकि चोरी आर्मी कैंप क्षेत्र में हुई थी। हमारी टीम ने तेजी और प्रोफेशनल अंदाज़ में काम करते हुए आरोपी पकड़ लिए।”

    🔹 कानूनी कार्रवाई

    इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने गुनाह रजिस्टर क्रमांक 699/2025 के तहत
    भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(अ) और 331(3) के तहत अपराध दर्ज किया है।


    FAQ सेक्शन

    1. चोरी कब और कहां हुई थी?
    → चोरी 1 नवंबर को मालाड पूर्व के सीओडी आर्मी कैंप के बंद कमरे में हुई थी।
    2. पुलिस ने क्या बरामद किया?
    → पुलिस ने एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद की है।
    3. कितने आरोपी पकड़े गए हैं?
    → तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
    4. आगे की जांच कौन कर रहा है?
    → आगे की जांच दिंडोशी पुलिस कर रही है।

  • मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों ने मचाई तबाही: तीन कारों की टक्कर, एयरबैग खुले तो बचीं जान

    मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों ने मचाई तबाही: तीन कारों की टक्कर, एयरबैग खुले तो बचीं जान

    मुंबई-गोवा हाईवे पर इंदापुर के पास गड्ढों की वजह से तीन कारों की आपसी टक्कर हुई। हादसे में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं, मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और हिंगोली में भी अलग-अलग हादसों ने सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।

    मुंबई: गड्ढों के कारण मुंबई-गोवा हाईवे पर तीन कारें आपस में टकरा गईं। हादसा इंदापुर शहर के पास हुआ, जहां अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से आ रही दो गाड़ियों ने सामने की कार को जोरदार टक्कर मार दी। एयरबैग खुलने से सभी यात्री बाल-बाल बच गए। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, हालांकि वाहनों को भारी नुकसान हुआ।

    🚗 इंदापुर के पास गड्ढों ने मचाया हड़कंप

    मुंबई-गोवा हाईवे पर इंदापुर के पास काशेने गांव के नज़दीक रविवार शाम यह भीषण हादसा हुआ।
    कोंकण से मुंबई की ओर आ रही एक कार चालक ने सड़क पर पड़े गहरे गड्ढे देखकर अचानक ब्रेक लगा दिए।
    पीछे से तेज रफ्तार में आ रही दो अन्य गाड़ियां समय पर ब्रेक नहीं लगा सकीं और जोरदार टक्कर हो गई।

    तीनों वाहनों के एयरबैग खुल गए, जिससे यात्रियों की जान बच गई। हादसे के बाद लोगों ने संबंधित विभाग पर नाराज़गी जताई और कहा कि अगर गड्ढे नहीं भरे गए तो वे “कार्यालय तोड़फोड़” जैसे आंदोलन करेंगे।

    🛣️ वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी हादसा, एक की मौत

    इसी बीच, मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी एक दर्दनाक हादसा हुआ।
    रात करीब 1:30 बजे मलाड के पास एक तेज़ रफ़्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी
    इस हादसे में बाइक सवार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है।
    घायल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उसका इलाज जारी है।

    हादसे के बाद बोरीवली से अंधेरी की ओर जाने वाला मार्ग कुछ समय के लिए जाम हो गया।
    पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की है।
    रात में भारी वाहनों की तेज़ रफ़्तार एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

    🔥 हिंगोली में कंटेनर में आग, 40 फ्रिज जलकर खाक

    हिंगोली जिले के कलमनुरी-नांदेड़ हाईवे पर दातिपति गांव के पास एक कंटेनर में अचानक आग लग गई।
    दिल्ली से चेन्नई की ओर जा रहे इस कंटेनर में 40 रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) लदे हुए थे।
    ड्राइवर ने चलते वाहन से धुआँ उठता देखा और समझदारी दिखाते हुए तुरंत ट्रक से कूद गया।

    कुछ ही मिनटों में कंटेनर पूरी तरह आग की लपटों में घिर गया और सभी रेफ्रिजरेटर जलकर राख हो गए।
    आग लगने के कारणों की जांच जारी है, लेकिन प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट का मामला हो सकता है।

    🚨 सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

    तीनों हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, भारी वाहनों की निगरानी और हाईवे रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    खासतौर पर मुंबई-गोवा हाईवे पर गड्ढों की हालत को लेकर यात्रियों में भारी नाराज़गी है।
    स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर मरम्मत का काम जल्द नहीं हुआ, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।


