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  • Kandivali Redevelopment विवाद: MSFC ने Developer पर कसा शिकंजा

    Kandivali Redevelopment विवाद: MSFC ने Developer पर कसा शिकंजा

    Kandivali Samata Nagar staff quarters redevelopment मामले में MSFC ने SD Corporation के खिलाफ legal action शुरू किया। MahaRERA और Bombay High Court में मामला, consent agreement breach और ₹88 लाख के rent-deposit विवाद ने बढ़ाई हलचल।

    मुंबई: Kandivali के Samata Nagar में स्थित staff quarters के redevelopment को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Maharashtra State Financial Corporation (MSFC) ने developer SD Corporation के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला अब Bombay High Court और MahaRERA तक पहुंच चुका है, जहां consent agreement breach और alleged misconduct के आरोपों की जांच चल रही है।

    📍 क्या है पूरा Kandivali Staff Quarters Dispute?

    MSFC ने अपने Kandivali स्थित staff quarters के redevelopment के लिए SD Corporation को नियुक्त किया था। शर्त साफ थी — redevelopment के बाद 40 flats MSFC को सौंपे जाएंगे।

    लेकिन 2019 में मामला उस वक्त उलझ गया जब यह सामने आया कि MSFC के आठ कर्मचारियों को developer की तरफ से ₹88 लाख rent और deposits के रूप में allegedly मिले थे।

    💰 ₹88 लाख Rent-Deposit और ₹12.45 लाख का नया खुलासा

    जांच में यह भी सामने आया कि चार कर्मचारियों ने MSFC से ही ₹12.45 लाख का rent वसूला।

    इतना ही नहीं, developer ने तय 40 flats में से आठ flats इन्हीं कर्मचारियों को उनके इस्तेमाल के लिए सौंप दिए थे।

    MSFC ने इसे redevelopment agreement का सीधा breach और कर्मचारियों की misconduct करार दिया।

    📜 MSFC ने Developer को भेजा Notice

    इन घटनाओं के बाद MSFC ने SD Corporation को औपचारिक notice जारी किया।

    Corporation का कहना है कि redevelopment terms का उल्लंघन हुआ है और बिना consent के flats कर्मचारियों को देना agreement breach है।

    ⚖️ Bombay High Court में मामला, Arbitrator की नियुक्ति

    सितंबर 2023 में Bombay High Court ने इस मामले में retired chief justice RD Dhanuka को arbitrator नियुक्त किया।

    मामला अदालत में लंबित रहते हुए भी developer ने MSFC के साथ consent agreement करने की इच्छा जताई। यह consent agreement 21 जून 2025 को execute किया गया।

    🤝 Consent Agreement में क्या था?

    Consent agreement के तहत developer ने 40 redevelopment flats के अलावा 650 sq ft carpet area के 12 और flats MSFC को देने पर सहमति दी।

    साथ ही यह भी तय हुआ कि अगर समय पर delivery नहीं हुई तो developer एक और अतिरिक्त flat MSFC को देगा।

    ❌ फिर हुआ Agreement Breach

    MSFC का आरोप है कि consent agreement के बावजूद developer ने शर्तों का पालन नहीं किया।

    40 flats में से आठ flats MSFC की अनुमति के बिना कर्मचारियों को दे दिए गए।

    इसके बाद MSFC ने उन कर्मचारियों को notice भेजा जो इन flats में रह रहे हैं और उनसे rent वापस करने को कहा है।

    🏠 Retired Employees से Recovery की मांग

    MSFC ने उन retired कर्मचारियों से भी रकम की recovery की मांग की है, जो allegedly अवैध रूप से premises में रह रहे हैं और जिन्होंने developer से रकम ली थी।

    🏛️ MahaRERA और High Court में Legal Action

    राज्य के industries minister Uday Samant ने legislative council में लिखित जवाब में बताया कि MSFC ने developer के खिलाफ legal process शुरू कर दिया है।

    Samant के अनुसार:

    • MSFC ने High Court में consent agreement breach के खिलाफ जाने के लिए legal counsel नियुक्त किया है।
    • साथ ही MahaRERA (Maharashtra Real Estate Regulatory Authority) से developer के खिलाफ regulatory action की मांग की है।

    🔎 Urban Redevelopment और Governance पर सवाल

    Kandivali redevelopment dispute ने Mumbai redevelopment projects में transparency, accountability और governance को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    Experts का कहना है कि staff quarters और सरकारी जमीनों के redevelopment में clear compliance और monitoring बेहद जरूरी है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. विवाद किस प्रोजेक्ट को लेकर है?
    Kandivali के Samata Nagar स्थित MSFC staff quarters के redevelopment को लेकर।

    Q2. MSFC ने developer पर क्या आरोप लगाए हैं?
    Agreement breach, बिना consent flats सौंपने और कर्मचारियों को rent-deposit देने के आरोप।

    Q3. ₹88 लाख का मामला क्या है?
    आठ कर्मचारियों को developer की तरफ से allegedly ₹88 लाख rent और deposit के रूप में मिले थे।

    Q4. मामला किस कोर्ट में है?
    Bombay High Court में मामला लंबित है और RD Dhanuka को arbitrator नियुक्त किया गया है।

    Q5. MahaRERA की क्या भूमिका है?
    MSFC ने developer के खिलाफ regulatory action के लिए MahaRERA से संपर्क किया है।

  • Bandra West में फिर खोदी गई St Andrew’s Road, Residents नाराज़

    Bandra West में फिर खोदी गई St Andrew’s Road, Residents नाराज़

    Bandra (W) की St Andrew’s Road एक बार फिर खुदाई की वजह से चर्चा में। Bandra Gymkhana के बाहर carriageway का हिस्सा excavate, traffic single lane पर। BMC ने Chimbai pumping station upgradation और micro-tunnelling बताया कारण।

    मुंबई: शहर के पॉश इलाकों में गिने जाने वाले Bandra (West) में एक बार फिर सड़क खुदाई को लेकर residents में गुस्सा देखने को मिल रहा है। Bandra Gymkhana के बाहर स्थित St Andrew’s Road का एक हिस्सा दोबारा खोद दिया गया है, जिससे traffic single lane तक सिमट गया है और रोजाना आने-जाने वाले motorists को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क पहले भी कई बार मरम्मत और निर्माण के नाम पर खोदी जा चुकी है, और अब फिर से excavation शुरू होने से “never-ending road work” जैसा हाल बन गया है।

    📍 St Andrew’s Road पर क्या हुआ?

