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  • 🚨 Mumbai Viral Video: Kandivali में ‘Marathi Language Row’ पर बवाल! Raj Thackeray को गाली देने पर शख्स की पिटाई? सच क्या है?

    🚨 Mumbai Viral Video: Kandivali में ‘Marathi Language Row’ पर बवाल! Raj Thackeray को गाली देने पर शख्स की पिटाई? सच क्या है?

    Kandivali Mumbai viral video में Raj Thackeray को लेकर गाली देने पर MNS workers द्वारा शख्स की पिटाई का दावा। Marathi language row फिर गरमाया। जानें पूरा मामला, सरकार की नई policy और सच्चाई।

    मुंबई: कांदिवली इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स को कथित तौर पर Raj Thackeray को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद पीटते हुए दिखाया गया है। हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    🎥 क्या है पूरा वायरल वीडियो मामला?

    वायरल क्लिप में एक व्यक्ति से पूछा जाता है कि क्या वह मराठी भाषा बोल सकता है। पहले वह “हाँ” कहता है, लेकिन बाद में बातचीत के दौरान वह खुद कहता है कि उसे मराठी नहीं आती।

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    इसी दौरान उससे यह सवाल किया जाता है कि अगर Raj Thackeray उसके गैरेज पर आएं तो वह मराठी में क्या बोलेगा। जवाब में वह कथित तौर पर गाली देता है (वीडियो में beep किया गया है)।

    इसके बाद वीडियो में दिखता है कि कुछ लोग उसे पकड़कर मारते-पीटते हैं और गालियां देते हैं।

    ⚠️ वीडियो की Authenticity पर बड़ा सवाल

    इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि अभी तक:

    • शख्स की पहचान सामने नहीं आई है
    • वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
    • पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं हुआ

    कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी साफ कहा गया है कि इस वायरल वीडियो की authenticity verify नहीं की गई है।

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    🔥 Marathi Language Row फिर क्यों गरमाया?

    मुंबई और महाराष्ट्र में एक बार फिर “Marathi Language Row” चर्चा में है। हाल ही में राज्य सरकार ने लोकल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में मराठी भाषा को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की है।

    🏛️ सरकार का बड़ा फैसला – Drivers को Marathi सिखाने की मुहिम

    Maharashtra Transport Department ने 1 मई से एक statewide अभियान शुरू किया है।

    इस अभियान के तहत:

    • Auto-rickshaw और taxi drivers को basic Marathi सिखाई जाएगी
    • Motor Vehicle rules को सख्ती से लागू किया जाएगा
    • 100 दिन (15 अगस्त तक) awareness campaign चलेगा

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    Transport Minister Pratap Sarnaik ने साफ किया है कि:
    👉 Marathi न आने पर सीधे सजा नहीं दी जाएगी
    👉 पहले awareness और training पर फोकस रहेगा

    🗣️ MNS और Marathi Identity का पुराना कनेक्शन

    Maharashtra Navnirman Sena (MNS) लंबे समय से मुंबई में Marathi identity और language को लेकर आक्रामक रुख अपनाती रही है।

    ऐसे में इस तरह के वायरल वीडियो माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना सकते हैं।

    🌐 सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है?

    यह वीडियो X (Twitter), Instagram और WhatsApp पर तेजी से शेयर हो रहा है। कुछ लोग इसे “language pride” से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे “mob violence” बता रहे हैं।

    🔗 Related Official / Useful Links


    ❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. क्या Kandivali viral video असली है?

    अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    Q2. वीडियो में क्या दिख रहा है?

    एक व्यक्ति को Raj Thackeray पर गाली देने के बाद कुछ लोग पीटते हुए दिख रहे हैं।

    Q3. सरकार ने Marathi language पर क्या फैसला लिया है?

    Auto और taxi drivers को basic Marathi सिखाने के लिए awareness campaign शुरू किया गया है।

    Q4. क्या Marathi न आने पर सजा मिलेगी?

