Tag: Uddhav Thackeray

  • महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में मातृभाषा के संरक्षण में शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकारी नीतियों के खिलाफ 5 जुलाई को विरोध मोर्चे का समर्थन किए जाने का ऐलान किया है। शुक्रवार को पार्टी नेता ने इसकी घोषणा कर दी।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने शुक्रवार को कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से महाराष्ट्र में स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदी को ‘थोपे जाने’ के खिलाफ पांच जुलाई को होने वाले विरोध मोर्चे का समर्थन करेंगे। पार्टी नेता ने इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    उद्धव और राज ने मिलाया हाथ

    राज्य सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना के खिलाफ यह विरोध आयोजित किया जा रहा है। आप को बता दें कि भाषा विवाद पर 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली होने जा रही है। मराठी मुद्दे को लेकर 20 साल बाद दोनों मंच पर साथ नजर आएंगे।

    राकांपा शरद पवार गुट की घोषणा

    शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाना शामिल किया गया है। राकांपा शरद पवार गुट की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने एक खुले पत्र में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय हितों के मामलों में महाराष्ट्र के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    शरद पवार ने क्या कहा?

    इसके पहले पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी ठाकरे भाइयों को समर्थन देते हुए कहा, कि “महाराष्ट्र में कक्षा 1 से हिंदी अनिवार्य नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई नई भाषा शुरू की जानी है तो उसे कक्षा 5 के बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    सरकार ने लिया यू टर्न

    दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल अप्रैल में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया था। विरोध के बाद उन्होंने फैसले में बदलाव किया। कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    महाराष्ट्र में मराठी भाषी आबादी का मुद्दा

    एनसीपी शरद पवार गुट के महाराष्ट्र अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि इस कदम का शिक्षाविदों, अभिभावकों, भाषाविदों एवं कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है और वे सभी दलील दे रहे हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे की मातृभाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में मराठी भाषी आबादी हिंदी सहित कई भाषाओं को सीखने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, कि लेकिन प्राथमिक स्तर पर हिंदी को थोपना हमें अस्वीकार्य है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, कि “अगर तीन-भाषा नीति का इस्तेमाल मातृभाषा को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है, तो मराठी भाषी समुदाय एकजुट होकर ऐसे कदमों का विरोध करेगी।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मराठी भूमिका की रक्षा

    शरद पवार गुट के नेता ने इस मुद्दे को भाषाई और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।पाटिल ने कहा कि इस मोर्चे का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में मराठी भाषा की भूमिका की रक्षा करना है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

  • ‘अखंड शिवसेना’: बालासाहेब के करीबी सहयोगी ने उद्धव, राज, एकनाथ से हाथ मिलाने और गठबंधन बनाने का आग्रह किया।

    ‘अखंड शिवसेना’: बालासाहेब के करीबी सहयोगी ने उद्धव, राज, एकनाथ से हाथ मिलाने और गठबंधन बनाने का आग्रह किया।

    महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है? ऐसी राजनैतिक गलियारों में गरमागरम खुसफुसाहट होने लगी है। हालही में पुरानी शिवसेना को अखंड शिवसेना के निर्माण के लिए सभी प्रमुख नेताओं को हाथ मिलाने का आग्रह पूर्व गृहमंत्री और बालासाहेब ठाकरे के खासमखास नेता ने पेशकश की है। ‘Akhand Shiv Sena’: Balasaheb’s close aide urges Uddhav, Raj, Eknath to join hands and form alliance.

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: महाराष्ट्र की सबसे बड़ी राजनैतिक दल शिवसेना को एकबार फिर समेटते हुए अखंड शिवसेना बनाने की खुसफुसाहट राजनैतिक हलचल बना हुआ है। यहां राज्य के पूर्व गृहमंत्री जिन्होंने उद्धव बालासाहेब ठाकरे, एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे को एक होकर हाथ मिलाने और गठबंधन करने का आग्रह किया है। यह वही नेता हैं, जो कभी स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के खासमखास हुआ करते थे। इन्होंने शिवसेना के एक प्रमुख मोर्चे की स्थापना की जो आज भी राज्य के भुमिपुत्रों के लिए काम करता है।

    क्या है उनकी पहचान?

    यह वही नेता हैं जो स्वर्गीय बालासाहेब से प्रेरित होकर वे शिवसेना में शामिल हुए थे। बाद में स्थानीय लोकाधिकार समिति की स्थापना की, जो शिवसेना का एक मोर्चा है जो भूमिपुत्रों के लिए काम करता है। राज्य के मराठी माणूस का इस समिति को इतना प्रतिसाद मिला कि देखते ही देखते लाखों की संख्या में इससे लोग जुड़ने लगे। इसी स्थानीय लोकाधिकार के कारण मराठी माणूस को बँक मे नौकरी मिलना आसान हो गया। इसी समिति के माध्यम से शिवसेना को बढावा मिला और अच्छे कार्यकर्ता भी प्राप्त हुए, इनमे अरविंद सावंत और भाई पोतनीड जैसे कई नेता उभरकर सामने आये।