    ताजा घटनाक्रम में St Andrew’s Road के एक हिस्से, खासकर Bandra Gymkhana के बाहर के stretch को दोबारा excavate किया गया। carriageway का बड़ा हिस्सा खोद दिए जाने के कारण गाड़ियों की आवाजाही सिर्फ एक लेन तक सीमित हो गई है।

    इस वजह से peak hours में लंबा traffic jam लग रहा है और local commuters को देरी का सामना करना पड़ रहा है। Residents का कहना है कि बिना proper advance notice और clear signage के खुदाई शुरू कर दी गई।

    😡 Residents का गुस्सा: “कब खत्म होगा ये road work?”

    Bandra (W) के कई स्थानीय निवासियों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह सड़क पिछले कुछ सालों से बार-बार खोदी जा रही है। एक resident ने कहा,

    “हर कुछ साल में यही सड़क खोद दी जाती है। पहले repair, फिर concretisation, अब pumping station का काम। आखिर planning है या नहीं?”

    लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले से ही narrow roads और heavy traffic के लिए जाना जाता है। ऐसे में एक लेन कम हो जाने से हालात और बिगड़ जाते हैं।

    🏗️ 2018 में Asphalt Work अधूरा रह गया था

    अगर पीछे की कहानी देखें तो May 2018 में Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने St Andrew’s Road पर paver blocks हटाकर asphalt बिछाने का काम शुरू किया था।

    लेकिन यह काम पूरा नहीं हो पाया। Residents की शिकायतों के बाद contractor की services terminate कर दी गई थीं। आरोप था कि काम की quality shoddy थी और execution में कई खामियां थीं।

    यानी 2018 में शुरू हुआ road repair project अधूरा ही छूट गया, जिससे लोगों में पहले से ही नाराज़गी थी।

    🛣️ 2021 में Concretisation का प्लान

    इसके बाद 2021 में civic body ने इस सड़क को concretise करने की योजना बनाई थी। यानी asphalt की जगह पूरी concrete road बनाने की बात कही गई थी ताकि लंबे समय तक durability बनी रहे।

    हालांकि, अब जो खुदाई हो रही है, वह उस concretisation plan से जुड़ी नहीं बताई जा रही है।

    🏭 BMC का स्पष्टीकरण: Road Repair नहीं, Pumping Station Upgrade

    Civic officials का कहना है कि वर्तमान excavation का road repair या resurfacing से कोई संबंध नहीं है।

    BMC अधिकारियों के अनुसार, यह काम Chimbai pumping station upgradation project का हिस्सा है। इसमें micro-tunnelling तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और जो हिस्सा खोदा गया है, वह एक chamber बनाने के लिए है।

    यानी, सड़क को पूरी तरह से तोड़ने के बजाय एक specific section में chamber construction के लिए excavation किया गया है।

    🔧 Micro-Tunnelling क्या है और क्यों जरूरी?

    Micro-tunnelling एक modern underground construction technique है, जिसमें बिना पूरी सड़क तोड़े जमीन के नीचे pipeline या drainage system बिछाया जाता है।

    Chimbai pumping station upgrade का मकसद reportedly drainage और stormwater management system को बेहतर बनाना है। Bandra जैसे coastal और low-lying areas में monsoon के दौरान waterlogging बड़ी समस्या रहती है।

    Officials का दावा है कि यह project long-term flood mitigation के लिए जरूरी है।

    🚗 Traffic Impact और Daily Commuters की परेशानी

    हालांकि BMC का तर्क है कि काम जरूरी है, लेकिन ground reality यह है कि traffic single lane पर आ जाने से रोजाना सैकड़ों motorists प्रभावित हो रहे हैं।

    • School buses को देरी
    • Office commuters को लंबा जाम
    • Local deliveries पर असर

    Residents का कहना है कि अगर यह project unavoidable है, तो proper traffic management plan और clear timeline दी जानी चाहिए।

    📣 Transparency और Coordination पर सवाल

    Local नागरिकों का सवाल है कि जब 2018 में asphalt work अधूरा रह गया और contractor terminate हुआ, और 2021 में concretisation plan आया, तो क्या इन projects के बीच proper coordination हुआ था?

    Experts का मानना है कि Mumbai में multiple infrastructure projects अक्सर अलग-अलग departments के बीच coordination की कमी के कारण overlapping हो जाते हैं।

    Residents की मांग है कि future planning में integrated approach अपनाई जाए ताकि एक ही सड़क बार-बार न खोदी जाए।

    🌧️ Monsoon से पहले काम पूरा होगा?

    Bandra (W) के लोग इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अगर excavation लंबा चला तो monsoon के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं।

    Waterlogging और potholes का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल BMC ने work completion timeline को लेकर कोई सार्वजनिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।

    🏙️ Bigger Urban Issue: Mumbai Road Digging Cycle

    St Andrew’s Road का मामला सिर्फ एक isolated incident नहीं है। Mumbai के कई इलाकों में residents अक्सर “dig, repair, re-dig” cycle की शिकायत करते रहे हैं।

    Urban infrastructure experts का कहना है कि long-term planning, utility mapping और centralized approval system से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. St Andrew’s Road को फिर से क्यों खोदा गया है?
    BMC के अनुसार यह road repair नहीं, बल्कि Chimbai pumping station upgradation project का हिस्सा है, जिसमें micro-tunnelling और chamber construction शामिल है।

    Q2. 2018 में क्या हुआ था?
    BMC ने paver blocks हटाकर asphalt बिछाने का काम शुरू किया था, लेकिन quality issues की शिकायत के बाद contractor की services terminate कर दी गईं और काम अधूरा रह गया।

    Q3. 2021 में क्या योजना थी?
    Civic body ने सड़क को concretise करने की योजना बनाई थी।

    Q4. अभी traffic पर क्या असर है?
    Carriageway का हिस्सा खोद दिए जाने से traffic single lane तक सीमित है, जिससे जाम और देरी हो रही है।

    Q5. Residents की मुख्य मांग क्या है?
    Proper planning, transparency, timeline और बेहतर traffic management।

  • Mumbai: Notice ना देने पर MNS कार्यकर्ता रिहा, कोर्ट ने बताया Arrest अवैध

    Mumbai: Notice ना देने पर MNS कार्यकर्ता रिहा, कोर्ट ने बताया Arrest अवैध

    Mumbai में MNS activist Ravindra Shinde की गिरफ्तारी को कोर्ट ने अवैध माना। BNSS Section 35(3) के तहत notice न देने पर magistrate court ने दी रिहाई। Extortion case में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल।

