जनता के एकाउंट से हो चुका है अब तक ३६ करोड़ का फ्रॉड …!
दो लाख करोड़ की साप्ताहिक GST की हो रही वसूली
GDP किनकी बदौलत बढ़ी?
विपक्षी भ्रष्ट नेताओं को बीजेपी में शामिल कर लेने और कुनबा बढ़ाने से कोई लोकप्रिय नहीं होता..!
मुंबई: बड़े गर्व से मुनादी पीटी जा रही है, कि “जापान को पछाड़ कर भारत विश्व की चौथी आर्थिक व्यवस्था बन गई है।” अब कहा जा रहा है, कि “चंद दिनों में जर्मनी को पिछाड़कर तीसरी अर्थ व्यवस्था बन जायेगा भारत।” कौन सा भारत बन गया चौथी इकॉनमी? उन गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 80 करोड़ ग़रीबों की या फिर 65% बेरोजगार युवा मजदूरों की?
लोग एस आई पी बंद कर रहे हैं। बैंक के कर्ज तले दबकर किसान और छोटे व्यवसायी आत्महत्या कर रहे हैं। गोल्ड लोन भी मंहगा हो गया है। रुपया डॉलर के मुकाबले 87 के निचले स्तर पर आ चुका है। नकली करेंसी पर कोई रोकटोक नहीं लग पाई है। डिजिटल देन लेने वाले ईमानदार लोगों के बैंक एकाउंट से अब तक 36 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया जा चुका है। मंहगाई सरकार के कागजों में गुलाबी हो गई है। दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं।
मनरेगा, शिक्षा, चिकित्सा का बजट कम कर दिया है। प्राइवेट स्कूल हों या प्राइवेट अस्पताल तो गहना और जमीन तक बिकवा दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में न योग्य डॉक्टर न मशीन जिनसे जांच की जा सके। सरकार केवल दो कार्यों में जुटी है। जनता से हर एक चीज़ पर जी एस टी लेने जिस पर फख्र करती है सरकार। जबकि दो लाख करोड़ की साप्ताहिक जी एस टी वसूली हो रही धन कम से कम जनता के हित में तो खर्च हो ही रहे हैं।
दूसरा काम हैं चुनाव प्रचार में जनता के पैसों की बर्बादी। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री क्यों जाए जनता के पैसों पर चुनाव प्रचार करने? क्या इतने मूर्ख होते हैं उनके प्रत्याशी कि सरकार को प्रचार करने के लिए गालीबाज नेता और नफरत का जहर घोलने वाले दुर्बुद्धि नेता की जरूरत पड़ती है। सरकार सिर्फ पूंजीपतियों के सोलह लाख बैंक कर्ज माफ कर सकती है। धनिकों की संपत्ति बढ़ाने का ही काम करती है। कल तक लल्लू सेठ आज अरबपति बन गए। बैंक का कर्ज लेकर देश से बाहर भगाने का काम भी सरकार कराती है।
जी डी पी किनकी बदौलत बढ़ी? एक प्रतिशत धन्नासेठों की जो सरकार को चुनाव में अरबों चंदा देते हैं इसके बदले में धन्नासेठों को सरकार धंधा देती है। भारत सरकार जिस चौथी अर्थव्यवस्था का दंभ भर रही है उसमें सौ करोड़ लोगों की आय कितनी है? केवल चंद अरबपतियों के बूते सरकार विश्व की पहली अर्थव्यवस्था होने के दावे भी कर दे तो ताज्जुब नहीं। ताज्जुब तो तब होगा जब सौ करोड़ लोगों को निःशुल्क शिक्षा सुविधा रोजगार और चिकित्सा की अच्छी व्यवस्था कर सके। जो करना ही नहीं चाहती।
क्योंकि देश को मूर्ख रखकर गुलाम बनाना और हिंदुत्व का जहर उनकी रगो में भरकर वोट ले सकती है। मोदी जो प्रधानमंत्री हैं ग्यारह वर्षों में एक भी उपलब्धि बताकर जनता से वोट मांगने की हिम्मत तो दिखाते। सबकी जमानत जब्त हो जाएगी। विपक्षी भ्रष्ट नेताओं को बीजेपी में शामिल कर लेने और कुनबा बढ़ाने से कोई भी लोकप्रिय नहीं हो जाता। उसके लिए जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने वाला होना चाहिए। झूठ बोलकर शब्ज़ बाग दिखने और वादे पूरा करने वाला बेहद क्रूर और तानाशाह हो सकता है जन नेता नहीं।
राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल
वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिंदू मतों को लुभाने की कोशिश
मुंबई: अभी दो साल भी नहीं बैठे कि एन डी ए सरकार में बीजेपी को समर्थन देने वाली पार्टी जे डी यू के नेता सुशासन बाबू उर्फ पलटू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के वोटरों ने जबरदस्त नाराजगी जताकर नीतीश कुमार को केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं।
बीजेपी के समर्थन से बिखरने लगे लोग
वैसे बीजेपी सरकार ने जे डी यू में से कुछ लोगों को केंद्र में मंत्री बनाकर तोड़ फोड़ पहले ही चालू कर दी थी। नीतीश पशोपेश में चाहे जितना भी रहें उनकी पार्टी का टूटना सुनिश्चित है। बचे हुए लोग पार्टी को कितने दिनों तक बचा पाएंगे कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू के वोटर्स जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते हैं बीजेपी को समर्थन देने से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
केंद्र द्वारा नायडू के समर्थन से वक्फ कानून संशोधन ने आग में घी डालने का काम किया है। जहां नीतीश कुमार अपना अस्तित्व बचाने में लगे हैं वहीं नायडू भी काफी परेशान नजर आते हैं। दोनों के फॉलोवर और मतदाता नाराज़ चल रहे हैं। यह नाराजगी दोनों के अस्तित्व पर भारी पड़ने वाली है।
ऐसे में जबकि दिसंबर में बिहार राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले है उससे पहले ही नीतीश कुमार और नायडू को फिर से विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक तरफ कुआं तो दूसरी ओर खाई नजर आने लगी है। नीतीश कुमार और नायडू के लिए अपनी अपनी पार्टी बचाने का अंतिम मौका है। अतः संभव है कि दोनों केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेकर शहीद हो जाएं।
उसके पूर्व मानसून सेशन के बाद केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव करने के लिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दें। दोनों ही स्थितियों में मध्यावधि चुनाव के आसार प्रबल हैं। जिसमें बीजेपी वक्फ संशोधन कानून को प्रचारित कर हिन्दू मतों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। अतः देश को जनता के द्वारा दिए गए अरबों टैक्स की बर्बादी देखने को मिल सकती है।
पीओके पर कब्जा करने का दावा करते रहकर भक्तों में उत्साह भरते रहे, ताकि बूथ मजबूत कर चुनाव दर चुनाव जीतते रहे। जबकि चीन बंगाल बॉर्डर के पास पुराने हवाईअड्डे को नई साज़ सज्जा देने में लगा है। वहां चीनी रडार युद्धक विमान मिसाइलें युक्त रखने की योजना पर काम कर रहा है। जिससे भारत का पूर्वोत्तर बंगाल, बिहार, उड़ीसा सहित दक्षिण के सभी राज्यों पर खतरा मंडरा रहा है।
मुंबई: पहलगाम में आतंकी हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने लिया। हमारे फाइटर विमान गिरे मुद्दा नहीं गिरे क्यों? यह मुद्दा है हमने क्या सबक लिया? विपक्ष सवाल पूछ रहा है। जनता प्रश्न कर रही है। जवाब बीजेपी सरकार देने से भाग रही है। पहलगाम जैसे हमले क्यों हुए? धारा 370 हटाए जाने पर मोदी सरकार ने कश्मीर में शांति का दावा किया था। उस दावे का क्या हुआ? उरी पठानकोट पुलवामा और अब पहलगाम के आतंकी और आर डी एक्स कहां से आया? इस बात का पता अबतक सरकार लगा नहीं पाई है। जबकि मुंबई हमले में पाकिस्तानी कसाब को जिंदा पकड़कर दुनिया के सामने सबूत पेश किए गए थे। मगर बीजेपी शासन कोई सबूत नहीं ला सकी। इससे शंका जाहिर की जाती है कहीं यह सब प्रायोजित तो नहीं था? We are busy in the rally and China is making preparations
क्या ट्रम्प को होगी 5 सालों की सजा?
