Tag: Breaking news

  • बिना अनुमति सड़क खोदने पर ठेकेदार पर केस, गोरेगांव में घंटों जाम से लोग परेशान

    बिना अनुमति सड़क खोदने पर ठेकेदार पर केस, गोरेगांव में घंटों जाम से लोग परेशान

    मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में बिना अनुमति सड़क खोदने पर टेलीकॉम कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरएम रोड और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर घंटों ट्रैफिक जाम लगा, यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

    मुंबई: गोरेगांव (पूर्व) के आरे कॉलोनी इलाके में बिना अनुमति सड़क खोदने का मामला सामने आया है। टेलीकॉम कंपनी के एक ठेकेदार ने बीएमसी और ट्रैफिक पुलिस को बिना जानकारी दिए सार्वजनिक सड़क पर खुदाई कर दी, जिससे इलाके में कई घंटों तक भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। इस मामले में आरे पुलिस स्टेशन में ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

    बिजनेस पार्क के पास खोदी गई सड़क

    पुलिस के मुताबिक, ओबेरॉय बिजनेस पार्क के पास सार्वजनिक सड़क पर करीब 18.5 मीटर लंबी खाई खोदी गई थी। यह खुदाई केबल बिछाने के लिए की गई थी, लेकिन इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।

    इस मामले में शिकायतकर्ता रामदास देविदास बुर्डे (37) हैं, जो दिंडोशी ट्रैफिक पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।

    ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप

    शिकायत में बताया गया है कि ठेकेदार समीश कुमार कमला यादव (34) और मोहम्मद नदीम याह्या खान (25) ने अपने मजदूरों के साथ सड़क की खुदाई शुरू की।
    आरोप है कि:

    • बीएमसी की शर्तों का पालन नहीं किया गया
    • शाम 5 बजे के बाद भी काम अधूरा छोड़ दिया गया
    • सड़क पर न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए और न ही ट्रैफिक वार्डन तैनात किए गए
    • ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस स्टेशन को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।

    वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक लगा जाम

    रामदास बुर्डे के अनुसार, अचानक सड़क खुदे होने की वजह से ट्रैफिक पुलिस पहले से तैयार नहीं थी।
    इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि:

    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर दो घंटे से ज्यादा जाम रहा
    • मोहन गोखले रोड, सीबा जंक्शन और आसपास के इलाकों में वाहन फंस गए
    • महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी
    • जाम अंधेरी तक फैल गया

    स्थानीय लोगों और यात्रियों ने भी इस अव्यवस्थित सड़क खुदाई पर नाराजगी जताई।

    आरे पुलिस ने दर्ज की FIR

    आरे पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि:

    • क्या किसी तरह की अनुमति ली गई थी
    • किस टेलीकॉम कंपनी के कहने पर काम किया जा रहा था
    • बीएमसी के नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ।

    FAQ

    Q1. सड़क खुदाई का मामला कहां का है?
    👉 गोरेगांव ईस्ट, ओबेरॉय बिजनेस पार्क के पास।

    Q2. कितनी लंबी सड़क खोदी गई थी?
    👉 करीब 18.5 मीटर लंबी खाई खोदी गई थी।

    Q3. किस वजह से ट्रैफिक जाम लगा?
    👉 बिना सूचना और सुरक्षा इंतजाम के सड़क खोदने से।

    Q4. किन पर केस दर्ज हुआ है?
    👉 ठेकेदार समीश यादव और मोहम्मद नदीम खान पर।

    Q5. मामला किस थाने में दर्ज है?
    👉 आरे सब पुलिस स्टेशन में।

  • खार स्टेशन के सामने जानलेवा हमला, पुलिस की मुस्तैदी से बची कारोबारी की जान

    खार स्टेशन के सामने जानलेवा हमला, पुलिस की मुस्तैदी से बची कारोबारी की जान

    खार पश्चिम में प्रॉपर्टी विवाद के चलते एक व्यक्ति पर कोयते से जानलेवा हमला किया गया। खार पुलिस के जवान अनिल जाधव की बहादुरी से घायल की जान बची, आरोपी मौके पर गिरफ्तार।

    मुंबई: खार पश्चिम इलाके में रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक इमारत में प्रॉपर्टी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोपी ने खुलेआम कोयते से एक व्यक्ति की हत्या की कोशिश की, लेकिन खार पुलिस के जवान की सतर्कता और साहस से बड़ी वारदात टल गई। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    प्रॉपर्टी विवाद से भड़का झगड़ा

    मिली जानकारी के अनुसार, खार पुलिस स्टेशन में गुन्हा रजिस्टर क्रमांक 1203/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह विवाद नीरा-विला बिल्डिंग, खार रेलवे स्टेशन के सामने, खार पश्चिम में स्थित प्रॉपर्टी को लेकर था।
    जख्मी व्यक्ति का नाम हेमंत दलाल है, जबकि आरोपी की पहचान रोशन रमेश पाटील उर्फ सिंग के रूप में हुई है।

