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  • कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।

    लोकतंत्र का हिस्सा

    संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?

    संसद में होती है गुंडो की भाषा

    पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही  सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।

    जवाब देने से क्यों भागती है मोदी सरकार?

    मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।

    Priyanka-gandhi-news

    कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा

    अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।

    इस्तीफे देने का दायित्व

    यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर  नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?

    सरकार ने दिया सेना को धोखा

    इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”

    कांग्रेस और मोदी में अंतर?

    आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।

    टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार

    दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।

    प्रशासन का गलत इस्तेमाल

    सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।

    विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?

    दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?

    विदेशनीति पर सवाल?

    ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?

    दुनिया की निगाहों में भारत?

    भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।

  • नाटो चीफ़ की भारत को खुली धमकी। कहा, लगा देंगे बैन …

    नाटो चीफ़ की भारत को खुली धमकी। कहा, लगा देंगे बैन …

    भारतीय प्रधानमंत्री की चुप्पी आज धमकियों का सामना कर रही है। जनता के अरबों डॉलर टैक्स का पैसा खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

    नेशनल डेस्क
    नई दिल्ली:
    भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप बार बार धमकी देते रहते हैं कि भारत पर हम बहुत अधिक टैरिफ लगाएंगे। भारत चुप रहता है। ट्रंप ने बारह बार कहा था उसने भारत और पाकिस्तान को ट्रेड की धमकी देकर सीज फायर कराया। 22 अरब रूपये जनता के टैक्स का खर्च कर दो सौ विदेशी दौरों और 79 राष्ट्रों के दौरों का परिणाम क्या निकला जब पाकिस्तान के साथ युद्ध में एक भी राष्ट्र भारत के साथ खुलकर नहीं आया। जबकि अमेरिका चीन तुर्की और अज़रबैजान खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े रहे। अमेरिका के चक्कर में भारत रूस का साथ भी छोड़ता दिख रहा है।

    भारत को खुली चुनौती

    ट्रंप भारत चीन ब्राजील को रूस के साथ संबंध रखने के कारण हमेशा धमकी देता है। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस के विदेशमंत्री ने स्पष्ट जवाब दिया हम तैयार हैं। चीन ने तो अमेरिकी ट्रंप को खुली धमकी दे डाली चाहे ट्रेड वॉर हो या सचमुच का युद्ध हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब अमेरिकी पिट्ठू नाटो के अध्यक्ष ने रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत को रूस का साथ छोड़ने अन्यथा बैन झेलने की खुली चुनौती दे डाली है। लेकिन भारत है कि जवाब ही नहीं देता। अमेरिका हड़काया करता है तो मोदी हंसते हैं। बार बार भारत का अपमान करता है फिर भी मोदी की हिम्मत नहीं पड़ती कि पलट कर जवाब दें।

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    कौन है नाटो अध्यक्ष?

    नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनायझेशन (NATO) यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 32 सदस्य देशों का एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इन 32 सदस्य देशों में से 30 यूरोप में और दो उत्तरी अमेरिका में स्थित हैं। नाटो के अध्यक्ष (महासचिव) मार्क रूट ने हालही में भारत को रुस का साथ छोडने अन्यथा बैन झेलने की चुनौती दी है। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

    क्या रुस को है भारत पर भरोसा?

    छोटे से राष्ट्र ब्राजील ने ट्रंप को टका सा जवाब दिया तुम्हे टैरिफ लगाना हो लगाओ हम नहीं झुकेंगे। रूस प्रतिद्वंद्वी है। चाइना के सामने अमेरिका की दाल गलती नहीं वह हमेशा अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब देता रहता है। रूस यूक्रेन युद्ध में नाटो भी शामिल है यूक्रेन को हथियारों की मदद करता हुआ अमेरिका तो है ही। रूस को शायद भारत पर भरोसा ही नहीं रहा इसीलिए पाकिस्तान के साथ ट्रेड कर रहा है। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

    भारत और मोदी कहीं है ही नही ..

