महाराष्ट्र में बिजली कर्मचारियों का मुंबई धरना स्थगित। ईंधन भत्ता, भर्ती, वेतनवृद्धि, सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर राज्यभर में आंदोलन होगा।
नागपुर: महाराष्ट्र में बिजली तकनीकी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर प्रस्तावित आंदोलन का स्वरूप बदल गया है। तांत्रिक कामगार यूनियन ने 22, 23 और 24 सितंबर 2026 को मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला धरना स्थगित कर दिया है। अब संगठन ईंधन भत्ता, आंतरिक भर्ती, वेतनवृद्धि, कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर जरूरी सुविधाओं सहित 15 प्रमुख मांगों को लेकर राज्यभर में आंदोलन करेगा।
यूनियन ने साफ किया है कि आंदोलन स्थगित करने का मतलब मांगों से पीछे हटना नहीं है। बैठकों में आश्वासन मिलने के बावजूद कई मामलों में कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से पुराने मुद्दों के साथ नई समस्याओं को भी आंदोलन में शामिल करने का फैसला लिया गया है।
बैठकों में फैसले हुए, लेकिन अमल नहीं
कर्मचारियों की समस्याओं पर 16 जुलाई 2025 और 23 फरवरी 2026 को बैठकें हुई थीं। 23 फरवरी की बैठक के कार्यवृत्त के आधार पर तीन महीने के भीतर कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद कई मुद्दे लंबित हैं।
विद्युत सहायकों के ईंधन भत्ते और वरिष्ठ तकनीशियन से यंत्रचालक पद पर आंतरिक भर्ती का मामला वर्ष 2016 से अटका हुआ है। इन मांगों पर जल्द निर्णय लेने की बात कही जाती रही, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं हुआ। संगठन ने 18 सितंबर 2026 को आंदोलन का नोटिस भी दिया था।
विद्युत सहायकों को ईंधन भत्ता या दोपहिया वाहन
विद्युत सहायकों को काम के लिए आने-जाने में होने वाले खर्च को देखते हुए बढ़ा हुआ ईंधन भत्ता देने या इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही वरिष्ठ तकनीशियन से यंत्रचालक पद पर आंतरिक भर्ती का प्रस्ताव जल्द मंजूर करने की मांग है।
एक अप्रैल 2019 के बाद शुरू हुए उपकेंद्रों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम एक नियमित यंत्रचालक नियुक्त करने की भी मांग उठाई गई है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती के बिना उपकेंद्रों का नियमित संचालन प्रभावित हो सकता है।
एसईबीसी और ईएसबीसी कर्मचारियों की वेतनवृद्धि का मामला
कर्मचारियों की दो वेतनवृद्धियों का मुद्दा भी आंदोलन के प्रमुख विषयों में शामिल है। सामान्य आदेश 166 (पी), दिनांक 21 जुलाई 2005 के तहत संबंधित पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को दो वेतनवृद्धियां देने का प्रावधान होने की बात उठाई गई है। इसके बावजूद एसईबीसी और ईएसबीसी श्रेणी के कुछ कर्मचारी इस लाभ से वंचित हैं।
नियुक्ति के समय मिलने वाली दो वेतनवृद्धियां और हर साल मिलने वाली नियमित वेतनवृद्धि अलग-अलग हैं। संगठन ने यह भी मुद्दा उठाया है कि वेतन संरक्षण की अवधि में पहले दी गई वेतनवृद्धियों की तीन साल की वसूली कुछ कर्मचारियों से की गई, जबकि नए कर्मचारियों को दो वेतनवृद्धियों के लाभ के बिना वेतन दिया जा रहा है।
जाति सत्यापन लंबित होने के कारण अधिसंख्य घोषित कर्मचारियों के मामलों में भी समान नीति अपनाने की मांग की गई है। संगठन चाहता है कि प्रभावित कर्मचारियों के वेतन और वेतनवृद्धि से जुड़े मामलों पर स्पष्ट आदेश जारी हो।
पुल व्यवस्था और अतिरिक्त काम के बोझ पर आपत्ति
कुछ क्षेत्रों में उपकेंद्रों के संचालन के लिए इस्तेमाल की जा रही पुल व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर काम के लिए तैनात करने से काम का बोझ बढ़ने और उन्हें परेशानी होने की शिकायत है।
यूनियन ने गलत तरीके से की जाने वाली प्रतिनियुक्ति बंद करने की मांग की है। जिन क्षेत्रों में बाहरी स्रोतों से कर्मचारियों की भर्ती होने के बावजूद पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जाते, वहां पूरा अतिरिक्त समय भत्ता देने या कर्मचारियों की उपलब्धता के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी रखी गई है।