    दिनदहाड़े कोयते से हमला

    घटना 24 दिसंबर 2025, दोपहर करीब 2:30 बजे की है। हेमंत दलाल जब संबंधित प्रॉपर्टी पर पहुंचे, तभी आरोपी रोशन पाटील से उनका तीखा विवाद हो गया। पहले आरोपी ने बांबू से मारपीट की और फिर घर के अंदर से कोयता लाकर हेमंत दलाल पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की।

    पुलिस जवान की बहादुरी से टली हत्या

    हमले के दौरान शोर सुनकर खार रेलवे स्टेशन के पास पुलिस चौकी पर ड्यूटी कर रहे पोलीस अंमलदार अनिल दत्तू जाधव (क्र. 113540) तुरंत मौके पर पहुंचे।
    आरोपी जब हेमंत दलाल के सिर पर कोयते से वार कर रहा था, तब अनिल जाधव ने अपनी पुलिस लाठी पर वार झेलते हुए आरोपी को पीछे धकेल दिया और उसे हथियार समेत काबू में ले लिया।

    घायल को तुरंत अस्पताल में भर्ती

    घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। इसके बाद खार-1 मोबाइल वैन की मदद से घायल हेमंत दलाल को भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायल की हालत गंभीर जरूर थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई और अब उसकी स्थिति स्थिर है।

    किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ
    भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 351(3), 49, 3(5),
    शस्त्र अधिनियम की धारा 4 और 25,
    और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1), 135
    के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में है।

    पुलिस जवान को सराहना

    खार पुलिस के जवान अनिल जाधव की तत्परता और साहस की हर ओर सराहना हो रही है। उनकी वजह से न केवल एक व्यक्ति की जान बची, बल्कि आरोपी को भी मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। स्थानीय लोगों और पुलिस विभाग ने उनके साहसिक कार्य के लिए उन्हें बधाई दी है।


    FAQ

    Q1. यह घटना कहां हुई?
    खार पश्चिम में खार रेलवे स्टेशन के सामने नीरा-विला बिल्डिंग में।

    Q2. घायल व्यक्ति कौन है?
    हेमंत दलाल।

    Q3. आरोपी की पहचान क्या है?
    रोशन रमेश पाटील उर्फ सिंग।

    Q4. घायल की हालत कैसी है?
    वह गंभीर रूप से घायल था, लेकिन फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।

    Q5. पुलिस जवान कौन थे जिन्होंने जान बचाई?
    पोलीस अंमलदार अनिल दत्तू जाधव।

  • ₹10 करोड़ की वसूली की साजिश नाकाम, फर्जी छेड़छाड़ केस में दो महिलाएं गिरफ्तार

    ₹10 करोड़ की वसूली की साजिश नाकाम, फर्जी छेड़छाड़ केस में दो महिलाएं गिरफ्तार

    मुंबई में एक कारोबारी के बेटे को फर्जी छेड़छाड़ केस में फंसाने की धमकी देकर ₹10 करोड़ की उगाही करने वाली दो महिलाओं को एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो एक कारोबारी के बेटे को फर्जी छेड़छाड़ के केस में फंसाने की धमकी देकर ₹10 करोड़ की उगाही करने की कोशिश कर रही थीं। पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा।

    कौन हैं आरोपी महिलाएं?

    गिरफ्तार महिलाओं की पहचान

    • हेमलता आदित्य पाटकर उर्फ हेमलता बाने (39)
    • अमरिना इक़बाल ज़वेरी उर्फ एलिस उर्फ अमरिना मैथ्यू फर्नांडिस (33)
      के रूप में हुई है।

    क्या है पूरा मामला?

    शिकायतकर्ता अरविंद गोयल, गोरेगांव पश्चिम में स्थित Goyal & Sons Infra LLP नाम की कंपनी चलाते हैं। पुलिस के मुताबिक, उनके बेटे रितम गोयल की सगाई 5 नवंबर को यश्वी शाह से हुई थी।

    इस खुशी में 14 नवंबर की रात अंबोली इलाके के एक होटल में पार्टी रखी गई थी।

    लिफ्ट में हुआ विवाद, दर्ज हुआ केस

    पार्टी खत्म होने के बाद 15 नवंबर तड़के करीब 2:40 बजे, रितम, उनकी मंगेतर, उसका भाई और एक दोस्त लिफ्ट में थे। उसी दौरान एक अज्ञात महिला लिफ्ट में आई और रितम पर लेज़र लाइट दिखाने का आरोप लगाया।

    लिफ्ट के ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचते ही महिला ने हंगामा किया, जिसके बाद अंबोली पुलिस स्टेशन में छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया।