    बंद पड़ी स्टील कंपनी चालू करने और रेल संपर्क बढ़ाने में इन्वेस्ट कर रहा है और भारत ऊहापोह की स्थिति में है। पुरानी विदेशनीति भारत छोड़ चुका है। मोदी भले खुद को विश्वगुरू कहलाने की चेष्टा करते रहते हैं। गोदी मीडिया और अंधभक्त विश्वगुरू ही मानते हैं। लेकिन सच तो यह है कि भारत और मोदी कहीं है ही नहीं। ईरान ब्रिक्स में नया नया शामिल होकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करा लेता है जबकि भारत को कोई पूछता तक नहीं। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

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    भारतीय बाज़ार पर कब्जा

    तमाम संगठनों में भारत शामिल होने के बावजूद कोई अहमियत हो देखा नहीं जाता।रूस भारत का हर विपदा में पक्का साथी रहा है पर लगता है अमेरिकी धमकियों के आगे घुटने टेक कर रूस दूर जा रहा हैं। अमेरिका भारत के 140 करोड़ लोगों के बड़े बाजार पर कब्जा कर अपने माल को खपाना चाहता है। ट्रेड की धमकी इसीलिए देता है। अमेरिका भारत को जीरो टैरिफ पर अपना खाद्यान्न बेचना चाहता है। साथ ही अपने देश की देशी गायों का दूध जिसमें सुअर मछली मुर्गे की चर्बी मिली हुई होती है।

    भारत की खामोशी

    कहने को तो भारत ने अमेरिका को मना कर दिया है कि तुम्हारा मांसाहार वाला दूध हम नहीं लेंगे। ऐसा इसलिए कि भारत के हिंदुओं को भरोसा हो जाए कि मोदी सनातन की रक्षा कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि अमेरिकी गायों के मांसाहार वाले दूध आयात को स्वीकृत कर दिया गया है। अमेरिका शाकाहारी दूध बेचेगा या मांसाहारी इसकी गारंटी कहने को भारत की ओर से ले ली जाएगी। भारत चीन दोनों रूस से तेल खरीदने वाले बड़े ग्राहक हैं।रूस को अमेरिकी धमकियों का कोई भय नहीं। चीन भी खुला जवाब देता है लेकिन भारत की खामोशी कायरता बताती है।

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    चोरी छुपे सहमति

    अमेरिका से वहां के कृषि उपज खरीदने पर चोरी छुपे सहमति बन चुकी है क्योंकि मोदी के परम मित्र अडानी ने कई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अनाज के सीमेंटेड गोदाम बनाए हुए हैं। अडानी के फायदे के लिए ही मोदी सरकार ने किसान संविरोधी तीन कानून बना लिए थे। जिससे किसानों की जमीन छीनकर अडानी को दी जा सके और किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनकर रह जाएं। लेकिन किसानों के व्यापक विरोध के चलते मोदी ने तीनों बिल वापस लेने की घोषणा कर दी थी। फिर भी अब जीरो टैरिफ पर अमेरिकी किसानों के खाद्य पदार्थ भारत आयत कर अडानी के भंडार भरा जाएगा।

    सस्ता होगा अनाज

    अमेरिकी अनाज बेहद सस्ता होगा क्योंकि अमेरिका अपने किसानों को सौ प्रतिशत सब्सिडी देता है। जबकि भारत में बीज खाद डीजल कीटनाशक आदि बेहद महंगे हैं। किसान कर्ज के बोझ तले दबा आत्महत्या कर रहा है। उसकी लागत भी नहीं मिलती। अमेरिकी अनाज की जीरो टैरिफ पर भारत में आयात करने में सस्ता पड़ेगा तो अडानी सस्ता अनाज खुले मार्केट में डाल देंगे तो भारत के किसानों का मंहगा खाद्यान्न कौन लेगा? NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

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    भारतीय किसानों की मुश्किल

    नतीजा होगा लाखों किसान आत्महत्या कर लेंगे तब मोदी कहेंगे मेरे लिए थोड़े मरे हैं। मरता है किसान तो मरे, मोदी को केवल अडानी का फायदा दिखता है। ट्रंप भारतीय नजरों में अपने प्रोडक्ट लाना चाहता है। मोदी सरकार में हिम्मत नहीं कि वह ट्रंप को जवाब दे दे। सच तो यह है जैसा बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्वामी कहते हैं अडानी को बचाने के लिए मोदी देश भी बेच देगा। NATO chief openly threatens India. Said, will ban it

  • डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    डरा रहा इजराईल ईरान घमासान

    इजराईल के यहूदी जर्मनी से हिटलर की तानाशाही और लाखों यहूदियों को पकड़कर ज्वलनशील चैंबर में बंद कर जलाए जाने के डर से अपना जीवन बचाने के लिए भाग खड़े हुए। दुनिया के किसी देश ने उन्हें पनाह नहीं दी। लेकिन चूंकि फिलिस्तीन उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था तब अंग्रेजों ने उन्हें फिलिस्तीन में शरण दिया। लेकिन यहूदियों ने धीरे धीरे फिलिस्तीनी इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
    प्रसिद्ध और संपन्न नगर गाजा पर इतनी अधिक बमबारी की जिसमें अस्पताल तक नहीं छोड़ा। दूध मुहे बच्चों का भी नरसंहार किया। गाजा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टेढ़ी नजर है। वे गाजा को हड़पना और वहां इजराईल की सहायता से व्यापारिक संकुल बनाना चाहते हैं। जिस तरह भारत में मुसलमानों को किरायेदार कहा जा रहा है उसी तरह यहूदी तो किरायेदार भी नहीं शरणार्थी हैं। जैसे कश्मीर से भगाए गए पंडित खानाबदोश हालत में ट्रांजिट कैंपों में नरकीय जीवन जीने को अभिशप्त कर दिए गए हैं।
    हिंदू वादी सरकार पिछले ग्यारह वर्षों में कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने की बात करती रही, लेकिन कुछ किया नहीं। अनाथ बनाकर छोड़ दिया। बीमारी, अभाव और गंदगी में घुट-घुट कर मरने के लिए।
    कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण करने का आरोप लगाने वाली हिंदूवादी सरकार और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए प्रयत्नशील आरएसएस ने उन कश्मीरी पंडितों की ओर झांकने की जहमत तक नहीं उठाई। फिर उनके लिए आवाज कैसे उठाती?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की दोगली अनीति देखिए। एक तरफ वे ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने के लिए वार्ता कर रहे हैं, तो वहीं इजराईल को ईरानी परमाणु प्रोजैक्ट पर हमला करने को भी कह रहे हैं। परमाणु वार्ता संपन्न हुई नहीं कि इजराईल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर दो सौ बम वर्षक विमान भेजकर आधा दर्जन ठिकानों पर बम गिरा कर दो वैज्ञानिकों, सेना के कमांडरों की हत्या कर दी।
    स्वाभाविक है ईरान बदले की भावना से इजराईल पर हमला करता रहा। जिस तरह भारत को आत्मरक्षार्थ आतंकवादी पाकिस्तान पर हमला करने का अधिकार है। उसी तरह ईरान को भी इजराईल पर हमला करने का मौलिक अधिकार मिल जाता है। ईरान ने इजराईल पर इतनी अधिक बमबारी की, कि उसके परमाणु ठिकानों और सेना का संहार कर दिया। इस वज़ह से इजराईल के पास सैनिकों की कमी हो गई है। जिस कारण वह सेना में नई भरती करने को मजबूर हो गया है।
    इजराईल अपने नुकसान को हमेशा छुपाता रहता है। नए सैनिक भरती करने से ही पता चल जाता है कि ईरान ने उसे कितनी क्षति पहुंचाई है? धूर्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान पर इजराईली हमले में उनका कोई हाथ नहीं है। ईरानी हमले से डर कर अमेरिका ने अरब देशों से अपने सैनिक हटा लिए हैं। दियागोगरसिया में अमेरिका ने अपना सैनिक बेस बनाया हुआ है। ईरान के पास सात सौ किलोमीटर दूर तक मार करने के लिए मिसाइल की कमी है। इसलिए दियागोगरसिया पर हमला नहीं कर पा रहा। इसका मतलब यह नहीं कि ईरान चीन और रूस से लंबी दूरी तक मारक मिसाइल नहीं ले सकता। जिस दिन ईरान ने रूस और चीन से लंबी दूरी तक मार करने की मिसाइल खरीद ली, उसी दिन अमेरिकी बेस पर हमला करके अमेरिका को भारी क्षति पहुंचा सकता है।
