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फर्जी जन्म प्रमाणपत्र लगाकर नकली पासपोर्ट बनाने वाले सोमप्रकाश गुप्ता को मुंबई पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया है। पुलिस वेरिफ़िकेशन में हुआ खुलासा।
मुंबई: बोरीवली पश्चिम के गोराई पुलिस थाने में एक पासपोर्ट वेरिफिकेशन के एप्लीकेशन में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर नकली पासपोर्ट बनाए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि बिहार के रहने वाले एक मुंबई निवासी का जब पासपोर्ट वेरिफिकेशन का आवेदन मिला, तो उसमें जन्म प्रमाणपत्र फर्जी नजर आ रहा था। पूछताछ और जांच में इसका खुलासा हुआ, कि बिहार के एक कंप्यूटर सेंटर से यह फर्जीवाडा किया गया है, जिसके खिलाफ अपराध दर्ज कर बिहार के कुकुराढ़ गांव से फर्जी दस्तावेज बनाने वाले सोमप्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। Mumbai Police arrested a youth from Bihar for making fake passports
गोराई पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश निवटकर ने बताया, कि आरोपी सोमप्रकाश गुप्ता बिहार के कैमूर में भभुआ शहर के गुरुद्वारा के पास एक कंप्यूटर सेंटर चलाता था। वहीं से पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया गया था। मामले की पड़ताल में गोराई पुलिस थाने के सहायक उपनिरीक्षक सूर्यकांत पॉल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन कर बिहार के लिए रवाना किया गया था। जहां भभुआ पुलिस थाना की मदद से आरोपी को कुकुराढ़ गांव के कंप्यूटर सेंटर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया, कि अपराध में इस्तेमाल उपकरणों को भी हस्तगत किया गया है। Mumbai Police arrested a youth from Bihar for making fake passports
गोराई पुलिस थाने के सहायक उपनिरीक्षक सूर्यकांत पॉल ने बताया कि सोमवार को जब हम बिहार के कैमूर में भभूआ पुलिस थाना पहुंचे तो वहां के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी शिव शंकर कुमार का हमें अच्छा सहयोग मिला। तुरंत उन्होंने भभूआ पुलिस की मदद से सोनहन थाना क्षेत्र के कुकुराढ़ गांव स्थित कंप्यूटर सेंटर में हमारी टीम के साथ छापेमारी करवाई और घटना स्थल पर पंचनामा करने में हमारी मदद की। इसके बाद सारी कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर हमें रवाना किया गया। पॉल ने यह भी बताया, कि आरोपी का पिछला रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है। Mumbai Police arrested a youth from Bihar for making fake passports
नासिक करेंसी नोट प्रेस में अब्दुल करीम तेलगी के स्टॉप घोटाले के बाद एक बार फिर सेंधमारी होने जा रही थी। इसके लिए कुछ बिहारियों ने पुरी तैयारी कर ली थी। लेकिन समय रहते पुलिस ने सारा खेल समाप्त कर दिया।
मुंबई: पुरानी कहानी फिर एक बार दोहराई जाने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने खेला कर दिया। खबर नासिक सिक्यूरिटी प्रेस यानी नासिक करेंसी नोट प्रेस और नासिक के सरकारी टकसाल की है। जहां कभी अब्दुल करीम तेलगी ने सेंध लगाई थी। तेलगी ने अपना नेटवर्क तैयार करके अभेद माने जाने वाले प्रेस की पुरानी और खारिज हो चुकीं ‘मशीनें’ खरीदें जिससे स्टांप पेपर पर सुरक्षा चिन्ह (सिक्योरिटी मार्क्स) छापे जा सकें। इसी तरीके के अपराध होने से पहले ही मुंबई पुलिस ने बिहार से 7 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। जिन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी हांसिल की थी। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
मामले की तहकीकात
खबर के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने सोमवार को बिहार के नालंदा जिले के सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जीवाड़ा करके करंसी नोट प्रेस नासिक में नकली सर्टिफिकेट की मदद से योग्यता परीक्षा पास की और नौकरी हासिल कर ली। फिलहाल पवई पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर मिलि नौकरी
आरोपियों ने नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए थे। पवई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो इसका खुलासा हुआ। शिकायत के मुताबिक, करेंसी नोट प्रेस नासिक ने 2022-23 में जूनियर टेक्नीशियन (स्टाम्प/कंट्रोल), जूनियर टेक्नीशियन (वर्कशॉप/इलेक्ट्रिकल) और सुपरवाइजर के पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें उचित प्रक्रिया के बाद रिक्त पदों को भर दिया गया था। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
कुछ हफ़्ते पहले ही करेंसी नोट प्रेस को सूचना मिली, कि कुछ उम्मीदवारों ने नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी करके परीक्षा पास किया है। जांच शुरू की गई और अधिकारियों ने पवई में आईओएन डिजिटल ज़ोन में परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज को स्कैन किया, जहाँ 13 मार्च, 2022 और 4 मार्च, 2023 को परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें पाया गया कि जिन उम्मीदवारों को नौकरी मिली है उनकी जगह पर दूसरे लोगों ने एक्जाम दिया है। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता अधिकारी ने एफआईआर में कहा कि यह पाया गया कि बिहार के सात उम्मीदवारों ने कभी परीक्षा ही नहीं दी थी और उन्होंने फर्जी उम्मीदवार भेजे थे, जिन्होंने उनकी जगह परीक्षा दी। आरोपी उम्मीदवारों की पहचान रवि रंजन कुमार, संदीप कुमार, शिशुपाल कुमार, आयुष्य राज, राजीव सिंह, संदीप कुमार और आशुतोष कुमार के रूप में की गई है। ये सभी बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। जांच अधिकारियों ने इसके बाद नौकरी पाने वाले और काम कर रहे उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता की जांच की। एफआईआर में कहा गया है कि यह पता चला कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए आईटीआई प्रमाण पत्र और डिप्लोमा प्रमाण पत्र फर्जी हैं।
