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  • मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपी कैसे हो गए बरी? जांच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका की तैयारी

    महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार 7 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इसमें जांच एजंसियों की चूक प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट के वकील नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है। अदालत ने यह भी कहा, “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    मुंबई: देश के बड़े आतंकी हमले में शुमार मालेगांव ब्लास्ट का मामला मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में खत्म हो चुका है। आखिरकार 17 सालों बाद फैसला आता है कि गिरफ्तार 7 अभियुक्तों के खिलाफ जांच एजेंसियां सबूत पेश करने में विफल साबित हुई। जबकि सरकारी वकील अविनाश रसाल ने बताया, कि सुनवाई के दौरान कुल 324 गवाहों से पूछताछ की गई थी। जिनमें से 34 गवाह मुकर गए। अदालत ने सभी मुख्य अभियुक्त बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। इसमें जांच एजंसियों की गलतियों के खिलाफ एडवोकेट नितिन सातपुते ने जनहित याचिका दायर करने का फैसला किया है।

    अगर हेमंत करकरे होते तो, ..

    शुक्रवार को एडवोकेट नितिन सातपुते ने बताया कि “मालेगांव बम विस्फोट कांड का फैसला निराशाजनक है। शहीद हेमंत करकरे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी ने उचित जाँच के बाद मामला दर्ज किया था। लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी जानते हैं। अगर शहीद हेमंत करकरे आज हमारे बीच होते, और इस तरह का फैसला सामने आता, तो सही माना जाता। लेकिन इस वक्त जांच एजंसियों की गलतियों पर पूरे देश को शक हो रहा है। इसके साथ ही जिन्होंने नतीजे आने से पहले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बना दिया, उसी विचारधारा के लोग आज देश और प्रदेश में सत्ता में हैं।” How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    आरोपी बन गई सांसद

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    उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि आज के परिणामों में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही जिन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांसद बनाया और अब क्या महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी? ये भी एक बड़ा सवाल है। आज के फैसले से साफ़ हो गया है कि सबूत होने पर भी आरोपी बरी हो जाते हैं। तो क्या न्याय धर्म के आधार पर हो रहा है?” इसके साथ ही मामले को लेकर विशेष अदालत के न्यायाधीश एके लाहोटी ने सभी अभियुक्तों को निर्दोष करार देते हुए कहा, “यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसमें नागरिकों की जान गई। लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नही कर पाई।”

    क्या था मालेगांव बम धमाके का मामला?

    29 सितम्बर 2008 को मालेगांव के व्यस्त भिकू चौक के पास एक मोटरसाइकिल में बम धमाका हुआ था। जिस वक्त लोग पास की मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे। इस विस्फोट में 92 लोग घायल हो गए और 7 लोगों की मौत हो गई। इस आतंकी हमले में “आरडीएक्स” विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ लेकिन जांच एजेंसियां उसका स्त्रोत सिद्ध नही कर पाई। यहां तक कि 14 लोगों की गिरफ्तारी में मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनके खिलाफ साज़िश रचने से लेकर विस्फोट हासिल करने और कई लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे।

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    मुकदमा खड़ा ही गलत तरीके से किया गया।

    इसमें साल 2008 में एंटी टेरेरिजम स्कॉड (ATS) ने शुरूआती जांच के दौरान कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने मामले को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौपने से पहले दो चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन 31 जुलाई को अदालत के फैसले मे सामने आया कि सभी साक्षों और गवाहों के आधार पर जो मुकदमा खड़ा हुआ, वह अभियुक्तों का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    सबूत ही नहीं मिला

    अदालत ने कहा, कि आरोप लगाया गया था, कि विस्फोट पुरोहित ने कश्मीर से हासिल किया था। लेकिन इसका कोई सबूत नही दिया और यह भी प्रमाणित नहीं किया कि किसी भी अभियुक्त के घर बम तैयार किया गया था। जिस मोटरसाइकिल पर विस्फोट रखा गया था, उसका साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से ठोस सबूतों के साथ संबंध सिद्ध नहीं हो सका। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    कहां हुई थी साज़िश?