    जो डोनॉल्ड ट्रंप बारंबार भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू से तौलते हुए सीज फायर का ऐलान करते हुए बार-बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापार का दबाव डालकर सीजफायर करा दिया है। दर्जनों बार यही दोहराते रहने वाला धूर्त ट्रंप अब कहने लगा, कि उसने दबाव डालकर सीजफायर नहीं कराया।
    धूर्त ट्रंप की जुबान का क्या भरोसा? वह तो भारत को चीन के खिलाफ एक मोहरा मानता है। दूसरी तरफ भारत को विकसित होते देख उसकी छाती पर सांप लौटने लगता है। भारत को कमजोर करने के लिए ट्रंप पाकिस्तान को सैन्य हथियारों और विभिन्न स्रोतों से अरबों डॉलर्स कर्ज दिलाकर पाकिस्तान पर आजमान करते हुए चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है।
    भारत को बारंबार अपमानित करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा। अमेरिकी सेना की 250 वी वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आमंत्रित कर भारत को फिर से अपमानित किया है। पता नहीं मोदी की कौन सी दुखती रग वह जब चाहे दबा देता है और भारत के प्रधानमंत्री सरेंडर हो जाते हैं। बड़बोले ट्रंप की किसी बात का जवाब ही नहीं दे सकते। शायद मोरल ही नहीं है वर्ना शक्ति संपन्न राष्ट्र भारत के प्रधानमंत्री होते हुए भी क्यों ट्रंप की घुड़की सहन करते हैं?
    राहुल गांधी इसी बात पर नरेंद्र का सरेंडर कहकर तंज कसते हैं। ईरान और इजराईल का घमासान ट्रंप क्यों नहीं रुकवा देते? रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को रुकवाने की हैसियत क्यों नहीं है ट्रंप में?
    ट्रंप के दोगलेपन और कुटनीतियों के कारण उनके खिलाफ अमेरिकी जनता उठ खड़ी हो चुकी है। सड़कों पर उतरकर अमेरिकी नागरिक ट्रंप का विरोध करने लगे हैं। उनकी चुनाव में जीत दिलाने में हजारों करोड़ डॉलर लुटा देने वाले अरबपति मस्क भी ट्रंप को गद्दी से उतारने में लगे हैं। संभव है कि जिस बिल को ट्रंप ब्यूटीफुल कहते हुए तारीफों के पुल बांधते हैं सीनेट से पास ही नहीं हो सके। क्योंकि यदि मस्क ने सीनेटरों को ट्रंप के विरोध में लाने के लिए रिपब्लिकन के दो तीन और सीनेटरों को ट्रंप के खिलाफ लाने में सफल हुए तो बिल सीनेट में पास नहीं हो सकेगा। जबकि चार सीनेटर ट्रंप की नीतियों की आलोचना प्रबल तरीके से करके ट्रंप को चेतावनी दे दी है। अगर सीनेट से ट्रंप को ब्यूटीफुल बिल पास नहीं हो सका तो अविश्वास प्रस्ताभ लाकर ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है।
    बहरहाल भारत के सामने चुनौती है। हमारे भारत देश के ईरान और इजराईल दोनों से रिश्ते अच्छे हैं इसलिए भारत को दोनों के साथ संबंध बनाए रखने होंगे, ताकि कोई विरोधी नहीं हो जाए। भारत को रूस के राष्ट्रपति को रूस चीन भारत संगठन पर भी पुनः विचार करना होगा, जो डोकलाम में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद पटरी से उतर गई थी।
    तेहरान में बमों के धमाके सुनाई देने की बात पर ट्रंप को अंदेशा हो गया है कि अब ईरान इजराईल और अमेरिकी बेस पर परमाणु हमला कर सकता है। इसी डर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जी 7 देशों की मीटिंग छोड़कर अमेरिका जाने की योजना ही नहीं बनाई बल्कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को एलर्ट कर दिया है।
    अमेरिका जाकर ट्रंप इमरजेंसी मीटिंग करेंगे इसलिए सभी अधिकारियों को तैयार रहने का आदेश दे दिया है। इजराईली हमले का करारा जवाब देने की योजना ईरान ने बना ली है। कब और कैसे जवाबी हमला ईरान करेगा यह जल्द ही मालूम होगा। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपने सहयोगी स्टॉफ को एलर्ट कर दिया है। ट्रंप को भय है कि रूस चीन और नॉर्थ कोरिया के हस्तक्षेप के बाद विश्वयुद्ध छिड़ना तय है।

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    क्या दुनिया में भारत का डंका बजा या स्वयं अकेला पड़ गया?