    FAQ सेक्शन

    Q1: मुंबई-गोवा हाईवे पर हादसा कैसे हुआ?
    ➡️ एक कार चालक ने गड्ढे देखकर अचानक ब्रेक लगाया, जिससे पीछे से आ रही दो गाड़ियां टकरा गईं।
    Q2: क्या हादसे में कोई घायल हुआ?
    ➡️ एयरबैग खुलने से सभी यात्री सुरक्षित रहे, केवल गाड़ियों को भारी नुकसान हुआ।
    Q3: क्या पुलिस ने किसी पर कार्रवाई की?
    ➡️ फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सड़क की मरम्मत के लिए विभाग को सूचित किया गया है।
    Q4: वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर हुई मौत का कारण क्या था?
    ➡️ एक तेज़ रफ़्तार डंपर ने बाइक को टक्कर मारी, जिससे एक व्यक्ति की मौके पर मौत हो गई।
    Q5: हिंगोली में कंटेनर आग में कितना नुकसान हुआ?
    ➡️ करीब 40 रेफ्रिजरेटर और पूरा कंटेनर जलकर राख हो गया, ड्राइवर सुरक्षित बच गया।

  • HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    HIV पॉज़िटिव होने पर नहीं की सर्जरी: मुंबई के शताब्दी अस्पताल पर भेदभाव का आरोप

    मुंबई के कांदिवली स्थित BMC के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को अपेंडिक्स की सर्जरी से मना कर दिया गया। मरीज को दो बार रेफर किया गया और बाद में नायर अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। जानिए क्या कहती है सरकार और कानून।

    मुंबई: कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में HIV पॉज़िटिव मरीज को सर्जरी से इनकार किए जाने का मामला सामने आया है।
    37 वर्षीय यह व्यक्ति, जो मलवणी इलाके का रहने वाला है, गंभीर पेट दर्द और अपेंडिक्स की शिकायत के चलते 31 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था।
    अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में 7.5 mm का अपेंडिक्स और किडनी स्टोन की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने शुरू में आपातकालीन अपेंडिक्स सर्जरी की तैयारी की, लेकिन HIV रिपोर्ट आने के बाद सर्जरी रोक दी गई।

    मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर कुपर अस्पताल रेफर कर दिया गया — और रेफरल नोट में यह स्पष्ट लिखा गया कि वजह मरीज का HIV पॉज़िटिव होना है।

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    🔹 एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक — मरीज का दर्द बढ़ा

    कुपर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने रेफरल पर सवाल उठाए और मरीज को वापस लौटा दिया।
    इसके बाद शताब्दी अस्पताल ने फिर से मरीज को नायर अस्पताल रेफर किया, जहाँ अब उसका इलाज चल रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल जूनियर डॉक्टरों की गलती नहीं थी — क्योंकि मरीज को भर्ती करने और डिस्चार्ज करने दोनों में सीनियर डॉक्टरों की जानकारी शामिल थी।
    वर्तमान में मरीज नायर अस्पताल में ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।

    🔹 अस्पताल की सफाई में फंसी जान? शताब्दी अस्पताल ने दी सफाई

    शताब्दी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने भेदभाव के आरोपों से इनकार किया।
    उन्होंने बताया कि मरीज शुक्रवार को आया था, जबकि शनिवार को ऑपरेशन थिएटर (OT) की मासिक डीप क्लीनिंग निर्धारित थी।

    उनके अनुसार,

    “शनिवार को वार्ड के मरीजों की सर्जरी तय थी। HIV पॉज़िटिव मरीज की सर्जरी करने के बाद OT की पूरी स्टरलाइज़ेशन प्रक्रिया करनी होती है, जिससे बाकी 5 सर्जरी रद्द करनी पड़तीं। इसलिए हमने मरीज को नायर अस्पताल भेजा।”

    हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV पॉज़िटिव मरीज को इलाज से इनकार करना कानूनन अपराध है, और अस्पताल को यूनिवर्सल प्रिकॉशन के तहत इलाज करना चाहिए था।

    🔹 कानून क्या कहता है — HIV Act, 2017

    HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी HIV स्थिति के कारण इलाज से वंचित करना गैरकानूनी है।
    यह कानून मरीज की गोपनीयता की रक्षा करता है और

    • स्वास्थ्य सेवा,
    • रोजगार,
    • शिक्षा,
    • और आवास में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाता है।

    सभी अस्पतालों को ‘यूनिवर्सल प्रिकॉशन’ (universal precautions) का पालन करना अनिवार्य है, ताकि HIV-संक्रमित मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह ही इलाज मिल सके।

    🔹 प्रशासनिक और नैतिक सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने BMC के अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    • क्या OT क्लीनिंग का बहाना वास्तव में देरी का कारण था या भेदभाव का मामला?
    • क्या BMC के अस्पताल HIV-पॉज़िटिव मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं?
    • और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी?