    नहीं, फिलहाल केवल training और awareness पर ध्यान है।

    🏁 Conclusion

    कांदिवली का यह वायरल वीडियो मुंबई के संवेदनशील “Marathi Language Row” को फिर से सुर्खियों में ले आया है। हालांकि, बिना पुष्टि के ऐसे वीडियो पर विश्वास करना सही नहीं है। वहीं, सरकार की नई policy साफ दिखाती है कि भाषा को लेकर सख्ती के बजाय जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है।

  • 🚨 Malad East में Gujarati Signboard पर बवाल! “Marathi क्यों नहीं?” Video Viral होते ही BMC और Police पर उठे सवाल

    🚨 Malad East में Gujarati Signboard पर बवाल! “Marathi क्यों नहीं?” Video Viral होते ही BMC और Police पर उठे सवाल

    Mumbai के Malad East में Gujarati signboard को लेकर बड़ा विवाद, Marathi भाषा को लेकर उठे सवाल। Viral video के बाद BMC और Police पर लापरवाही के आरोप। पढ़ें पूरा मामला।

    MUMBAI: मुंबई के Malad East इलाके में language controversy ने तूल पकड़ लिया है, जहां एक viral video में दुकानों के signboard पर Gujarati भाषा का इस्तेमाल दिखने के बाद बवाल मच गया। मामला Datta Mandir Road का बताया जा रहा है, जहां लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर महाराष्ट्र की official language Marathi को क्यों नजरअंदाज किया गया।

    📹 Viral Video ने बढ़ाया विवाद (Malad Viral Video Controversy)

    यह पूरा मामला तब सामने आया जब “Malad Culture” नाम के Instagram पेज पर एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में एक व्यक्ति खुलेआम सवाल उठाते नजर आता है कि:

    👉 “अगर मुझे ये दिख रहा है तो BMC और पुलिस को क्यों नहीं दिख रहा?”
    👉 “Signboard Marathi में होना चाहिए”

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दुकान के बोर्ड पर Gujarati भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जबकि Marathi पूरी तरह गायब है।

    🏛️ Marathi Language को लेकर उठे सवाल (Marathi vs Gujarati Row)

    Maharashtra में Marathi official language है और public signboards में Marathi का होना जरूरी माना जाता है। ऐसे में Malad East में Gujarati signboards दिखने के बाद यह मुद्दा linguistic identity से जुड़ गया है।

    स्थानीय लोगों और social media users का कहना है कि:

    • Marathi को प्राथमिकता दी जानी चाहिए
    • अन्य भाषाओं का इस्तेमाल secondary रूप में हो सकता है
    • authorities को इस पर strict action लेना चाहिए

    🚓 BMC और Police पर सवाल (BMC Negligence Issue)

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) और पुलिस प्रशासन पर उठ रहा है।

    वीडियो में व्यक्ति ने सीधे पूछा:
    👉 “इतना visible issue होने के बावजूद BMC और पुलिस ने ध्यान क्यों नहीं दिया?”

    अब यह मामला civic negligence और monitoring system पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

    🔁 पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद (Previous Language Controversies Mumbai)

    यह पहली बार नहीं है जब Mumbai में language को लेकर विवाद हुआ हो।

    📍 Parel TT Incident (March Case)

    Shiv Sena UBT के एक worker ने Parel TT flyover construction site पर Gujarati signboard का विरोध किया था।

    • Contractor से सीधा सवाल किया गया
    • Marathi language की अनदेखी पर नाराजगी जताई गई

    📍 Palghar Highway Controversy (January Case)

    Palghar में भी January में बड़ा विवाद हुआ था:

    • Mumbai-Ahmedabad Highway (NH-48) पर Gujarati में traffic notice लगाया गया
    • Opposition parties ने Gujarati थोपने का आरोप लगाया

    यह notice Communist Party of India (Marxist) के morcha के दौरान जारी किया गया था।

    🌉 Gujarat Connection क्या है? (Why Gujarati Language Used)

    Administration के अनुसार:

    • NH-48 route पर Gujarat से आने वाले motorists की संख्या ज्यादा होती है
    • इसलिए notice को Gujarati में भी translate किया गया था
    • Gujarat के Valsad के पास banners लगाए गए

    लेकिन इसके बावजूद Maharashtra में Marathi की अनदेखी पर सवाल उठते रहे।

    ⚖️ Language Politics या Practical Decision? (Public Debate)

    अब यह मुद्दा दो हिस्सों में बंट गया है:

    👉 एक पक्ष: Marathi को प्राथमिकता मिलनी चाहिए
    👉 दूसरा पक्ष: multi-language approach practical है