खंभे, तार और जरूरी औजार उपलब्ध कराने की मांग
बिजली कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण मिलने के बावजूद रोजाना के काम के लिए जरूरी सामग्री और औजारों की कमी का मुद्दा उठाया गया है। फील्ड में समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं होने से कामकाज प्रभावित होता है।
अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में पुराने और सड़े हुए बिजली के खंभे तथा पुराने कंडक्टर बदलने की मांग की गई है। इसके अलावा जिन इलाकों में एक ही 33 केवी फीडर से कई उपकेंद्र जुड़े हैं और उसी लाइन से औद्योगिक क्षेत्रों को भी बिजली दी जाती है, वहां आपूर्ति में रुकावट कम करने के लिए तीन डिस्क इंसुलेटर वाली सस्पेंशन लाइन बनाने की मांग है।
सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से वितरण व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को देखते हुए उन सभी वितरण ट्रांसफॉर्मरों का लोड सर्वे करने की मांग की गई है, जिन पर 30 प्रतिशत से अधिक सौर ऊर्जा उपभोक्ता जुड़े हैं। असंतुलित भार मिलने पर ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाने और जरूरी सुधार करने की मांग भी शामिल है।
महिला कर्मचारियों के लिए शौचालय और सुरक्षा कक्ष
महिला कर्मचारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शाखा कार्यालयों और उपकेंद्रों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। किराये की इमारतों और निजी परिसरों में चलने वाले शाखा कार्यालयों में तैयार शौचालय बनाने के साथ कंपनी परिसर के उपकेंद्रों और शाखा कार्यालयों में भी अलग शौचालय की व्यवस्था करने की मांग है।
रात की पाली में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सभी उपकेंद्रों पर सुरक्षा कर्मियों के लिए अलग कक्ष बनाने की मांग भी रखी गई है।
ठेका भर्ती पर रोक या एक साल का प्रशिक्षण
वर्ष 2013 से शुरू हुई सहायक कर्मचारियों की ठेका पद्धति को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए हैं। मांग है कि ठेका अवधि में काम करने वाले कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों की तरह काम लेने के बावजूद सुविधाओं के मामले में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
यूनियन ने सहायक कर्मचारियों की ठेका पद्धति से भर्ती बंद करने या इसे केवल एक साल की प्रशिक्षण अवधि तक सीमित रखने की मांग की है।
पुनर्गठन और तबादला नीति में बदलाव
विभागीय पुनर्गठन को सही तरीके से लागू करने और नियंत्रण कक्षों के अंतर्गत बनाए गए दो-तीन यार्डों का उचित नियोजन करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि व्यवस्था में स्पष्टता नहीं होने से कर्मचारियों के कामकाज में परेशानी होती है।
तबादला नीति में भी बदलाव की जरूरत बताई गई है। अलग-अलग मंडलों के कार्यक्षेत्र में अंतर और चिकित्सा संबंधी मामलों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए तबादलों के लिए उचित व्यवस्था बनाने की मांग है, ताकि सामान्य कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
राज्यभर में आंदोलन की तैयारी
तांत्रिक कामगार यूनियन ने मुंबई के आजाद मैदान में प्रस्तावित 22 से 24 सितंबर के धरने को स्थगित करते हुए आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। संगठन की मांग है कि 16 जुलाई 2025 और 23 फरवरी 2026 की बैठकों में तय मुद्दों पर कार्रवाई की जाए और 18 सितंबर 2026 के आंदोलन नोटिस को गंभीरता से लिया जाए।
यूनियन का जोर इस बात पर है कि समस्याओं को केवल बैठकों और आश्वासनों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए। अब कर्मचारियों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम और लंबित मांगों पर होने वाले फैसलों पर टिकी हैं।