    अखंड शिवसेना का निर्माण

    इसी कारण स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे ने 1996-97 में पहली बार युती की सरकार बनाई और उन्हें गृहराज्यमंत्री के पद से नवाजा। आज उन्होंने एकबार फिर पुरानी शिवसेना के दिग्गज नेताओं को साथ लाने और हाथ मिलाकर ‘अखंड शिवसेना’ के निर्माण के लिए तीनों नेताओं को गठबंधन में आने का आग्रह किया है।

    चुनाव की तैयारी

    राज्य में नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में सत्ता पक्ष भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन में होने के बावजूद कहीं साथ तो कहीं अलग होकर चुनाव लड़ने की अटकलें लग रहे हैं। वहीं बृहन्मुंबई महानगर पालिका की सत्ता पर हमेशा से काबिज़ रहनेवाली उद्धव की शिवसेना गुटबाजी के कारण कमजोर दिखाई पड़ने लगी है। राज ठाकरे भी कभी शिवसेना का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उन्होंने ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना‘ का निर्माण किया और शिवसेना के कई दिग्गज नेताओं को अपने ले गये। बाद में उन्होंने एक मजबूत नेतृत्व कायम किया। लेकिन समय के चलते आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी कमजोर साबित हो रही है। ऐसे में स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के करीबी नेता का इन तीनों दिग्गज नेताओं को गठबंधन के लिए एकत्रित करना, ‘अखंड शिवसेना’ के उदय की संभावना प्रबल कर रहा है ऐसा राजनैतिक विशेषज्ञों द्वारा विश्वास जताया जा रहा है।

  • बकरी ईद के पहले बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या का बड़ा बयान, बोले “नहीं कटने दूंगा बकरे”

    बकरी ईद के पहले बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या का बड़ा बयान, बोले “नहीं कटने दूंगा बकरे”

    Mumbai News: बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूँ। नहीं काटने दूंगा बकरा ..

    मुंबई: बकरी ईद के मद्देनजर बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैय्या रहिवासी चालों और इमारतों का दौरा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रविवार 25 मई को घाटकोपर स्थित मैत्री को-ऑपरेटिव सोसायटी और दामोदर पार्क का दौरा किया। इसी परिसर में बकरा ईद को लेकर पहले भी दो गुटों के बीच विवाद देखने को मिला था। अब एक बार फिर कुछ रहिवासियों का विरोध देखने को मिल रहा है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    बकरा नहीं काटने दूंगा ..

    बीजेपी नेता किरीट सोमैय्या ने आरोप लगाते हुए कहा, कि “एनसीपी शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की वोट जिहाद की सेना ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है। यह सब वोट जिहाद के लिए हो रहा है। अगली बार अगर कोई दहशत फैलाने के लिए ऐसा कोई काम करेगा, यानी बकरा काटेगा तो हम ऐसा नहीं होने देंगे।

    हम रैली में ब्यस्त हैं और चीन कर रहा है तैयारी 

    किरीट सोमैया हुए हमलावर

    उन्होंने आगे कहा, कि “पिछली बार महानगरपालिका अधिकारियों और माफिया ने पुलिस को धमकी देकर घाटकोपर में बकरा काटा था। इस बार मैं खुद ग्राउंड पर हूं। एनसीपी शरद पवार, उद्धव की सेना या राहुल गांधी की कांग्रेस का यहां पर टारगेट ही है वोट जिहाद करने का।” उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले के बाद हमने जो जवाब दिया, वैसा ही अमेरिका में भी वोट जिहाद किया गया। भगवान उन्हें सद्‌बुद्धि दे।

    हिजरी कैलेंडर का आखिरी महीना

    ईद उल-अजहा मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए अहम हिस्सा है। इस पर आम बोलचाल की भाषा में बकरा ईद भी कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक बकरी ईद का त्योहार जुल हिज्जा (Dhul Hijjah) महीने की दसवीं तारीख को मनाया जाता है, जोकि हिजरी कैलेंडर का 12वां या आखिरी महीना होता है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

    कब है बकरी ईद ?

    इस साल बकरी ईद का त्योहार 6 या 7 जून को मनाने की संभावना है। इस त्योहार को लेकर तारीख की आधिकारिक घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाएगी। बकरी ईद का अर्थ सिर्फ जानवरों की कुर्बानी मात्र से नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक अर्थ बहुत ही गहरा है। यह पर्व अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और दान से जुड़ा हुआ है। इसकी मान्यता है कि बकरा ईद पर कुर्बानी के हिस्से को तीन भागों में तकसिम किया जाया है। पहला गरीब और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा मित्रों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरी हिस्सा अपने घर-परिवार के लिए रखा जाता है। साथ ही ईद की नमाज़ से पहले जकत, फितरे का पैसा निकाला जाता है। जो ज़रूरतमंदों को देकर उनकी मदद की जाती है। BJP leader Kirit Somaiya made a big statement before Bakri Eid, said “I will not let goats be slaughtered”