    स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की है।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. क्या अस्पताल HIV मरीज का इलाज मना कर सकता है?
    नहीं, HIV और AIDS (Prevention and Control) Act, 2017 के तहत इलाज से इनकार करना अवैध है।
    Q2. मरीज की हालत अभी कैसी है?
    वह फिलहाल नायर अस्पताल में भर्ती है और ब्लड क्लॉट की समस्या से जूझ रहा है।
    Q3. क्या शताब्दी अस्पताल ने भेदभाव स्वीकार किया?
    अस्पताल प्रशासन ने इनकार किया, उन्होंने कहा कि OT की डीप क्लीनिंग के कारण सर्जरी संभव नहीं थी।
    Q4. क्या सरकार इस मामले की जांच करेगी?
    संभावना है कि BMC और राज्य स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की जाएगी, क्योंकि यह कानून का उल्लंघन है।
    Q5. क्या HIV मरीजों को विशेष सुरक्षा दी जाती है?
    हाँ, कानून के तहत मरीज की पहचान गोपनीय रखनी होती है, और सभी डॉक्टरों को यूनिवर्सल सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

  • कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड में प्रभारी अभियंता अभय जगताप पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और विधायक के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने से लोग नाराज़ हैं। सवाल उठ रहा है — क्या कानून से ऊपर हैं कार्यकारी अभियंता एवं डी. ओ. अभय जगताप?

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में स्थित मनपा आर/दक्षिण वार्ड कार्यालय में तैनात (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
    निवासियों का आरोप है कि वार्ड के अंतर्गत आने वाले सागवाडी आदिवासी पाड़ा, समाज मंदिर के पास अवैध निर्माण होने के बावजूद, जगताप कार्रवाई से बच रहे हैं।

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    लोगों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शौचालय और बोरिंग के लिए मांग की थी, जिसको लेकर 10 लाख रुपये सरकारी फंड भी पास किया गया। लेकिन उस पर कुछ लोगों ने तीन अवैध कमरे बना लिए। विधायक और सहाय्यक आयुक्त के आदेश के बाद भी तोड़क कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में नाराज़गी है।

    सार्वजनिक शौचालय के लिए दी गई भूमि पर हुआ कब्ज़ा

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है।
    इसी वजह से गुरुचरण की भूमि पर शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया गया था।
    लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर वहाँ तीन अवैध रूम बना लिए।

    नागरिकों ने इस संबंध में तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे को पत्र लिखा और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
    इसके साथ ही, विधायक योगेश सागर ने भी मनपा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया।

    अभय जगताप पर मिलीभगत के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
    आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ताओं से पैसे लेकर कार्रवाई रोक दी है।
    स्थानीयों के अनुसार, जगताप का रवैया मनमाना है और वे कहते हैं —

    “मेरी मर्जी है, कोई काम करूं या न करूं। मेरा क्या बिगाड़ लेंगे अधिकारी या विधायक?”

    यह बात न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है बल्कि मनपा की साख पर भी सवाल उठाती है।

    सहाय्यक आयुक्त और विधायक के आदेशों की अनदेखी

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    सूत्रों के मुताबिक, विधायक योगेश सागर ने खुद सहाय्यक आयुक्त से फोन पर बात कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
    अभय जगताप का कहना है कि यह मामला अब वर्तमान सहाय्यक अभियंता शिशिर खोखले या पूर्व अभियंता ब्रह्मणकार को देखना चाहिए। जबकि ब्रह्मणकर का तबादला हो चुका है।
    हालांकि जगताप का यह बयान जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मानी जा रही है।

    स्थानीय समाज का विरोध — कार्रवाई की मांग

    इस पूरे मामले में आदिवासी समाज और स्थानीय महिलाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं।
    चंदू बंजारा, गोपाल, अजय, कमल काली, दिनेश और कई अन्य लोगों ने पत्रकार को बुलाकर आदिवासी समाज मंदिर के पास बने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी।
    उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मनपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
    इसी सिलसिले में अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प के मुंबई उपाध्यक्ष राजेश किसन मंजाळ से मुलाकात की तो उन्होंने और भी चौकाने वाला खुलासा किया मनपा आर/ दक्षिण विभाग के इमारत व कारखाना विभाग की ओर से शिकायत क्रमांक RS/022/14- 12 – 2024/333 से संबंधित राजेश पवार के खिलाफ नोटिस क्रमांक RS/DO1RS/022/351-MMC ACT/RS333NO1/16-12-2024 जारी किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने यहां रिश्वतखोरी की हुई है।

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    निवासियों ने मांग की है कि

    “सबसे पहले भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चले।”

    कनिष्ठ अभियंता पर भी सवाल — ‘जगताप से क्यों डरते हैं अधिकारी?’