    जांच एजेंसियों का कहना था कि इस घटना से पहले एक बड़ी साजिश रची गई थी। जिसके तहत इंदौर, उज्जैन, पुणे जैसे अलग-अलग जगहों पर इन सभी अभियुक्तों की बैठकें हुईं और वहीं साज़िश रची गई। लेकिन अदालत ने कहा, बैठकों के कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिले। कहा, कि भले ही अभियुक्तों के बीच कुछ आर्थिक लेन-देन के सबूत पेश किए गए, लेकिन यह साबित नहीं हो सका, कि वह पैसे किसी हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    सबूतों के साथ छेड़छाड़

    अदालत ने यह भी कहा, कि अभियुक्तों और उनके संबंधित लोगों के कॉल रिकार्ड निकालते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके लिए जरूरी अनुमति भी नहीं ली गई। अदालत ने यह भी कहा, कि “सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।” अदालत ने कहा, “कुल मिलाकर सरकारी पक्ष विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा और केवल संदेह के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। भले ही यह गंभीर अपराध हो, लेकिन सबूतों के अभाव में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देना पड़ रहा है।” ऐसा कहते हुए अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

    जांच एजेंसियों ने की आरोपियों की मदद

    उच्च न्यायलय के वकील नितिन सातपुते ने आरोप लगाते हुए कहा, की जाँच एजेंसी ने जानबूझकर जाँच में चूक की है, जानबूझकर पर्याप्त सबूत नहीं जुटाए हैं और दोषपूर्ण आरोपपत्र दायर किया है ताकि मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपियों की मदद की जा सके, उन्हें बचाया जा सके, उनकी रक्षा की जा सके। उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जिसने किसी के इशारे पर सभी आरोपियों को बचाने के लिए ठीक से जाँच नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप विशेष अदालत के न्यायाधीश लखोटी ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मैं इन जाँच एजेंसियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूँ। How did all the accused in Malegaon blast get acquitted? Preparation of PIL against the investigating agencies

  • पुलिस पर लगे कॉपी पेस्ट के आरोप, सरकार को दिया कोर्ट ने निर्देश

    पुलिस पर लगे कॉपी पेस्ट के आरोप, सरकार को दिया कोर्ट ने निर्देश

    पुलिस प्रशासन पर कॉपी पेस्ट के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस प्रशासन के बीच ये कॉपी पेस्ट का कल्चर खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। Police accused of copy paste, court gives instructions to the government

    मुंबई: गवाहों के बयान और आरोपियों के जवाब एक दूसरे से मेल नही खाते। तब पर भी क्यों न्याय के लिए पीड़ितों को 19 साल का इंतजार करना पड़ा। मुंबई लोकल ट्रेन बम ब्लास्ट के मामले ने सैकड़ों निरपराध लोगों की जान ले ली और प्रशासन लीपा-पोती कर निर्दोष लोगों को जेल में ठूंस दिया। यहां तक कि कईयों को उम्र कैद तो कईयों को फांसी की सजा तक सूना दी गई। लेकिन आखिरकार हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया तब जाकर फैसला सामने आया, कि पुलिस ने आरोप पत्र में गड़बड़ियां की हुई है और गिरफ्तार आरोपियों को सज़ा देने के लिए कोई भी ठोस सबूत नही है।

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    लापरवाह प्रशासन

    मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाका कोई छोटी मोटी घटना नहीं थी। इस घटना ने पूरे देश को झगझोड कर रख दिया था। लेकिन प्रशासन उन आरोपियों को पकड़ने में नाकाम हो गई और बेगुनाहों को बली का बकरा बना दिया गया। ये कैसी क्रूरता रही की उन निरपराध लोगों को 19 सालों का वनवास काटना पड़ा। इसकी जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जबकि सरकारी पक्ष भी कोर्ट में गलत साबित हुआ।

    कोर्ट में क्या हुआ?

    मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने आरोपियों के इकबालिया बयान में समानता पर गंभीरता से गौर किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के बयान कई आधारों पर अधूरे हैं और सत्यता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार्जशीट में गवाहों के बयान में कॉपी-पेस्ट कल्चर पर चिंता जताते हुए इसे खतरनाक ट्रेंड बताया है। अदालत ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया।

    अदालत ने क्या कहा?