ट्रम्प दसवीं बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ट्रेड की धमकी देकर वार रुकवा दी। इसी आशय का एफिडेविट ट्रम्प ने अमेरिकी कोर्ट में दिया है। अगर वह झूठ है तो ट्रम्प को अमेरिकी कोर्ट पांच साल कैद की सजा दे सकती है। लेकिन ट्रम्प जैसा घाघ व्यापारी क्यों दंडित होने का रिस्क लेगा? देश जानना चाहता है, कि सीजफायर क्यों और किस लिए किया गया? जबकि हमारी जांबाज़ सेना पाकिस्तान पर बढ़त बनाकर उसे पंगु कर चुकी थी। हमारी सेना पाकिस्तान से नहीं अमेरिका, चीन, तुर्की, अज़रबैजान से लड़ रही थी। तुर्की के ड्रोन हो या चीन के फाइटर विमान या फिर उन्नत मिसाइलें सब पर भारत की सेना ने अपना दम दिखाया। लेकिन बीजेपी के सांसद, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों ने सेना का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। We are busy in the rally and China is making preparations
बार्डर की सुरक्षा
मोदी की फोटो डालकर सेना की जीत को मोदी की जीत बताते हुए देश को बरगलाया जा रहा।खुद मोदी कानपुर हो या पटना या कहीं और कहते फिर रहे हैं पाकिस्तान ने अगर हमला किया तो मुंहतोड़ जवाब देंगे। जबकि हमारी सेना सर्च ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तानी आतंकियों और उसके भारत में स्लीपर सेल्स को खत्म करने में लगी है। लगभग रोज ही एनकाउंटर कर रही है हमारी सेना। मोदी सरकार ने बहुत पहले दावा किया था, कि वह पाकिस्तान बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था में रे का प्रबंध कर रही, जिससे भारत में एक भी आतंकवादी नहीं घुस सकेगा। क्या हुआ उस दावे का?
विपक्ष जानना चाहता है, कि सच क्या है? लेकिन मोदी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने से भाग रही है। क्योंकि संसद में मोदी सरकार विपक्षी नेताओं के सवालों के उत्तर देने की स्थिति में नहीं होगी। किरकिरी होगी सरकार की। पार्टी के स्वार्थ की सारी गोपनीयता खुल जाएगी। एयरमार्शल पहले ही सरकार को दोषी ठहरा चुके हैं, कि वादा क्यों करती है सरकार? जब समय पर युद्धक विमान और हथियार नहीं मिल पाएंगे।
नग्नता को परिचित
सच तो यह है कि हमारी वायुसेना कमजोर कर दी गई है। जीडीपी बड़ी, लेकिन उस रेशियों में सेना का बजट नहीं बढ़ा। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी बीजेपी सरकार की पार्टी के कुलदीप सिंह सेंगर बलात्कार और हत्या के मामले में सजा काट चुके हैं। खुलेआम बीजेपी नेता हाइवे पर सेक्स करते पकड़े जा चुके हैं। विधायक के बेटे के पास तीन सौ वीडियो बीजेपी की नग्नता को परिचित करा रहे। बलिया में क्या कुछ हुआ यह बीजेपी नहीं बताएगी। बल्कि बलात्कारियों को हमेशा की तरह बचाने में लगी रहेगी। जैसा महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में सांसद को बचाकर किया गया।
चीनी के रडार पकड़ ही नहीं पाएंगे
हिंदू मुस्लिम अगड़े पिछड़े करके समझ में फूट डालकर सत्ता पाने में लगी बीजेपी देश की हिफाजत के विषय में सोच ही नहीं रही। राफेल खरीदी, लेकिन सोर्स कोड नहीं लेने का नतीजा सेना को भुगतना पड़ा। डीआरडीओ राफेल में देशी मिसाइलें फिट नहीं कर सका। आने वाले खतरे से अनजान बनी बीजेपी के लिए चुनाव और जैसे भी हो जीतने से ही मतलब है। जबकि चीन पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी का विमान जे 35 से लैस करने में लगा है जिसे रडार पकड़ ही नहीं पाएंगे।
पाकिस्तान के साथ झड़प में भारतीय सेना अपने बाहुबल और चतुर रणनीति से पाकिस्तान पर बढ़त बनाए हुई थी। जबकि पाकिस्तान को चीन अपने सेटलाइट से भारत के जर्रे जर्रे की लोकेशन ट्रेस कर रहा था। जब भारतीय सेना ने बढ़त बढ़ाई, तभी सीजफायर, वह भी ट्रंप की धमकियों से डरकर बीजेपी सरकार ने कर लिया। यह सेना का मनोबल गिराने वाला “दुष्कर्म” कहा जायेगा।
मोदी सरकार के पास इच्छाशक्ति और साहस के साथ रणनीति का अभाव है। सरकार एयर मार्शल के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही? समय पर भारत में बने युद्धक विमान और बाकी हथियार की आपूर्ति नहीं करनी थी तो फिर वादे और दावे क्यों करती है बीजेपी सरकार?
चीन का खतरा
चीन भारत को चारों तरफ से घेरने और अपनी शक्ति बढ़ाने में लगा है। बांग्लादेश के साथ मिलकर चीन बंगाल बॉर्डर के पास पुराने हवाईअड्डे को नई साज़ सज्जा देने में लगा है। वहां चीनी रडार युद्धक विमान मिसाइलें युक्त रखने की योजना पर काम कर रहा है। जिससे भारत का पूर्वोत्तर बंगाल, बिहार, उड़ीसा सहित दक्षिण के सभी राज्यों पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन मोदी और बीजेपी केवल फुट डालकर शासन करने की कुनीति पर चल रही है।
सच तो यह है, कि जितना बोल बच्चन दे ले बीजेपी, उसे जनता और राष्ट्र की एकता और अखंडता की तनिक भी परवाह नहीं है। अपने मित्र को कारोबार दिलाने के फेर में भारत के सभी सटे हुए राष्ट्रों के साथ संबंध खराब कर ली है। बांग्लादेश जिसका उदय ही भारत की कृपा से हुआ था वहां तख्तापलट कराया गया। पाकिस्तानी आई एस आई के एजेंटों और अमेरिकी दौलत बांटकर छात्रों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया गया। बीजेपी सरकार चुपचाप देखती रह गई। हस्तक्षेप तक करने की जहमत नहीं उठाई। जबकि इंदिरा गांधी ने अमेरिकी धमकी को दरकिनार कर बांग्लादेश के रूप में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिखाए थे। We are busy in the rally and China is making preparations
चुनावी रणनीति
अटल बिहारी बाजपेई जी ने भी अमेरिकी धमकियों पाबंदियों की परवाह नहीं करते हुए इंदिरा गांधी के आदर्श पर चले और पोखरण दो कराया। धनी देशों की सेटेलाइट पता ही नहीं चला सकी थी। सवाल यह है कि कथनी छोड़ करनी कब करेंगे मोदी। रैलियों में पाकिस्तान को सबक सिखाने की चीख से आतंकवाद कम नहीं होगा। बीजेपी के मोदी भक्त सीजफायर से काफी मायूस हुए हैं। कहां मोदी द्वारा पी ओ के पर कब्जा करने का दावा करते रहकर भक्तों में उत्साह भरते रहे, ताकि बूथ मजबूत कर चुनाव दर चुनाव जीतते रहे।
हर घर सिंदूर बांटने की योजना
अब बीजेपी के कार्यकर्ता भयभीत हैं। आपदा में अवसर तलाशने वाले मोदी द्वारा हर घर सिंदूर पहुंचाने की योजना बनाकर हिंदू मतों को एकजुट करने की योजना पर तब पानी फिर गया, जब समूचे देश की भयानक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर आने लगी। इतने प्रबल विरोध की आशा मोदी सरकार और बीजेपी को नहीं रही होगी। तभी तो दैनिक अखबारों में हर घर सिंदूर बांटने की योजना बनाकर परखा गया कि देश की जनता क्या प्रतिक्रिया देती है।
तीन दिनों तक बीजेपी देखती समझती रही लेकिन जब देख लिया कि उसकी चाल नाकाम हो चुकी है तो पल्ला झाड़ लिया और अखबारों में छपी खबर को फेक बताने लगी। अगर फेक खबर छापी गई तो मानहानि का दावा क्यों नहीं किया बीजेपी ने? गोदी मीडिया चीख चीख कर हर घर सिंदूर बांटने की घोषणा करती रही। वह तो मोदी की मीडिया है। उसपर एक्शन क्यों नहीं लिया जाता। चंद महीनों बाद पाकिस्तान से फिर भारत को जूझना पड़ सकता है। सवाल है चीनी चालों का जवाब देने के लिए कितनी तैयारी है मोदी सरकार की?
लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान
बीजेपी दैत्य है या दानव?
भारतीय सेना की गौरव गाथा है ऑपरेशन सिंदूर
भाजपा की निंदनीय विचार
मुंबई: पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को टार्गेट किलिंग किया था। दरअसल पाकिस्तान चाहता है भारत में हिंदू-मुस्लिम के बीच दंगे हों तभी तो भारत कमजोर होगा। दुर्भाग्यवश बीजेपी पाकिस्तानी एजेंडे पर ही काम करते हुए जहरीले बोल बोले जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर जो हमारी सेना ने पीओके स्थित आतंकवादियों के अड्डे नष्ट करने के साथ ही सौ से अधिक आतंकवादियों को भी मार गिराया। इसमें मजेदार बात यह है, कि नेतृत्व कर्नल सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह को दिया गया। पाकिस्तान के महत्वपूर्ण हवाईअड्डे भी तहस नहस कर दिए। तुर्की के ड्रोन और चीन के हथियारों का भारतीय फौज ने धुआं निकाल दिया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी, सेना को अपमानित करते हुए मोदी को ऑपरेशन सिंदूर का नायक बताते हुए पोस्टर लगाए, साथ ही हर घर शिक्षा रोजगार नहीं पहुंचाने वाले हर घर सिंदूर भेजकर हिंदुओं की भावनाओं का मजाक उड़ाने की सोच ली।
पिछले 60 सालों से पति का इंतजार
यह नहीं पता उन्हें कि भारत की हिंदू पत्नियां पति के सिंदूर से अपनी मांग संवारती हैं।बीजेपी के सिंदूर पहुंचाने के मामले में देश में उबाल आ गया और निश्चय किया गया जो भी लुच्चा और लफंगा सिंदूर लेकर आएगा। उसकी जमकर कुटाई होगी। सोशल मीडिया पर देश में नारी के सुहाग चिन्ह को लेकर बीजेपी के खिलाफ भावना उजागर हुई। जिस सिंदूर बांटो अभियान के द्वारा बीजेपी अपना वोट बैंक बढ़ाना चाहती थी, उसी को लेकर धुर विरोध शुरू हो गया। इसमें यह भी लिखा गया, “मोदीजी पहले सिंदूर अपनी पत्नी को भेजे जो पिछले साठ सालों से इंतजार कर रही हैं।”
हर घर सिंदूर योजना
वोट बैंक के लिए भाजपा जो न करे, थोड़ा ही है। पहलगाम हो या पुलवामा दोनों ही जगह सुरक्षा देने में बीजेपी सरकार चूक गई थी। नतीजन पहलगाम में 26 महिलाओं के सुहाग उजड़ गए और पुलवामा में चालीस सैनिकों की पत्नियों की मांग के सिंदूर पुछ गए। पाकिस्तान के साथ युद्ध हो या आतंकियों के साथ मुठभेड़ यहां हजारों जवान शहीद हो गए। उनकी पत्नियां विधवा और बच्चे अनाथ हो गए और अब बीजेपी सभी हिंदू घरों में सिंदूर भेजने की योजना पर काम कर रही है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह इस पर सवाल उठाते हैं। भारतीय हिंदू पत्नियां अपने पति के नाम का ही सिंदूर अपनी मांग में डालती हैं। किसी पराई औरत का सिंदूर अपनी मांग में भरना ही नहीं चाहेगी। न भरती ही भी हैं। संजय सिंह सवाल करते हैं कि क्या पहलगाम में विधवा हुई पत्नियों को सिंदूर भेज पाएंगे? क्या पुलवामा और उरी में शहीद फौजी जवानों की पत्नियों को सिंदूर दिया जा सकता है? क्या भारत पाकिस्तान युद्ध में शहीद 21 जवानों की विधवाओं को सिंदूर भेजा जा सकेगा? संजय सिंह के सवाल भारतीय हिंदू विचारधारा के सवाल हैं। उनका विरोध कर पाना किसी के बूते का नहीं है।
एजेंडा बना लिया गया है गोदी मीडिया
हो सकता है, गोदी मीडिया के निर्लज्ज एंकर्स संजय सिंह को हिंदू विरोधी घोषित कर, देशद्रोही भी कह दे। उनको लानत मलामत भेज सकते हैं, क्योंकि उनके मालिक का एजेंडा है बीजेपी सत्ता आरएसएस, बजरंग दल जैसे कथित हिंदू संगठनों से अगर कोई निष्पक्ष पत्रकार सवाल पूछता है तो उसे एंटी हिंदू और देश विरोधी घोषित करने, मुगलों की पैदाइश होने, डी एन ए टेस्ट कराने की बात, दो दो रुपाल्ली के ट्रोलर ट्रोल करने लगते हैं और मोदी विरोधियों को देशद्रोही होने का सार्टिफिकेट देने लगते हैं।
भारतीय सेना की गौरव गाथा है ऑपरेशन सिंदूर
सोशल मीडिया में अपने सरकार से कोई सवाल पूछ लिया तो अंधभक्त हो या बीजेपी नेता तुरंत एक्शन मोड में आ जाते हैं और गालियों की बौछार शुरू कर देते हैं। मुगलों की, हलाल की औलाद कहने में उन्हें शर्म नहीं आती। बीजेपी के सवाल को घुमाकर आपको देशद्रोही हिंदू विरोधी बताने लगते हैं। ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की गौरव गाथा है। लेकिन प्रचार तंत्र उसे महत्त्व नहीं देता। सारी उपलब्धियां बीजेपी और मोदी की बताने लगता है।
मुस्लिम स्त्रियां सिंदूर से अपनी मांग नहीं भरती। तमाम ऐसी हिंदू महिलाएं भी मांग में सिंदूर नहीं डालतीं। अन्य हिंदू स्त्रियां अपनी मांग में केवल अपने पति के नाम का सिंदूर डालती हैं। किसी पराए मर्द के नाम का नहीं। सवाल यह भी है, कि देश में करोड़ो हिंदू बेवाएं भी हैं। जिनके पति की मृत्यु के बाद से सिंदूर नहीं डालती। कुल मिलाकर चालीस करोड़ हिंदू पत्नियां अपनी मांग में सिंदूर भरती हैं। सिंदूर प्रतीक है पति के जीवित रहने का। जिनके पति जीवित नहीं वे सिंदूर क्यों पहनेंगी?