    मुंबई: मुंबई में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। South Mumbai में रोड वर्क ठेकेदार से कथित तौर पर धमकी देकर वसूली (extortion) करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए MNS कार्यकर्ता Ravindra Shinde को अदालत ने रिहा कर दिया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में BNSS के तहत जरूरी notice नहीं दिया गया, जिससे arrest अवैध हो गया।

    ⚖️ Court का बड़ा फैसला: Arrest को बताया Illegal

    मामले की सुनवाई के दौरान magistrate court ने कहा कि चूंकि आरोपी को Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) Section 35(3) के तहत अनिवार्य notice for appearance नहीं दिया गया, इसलिए गिरफ्तारी वैध नहीं मानी जा सकती।

    यह मामला उन अपराधों से जुड़ा है जिनमें अधिकतम सजा सात साल तक की है। ऐसे मामलों में Supreme Court के आदेश के मुताबिक पहले notice जारी करना जरूरी है।

    👤 कौन हैं आरोपी?

    इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम Ravindra Shinde है, जो MNS (Maharashtra Navnirman Sena) से जुड़े कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। उन्हें शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

    उन पर आरोप है कि उन्होंने South Mumbai में एक road work contractor को धमकाकर पैसे की मांग की थी।

    📜 Defence ने Supreme Court Order का दिया हवाला

    Shinde की ओर से वकील Rajendra Shirodkar, साथ में Archit Sakhalkar ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने Supreme Court के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि जिन अपराधों में सात साल तक की सजा है, उनमें Section 35(3) BNSS के तहत पहले notice देना अनिवार्य है।

    डिफेंस का तर्क था कि पुलिस ने यह जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की।

    🏛️ Police ने कहा – Process Follow किया

    Public Prosecutor R A Patil ने अदालत में कहा कि पुलिस ने सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया है।

    हालांकि कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी यह साबित नहीं कर सके कि आरोपी को Section 35(3) के तहत notice जारी किया गया था।

    📌 BNSS की किन धाराओं का पालन हुआ?

    डिफेंस वकील Shirodkar ने बताया कि मजिस्ट्रेट ने माना कि पुलिस ने:

    • Section 47(1) BNSS के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी
    • Section 48(2) और 48(3) BNSS के तहत आरोपी के रिश्तेदारों को सूचना दी

    लेकिन सबसे अहम Section 35(3) notice for appearance जारी करने का कोई प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।

    🔎 Legal Procedure पर फिर उठे सवाल

    इस फैसले के बाद Mumbai Police की arrest procedure और BNSS compliance को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है। Legal experts का मानना है कि Supreme Court guidelines का पालन न करना जांच पर असर डाल सकता है।


    ❓ FAQ Section

    Q1. किसे रिहा किया गया है?
    MNS कार्यकर्ता Ravindra Shinde को कोर्ट ने रिहा किया।

    Q2. कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध क्यों माना?
    क्योंकि BNSS Section 35(3) के तहत अनिवार्य notice for appearance जारी नहीं किया गया था।

    Q3. आरोपी पर क्या आरोप हैं?
    South Mumbai में एक road work contractor को धमकाकर extortion करने का आरोप है।

    Q4. पुलिस ने कौन सी कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी?
    Section 47(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण बताए और Section 48(2)(3) के तहत रिश्तेदारों को सूचना दी।

    Q5. Supreme Court का क्या आदेश है?
    जिन मामलों में सजा सात साल तक है, उनमें पहले notice जारी करना जरूरी है।

  • Andheri West Demolition Video Viral: Seven Bungalows में ‘Earthquake Like’ Tremors से दहशत

    Andheri West Demolition Video Viral: Seven Bungalows में ‘Earthquake Like’ Tremors से दहशत

    Andheri West के Seven Bungalows इलाके में Ratan Kunj building demolition का shocking video viral। Residents ने महसूस किए ‘earthquake like tremors’, BMC पर उठे safety norms और illegal construction के सवाल।

    मुंबई: Andheri West के Seven Bungalows इलाके में रविवार को एक demolition drive ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। Ratan Kunj building को गिराते वक्त का एक shocking viral video सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें इमारत का बड़ा हिस्सा एक ही झटके में नीचे गिरता दिख रहा है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि गिरने के समय उन्हें “earthquake like tremors” महसूस हुए।

    📹 Viral Video में क्या दिखा?

    वायरल वीडियो, जिसे Instagram अकाउंट Andheriloca ने शेयर किया है, उसमें Ratan Kunj building के ऊपरी हिस्से का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिरता दिख रहा है। वीडियो में कहीं भी साफ तौर पर protective barricading, safety net या dust control measures नजर नहीं आ रहे।

    Debris सीधे नीचे गिरता दिखाई दे रहा है, जिससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या demolition के दौरान BMC safety guidelines और controlled dismantling norms का पालन किया गया था या नहीं।

    🏢 Residents बोले – ‘भूकंप जैसा लगा’

    घटना के बाद कई लोकल residents ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। एक निवासी ने लिखा,

    “हम यहीं पास में रहते हैं। गिरने के वक्त सच में tremors महसूस हुए, ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। ये सिर्फ demolition नहीं, इसकी construction भी illegal लगती है, क्योंकि इसे बने ज्यादा समय भी नहीं हुआ।”

    दूसरे यूज़र ने civic body को टैग करते हुए लिखा कि गिरने के impact से “earthquake-like effect” हुआ और यह परिवारों के लिए बेहद डरावना अनुभव था।

    🌫️ Dust Pollution और Sunday Work पर भी सवाल

    स्थानीय लोगों ने सिर्फ demolition की safety पर ही नहीं, बल्कि excessive dust pollution और रविवार को भी construction activities जारी रहने पर भी आपत्ति जताई।
    एक कमेंट में लिखा गया,

    “ये आसपास रहने वाले लोगों के लिए बिल्कुल safe नहीं है। Sunday को भी काम कैसे चल रहा है? BMC इसे कैसे allow कर रही है?”