  • शिंदे गुट के शिवसेना विधायकों की सुरक्षा में कटौती। साइडलाइन किए जाने का आरोप

    शिंदे गुट के शिवसेना विधायकों की सुरक्षा में कटौती। साइडलाइन किए जाने का आरोप

    महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों की सुरक्षा में कटौती करने का फैसला किया गया है। ऐसे में बीजेपी और शिंदे सेना के बीच मतभेद बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। करीब 25 मौजूदा और पूर्व विधायकों की सुरक्षा में कटौती की जानकारियां प्राप्त हो रही है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    मुम्बई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना शिंदे गुट के करीब 25 मौजूदा और पू्र्व विधायकों की सिक्योरिटी में कौटती करने का फैसला किया गया है। इसको लेकर शिंदे गुट शिवसेना के नेताओं ने नाराजगी भी जाहिर की। उनका कहना है कि देंवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली सरकार में उन्हें साइडलाइन किया जा रहा है। गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने ही पास रखी है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    बता दें कि इससे पहले शिवसेना के 40 और 10 निर्दलीय विधायकों ने शिंदे का समर्थन किया था। इसके बाद शिंदे गुट की शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। वहीं उद्धव ठाकरे के समर्थकों ने शिवसेना को विभाजित करने के आरोप एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कई जगहों पर विरोध का उग्र रूप भी देखा गया। वहीं शिंदे सेना के विधायकों की सुरक्षा के मद्देनजर वाई प्लस सिक्योरिटी मुहैया कराई गई थी। विधायकों को पांच से छह पुलिसकर्मियों के अलावा एक एस्कॉर्ट वाहन भी दिया गया था। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    विधायकों की सुरक्षा में 600 पुलिसकर्मी

    इसके अलावा शिवसेना शिंदे गुट के विधायकों के काफिले के साथ फ्लैशिंग लाइट वाला वाहन भी रहता था। मुम्बई में एक आईपीएस अधिकारी ने कहा, विधायकों की सुरक्षा के लिए करीब 600 पुलिसकर्मियों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पुलिस के बाकी काम प्रभावित होते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने फैसला लिया है कि इन विधायकों की सुरक्षा में कटौती की जाएगी। केवल उन शिवसेना विधायकों को इतनी सुरक्षा मिलेगी जो कि मंत्रिपद पर हैं या फिर उनकी जान को खतरा है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    अब मिलेगा सिर्फ एक पुलिसकर्मी

    उन्होंने कहा कि अन्य विधायकों की तरह ही बाकी शिवसेना विधायकों को सुरक्षा के लिए एक पुलिसकर्मी दिया जाएगा। गृह विभाग ने कई अन्य राजनेताओं की सुरक्षा में भी कटौती करने का फैसला किया है। वहीं शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कयांदे ने कहा, कि “कहा जा रहा है, अब चुनौतियां कम हैं इसलिए शिवसेना विधायकों की सुरक्षा भी कम कर दी गई है। लेकिन कुछ लोगों को इसको लेकर शिकायत है।” शिंदे सेना के नेताओं का कहना है, कि “सरकार सोच-समझकर उन्हें साइडलाइन करने के लिए ऐसा कर रही है।” वहीं शिवसेना के दो मंत्री रायगढ़ और नासिक की गार्जियन मिनिस्टरशिप को लेकर भी नाखुश हैं। शिंदे भी देवेंद्र फडणवीस के साथ कई बैठकों में शामिल नहीं हुए। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    तीन महीने के भीतर मतभेद

    एक तरफ सत्ता पक्ष महायुति गठबंधन के शिवेसेना और बीजेपी में इस तरह की दूरियों के कारण आपसी कलह के कयास लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शरद पवार तारीफ कर रहे हैं। वहीं देवेंद्र फडणवीस से शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं ने मुलाकात चर्चाओं का विषय बना हुआ है। बता दें कि महाराष्ट्र के चुनाव में शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन तीन महीने के भीतर ही दोनों में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति ने महाराष्ट्र की 288 सीटों में से 230 सीट जीतकर भारी प्रदर्शन के साथ विजय हासिल किया है। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

    नगरपालिका चुनाव

    हालही के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद अब मुम्बई, पुणे और ठाणे समेत पूरे राज्य मे नगर पंचायत एवं नगरपालिका चुनाव भी बड़े दांव वाली लड़ाई होने वाली है, जिसके लिए राज्यभर में सभी राजनैतिक पार्टियां और उनके कार्यकर्ता कमर कस रहे हैं। हालही में उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेताओं ने पिछले ढाई महीने में कम से कम तीन बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके अलावा मुख्यमंत्री से आदित्य ठाकरे ने दो बार, उद्धव ने एक बार मुलाकात की है, जबकि अन्य वरिष्ठ शिवसेना नेताओं ने भी फडणवीस से अलग से मिलने गए। (Reduction in security of Shiv Sena MLAs of Shinde faction. accused of being sidelined)

  • ठाकरे गुट को लगा और एक बड़ा झटका, मातोश्री के वफादार जितेंद्र जनावाले का इस्तीफ, साजिश का आरोप

    ठाकरे गुट को लगा और एक बड़ा झटका, मातोश्री के वफादार जितेंद्र जनावाले का इस्तीफ, साजिश का आरोप

    उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका, मातोश्री के वफादार नेता राजन साल्वी के बाद जितेंद्र जनावाले ने भी दिया इस्तीफा, अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप.. (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