सेना का अपमान, हिंदू संस्कृति से खिलवाड़
हर हिंदू परिवार में सिंदूर पहुंचाने की बात उठ रही है। भाजपा ने फौजी उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि बताते हुए मोदी की फोटो चस्पा किए हैं जिसमें सेना का चेहरा नहीं है। बीजेपी ने इस पोस्टर के द्वारा सेना को अपमानित किया है और अब हर हिंदू घरों में सिंदूर भेजकर बीजेपी हिंदू संस्कृति से खिलवाड़ करे हुए अपना वोट बैंक बनाना चाहती है।
लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान..
संजय सिंह के सवाल सेना का सम्मान करते हैं। उनका कहना कि बीजेपी का कोई लुच्चा लफंगा हिंदू औरतों को ले जाकर सिंदूर देगा?आखिर सिंदूर को लेकर बीजेपी अपना प्रचार क्यों कर रही है। बीजेपी से सवाल है, कि “तुम सिंदूर क्यों भेज रहे हो?” उन्होंने यह भी कहा, कि “अपनी मां भाभी और पत्नी को दूसरे के द्वारा अपने नाम का सिंदूर पहनाकर दिखा दे।” दरअसल लोगों का सिंदूर छीनने में भाजपा सरकार का बहुत बड़ा योगदान है। पहलगाम हमले के समय सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटा ली गई थी?
आपकी गलती से पुलवामा हुआ। आपने एयरलिफ्ट नहीं दिया। पहलगाम पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था में आप चुके। पांच दर्जन से अधिक हिंदू पत्नियां विधवा बनीं आप की गलतियों से। लेकिन बीजेपी को अपनी गलती स्वीकार ही नहीं होती। दूसरे के श्रम और शौर्य को अपना बताने की आदत हो गई है। बिना श्रम किए भोजन करने वाले दैत्य होते हैं। दूसरों का हक मारने वाले दानव होते हैं। सच कहा जाए तो हिंदू विधवाओं और सेना का अपमान करने वाली बीजेपी को हिंदुत्ववादी और सनातनधर्मी बोलने का अधिकार ही नहीं है।सनातनधर्म स्व नही सर्व में विश्वास रखता है। सनातन मैं नहीं हम कहना सिखाता है। आप तो सेना के पुरुषार्थ को ही छीनकर अपना पुरुषार्थ बताकर वोट की राजनीति कर रहे हैं।
भाजपा की निंदनीय विचार
हिंदू विधवाओं को क्या सिंदूर देंगे जिनके पति पुलवामा, पहलगाम और उरी में शहीद हुए? किसी लुच्चे और लफंगे के हाथों का सिंदूर एक भी हिंदू पत्नी स्वीकार नहीं करेगी। किस हैसियत से सिंदूर देने का कुत्सित विचार आया? हर घर सिंदूर पहुंचाने का विचार ही निंदनीय है। ऐसी निकृष्ट सोच वाली पार्टी जिसके मंत्री बहादुर देश की बिटियों को आतंकी की बहन कहता है। सेना के शौर्य का अपमान केवल निहित स्वार्थ वोट के लिए केवल और केवल बीजेपी ही कर और सोच सकती है। सच तो यही है जैसा राहुल गांधी ने संसद में कहा था बीजेपी का हिंदुत्व देश का हिंदुत्व नहीं है बिल्कुल सटीक बैठता है।
सर्प का स्वभाव है डसना, चाहे जितना दूध पिलाया जाए।
क्या चीन के रहते भारत पाकिस्तान का पानी रोक सकता है?
जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?
अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश, सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं।
भारत को क्यों सफाई पेश करनी पड़ी?
सरकार ने किया सेना का बार-बार अपमान
सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी किरकिरी
देश की जनता को है सच जानने का अधिकार।
सरकार ने गलती किया जो सोर्स कोड नहीं मांगा।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल?
मुंबई: जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी अपने पद और गोपनीयता की शपथ ले रहे थे तब भारत के जन्मजात शत्रु पाकिस्तान से दोस्ती करने की कोशिश करते हुए हमारे देश के प्रधानमंत्री ने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था।जबकि इसके पूर्व हमारे किसी भी प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को नहीं बुलाया था।मोदी ने सहृदयता दिखाते हुए आमंत्रित किया।प्रयास अच्छा जरूर रहा।
बिन बुलाए मेहमान
फिर भी मोदी ने विदेश यात्रा से लौटते समय बिन बुलाए मेहमान की तरह पाकिस्तान चले गए। लेकिन कहावत है कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती। उसी तर्ज पर पाकिस्तान पहले भी आतंकी हमले भारत में किए थे और गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की बातें कहते रहे थे। फिर पाकिस्तान से दोस्ती का प्रयास ही बेमानी थी। हमारे प्रधानमंत्री कांग्रेस शासन की बात छोड़ भी देते और अपनी पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी के समय संसद पर आतंकी हमला याद रखते तो भूलकर भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से दोस्ती की पेग नहीं बढ़ाते।
अब मोदी के ही शासनकाल में पठानकोट, उरी, पुलवामा और अभी हालही के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों का स्याह चेहरा सामने आया, जिसकों देख उनकी आँखें खुल गईं होंगी, कि सर्प का स्वभाव है डसना, चाहे जितना दूध पिलाया जाए।
क्या चीन के रहते भारत पाकिस्तान का पानी रोक सकता है?
पाकिस्तान के आतंकवादियों को अमेरिका पालता है। अमेरिका बनिया देश है। वह दूसरे देशों को लड़ाकर अपने हथियार बेचता है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि तोड़ने के कारण ही अब चीन ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने जा रहा है। वैसे भी सिंधु और उसकी सहायक नदियों में पानी तिब्बत से ही आता है जिसपर चीन का कब्जा है। वैसे भी भारत पाकिस्तान का पानी तभी रोक पाएगा जब बहुत बड़े बांध बनायेगा। लेकिन अड़चन यही होगी कि तब तक चीन पांच नदियों का पानी रोक चुका होगा। चीन की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है, कि वह जब चाहे भारत की नदियों को सुखा कर सकता है। सिंधु नदी संधि तोड़ना प्रतीकात्मक हो सकता है। मनोवैज्ञानिक दबाव संभव है। लेकिन जब तक चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है भारत उसका पानी रोक ही नहीं पाएगा।
जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?
जब दो देश युद्ध लड़ते हैं तो नुकसान दोनों का होता है। ब्लूम वर्ग को इंटरव्यू में भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने कहा, पाकिस्तान के साथ संघर्ष में भारतीय जेट गिरने की बात महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि विमान गिरे ही क्यों? भारत ने अपनी गलतियों को पहचाना, उन्हें जल्दी सुधारा और फिर दो दिन के भीतर दुश्मन के ठिकानों को लंबी दूरी से निशाना बनाकर एक बार फिर प्रभावी तरीके से जवाब दिया। लेकिन एयर मार्शल ने सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा, जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो टेंडर ही क्यों देते हैं?उन्होंने पूछा जब समय से एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ और पूरा ही नही कर सकते तो वादा ही क्यों करते हो? दरअसल समय पर युद्धक विमान नहीं मिलने की ओर इशारा कर रहे थे जिसमें सरकार फेल हुई।
अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश, सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं।
मोदीजी की एक विशेषता है, वे सेना इसरो का श्रेय खुद लेते रहते हैं लेकिन अपनी नाकामी छुपाने की हरचंद कोशिश करते रहते हैं।ऑपरेशन सिंदूर हमारी जांबाज़ सेना ने चलाया। पाकिस्तानी आतंकवादियों को और उनके ठिकाने नष्ट करने के साथ पाकिस्तान के महत्वपूर्ण हवाईअड्डों को क्षति पहुंचाई ताकि उसके लड़ाकू विमान उड़ ही नहीं सकें। यहां तक कि पाकिस्तानी पायलट अपने विमानों को बचाने के लिए दौड़े परन्तु भारतीय सेना ने उनके हैंगर पर हमला करके विमानों को ही नष्ट कर दिया। सेना कहती है आज का युद्ध जमीन, आसमान, पानी और अंतरिक्ष में लड़ा जाता है। यहां तक कि साइबर द्वारा प्रोपोगंडा फैलाकर लड़ा जाता है जैसा चीन ने पाकिस्तानी पक्ष में किया।
भारत को क्यों सफाई पेश करनी पड़ी?