    🏛️ BMC पर उठे सवाल, कोई आधिकारिक बयान नहीं

    वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। आरोप लगाया गया है कि demolition “dangerous manner” में किया गया और BMC द्वारा तय norms का खुला उल्लंघन हुआ।

    फिलहाल, खबर लिखे जाने तक BMC की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    ⚠️ Densely Populated Area में Safety Concerns

    Seven Bungalows जैसे densely populated residential area में इस तरह की demolition ने एक बार फिर Mumbai demolition safety norms, illegal construction और public safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    Residents का साफ कहना है कि accountability तय होनी चाहिए और developer के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


    ❓ FAQ Section

    Q1. Andheri West में कौन सी बिल्डिंग का demolition हुआ?
    Seven Bungalows इलाके में स्थित Ratan Kunj building का demolition किया जा रहा था।

    Q2. Viral video में क्या दिख रहा है?
    वीडियो में बिल्डिंग का बड़ा हिस्सा एक ही बार में गिरता दिख रहा है, जहां कोई साफ safety barricading नजर नहीं आती।

    Q3. Residents ने क्या आरोप लगाए?
    लोगों का कहना है कि उन्हें “earthquake like tremors” महसूस हुए और demolition safety norms का पालन नहीं हुआ।

    Q4. क्या BMC ने इस मामले में बयान दिया है?
    खबर लिखे जाने तक BMC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    Q5. लोगों की मुख्य चिंता क्या है?
    Safety norms का उल्लंघन, dust pollution, Sunday को काम और illegal construction को लेकर चिंता जताई गई है।

  • Andheri Murder Case: Domestic Dispute के बाद पति ने पत्नी को चाकू से गोदा, Arrest

    Andheri Murder Case: Domestic Dispute के बाद पति ने पत्नी को चाकू से गोदा, Arrest

    Mumbai के Andheri East में 46 वर्षीय Rajesh Eknath Chhatre ने पत्नी Panchbhila Chhatre की stabbing कर हत्या की। MIDC Police ने आरोपी को गिरफ्तार किया, CCTV और eyewitness के आधार पर FIR दर्ज।

    मुंबई: Mumbai Crime की एक दिल दहला देने वाली घटना में Andheri East में 46 साल के शख्स ने अपनी पत्नी की चाकू मारकर हत्या कर दी। Domestic Dispute के बाद आरोपी ने सरेआम हमला किया। MIDC Police ने आरोपी Rajesh Eknath Chhatre को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी वारदात कैमरे में कैद होने की भी जानकारी सामने आई है।

    Aradhya Hospital के सामने हुआ हमला

    पुलिस के मुताबिक यह घटना 28 फरवरी को शाम करीब 4:30 बजे Sagbaug Road स्थित Aradhya Hospital के सामने हुई।

    आरोपी Rajesh Eknath Chhatre (46) ने अपनी पत्नी Panchbhila Rajesh Chhatre (38) पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    Eyewitness Auto Driver ने दी पुलिस को सूचना

    इस मामले में शिकायत Powai निवासी 27 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक Rahil Riyaz Lokhande ने दर्ज कराई। उन्होंने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी और तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    उनके बयान के आधार पर MIDC Police ने मामला दर्ज किया।

    साथ रहने को लेकर था विवाद

    FIR के मुताबिक आरोपी इस बात से नाराज था कि उसकी पत्नी उसके साथ रहने को तैयार नहीं थी। बहस के दौरान उसने एक हाथ से पत्नी को पकड़ा और धमकी दी कि वह उसे छोड़ेगा नहीं।

    इसके बाद उसने तेज धारदार चाकू से बार-बार हमला किया। महिला को कई गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

    Crime Weapon बरामद, सबूत जब्त

    Post-mortem के दौरान मृतका के कपड़े और घटनास्थल से अन्य सैंपल सबूत के तौर पर जब्त किए गए।

    आरोपी की गिरफ्तारी के समय पहने गए कपड़े भी पुलिस ने कब्जे में ले लिए हैं। हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया गया है।

    Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत केस दर्ज

    MIDC Police ने आरोपी के खिलाफ Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 103(1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें मौत या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

    इसके अलावा Maharashtra Police Act की धारा 37(1)(a) और 135 भी लगाई गई है।

    मामला 28 फरवरी रात 11:32 बजे दर्ज किया गया। आरोपी को 1 मार्च को रात 12:09 बजे गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की जांच जारी है।


    FAQ Section

    Q1. Andheri Murder Case कब हुआ?
    28 फरवरी को शाम 4:30 बजे के आसपास।

    Q2. आरोपी कौन है?
    Rajesh Eknath Chhatre (46), जो मृतका का पति है।

    Q3. हत्या की वजह क्या थी?
    Domestic Dispute और साथ रहने को लेकर विवाद।

    Q4. केस किस कानून के तहत दर्ज हुआ?
    Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 103(1) और Maharashtra Police Act की धाराएं।

    Q5. आरोपी कब गिरफ्तार हुआ?
    1 मार्च को रात 12:09 बजे।

  • Iran-Afghanistan Tension से Mumbai में Dry Fruits महंगे, कीमतों में 30% तक उछाल

    Iran-Afghanistan Tension से Mumbai में Dry Fruits महंगे, कीमतों में 30% तक उछाल

    Iran-Israel conflict और Afghanistan-Pakistan war के असर से Mumbai में imported dry fruits जैसे pista, mamra badam, anjeer, saffron और apricot की कीमतों में 20-30% तक बढ़ोतरी। APMC Vashi, Crawford Market, Masjid Bunder और Malad में हड़कंप, wedding season पर असर।

    मुंबई: Middle East में बढ़ते Iran-Israel conflict और Afghanistan-Pakistan tension का सीधा असर अब मुंबई की थाली पर दिखने लगा है। Iran और Afghanistan से आने वाले imported dry fruits जैसे figs (anjeer), almonds (badam), pistachios (pista), raisins (kishmish), saffron (kesar) और apricots (khubani) की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ गया है। व्यापारियों के मुताबिक हालात और बिगड़े तो सप्लाई पूरी तरह रुक सकती है।

    US Attack on Iran के बाद से बढ़ने लगी थीं कीमतें

    सूत्रों के मुताबिक, June 2025 में US द्वारा Iran पर किए गए हमले के बाद से ही दाम चढ़ने शुरू हो गए थे। इसके बाद October में Pakistan ने Afghanistan में घुसकर हमला किया, जिससे भारत को होने वाली सप्लाई में बड़ी रुकावट आई।