    अदालत ने कहा कि गवाहों और आरोपियों के बयान अधूरे और असत्य पाए गए हैं और इनके कुछ हिस्से एक-दूसरे से हूबहू मिलते हैं, जो कॉपी-पेस्ट कल्चर को दर्शाते हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मई और जून के मामलों में गवाहों के बयानों में कॉपी-पेस्ट पर संज्ञान लिया और महाराष्ट्र सरकार से इससे निपटने और इस संबंध में गाइडलाइन जारी करने को कहा।

    पुलिस प्रशासन का कॉपी पेस्ट

    मई में हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में पुलिस की ओर से अमल में लाए जा रहे एक और खतरनाक कल्चर पर संज्ञान लिया था, जिसमें गंभीर अपराधों में भी गवाहों के बयान कॉपी-पेस्ट किए गए थे। अदालत ने तब कहा था कि गवाहों के बयान में कॉपी पेस्ट के इस तरह के कई मामले सामने आए है। पिछले महीने हाईकोर्ट ने एक अन्य आपराधिक मामले में भी इसी तरह के ट्रेंड पर संज्ञान लिया था और राज्य सरकार को इससे निपटने का निर्देश दिया था।

    2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट मामले में जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस श्याम चंदक की विशेष पीठ ने कहा कि कई आरोपियों के इकबालिया बयान इस तरह के थे, जिन्हें देखकर लग रहा था कि सवालों के जवाब कॉपी-पेस्ट किए गए हैं। Police accused of copy paste, court gives instructions to the government

  • गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    गरीब न पढ़े अंग्रेजी ताकि आगे न बढे न सरकार गिरे

    • बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
    • शिक्षा को व्यापार की तरह चलाया जा रहा माफियाओं के हाथों
    • पचास हजार के ऊपर सरकारी स्कूल बंद
    • हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
    • निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
    • दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
    • सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
    • 18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
    • गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
    • उत्तर प्रदेश के 70 प्रतिशत इंजीनियर बेकार
    • देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के…!
    • धर्म की सियासत चमकाने में व्यस्त बीजेपी सरकार
    • बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
    • पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की बूंद जैसा
    • मुफ्त राशन प्रचार में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन का खर्च
    • विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
    • 95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    मुंबई: बीजेपी के कथित चाणक्य अमित शाह ने अंग्रेजी नहीं पढ़ने की वकालत की है। लेकिन सबसे पहले उन्हें अपने बेटे को जिसे बीसीसीआई का सेक्रेटरी दबाव में बनाया है, इससे कहें कि अंग्रेजी न बोले। इसके साथ ही अपनी सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पार्टी से बाहर करें जो विदेश से पढ़कर आए हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी ही पढ़ाई जाती है। साथ ही उन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी जिनके बेटे, बेटियां विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे और जो वहां सेटल्ड हो चुके हैं।

    देश के सारे कॉन्वेंट स्कूल बंद कर दें। सीबीएससी जिसमें अंग्रेजी मीडियम से शिक्षा दी जाती है उसकी मान्यताएं खत्म कर दें। संसद में अंग्रेजी बोलने, सेक्रेटरियो द्वारा अंग्रेजी बोलने लिखने की मनाही कर दें। यहां तक कि संसद में अंग्रेजी बोलने वालों को बरखास्त कर दें। तब आम गरीब आदमी या देशवासियों से अंग्रेजी पढ़ने को मना करें।
    लेकिन अब कोई छात्र किस मीडियम में पढ़ेगा। किस भाषा में बात करेगा सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है?