नासिक पुलिस ने मुंबई को किया ट्रांसफर
एफआईआर में कहा गया है कि इस तरह के धोखाधड़ीपूर्ण कार्यों से आरोपियों ने योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय किया है और करेंसी नोट प्रेस, नासिक के साथ धोखाधड़ी की है। करेंसी नोट प्रेस ने नासिक के उपनगर पुलिस स्टेशन में सात आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। नासिक पुलिस ने डेप्यूटी मैनेजर (लीगल) 30 वर्षीय विक्रमसिंह चौधरी की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की और मामले को आगे की जांच के लिए पवई पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र आदि के लिए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय बोर्ड और अन्य निर्दिष्ट परीक्षा (कदाचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की और अधिक तहकीकात कर रही है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस उन डमी अभ्यर्थियों का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने परीक्षा में आरोपियों की मदद की थी। After Telgi, 7 Biharis broke into Nashik’s ‘super safe’ point! Powai police took charge
मुंबई के नजदीक ‘हिंदी’ विवाद के बीच मराठी नहीं बोल पाने पर एक व्यापारी की पिटाई का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं पर व्यापारी की पिटाई करने का आरोप है। इस घटना का वीडियो वायरल होने पर भारतीय जनता पार्टी ने घटना की निंदा की है।
मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा को लेकर लगातार विवाद बढ़ाया जा रहा है। यहां सियासती जंग के बीच ज़बरन आम लोगों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। इसी बीच मिराभाईंदर से एक व्यापारी को मराठी नही बोल पाने के कारण पिटाई करने की खबर सामने आ रही है। यहां एक व्यापारी के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के तथाकथित कार्यकर्ता बहस कर रहे थे। मनसे के कार्यकर्ता उस व्यापारी को मराठी बोलने के लिए जोर दे रहे थे। इस दौरान बहस हो गई और व्यापारी की पिटाई कर दी गई। MNS workers beat up a businessman for not being able to speak Marathi, BJP leader said- don’t forget the limits of humanity
महाराष्ट्र में लगातार हो रहे हैं हमले
महाराष्ट्र में शिक्षा निती को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार राजनैतिक पार्टियों द्वारा हमले किए जा रहे हैं। इसी ‘हिंदी’ विवाद के बीच मराठी नहीं बोल पाने को लेकर एक व्यापारी की पिटाई का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं पर व्यापारी की पिटाई करने का आरोप है। इस घटना का वीडियो वायरल होने पर भारतीय जनता पार्टी ने घटना की निंदा की और कहा किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नही है और मानवता की सीमा को न भूलें।
जानकारी के मुताबिक, मुंबई में मिराभाईंदर इलाके में एक व्यापारी के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के तथाकथित कार्यकर्ता बहस कर रहे थे। इस दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा गया कि मनसे के कार्यकर्ता उस व्यापारी को मराठी बोलने के लिए कह रहे थे। इसी दौरान व्यापारी ने कहा, कि मराठी सीखनी पड़ेगी। साथ ही उसने कहा कि महाराष्ट्र में सभी भाषाएं बोली जाती हैं। इसपर मनसे कार्यकर्ताओं ने दबंगई दिखाते हुए पीटना शुरू कर दिया। MNS workers beat up a businessman for not being able to speak Marathi, BJP leader said- don’t forget the limits of humanity
चुनाव को लेकर बना मुद्दा
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री योगेश कदम ने कहा, पिछले कई महीनों से हिंदी और मराठी भाषा को लेकर विवाद चल रहा है। कुछ लोग आगामी नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखते हुए इसे मुद्दा बना लिए हैं। उन्होंने कहा, कि किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। हमारे राज्य में मराठी भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए। हमारी सरकार मराठी भाषा का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसी घटना को लेकर भाजपा नेता नरेंद्र मेहता ने कहा, “मराठी हमारी गौरव है, लेकिन मानवता की सीमा को नहीं भूलें!” उन्होंने एक पुराने वीडियो को भी साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है कि मीरा-भायंदर इलाके में मराठी में बातचीत करने से इनकार करने पर एक व्यापारी की पिटाई कर दी गई। महाराष्ट्र में मराठी भाषा हमारी पहचान, संस्कृति और गौरव का हिस्सा है। मराठी का प्रचार और प्रसार भी जरूरी है- लेकिन ये प्यार, समझ और सहिष्णुता के साथ किया जाना चाहिए।