    अब शनिवार को Middle East में हुए ताजा घटनाक्रम के बाद संकट और गहरा गया है। Traders का कहना है कि अगर Iranian route बंद हुआ तो imports पूरी तरह ठप हो जाएंगे।

    Wagah Border बंद, अब Iran Port ही Mumbai एकमात्र रास्ता

    पहले Afghanistan से dry fruits सीधे Amritsar के Wagah Border के रास्ते आते थे, लेकिन India-Pakistan conflict के बाद यह रास्ता दो साल पहले बंद हो गया।

    अब माल Iran के port के जरिए भारत पहुंच रहा है। Mumbai Dryfruit and Date Merchants Association के अध्यक्ष और APMC director विजय भुटा ने कहा कि अगर यह Iranian route भी बंद हुआ तो arrivals पूरी तरह choke हो जाएंगी।

    उनके मुताबिक फिलहाल औसतन 5% की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बाकी व्यापारी इससे ज्यादा उछाल बता रहे हैं।

    Crawford Market और Malad में 20-30% तक महंगाई

    Crawford Market के A-1 Dryfruit के बाबन पवार ने बताया:

    • Mamra badam: ₹1,800 (Oct) से बढ़कर ₹2,800/kg
    • Irani pista: ₹840 से ₹1,300/kg
    • Irani apricot: ₹750 (Dec 2025) से ₹1,400/kg
    • कुछ मामलों में कीमतें दोगुनी

    उन्होंने कहा, “जो ग्राहक पहले 1 किलो लेते थे, अब 250 ग्राम ले रहे हैं। 2025 से बिक्री 50% तक गिर गई है।”

    Malad के मेहुल गाला ने कहा कि अगर Iran ने borders पूरी तरह बंद किए तो imports halt हो जाएंगे और short term में supply scarcity और price hike दोनों देखने को मिलेंगे। Mumbai और Delhi के बड़े बाजारों ने पुराने rate वापस ले लिए हैं और नए rate जल्द घोषित होंगे।

    Wedding Season और Mithai Industry पर असर

    Bulk buyers जैसे:

    • Sweetmeat makers
    • Hotels & Restaurants
    • Bakers & Confectioners
    • Caterers
    • Dairy Industry
    • Snack Makers
    • Processed Food Industry
    • Cosmetics Sector

    सभी पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

    Ulhasnagar के A-1 Sweets के विक्की जैसिंघानी ने कहा:
    “Imported Pishori pista ₹2,600 से बढ़कर ₹3,400/kg हो गया। Iranian pista ₹1,650 से ₹2,400 हो गया। लेकिन mithai का स्वाद बनाए रखने के लिए हमें Pishori pista लेना ही पड़ेगा।”

    Masjid Bunder के Pravinchandra & Co. के मयूर शाह ने कहा कि फिलहाल उन्होंने rate नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन stock खत्म होने के बाद बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने बताया कि cashew भारत से आता है और almonds California से भी आते हैं, लेकिन imported anjeer, pista, saffron और apricots सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इसका असर upcoming wedding season पर भी पड़ेगा।


    FAQ Section

    Q1. Dry fruits की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
    Iran-Israel conflict और Afghanistan-Pakistan war के कारण supply chain प्रभावित हुई है।

    Q2. कौन-कौन से dry fruits महंगे हुए हैं?
    Pista, mamra badam, anjeer, saffron, apricot, raisins।

    Q3. कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
    औसतन 20-30%, कुछ मामलों में दोगुनी।

    Q4. क्या wedding season पर असर पड़ेगा?
    हां, mithai और catering industry पर सीधा असर पड़ेगा।

    Q5. क्या आगे और महंगाई बढ़ सकती है?
    अगर Iran का route बंद हुआ तो supply पूरी तरह रुक सकती है और कीमतें और बढ़ सकती हैं।

  • Mental Healthcare Act को Litigation Weapon नहीं बना सकते: Bombay HC

    Mental Healthcare Act को Litigation Weapon नहीं बना सकते: Bombay HC

    Bombay High Court ने साफ किया कि Mental Healthcare Act 2017 और Section 105 का इस्तेमाल property dispute या किसी भी litigation में विरोधी की mental capacity पर सवाल उठाने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा – यह कानून protection के लिए है, harassment के लिए नहीं।

    मुंबई: शहर में चल रहे एक अहम property dispute case में Bombay High Court ने बड़ा और साफ संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि Mental Healthcare Act, 2017 को किसी भी पक्ष द्वारा सामने वाले की mental capacity पर सवाल उठाने के लिए “litigation weapon” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह कानून कमजोर और जरूरतमंद लोगों की हिफाज़त के लिए है, न कि कोर्ट में बढ़त लेने की चाल के लिए।

    ⚖️ Welfare Law के Misuse पर सख्त टिप्पणी

    17 फरवरी को जस्टिस Farhan Dubash ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ एक पक्ष के आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति की जांच के लिए Mental Health Review Board (MHRB) को रेफर करना कानून के गलत इस्तेमाल का रास्ता खोल सकता है।

    कोर्ट ने साफ कहा कि अगर ऐसा होने लगा तो welfare legislation को adversarial parties अपने फायदे के लिए “weaponise” करने लगेंगी। इससे कानून का असली मकसद ही खत्म हो जाएगा।

    📜 Section 105 की सही व्याख्या

    कोर्ट ने समझाया कि Section 105 of Mental Healthcare Act 2017 अदालत को यह अधिकार देता है कि अगर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान mental illness का पुख्ता सबूत हो, तभी मामले को Mental Health Review Board के पास भेजा जा सकता है।

    लेकिन जस्टिस दुबाश ने कहा कि इस प्रावधान को पूरे कानून के उद्देश्य के साथ पढ़ना जरूरी है। इसका मकसद है rights protection, न कि किसी विरोधी पक्ष के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने का तरीका।

    कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा:

    “यह कानून मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए है, न कि किसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला हथियार।”

    🏠 Property Dispute का पूरा मामला

    यह फैसला एक ongoing property dispute in Mumbai के दौरान आया। बेटे ने अपने पिता की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए एक independent medical board बनाने की मांग की थी।

    बेटे का दावा था कि उसके पिता मुकदमे को समझने और लड़ने में सक्षम नहीं हैं। उसने एक medical certificate भी पेश किया, जिसमें confusion और forgetfulness के एपिसोड का जिक्र था। डॉक्टरों ने इन लक्षणों को diabetes से जुड़ी hypoglycaemia की वजह बताया था।