    लेकिन Malad East के इस ताजा मामले ने फिर से language politics को हवा दे दी है।

    🌐 Useful Links (Official Resources)


    ❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

    Q1. Malad East में विवाद किस बात को लेकर हुआ?
    Gujarati signboard पर Marathi भाषा के न होने को लेकर विवाद हुआ।

    Q2. वीडियो किसने शेयर किया था?
    “Malad Culture” नाम के Instagram पेज ने वीडियो शेयर किया।

    Q3. BMC पर क्या आरोप हैं?
    लोगों का कहना है कि BMC ने इस issue को नजरअंदाज किया।

    Q4. क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
    हाँ, Parel और Palghar में भी language related विवाद हो चुके हैं।

    Q5. Gujarati language क्यों इस्तेमाल की गई?
    कुछ मामलों में Gujarat से आने वाले लोगों के लिए translation किया गया था।

  • मुंबई में कॉलेज के नाम को लेकर बवाल! गुजराती बोर्ड को लेकर ठाकरे गुट की चेतावनी

    मुंबई में कॉलेज के नाम को लेकर बवाल! गुजराती बोर्ड को लेकर ठाकरे गुट की चेतावनी

    कांदिवली के बालभारती कॉलेज के गुजराती साइनबोर्ड पर बवाल। मराठी अनिवार्य नियम की अनदेखी का आरोप, युवा सेना ने प्रशासन को दी सीधी चेतावनी। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: कांदिवली इलाके में एक कॉलेज के नाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में होने का मामला सामने आते ही राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है। मराठी भाषा अनिवार्य होने के बावजूद कॉलेज ने अब तक मराठी में साइनबोर्ड नहीं लगाया, जिस पर ठाकरे गुट की युवा सेना ने आक्रामक रुख अपनाया है।

    क्या है पूरा साइनबोर्ड विवाद?

    राज्य सरकार के नियम के अनुसार महाराष्ट्र में सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।

    इसके बावजूद कांदिवली (पश्चिम) के इस कॉलेज का बोर्ड पूरी तरह गुजराती में लिखा हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह मराठी भाषा कानून (Marathi Language Law Maharashtra) का सीधा उल्लंघन है।

    मुंबई विश्वविद्यालय के आदेश का हवाला

    ठाकरे गुट की युवा सेना का कहना है कि मुंबई विद्यापीठ के परिपत्र क्र. संलग्नता/आय सी सी/(2021-22)/2022 के अनुसार महाविद्यालयों के नाम मराठी में होना अनिवार्य है।

    सवाल यह उठ रहा है कि जब विश्वविद्यालय का स्पष्ट आदेश है, तो फिर कॉलेज प्रशासन ने अब तक मराठी नामफलक क्यों नहीं लगाया?

    युवा सेना की आक्रामक एंट्री

    मामले ने तूल पकड़ा तो युवा सेना के पदाधिकारी सीधे कॉलेज पहुंच गए।

    युवा सेना के सिनेेट सदस्य प्रदीप सावंत, शशिकांत झोरे, पूर्व सिनेेट सदस्य राजन कोळंबेकर और कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक शिर्के ने कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात की और तुरंत मराठी में साइनबोर्ड लगाने की मांग की।

    उनका कहना था कि “राज्य में मराठी भाषा को प्राथमिकता देना कानूनन अनिवार्य है। संस्थान का यह रवैया अस्वीकार्य है।”

    Mumbai-college-name-row-Thackeray-faction-issues-warning-regarding-Gujarati-board-news

    विश्वविद्यालय प्रशासन से भी मुलाकात

    युवा सेना के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. अजय भामरे (प्र-कुलगुरु) और डॉ. प्रसाद कारंडे (कुलसचिव) से भी मुलाकात की।

    उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि संबंधित कॉलेज को तत्काल मराठी नामफलक लगाने का निर्देश दिया जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

    स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी

    कांदिवली इलाके के कई स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब राज्य सरकार ने स्पष्ट कानून बनाया है, तो उसका पालन हर संस्था को करना चाहिए।

    सिर्फ गुजराती भाषा में बोर्ड रखना कानून का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है।

    कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

    सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने जल्द ही मराठी में नामफलक लगाने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, अभी तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया है।

    युवा सेना ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मराठी साइनबोर्ड नहीं लगाया गया, तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

    मराठी भाषा कानून क्या कहता है?