    मुम्बई: राज्य या देश में चुनाव आते ही राजनैतिक उठा पटक शुरू हो जाती है। कोई नाराज़ तो कोई लोभ के चले पाला बदल लेते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी यहां राजनैतिक उठा पटक थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां हर दिन नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट की शिवसेना को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। ये झटके कोई और नहीं ठाकरे के पुराने साथी और पार्टी को तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ही दे रहे हैं। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

    अब ताज़ा खबर के मुताबिक, बांद्रा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपविभाग प्रमुख जितेंद्र जनावाले ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। जितेंद्र जनावाले ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाते हुए कहा, कि उन्होंने पिछले छह सालों से कार्यक्षेत्र से बाहर नियुक्ति कर राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई है। इससे पहले मातोश्री के वफादार नेता राजन साल्वी ने इस्तीफा देकर एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना में शामिल हो गए है। जितेंद्र जनावाले के भी एकनाथ की पार्टी में शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

    नजरअंदाज का आरोप

    जितेंद्र जनावाले को एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है, जो ठाकरे गुट को मशाल चुनाव चिन्ह मिलने के बाद सबसे पहले खुद मशाल लेकर मातोश्री आए थे। जनावाले का कहना है कि विभाग प्रमुख अनिल परब ने उन्हें कार्यक्षेत्र से बाहर रखा था। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि जानबूझकर उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा है और अपनी व्यथा बताने के बावजूद पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। पत्र में उन्होंने लिखा है कि वह इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि उनकी क्षमता के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

    राजन साल्वी ने भी किया था अनदेखा का आरोप

    बता दें कि इससे पहले हाल ही में पार्टी के पूर्व विधायक राजन साल्वी ने इस्तीफा दे दिया था। कोंकण में ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता राजन साल्वी ने उपनेता पद से इस्तीफा देकर शिंदे गुट का दामन थाम लिया। वह पिछले 35 सालों से शिवसेना के लिए काम कर रहे थे। कोंकण के रतापुर निर्वाचन क्षेत्र से 2024 का विधानसभा चुनाव हारने वाले तीन बार के विधायक राजन साल्वी ने पार्टी पर अनदेखी करने का आरोप लगाया था वो अपनी उपेक्षा से नाराज थे। इसके बाद राजन साल्वी शिंदे गुट की शिवसेना शामिल हो गए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और कई पार्टी नेताओं की उपस्थिति में वो शिवसेना में शरण ले ली। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

    20 और 25 को होगी ठाकरे गुट की बैठक

    इस बीच उद्धव ठाकरे की अगुवाई में ठाकरे गुट के सांसदों की बैठक 20 फरवरी को बुलाई गई है। ऐसे ही 25 फरवरी को विधायकों की बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे इस दौरान सांसदों और विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। उद्धव ठाकरे की ओर से यह बैठक तब बुलाई जा रही है जब पार्टी के पूर्व विधायक और कई पदाधिकारी लगातार ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। (Thackeray group gets another big blow, resignation of Matoshree loyalist Jitendra Janawale, allegation of conspiracy)

  • Maharashtra: उद्धव ठाकरे के खिलाफ एकनाथ शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’, दिल्ली में हो गया खेला?

    Maharashtra: उद्धव ठाकरे के खिलाफ एकनाथ शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’, दिल्ली में हो गया खेला?

    Maharashtra Politics: उद्धव ठाकरे की शिवसेना को एकनाथ शिंदे तोड़ने की कोशिश में हैं। उद्धव गुट के सांसदों को शिंदे गुट में शामिल करने की योजना है ‘ऑपरेशन टाइगर’।4 ठाकरे सांसद शिंदे के संपर्क में? (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    Maharashtra Politics:  उद्धव ठाकरे की मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है. ‘ऑपरेशन टाइगर’ वाला खतरा टला नहीं है। एकना शिंदे उद्धव ठाकरे की सेना का शिकार करने में लगे हुए हैं। पहले विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को झटका लगा। अब एकनाथ शिंदे और भाजपा मिलकर उद्धव ठाकरे को तगड़ा झटका देने की कोशिशों में जुटे हैं। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन पर टिकी केंद्र की मोदी सरकार को मजबूती देने के लिए अब उद्धव की शिवसेना को तोड़ने की प्लानिंग चल रही है। (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    बीते दिनों खबर आई कि उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर को फेल कर दिया। मगर ताज़ा अपडेट है कि उद्धव के सामने खतरा पूरी तरह अभी टला नहीं है। शिवसेना ठाकरे गुट के सांसदों को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। दिल्ली के राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ऑपरेशन टाइगर को गति एकनाथ शिंदे समूह दे रहा है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट के चार सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    क्या है ऑपरेशन टाइगर?

    दरअसल, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तोड़ने में पूरी तरह से जुट चुके हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए ‘ऑपरेशन टाइगर’ शुरू किया है। ऑपरेशन टाइगर के अनुसार, उद्धव गुट के नेताओं को शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिश हो रही है। उद्धव ठाकरे के पास अभी 9 सांसद हैं। उनमें 6 से 7 सांसदों को तोड़कर शिंदे गुट में मिलाने की कवायद चल रही है। इसकी हलचल मुंबई से लेकर दिल्ली तक देखने को मिल रही है। (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    ठाकरे के सांसद शिंदे गुट के करीब?