चॉकलेट के बैग में छिपाकर मुंबई पहुंचे यात्री को चैकिंग के दौरान अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। जांच अधिकारियों ने बताया कि भारतीय मूल निवासी थाईलैंड से मुंबई गैरकानूनी तरीके से 16 विदेशी सांप लाने की कोशिश करते हुए पकड़ गया है।
Mumbai Airport: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर कस्टम अथिकारियों ने एक ऐसे यात्री को पड़ा है, जिसके पास से हैरान कर देने वाली चीजें बरामद हुई है। अधिकारियों ने एक भारतीय यात्री को विदेशी सांपों की तस्करी करते हुए पकड़ा। जांच के दौरान अधिकारियों को चॉकलेट के बैग में छिपाए गए 16 विदेशी सांप मिले। बता दें कि ये घटना 27 जून की है, जब तमिलनाडु निवासी गुडमैन लिनफोर्ड लियो नामक शख्स की हरकतें संदिग्ध लगने पर अधिकारियों ने उसके सामान की जांच की।
एयरपोर्ट पर मचा हडकंप
बता दें कि ये शख्स थाईलैंड से मुंबई आ रहा था और गैरकानूनी तरीके से 16 विदेशी सांप लाने की कोशिश करते हुए पकड़ गया है। चैकिंग के दौरान बैग की तलाशी लेने पर इसमें विदेशी सांप मिलने से एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने बताया, कि आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया है।
सामान की हुई स्कैनिंग
स्कैनिंग के दौरान अधिकारियों को आरोपी के बैग से कई दुर्लभ प्रजाति के विदेशी सांप मिले। इनमें पांच एल्बिनो होंडुरन मिल्क स्नेक्स, दो गाटर स्नेक्स, दो केन्याई सैंड बोआ, एक तटीय बंडेड कैलिफोर्निया किंग स्नेक, पांच गैंडे के चूहे के सांप और एक एल्बिनो रेट स्नेक शामिल थे। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने बताया कि ये सभी सांप सफेद थैलियों में और चॉकलेट के बीच छिपाए गए थे। गौर करने वाली बात यह है कि इस महीने में ऐसी यह तीसरी तस्करी की कोशिश पकड़ी गई है।
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में भी इसी तरह का मामला पेश हुआ था। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतराष्ट्रीय हवाई आड्डे पर कस्टम अधिकारियों ने एक यात्री को पकड़ा, जो बैंकॉक से थाई एयरवेज की प्लाइट TG317 से आया था। उस यात्री के व्यवहार में कुछ गड़बड़ी दिखने पर अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने उसका सामान चेक किया। तलाशी के दौरान बैग से 52 जिंदा सांप मिलने पर सभी हैरान रह गए थे। यह तस्करी की एक और गंभीर कोशिश थी जिसे समय रहते रोक लिया गया।
खतरनाक सांपों की तस्करी
जब अधिकारियों ने बैग की जांच की तो उन्हें तीन स्पाइडर- टेल्ड हॉर्नड वाइपर मिले, जो रेगिस्तान में पाए जाने वाले दुर्लभ सांप हैं। इसके अलावा, पांच एशियाई लीफ़ टर्टल भी बरामद हुए, जो दक्षेण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं और अक्सर विदेशी पालतू जानवरों की तस्करी में इस्तेमाल होते हैं। जांच में 44 इंडोनेशियाई पिट वाइपर भी मिले, जो इन तस्करों की बड़ी योजना का हिस्सा माने जा रहे हैं। जनकारी के अनुसार, स्पाइडर-टेल्ड हॉर्नड वाइपर और एशियाई लीफ़ टर्टल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित जीवों की लिस्ट और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 4 में शामिल किया गया है, जिससे इनकी तस्करी करना कानूनन अपराध है।
दिल्ली-मुंबई हाईवे के कॉरिडोर पर चार अपना घर बन चुके हैं। हर 30 किलोमीटर पर हाईवे के किनारे पेट्रोल पंप, टॉयलेट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और अपना घर विश्राम केंद्र बनाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने दिल्ली मुंबई हाईवे पर आपको कई जगहों पर ‘अपना घर’ नाम से इमारतों का निर्माण कर रही है। इन इमारतों को हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल लंबी दूरी के हाईवे पर नींद आने की वजह से सड़क दुर्घटना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब ट्रक ड्राइवरों को ढाबे के पीछे या सड़क के किनारे सोने की जरूरत न पड़े, इसलिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ‘अपना घर’ नाम से आधुनिक और सुरक्षित रेस्ट एरिया तैयार किया गया है। यहां उन्हें आराम करने, नहाने, खाना बनाने और नींद पूरी करने के लिए घर जैसा माहौल मिलेगा। हालांकि इसके लिए किमत अदा करनी पडेगी। लेकिन इसका किराया बहोत ही ज्यादा कम होने वाला है।
नींद की वजह से होती हैं दुर्घटना
भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। 70% हादसे ड्राइवर की थकान और नींद पूरी न होने की वजह से होते हैं। लंबी दूरी पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर अक्सर बिना आराम किए चलते रहते हैं। इसकी वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। NHAI कोटा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया, कि “ट्रक ड्राइवर लगातार सफर करते हैं और ठीक से सो नहीं पाते। इसके कारण सड़क दुर्घटना होती है। इसी के कारण अपना घर योजना की शुरुआत की गई, ताकि वे सुरक्षित जगह पर आराम कर सकें और हादसे से बच सकें।”
बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
शिक्षा को व्यापार की तरह चलाया जा रहा माफियाओं के हाथों
पचास हजार के ऊपर सरकारी स्कूल बंद
हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
उत्तर प्रदेश के 70 प्रतिशत इंजीनियर बेकार
देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के…!