    ₹10 करोड़ की मांग, डराने-धमकाने का आरोप

    पुलिस के अनुसार, बाद में दोनों महिलाओं ने इस मामले को “सेटल” करने के बदले गोयल परिवार से ₹10 करोड़ की मांग की।
    20 दिसंबर को हेमलता पाटकर ने अंधेरी पश्चिम के एक कैफे में अरविंद गोयल को धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनके बेटे को उम्रकैद हो सकती है।

    बातचीत के बाद रकम घटाकर ₹5.5 करोड़ तय की गई।

    लोअर परेल में बिछाया गया जाल

    इसके बाद कारोबारी की शिकायत पर एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने जाल बिछाया।
    आरोपियों को लोअर परेल बुलाकर ₹1.5 करोड़ नकद देने का नाटक किया गया, जिसमें कुछ नकली नोट भी शामिल थे।

    जैसे ही पैसे लेने की कोशिश हुई, पुलिस ने दोनों महिलाओं को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और एफआईआर दर्ज की।

    तीसरा आरोपी फरार

    पुलिस ने बताया कि इस गिरोह में उत्कर्ष नाम का एक तीसरा आरोपी भी शामिल है, जो फिलहाल फरार है। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।


    FAQ

    Q1. आरोपी महिलाओं पर क्या आरोप है?
    फर्जी छेड़छाड़ केस में फंसाने की धमकी देकर ₹10 करोड़ की उगाही का।

    Q2. गिरफ्तारी किसने की?
    मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने।

    Q3. घटना कहां की है?
    अंबोली, अंधेरी और लोअर परेल इलाके से जुड़ा मामला है।

    Q4. क्या कोई आरोपी फरार है?
    हां, उत्कर्ष नाम का तीसरा आरोपी फरार है।

  • वर्ली सी फेस पर दिखे डॉल्फ़िन, मुंबईकरों में खुशी; वीडियो हुआ वायरल

    वर्ली सी फेस पर दिखे डॉल्फ़िन, मुंबईकरों में खुशी; वीडियो हुआ वायरल

    मुंबई के वर्ली सी फेस के पास अरब सागर में डॉल्फ़िन का झुंड नजर आया। दुर्लभ नज़ारे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर मुंबईकरों ने जमकर प्रतिक्रिया दी।

    मुंबई: कंक्रीट और भागदौड़ से भरी मुंबई के बीच गुरुवार को एक खूबसूरत और दुर्लभ नज़ारा देखने को मिला, जब वर्ली सी फेस के पास अरब सागर में डॉल्फ़िन का झुंड तैरता हुआ दिखा। इस नज़ारे के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में मुंबईकर वर्ली सी फेस की ओर पहुंच गए।

    अरब सागर में ‘फ्लिपर’ की मस्ती

    डॉल्फ़िन को उनके चंचल स्वभाव के कारण अक्सर ‘फ्लिपर’ कहा जाता है। वायरल वीडियो में डॉल्फ़िन समुद्र की लहरों के बीच उछलते-कूदते और मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं।
    एक वीडियो इंस्टाग्राम यूज़र सविन चौहान ने शेयर किया, जिसका कैप्शन था –
    “Between concrete and chaos… A Dolphin moment.”
    इस रील में हालिया बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ का ट्रेंडिंग गाना “FA9LA” भी इस्तेमाल किया गया है।

    Dolphins-spotted-at-Worli-Sea-Face-Mumbaikars-rejoice-video-goes-viral-mumbai

    पहले भी दिख चुके हैं डॉल्फ़िन

    यह पहली बार नहीं है जब मुंबई के तट पर डॉल्फ़िन देखे गए हों। इससे पहले भी कभी-कभी डॉल्फ़िन या उनके अवशेष शहर के समुद्री किनारों पर देखे जा चुके हैं। खासकर मानसून और सर्दियों के मौसम में इनके दिखने की संभावना बढ़ जाती है।

    सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

    वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
    एक यूज़र ने लिखा,

    “अगर हम समुद्र को साफ रखें और कचरा फेंकना बंद करें, तो और भी खूबसूरत समुद्री जीव साफ-साफ देख पाएंगे।”

    एक अन्य यूज़र ने दावा किया,

    “बांद्रा-वर्ली सी लिंक के पास सुबह करीब 10 बजे अक्सर डॉल्फ़िन दिखाई देते हैं।”

    कौन-सी प्रजाति के हैं ये डॉल्फ़िन?