    सूत्र बताते हैं कि जब से अभय जगताप प्रभारी डी.ओ. बने हैं, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को धमकाते और दबाव डालते हैं।
    कई अधिकारी उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं।
    स्थानीयों का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता नितिन ठाकुर ही इस मामले की सच्चाई बता सकते हैं कि आखिर “जगताप का डर” इतना क्यों है? लेकिन उनका भी तबादला हो गया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    A1. कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड, पटेल नगर रोड नंबर 4 का मामला है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर है?
    A2. नागरिकों द्वारा दी गई भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है, जिस पर कार्रवाई नहीं की गई।
    Q3. किस अधिकारी पर आरोप लगे हैं?
    A3. प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर।
    Q4. क्या विधायक और मनपा अधिकारी इस मामले में शामिल हुए?
    A4. हाँ, विधायक योगेश सागर और तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे दोनों ने कार्रवाई का आदेश दिया था।
    Q5. नागरिकों की क्या मांग है?
    A5. अभय जगताप के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही अवैध निर्माण का तुरंत तोड़फोड़ अभियान।

  • BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने फिर शुरू की ‘शिव भोजन थाली’, गरीबों को सस्ते में मिलेगा खाना

    महाराष्ट्र में महायुती सरकार ने BMC चुनाव से पहले शिव भोजन थाली योजना को फिर शुरू किया है। गरीबों को ₹10 में ₹50 की थाली मिलेगी। जानिए कैसे मिला ₹70 करोड़ का बजट, किन जिलों में खुले रहेंगे केंद्र, और क्या हैं सरकार के नए नियम।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई के गरीब नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। महा यूती सरकार ने फिर से ‘शिव भोजन थाली योजना’ को शुरू करने का ऐलान किया है, जो पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (MVA) सरकार ने शुरू की थी।
    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली मुहैया कराती है। चुनावी मौसम में इस फैसले को गरीब वर्ग तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    🔹 योजना का बजट और फंड रिलीज़

    • सरकार ने इस योजना के लिए ₹70 करोड़ का बजट तय किया है।
    • इसमें से ₹28 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि सितंबर में ₹21 करोड़ पहले ही वितरित किए गए थे।
    • वित्त विभाग की अनुमति के बाद 10 दिनों के भीतर फंड खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं, नहीं तो राशि वापस ली जाएगी।
    • योजना को लागू करने की ज़िम्मेदारी अन्न व नागरी पुरवठा विभाग को दी गई है।

    🔹 क्या है ‘शिव भोजन थाली’ योजना?

    • शुरुआत: 26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने की थी।
    • उद्देश्य: गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना।
    • लागत: शुरू में थाली ₹5 में मिलती थी, बाद में ₹10 कर दी गई।
    • कोविड-19 के दौरान: थाली फ्री में दी जाती थी।
    • वर्तमान स्थिति: ₹50 की थाली अब ₹10 में दी जाएगी, बाकी ₹40 का भुगतान सरकार करेगी।
    • राज्यभर में पहले 1,904 केंद्रों से रोज़ाना 2 लाख थालियाँ वितरित होती थीं।

    🔹 ऑपरेटर्स की दिक्कतें और सरकार का नया कदम

    पिछले कई महीनों से योजना ठप होने के कारण शिव भोजन केंद्र चालकों के भुगतान रुके हुए थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा।
    इस मुद्दे को NCP नेता और मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष उठाया।
    इसके बाद सरकार ने योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और ₹21 करोड़ का तत्काल अनुदान जारी किया।

    साथ ही, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी शिव भोजन केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि भोजन वितरण में गड़बड़ी न हो।

    🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि: BMC चुनाव से पहले बड़ा दांव

    राज्य सरकार का यह फैसला BMC और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों से पहले लिया गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
    MVA के दौरान शुरू की गई इस योजना को महा यूती सरकार द्वारा बंद करने पर पहले काफी आलोचना हुई थी।


    🔹 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. शिव भोजन थाली योजना क्या है?
    यह महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक योजना है, जिसके तहत गरीबों को मात्र ₹10 में ₹50 की पौष्टिक थाली दी जाती है।
    Q2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?
    26 जनवरी 2020 को उद्धव ठाकरे सरकार ने इसे लॉन्च किया था।
    Q3. क्या यह योजना बंद कर दी गई थी?
    हाँ, मार्च 2025 में महायुती सरकार ने वित्तीय कारणों से इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
    Q4. वर्तमान में थाली की लागत और सब्सिडी क्या है?
    थाली की कुल लागत ₹50 है। लाभार्थी ₹10 देते हैं, जबकि ₹40 सरकार वहन करती है।
    Q5. कितने केंद्रों पर यह योजना चल रही है?
    राज्यभर में लगभग 1,904 शिव भोजन केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ रोज़ाना लाखों गरीब भोजन करते हैं।