न्यूट्रिशन का ‘डार्क मैटर’: आखिर क्या खा रहे हैं हम?

जानिए न्यूट्रिशन का ‘डार्क मैटर’ क्या है और क्यों आपका खाना सिर्फ कैलोरी और विटामिन तक सीमित नहीं है।

डिजिटल डेस्क
मुंबई:
जब 2003 में वैज्ञानिकों ने ह्यूमन जीनोम (मानव का पूरा जेनेटिक कोड) सीक्वेंस किया था, तब उम्मीद थी कि इससे बीमारियों के रहस्य खुल जाएंगे। लेकिन रिसर्च से पता चला कि जेनेटिक्स यानी हमारे जीन्स, बीमारियों का सिर्फ 10% कारण बनते हैं। बाकी 90% फैक्टर हमारे एनवायरनमेंट और डाइट (खानपान) से जुड़े हैं।

पूरी दुनिया में खराब खानपान हर साल 25 साल से ऊपर के करीब हर 5 में से 1 व्यक्ति की मौत से जुड़ा है। यूरोप में लगभग आधी हार्ट डिजीज मौतें पुअर डाइट के कारण होती हैं।

पिछले कई दशकों से हमें कम फैट, कम नमक और कम शुगर खाने की सलाह मिलती रही है। लेकिन मोटापा और डाइट-रिलेटेड बीमारियाँ लगातार बढ़ रही हैं। यानी कहीं न कहीं न्यूट्रिशन को समझने के हमारे तरीके में कुछ कमी है।

न्यूट्रिशन सिर्फ प्रोटीन और विटामिन तक नहीं

अब तक डाइट को अक्सर सरल रूप में समझा गया है – खाना यानी ईंधन, और न्यूट्रिएंट्स यानी शरीर की ईंटें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट और विटामिन – यानी लगभग 150 ज्ञात केमिकल्स ही हमारी थाली के मुख्य किरदार माने गए।

लेकिन नई रिसर्च बताती है कि हमारी डाइट में 26,000 से ज्यादा कम्पाउंड्स होते हैं, जिनमें से ज्यादातर के बारे में हमें पता तक नहीं है।

The-dark-matter-of-nutrition
प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

जैसे अंतरिक्ष में डार्क मैटर, वैसे ही हमारे खाने में भी

खगोल विज्ञान (Astronomy) बताता है कि ब्रह्मांड का लगभग 27% हिस्सा डार्क मैटर से भरा है। ये दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके ग्रेविटेशनल असर से वैज्ञानिक जानते हैं कि यह मौजूद है।

इसी तरह न्यूट्रिशन साइंस भी डार्क मैटर की तरह एक रहस्य से भरा है। हमारी थाली में ढेर सारे ऐसे केमिकल्स हैं जिन्हें हम रोज खाते हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि उनका शरीर पर क्या असर पड़ता है।

इन्हें ही वैज्ञानिक “Nutritional Dark Matter” कहते हैं।

फूडोमिक्स (Foodomics) क्या है?

इस डार्क मैटर को समझने के लिए एक नई रिसर्च फील्ड है – Foodomics
यह चार साइंस की ब्रांच को जोड़ती है:

  • Genomics (जीन्स का रोल)
  • Proteomics (प्रोटीन्स का स्टडी)
  • Metabolomics (सेल एक्टिविटी)
  • Nutrigenomics (जीन्स और डाइट का रिश्ता)

इससे पता चल रहा है कि खाना सिर्फ कैलोरी और विटामिन का खेल नहीं, बल्कि एक जटिल केमिकल वेब है। The ‘dark matter’ of nutrition: What are we eating?

उदाहरण: मेडिटेरेनियन डाइट क्यों काम करती है?

मेडिटेरेनियन डाइट (Mediterranean Diet) में फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, होल ग्रेन्स, लेग्यूम्स, नट्स, ऑलिव ऑयल और मछली शामिल होती है। इसे हार्ट डिजीज से बचाव के लिए बेस्ट माना जाता है।

लेकिन क्यों?

रिसर्च से पता चला है कि जब हम रेड मीट और अंडे खाते हैं तो गट बैक्टीरिया उन्हें तोड़कर TMAO (Trimethylamine N-oxide) बनाते हैं। TMAO की हाई लेवल हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाती है।

लेकिन लहसुन में मौजूद कुछ पदार्थ TMAO के बनने को ब्लॉक कर देते हैं। यानी डाइट में एक चीज दूसरी के नेगेटिव असर को कंट्रोल कर सकती है।

गट बैक्टीरिया और डाइट का रिश्ता

हमारे आंतों के बैक्टीरिया कई कम्पाउंड्स को नए केमिकल्स में बदल देते हैं, जो इंफ्लेमेशन, इम्युनिटी और मेटाबोलिज्म पर असर डालते हैं।

उदाहरण:

  • Ellagic Acid (फ्रूट्स और नट्स में पाया जाने वाला) गट बैक्टीरिया की मदद से Urolithins में बदल जाता है।
  • ये यू्रोलिथिन्स हमारी माइटोकॉन्ड्रिया (शरीर की एनर्जी फैक्ट्री) को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

जेनेटिक्स और डाइट का कनेक्शन

डाइट सिर्फ शरीर पर असर नहीं डालती, बल्कि हमारे जीन्स को भी ऑन-ऑफ कर सकती है। इसे कहते हैं Epigenetics

उदाहरण:
दूसरे विश्व युद्ध में जब नीदरलैंड में अकाल पड़ा, उस समय गर्भवती माताओं के बच्चों में आगे चलकर हार्ट डिजीज, डायबिटीज और स्किज़ोफ्रेनिया का खतरा ज्यादा पाया गया।

सालों बाद पता चला कि उनकी जीन एक्टिविटी उनकी माँ की डाइट से बदल गई थी।

फूडोम प्रोजेक्ट: खाने का नक्शा बनाना

आज Foodome Project जैसे इंटरनेशनल रिसर्च चल रहे हैं, जिनमें अब तक 1.3 लाख से ज्यादा फूड मॉलिक्यूल्स को लिस्ट किया जा चुका है।

इनका मकसद है एक ऐसा Atlas of Food Chemistry बनाना जिससे पता चले कि कौन सा कम्पाउंड शरीर पर क्या असर करता है।

क्यों जरूरी है ये समझना?

  • क्यों एक डाइट कुछ लोगों पर काम करती है और कुछ पर नहीं?
  • क्यों कुछ फूड्स बीमारी से बचाते हैं और कुछ उसे बढ़ाते हैं?
  • कौन से फूड कम्पाउंड्स को नई दवाइयों या न्यूट्रिशनल फूड्स में बदला जा सकता है?

ये सारे जवाब Nutritional Dark Matter को समझे बिना नहीं मिल सकते।

हमारी थाली में सिर्फ कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स ही नहीं, बल्कि हजारों छुपे हुए केमिकल्स भी हैं। यह डार्क मैटर ऑफ न्यूट्रिशन हमारी सेहत, जीन्स और आने वाली पीढ़ियों पर असर डाल सकता है।

जिस तरह डार्क मैटर ने ब्रह्मांड की समझ बदल दी, उसी तरह न्यूट्रिशनल डार्क मैटर को समझना हमारी सेहत, बीमारियों के इलाज और खाने की आदतों को बदल सकता है।

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