    एक जानकार इंस्टाग्राम यूज़र ने कमेंट में बताया कि ये इंडियन ओशन हम्पबैक डॉल्फ़िन हो सकती हैं।
    उनके मुताबिक,

    “ये तट के पास रहने वाली डॉल्फ़िन प्रजाति है, जो भारत के पश्चिमी तट पर आम तौर पर पाई जाती है। मुंबई में ये कोलाबा, वर्ली, मढ़ और खासकर क्रीक इलाकों के पास अक्सर नजर आती हैं।”

    प्रकृति और शहर के बीच खास पल

    विशेषज्ञ मानते हैं कि समुद्री जैव विविधता का दिखना इस बात का संकेत है कि कुछ इलाकों में समुद्र अब भी जीवंत है। हालांकि, प्रदूषण और तटीय विकास के चलते इन जीवों के लिए खतरे भी बढ़ रहे हैं।


    FAQ

    Q1. डॉल्फ़िन मुंबई में कहां दिखे?
    वर्ली सी फेस के पास अरब सागर में।

    Q2. क्या यह पहली बार हुआ है?
    नहीं, पहले भी मुंबई के तट पर डॉल्फ़िन देखे जा चुके हैं।

    Q3. ये कौन-सी डॉल्फ़िन प्रजाति हो सकती है?
    संभावना है कि ये इंडियन ओशन हम्पबैक डॉल्फ़िन हों।

    Q4. वीडियो कहां वायरल हुआ?
    इंस्टाग्राम और X (पूर्व में ट्विटर) पर।

  • गोरगांव के स्पा में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर समेत दो गिरफ्तार

    गोरगांव के स्पा में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर समेत दो गिरफ्तार

    मुंबई के गोरगांव इलाके में एक स्पा की आड़ में चल रहे सेक्स रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। छापेमारी में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सात युवतियों को मुक्त कराया गया।

    मुंबई: गोरगांव पश्चिम इलाके में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पा की आड़ में चल रहे देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में स्पा मैनेजर समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात युवतियों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। यह कार्रवाई गोरगांव पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर की।

    मालिश के नाम पर चल रहा था अवैध धंधा

    पुलिस के अनुसार, एम.जी. रोड स्थित एकवीरा प्रसाद बिल्डिंग में मौजूद अरोमा लग्ज़री स्पा में मसाज सर्विस के नाम पर देह व्यापार कराया जा रहा था।
    गोरगांव के पुलिस निरीक्षक मनोज पाटिल को इस संबंध में पुख्ता जानकारी मिली थी कि स्पा का मैनेजर ग्राहकों को “स्पेशल सर्विस” देने के नाम पर युवतियां उपलब्ध करवा रहा है।

    नकली ग्राहक भेजकर पकड़ा गया रैकेट

    सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने नकली ग्राहक भेजा। ग्राहक ने स्पा मैनेजर से मसाज के साथ अतिरिक्त सेवाओं की मांग की।
    आरोप है कि मैनेजर श्रवण संतोष दुबे और उसके सहायक दिलीप संजीव यादव ने ग्राहक के सामने कई युवतियों को पेश किया और सौदा तय किया।
    जैसे ही तय इशारे पर पुलिस को संकेत मिला, टीम ने अचानक छापा मार दिया।

    छापे में दो गिरफ्तार, सात महिलाएं मुक्त

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। उस समय पैसों का लेन-देन भी चल रहा था।
    मौके पर मौजूद कुछ महिलाएं भागने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
    इस कार्रवाई में कुल सात युवतियों को रेस्क्यू किया गया, जिन्हें मेडिकल जांच के बाद महिला संरक्षण गृह भेज दिया गया है।

    कमाई का बड़ा हिस्सा रखता था मैनेजर

    प्राथमिक जांच में सामने आया है कि स्पा मैनेजर ग्राहकों से मोटी रकम वसूलता था।
    कमाई का बड़ा हिस्सा खुद रखता था, जबकि बाकी रकम महिलाओं को दी जाती थी।
    यह पूरा रैकेट सुनियोजित तरीके से लंबे समय से चल रहा था।

    इन धाराओं में मामला दर्ज

    पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ

    • भारतीय न्याय संहिता (BNS)
    • अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम – PITA
      की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
      दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और आगे की जांच जारी है।

    FAQ

    Q1. यह मामला कहां का है?
    मुंबई के गोरगांव इलाके का।

    Q2. कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
    दो लोग, जिनमें स्पा मैनेजर और उसका सहायक शामिल हैं।

    Q3. कितनी महिलाओं को रेस्क्यू किया गया?
    कुल सात युवतियों को मुक्त कराया गया है।

    Q4. आरोपियों पर कौन-सा कानून लगाया गया है?
    BNS और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत।

  • वसई किले में शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने पर प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज

    वसई किले में शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने पर प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज

    महाराष्ट्र के ऐतिहासिक वसई किले में फिल्म शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने का मामला सामने आया है। ASI के नियमों के उल्लंघन पर वसई पुलिस ने प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच जारी है।