पाकिस्तानी एंकर्स भारत की गोदी मीडिया के एंकरों से ज्यादे समझदार हैं जो भारत के जेट और राफेल गिराने के दावे कर रहे थे जिससे पाकिस्तानी सेना का हौसला बुलंद हो सके। भले भारतीय सेना की मार से पाकिस्तानी फ़ौजी भागते नजर आए। लेकिन गोदी मीडिया के अनुसार हमारे सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर लाहौर, इस्लामाबाद और कराची तक जीत लेने का झूठ बोलकर भारत को हमलावर बताने में लगे थे। मजबूर होकर सरकार को सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजकर दुनिया को बताना पड़ा कि हमलावर हम नहीं पाकिस्तान द्वारा पाले गए आतंकी हैं जिन्होंने बार बार कायराना हरकते करके निरीह भारतीयों को मारा है।
सरकार फौज के ऑपरेशन सिंदूर को बीजेपी का बताने के लिए सेना का अपमान बार-बार किया और सैनिक वर्दी में मोदी की फोटो लगाकर पोस्टर टंगवाए। खुद मोदी भी सेना के शौर्य को अपना बताने में चुनाव प्रचार करते रहते हैं। अपना शौर्य बताने वाले बीजेपी के प्रधानमंत्री हमारे जेट जिसमे राफेल भी थे, इसे छुपाते क्यों हैं? सेना ने साफ साफ कहा संघर्ष में नुकसान होता है। कितने विमान गिरे यह मुद्दा नहीं है। क्यों गिरे यह प्रमुख मुद्दा है। एयर मार्शल ने तो बीजेपी सरकार के बड़बोले पन की पोल खोलकर रखते हुए कहा जब समय पर मुहैय्या ही नहीं कर सकते तो वादे ही क्यों करते हो?
सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी किरकिरी
विपक्ष विशेषकर राहुल गांधी और राष्ट्रभक्त जनता जब सवाल पूछती है तो बीजेपी की ट्रोल कंपनी देशद्रोही कहने लगते हैं। अमित मालवीय में तनिक भी नैतिकता बची हो तो एयर मार्शल और C D S की ओर उंगली उठाकर दिखाएं। दिन में ही तारे नजर आने लगे हैं। जो सच हमारे सेना के बड़े अधिकारी कह रहे हैं पीएम मोदी उन्हें छुपा क्यों रहे? विपक्ष विशेष संसद सत्र बुलाने की मांग कर रहा, तो भाग क्यों रहे? संसद का विशेष सत्र मत बुलाइए लेकिन विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सभी विपक्षी दलों के नेताओं को एक बड़े कमरे में जहां कैमरे लगे हों, बुलाकर विपक्षी नेताओं को तो जवाब दे ही सकते हैं। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे। किरकिरी तो हमारे सैन्य अधिकारियों ने मोदी सरकार की कर दी है।
देश की जनता को है सच जानने का अधिकार
अगर बीजेपी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की हिम्मत करे तो सारा सच देश के सामने आ जायेगा। सच क्या है? यह जानने का अधिकार विपक्षी दलों को ही नहीं 145 करोड़ जनता को भी है। बीजेपी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के खिलाफ संपूर्ण देशवासी और पूरा विपक्ष सरकार और सेना के साथ खड़ा होकर देशभक्ति दिखा चुका है। अब बीजेपी को अपनी देशभक्ति दिखाने की जरूरत है। सच क्या है? क्या सचमुच राफेल मार गिराया गया, जिसे बीजेपी सरकार ने यूरोपीय संगठन के राष्ट्र फ्रांस से खरीदा था।
सरकार ने चूक किया जो सोर्स कोड नहीं मांगा। जबकि मनमोहन सिंह की सरकार ने बेहद कम मूल्य पर राफेल खरीदी की बात की थी, वह भी सोर्स कोड सहित। ताकि टेक्नोलॉजी भारत को मिले और उस पर भारत निर्मित मिसाइलें तैनात की जा सकें। लेकिन नाटो संगठन अमेरिका के पिट्ठू राष्ट्रों का संगठन है। मोदी के मित्र ट्रंप ने अपना बदसूरत चेहरा पाकिस्तान का सपोर्ट कर दिखा दिया।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल?
मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर सवा सौ बार विदेश यात्रा से मोदी ने कौन सी उपलब्धि हासिल की? क्योंकि एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आया। यहां तक कि सदाबहार दोस्त रूस भी क्यों खुलकर भारत के साथ नहीं आया? जो पाकिस्तान में स्टील प्लांट सहित कई प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है। बीजेपी सरकार ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध इतने कड़वे कर लिए हैं जिससे भारत के साथ कोई पड़ोसी देश तक नहीं आया।
नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते।
माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर
आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है।
कब-कितना फीस बढ़ाया गया?