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    बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ

    एक तो वैसे ही बीजेपी सरकार ने शिक्षा को माफियाओं के हाथों में सौप दिया है, जिसे व्यापार की तरह चलाया जा रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। स्कूल बैग, जूता, मोजा और किताबें वह भी प्राइवेट स्कूलों की जिनका मूल्य चार सौ से कम नहीं है। उसमें भी कमीशन मिलता है। तमाम प्राइवेट स्कूलों में न लाइब्रेरी है, न कंप्यूटर हाल और ना ही साइंस लैब।

    फिर भी स्कूलों को दो चार लाख रुपए लेकर मान्यताएं दी जा रही है, जहां शिक्षा के नाम पर नील बटा सन्नाटा है। ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है। सरकार जिसका दायित्व है कि निःशुल्क शिक्षा देना।नहीं दे रही। तमाम सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। स्कूलों को मर्च किया जा रहा दूर के स्कूलों में।

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    हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां

    शिक्षक आंदोलन रत हैं। बिजली कर्मचारी आंदोलन रत हैं, लेकिन बीजेपी सरकारें दो कार्य कर रही। अब तक पचास हजार से ऊपर तक के सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां किए जाने पर हाईकोर्ट ने सारी नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। वहीं शिक्षा निःशुल्क देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस लाखों में रखी गई है।

    उसके अलावा हर वर्ष एडमिशन फीस और तमाम तरह की फीस की वसूली की जा रही है। यहां तक कि फीस जमा नहीं कर पाने वाले छात्रों को गेट से ही घर लौटाया जा रहा। केंद्र सरकार की नाक के नीचे दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल द्वारा तीन साल में हजारों रुपए बढ़ा दिए जाने और छात्रों के घर लौटाए जाने के कारण अभिभावकों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार

    दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया। अगर पांच दस वर्ष जीवित रहते तो शिक्षा को समवर्ती सूची से निकालकर समूचे देश में एक ही शिक्षा पद्धति लागू कर देते। पाठ्यक्रम भी एक होते ताकि असमय स्थल परिवर्तन का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। छः से चौदह वर्ष आयु तक शिक्षा का अधिकार देने के बाद उनकी योजना कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दे देते। लेकिन देश का दुर्भाग्य उनकी मृत्यु की साजिश रची गई।जिससे उनका शिक्षा को लेकर सारी योजना ही बंद हो गई।

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    सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..

    अब तो सरकारें सारे के सारे सरकारी स्कूल बंद करने पर तुली हुई हैं। हमारी सरकारों ने नारे बड़े लोकलुभावन दिए थे, कि “पड़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” लेकिन कार्य उसके ठीक विपरित किए जा रहे हैं। भारी भरकम फीस के कारण लाखों छात्र पांचवीं और आठवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा पाना देश के नब्बे प्रतिशत लोगों के बूते में नहीं है।

    18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित

    शिक्षा पर 18% की जीएसटी लगाकर सरकार ने आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया है। कैसे पड़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया?
    देश में एक भी कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जो दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में स्थान पा सके। इसका कारण है शिक्षा मद में केंद्र सरकार द्वारा कटौती।

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    गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक

    अंग्रेजी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी पढ़े लिखे छात्रों को ही खुद अपने ही देश में प्राइवेट जॉब मिल पाता है। बिना अंग्रेजी के कहीं भी कोई पूछता तक नहीं है। विदेश जाने, उच्च शिक्षा प्राप्ति अथवा जॉब पाने के लिए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य है। ज्ञान विज्ञान की समस्त पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए अरबों खरबों रूपये व्यय करने होंगे। बिना अंग्रेजी ज्ञान के कोई भी विदेश जाकर उच्च शिक्षा या नौकरी या व्यवसाय कर ही नहीं सकता। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी नहीं पढ़ाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक है।केंद्रीय मंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।

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    निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें

    जबकि शिक्षा को व्यापार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का दायित्व है, कि सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करना। लेकिन सरकार अपने दायित्व पालन से भाग रही है। निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देकर प्रति परिवार एक रोजगार के संसाधन जुटाना सरकार का दायित्व है। जब नब्बे प्रतिशत बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगे। शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि उत्तर प्रदेश के सत्तर प्रतिशत इंजीनियर बेकार हैं। उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि प्राइवेट शिक्षा संस्थान प्रैक्टिकल कहां करते हैं? बिना प्रेक्टिकल के ज्ञान कैसे आयेगा?

    देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के हैं जिनका लक्ष्य दौलत अर्जित करना है। इसीलिए सरकार शिक्षा को माफियाओं के हाथों सौंप चुकी है। सरकार डरती है कि कहीं शिक्षा व्यवसाय पर नकेल कसी गई तो उसके लोग ही सरकार गिरा देंगे। सत्ता बचाने के लिए देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना सरकार को शोभा नहीं देता। शायद यही वजह है, कि सरकार को चुनाव जीतने के लिए धर्म, नफरत का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने वादों को जो कभी पूरे ही नहीं किए सरकार ने, वोट मांगने की हिम्मत ही नहीं है। इसलिए धर्म की सियासत चमकाने का कार्य कर रही सरकार।

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    बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद

    सिर्फ़ दो बीजेपी शासित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में ही 60% सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। दोनों राज्यों के दो करोड़ बच्चे चौथी या आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है, कि पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की भी बूंद जैसा नहीं है। माता पिता मेहनत करते हैं। महीने में आठ से दस दिन मजदूरी मिलती है शेष दिन फांका कटता है। परिवार का पेट भरे कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा लेने भेजें?

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    95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र

    दरअसल पांच किलो मुफ्त राशन का प्रचार करने में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन खर्च आ जाता है। विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकारें नहीं चाहती कि अस्सी करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाएं। ऊपर से अंग्रेजी नहीं पढ़ाने की वकालत? यह वकालत वे लोग करते हैं जो कभी अंग्रेजों की दलाली करते और गांधी के आंदोलन को कुचलने के लिए वायसराय को खत लिखा करते थे। आज उन्हीं की औलादें सत्ता में आई हैं, तो देश को निरक्षर रखने के तमाम उपाय करते रहते हैं। विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था चंद पूंजीपतियों की है जबकि सच तो यह है कि देश की 95% आबादी बीजेपी शासन में हैंड टू माउथ हो चुकी है।

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    विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार

    इतने टैक्स तो लुटेरे अंग्रेजों ने भी नहीं लगाए थे जितनी हिंदुत्ववादी सरकार टैक्स लगाकर 95% जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र करती है। गरीबी झेली है। गरीब मां का बेटा हूं। बर्तन माजती थी मां कहने वाले पीएम दिन में पांच ड्रेस वह भी लाखों के बदलते रहते हैं। नेहरू पर आरोप लगाने वाले सोचें कहां राजा भोज कहां गंगू तेली। नेहरू परिवार आजादी के पहले से ही संपन्न रहा था। उनकी बराबरी तो क्या पैरों की धूल बराबर आज कोई नेता नहीं। हर मोर्चे पर नाकाम सरकार केवल विज्ञापनों, व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के द्वारा ब्रेन वाश करके मूर्ख बनाती और धर्म आस्था के नाम पर वोट मांगती सरकार।

  • दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने कब्जे में ले लें दिल्ली सरकार

    दिल्ली के सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने कब्जे में ले लें दिल्ली सरकार

    • सरकार से डर नहीं लगता शिक्षा माफियाओं को..!
    • दिल्ली का DPS द्वारका स्कूल सुर्खियो में..
    • गेट पर बॉउंसर तैनात कर बढाई मनमानी फीस

    नई दिल्ली: जब सरकारें निशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भागेगी और शिक्षा माफियाओं को आजाद कर देगी तो लूटने के लिए, तो क्या होगा? शिक्षा माफियाओं को न तो सरकार से डर लगता है और न ही शिक्षा विभाग से और न किसी कोर्ट से। बेलगाम घोड़े बन गए हैं। खासकर दिल्ली में सरकारी जमीन पर खुले हुए प्राइवेट स्कूल जो किसी की परवाह किए बिना ही हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते जा रहे हैं। यहां तक कि डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन से अनुमति लेने की भी जहमत नहीं उठाते। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    माता-पिता नौकरी करने पर मजबूर

    आज कल दिल्ली का D.P.S द्वारका स्कूल सुर्खियों में है जो गेट पर बाउंसर तैनात करके बढ़ाई गई मनमानी फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों के बच्चों को गेट पर ही रोककर जबरन बस में उनके घर पहुंचा रहे हैं। चाहे घर में ताला ही क्यों न लगा हो। कारण माता पिता दोनों ही मंहगाई बढ़ाए जाने के कारण नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल गेट पर तैनात बाउंसर कितने बदतमीज और बेहूदे होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लड़कियों की बांह तक पकड़कर स्कूल के भीतर जाने से रोकते है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    कब-कितना फीस बढ़ाया गया?