    🩺 Temporary Symptoms को Mental Illness नहीं माना

    कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया और कहा कि जिन लक्षणों का जिक्र है, वे अस्थायी (temporary) और medically reversible थे। ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव के कारण ऐसी स्थिति बन सकती है।

    इसलिए इसे mental illness under Mental Healthcare Act की कानूनी परिभाषा में नहीं रखा जा सकता।

    🚫 Harassment का रास्ता नहीं खुलेगा

    कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:

    “अगर ऐसी मांगों को मंजूरी दी गई तो बेईमान litigants कानून को harassment के हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे।”

    कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा होने से हर मुकदमे में एक पक्ष दूसरे की mental fitness पर सवाल उठाकर litigation strategy के तहत फायदा उठाने की कोशिश करेगा।

    🔄 Mental Health Law में बदलाव की याद दिलाई

    कोर्ट ने कहा कि 2017 का कानून भारत में mental health law का बड़ा बदलाव है। पहले की व्यवस्था custodial और stigma-driven थी, लेकिन अब यह rights-based framework है, जो dignity, autonomy, treatment और rehabilitation पर फोकस करता है।

    🛡️ “Shield है, Sword नहीं”

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि Section 105 एक “shield” है, जो मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों की सुरक्षा करता है, न कि एक “sword” जो किसी के खिलाफ कोर्ट में चलाया जाए।

    ❌ कोर्ट ने याचिका खारिज की

    अदालत ने पाया कि बेटे की अर्जी पिता के welfare से ज्यादा ongoing litigation में advantage लेने की कोशिश थी।

    साथ ही कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इसी तरह की एक अर्जी पहले भी दायर की गई थी, जिसे बिना दोबारा दाखिल करने की अनुमति के वापस ले लिया गया था।

    इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम आवेदन (interim application) खारिज कर दिया।


    ❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. Bombay High Court ने क्या फैसला दिया?

    कोर्ट ने कहा कि Mental Healthcare Act 2017 को property dispute या किसी भी litigation में विरोधी की mental capacity पर सवाल उठाने के हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

    Q2. Section 105 क्या है?

    Section 105 अदालत को यह अधिकार देता है कि यदि मानसिक बीमारी का सबूत हो तो मामले को Mental Health Review Board को भेजा जा सकता है।

    Q3. इस केस में मेडिकल रिपोर्ट में क्या था?

    रिपोर्ट में confusion और भूलने की समस्या बताई गई थी, जो diabetes से जुड़ी hypoglycaemia के कारण अस्थायी रूप से हुई थी।

    Q4. कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

    कोर्ट को लगा कि यह अर्जी पिता के हित के बजाय litigation advantage पाने के लिए दाखिल की गई थी।

    Q5. Mental Healthcare Act 2017 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

    यह एक rights-based law है, जिसका मकसद mental illness से जूझ रहे लोगों की dignity, autonomy और protection सुनिश्चित करना है।

  • Chembur Building Accident: 7वीं मंज़िल से गिरे 6 मज़दूर, 1 की मौत

    Chembur Building Accident: 7वीं मंज़िल से गिरे 6 मज़दूर, 1 की मौत

    Chembur Subhash Nagar में under construction building से 6 मजदूर गिरने का बड़ा हादसा। 1 की मौत, 5 घायल। Mayor Ritu Tawde ने सख्त कार्रवाई और culpable homicide का केस दर्ज करने के निर्देश दिए। Rajawadi Hospital में इलाज जारी।

    मुंबई: Chembur इलाके के Subhash Nagar में शनिवार दोपहर बड़ा construction site accident सामने आया। Under construction building की 7वीं मंज़िल पर काम करते वक्त 6 मजदूर नीचे गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में 1 मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों का इलाज घाटकोपर स्थित Rajawadi Hospital में चल रहा है।

    Mayor Ritu Tawde ने किया मौके का दौरा

    हादसे की जानकारी मिलते ही मुंबई की महापौर Ritu Tawde तुरंत घटनास्थल पहुंचीं। उन्होंने पूरे मामले की primary investigation की जानकारी ली। बाद में वह सीधे Rajawadi Hospital पहुंचीं और घायल मजदूरों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

    उनके साथ उपमहापौर Sanjay Ghadi और विरोधी पक्षनेता Kishori Pednekar भी मौजूद थे।

    Building Project ‘Aditya Raj’ पर उठे सवाल

    महापौर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि यह इमारत ‘Aditya Raj’ नामक developer के माध्यम से बनाई जा रही है। प्रारंभिक जांच में safety negligence और भारी लापरवाही सामने आई है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब हादसा हुआ, तब साइट पर supervising engineer कहां था? क्या मजदूरों को proper safety gear दिया गया था? क्या scaffolding और सुरक्षा इंतज़ाम standard guidelines के मुताबिक थे?

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    Mayor ने साफ कहा कि इस तरह की construction negligence बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    Culpable Homicide का केस दर्ज करने के निर्देश

    महापौर Ritu Tawde ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि लापरवाही बरतने वाले developer और contractor के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

    उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दोषियों पर culpable homicide यानी मनुष्यवध का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए BMC और MHADA प्राधिकरण को सख्त monitoring और safety audit करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    7वीं मंज़िल पर काम के दौरान टूटी परांची

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, इमारत की 7वीं मंज़िल पर काम चल रहा था। इसी दौरान परांची (scaffolding) अचानक टूट गई और 6 मजदूर नीचे गिर पड़े।

    हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 5 घायल मजदूरों को तुरंत Rajawadi Hospital में भर्ती कराया गया।

    एक मजदूर ICU में भर्ती

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    राजावाड़ी अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, 5 घायलों में से एक की हालत बेहद गंभीर है और उसे ICU में रखा गया है। बाकी मजदूरों का इलाज जारी है।

    महापौर ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को best medical treatment दिया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न हो।

    Mumbai Construction Safety पर बड़ा सवाल

    यह हादसा एक बार फिर मुंबई में construction site safety, labour safety laws, और BMC action पर सवाल खड़े कर रहा है। लगातार हो रहे building accidents से मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।


    FAQ

    Q1. Chembur में हादसा कब हुआ?

    यह हादसा 28 फरवरी 2026 को दोपहर में हुआ।

    Q2. कितने मजदूर गिरे और कितनों की मौत हुई?