    वसई (पालघर): ऐतिहासिक वसई किले में फिल्म शूटिंग के दौरान लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक निजी प्रोडक्शन कंपनी द्वारा फ्रांसिस्कन चर्च के अंदर चूल्हा जलाने के आरोप में वसई पुलिस ने केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि चूल्हा उन पत्थरों पर जलाया गया, जिन पर सैकड़ों साल पुराने शिलालेख मौजूद हैं। इस घटना से पुरातत्व प्रेमियों और स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है।

    ASI के नियमों का उल्लंघन

    पुलिस के मुताबिक, मुंबई के मालाड स्थित ‘आरंभ एंटरटेनमेंट’ नाम की प्रोडक्शन कंपनी को 18 और 19 दिसंबर को वसई किले में शूटिंग की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सख्त शर्तों के साथ दी गई थी।
    इसके बावजूद शूटिंग के दौरान फ्रांसिस्कन चर्च के भीतर चूल्हा जलाया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया है।

    संरक्षित स्मारक को खतरा

    पुरातत्व विभाग ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह कृत्य प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 का उल्लंघन है। जिस स्थान पर चूल्हा जलाया गया, वह ऐतिहासिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
    यही वह स्थान बताया जाता है, जहां मराठों और पुर्तगालियों के बीच ऐतिहासिक संधि वार्ता हुई थी।

    वसई किले का ऐतिहासिक महत्व

    1536 में पुर्तगालियों द्वारा निर्मित वसई किला 109 एकड़ में फैला हुआ है। तीन तरफ से समुद्र और दलदली इलाके से घिरा यह किला करीब 30 फीट ऊंची दीवारों से सुरक्षित है।
    बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति चिमाजी अप्पा ने इसे जीतकर मराठा शौर्य का प्रतीक बना दिया। किले में फ्रांसिस्कन चर्च समेत कई रोमन कैथोलिक मिशनों के अवशेष मौजूद हैं।

    पहले भी हो चुकी है लापरवाही

    स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि इससे पहले भी फिल्म ‘कांतारा 2’ की शूटिंग के दौरान किले के भीतर जलती मशालें फेंके जाने का आरोप लगा था। उस समय भी शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    विरासत प्रेमियों का आरोप

    हेरिटेज एक्टिविस्ट्स का आरोप है कि शूटिंग फीस के बदले नियमों की अनदेखी की जाती है।
    एक स्थानीय इतिहास प्रेमी ने कहा,

    “अगर ऐसे ही लापरवाही चलती रही, तो वसई किले की ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी।”

    पुलिस जांच जारी

    वसई पुलिस ने पुष्टि की है कि प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    FAQ

    Q1. वसई किले में क्या घटना हुई?
    फिल्म शूटिंग के दौरान फ्रांसिस्कन चर्च के अंदर चूल्हा जलाया गया।

    Q2. किसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है?
    मुंबई की आरंभ एंटरटेनमेंट नामक प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ।

    Q3. किस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है?
    प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत।

    Q4. पुलिस जांच की स्थिति क्या है?
    मामले की जांच जारी है।

  • फर्जी पुलिस बनकर 99 लाख की वसूली, मालाड के कारोबारी को आत्महत्या तक पहुंचाया

    फर्जी पुलिस बनकर 99 लाख की वसूली, मालाड के कारोबारी को आत्महत्या तक पहुंचाया

    मुंबई के मालाड में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर 99 लाख रुपये की उगाही करने वाले तीन ठगों को दिंडोशी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीड़ित गैस एजेंसी मालिक डर के कारण आत्महत्या करने दहाणू स्टेशन तक पहुंच गया था।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में फर्जी पुलिस अधिकारियों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। मालाड के एक एलपीजी एजेंसी मालिक से 99 लाख रुपये की उगाही करने वाले तीन ठगों को दिंडोशी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन ठगों की धमकियों से इतना डर फैल गया कि 39 वर्षीय पीड़ित घर छोड़कर दहाणू रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने की सोच रहा था, जहां पुलिस ने समय रहते उसकी जान बचा ली।

    पत्नी की शिकायत से खुला पूरा मामला

    यह मामला तब सामने आया जब 15 दिसंबर को पीड़ित की पत्नी ने दिंडोशी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पति अचानक घर छोड़कर चले गए हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वह गंभीर मानसिक दबाव में था और खुद को फर्जी केस में फंसाया जाने से डर रहा था।

    गणपति पंडाल से शुरू हुई ठगी की कहानी

    पुलिस के मुताबिक, ठगी की शुरुआत सितंबर में हुई थी। पीड़ित ने अपने परिचित प्रवीण खेडेकर को गणपति पंडाल के लिए करीब ₹10,500 उधार दिए थे। कुछ समय बाद खेडेकर ने उससे ₹50,000 और मांगा जिसमें उसने मोबाइल ट्रांसफर एक अन्य नंबर पर करवाया।

