BMC की QR-code जांच में 3,167 लाइसेंस ऐसे मिले जिनसे जुड़े अधिकृत हॉकर मृत पाए गए। अब लाइसेंस परिजनों को ट्रांसफर करने पर विचार है।
BMC की QR-code जांच में 3,167 ‘घोस्ट’ हॉकर लाइसेंस का खुलासा
मुंबई में हॉकर लाइसेंस को QR-code आधारित पहचान से जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान BMC को 3,167 ऐसे लाइसेंस मिले हैं, जिनसे जुड़े अधिकृत विक्रेताओं के बारे में सत्यापन में पता चला कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। अब प्रशासन यह देख रहा है कि ऐसे मामलों में लाइसेंस को पात्र परिजनों को ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं।
QR-code जांच में सामने आया बड़ा अंतर
मुंबई में हॉकरों की पहचान और लाइसेंस व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए BMC QR-code आधारित पहचान-पत्र जारी कर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क पर कारोबार कर रहा विक्रेता वास्तव में अधिकृत है या नहीं।
इसी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान 3,167 ऐसे लाइसेंस सामने आए जिनसे जुड़े मूल लाइसेंसधारी अब जीवित नहीं हैं। इसी वजह से इन्हें ‘ghost’ licences कहा जा रहा है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि इन सभी लाइसेंसों को फर्जी घोषित कर दिया गया है। इन मामलों में यह अलग से जांच का विषय है कि लाइसेंसधारी की मृत्यु के बाद उस स्थान या लाइसेंस का इस्तेमाल कौन कर रहा था।
अब मृत लाइसेंसधारियों के परिजनों पर नजर
इस खुलासे के बाद BMC के सामने अगला सवाल यह है कि इन लाइसेंसों का क्या किया जाए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, civic body ऐसे मामलों में संबंधित परिवार के सदस्यों को लाइसेंस ट्रांसफर करने की संभावना पर विचार कर रही है।
हालांकि, यह प्रक्रिया स्वतः नहीं होगी। किसी भी ट्रांसफर से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान, पारिवारिक संबंध और अन्य जरूरी रिकॉर्ड की जांच करनी होगी। इसलिए 3,167 मामलों को सीधे अवैध या फर्जी लाइसेंस कहना अभी सही नहीं होगा।
QR-code से कैसे होगी हॉकर की पहचान?
BMC की नई व्यवस्था में QR-code आधारित पहचान-पत्र या लाइसेंस को मौके पर स्कैन किया जा सकेगा। इससे अधिकारी यह जांच सकेंगे कि संबंधित विक्रेता का नाम, सर्वे नंबर, अधिकृत स्थान और अन्य रिकॉर्ड BMC के डेटाबेस से मेल खाते हैं या नहीं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकृत और अनधिकृत हॉकरों के बीच अंतर करना है। BMC और Mumbai Police के लिए मौके पर सत्यापन आसान होने की उम्मीद है।
करीब एक लाख हॉकरों की पहचान प्रक्रिया का हिस्सा
यह अभियान मुंबई में लंबे समय से चल रही हॉकर नीति और अवैध अतिक्रमण से जुड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। BMC ने 2014 के सर्वे से जुड़े लगभग 99,345 हॉकरों के रिकॉर्ड के आधार पर QR-code पहचान-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी QR-code आधारित पहचान व्यवस्था के जरिए अधिकृत हॉकरों की पहचान और अवैध हॉकरों के खिलाफ कार्रवाई को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया था। बाद में BMC ने अदालत को बताया कि हजारों हॉकरों को QR-code वाले पहचान-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
BMC के सामने अब असली चुनौती क्या है?
3,167 मृत लाइसेंसधारियों का मामला यह दिखाता है कि पुराने हॉकर रिकॉर्ड को अपडेट करना कितना जरूरी है। अब BMC को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी मृत लाइसेंसधारी के नाम पर कोई अन्य व्यक्ति बिना वैध प्रक्रिया के कारोबार न करता रहे।
दूसरी ओर, यदि नियमों के तहत परिवार के किसी पात्र सदस्य को लाइसेंस ट्रांसफर किया जा सकता है, तो ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया की जरूरत होगी। इससे वास्तविक परिवारों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होगी और लाइसेंस व्यवस्था का दुरुपयोग भी रोका जा सकेगा।
BMC की QR-code verification प्रक्रिया में 3,167 मृत लाइसेंसधारियों से जुड़े रिकॉर्ड सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब ऐसे मामलों में लाइसेंस ट्रांसफर और रिकॉर्ड की आगे की जांच पर विचार किया जा रहा है। इन लाइसेंसों को स्वतः फर्जी या अवैध घोषित नहीं किया गया है; अंतिम कार्रवाई संबंधित सत्यापन और लागू नियमों के आधार पर होगी।
FAQ
BMC की जांच में कितने ‘घोस्ट’ हॉकर लाइसेंस मिले?
QR-code verification के दौरान 3,167 ऐसे लाइसेंस मिले जिनसे जुड़े अधिकृत लाइसेंसधारियों की मृत्यु हो चुकी है।
क्या सभी 3,167 लाइसेंस फर्जी हैं?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें सीधे फर्जी कहना सही नहीं है। संबंधित लाइसेंसधारियों की मृत्यु के बाद लाइसेंस का इस्तेमाल किसने किया और क्या वह नियमों के तहत वैध था, यह आगे के सत्यापन का विषय है।
BMC QR-code सिस्टम क्यों ला रही है?
QR-code से हॉकर की पहचान, लाइसेंस और अधिकृत वेंडिंग रिकॉर्ड को मौके पर सत्यापित करना आसान होगा। इसका उद्देश्य अधिकृत और अनधिकृत हॉकरों के बीच अंतर करना है।