D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है।
इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं।
जनता को ही दंडित किया जा रहा है।
जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है।
आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे।
सरकार का दायित्व
जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं। शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है।
लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो।
मनपा मुख्यालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर
मनपा आर/दक्षिण वार्ड के सहायक आयुक्त मनीष सालवे भ्रष्टाचार में लिप्त
मनपा नियमों का हो रहा चीर हरण
मनपा नियमों की धज्जियां उड़ाने पर अमादा है जिम्मेदार अधिकारी
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री ने आदेश जारी किया है कि मुंबई में अब और गैरकानूनी बांधकाम पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा। गैरकानूनी बांधकाम के भरमार के कारण मुंबईकर जीवनोपयोगी सुविधाओं से वंचित होते हैं। लेकिन सुनता और मानता कौन है? मुख्यमंत्री का आदेश।
कांदीवली बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) आर/दक्षिण वार्ड के भ्रष्ट वार्ड ऑफिसर मनीष सालवे और पदनिर्देशित अधिकारी (D.O) अभय जगताप दौलत कमाने के लिए गैरकानूनी बांधकाम को संरक्षण दे रहे और उसके बदले लाखों रुपयों की वसूली हो रही है। आइए अवैध ठेकेदार जलील खान द्वारा किए जा रहे गैरकानूनी बांधकाम का जायजा लेते है।
मनपा नियमों का चीर हरण
कांदीवली पूर्व, सिंह ईस्टेट, रोड़ नंबर 3, नवजीवन सोसायटी ग्राउंड प्लस दो महले का कमर्शियल अवैध निर्माण
हमने कांदिवली (पूर्व) स्थित सिंह ईस्टेट के रोड नंबर -३, में जैसे ही प्रवेश किया। नवजीवन सोसाइटी में ही ग्राउंड +२ (तीन मंजिला), के दो कमर्शियल गालों का गैरकानूनी तरीके से बांधकाम किया जा रहा है। यहां दिन के उजाले में अवैध निर्माण इतेने आराम से किया जा रहा है कि ठेकेदार को किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई दे रही है। यहां अवैध निर्माण को पूरा करने में आश्वस्त से लग रहे है मजदूर, मिस्त्री और ठेकेदार।
ठेकेदार ने बताया कि आर/दक्षिण, वार्ड को वे लाखों रुपए दे चुके हैं। यहां तो एक ही फंडा चलता है, नोट दो गैरकानूनी बांधकाम करते रहो। उक्त गैरकानूनी बांधकाम का ठेकेदार है जलील खान। जिसके चेहरे पर जंग जीतने की खुशी झलक रही थी। ठेकेदार जलील खान मूंछों पर ताव देते हुए कहता है, कि “यहां का वार्ड और नेता उसके साथ है! कोई मेरी कितनी भी कंप्लेन करे, मेरा कुछ नहीं उखड़ेगा।” वाह..! मानना पडेगा गैरकानूनी बांधकाम करने वाले अवैध ठेकेदार जलील खान की हेकड़ी को। जिसके सामने वार्ड ऑफिसर मनीष सालवे या तो विवश हैं या उनकी जेबें गर्म हो चुकी हैं।
सहायक अभियंता संतोष भेंडवडेकर ने बताया कि परिमंडल -७, के उपायुक्त (DMC) संजय कुर्हाडे बेहद प्रभावशाली अधिकारी हैं। जिनका सम्बंध राज्य के कई नेताओं से है। जिनका संरक्षण भी उन्हें प्राप्त है। यह भी ज्ञात हुआ कि अपने पद और पॉवर का नाजायज फायदा उठाते हुए उपायुक साहब ने सहायक आयुक्त मनीष सालवे और डी. ओ. अभय जगताप पर दबाव बनाकर गैरकानूनी बांधकाम कराते और संरक्षण देते हैं। लाखों में खेलते है।
दंडात्मक कार्यवाही की पहल
इस काले कारोबार में सहायक आयुक्त और डी. ओ. लिप्त। ये दोनों भी भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद भी मालामाल हो रहे हैं। राज्य के मुखिया से हमारी मांग है कि निष्पक्ष पारदर्शी जांच पूरे मुंबई शहर में कराएं। अवैध बांधकाम की सूची बनवाएं। गैरकानूनी बांधकाम पर तोड़क कार्रवाई करें साथ ही भूमाफियों और ठेकेदारों को कानूनी ढंग से दंडित करने की पहल करें।
डिजिटल डेस्क BJP Government: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को झूठे भ्रष्टाचार में फंसाकर सत्ता का खेल खेलने वाली बीजेपी जब सत्ता में आई तो राज्य को विकसित करने का उसका नजरिया भी सामने आने लगा है। यहां जनता को शराबी बनाकर अपनी तिजोरी भरने का पुख्ता इंतजाम कर लिया है।
सरकार ने 67 शराब की नई दुकानें खोलकर जनता को नशा मुक्त बनाने में लगी है। नशा यानी जीवन। जीवन से मुक्ति दिलाने के लिए शराब का सहारा ले रही है। अब जनता शराब पीकर मदमस्त रहा करेगी। उसे मंहगाई बेरोजगारी और शिक्षा की चौपट की जा रही व्यवस्था नहीं दिखेगी। छत्तीसगढ़ के विकास रचने के लिए अब 741 सरकारी शराब के ठेके चलेंगे। जिसकी कमाई से सरकार मनमाने ढंग से राजसी जिंदगी जीने की व्यवस्था कर लेगी।
कभी विधायकों के वेतन तो कभी भत्ते में बढ़ोत्तरी करके खुशी मनाएंगे विधायक। और चाहिए ही क्या उन्हें? बीजेपी सरकार नहीं चाहती कि गरीब निम्न मध्यम वर्ग पढ़े लिखे क्योंकि शिक्षा का व्यापारीकरण कर चुकी पार्टी की सरकार जानती है कि गरीब और निम्न वर्ग पढ़ लिख लेगा तो गुलाम बनने से इनकार कर सरकार से रोजगार और अन्य अधिकार मांगने लगेगा।
इसलिए न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी की कहावत को चरितार्थ करने के लिए 4000 सरकारी स्कूल बंद करने का बीजेपी राज्यसरकार ने फैसला कर लिया है। ऐसा ऐतिहासिक फैसला करने का दुस्साहस केवल बीजेपी सरकार ही कर सकती है। इतनी बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद करने से सरकार का खजाना भरा रहेगा। क्योंकि तब 35000 शिक्षकों को वेतन देने ही नहीं होंगे। यानी सरकार तीन का एक करके शिक्षक पदों को ही नहीं प्रधानाध्यापकों के पद भी खत्म कर देगी।
इस तरह से सरकार अरबों रुपए खर्च करने से पैसे बचा लेगी। क्योंकि बीजेपी नहीं चाहती कि लोग पढ़ें। वह तो जनता को अनपढ़ गुलाम बनाने में विश्वास करती है। अनपढ़ जनता रहेगी तो ही अनपढ़ लोगों की सरकार दौड़ेगी। बीजेपी को सिर्फ सरकार चलानी है जनता की सेवा नहीं। इसीलिए बीजेपी शिक्षित लोगों को शहरी नक्सली कहती हैं कि वे जनता के अधिकार मांगते हैं। ऐसे लोग सरकार की आंखों में बहुत चुभते हैं जो सरकार के नकारेपन को सार्वजनिक करे।
मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के अधिकारी एवं कर्मचारी हमेशा से ही हेराफेरी और घपले बाज़ी के लिए मशहूर रहे हैं। लेकिन आज आपके सामने कांदीवली पश्चिम का एक ऐसा मामला पेश करने जा रहे हैं, जो घपलेबाजों को भी शर्मसार कर दे। कहते हैं, बीएमसी जो कर दे, कोई पूछने वाला नहीं है। सत्ता या कुर्सी ही सर्वोपरि है। जब तक साहेब कुर्सी पर बैठे रहेंगे दीवान ही रहेंगे। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
क्या है पूरा मामला ?
वाकया है कि 14 अगस्त 1993 में अपने झोपड़े जिसकी माप 15 गुने 10 फीट रही। जिसके मालिक अब्दुल रहमान 90 हज़ार रुपये में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को बेच देते हैं जिसे 1976 के सेंसस में भी 15 गुने 10 का ही दर्ज किया गया है। बीएमसी के जल आपूर्ति विभाग ने 25/09/2017 को पेय जल का कनेक्शन सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या का पता शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग, त्रिकम दास रोड, कांदिवली (पश्चिम) के नाम पर दिया। जबकि बिजली का बिल आकांक्षा आर्केड CHS वड़ापाव शॉप त्रिकम दास रोड के पते पर आता है यानी फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसाइटी द्वारा मौर्या फास्ट फूड टी एंड कोलड्रिंक का प्रीमाइस में होने का पत्र सोसाइटी सेक्रेटरी द्वारा एक पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वॉर्ड को 12/03/2018 को लिखित रूप में दिया गया था। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
चाय की दुकान या फास्ट फूड की दुकान?
लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/03/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया। बीएमसी द्वारा यह पत्र mr. सावंत के नाम का केयर ऑफ दिया गया। जबकि बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स को सिर्फ चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को सिर्फ दो साल के लिए दिया गया। जिसमें शॉप आकांक्षा आर्केड का पता दर्ज किया गया था। हैरानी की बात यह कि गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम से वड़ा पाव बेचने का दर्ज किया गया है। (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
क्या है घपला?