    कुल 6 मजदूर गिरे, जिनमें 1 की मौत हुई और 5 घायल हैं।

    Q3. घायलों का इलाज कहां चल रहा है?

    घायलों का इलाज घाटकोपर के Rajawadi Hospital में जारी है।

    Q4. हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?

    प्राथमिक जांच में scaffolding टूटने और safety negligence की बात सामने आई है।

    Q5. महापौर ने क्या कार्रवाई के निर्देश दिए?

    Developer और contractor पर सख्त कार्रवाई और culpable homicide का केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • Bombay HC का बड़ा आदेश: MSRTC को देना होगा ₹50 लाख मुआवज़ा

    Bombay HC का बड़ा आदेश: MSRTC को देना होगा ₹50 लाख मुआवज़ा

    Bombay High Court ने MSRTC को आदेश दिया कि COVID-19 से ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख compensation दे। कोर्ट ने कहा – महामारी के समय “narrow view” लेकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

    मुंबई: Bombay High Court ने एक अहम फैसले में Maharashtra State Road Transport Corporation (MSRTC) को निर्देश दिया है कि वह COVID-19 के दौरान ड्यूटी करते हुए संक्रमित होकर जान गंवाने वाले अपने कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख का compensation अदा करे। कोर्ट ने साफ कहा कि महामारी के समय निगम ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर “narrow view” अपनाया, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    🔹 Compensation Claim खारिज करने को दी थी चुनौती

    याचिकाकर्ता सुनीता बापू जगताप ने MSRTC के जनवरी 2022 और मार्च 2023 के उन फैसलों को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिनमें उनके मुआवज़े का दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि उनके पति “essential services” में तैनात नहीं थे और वे interstate transport के ड्राइवर भी नहीं थे।

    सुनीता जगताप के पति बापू जगताप की अप्रैल 2021 में COVID-19 से मौत हो गई थी। पत्नी का कहना था कि उनके पति ने महामारी के सबसे खतरनाक दौर में ड्यूटी की और उसी दौरान संक्रमण की चपेट में आए।

    🔹 HC का आदेश: 8 हफ्ते में भुगतान, नहीं तो 6% ब्याज

    24 फरवरी को जस्टिस मकरंद कर्णिक और जस्टिस श्रीराम मोडक की बेंच ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि MSRTC कुल ₹50 लाख में से ₹45 लाख आठ हफ्तों के भीतर अदा करे और पहले से दिए गए ₹5 लाख को adjust किया जाए।

    अगर आठ हफ्तों में भुगतान नहीं किया गया, तो 6% per annum की दर से interest भी देना होगा। कोर्ट ने कहा कि यह widow compensation का मामला है और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    🔹 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “Pandemic में Narrow View क्यों?”

    बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि MSRTC ने महामारी के दौरान अपनी जिम्मेदारी को लेकर बेहद संकीर्ण नजरिया अपनाया। कोर्ट ने कहा:

    “Pandemic के समय हालात ऐसे थे कि लोग घर से बाहर निकलने से डर रहे थे। ऐसे में जो कर्मचारी ड्यूटी कर रहे थे, वे अपनी जान जोखिम में डालकर public service निभा रहे थे।”

    कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही मृतक सीधे interstate buses नहीं चला रहे थे, लेकिन वे ड्राइवरों और कंडक्टरों के संपर्क में आते थे, जिससे उन्हें भी समान खतरा था।

    🔹 Pandemic की भयावह स्थिति पर कोर्ट की टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि वह judicial notice ले सकती है कि उस समय पूरा देश ठप था, public transport limited services के साथ चल रही थी और दवाइयों की भारी किल्लत थी।

    बेंच ने स्पष्ट किया कि सरकारों ने उस समय Disaster Management Act, 2005 और Epidemic Diseases Act, 1897 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया था। ऐसे हालात में कोई भी सरकारी संस्था अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

    🔹 Wadala Depot में ड्यूटी और संक्रमण की कहानी

    बापू जगताप को मार्च 24 से 28, 2021 के बीच BEST Bus Depot, वडाला में ट्रैफिक सुपरविजन की ड्यूटी दी गई थी। वहां वे बस ड्राइवरों और स्टाफ के लगातार संपर्क में रहे।

    29 से 31 मार्च तक तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने छुट्टी ली और नाशिक जिले के मनमाड लौट गए। 5 अप्रैल 2021 को उनकी COVID-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान 7 अप्रैल 2021 को येवला के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में COVID-related pneumonia से उनका निधन हो गया।

    🔹 Widow Compensation और Employee Rights पर बड़ा संदेश

    इस फैसले को employee rights, COVID compensation policy और government liability के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। High Court ने साफ किया कि महामारी जैसे संकट के समय ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को “essential service” की संकीर्ण परिभाषा में बांधकर उनके परिवार को मुआवज़े से वंचित नहीं किया जा सकता।

    यह निर्णय भविष्य में Pandemic Death Compensation मामलों में एक मजबूत मिसाल बन सकता है।


    ❓ FAQ Section

    1. Bombay High Court ने MSRTC को कितना मुआवज़ा देने का आदेश दिया?

    कोर्ट ने कुल ₹50 लाख compensation देने का आदेश दिया, जिसमें ₹45 लाख आठ हफ्तों में देने होंगे और ₹5 लाख पहले से दिए गए हैं।

    2. यह मामला किस वर्ष की घटना से जुड़ा है?

    यह मामला अप्रैल 2021 में COVID-19 से हुई कर्मचारी की मौत से जुड़ा है।

    3. कोर्ट ने MSRTC पर क्या टिप्पणी की?

    कोर्ट ने कहा कि निगम ने महामारी के दौरान “narrow view” अपनाया और अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

    4. अगर MSRTC तय समय में भुगतान नहीं करती तो क्या होगा?

    आठ हफ्तों में भुगतान न होने पर 6% per annum interest देना होगा।

    5. कर्मचारी की ड्यूटी कहाँ लगी थी?