    यहीं से शुरू हुआ फर्जी पुलिस कॉल का खेल

    “तुम पर मर्डर का शक है” – फर्जी जॉइंट सीपी की धमकी

    पैसे ट्रांसफर करने के बाद पीड़ित को एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस बताया और कहा कि
    ₹10,500 की रकम सुपारी देकर हत्या कराने की एडवांस पेमेंट है।
    इस धमकी से पीड़ित पूरी तरह डर गया।

    “तुम्हें बचाने के लिए हत्या कर दी” – फिर मांगे 2 लाख

    कुछ दिन बाद एक और कॉल आया, जिसमें ठग ने कहा कि खेडेकर को पीड़ित को बचाने के लिए मार दिया गया है, और अब इसके बदले ₹2 लाख देने होंगे
    इसके बाद लगातार कॉल आने लगे। हर बार रकम बढ़ती गई —
    ₹50,000 से शुरू होकर ₹7 लाख तक

    मुंबई पुलिस कमिश्नर बनकर मांगे 20 लाख

    ठगों में से एक ने खुद को “अविनाश शिंदे” नाम का पुलिस अधिकारी बताया। बाद में तो हद तब हो गई जब एक आरोपी ने खुद को मुंबई पुलिस कमिश्नर बताते हुए तुरंत गिरफ्तारी रोकने के लिए ₹20 लाख की मांग कर डाली।

    बुजुर्ग के जरिए होती थी नकद वसूली

    पीड़ित ने पुलिस को बताया कि जब भी वह नकद पैसे देता था, तो एक बुजुर्ग व्यक्ति सार्वजनिक गार्डन में आकर पैसे ले जाता था
    जांच में पता चला कि कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन उसी बुजुर्ग के मोबाइल से किए गए थे।

    कर्ज लेकर दिए 99 लाख रुपये

    डर और धमकियों के चलते पीड़ित ने

    • करीब ₹80 लाख नकद
    • और ₹19 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर
      किए। इसके लिए उसने फाइनेंस कंपनियों से कर्ज भी लिया। फिर भी उसे लगने लगा कि उसकी गिरफ्तारी तय है।

    आत्महत्या के इरादे से दहाणू पहुंचा पीड़ित

    15 दिसंबर को वह घर छोड़कर चला गया। पुलिस ने उसे दहाणू रेलवे स्टेशन पर पाया, जहां वह आत्महत्या करने की हिम्मत जुटा रहा था
    एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “वह इतना डर चुका था कि उसे मरना ही एकमात्र रास्ता लग रहा था।”

    CDR जांच से तीनों आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, जिससे

    • प्रवीण खेडेकर,
    • प्रवीण काटे
      और एक अन्य साथी का नाम सामने आया।
      तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बुजुर्ग ने दावा किया कि उसे ठगी की जानकारी नहीं थी और उसने सिर्फ अपना फोन इस्तेमाल करने दिया था।

    कानूनी कार्रवाई

    दिंडोशी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 (उगाही) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच जारी है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: पीड़ित कौन है?
    A: मालाड का 39 वर्षीय एलपीजी गैस एजेंसी मालिक।

    Q2: ठगों ने कितनी रकम वसूली?
    A: कुल ₹99 लाख।

    Q3: पुलिस ने कितने लोगों को गिरफ्तार किया?
    A: तीन आरोपियों को।

    Q4: मामला किस थाने में दर्ज है?
    A: दिंडोशी पुलिस थाना।

  • 2013 सिलेंडर अग्निकांड: कंदिवली के कबाड़ी को लापरवाही में एक साल की सजा

    2013 सिलेंडर अग्निकांड: कंदिवली के कबाड़ी को लापरवाही में एक साल की सजा

    मुंबई के कंदिवली में 2013 में हुए एलपीजी गैस सिलेंडर अग्निकांड मामले में सेशन कोर्ट ने कबाड़ी बाबलू पासवान को दोषी ठहराते हुए एक साल की जेल की सजा सुनाई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी।

    मुंबई: करीब 12 साल पुराने कंदिवली गैस सिलेंडर अग्निकांड मामले में मुंबई की सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कबाड़ का व्यवसाय करने वाले बाबलू पासवान को लापरवाही का दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाई है। यह हादसा मार्च 2013 में हुआ था, जिसमें पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए थे।

    2013-cylinder-fire-incident-Kandivali-scrap-dealer-sentenced-to-one-year-in-jail-for-negligence-1

    कबाड़ से गैस निकालते वक्त हुआ था भीषण हादसा

    अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 7 मार्च 2013 की शाम करीब 6 बजे, बाबलू पासवान अपने दो साथियों की मदद से एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकाल रहा था। यह काम कंदिवली पूर्व के फ्रेंड्स शेजार कमेटी चॉल के पास एक खुले नाले में किया जा रहा था, जो पूरी तरह से रिहायशी इलाका था।