धर्म की सियासत चमकाने में व्यस्त बीजेपी सरकार
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की बूंद जैसा
मुफ्त राशन प्रचार में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन का खर्च
विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र
मुंबई: बीजेपी के कथित चाणक्य अमित शाह ने अंग्रेजी नहीं पढ़ने की वकालत की है। लेकिन सबसे पहले उन्हें अपने बेटे को जिसे बीसीसीआई का सेक्रेटरी दबाव में बनाया है, इससे कहें कि अंग्रेजी न बोले। इसके साथ ही अपनी सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पार्टी से बाहर करें जो विदेश से पढ़कर आए हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी ही पढ़ाई जाती है। साथ ही उन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी जिनके बेटे, बेटियां विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे और जो वहां सेटल्ड हो चुके हैं।
देश के सारे कॉन्वेंट स्कूल बंद कर दें। सीबीएससी जिसमें अंग्रेजी मीडियम से शिक्षा दी जाती है उसकी मान्यताएं खत्म कर दें। संसद में अंग्रेजी बोलने, सेक्रेटरियो द्वारा अंग्रेजी बोलने लिखने की मनाही कर दें। यहां तक कि संसद में अंग्रेजी बोलने वालों को बरखास्त कर दें। तब आम गरीब आदमी या देशवासियों से अंग्रेजी पढ़ने को मना करें। लेकिन अब कोई छात्र किस मीडियम में पढ़ेगा। किस भाषा में बात करेगा सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है?
बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
एक तो वैसे ही बीजेपी सरकार ने शिक्षा को माफियाओं के हाथों में सौप दिया है, जिसे व्यापार की तरह चलाया जा रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। स्कूल बैग, जूता, मोजा और किताबें वह भी प्राइवेट स्कूलों की जिनका मूल्य चार सौ से कम नहीं है। उसमें भी कमीशन मिलता है। तमाम प्राइवेट स्कूलों में न लाइब्रेरी है, न कंप्यूटर हाल और ना ही साइंस लैब।
फिर भी स्कूलों को दो चार लाख रुपए लेकर मान्यताएं दी जा रही है, जहां शिक्षा के नाम पर नील बटा सन्नाटा है। ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है। सरकार जिसका दायित्व है कि निःशुल्क शिक्षा देना।नहीं दे रही। तमाम सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। स्कूलों को मर्च किया जा रहा दूर के स्कूलों में।
हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
शिक्षक आंदोलन रत हैं। बिजली कर्मचारी आंदोलन रत हैं, लेकिन बीजेपी सरकारें दो कार्य कर रही। अब तक पचास हजार से ऊपर तक के सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां किए जाने पर हाईकोर्ट ने सारी नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। वहीं शिक्षा निःशुल्क देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस लाखों में रखी गई है।
उसके अलावा हर वर्ष एडमिशन फीस और तमाम तरह की फीस की वसूली की जा रही है। यहां तक कि फीस जमा नहीं कर पाने वाले छात्रों को गेट से ही घर लौटाया जा रहा। केंद्र सरकार की नाक के नीचे दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल द्वारा तीन साल में हजारों रुपए बढ़ा दिए जाने और छात्रों के घर लौटाए जाने के कारण अभिभावकों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया। अगर पांच दस वर्ष जीवित रहते तो शिक्षा को समवर्ती सूची से निकालकर समूचे देश में एक ही शिक्षा पद्धति लागू कर देते। पाठ्यक्रम भी एक होते ताकि असमय स्थल परिवर्तन का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। छः से चौदह वर्ष आयु तक शिक्षा का अधिकार देने के बाद उनकी योजना कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दे देते। लेकिन देश का दुर्भाग्य उनकी मृत्यु की साजिश रची गई।जिससे उनका शिक्षा को लेकर सारी योजना ही बंद हो गई।
सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
अब तो सरकारें सारे के सारे सरकारी स्कूल बंद करने पर तुली हुई हैं। हमारी सरकारों ने नारे बड़े लोकलुभावन दिए थे, कि “पड़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” लेकिन कार्य उसके ठीक विपरित किए जा रहे हैं। भारी भरकम फीस के कारण लाखों छात्र पांचवीं और आठवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा पाना देश के नब्बे प्रतिशत लोगों के बूते में नहीं है।
18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
शिक्षा पर 18% की जीएसटी लगाकर सरकार ने आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया है। कैसे पड़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया? देश में एक भी कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जो दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में स्थान पा सके। इसका कारण है शिक्षा मद में केंद्र सरकार द्वारा कटौती।
गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
अंग्रेजी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी पढ़े लिखे छात्रों को ही खुद अपने ही देश में प्राइवेट जॉब मिल पाता है। बिना अंग्रेजी के कहीं भी कोई पूछता तक नहीं है। विदेश जाने, उच्च शिक्षा प्राप्ति अथवा जॉब पाने के लिए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य है। ज्ञान विज्ञान की समस्त पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए अरबों खरबों रूपये व्यय करने होंगे। बिना अंग्रेजी ज्ञान के कोई भी विदेश जाकर उच्च शिक्षा या नौकरी या व्यवसाय कर ही नहीं सकता। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी नहीं पढ़ाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक है।केंद्रीय मंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
जबकि शिक्षा को व्यापार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का दायित्व है, कि सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करना। लेकिन सरकार अपने दायित्व पालन से भाग रही है। निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देकर प्रति परिवार एक रोजगार के संसाधन जुटाना सरकार का दायित्व है। जब नब्बे प्रतिशत बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगे। शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि उत्तर प्रदेश के सत्तर प्रतिशत इंजीनियर बेकार हैं। उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि प्राइवेट शिक्षा संस्थान प्रैक्टिकल कहां करते हैं? बिना प्रेक्टिकल के ज्ञान कैसे आयेगा?
देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के हैं जिनका लक्ष्य दौलत अर्जित करना है। इसीलिए सरकार शिक्षा को माफियाओं के हाथों सौंप चुकी है। सरकार डरती है कि कहीं शिक्षा व्यवसाय पर नकेल कसी गई तो उसके लोग ही सरकार गिरा देंगे। सत्ता बचाने के लिए देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना सरकार को शोभा नहीं देता। शायद यही वजह है, कि सरकार को चुनाव जीतने के लिए धर्म, नफरत का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने वादों को जो कभी पूरे ही नहीं किए सरकार ने, वोट मांगने की हिम्मत ही नहीं है। इसलिए धर्म की सियासत चमकाने का कार्य कर रही सरकार।
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
सिर्फ़ दो बीजेपी शासित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में ही 60% सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। दोनों राज्यों के दो करोड़ बच्चे चौथी या आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है, कि पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की भी बूंद जैसा नहीं है। माता पिता मेहनत करते हैं। महीने में आठ से दस दिन मजदूरी मिलती है शेष दिन फांका कटता है। परिवार का पेट भरे कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा लेने भेजें?
95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र
दरअसल पांच किलो मुफ्त राशन का प्रचार करने में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन खर्च आ जाता है। विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकारें नहीं चाहती कि अस्सी करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाएं। ऊपर से अंग्रेजी नहीं पढ़ाने की वकालत? यह वकालत वे लोग करते हैं जो कभी अंग्रेजों की दलाली करते और गांधी के आंदोलन को कुचलने के लिए वायसराय को खत लिखा करते थे। आज उन्हीं की औलादें सत्ता में आई हैं, तो देश को निरक्षर रखने के तमाम उपाय करते रहते हैं। विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था चंद पूंजीपतियों की है जबकि सच तो यह है कि देश की 95% आबादी बीजेपी शासन में हैंड टू माउथ हो चुकी है।
विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
इतने टैक्स तो लुटेरे अंग्रेजों ने भी नहीं लगाए थे जितनी हिंदुत्ववादी सरकार टैक्स लगाकर 95% जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र करती है। गरीबी झेली है। गरीब मां का बेटा हूं। बर्तन माजती थी मां कहने वाले पीएम दिन में पांच ड्रेस वह भी लाखों के बदलते रहते हैं। नेहरू पर आरोप लगाने वाले सोचें कहां राजा भोज कहां गंगू तेली। नेहरू परिवार आजादी के पहले से ही संपन्न रहा था। उनकी बराबरी तो क्या पैरों की धूल बराबर आज कोई नेता नहीं। हर मोर्चे पर नाकाम सरकार केवल विज्ञापनों, व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के द्वारा ब्रेन वाश करके मूर्ख बनाती और धर्म आस्था के नाम पर वोट मांगती सरकार।
मुंबई के गोरेगांव फिल्मसिटी में सोमवार तडके आग लगने से अफरा तफरी मच गई है। यहां अचानक आग लगने से टीवी सीरियल के फेमस शो अनुपमा का पूरा सेट जलकर खाक हो गया है। किसी के हताहत होने की जानकारी नही ..
