अमेरिकी टैक्स से मुंबई सीफूड इंडस्ट्री पर बड़ा संकट

अमेरिका ने भारतीय फ्रोजन सीफूड पर 50% टैक्स लगाया है। इससे मुंबई की ससून डॉक मछली इंडस्ट्री, मछुआरे और प्रॉन्स छीलने वाले हजारों मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

डिजिटल डेस्क
मुंबई: अमेरिका ने भारतीय फ्रोजन सीफूड पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाकर 50% कर दिया है। अभी तक यह ड्यूटी 10% थी, जिसे अगस्त की शुरुआत में पहले 25% और अब सीधे 50% कर दिया गया है। इस फैसले ने मुंबई की ससून डॉक सीफूड इंडस्ट्री और यहां काम करने वाले हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

ससून डॉक, जो मुंबई का सबसे बड़ा और व्यस्त मछली बाजार माना जाता है, वहां इन दिनों बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। आम दिनों की तरह मछलियों की लोडिंग, नीलामी और प्रोसेसिंग तो हो रही है, लेकिन व्यापारियों और मजदूरों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

संकट की जड़ क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने यह नया टैक्स लगाया है। इसका सीधा असर उन मछुआरों, व्यापारियों और मजदूरों पर पड़ने वाला है जो सालों से इस इंडस्ट्री से अपनी जीविका चलाते आ रहे हैं। ससून डॉक से रोज़ाना करीब 30 टन प्रॉन्स अमेरिका और चीन जैसे देशों में एक्सपोर्ट होते हैं। लेकिन बढ़े हुए टैक्स की वजह से अब अमेरिकी खरीदार भारतीय सीफूड की कीमत कम करने की मांग करेंगे। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

मछुआरों की मुश्किलें

मरीन प्रॉडक्ट्स ऑक्शनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वसंत भुचाडे का कहना है –
“अगर भारतीय सरकार ने इस टैक्स का हल नहीं निकाला तो एक्सपोर्टर्स मछुआरों को कम दाम देंगे। पहले जहां झींगा मछली (प्रॉन्स) की कीमत ₹300 प्रति किलो थी, वहीं अब यह ₹225-₹250 तक गिर सकती है। ऐसे में मछुआरे समुद्र में जाने से कतराएंगे, और पूरी इंडस्ट्री पर असर होगा।” Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

एक ट्रॉलर की 8-10 दिन की मछली पकड़ने की लागत करीब ₹4 लाख आती है। इसमें डीज़ल, बर्फ और मजदूरी का खर्च शामिल है। अगर कीमतें गिरीं, तो मछुआरे घाटे में चले जाएंगे। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

महिलाओं की रोज़ी-रोटी पर भी असर

ससून डॉक में करीब 12,000 महिलाएं प्रॉन्स छीलने का काम करती हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं रोज़ 12 घंटे मेहनत करके लगभग ₹600 कमाती हैं। लेकिन अगर मछुआरे प्रॉन्स पकड़ना बंद कर देंगे तो इन महिलाओं की रोज़ी-रोटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

जयश्री नाम की एक महिला बताती हैं –
“अगर मछुआरे प्रॉन्स पकड़ना बंद करेंगे तो हमारे पास काम नहीं रहेगा। हमारी पूरी कमाई इसी पर निर्भर है।” Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax

आगे का रास्ता क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सरकार को तुरंत अमेरिका से इस मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। वरना यह संकट केवल मछुआरों और मजदूरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी मुंबई सीफूड इंडस्ट्री और उससे जुड़े कारोबार को खत्म कर सकता है। Mumbai seafood industry in big trouble due to US tax


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