इस घपलेबाजी पर तमाम सवाल उठ खड़े होते हैं। वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड क्यों लिखा गया? यदि वड़ा पाव शॉप लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है, तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स शॉप का एक्सेप्ट कैसे हुआ? नेचर ऑफ बिजनेस के अनुसार सिर्फ मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक्स लिखा गया है तो लाइट बिल में आकांक्षा वड़ा पाव कैसे लिखा जा सकता है? शॉप एंड एस्टेब्लिश यानी गुमास्ता लाइसेंस में आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग के पते पर नेचर ऑफ बिजनेस वड़ा पाव है, तो टी एंड कोल्ड्रिंक्स का क्यों नहीं है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग
इतना ही नहीं सवाल यह भी है कि जब सेंसस में 150 वर्ग फीट है तो गुमास्ता में 120 वर्ग फीट कैसे दर्ज किया गया है? इसमें कौन सा सही है? जबकि झोपड़े की खरीदी में एरिया 150 वर्ग फीट है और फॉर्म P में आकांक्षा आर्केड लिखा है तो बिल्डिंग एंड फैक्टरी विभाग की एन ओ सी जो केवल चाल में लिया जाता है, तो बिल्डिंग में कैसे लिया गया? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
इतने सारे घपलों घोटालों में कौन सा बीएमसी विभाग, एप्लीकेंट और आर्केड बिल्डिंग का सेक्रेटरी सहित तमाम लोग शामिल हैं और तमाम अनियमितताएं हुई या जानबूझकर की गई, कहीं धोखाधड़ी के लिए तो साजिश नहीं की गई? जांच कौन करेगा? और गलत करने वालों को कानून के हवाले कौन करेगा? करेगा भी या नहीं? कौन बता सकता है नियमों कानूनों की हत्या में शामिल तमाम किरदार कौन है? (Why is the scam not being investigated, R-South Ward is tied in the shackles of bribery)
एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की मांग भी कर रही है।
मुंबई– बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) प्रशासक ने 3 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मनपा का वार्षिक बजट जारी किया। 744.27 बिलियन रुपए का यह बजट 2024-25 के बजट की तुलना में 20 प्रतिशत ज़्यादा रहा। इस बजट में बुनियादी ढांचे के कोई नए या मुख़्य काम को शुरू करने का उल्लेख नहीं है। हालांकि पहले से ही मंजूर बड़ी परियोजनाएं या फिर चल रही परियोजनाओं को जारी रखने के लिए भारी मात्रा में पैसा ख़र्च करना पड़ेगा। जिसपर मनपा प्रशासन ने संसाधनों का और अधिक बंटवारा करने के बजाय उनका विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए पुराने कार्य को ही पूरा करने पर जोर देते हुए समझदारी का परिचय दिया है।
Bmc चुनाव की संभावना
इस बजट में किसी नए कर की घोषणा नहीं की गई है। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि BMC के चुनाव इसी वर्ष होंगे। परंपरागत रूप से यह देखा गया है कि सरकारें कर वृद्धि की पृष्ठभूमि में चुनाव नहीं लड़ा करती हैं या चुनाव लड़ना पसंद नहीं करती हैं।
Bmc बजट पर काबू
बीएमसी के बजट में पूंजीगत निवेश के लिए 431.62 बिलियन रुपए या कुल बजट के 58 प्रतिशत राशि का प्रावधान दिखाई देता है। इसका उपयोग मुख़्यतः शहर में नई संपत्तियों के निर्माण पर किया जाना है। दूसरी ओर राजस्व ख़र्च में वेतन, पेंशन समेत अन्य संस्थागत ख़र्च भी शामिल हैं। इसके लिए 312.04 बिलियन रुपए या कुल बजट की 41.52 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया गया है। BMC का राजस्व बजट हमेशा से ही काफ़ी बढ़ा हुआ था और अब इसे काबू में लाने की कोशिश होती देखकर अच्छा लग रहा है।
खर्च पर ध्यान देना जरूरी
लेकिन साल जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे राजस्व ख़र्च के बर्ताव पर पहनी नज़र रखनी ज़रूरी होगी। यहां बुनियादी ढांचे के रखरखाव का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है। परंपरागत रूप से म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनुएल्स में मेंटेनेंस शेड्यूल दिया जाता है, जिस पर पूर्व निर्धारित समयावधि के हिसाब से अमल करना होता है। लेकिन नगरपालिका कर्मियों की ओर से होने वाली चूक की वजह से पूर्व में बुनियादी ढांचे की विफ़लता के अनेक मामले देखे गए हैं, जिसमें जनहानि भी हुई है।
ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है, कि राजस्व बजट में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया होगा। कुछ बुनियादी सुविधाओं को नियमित रखरखाव की ज़रूरत होती है जबकि कुछ को उनकी उम्र बढ़ने के बाद भारी या बड़े रखरखाव की आवश्यकता होती है। बुनियादी ढांचे के वार्षिक निरीक्षण और उन्हें बेहतर स्थिति में रखने के लिए राशि का प्रावधान उतना ही आवश्यक है जितना आवश्यक नई बुनियादी सुविधाओं संबंधी संपत्तियों के निर्माण पर पैसा ख़र्च करना होता है।
दुर्भाग्यवश देश की अर्बन लोकल बॉडीज (ULB ) यानी शहरी स्थानीय निकाय, संसाधनों को लेकर काफ़ी संघर्ष करती हैं। यह बात GST की ओर से इन संस्थाओं के राजस्व संबंधी सभी रास्तों पर कब्ज़ा करने के बाद और भी सटीकता से लागू होती है। BMC की स्थिति और भी गंभीर है। इसका कारण यह है कि BMC पर अनेक विशाल परियोजनाओं का काम डाल दिया गया है, जो BMC की पूर्व में मजबूत रही वित्तीय स्थिति पर दबाव में डालने का काम कर रही है।
BMC का कमिटेड फंड
बजट में पहले से चल रही परियोजनाओं पर होने वाले कुल बिल यानी ख़र्च के रूप में 2.32 ट्रिलियन रुपए दर्शाए गए हैं। इस राशि को कमिटेड लायबिलिटी अर्थात प्रतिबद्ध देय राशि के रूप में दिखाया गया है। इस राशि में से 882.51 बिलियन रुपए केवल सड़क और पुलों के लिए ही रखे गए हैं। चूंकि वार्षिक बजटीय प्रावधान से यह बोझ नहीं उठाया जा सकता। इसलिए BMC को अपने भारी भरकम रिजर्व यानी जमा राशि को हाथ लगाना होगा। 817.74 बिलियन रुपए की इस जमा राशि के एक बड़े हिस्से को कमिटेड लायबिलिटी और वर्तमान में जारी निर्माण कार्य पर ही ख़र्च करने की नौबत आ गई है।
BMC के खजाने पर बोझ
ऐसे में यह साफ़ है कि महानगरपालिका के पास मौजूद जमा निधि का खजाना तेजी से खाली होता जा रहा है और यह भविष्य में बहुत ज़्यादा सहायता करने की स्थिति में नहीं होगा। चूंकि हम अनिश्चितता के दौर में रह रहे हैं, जहां अचानक आने वाला संकट शहर के सुचारू संचालन में व्यवधान डालता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय निकाय के पास जमा निधि ही ऐसे संकट को पार करने में उसकी सहायता करती है। लेकिन भविष्य में उसे जमा निधि से सहायता मिलने की संभावना कम ही दिखाई देती है।
बड़ी परियोजनाओं के इस अत्यधिक बोझ को लेकर पड़ने वाला दबाव नगर पालिका के बजट में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी वजह से बजट का पहला स्टेटेड ऑब्जेक्टिव यानी लिखित उद्देश्य फिस्कल डिसिप्लिन अर्थात वित्तीय अनुशासन और सस्टेनेबिलिटी यानी वहनीयता है। इसके तहत दो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला है रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन यानी राजस्व वृद्धि हासिल करना और एक्सपेंडिचर रेशनलाइजेशन यानी व्यय युक्तिकरण अर्थात सोच-समझकर ख़र्च करना।