अधिकारियों ने बताया कि सुबह 6.10 बजे गोरेगांव (पूर्व) इलाके में स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी (फिल्म सिटी) में मराठी बिग बॉस के सेट के पीछे बने अनुपमा के सेट पर आग लगी। आग की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की लगभग चार गाड़ियां और पानी के टैंकर मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया। सुबह होने की वजह से सेट पर शूटिंग नहीं चल रही थी, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई।
‘अनुपमा’ (Anupamaa) के सेट पर हुए इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है। सेट पर मौजूद सभी कलाकार और क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया है।
इस घटना को लेकर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन अपने एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया, कि “मुंबई की फिल्म सिटी में आज सुबह 5 बजे ‘अनुपमा’ शो के सेट पर भयंकर आग लग गई। सुबह 7 बजे शूटिंग शुरू होनी थी। लेकिन उससे ठीक दो घंटे पहले ही आग ने पूरा सेट तबाह कर दिया। उस वक्त शूटिंग की तैयारियां चल रही थीं। कई कर्मचारी और क्रू मेंबर उस समय सेट पर मौजूद थे।” Mumbai: Fire broke out on the set of Anupamaa in Goregaon Film City, goods worth crores burnt to ashes…
भारत सरकार क्या आम लोगों की तरक्की के लिए काम कर रही हैं या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को गिनाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रही है। हालही में भारत सरकार ने देशव्यापी बंद का ऐलान कर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की घोषणा कर दी है।
डिजिटल डेस्क मुंबई: सोमवार 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद घोषित करने के भारत के फैसले ने पूरे देश में व्यापक रुचि और जिज्ञासा पैदा कर दी है। जबकि यह जानना जरूरी है कि एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पडेगा? सरकार फिलहाल इतिहास में अपना नाम दर्ज करने में सबसे ज्यादा रुची दिखा रही है। उसे फर्क नही पड़ता की इससे देश की जनता पर कैसा असर पड सकता है। जबकि कानून व्यवस्था में इस तरह की कोई भी निति मौजूद नही है। बंद सिर्फ सार्वजनिक हितों के मुद्दों को प्रबलता के साथ सरकार को समझने और अपनी बात मनवाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन यहां तो सरकार खुद की महिमा बखान करने के लिए सार्वजनिक नुकसान करने पर उतारु हो गई है।
बंद से हागा नुकसान
सीआईआई (Confederation of Indian Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत के तुरंत 25 से 90 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है। सेवाओं के दोबारा शुरू होने के बाद भी नुकसान चलता रहता है और इसकी भरपाई कभी नहीं हो पाती है।
सरकारी फरमान
सरकारी घोषणा के मुताबिक, सार्वजनिक अवकाश मनाने का यह अभूतपूर्व कदम देश के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाने के साधन के रूप में पेश किया गया है। सरकार ने देश की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं को पहचानने और उन पर विचार करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ठहराव की योजना बनाई है। इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल होने के लिए एक दिन प्रदान करना है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय की भावना बढ़े।
आपको जानकारी देते हुए बता दें कि बंद का प्रावधान क्यों अपनाया जाता है? ये दक्षिण एशियाई देशों जैसे भारत और नेपाल में सरकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर असंतोष जताने का तरीका है। भारत में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए बंद का अधिकार है। संविधान की धारा 19 के तहत राइट टू प्रोटेस्ट मिला हुआ है, जिसे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 का सहारा मिलता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
इसके तहत सेवाएं ठप पड़ जाती हैं, फिर चाहे वो बैंकिंग हो या फिर ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य। इससे आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है और कई बार मारपीट और खूनखराबे की नौबत भी आ जाती है। कई बार राजनैतिक पार्टियां अपने नीतिगत विरोधों के चलते बंद बुलाती हैं। उनसे असहमत लोग बंद के दौरान अपनी सेवाएं जारी रखने की कोशिश करते हैं तब मारपीट और लूटपाट जैसी घटनाएं होती हैं।
एक दिन के बंद से कितना नुकसान होता है?
फिक्की (Federationof Indian Chambers of Commerce and Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एकदिवसीय देशबंद से लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का सीधा नुकसान होता है। अलग-अलग सेक्टरों में बंद से होने वाला नुकसान अलग-अलग है। जैसे देशभर के बैंक कर्मचारी एक दिन के बंद पर चले जाएं तो तकरीबन 25 हजार करोड़ का नुकसान होता है। रेलवे का नुकसान एक दिन में 24 सौ करोड़ है, वहीं देशभर के मजदूर (असंगठित सेवा) एक दिवसीय हड़ताल करें तो 26 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
महामारी के दौरान, मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया और गैरजरूरी खर्चों को सीमित रखा. इससे जीडीपी तो बढ़ी लेकिन वेतन और खपत में सुधार नहीं हुआ। सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के वरिष्ठ फेलो संजय कथूरिया कहते हैं, “भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह 6.5 से 7.5 फीसदी की विकास दर बनाए रख पाएगी या 5-6 फीसदी तक गिर जाएगी।” India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
माधवी अरोड़ा कहती हैं कि भारत फिलहाल एक ऊहापोह की स्थिति में है, जहां लोग खर्च नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक रोजगार में सुधार नहीं होता और वेतन वृद्धि धीमी रहती है।
7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक अवकाश को समझना
गृह मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
छुट्टियों का असर सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा।
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
परिवहन सेवाएँ केवल आवश्यक आवश्यकताओं तक ही सीमित रहेंगी।
राष्ट्रव्यापी बंद का सरकारी ऐलान क्या है?