    डिजिटल डेस्क
    बीजेपी सरकार
    ढोल बजाकर खुशी का इजहार करने और गर्व में भरती जा रही। कहा जा रहा की जापान को छोड़कर भारत को विश्वगुरू ने विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनाते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है। यह दावा सरासर गलत और भ्रामक है। भारत अभी चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं हैं बनने की ओर अग्रसर है। दरअसल एमएफए की तरफ से भारत और जापानी अर्थ व्यवस्था पर अंदाजा लगाया था, कि भारत जापान को 0.01 अंक आगे बढ़कर विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
    इसी बात को नीति आयोग के अधिकारी के सीईओ ले उड़े और भारत द्वारा जापानी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब नीति आयोग जब कह रहा हो तो बीजेपी और मोदी सरकार ने भी लपक लिया और घोषणा कर डाली लेकिन नीति आयोग के ही बड़े अर्थशास्त्री ने खुलासा करते हुए कहा है, कि “भारत अभी विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था नहीं बना है। हां बनने की राह पर अग्रसर जरूर है।” उन्होंने कहा, “चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चौथी तिमाही तक भारत को अपनी जीडीपी मेंटेन रखनी होगी। चौथी तिमाही का परिणाम निश्चित करेगा कि भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है या नहीं? चौथी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है न कि बन गया है।”
    नीति आयोग के सदस्य अर्थशास्त्री का कथन बीजेपी सरकार को झकझोर कर रख दिया होगा। नीति आयोग का सीईओ चौथी अर्थब्यव्यवस्था बन चुका है भारत का सच नीति आयोग के ही सदस्य ने खोलकर बता दिया है। जिससे साफ है कि चौथी अर्थव्यवस्था बना नहीं है। हां चौथी तिमाही के अंत में भी हमें अपनी जीडीपी उसी स्तर या उससे ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। उन्होंने निष्कर्ष में कहा बने नहीं हैं बनने की राह पर अग्रसर हैं। अगर चौथी तिमाही के अंत तक हम जीडीपी बढ़ाए रख सके तो दिसंबर 2025 तक बन सकते हैं।
    अर्थव्यवस्था तब बढ़ती है जब वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी बढ़ती जाए। विदेशी निवेश अधिक बढ़ाना पड़ेगा। एप्पल मोबाइल भले ही चीन से भारत में बनने लगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना होगा कि एप्पल मोबाइल मेड इन इंडिया के नाम पर केवल असेंबलिंग की जाती है। उसके पार्ट्स चिप आदि चीन से ही आते हैं। चीन हार्डवेयर में अमेरिका से कम नहीं है। अमेरिकी उद्योगों के लिए चीन में बनी चिप्स जैसे पार्ट्स चीन से ही आते हैं।
    भले बीजेपी लग रही हो कि दुनिया में भारत का डंका बज रहा जबकि सच तो यह है कि भारत का दुनिया में डंका नहीं घंटा बज रहा है। भारत जब पाकिस्तान पर बढ़त हासिल किए हुए था तब एकाएक क्या हुआ कि भारत को सीजफायर का ऐलान करना पड़ गया। भारत को जीती हुई बाज़ी हारने को मजबूर क्यों होना पड़ा। भले आर्मी के जनरल कहा कि कितने विमान गिरे यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्यों गिरे यह मुद्दा है और इससे हमने क्या सीखा? तीन बाते ऐसी हुई हैं जिससे भारत के डंका बजने की बात बेनकाब हो जाती है।
    अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का कहना है कि भारत ने हमारे साथ गलत किया, उसे भुगतना होगा। दूसरा है जिस पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक बताने के लिए दुनिया भर से गुहार लगाने के लिए सांसदों की टीमें भेजी गई ताकि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कराया जा सके। वह तो हुआ ही नहीं क्योंकि हमारे डेलिगेशनो का दुनिया पर कोई भी असर नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के दो मंचों का पाकिस्तान को एक में अध्यक्ष और दूसरे में उपाध्यक्ष बना दिया गया। आप पाकिस्तान उन मंचों से बताएगा कि कौन आतंकवादी देश है। कौन आतंकवादी गीत है जिसे कौन सा देश समर्थन कर रहा है। दो अत्यंत महत्वपूर्ण पद पाकर अब पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ यह कहने का अधिकार मिल गया है कि उसके देश में बलूच आतंकी गुट है जिसे भारत का समर्थन हासिल है। भारत ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने के लिए हथियार और पैसा दे रहा है। दूसरी बात पाकिस्तान को अफगानिस्तानी फूटी आंखों नहीं सुहाते, जिसने पाकिस्तान के भारत युद्ध के समय भारत का समर्थन किया था।
    जिन तालिबानी लड़ाकों के कारण अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र अपने युद्धक विमान टैक्स जैसे सारे विपाश छोड़कर भागना पड़ा है, उन तालिबानियों को पाकिस्तान के लिए खतरा बताकर उन्हें आतंकवादी घोषित कर सकेगा। यही नहीं अब पाकिस्तान भारत को ही आतंकवाद फैलाने का आरोपी बताने की हैसियत में आ चुका है। ट्रंप का यह पसितारा उसके माय बेस्ट फ्रेंड मोदी और आई मिस यू मोदी के खिलाफ गुस्से का इजहार कर भारत को निचा दिखाने वाला कदम है। कल को पाकिस्तान खाड़ी देशों को भी विश्वास दिला सकता है, कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को भारत हिंदुत्व वाली सरकार प्रताड़ित कर रही है। मस्जिदों मुसलमानों की बस्तियों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय किया जा रहा है। इन बातों पर छपी खबरें प्रमाण बन जाएंगी और इस्लामिक राष्ट्र भारत के खिलाफ जिहाद के तौर पर खड़े हो सकते हैं।
    अमेरिका ने पहले ही एक अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दिलाया था, जिससे पाकिस्तान अमेरिका और अब एशियाई बैंक से भी पाकिस्तान को कर्ज दिलवा चुका है। जिससे पाकिस्तान हथियार खरीदकर भारत के साथ युद्ध कर सके। भारत अब दुनिया में अकेला पड़ गया है। चीन तो भारत के विरोध में है ही। रूस जो भारत का सदाबहार मित्र रहा है वह भी पाकिस्तान स्थित अपने साझेदार पाकिस्तान के साथ बंद स्टील फैक्ट्री फिर से चालू कर पाकिस्तानी आय में वृद्धि करने में लगा हुआ है। भारत सरकार ने भारतीय वायु सेना को स्वदेशी जहाज देने का वादा किया था, जिसे समय से पूरा किया ही नहीं जा रहा। अमेरिका भारत को ब्लैकमेल लगातार करने और भारत की बेइज्जती करने में लगा है।
    यह वही ट्रंप है जिसके लिए वैश्विक कानून तोड़कर पीएम मोदी ने अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाया था। दोबारा चुनाव में ट्रंप हार गए तो जब मोदी अमेरिकी यात्रा पर जाने वाले थे तब ट्रंप ने कहा था मेरा बेस्ट फ्रेंड मोदी मुझसे मिलने आ रहा है। लेकिन मोदी अमेरिका जाने के बाद राष्ट्रपति वाईडन से तो भेंट किया लेकिन ट्रंप से मिलने की फॉर्मेलिटी भी नहीं दिखाई। जिसे ट्रंप ने अपना अपमान समझा जो सही भी है। एक कहे मेरा बेस्ट फ्रेंड मुझसे मिलने आ रहा है दूसरा अनदेखा कर दे। औपचारिकता भी नहीं निभाए तो फ्रेंड कैसा? इसीलिए जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी थी तब ट्रंप ने मोदी को बुलाया तक नहीं और जब पीएम गए उससे मिले तब ट्रंप ने कहा था आई मिस यू फ्रेंड। ये चार शब्द बड़े अर्थपूर्ण थे। व्यंग्य और दुखी हो कर कहा था ट्रंप ने। इशारा था लेकिन तब तक बहुत अधिक दरार पड़ चुकी थी। जिस कारण ट्रंप भारत को बेइज्जत करने का एक भी मौका छोड़ नहीं रहा। शायद जब तक मोदी और ट्रंप जीवित रहेंगे ट्रंप अपमान नहीं भूलेगा और गिन गिन कर बदला लेता रहेगा। पाकिस्तान को भारत पर तरजीह देकर ट्रंप ने भारत को अकेला कर दिया है।