    महाराष्ट्र शासन के नियमों के अनुसार:

    • सभी स्कूल, कॉलेज और संस्थानों को सबसे पहले मराठी भाषा में नामफलक लगाना अनिवार्य है।
    • मराठी को प्राथमिकता देना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
    • उल्लंघन की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

    इसी आधार पर इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. विवाद किस कॉलेज को लेकर है?
    कांदिवली (पश्चिम) स्थित बालभारती कॉलेज ऑफ कॉमर्स।

    Q2. विवाद की वजह क्या है?
    कॉलेज का नामफलक पूरी तरह गुजराती भाषा में है, जबकि मराठी अनिवार्य है।

    Q3. किस संगठन ने विरोध किया?
    ठाकरे गुट की युवा सेना ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की।

    Q4. विश्वविद्यालय का क्या आदेश है?
    मुंबई विश्वविद्यालय के परिपत्र के अनुसार कॉलेज का नाम मराठी में होना चाहिए।

    Q5. आगे क्या हो सकता है?
    अगर मराठी नामफलक नहीं लगाया गया तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

  • महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में NCP शरद पवार गुट ‘हिंदी थोपे जाने’ के खिलाफ मोर्चे का समर्थन करेगी।

    महाराष्ट्र में मातृभाषा के संरक्षण में शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सरकारी नीतियों के खिलाफ 5 जुलाई को विरोध मोर्चे का समर्थन किए जाने का ऐलान किया है। शुक्रवार को पार्टी नेता ने इसकी घोषणा कर दी। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई:
    शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने शुक्रवार को कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से महाराष्ट्र में स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदी को ‘थोपे जाने’ के खिलाफ पांच जुलाई को होने वाले विरोध मोर्चे का समर्थन करेंगे। पार्टी नेता ने इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    उद्धव और राज ने मिलाया हाथ

    राज्य सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना के खिलाफ यह विरोध आयोजित किया जा रहा है। आप को बता दें कि भाषा विवाद पर 5 जुलाई को उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली होने जा रही है। मराठी मुद्दे को लेकर 20 साल बाद दोनों मंच पर साथ नजर आएंगे। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    राकांपा शरद पवार गुट की घोषणा

    शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाना शामिल किया गया है। राकांपा शरद पवार गुट की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने एक खुले पत्र में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, कि उनकी पार्टी क्षेत्रीय हितों के मामलों में महाराष्ट्र के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    शरद पवार ने क्या कहा?

    इसके पहले पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी ठाकरे भाइयों को समर्थन देते हुए कहा, कि “महाराष्ट्र में कक्षा 1 से हिंदी अनिवार्य नहीं की जानी चाहिए। अगर कोई नई भाषा शुरू की जानी है तो उसे कक्षा 5 के बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    सरकार ने लिया यू टर्न

    दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल अप्रैल में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया था। विरोध के बाद उन्होंने फैसले में बदलाव किया। कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी के अलावा भी दूसरी भारतीय भाषाएं चुन सकते हैं। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    महाराष्ट्र में मराठी भाषी आबादी का मुद्दा

    एनसीपी शरद पवार गुट के महाराष्ट्र अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि इस कदम का शिक्षाविदों, अभिभावकों, भाषाविदों एवं कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है और वे सभी दलील दे रहे हैं कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे की मातृभाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में मराठी भाषी आबादी हिंदी सहित कई भाषाओं को सीखने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, कि लेकिन प्राथमिक स्तर पर हिंदी को थोपना हमें अस्वीकार्य है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, कि “अगर तीन-भाषा नीति का इस्तेमाल मातृभाषा को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है, तो मराठी भाषी समुदाय एकजुट होकर ऐसे कदमों का विरोध करेगी।” In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.

    मराठी भूमिका की रक्षा

    शरद पवार गुट के नेता ने इस मुद्दे को भाषाई और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से पांच जुलाई को विरोध मोर्चे में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है।पाटिल ने कहा कि इस मोर्चे का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में मराठी भाषा की भूमिका की रक्षा करना है। In Maharashtra, NCP Sharad Pawar faction will support the front against ‘imposition of Hindi’.