    उन्हें मार्च 2021 में वडाला स्थित BEST Bus Depot में ट्रैफिक सुपरविजन के लिए तैनात किया गया था।

  • Dhake Colony Gate खुदाई के बाद बदहाल, 150 रहवासी परेशान

    Dhake Colony Gate खुदाई के बाद बदहाल, 150 रहवासी परेशान

    Andheri West के JP Road स्थित Dhake Colony CHS का main entry gate cabling work के बाद 25 दिनों से टूटा पड़ा है। Mud, stones और uneven patch की वजह से Ambulance access, senior citizens और school children की safety पर खतरा।

    मुंबई: Andheri West के JP Road पर स्थित Dhake Colony Co-operative Housing Society (CHS) का इकलौता concrete entry/exit gate पिछले करीब 25 दिनों से खुदाई के बाद बदहाल पड़ा है। Cabling work के लिए फरवरी की शुरुआत में गेट को खोदा गया था। काम तो कुछ ही दिनों में पूरा हो गया, लेकिन गेट का हिस्सा आज भी टूटा-फूटा और असमतल (Uneven Patch) है, जिससे करीब 150 residents की daily life प्रभावित हो रही है।

    🚧 Cabling Work के बाद अधूरा Repair

    फरवरी की शुरुआत में गेट पर heavy industrial metal sheet रखकर नीचे cabling का काम किया गया। उस दौरान गाड़ियां metal sheet के ऊपर से आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं। Residents को उम्मीद थी कि काम खत्म होते ही पुरानी smooth concrete surface बहाल कर दी जाएगी।

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    लेकिन metal sheet हटने के बाद भी गेट पर पड़े tiles, blocks, मिट्टी, पत्थर और ईंटें वैसे ही पड़ी हैं। Patch अभी तक concreted नहीं हुआ है और entry पूरी तरह uneven बनी हुई है।

    🏢 150 Residents पर असर

    Dhake Colony CHS में पांच इमारतें हैं और लगभग 150 लोग यहां रहते हैं। Society का यह main gate ही vehicles और pedestrians के लिए एकमात्र बड़ा प्रवेश-द्वार है। बगल में एक छोटा gate है, लेकिन वह सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए है, गाड़ियों के लिए नहीं।

    🗣️ “अंदर आने के लिए Skilled Driver चाहिए” – Anand Shirali

    सोसाइटी के चेयरमैन Anand Shirali ने कहा:

    “यह patch सीधे हमारे gate पर है। गाड़ी अंदर लाने के लिए बेहद skilled driver होना चाहिए। काम कम से कम पंद्रह दिन पहले खत्म हो चुका है, लेकिन gate अभी भी खुदा हुआ है। Mud, stones और bricks की वजह से surface पूरी तरह uneven है। अगर किसी को Ambulance या Fire Brigade की जरूरत पड़े तो अंदर आना लगभग नामुमकिन होगा। कॉलोनी में एक doctor हैं जिनकी बड़ी car है, वे emergency के लिए अपनी गाड़ी colony के बाहर road पर पार्क करते हैं। अभी turning radius भी बहुत tight हो गया है, manoeuvre करना मुश्किल है।”

    Residents का कहना है कि संबंधित phone numbers और X (Twitter) handles पर शिकायत करने के बावजूद कोई response नहीं मिला।

    🐦 Tweet Heat: सोशल मीडिया पर गुहार

    X पर Shira Lee ने @mybmc को टैग करते हुए लिखा:

    “Main arterial JP Road Dhake Colony CHS gate entry 20 दिन पहले खोदी गई और अब तक repair नहीं हुई। Cars अंदर-बाहर लाना मुश्किल है। Society में कई senior citizens हैं जिन्हें ambulance की जरूरत पड़ सकती है। Bus Route No. 425 भी प्रभावित है। K West Ward – HELP!”

    यह मुद्दा अब Social Media पर भी उठने लगा है, लेकिन ground level पर अभी तक repair शुरू नहीं हुआ।

    ⚠️ Injury का खतरा: Residents की नाराजगी

    👴 Senior Citizens और बच्चों पर Risk

    सोसाइटी निवासी Shailesh Bhat ने कहा:

    “यह unattended work बिल्कुल unacceptable है। Senior citizens और छोटे बच्चे accident के सबसे ज्यादा खतरे में हैं। High probability है कि कोई भी गिर सकता है। इसे तुरंत repair किया जाना चाहिए।”

    🛵 Exam से पहले Scooter Slip

    एक और resident Nilesh Sawant ने बताया:

    “कुछ दिन पहले मैं सुबह 7:15 बजे अपनी 11 साल की बेटी को scooter से school छोड़ने जा रहा था। उसके exams थे। Uneven patch पर scooter डगमगाई और हम दोनों गिर गए। Thankfully, हमें गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन हम हिल गए थे। यह बेहद dangerous है और urgent attention की जरूरत है।”

    🚶‍♀️ Walking भी मुश्किल

    Resident Ramila Gala ने कहा:

    “हम 25 दिनों से इस stretch के concreted और smooth होने का इंतजार कर रहे हैं। Senior citizens अब बाहर निकलने से डरते हैं। हाल ही में मेरे घर मेहमान आए थे, उनमें से एक का पैर इस uneven stretch पर मुड़ गया। समझ नहीं आता कि इतना समय क्यों लग रहा है।”

    🚑 Emergency Access पर बड़ा सवाल

    Residents का सबसे बड़ा डर Emergency Access को लेकर है। Ambulance, Fire Brigade या Medical Emergency की स्थिति में main gate की खराब हालत बड़ी समस्या बन सकती है। Colony में रहने वाले doctor भी अपनी बड़ी car बाहर park कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकल सकें।

    📊 Local Infrastructure Issue या Negligence?

    JP Road Andheri West का यह हिस्सा एक busy arterial road है। ऐसे में Entry Gate Repair Delay से न सिर्फ Society Residents बल्कि आसपास के traffic flow पर भी असर पड़ रहा है। Bus Route No. 425 का संचालन भी प्रभावित बताया जा रहा है।

    यह मामला अब Mumbai Civic Issue, Road Repair Delay, और Public Safety Concern के तौर पर देखा जा रहा है।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. Dhake Colony Gate कब खोदा गया था?
    ➡️ फरवरी की शुरुआत में cabling work के लिए।

    Q2. काम कब पूरा हुआ?
    ➡️ Residents के मुताबिक करीब 15–20 दिन पहले काम पूरा हो चुका है।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हैं?
    ➡️ लगभग 150 residents (5 buildings)।

    Q4. सबसे बड़ी समस्या क्या है?
    ➡️ Uneven Patch के कारण vehicle entry मुश्किल, senior citizens और बच्चों के लिए injury risk, और ambulance access में बाधा।

    Q5. क्या BMC या Ward Office ने जवाब दिया?
    ➡️ Residents के अनुसार शिकायतों पर अभी तक कोई response नहीं मिला।