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  • Indian Army: लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी ने दी पाकिस्तान पर स्ट्राइक की जानकारी

    Indian Army: लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी ने दी पाकिस्तान पर स्ट्राइक की जानकारी

    Indian Army Lieutenant Colonel Sofia Qureshi
    Indian Army Lieutenant Colonel Sofia Qureshi

    भारत की एक मात्र महिला सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी देश की एक ऐसी बहादुर बेटी बन चुकी है जिनको सबसे महत्वपूर्ण मिशन ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दुनिया भर के सामने प्रस्तुत करने का मौका मिला। साथ ही एयरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    नई दिल्ली: भारत की बहादुर बेटियां आज सिर्फ सीमाओं की रखवाली नहीं कर रहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश की आवाज बन रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत जब दुनिया भर के मीडिया को जानकारी देने का समय आया, तो भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और एयरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी इस अहम प्रेस ब्रीफिंग में शामिल थे। यह पल भारत की रक्षा सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक बन गया। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    भारतीय सेना के कर्नल की जीवनी

    दुनिया भर के मीडिया के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ब्रीफ करने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी ने मार्च 2016 में, बहुराष्ट्रीय अभ्यास में सेना की टुकड़ी का नेतृत्व किया, जिसमें 18 देशों ने भाग लिया था। यह अभ्यास महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था और इसमें चीन, जापान, रूस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे शक्तिशाली देश शामिल थे। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    लीडरशिप की मिसाल

    कर्नल सोफिया कुरैशी भारत के लिए जज्बे, मेहनत और लीडरशिप की मिसाल बन चुकी है। उन्हें 2016 के एक्सरसाइज फोर्स 18 के तहत 18 देशों की मल्टीनेशनल आर्मी ड्रिल में भारत की तरफ से कमान संभालने का मौका मिला। उस समय वो अकेली महिला थीं जो किसी भी देश की आर्मी टुकड़ी की कमांड कर रही थीं। उन्होंने 40 सैनिकों की भारतीय टीम का नेतृत्व किया। वे शांति स्थापना अभियानों में भी सक्रिय रही है। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    2006 में, उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में काम किया और 2010 से शांति ऑपरेशंस में जुड़ी रही है। सोफिया सेना के सिग्नल कॉप्स में भी ऑफिसर रही हैं। आपको बता दें कि वे आर्मी बैकग्राउंड से ताल्‍लुक रखती हैं, उनके दादा भी सेना में थे। उनके पति मेकेनाइज्ड इन्फेंट्री में आर्मी ऑफिसर हैं। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी

    गुजरात की रहने वाली सोफिया कुरैशी 17 साल की आयु में ही सेना में शामिल हो गई थीं। गुजरात के वड़ोदरा की रहने वाली सोफिया कुरैशी भारतीय थलसेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात हैं। वह सिग्नल कोर में हैं। सोफिया बायोकेमिस्ट्री से पोस्ट ग्रेजुएट हैं जो भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 1999 में शामिल हुईं थीं। (Indian Army: Lieutenant Colonel Sofia Qureshi gave information about the strike on Pakistan)

    • कर्नल लेफ्टिनेंट सोफिया कुरैशी एक मात्र महिला अधिकारी है!
    • इनके परदादा, दादा, पिता, पति,और यह खुद भारतीय सेना मे है!
  • ‘शतरंज का अंत…’, रूस के क्रैमनिक ने क्यों कहा ?