    जलती सिगरेट से भड़की आग

    शिकायतकर्ता सलीम शेख, जो कंदिवली पश्चिम की जन एकता वेलफेयर सोसायटी में रहते हैं, ने अदालत को बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ वहां बैठकर बातचीत कर रहे थे और आसपास बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान, आरोप है कि पासवान के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने जलती हुई सिगरेट नाले में फेंक दी, जहां गैस छोड़ी जा रही थी।
    इसके बाद अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिसने पूरे इलाके को चपेट में ले लिया।


    बच्चे समेत कई लोग झुलसे

    हादसे में दो नाबालिग बच्चे और करीब 10 से 12 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत कपड़ों से आग बुझाने की कोशिश की और घायलों को अलग-अलग अस्पतालों — शिवम अस्पताल (चारकोप), चव्हाण अस्पताल, भगवती अस्पताल और ऑस्कर अस्पताल — में भर्ती कराया गया।

    पांच लोगों की गई जान

    इलाज के दौरान प्रीति यादव, मोहम्मद अफजल शेख, शरतूनिसा खान, सोफिया खातून और मोहम्मद हवेलदार की मौत हो गई। वहीं कई अन्य जैसे नदीम खान, अमन खान, आमिर खान और जीतू बुधाहांडी गंभीर रूप से घायल होकर किसी तरह बच पाए।

    सह-आरोपी बरी, कबाड़ी दोषी

    पुलिस ने इस मामले में अब्दुल सिद्दीक जब्बार खान को भी आरोपी बनाया था, जिस पर सिगरेट फेंकने का आरोप था। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया, लेकिन मुख्य आरोपी बाबलू पासवान को दोषी ठहराया

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    अदालत ने फैसले में कहा कि बाबलू पासवान ने जानबूझकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की।
    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ज्वलनशील गैस सिलेंडरों को खाली करना सुरक्षित और नियंत्रित स्थान पर किया जाना चाहिए, न कि रिहायशी इलाके के खुले नाले में। यह लापरवाही सीधे तौर पर लोगों की जान पर भारी पड़ी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: यह हादसा कब और कहां हुआ था?
    A: 7 मार्च 2013 को कंदिवली पूर्व के एक रिहायशी इलाके में।

    Q2: हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
    A: कुल पांच लोगों की मौत हुई थी।

    Q3: कोर्ट ने आरोपी को क्या सजा दी?
    A: एक साल की जेल की सजा।

    Q4: आरोपी पर किस तरह की लापरवाही साबित हुई?
    A: रिहायशी इलाके में अवैध रूप से गैस सिलेंडर खाली करना।

  • बोरीवली में उबर कैब हादसा: डिवाइडर से टकराई कार, बुजुर्ग महिला की मौत

    बोरीवली में उबर कैब हादसा: डिवाइडर से टकराई कार, बुजुर्ग महिला की मौत

    मुंबई के बोरीवली पूर्व में उबर कैब के भीषण हादसे में 66 वर्षीय महिला की मौत हो गई। ड्राइवर पर लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने का मामला दर्ज। पढ़िए पूरी खबर।

    मुंबई: बोरीवली इलाके में उबर कैब से हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 66 साल की बुजुर्ग महिला जेसिंथा डिसुजा की मौत हो गई। आरोप है कि कैब चालक ने गाड़ी तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाई, जिससे वाहन सड़क के डिवाइडर से टकरा गया। इस मामले में कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन में ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

    वसई से वडाला जाते वक्त हुआ हादसा

    जानकारी के मुताबिक, मृतक महिला जेसिंथा डिसुजा को उनके बेटे एडवर्ड प्रियांक डिसुजा (37) ने वसई से वडाला आने के लिए उबर कैब बुक करके दी थी। कैब सुबह करीब 7:30 बजे वासई से रवाना हुई थी।
    करीब 9 बजे के आसपास, बोरीवली पूर्व इलाके में अचानक कैब सड़क के डिवाइडर से टकरा गई, जिससे जेसिंथा गंभीर रूप से घायल हो गईं।

    सिर में गंभीर चोट, ICU में भर्ती

    हादसे के बाद कैब चालक ने परिजनों को सूचना दी कि जेसिंथा को समतानगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
    बेटा एडवर्ड तुरंत अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने बताया कि जेसिंथा के सिर में गंभीर चोट आई थी और उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उन्हें आईसीयू में रखा गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शाम करीब 6:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया

    परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    एडवर्ड डिसुजा वडाला में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं और ईस्टर्न शिपिंग कंपनी में काम करते हैं। उनके माता-पिता वासई में रहते थे। मां की अचानक मौत से परिवार सदमे में है।

    ड्राइवर पर लापरवाही का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, कैब चालक ने वाहन बेदरकारी, तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाया, जिसकी वजह से कार डिवाइडर से टकराई और यह हादसा हुआ।
    पीड़ित परिवार की शिकायत पर कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन में चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