7 जुलाई 2025 को होने वाले पूर्ण बंद से अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं सहित कई क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रुकावट आ सकती है। शटडाउन का उद्देश्य व्यवधानों को कम करना और नागरिकों को नियोजित सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देना है। व्यवसायों को किसी भी संभावित आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए पहले से तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, और स्कूल इस अवसर का उपयोग छात्रों को देश के इतिहास और उपलब्धियों के बारे में शिक्षित करने के लिए करेंगे। India announces complete lockdown: 7th July 2025 set as public holiday
चूंकि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन होने वाला है, इसलिए नागरिकों को सलाह दी गई है, कि वे एक सहज और आनंददायक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए तदनुसार तैयारी करें। व्यक्तियों और परिवारों को सार्वजनिक परिवहन और अन्य सेवाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अपनी गतिविधियों की योजना पहले से बनाने के लिए कहा गया है। व्यवसायों को सलाह दी गई है कि वे छुट्टी के दौरान परिचालन परिवर्तनों के बारे में कर्मचारियों और ग्राहकों को सूचित करें। स्कूल और शैक्षणिक संस्थान को ऐसी गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए कमर कसने के लिए कहा गया हैं, जो छात्रों को इस दिन के महत्व के बारे में शिक्षित कर सके। योजनाओं में किसी भी अपडेट या बदलाव के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सूचित रहना के लिए सभी को महत्वपूर्ण बताया गया है।
अपने दिन और गतिविधियों की योजना पहले से बना लें।
सार्वजनिक परिवहन के शेड्यूल के बारे में जानकारी रखें।
स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लें।
दिन का उपयोग पारिवारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करें।
7 जुलाई 2025 को पूर्ण शटडाउन की योजना बनाने में सरकार की भूमिका इसकी सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताया गया है। संस्कृति मंत्रालय, अन्य विभागों के साथ मिलकर, राष्ट्रीय एकता और गौरव के विषय से जुड़े कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए अथक प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके, केंद्र सरकार का लक्ष्य इस छुट्टी को निर्बाध रूप से मनाना बताया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय सूचना और अपडेट प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि नागरिक इस दिन के लिए अच्छी तरह से सूचित और तैयार हों जाएं।
भारत सरकार की घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को राष्ट्रव्यापी बंद सिर्फ़ आराम का दिन नहीं है, बल्कि जन भागीदारी और सहभागिता का आह्वान है। इसमें कहा गया, कि नागरिकों को सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से लेकर सामुदायिक सेवाओं में स्वयंसेवा करने तक, व्यक्तियों के लिए दिन की भावना में योगदान देने के कई तरीके हैं। स्थानीय संगठनों और सामुदायिक समूहों को ऐसे कार्यक्रमों की मेजबानी करने के लिए आमंत्रित किया जाता है जो राष्ट्रीय एकता की थीम के साथ संरेखित हों, लोगों को एक साथ आने और अपनी साझा पहचान का जश्न मनाने के लिए मंच प्रदान करें।
आयोजित कार्यक्रमों और समारोहों में भाग लें।
स्वयंसेवी कार्यक्रमों और सामुदायिक सेवा में भाग लें।
स्थानीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गतिविधियों में भाग लें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुभव और कहानियाँ साझा करें।
लोगों के लिए अवसर बता कर मूर्ख बनाया जा रहा है।
सरकारी घोषणा में कहा गया है, कि 7 जुलाई 2025 को पूर्ण बंद होने से चिंतन और उत्सव मनाने का एक अनूठा अवसर मिलता है, जिससे राष्ट्र गौरव और एकता के साझा क्षण में एक साथ आ सकता है। इस दिन को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार के प्रयास समाज के ताने-बाने को मजबूत करने और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
7 जुलाई 2025 को बंद का उद्देश्य क्या है?
बंद का उद्देश्य भारत के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाना है, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है।
क्या बंद के दौरान आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी? हाँ, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ चालू रहेंगी।
बंद के दौरान नागरिक किन गतिविधियों में भाग ले सकते हैं? नागरिक देश भर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामुदायिक सेवा और शैक्षिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।
बंद का व्यवसायों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? व्यवसायों में अस्थायी परिचालन परिवर्तन हो सकते हैं, और उन्हें न्यूनतम व्यवधान के लिए तदनुसार योजना बनाने की सलाह दी जाती है।
शटडाउन के बारे में अपडेट कहां से मिलेगी? अपडेट और जानकारी आधिकारिक सरकारी चैनलों और मीडिया आउटलेट के माध्यम से प्रसारित की जाएगी।
मंत्रालय प्रतिनिधि मुंबई: महाराष्ट्र में इस बार का विधानसभा मुख्य रूप से दो खेमों के बीच लड़ा गया था। एक तरफ भाजपा की अगुआई वाली महायुति और दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी मैदान में थी। महायुति ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की और देवेंद्र फडणवीस को फिर से प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार पर सीएम फडणवीस ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनके शासनकाल में करप्शन पर लगाम लगाने की कोशिश किया जाएगा और उस दिशा में काम भी महायुति की सरकार करेगी। जबकि महाराष्ट्र में करप्शन हमेशा से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
खुद ने लगाया था भ्रष्टाचार के आरोप
दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा गया था कि अतीत में उन्होंने जिनपर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया था। जैसे अजित पवार और छगन भुजबल जैसे और भी नेता अब महायुति गठबंधन की सरकार में कैबिनेट मंत्री कैसे बन गए हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगाई जा सकता है? इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपनी तरफ से गारंटी देते हुए जोर दिया कि पहले जो हुआ वो हो गया लेकिन हमारी सरकार में भ्रष्टाचारी के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
महाविकास अघाडी मे थे मंत्री
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि वे इस बात की गारंटी देते हैं कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी। बता दें कि अजित पवार और छगन भुजबल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। महाविकास अघाड़ी की सरकार के दौरान मंत्री रहे अजित पवार पर अनियमितता के आरोप लगे थे। अब अजित पवार महाराष्ट्र महायुति गठबंधन की मौजूदा सरकार में राज्य के उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाल रहे हैं। Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
भ्रष्टाचार पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, कि “राजनीति की यही सच्चाई है। राजनीति में आप इन चीजों से मुंह मोड़कर आगे नहीं बढ़ सकते। साल 2019 में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद और जब ये घोषणा हुई कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, तो मेरे रास्ते में रोड़े अटकाए गए। घोषणा के बाद भी उद्धव ठाकरे ने हमें धोखा दिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने हमें धोखा दिया।” उन्होंने कहा, राजनीति मे आपको टीके रहने के लिए रास्ता खोजना पड़ता है, तो हमने रास्ता निकाला। एक सही रास्ता था, लेकिन हमारे साथी उस रास्ते से भटक गए, तो हमने जिन्हें साथ ले सकते थे, उन्हें साथ लिया और आगे बढ़े।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
समझौता करना पड़ा
उन्होंने यह भी कहा कि “मैंने राजनैतिक सिद्धांत का हमेशा से पालन किया है और हमेशा इसे कायम रखा है। इसलिए मैंने हमेशा अपनी राजनीति को पकड़े रखा। लेकिन जब आप राजनीति में काम करते हैं, तो कभी-कभी आपको समझौता करना पड़ता है। लेकिन, अगर मैं मुख्यमंत्री हूं, तो मैं अपने मंत्रिमंडल में किसी को भी गलत काम नहीं करने दूंगा। मैं आपको गारंटी देता हूं कि यह सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करेगी।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
राजनीतिक अवसरवाद पर क्या बोले?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राजनीतिक अवसरवादिता पर भी सवाल पूछा गया। उनसे पूछा गया कि क्या राजनीतिक अवसरवादिता तब से बदल गई है, जब आपने शुरुआत की थी? या यह हमेशा से ऐसा ही रहा है? सीएम फडणवीस ने कहा, “यह हमेशा से ऐसा ही था। इसे इस तरह के चक्र के रूप में देखें। जैसे 1978 में महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव हुआ था। उस वक्त शरद पवार ने ठीक इसी तरह सरकार बनाई, फिर अगर आप 1992 को देखें, तो शरद पवार की सरकार के पास बहुमत नहीं था और उन्होंने शिवसेना को तोड़कर सरकार बनाई।” Is the Maharashtra government working to end corruption? How did someone get a ministerial position despite corruption charges?
वकालत का मौका बहुत ही कम मिलता है सुप्रीम कोर्ट में..!
गठबंधन करने वाले दल को ही खत्म कर देना बीजेपी की खासियत
नितीश कुमार की पार्टी को खत्म करने की चाल..
मोदी और शाह के अत्यंत करीबी संजय झा की दोनो बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
झा ने स्वयं सोशल मिडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए किया पोस्ट
सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन
मुंबई: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट बनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वकालत का अनुभव या किसी सीनियर के अंडर में वर्षों तपस्या करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में वकालत का मौका बहुत कम ही मिलता है लेकिन मोदी सरकार जिस पर मेहरबां हो जाए। जिस पर कृपा दृष्टि पड़ जाए तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता। जेडीयू के सांसद ही नहीं कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं संजय झा और मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री भी।
कौन है संजय झा?
मोदी शाह के अत्यंत विश्वसनीय भी हैं, इसलिए उन पर विशेष कृपा दृष्टि बरस रही है क्यों कि संजय झा और अन्य मंत्री जो जेडीयू के हैं मोदी को तीसरी बार बहुमत नहीं मिलने के बावजूद जेडीयू का समर्थन मिला, लेकिन मंत्रियों को तोड़ने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी को ही खत्म करने की चाल चली गई है। सबको अपने कर्म का फल भोग मिलना निश्चित है।
सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति
नीतीश कुमार की पार्टी के सांसद बगावत पर उतर कर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।बीजेपी की यही खासियत है। जिस दल के साथ गठबंधन करती है, उसे ही खत्म कर देती है। अकाली दल और शिवसेना का हश्र सभी को याद होगा। अब बारी नीतीश कुमार के जेडीयू पार्टी की है। इसीलिए सारी मान मर्यादा तोड़कर संजय झा की दो बेटियों जिनमें से एक ने 2023 में और दूसरी ने 2025 में एलएमएम किया है। जिन्हें वकालत का अनुभव भी नहीं है इनको सुप्रीमकोर्ट में सरकारी एडवोकेट की नियुक्ति मिल चुकी है।
जिसका जिक्र स्वयं झा ने सोशल मीडिया पर बेटियों पर गर्व करते हुए पोस्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का खुला उल्लंघन है यह। इसी मुद्दे पर जेडीएस नेता ने पूछा है, कि कितने ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सुप्रीमकोर्ट में सरकार की सेवा का अवसर दिया गया है? इसके पहले भी आरएसएस विचारधारा के लोगों को बिना आई ए एस परीक्षा उत्तीर्ण हुए ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष नियुक्त कर मोदी सरकार ने जता दिया था कि उसे संविधान की मर्यादा या कोर्ट और कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है।