मुंबई के वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव। गोरेगाव का वीर सावरकर फ्लाईओवर बिना तोड़े ऊपर से नया एलिवेटेड रोड बनाने की योजना, जानें ट्रैफिक और कनेक्टिविटी पर असर।
मुंबई: वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट में गोरेगाव के वीर सावरकर फ्लाईओवर को लेकर बड़ा रास्ता निकाल लिया गया है। मुंबई महानगरपालिका ने मौजूदा फ्लाईओवर को तोड़े बिना उसके ऊपर से नया एलिवेटेड रोड बनाने की योजना तैयार की है। इससे उत्तर मुंबई कोस्टल रोड के रास्ते में आ रही एक बड़ी तकनीकी और निर्माण संबंधी बाधा दूर होने की उम्मीद है।
इस फैसले से गोरेगाव के मौजूदा फ्लाईओवर को बनाए रखते हुए कोस्टल रोड का काम आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, नए पुल के निर्माण की अंतिम मंजूरी, संशोधित लागत और काम पूरा होने की तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्यों अटक रहा था वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड का काम?
गोरेगाव में स्थित वीर सावरकर फ्लाईओवर को एमटीएनएल फ्लाईओवर के नाम से भी जाना जाता है। यह पुल रेडिसन होटल से रुस्तमजी ओजोन परिसर तक फैला हुआ है। इसका उद्घाटन 2018 में हुआ था और इसके निर्माण पर करीब 27 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।

वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड का प्रस्तावित मार्ग इसी फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरता है। ऐसे में पुराने पुल को बनाए रखते हुए नए मार्ग का निर्माण करना इंजीनियरिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिहाज से एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया था।
पहले इस जगह पर मौजूदा फ्लाईओवर को तोड़कर नया डबल-डेकर पुल बनाने का विकल्प सामने आया था। इससे पहले से बनी संरचना को हटाने और नए निर्माण की जरूरत पड़ती। अब पुराने पुल को तोड़े बिना उसके ऊपर नया एलिवेटेड रोड बनाने की योजना सामने आई है।
गोरेगाव-ओबेरॉय मॉल के बीच निर्माण कार्य की स्थिति
उत्तर मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के तहत गोरेगाव से ओबेरॉय मॉल के बीच भी एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जा रहा है। मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने इस परियोजना के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर काम की प्रगति का जायजा लिया था।
निरीक्षण से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हिस्से में प्रस्तावित 38 पिलरों में से 11 का निर्माण पूरा हो चुका था। इसके अलावा पानी के पाइपलाइन को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का काम जारी था।
आयुक्त ने अधिकारियों को निर्माण कार्य की गति बढ़ाने, सुरक्षा को प्राथमिकता देने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए थे, ताकि परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी हो सके।
गोरेगाव में ट्रैफिक पर क्या होगा असर?
कोस्टल रोड के निर्माण से गोरेगाव पश्चिम के वाहनचालकों को फिलहाल कुछ स्थानों पर ट्रैफिक प्रतिबंध और वैकल्पिक रास्तों का सामना करना पड़ सकता है। पिलरों का निर्माण, पाइपलाइन की शिफ्टिंग और सड़क के आसपास होने वाले दूसरे कार्य स्थानीय ट्रैफिक को प्रभावित कर सकते हैं।
9 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, वासरी हिल जंक्शन से एमटीएनएल जंक्शन की दिशा में स्वामी विवेकानंद मार्ग (एसवी रोड) के एक हिस्से पर कोस्टल रोड के काम के लिए यातायात प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों की घोषित अवधि 9 नवंबर 2026 तक थी। वाहनचालकों को इस मार्ग पर निकलने से पहले मुंबई ट्रैफिक पुलिस की नवीनतम अधिसूचना देखनी चाहिए, क्योंकि प्रतिबंधों में बदलाव संभव है।
लंबी अवधि में कोस्टल रोड का उद्देश्य पश्चिमी उपनगरों में उत्तर-दक्षिण यात्रा के लिए एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और एस.वी. रोड जैसे प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि प्रवेश और निकास बिंदुओं पर ट्रैफिक का प्रबंधन किस तरह किया जाता है।

वर्सोवा से दहिसर तक कितने बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है?
वर्सोवा-दहिसर लिंक रोड मुंबई के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए तैयार की जा रही एक बड़ी परियोजना है। इसके विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) में लगभग 18 किलोमीटर के मार्ग और करीब 16,300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का उल्लेख किया गया है। ये DPR के आंकड़े हैं।
इस परियोजना में एलिवेटेड रोड, इंटरचेंज, बोगदे और दूसरे प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बांगूर नगर और मालाड माइंडस्पेस जैसे हिस्से भी इसके मार्ग नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रस्तावित योजना में गोरेगाव-मुलुंड लिंक रोड के लिए कनेक्टर भी शामिल है। इससे भविष्य में पश्चिमी उपनगरों से पूर्वी मुंबई की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिल सकती है।
अब आगे क्या होगा?
वीर सावरकर फ्लाईओवर को बिना तोड़े उसके ऊपर नया एलिवेटेड रोड बनाने की योजना से वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड के निर्माण में आने वाली एक महत्वपूर्ण बाधा दूर होने की उम्मीद है। इससे मौजूदा सड़क संरचना का इस्तेमाल जारी रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने का विकल्प मिल सकता है।
अब इस हिस्से में अंतिम इंजीनियरिंग डिजाइन, निर्माण की मंजूरी, संशोधित लागत और काम पूरा होने की समयसीमा से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, निर्माण के दौरान गोरेगाव के वाहनचालकों के लिए ट्रैफिक व्यवस्था और वैकल्पिक मार्गों की ताजा जानकारी भी जरूरी रहेगी।