    D.P.S द्वारका स्कूल की मनमानी देखिए। पिछले पांच वर्षों में बच्चों की फीस को 139630 रुपए से बढ़ाकर 190000 रुपए कर दिया गया है। इसी कड़ी में हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को पैसे कमाने की मशीन और बच्चों के साथ बाउंसरों और स्कूल संचालकों द्वारा पर यातना तक बताया जा रहा है। D.P.S स्कूल द्वारका के द्वारा पिछले पांच वर्षों में फीस मनमाने तरीके से कैसे बढ़ाया गया? इसका नमूना वर्ष 2020/21 में फीस थी 139630 रुपए , 2021/22 में उतनी ही रही, लेकिन 2022/23 में 152510 रुपए कर दी गई। फिर वर्ष 2023/24 में 164844 रूपये, 2024/25 में 176340 रुपए और 2025/26 में पूरे 190000 रुपए कर दी गई है। इसमें विवरण देखा जाए तो ट्यूशन फीस 142800 रुपए, इन्यूअल चार्ज 32016 रुपए और डेवलपमेंट फीस 14280 रुपए जो पैरेंट टीचर मीटिंग की फीस केवल एक बार होने की है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    क्यों नाम काटा गया?

    इतना ही नहीं, फीस बढ़ाने की सूचना नहीं देने के कारण फीस जमा नहीं कर पाने वाले 32 बच्चों के नाम काट दिए गए। नाम काट देना किस एज्युकेशन मैनुएल में लिखा है? नियमानुसार सरकारी जमीन पर बने स्कूल हॉस्पिटल में 15% लोगों को निःशुल्क सुविधा देनी चाहिए। विवाद डेवलपमेंट फीस को लेकर है। डायरेक्टरेट ऑफ एज्युकेशन के अनुसार दस प्रतिशत फीस बढ़ाई जा सकती है वह भी अनुमति लेकर, लेकिन शिक्षा माफिया कब मानते हैं? जिन बच्चों के नाम काटे गए, उनके मित्र फोन कर पूछते हैं, कि क्यों नाम काटा गया? बच्चों को अकेले घर जबरन छोड़ने के कारण बच्चों के मन में भय उत्पन्न होता है। मानसिक उत्पीड़न होती है और बच्चों को भारी सदमा पहुंचता हैं। इंफ्रियोरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दबाव से बच्चों के मानसिक संतुलन बिगड़ने का डर रहता है। लेकिन दौलत कमाने की हवस प्राइवेट स्कूल संचालकों में इस कदर हावी है कि उनके बच्चों पर पढ़ने वाले कॉम्प्लेक्स से कोई मतलब नहीं। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    जनता को ही दंडित किया जा रहा है।

    जब सैकड़ों अभिभावक कोर्ट गए तो स्कूल में छुट्टी घोषित कर संचालक फरार हो गए। अभिभावकों ने पुलिस बुलाई तो बिना नेम प्लेट वाली पुलिस पहुंची लेकिन वह खुद बच्चों और उनके अभिभावकों को टॉर्चर करने लगी। पुलिस और स्कूल संस्थापकों द्वारा लगाए गए गुंडों के द्वारा दुर्व्यवहार को अलग अलग नहीं किया जा सकता। दोनों ने ही अमानवीयता का परिचय दिया है। पुलिस जो जनता की रक्षा के लिए होती है उसे जनता के विरुद्ध कर दिया गया। सरकार की तरह उसका प्रशासन भी जनता को ही दंडित करने में लगा है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    आम आदमी पार्टी की सरकार