BMC ने की सरकार से गुजारिश
निश्चित रूप से महापालिका प्रशासन चिंतित है और वह सिविक मशीनरी यानी नगरीय व्यवस्था को अपनी कमर कसने के लिए तैयार होने को कह रहा है। राजस्व वृद्धि करने के लिए नगरपालिका प्रशासन आय अर्जित करने या संसाधन जुटाने के नए स्रोत ख़ोज रहा है। इसकी शुरुआत करते हुए BMC ने राज्य सरकार को गुजारिश की है, कि वह महापालिका की ओर से एकत्रित किए गए प्रीमियम में राज्य सरकार की हिस्सेदारी के प्रतिशत को कम करें, ताकि स्थानीय निकाय को प्रीमियम में ज़्यादा हिस्सेदारी मिल सके। यदि राज्य सरकार ने उसकी यह गुजारिश मान ली तो 2025- 26 के दौरान ही उसे 3 बिलियन रुपए की अतिरिक्त आय होगी।
अधिनियम में संशोधन पर विचार
BMC ने वेकेंट लैंड टेनेंसी (VLT) यानी खाली जमीन किरायेदारी नीति भी जारी की है। इसके तहत वह उसके पास उपलब्ध खाली जमीन को दीर्घावधि की लीज पर दे सकेगा। इसके चलते BMC को 20 बिलियन रुपए मिलने की उम्मीद है। BMC इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या वह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) यूजर चार्ज लगा सकता है? ऐसा करने के लिए वह 2006 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सैनिटेशन बायलॉज यानी अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। उसका मानना है कि ऐसा हुआ तो वेस्ट मैनेजमेंट को इंडिपेंडेंट सस्टेनेबल यानी स्वतंत्रता के साथ वहनीय किया जा सकेगा।
BMC का प्लान
BMC ने कहा, कि वह स्लम्स यानी झोपड़पट्टी में आने वाले 50,000 के आसपास कमर्शियल यूनिट्स पर संपत्ति कर लगाना चाहता है। यह एक साहसिक नवाचार है और इसके चलते ULB को 3.5 बिलियन रुपए मिल सकेंगे। इसके अलावा वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जुड़े दहिसर ‘चेक नाके’ पर एक ट्रांसपोर्टेशन और कमर्शियल हब बनाने का प्रस्ताव है। इससे भी अतिरिक्त आय हासिल हो सकेगी। इसके अलावा BMC की वरली और क्रॉफोर्ड मार्केट जैसे इलाकों में अंडर यूटिलाइज्ड प्लॉट्स यानी कम उपयोग में आने वाले प्लॉट्स की नीलामी करने की भी योजना है। BMC की मनोरंजन कर वसूलने में तेजी लाने, अपनी विज्ञापन नीति को अंतिम रूप देने तथा ट्रेड लाइसेंस फ़ीस में वृद्धि करने की भी योजना है। Mumbai BMC Alarm bells in the municipal budget
संसाधनों को बढ़ाना भी आय अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा बेहतर दिनों में शुरू किए गए गैर ज़रूरी ख़र्च में कटौती करके भी पैसा अर्जित किया जा सकता है। BMC अब इस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ऐसा करने के लिए वह ख़र्च में युक्तिकरण की नीति लागू करने की इच्छुक है। इस नीति के तहत वह आस्थापना ख़र्च को न्यूनतम करने, कार्यबल की कुशलता बढ़ाने, 10 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण और प्वाइंट ऑफ यूटिलिटी यानी उपयोगिता के हिसाब से कार्य का चयन करना चाहती है।
BMC की सेवाएं
BMC देश में सबसे ज़्यादा संख्या में सेवाएं मुहैया करवाती है। इसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचा भी शामिल है। यह BMC की सेवाओं में सबसे अहम क्षेत्र है। इनके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। BMC को कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की आवश्यकता है। इसमें शहर की हवा, सॉलिड वेस्ट एंड सैनिटेशन मैनेजमेंट, ओपन स्पेसेस् और बगीचे, बाढ़ शमन एवं आपदा मुस्तैदी विशेषत: बाढ़ प्रबंधन का समावेश है। इन सभी के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं।
यह बात विशेष रूप से संशोधित BRIMSTOWAD (बृहन्मुंबई स्टॉर्म वॉटर डिस्पोजल सिस्टम) मास्टर प्लान के तहत स्टॉर्म वॉटर ड्रेंस यानी बरसाती पानी निकास नाली में की गई वृद्धि से साबित होती है। BRIMSTOWAD मास्टर प्लान में नई नालियों का निर्माण, पुरानी नालियों का विस्तार, होल्डिंग पॉन्ड्स यानी पानी को जमा करने के तालाब और नालों की संख्या में विस्तार के साथ मीठी नदी का समावेश है।
BMC का Water Sistema
BMC सबसे पुरानी बस सेवा BEST का भी संचालन करती है। इस अंडरटेकिंग यानी उपक्रम के लिए 10 बिलियन रुपए दिए गए हैं। इस राशि से वह बसों के अपने काफिले में नई बसों को जोड़ने के साथ ही 2,000 इलेक्ट्रिक बस भी शामिल कर रहा है। मुंबई के पास दशकों से एक मजबूत जलापूर्ति व्यवस्था है। वह इसे इसी तरह मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसी वजह से शहर के जलापूर्ति एवं सीवरेज विभाग को उन्नतिकरण के लिए 134.23 बिलियन रुपए की एक भारी-भरकम राशि दी गई है।
आश्चर्यजनक
आश्चर्यजनक रूप से शहर के डेवलपमेंट प्लान यानी विकास योजना (DP 2034) को लागू करने के लिए अलग से राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। शहर में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ यानी जिंदगी की गुणवत्ता मुख़्यत: विकास योजना के अमल पर ही निर्भर है। इस बात की संभावना है, कि व्यक्तिगत तौर पर विभागों के लिए किए गए प्रावधान के तहत विकास योजना पर होने वाला ख़र्च शामिल किया गया होगा। लेकिन बजट में DP के लिए अलग से हेड अर्थात मद बनाने को लेकर की गई सिफ़ारिश की उपेक्षा की गई है। DP में यह सिफ़ारिश की गई थी कि DP के लिए अलग से मद बनाकर उसके लिए किए गए प्रावधान को इसमें दर्शाया जाए।
कुल मिलाकर मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बजट में बेहतर करने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। लेकिन यह भी साफ़ है कि जिस ULB को देश की सबसे धनाढ्य यानी संपन्न महापालिका के रूप में पहचाना जाता था। वह अब अपने सामर्थ्य से अधिक काम लेने की वजह से मुश्किल में दिखाई दे रही है। एक लंबे समय के बाद अब वह न केवल अधिक संसाधन जुटाने की राह ख़ोज रही है, बल्कि वह राज्य सरकार से अपने हिस्से की अतिरिक्त राशि मांगते हुए बकाया राशि को जारी करने की भी मांग कर रही है। यह ऐसे वक़्त में हुआ है जब निर्वाचित स्थानीय निकाय अस्तित्व में नहीं है और महापालिका पर इस वक़्त सीधे राज्य सरकार का ही नियंत्रण है। वर्तमान स्थिति में सावधानी बरतना आवश्यक है। इस स्थिति में बेकार के ख़र्च से बचने की कोशिश होनी चाहिए।
निश्चित रूप से देश की अग्रणी ULB पर 2024 में हुए राष्ट्रीय और उसके बाद नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव का असर पड़ा है। इसी तरह वह अपने आसन्न चुनावों का दबाव भी झेल रही है। इन सारे दबावों के बावजूद मौजूदा स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को आकर्षित करने वाले बुनियादी कार्यों की घोषणा करने की होड़ के कारण शहर के वित्तीय स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम न पड़े। ऐसा हुआ तो एक वक़्त आएगा जब BMC के वित्तीय संसाधनों पर इतना बोझ बढ़ेगा कि वह टूटने की कगार पर पहुंच जाएगी। ऐसा हुआ तो यह घोर त्रासदी होगी।