    आप को बता दें, कि संसदीय बजट सत्र इस समय दिल्ली में चल रहा है। सांसद संजय दीना पाटिल ने सांसद और शिंदे गुट के नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे के घर आयोजित लंच में शामिल हुए। श्रीकांत शिंदे के घर लंच में शिंदे गुट के सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे और संजय दीना पाटिल भी पहुंचे। इस लंच के बाद से ही सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। दिल्ली की हलचल से महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मच गई है। इस वजह से अब उद्धव की शिवसेना के कान खड़े हो गए हैं। चर्चा है कि क्या शिंदे वाली शिवसेना ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ वाला दांव चल दिया? (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    दिल्ली में क्या हुआ?

    एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के घर उद्धव सेना के सांसद संजय दीना पाटिल की मौजूदगी से राजनीतिक हलकों में चर्चा छिड़ गई है। दूसरी ओर श्रीरंग बारणे ने इस पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि “संजय दीना पाटिल मुझे कार से श्रीकांत शिंदे के घर छोड़ने आए थे। फिर उनकी मुलाकात श्रीकांत शिंदे से हुई।” श्रीरंग अप्पा बारणे ने स्पष्ट किया कि यह कोई योजनाबद्ध बैठक नहीं थी। इस बीच संजय दीना पाटिल दिल्ली में विपक्षी सांसदों के शक्ति प्रदर्शन में नहीं पहुंचे थे। वह उसी दिन संजय राउत के साथ थे। (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

    दिल्ली में और एक मुलाकात

    दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के घर पर आयोजित डिनर में उद्धव ठाकरे के सांसदों की मौजूदगी से चर्चाएं तेज हो गईं। बुधवार रात शिंदे गुट के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के घर पर सभी सांसदों के लिए डिनर का आयोजन किया गया था। शिवसेना ठाकरे गुट के तीन सांसद संजय जाधव, नागेश पाटिल अष्टीकर और भाऊसाहेब वाघचौरे इस डिनर में शामिल हुए। इसके बाद से ही चर्चा है कि क्या ऑपरेशन टाइगर ने रफ्तार पकड़ ली, और ये भी कहा जा रहा है कि “क्या ठाकरे के चार सांसद शिंदे वाली शिवसेना के संपर्क में हैं?” (Maharashtra Eknath Shinde’s ‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, played in Delhi)

  • उद्धव ठाकरे के खिलाफ ‘ऑपरेशन टाइगर’, पार्टी मे फूट का इस मंत्री ने किया बड़ा दावा

    उद्धव ठाकरे के खिलाफ ‘ऑपरेशन टाइगर’, पार्टी मे फूट का इस मंत्री ने किया बड़ा दावा

    एकनाथ शिंदे सरकार में मंत्री उदय सामंत ने दावा किया है उद्धव ठाकरे के खिलाफ ऑपरेशन टाइगर चल रहा है और जल्द ही उनकी पार्टी टूट जाएगी। उद्धव ठाकरे के कई विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में है। (‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, this minister made a big claim of division in the party)

    मुंबई: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में बड़ी फूट पड़ सकती है। उद्धव की सेना के कई विधायक, सांसद और पूर्व विधायक पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना से हाथ मिला सकते हैं। महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे के कई विधायक, सांसद, पूर्व विधायक एवं पूर्व सांसद राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ 3 महीने के अंदर सफल होगा। (‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, this minister made a big claim of division in the party)

    उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ देंगे कई विधायक

    उदय सावंत ने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में जो काम हुआ है उससे लोगों को यह महसूस हो गया है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अगले तीन महीने में जो पूर्व विधायक उद्धव ठाकरे के पार्टी में हैं वे जल्द ही उद्धव ठाकरे की शिवसेना को छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो जाऐंगे। (‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, this minister made a big claim of division in the party)

    कांग्रेस वाले पहले खुद को देखें

    महाराष्ट्र की महायुति गठबंधन सरकार में मंत्री पद को लेकर नाराज़गी वाले कांग्रेसी बयानों पर जब पूछा गया कि क्या एकनाथ शिंदे नाराज चल रहे हैं इसका उत्तर देते हुए महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री ने कहा कि एकनाथ शिंदे नाराज हैं कि नहीं हैं उस पर विपक्ष को एनालिसिस करने के बजाय जो लोग मुख्यमंत्री बनने जा रहे थे, उनका हाल क्या है? उस पर विचार करना चाहिए। एकनाथ शिंदे सीएम की मीटिंग में क्यों शामिल नहीं हुए थे इसका खुलासा खुद सीएम ने कर दिया है। कांग्रेस वालों को खुद को देखना चाहिए। (‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, this minister made a big claim of division in the party)

    लाडली बहन योजना ने किया कंगाल

    विपक्ष ने सदन में आरोप लगाया कि लाडली बहन योजना महाराष्ट्र को कंगाल कर दिया है। इसपर उदय सावंत ने कहा कि विधानसभा चुनाव मे रिकार्ड तोड़ जीत हासिल कर पूरे विपक्ष गठबंधन को ही “मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना” ने कंगाल किया है, इसलिए विपक्ष इस तरह के आरोप प्रत्यारोप कर रहे है। (‘Operation Tiger’ against Uddhav Thackeray, this minister made a big claim of division in the party)