    पुलिस जांच जारी

    इस केस की जांच पुलिस उपनिरीक्षक मयूर पाटील के मार्गदर्शन में की जा रही है। पुलिस ड्राइवर की ड्राइविंग हिस्ट्री, स्पीड और हादसे के हालात की जांच कर रही है।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. हादसा कहां हुआ?
    👉 मुंबई के बोरीवली पूर्व इलाके में।

    Q2. मृतक महिला की उम्र कितनी थी?
    👉 66 वर्ष।

    Q3. महिला कहां जा रही थीं?
    👉 वासई से वडाला।

    Q4. पुलिस ने किसके खिलाफ मामला दर्ज किया है?
    👉 उबर कैब चालक के खिलाफ।

    Q5. हादसे की वजह क्या बताई गई है?
    👉 तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाना।

  • BMC Election: नामनिर्देशन वितरण का आंकड़ा सामने आया, 26 वार्डों में 4,165 पत्र जारी

    BMC Election: नामनिर्देशन वितरण का आंकड़ा सामने आया, 26 वार्डों में 4,165 पत्र जारी

    मुंबई महानगरपालिका के विभिन्न प्रशासकीय विभागों में BMC Election के लिए नामनिर्देशन पत्रों का वितरण पूरा हो गया है। ए से आर वार्ड तक कुल 26 विभागों में 4,165 नामनिर्देशन पत्र बांटे गए हैं। जानिए किस वार्ड में कितने पत्र वितरित हुए।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अलग-अलग प्रशासकीय विभागों में नामनिर्देशन पत्रों के वितरण का विस्तृत आंकड़ा सामने आया है। ए विभाग से लेकर आर उत्तर विभाग तक, कुल 26 वार्डों में 4,165 नामनिर्देशन पत्र जारी किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा वितरण एम पश्चिम, एल और के पूर्व विभाग में देखने को मिला है। यह आंकड़े प्रशासनिक तैयारियों और आगामी प्रक्रियाओं की अहम तस्वीर पेश करते हैं।

    BMC के किस विभाग में कितने नामनिर्देशन पत्र

    नगर प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, वार्ड-वार वितरण इस प्रकार रहा—

    • ए विभाग – 18
    • बी विभाग – 25
    • सी विभाग – 46
    • डी विभाग – 52
    • ई विभाग – 225

    एफ और जी वार्ड में स्थिति

    • एफ उत्तर विभाग – 200
    • एफ दक्षिण विभाग – 107
    • जी उत्तर विभाग – 185
    • जी दक्षिण विभाग – 118

    इन वार्डों में मध्यम स्तर पर नामनिर्देशन पत्रों का वितरण दर्ज किया गया है।

    एल और एम वार्ड में सबसे ज्यादा वितरण

    • एल विभाग – 347
    • एम पूर्व विभाग – 228
    • एम पश्चिम विभाग – 419

    एम पश्चिम विभाग में सबसे ज्यादा 419 नामनिर्देशन पत्र बांटे गए, जो पूरे शहर में सबसे बड़ा आंकड़ा है।

    एन, एस और टी वार्ड का हाल

    • एन विभाग – 156
    • एस विभाग – 240
    • टी विभाग – 116

    इन इलाकों में भी नामनिर्देशन प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज रही।

    एच और के वार्ड के आंकड़े

    • एच पूर्व (अधिक पूर्व) – 102
    • एच पश्चिम (अधिक एच पश्चिम) – 263
    • के पूर्व (अधिक के उत्तर) – 240
    • के पूर्व – 300

    के पूर्व और एच पश्चिम विभागों में बड़ी संख्या में नामनिर्देशन पत्र जारी किए गए हैं।

    पी और आर वार्ड का वितरण

    • पी दक्षिण विभाग – 183
    • पी उत्तर विभाग – 92
    • पी पूर्व विभाग – 183
    • आर दक्षिण विभाग – 164
    • आर मध्य विभाग – 80
    • आर उत्तर विभाग – 76

    कुल आंकड़ा

    👉 कुल नामनिर्देशन पत्र: 4,165

    प्रशासन का कहना है कि सभी विभागों में प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है और आगे की कार्रवाई तय समय पर की जाएगी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कुल कितने नामनिर्देशन पत्र वितरित किए गए हैं?
    👉 कुल 4,165 नामनिर्देशन पत्र।

    Q2. किस वार्ड में सबसे ज्यादा नामनिर्देशन हुए?
    👉 एम पश्चिम विभाग में सबसे ज्यादा 419।

    Q3. सबसे कम वितरण किस विभाग में रहा?
    👉 ए विभाग में केवल 18 नामनिर्देशन पत्र।

    Q4. यह वितरण किससे जुड़ा है?
    👉 यह प्रशासकीय और नगर निगम से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है।

    Q5. आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
    👉 नामनिर्देशन के बाद जांच और अगली प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।