    ‘शतरंज का अंत…’, रूस के क्रैमनिक ने क्यों कहा ?

    चीन के डिंग लिरेन को मात देकर 18 साल के भारतीय ग्रैंडमास्टर नए वर्ल्ड चेस चैंपियन बने. उनकी इस जीत के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन व्लादिमीर क्रैमनिक ने ‘शतरंज का अंत’ पोस्ट शेयर किया। (‘End of chess’, why did Russia’s Kramnik say?)

    न्यूज़ डेस्क
    Spot News
    – चीन के डिंग लिरेन को मात देकर 18 साल के भारतीय ग्रैंडमास्टर नए वर्ल्ड चेस चैंपियन बने। 18 साल की उम्र में यह खिताब जीतकर डी गुकेश दुनिया के सबसे कम उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले चेस प्लेयर बन गए। वहीं, विश्वनाथन आनंद के बाद डी गुकेश वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने वाले दूसरे भारतीय भी हैं। गुकेश की इस जीत के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन व्लादिमीर क्रैमनिक ने ‘शतरंज का अंत’ नाम से पोस्ट शेयर किया। (‘End of chess’, why did Russia’s Kramnik say?)

    चीन के चैम्पियन को बताया बचकाना

    पूर्व विश्व चैंपियन व्लादिमीर क्रैमनिक भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश (D Gukesh) और चीन के डिंग लिरेन के बीच विश्व चैंपियनशिप मैच के दौरान शतरंज की गुणवत्ता से निराश थे और उन्होंने इसे ‘शतरंज का अंत’ करार दिया। गुकेश गुरूवार को तनावपूर्ण मुकाबले की 14वीं और आखिरी बाजी में गत चैंपियन लिरेन को हराकर 18 साल की उम्र में खिताब जीतकर सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बन गए। मैच के बाद क्रैमनिक ने खेल की गुणवत्ता पर अपनी निराशा व्यक्त की और लिरेन की एक गंभीर गलती को ‘बचकाना’ बताया। (‘End of chess’, why did Russia’s Kramnik say?)

    ‘दुखद. शतरंज का अंत’

    अपनी प्रतिक्रिया में क्रैमनिक ने सोशल मीडिया ट्वीटर अकाउंट यानी ‘एक्स’ पर लिखा, ‘कोई टिप्पणी नहीं। दुखद. शतरंज का अंत हो गया है, जैसा कि हम जानते हैं।’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘अभी तक किसी विश्व कप खिताब का फैसला इतनी बचकानी एक चाल की गलती से नहीं हुआ है।’ क्रैमनिक ने चैंपियनशिप में छठी बाजी के बाद भी खेल के स्तर की आलोचना की थी और इसे ‘कमजोर’ बताया था। उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो मैं आज के खेल (छठी बाजी) से बहुत निराश हूं। यहां तक कि पांचवीं बाजी भी बहुत उच्च स्तर की नहीं थी। लेकिन आज – एक पेशेवर के लिए – दोनों खिलाड़ियों का खेल वाकई बहुत कमजोर था। यह बहुत निराशाजनक स्तर है।’ (‘End of chess’, why did Russia’s Kramnik say?)

    2000 में बने थे वर्ल्ड चैंपियन

    रूस के 49 वर्षीय क्रैमनिक 2000 से 2006 तक क्लासिकल विश्व शतरंज चैंपियन थे। क्रैमनिक ने 2000 में दिग्गज गैरी कास्पारोव को हराया और क्लासिकल विश्व शतरंज चैंपियन बने। 2007 में व्लादिमीर को हराकर दिग्गज चेस प्लेयर विश्वनाथन आनंद ने इतिहास रचा और भारतीय चेस हिस्ट्री में वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले पहले खिलाड़ी बने। 2012 तक विश्वनाथन आननद अपने टाइटल को डिफेंड करने में कामयाब रहे। 2013 में वर्तमान चेस दिग्गज मैगनस कार्लसन ने यह खिताब अपने नाम किया। अब गुकेश चीनी लिरेन को हराकर नए वर्ल्ड चेस चैंपियन बन गए हैं। (‘End of chess’, why did Russia’s Kramnik say?)