  • महायुति सरकार न केवल भ्रष्ट, बल्कि उसमें शामिल लोग अपराधी हैं- पटोले

    महायुति सरकार न केवल भ्रष्ट, बल्कि उसमें शामिल लोग अपराधी हैं- पटोले

    महायुति सरकार न केवल भ्रष्ट, बल्कि उसमें शामिल लोग अपराधी हैं। ऐसा कहते हुए नाना पटोले ने राज्य की सरकार गठबंधन पर आरोप लगाया। साथ ही संजय राउत के आरोपों के बीच चुनाव में धांधली को लेकर एमवीए नेता ने कोर्ट का रुख अपनाया। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    मुंबई– कांग्रेस की महाराष्ट्र प्रदेश प्रमुख नाना पटोले ने मंगलवार को राज्य में देवेंद्र फडणवीस की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह महायुति सरकार न केवल भ्रष्ट है बल्कि इसमें शामिल लोग अपराधी हैं। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    पटोले ने यह भी जानना चाहा कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक मंत्री ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनको लेकर उठे विवाद ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के अंदरूनी कलह को सामने ला दिया है। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

    पटोले ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार न केवल भ्रष्ट है, बल्कि जो लोग इसमें शामिल हैं, वे सभी अपराधी हैं। सिर्फ़ मंत्री ही नहीं, बल्कि पूरा प्रशासन भ्रष्ट है। धनंजय मुंडे के खिलाफ आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन आरोपों के पीछे भाजपा ही है। भाजपा के एक विधायक मुंडे के भ्रष्टाचार को खुलेआम उजागर कर रहे हैं, फिर भी मुख्यमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की है।’’ (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह भाजपा, अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच की अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है? कांग्रेस को उनके अंदरूनी झगड़ों में कोई दिलचस्पी नहीं है।’’ (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने मंगलवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की पिछली महायुति सरकार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता धनंजय मुंडे के मंत्री रहते कृषि विभाग में 88 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    मुंडे पहले से ही बीड जिले में सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से संबंधित जबरन वसूली के मामले में अपने सहयोगी वाल्मिक कराड की गिरफ्तारी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    पटोले ने कहा कि असली मुद्दे लोगों के सामने हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उनका बकाया नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन, चावल और प्याज के किसान संकट का सामना कर रहे हैं। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बांग्लादेशी महिलाओं को सरकार से लाड़की बहिन योजना का पैसा मिल रहा है, जबकि महाराष्ट्र के नागरिक परेशान हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो गई है, कल ही शिरडी में दो हत्याएं हुईं। महिलाएं असुरक्षित हैं।’’ (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    फर्जी मुठभेड़

    उन्होंने कहा कि परभणी में पुलिस ने युवा आंबेडकरवादी कार्यकर्ता सोमनाथ सूर्यवंशी को कथित तौर पर मार डाला। उन्होंने आरोप लगाया कि बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न मामले का आरोपी अक्षय शिंदे फर्जी मुठभेड़ में मारा गया। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    मुख्यमंत्री का अंधविश्वास

    उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार गंभीर मुद्दों को छिपा रही है, लेकिन विपक्ष चुप नहीं रहेगा। सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।’’
    इससे पहले दिन में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया कि देवेंद्र फडणवीस अंधविश्वास के कारण दक्षिण मुंबई स्थित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में रहने नहीं गए हैं। राउत ने कहा था कि अफवाह यह है कि एकनाथ शिंदे की कामाख्या मंदिर यात्रा के दौरान गुवाहाटी में कथित तौर पर बलि दिये गए भैंसों के सींग को ‘वर्षा’ के परिसर में गाड़ा गया था, ताकि मुख्यमंत्री का पद शिंदे के अलावा किसी और के पास न रहे। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    मुख्यमंत्री आवास में रहने से इनकार

    राउत के आरोप पर एक सवाल का जवाब देते हुए पटोले ने कहा, ‘‘जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, देश में काला जादू और अंधविश्वास फैल गया है। क्या महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हो रहा है? क्या वे अपना राजनीतिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं? क्या इसीलिए देवेंद्र फडणवीस ‘वर्षा’ में रहने से इनकार कर रहे हैं?’’ (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    उन्होंने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अंधविश्वास रोधी कानून बनाया, फिर भी ऐसी प्रथाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, ज्योतिबा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की भूमि महाराष्ट्र में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

    चुनाव में धांधली का आरोप

    वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर द्वारा हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की विश्वसनीयता पर चिंता व्यक्त करने पर पटोले ने कहा कि कांग्रेस और महा विकास आघाडी (MVA) ने इसी तरह के मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने पहले ही निर्वाचन आयोग से शिकायत की है, जिसने खुद लोकतंत्र का अपमान किया है। प्रकाश आंबेडकर ने अदालत का रुख किया है, वहीं राहुल गांधी ने भी कल संसद में इस मुद्दे को उठाया। अब जब मामला अदालत में है, तो हमें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।’’ (Mahayuti government is not only corrupt, but the people involved in it are criminals-Nana Patole)

  • मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालाड़ पश्चिम के मालवनी कच्चा रोड़ से एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को लेकर भारतीय जनता पार्टी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए लोगों की मुलभुत सुविधाओं से खिलवाड़ कर रही है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मालाड़ पश्चिम के एक छोटे से ब्रिज को लेकर राजनीती तेज हो गई है। लेकिन इस राजनीतिक खेल में अकेले भारतीय जनता पार्टी लोगों के मुलभुत सुविधाओं के साथ खेल कर रही है और दूसरी पार्टियों के स्थानीय दिग्गज नेता मुकदर्शी बने तमाशा देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये सारा खेल एवरशाइन नगर के किनारे खाली पड़ी जमीन के बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। जबकि यही जमीन कभी मैंग्रोवस से भरी हुआ करती थी। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    भाजपा की दोहरी राजनीति से लोग परेशान

    खबर के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष तेजिंदर सिंह तिवाना एवरशाइन नगर के निवासियों की आवाज बनकर मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को तोड़ने की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर कहा जा रहा है कि इस ब्रिज पर बाइक सवारों की वजह से दुर्घटना का खतरा है। जबकि एक समाजसेवक को यह जानने की जरूरत है कि इस ब्रिज के कारण लाखों लोगों को सफर करने में सहूलियत मिलती है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो शहर में कोई भी किसी भी रोड़ और रास्ते को बंद करने की मांग को लेकर आंदोलन पर बैठ जाएगा और दूसरी तरफ अगर इस ब्रिज को तोड़ दिया गया तो लाखों लोगों को मालवनी से बाहर निकलने के लिए लंबा और ट्रेफिक से जाम का सफर तय करना पडेगा। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    आम लोगों ने क्या कहा?

    दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी को मालवनी की जनता से कोई लेना देना नही है वो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकती है। लेकिन हमारे इलाके के विधायक क्यों खामोश हैं। एक तरफ इसी ब्रिज को बनाने के लिए सरकारी खजाने का करोड़ों रूपया खर्च किया जाता है और दूसरी तरफ बेतूके कारण बता कर उसे तोड़कर आम लोगों का नुकसान किया जाता है। ये तो आम जनता के साथ सरासर अन्याय है। बता दें कि भाजपा के तेजिंदर सिंह तिवाना बेतूके कारण बताकर आंदोलन का इशारा दे रहे हैं। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    क्या है पूरा मामला?

    तेजिंदर सिंह ने बताया कि एवरशाइन नगर के निवासियों ने पुल पर अवैध रूप से बनाए गए रैंप को ध्वस्त करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को अल्टीमेटम देने का फैसला किया है। निवासियों ने इस पैदल यात्री पुल का उपयोग करने वाले दोपहिया वाहन सवारों के लिए खतरे पर चर्चा करने के लिए शनिवार शाम को एक सार्वजनिक बैठक का आयोजन किया। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    निवासियों द्वारा BMC और पुलिस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि रैंप के कारण कई दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनमें से कई में वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। निवासियों ने बाइकर्स को प्रवेश की अनुमति देने वाले रैंप को ध्वस्त करने, FOB पर बाइकर्स को इसका उपयोग करने से रोकने के लिए ट्रैफ़िक पुलिस को तैनात करने और बाइकर्स को पुल पर जाने से रोकने के लिए बोलार्ड लगाने की मांग की है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    विरोध प्रदर्शन की योजना

    निवासियों ने 20 जनवरी तक की समयसीमा तय की है, जिसके विफल होने पर वे एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं, जिसमें एवरशाइन नगर के निवासी और भाजपा कार्यकर्ता तजिंदर सिंह तिवाना द्वारा अनिश्चितकालीन अनशन भी शामिल है। बैठक में तिवाना ने कहा, “हमने इन अवैध रैंपों को गिराने के लिए बीएमसी और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    समाज सेवकों से अपील

    इस ब्रिज को जबरन अगर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। तो मालवनी और मालाड़ के लाखों समाजसेवकों और आरटीआइ कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि एवरशाइन से सटे रिक्त भूखंड पर क्या होने वाला है उस पर नजर बनाए रखें। बता दें कि इसके पहले यहाँ मैंग्रोवस की घनी झाडियां हुआ करती थी। कुछ साल पहले इसी ब्रिज के अचानक गिर जाने की वजह से काफी सारे लोग घायल हुए थे। उसी समय धडल्ले से यहा अवैध मिट्टी की भरनी कर मैंग्रोवस को नष्ट कर दिया गया। इस अवैध भरनी की शिकायत पर भरनी माफिया चौरसिया के खिलाफ मालवनी पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज है। जबकि ध्यान देने बात यह है कि आज भी यहां मैंग्रोवस की झाड़ियां मौजूद है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

  • चुनाव खत्म हुआ तो विवादों में फंसी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’, क्या हुआ 2100  का वादा?

    चुनाव खत्म हुआ तो विवादों में फंसी ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’, क्या हुआ 2100  का वादा?

    महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ अब विवादों में फंस गई है। सरकार इसमें अनियमितता को लेकर क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही है। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनाव खत्म तो मामला खत्म। साथ ही राज्य के कृषि मंत्री का कहना है कि इससे किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    महाराष्ट्र में बहुचर्चित ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना‘ अब विवादों में फंस गया है। 2 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले महायुति गठबंधन ने इस योजना को लागू किया और चुनाव प्रचार में इसका भरपूर इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, चुनाव से पहले महिलाओं के बैंक खातों में 1500 रुपए की कुल 5 किश्तें भी जमा कराई और दावा किया गया कि चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों को 1500 की जगह 2100 रुपए दिया जाएगा। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    2100 बना चुनावी जुमला

    राज्य की महिलाओं ने महायुति को चुनाव तो जिता दिया, लेकिन अब तक उनके खाते में 2100 रुपये की रकम नहीं आई। और तो और 1500 देने मे भी सरकार आना-कानी कर रही है। राज्य के कृषि मंत्री ने यहां तक ​​कह दिया कि लाडकी बहिन योजना की वजह से किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ अब विवादों में आ गई है। विधानसभा चुनाव में वादा किया गया था कि चुनाव जीतने के बाद इस योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। लेकिन चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों की जांच शुरू कर दी गई। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    कहां हुई गडबडी ?

    आरोप है कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस योजना के तहत दो बार पंजीकरण कराया और दो बार पैसे भी ले लिए। एक ही घर की 4 से 5 महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया। जिनके पास 4 पहिया वाहन हैं वे भी लाभार्थी बन गईं और जो शादी करके दूसरे राज्य में चले गए है उन लोगों ने भी इस योजना का फायदा उठा लिया। इतना ही नहीं, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से अधिक है वो भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। अब सरकारी यंत्रणा ऐसे लाभार्थियों की सूची बनाकर उन्हें इस योजना से हटा रही है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    क्रॉस वेरिफिकेशन

    अब तक 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं, जबकि सूची छांटने के बाद यह संख्या करीब 25 लाख कम हो जाएगी. वहीं, राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 2 महीनों में हमारे पास लाडकी बहिन योजना लाभार्थियों के बारे में कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनके आधार पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। आईटी विभाग की मदद ली जा रही है। आधार कार्ड का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को इस प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमारा उद्देश्य है कि अधिकतम लाभार्थियों को योजना का लाभ मिले। लेकिन हमें जो शिकायतें मिली हैं, उनका समाधान करने की जरूरत है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को सशक्त बनाना और जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम है, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    विपक्ष और पक्ष दोनों ने लगाया आरोप

    महाराष्ट्र सरकार की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी फायदे के लिए बिना उचित जांच के इस योजना को शुरू कर दिया गया, जिसके कारण अपात्र लाभार्थियों को भी इसका फायदा मिला। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि सरकार ने वोट पाने के लिए मानदंडों को सख्ती से लागू किए बिना लाभार्थियों को पैसे बांटे। राउत ने यह भी कहा, कि ‘वह सिर्फ चुनावी नारा था, चुनाव से पहले पैसे देकर वोट लिए गए, उसके बाद मामला खत्म हो गया।’ (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    एक ही महिला को कई योजनाओं का मिला लाभ

    वहीं, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने भी आरोप लगाया कि लड़की बहन योजना के कारण किसानों के हित की कई योजनाएं बंद हो गईं। उन्होंने अपनी ही सरकार के लाडकी बहिन योजना पर 45 हजार करोड़ और किसान कर्ज योजना पर 15 हजार करोड़ हर साल व्यर्थ में बांटने का आरोप लगाया। अब अगर हमारे मंत्रालय को और पैसा मिलेगा तो हम किसानों को किसान सम्मान योजना का लाभ दे पाएंगे। वैसे भी इस योजना का पैसा महिलाएं लेती हैं और सिर्फ प्रपंच पर खर्च करती हैं। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    उन्होंने कहा, ‘इस बात को सभी लोग जानते हैं कि हमारे घर में भी महिलाएं हैं। महिलाओं को दिया जाने वाला पैसा अब सिर्फ प्रपंच पर खर्च होता है। लड़की बहन योजना का पैसा भी इधर-उधर किया गया। बच्चों के लिए ये लो, उनके लिए वो लो। बेकार का खर्च, और कुछ नहीं.’ उनका कहना है कि जो महिलाएं मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना में सरकारी पैसा ले रही हैं, उन्हें किसान सम्मान योजना में पैसा नहीं लेना चाहिए। मुझे बताइए कि एक महिला दो सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे ले सकती है? सरकार को इस पर जीआर लाना चाहिए। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)

    क्या बंद हो जाएगा मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना ?

    मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना को लेकर विवादों के बीच लोगों में इस योजना को बंद किए जाने को लेकर चर्चाऐ आम होने लगी है। लोगों को अब लगने लगा है कि शायद महायुति की सरकार ने लोगों को ‘चुनावी जुमले’ जैसे वादों मे फंसा कर धोखा दिया है और अब चुनाव मे जीत हासिल करने के बाद पैसा देना बंद कर दिया है। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने कहा, कि सरकार ने लाडकी बहिन योजना शुरू की थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डालने की कोशिश की। फिलहाल ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ को बंद नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि पात्रता मानदंडों की सख्ती से जांच की जाएगी ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिल सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का उद्देश्य सही लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके। (When elections ended in Maharashtra, ‘Mukhyamantri Ladki Bahini Yojana’ stuck in controversy, what happened to the promise of 2100)