    आम आदमी पार्टी का शासन था तब, केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली आप सरकार से संसद में कानून बनाकर सारे प्रशासनिक अधिकार छीन लिए और मुख्यमंत्री, शिक्षा, स्वास्थ्य मंत्री सहित झूठे शराब मामले में ई डी द्वारा जेल भेजवाया गया था। इसलिए मनमानी फीस बढ़ाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का दोष नहीं दिया जा सकता। सारा प्रशासन एल जी के हाथ में दे दिया गया। इसलिए एल जी को संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन नहीं लिया। दुनिया ने देखा किस प्रकार आम आदमी सरकार को बदनाम करने के लिए यमुना नदी की सफाई के लिए एल जी ने कुछ भी नहीं किया और सारा दोष अरविंद केजरीवाल पर मढ़ते रहे। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    सरकार का दायित्व

    जब दिल्ली में बीजेपी सरकार बनी तब कितनी जल्दी मशीनें लगाकर यमुना को साफ करने का ढिंढोरा पीटा गया, जबकि आज भी दिल्ली के गंदे नाले लगातार कई घाटों के पास नाले का गंदा पानी यमुना में छोड़ रहे हैं।
    शुक्र है बीजेपी की दिल्ली सरकार कम से कम प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट करने लगी है। लेकिन यह भी अपर्याप्त है। शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा निःशुल्क देना सरकार का दायित्व है। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

    स्कूल कॉलेज बने लूट के धंधे

    लेकिन केंद्र सरकार ने अपने दायित्व निभाने के स्थान पर शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौप कर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया। जिसके कारण समूचे देश में शिक्षा माफिया स्कूल कॉलेज को लूट का धंधा बना लिए हैं। इन माफियाओं पर लगाम लगाने का दायित्व सरकार का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ही नहीं समूचे देश के मुख्यमंत्रियों का दायित्व बनता है कि वह समान शिक्षा नीति अपनाए और सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिग्रहीत कर लें ताकि जनता का शोषण नहीं हो। Delhi government should take over all the private schools in Delhi

  • हाईकोर्ट ने पति के प्रेम-संबंध के दावे की पुष्टि के लिए महिला से आवाज का नमूना मांगा

    हाईकोर्ट ने पति के प्रेम-संबंध के दावे की पुष्टि के लिए महिला से आवाज का नमूना मांगा

    9 मई को पारित आदेश में न्यायमूर्ति शैलेश ब्रह्मे की बैंच ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत किसी पक्ष को आवाज का नमूना देने का निर्देश देने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन वर्तमान मामले में कार्यवाही अर्ध-दीवानी और अर्ध-आपराधिक दोनों है।

    Bombay High Court

  • बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को ‘आपले सरकार’ पोर्टल में संशोधन पर विचार करने को कहा है, जिससे असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर ओबीसी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

    मुम्बई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र और ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए ‘आपले सरकार’ पोर्टल में जरूरी बदलाव पर विचार करे। अदालत ने सरकार से एक समिति गठित करने को भी कहा है, जो इस संशोधन की संभावनाओं पर विचार करेगी। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

    किसने की थी याचिका?

    दरअसल, 30 वर्षीय स्वानुभूति जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर थी, उन्होंने अपनी याचिका में मां की जाति के आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जैन यह साबित नहीं कर सकीं कि उनका पालन-पोषण केवल मां ने किया था। अदालत ने पाया कि जैन के पिता, जो एक बैंक अधिकारी हैं, उनकी परवरिश में पूरी तरह शामिल रहे और उनकी मां ने 2022 में ही अपना ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया था। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

    नियमों का दुरुपयोग नही होना चाहिए

    कोर्ट ने सरकार से मां की सामाजिक स्थिति के दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति देने के लिए पोर्टल में संशोधन की संभावना पर विचार करने को कहा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण पत्र के नियमों का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़ी जांच जरूरी होगी। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)

    नाम से पता चलेगा उसकी जाति

    कोई भी व्यक्ति अपने नाम से जाति प्रमाण पत्र की जांच या तो संबंधित प्राधिकरण में जाकर या संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं, हालांकि यह प्रक्रिया राज्य के आधार पर अलग-अलग होती है। (Big decision of Bombay High Court, now caste certificate will be given on the basis of mother’s caste also)